यूपी के उन्नाव में पेड़ उखड़े, कर्नाटक में गाड़ियां बहीं, MP-राजस्थान में आंधी-बारिश का अलर्ट नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून 5 दिन में 13 राज्यों तक पहुंच गया है। मंगलवार को तेलंगाना में एंट्री कर चुका है। फिलहाल यह मुंबई से करीब 150 किमी दूर है और अगले 48 घंटे में शहर में दस्तक दे सकता है। वहीं, अगले सप्ताह तक यह गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक पहुंच सकता है। मानसूनी हवाओं के असर से कई मैदानी राज्यों में गर्मी कम हुई है। साथ ही प्री-मानसून के कारण कई जगह 50-60kmph रफ्तार से आंधी और तेज बारिश हो रही है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में मंगलवार को आंधी से कई जगह पेड़ उखड़ गए। केरल और कर्नाटक में पिछले 4 दिनों से लगातार बारिश जारी है। मंगलवार को बेंगलुरु और बेलगावी में भारी बारिश के बाद कई सड़कों पर पानी भर गया। कुछ जगहों पर गाड़ियां पानी में बहती नजर आईं। इधर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में गर्मी का असर बना हुआ है। कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress में इन दिनों अंदरूनी मतभेद और राजनीतिक हलचल चर्चा का विषय बने हुए हैं। पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों की ओर से लगातार आ रहे बयानों ने संगठन के भीतर असंतोष की अटकलों को और हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ सांसद कथित तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संपर्क में हैं। ऐसे में संभावित बागी गुट की प्रस्तावित प्रेस वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। ममता बनर्जी ने कल्याण बनर्जी को बनाया मुख्य सचेतक इसी बीच पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ममता बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि कल्याण बनर्जी को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी में अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना तृणमूल कांग्रेस से जुड़े घटनाक्रम पर विपक्षी दलों की भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेता Vijay Wadettiwar ने दावा किया कि देश की राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर हुई है और इसके लिए भाजपा जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक दलों को तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपे जाने और एनडीए के साथ संभावित समीकरणों की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक किसी बड़े विभाजन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रेस वार्ता से साफ हो सकती है तस्वीर राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बागी नेताओं की संभावित प्रेस वार्ता के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उठापटक चर्चा का केंद्र बनी हुई है और आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की राजनीतिक दिशा पर पड़ सकता है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार सोमवार से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को लागू करने जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल इस योजना को अपनाने वाला देश का 36वां राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari मौजूद रहेंगे। क्या मिलेगा योजना के तहत? आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। योजना के तहत लाभार्थी देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज बिना नकद भुगतान के करा सकेंगे। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य खर्च के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। पूरे देश में लागू होगी योजना पश्चिम बंगाल के जुड़ने के साथ ही आयुष्मान भारत योजना अब देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो जाएगी। केंद्र सरकार इसे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक मानती है। सामान्य राज्यों में योजना के वित्तीय खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकारें 60:40 के अनुपात में करती हैं। पश्चिम बंगाल में भी यही व्यवस्था लागू होगी। स्वास्थ्य साथी बनाम आयुष्मान भारत पिछली सरकार ने लंबे समय तक राज्य में आयुष्मान भारत लागू नहीं किया था और अपनी राज्य स्तरीय स्वास्थ्य योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ को प्राथमिकता दी थी। स्वास्थ्य साथी योजना के तहत राज्य के भीतर इलाज की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थी देशभर के पंजीकृत अस्पतालों में उपचार प्राप्त कर सकेंगे। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे मरीजों के लिए अधिक व्यापक विकल्प मान रहे हैं। लाखों परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना लागू होने के बाद राज्य के करोड़ों नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। विशेष रूप से गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाले भारी खर्च से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव राज्य सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत के लागू होने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और मरीजों को राज्य की सीमाओं से बाहर भी गुणवत्तापूर्ण उपचार का विकल्प मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य ढांचे को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे उथल-पुथल भरे दौर के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती मामले में नया नोटिस जारी किया है। बुधवार को ईडी की एक टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई कार्रवाई जांच एजेंसी के पहुंचने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बीच आवास के आसपास निगरानी रखी गई और स्थिति पर नजर बनाए रखी गई। घटना की जानकारी मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की आवाजाही भी बढ़ गई। भर्ती मामले की जांच में नए पहलुओं की तलाश ईडी लंबे समय से कथित शिक्षक भर्ती अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है ताकि मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके। जांच