राजनीति

बागी टीएमसी विधायक दल आज चुनाव आयोग से करेगा मुलाकात, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ठोक सकता है दावा

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Ritabrata Banerjee
Ritabrata Banerjee Delegation Meeting

कोलकाता एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का बागी विधायक दल आज चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और चुनाव चिन्ह से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेगा।

 

नेतृत्व विवाद को लेकर चुनाव आयोग के सामने रखेगा पक्ष

 

सूत्रों के अनुसार, बागी गुट का कहना है कि पार्टी में नए नेतृत्व का गठन किया गया है और इसकी आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए। वहीं ममता बनर्जी समर्थक गुट का दावा है कि टीएमसी की वैध राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की सूची पहले ही आयोग को सौंप दी गई है और पार्टी पर उनका ही अधिकार है।

 

चुनाव चिन्ह पर भी हो सकती है चर्चा

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बागी गुट की यह पहल भविष्य में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद का रूप ले सकती है। हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

 

राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर

 

आज होने वाली इस मुलाकात पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के अगले कदम से इस विवाद की दिशा और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका असर आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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जमशेदपुर घटना पर गरजे बाबूलाल, बोले - इसके जिम्मेदार हेमंत सरकार

गिरिडीह। झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) व्यवस्था पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके सामने बेबस नजर आते हैं।   जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर सरकार पर निशाना बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर में हुई करणी सेना के एक नेता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। उनके अनुसार, मामले में सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में हत्या होती है तो जवाबदेही भी पुलिस की तय होनी चाहिए।   एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद होटल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक बदलाव से कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।   सरकार से जवाबदेही की मांग नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।   गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर में एक बार के बाहर चाकूबाजी की घटना में घायल हुए हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए भरा नामांकन

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल का दौर जारी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पूर्व विधायक Sachin Ahir ने मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। उनके इस कदम को Uddhav Thackeray के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। श्रीकांत शिंदे ने की पुष्टि शिवसेना सांसद Shrikant Shinde ने सचिन अहीर के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें आधिकारिक तौर पर शिवसेना की सदस्यता दिलाई गई है और उपसभापति पद के चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस से शिवसेना तक का राजनीतिक सफर सचिन अहीर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वह Nationalist Congress Party (एनसीपी) में शामिल हुए और बाद में अविभाजित शिवसेना का हिस्सा बने। उन्हें लंबे समय तक Aaditya Thackeray के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा। खासकर जब आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, तब सचिन अहीर उनकी टीम के अहम सदस्य माने जाते थे। यूबीटी की मुश्किलें बढ़ीं साल 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी टूट के बाद से उद्धव ठाकरे गुट लगातार नेताओं और जनप्रतिनिधियों के पार्टी छोड़ने की चुनौती का सामना कर रहा है। हाल के दिनों में भी शिवसेना (यूबीटी) के कई नेताओं और सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में सचिन अहीर का पार्टी छोड़ना उद्धव ठाकरे के संगठनात्मक आधार के लिए एक और झटका माना जा रहा है। राजनीतिक संकेत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद उपसभापति चुनाव से ठीक पहले सचिन अहीर का शिंदे गुट में शामिल होना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी है। इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है।  

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TMC leader Humayun Kabir detained by Debra Police in West Midnapore district amid an ongoing investigation
बंगाल के डेबरा में TMC नेता हुमायूं कबीर गिरफ्तार, आरोपों का खुलासा नहीं; पुलिस जांच जारी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक प्रभावशाली नेता हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बाद इलाके की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। डेबरा ब्लॉक पंचायत समिति के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुमायूं कबीर को डेबरा थाना पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने अभी तक उनके खिलाफ दर्ज आरोपों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है। शिकायतों के आधार पर हुई कार्रवाई पुलिस के अनुसार, हुमायूं कबीर के खिलाफ कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामला किस प्रकृति का है और किन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जिले की राजनीति में बढ़ी हलचल एक प्रभावशाली टीएमसी नेता की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम मेदिनीपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने कहा- जांच जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है। आरोपों पर अब भी सस्पेंस हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं। ऐसे में मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। आगे क्या? जिले के राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब पुलिस जांच की दिशा और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है। इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई और संभावित खुलासों का इंतजार किया जा रहा है।  

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