के दौरान कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कारोबारी संस्थाओं और वित्तीय नेटवर्क पर नजर सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं जिनका नाम जांच के दौरान सामने आया है। उद्देश्य यह समझना है कि कथित तौर पर धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ और उससे जुड़े नेटवर्क कैसे काम कर रहे थे। इसी क्रम में कुछ अतिरिक्त जानकारियां जुटाने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजनीतिक संकट के बीच नई चुनौती यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर चर्चा और गतिविधियों को बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक महत्व भी रखती है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष इसे जांच प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेता केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई क्या होगी और पूछताछ या जांच के अगले चरण में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं। शिक्षक भर्ती मामला पहले से ही पश्चिम बंगाल के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है और ताजा घटनाक्रम ने इसे एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के आयोजन से जुड़ी हजारों समितियां इस समय असमंजस की स्थिति में हैं। धार्मिक आयोजनों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता को लेकर उठे सवालों ने छोटे और मध्यम स्तर की पूजा समितियों की चिंता बढ़ा दी है। पूजा आयोजकों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस वर्ष सरकार की ओर से वित्तीय सहायता जारी रहेगी या नहीं। चार महीने पहले ही शुरू हुई चिंता दुर्गा पूजा में अभी करीब चार महीने का समय है, लेकिन तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे समय में अनुदान को लेकर अनिश्चितता ने कई समितियों को बजट और आयोजन की योजनाओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। विशेष रूप से छोटे क्लब और स्थानीय समितियां सरकारी सहायता पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं। आर्थिक मदद से मिलता था बड़ा सहारा पिछले कुछ वर्षों में पूजा समितियों को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती रही है। समय के साथ यह सहायता राशि बढ़ती गई और हजारों समितियों को इसका लाभ मिला। इसके अलावा बिजली शुल्क में छूट, विभिन्न लाइसेंस शुल्कों में राहत और अन्य सुविधाओं के कारण आयोजकों का खर्च काफी कम हो जाता था। कई समितियों के लिए यह सहायता उनके कुल बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। छोटे आयोजनों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका पूजा आयोजकों के अनुसार, राज्य की अधिकांश सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों का बजट अपेक्षाकृत कम होता है। यदि सरकारी सहायता में कटौती होती है या उसे बंद किया जाता है, तो छोटे स्तर के आयोजनों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। आयोजकों का कहना है कि बढ़ती लागत और महंगाई के कारण बिना अतिरिक्त मदद के आयोजन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पंडाल निर्माण को लेकर भी बढ़ी उलझन वित्तीय सहायता के अलावा पंडालों के निर्माण और स्थान चयन को लेकर भी चिंता बनी हुई है। हाल में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए अभियानों के बाद आयोजकों को आशंका है कि इस बार अनुमति प्रक्रिया अधिक सख्त हो सकती है। कई समितियां सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल लगाती हैं, इसलिए वे प्रशासन के अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही हैं। नियमों के पालन पर रहेगा विशेष जोर पूजा पंडालों के निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक होता है। अदालत और प्रशासन पहले भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करते रहे हैं। इस कारण आयोजकों को उम्मीद है कि इस बार भी सुरक्षा और यातायात संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। प्रशासनिक स्पष्टता का इंतजार पूजा समितियों का कहना है कि तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए उन्हें जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। अनुदान, पंडाल अनुमति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति साफ होने के बाद ही वे अपने आयोजन की रूपरेखा तय कर पाएंगे। पूजा अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ एक बड़े आर्थिक गतिविधि केंद्र के रूप में भी जानी जाती है। इस दौरान मूर्तिकार, सजावट कर्मी, बिजली मिस्त्री, ढाक वादक, मजदूर और छोटे व्यापारी बड़ी संख्या में रोजगार प्राप्त करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटे और मध्यम स्तर की पूजा समितियों के बजट प्रभावित होते हैं, तो इसका असर पूजा से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल में लंबे इंतजार के बाद जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने 1 अगस्त 2026 से व्यापक जनगणना अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है, जो फरवरी 2027 तक चलेगा। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और विकास संबंधी जरूरतों का सटीक आकलन करना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनगणना को विकास और प्रशासनिक योजना निर्माण के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में राज्य की जनसंख्या और जनसांख्यिकीय स्वरूप में बड़े बदलाव आए हैं, जिनका अद्यतन आंकड़ा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी है। अगस्त से शुरू होगा घर-घर सर्वे सरकार की ओर से जारी प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह से प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करना शुरू करेंगे। यह अभियान राज्य के सभी जिलों, नगर निगम क्षेत्रों, नगरपालिकाओं और ग्रामीण इलाकों में चलाया जाएगा। प्रशासन ने फरवरी 2027 तक डेटा संग्रह का मुख्य चरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद आंकड़ों का सत्यापन और विश्लेषण किया जाएगा। डिजिटल तकनीक का होगा इस्तेमाल इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। प्रगणकों को टैबलेट और मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनके माध्यम से डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी कम होगा। इसके लिए जून और जुलाई के दौरान हजारों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और फील्ड स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनगणना फॉर्म बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी और नेपाली भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को जानकारी देने में सुविधा हो। विकास योजनाओं की बेहतर योजना पर जोर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जनगणना के जरिए प्राप्त आंकड़े राज्य की कल्याणकारी योजनाओं, खाद्य वितरण, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सटीक जनसंख्या आंकड़ों के बिना विकास योजनाओं की वास्तविक जरूरतों का आकलन करना कठिन हो जाता है। सरकार का उद्देश्य संसाधनों के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। विपक्ष ने उठाए सवाल सरकार इस अभियान को पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे लेकर आशंकाएं व्यक्त की हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि डेटा संग्रह की प्रक्रिया का इस्तेमाल नागरिकता और पहचान से जुड़े विवादित मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जनगणना एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका किसी राजनीतिक एजेंडे से संबंध नहीं है। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में सटीक आंकड़े जुटाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा डिजिटल डेटा संग्रह व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करना भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि आधुनिक तकनीक और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की मदद से इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा। पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित जनगणना को राज्य की भविष्य की विकास नीतियों और संसाधन वितरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के लगभग एक महीने बाद सोमवार (1 जून) को मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार में 35 नए मंत्री शपथ लेंगे। इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल लगभग पूर्ण आकार में पहुंच जाएगा और मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो जाएगी। राजभवन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे लोकभवन में आयोजित होगा, जहां राज्यपाल आर.एन. रवि नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। सरकार गठन के बाद पहला बड़ा विस्तार भाजपा सरकार के गठन के बाद 9 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच मंत्रियों ने शपथ ली थी। तब से विपक्ष और राजनीतिक हलकों में पूर्ण मंत्रिमंडल के गठन में देरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार प्रशासनिक स्तर पर पूरी क्षमता से काम करने की स्थिति में आ जाएगी। मुख्यमंत्री के साथ पहले चरण में शपथ लेने वाले मंत्रियों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, नीशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू शामिल थे। कई बड़े नामों पर नजर मंत्रिमंडल विस्तार से पहले संभावित मंत्रियों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता और रासबिहारी विधायक स्वपन दासगुप्ता का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। उन्हें पहले ही शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, जिससे उनके शिक्षा मंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा मानिकतला विधायक तापस रॉय के भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। संभावित मंत्रियों की सूची में शंकर घोष, रुद्रनील घोष, डॉ. शारद्वत मुखर्जी, प्रणत टुडू, रूपा गांगुली, कल्याण चक्रवर्ती, चंदना बाउड़ी, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, अशोक डिंडा और सुब्रत मैत्रा जैसे नाम भी चर्चा में हैं। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस भाजपा नेतृत्व मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर बंगाल, जंगलमहल, आदिवासी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति समुदाय, महिलाओं और दक्षिण बंगाल के प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दे सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल की संरचना से भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं की झलक भी मिलेगी। वर्तमान मंत्रियों के पास कौन से विभाग? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा कई प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी है। दिलीप घोष पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पशुपालन विकास और कृषि विपणन विभाग संभाल रहे हैं। अग्निमित्रा पॉल महिला एवं बाल विकास तथा नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी निभा रही हैं। नीशीथ प्रमाणिक के पास उत्तर बंगाल विकास और खेल विभाग है, जबकि अशोक कीर्तनिया खाद्य विभाग और खुदीराम टुडू पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अल्पसंख्यक मामलों का प्रभार संभाल रहे हैं। संवैधानिक सीमा के करीब पहुंचेगी सरकार संविधान के अनुसार किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 35 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्रिपरिषद की संख्या 41 हो जाएगी, जिससे सरकार संवैधानिक सीमा के काफी करीब पहुंच जाएगी। भाजपा सरकार की प्रशासनिक दिशा होगी स्पष्ट राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक संतुलन को भी परिभाषित करेगा। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर सकते हैं, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार ने ‘Detect, Delete and Deport’ यानी 3D नीति लागू करते हुए संदिग्ध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार का दावा है कि अब अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड से हटाया जायेगा और फिर सीमा सुरक्षा बल को सौंपकर वापस भेजा जायेगा। मालदा में बना पहला डिटेंशन सेंटर Malda राज्य का पहला जिला बन गया है, जहां अवैध विदेशी नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाया गया है। यह केंद्र इंगलिश बाजार के चंदन पार्क इलाके में स्थापित किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गजोले के पांडुआ क्षेत्र से पकड़ी गयी 3 महिलाओं और 6 नाबालिगों समेत कुल 9 संदिग्ध बांग्लादेशियों को यहां रखा गया है। सभी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डिटेंशन सेंटर लाया गया। सीसीटीवी और पुलिस निगरानी में रखा गया सेंटर अधिकारियों ने बताया कि डिटेंशन सेंटर में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। यहां सीसीटीवी निगरानी के साथ 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी है। इसके अलावा नागरिक सुरक्षा कर्मी और स्वयंसेवक भी मौजूद हैं। भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गयी है। क्या है ‘Detect, Delete and Deport’ नीति? राज्य सरकार की इस नीति का मकसद अवैध घुसपैठ रोकना और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है। Detect (पहचान) खुफिया एजेंसियों और जिला प्रशासन की मदद से उन लोगों की पहचान की जायेगी, जो बिना वैध दस्तावेजों के राज्य में रह रहे हैं। Delete (हटाना) जिन लोगों के दस्तावेज वैध नहीं होंगे, उनके नाम मतदाता सूची, राशन कार्ड और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से हटाये जायेंगे। Deport (निर्वासन) पकड़े गये लोगों को Border Security Force को सौंपा जायेगा, जो बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के साथ समन्वय कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगी। जिलों में बनेंगे होल्डिंग सेंटर राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिये हैं। इन केंद्रों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जायेगा, जो जेल से रिहा हो चुके हैं या अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में पकड़े गये हैं। CAA को लेकर भी सरकार का बड़ा बयान नबान्न में वरिष्ठ अधिकारियों और BSF अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग Citizenship Amendment Act के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जायेगा। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण वर्षों तक केंद्र के निर्देशों की अनदेखी की गयी। अब राज्य सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की बात कह रही है। सीमा क्षेत्रों में पुलिस को मिले विशेष निर्देश राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को सीमावर्ती जिलों के सभी थानों में इस नीति को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है। अब स्थानीय पुलिस संदिग्ध विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेते ही इसकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों और BSF को देगी, ताकि निर्वासन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके।
पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की 500 कंपनियां फिलहाल राज्य में तैनात रहेंगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने गृह मंत्रालय से 180 दिनों तक केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने फिलहाल 20 जून तक इसकी मंजूरी दी है। चुनाव के बाद भी तैनात रखे गए थे केंद्रीय बल विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पश्चिम बंगाल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएपीएफ की 500 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया था। पिछले चुनावों के बाद हुई हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार मतदान खत्म होने के बाद भी केंद्रीय बलों को नहीं हटाया गया था। गत सप्ताह राज्य की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद गृह मंत्रालय ने इन बलों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। पहले चरण में 100 कंपनियों यानी करीब 10 हजार जवानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। गृह मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब 20 जून तक राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी। आदेश में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न बलों की कुल 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में मौजूद रहेंगी। इनमें: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियां सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 150 कंपनियां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 50 कंपनियां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 50 कंपनियां सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 50 कंपनियां शामिल हैं। राज्य सरकार को करनी होगी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बलों की तैनाती के दौरान ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जवानों के ठहरने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी। साथ ही बलों की सभी ऑपरेशनल जरूरतों का भी ध्यान रखने को कहा गया है। पहले चरण में हटनी थीं 100 कंपनियां गृह मंत्रालय ने पहले चरण में 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला लिया था। इनमें CRPF की 40, BSF की 30, CISF की 10, ITBP की 10 और SSB की 10 कंपनियां शामिल थीं। आदेश के मुताबिक 15 मई से इन कंपनियों को कानून व्यवस्था ड्यूटी से हटाया जाना था। सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया फैसला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल गृह विभाग और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए थे। खुफिया एजेंसियों से भी विशेष रिपोर्ट मांगी गई थी। समीक्षा में बताया गया कि चुनाव के बाद फिलहाल राज्य में स्थिति शांतिपूर्ण है और बड़े राजनीतिक प्रदर्शन या हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं। वहीं बांग्लादेश सीमा से लगने वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल घुसपैठ रोकने के लिए लगातार सतर्क है और कई इलाकों में फेंसिंग का काम भी शुरू किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। सरकार के नए आदेश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों को सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा। इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पहले स्कूलों के लिए जारी हुआ था आदेश इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने कहा था कि सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाने से छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे व्यापक रूप से गाने की बात कही गई थी। नए आदेश में राज्य गीत को लेकर स्थिति साफ नहीं बंगाल में पहले से स्कूलों की सुबह की सभा में ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गीत गाना अनिवार्य था। हालांकि नए आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य गीत को अब भी जारी रखा जाएगा या नहीं। कुछ स्कूल प्रबंधन ने इस फैसले को लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। स्कूल प्रमुखों का कहना है कि राष्ट्रगान पहले से अनिवार्य है और अब ‘वंदे मातरम्’ जोड़े जाने के बाद अगर राज्य गीत भी जारी रहता है तो प्रार्थना सभा का समय काफी बढ़ जाएगा। स्कूलों ने शुरू किया पालन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल निर्देश केवल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी किया गया है। विभाग ने साफ किया कि स्कूल प्रार्थना में राष्ट्रगीत को शामिल करना जरूरी होगा, जबकि राज्य गीत पर कोई अलग निर्देश नहीं दिया गया है। कई स्कूलों ने इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है। जादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक पार्थ प्रतिम बैद्य ने बताया कि उनके स्कूल में पिछले सप्ताह से राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा है। राजनीतिक बहस तेज मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष और कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों की शुरुआत हो गई है। राज्य की पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी, जिनमें सबसे प्रमुख Ayushman Bharat योजना को राज्य में लागू करना रहा। इस फैसले पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खुशी जताई और कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों का कल्याण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अब राज्य के लोगों को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। पीएम मोदी ने ‘डबल इंजन सरकार’ पर दिया जोर पीएम मोदी ने अपने संदेश में “डबल इंजन सरकार” का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से विकास योजनाओं की डिलीवरी तेज और निर्बाध होगी। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल के लोगों तक केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के पहुंचाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए तालमेल का संकेत मान रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी सरकार के बड़े फैसले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें आयुष्मान भारत योजना लागू करने के अलावा सीमा सुरक्षा बल को बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराने का फैसला भी शामिल है। सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में पांच साल की छूट देने की घोषणा की है। इसके साथ ही राज्य में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) लागू करने को भी मंजूरी दी गई। केंद्र की योजनाओं का रास्ता साफ नई सरकार ने कई केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को हटाने का भी फैसला किया है। इनमें PM Vishwakarma Yojana, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana और Pradhan Mantri Ujjwala Yojana जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों, श्रमिकों, कारीगरों और गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। आयुष्मान भारत लागू होना क्यों अहम माना जा रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू होना बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव है। पिछले कई वर्षों से राज्य में यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान इसे प्रमुख मुद्दा बनाया था और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार के दौरान वादा किया था कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत को मंजूरी दी जाएगी। अब सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि और “डबल इंजन मॉडल” की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।
Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनते ही West Bengal में कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा को लेकर बड़े फैसलों का दौर शुरू हो गया है। अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में शुभेंदु सरकार ने गौ-तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया। सरकार ने Border Security Force (BSF) को बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी (Fencing) के लिए जमीन हस्तांतरण की मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि जब तक सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय गौ-तस्करी और घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल रहेगा। गौ-तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि बंगाल में अब तस्करों और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान सीमा पर बाड़बंदी का काम लंबे समय तक अटका रहा, जिसकी वजह से तस्करी का नेटवर्क मजबूत होता गया। अब सरकार का दावा है कि BSF को जमीन मिलने के बाद सीमा पर तेजी से बाड़ लगाने का काम पूरा किया जाएगा, जिससे तस्करी के प्रमुख रास्ते बंद हो सकेंगे। ‘नार्को-टेरर’ और तस्करी के गठजोड़ पर नजर राज्य सरकार का कहना है कि गौ-तस्करी से आने वाला पैसा सिर्फ अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा हो रहे हैं। इसी को देखते हुए गृह विभाग को निर्देश दिया गया है कि तस्करी में शामिल बड़े नेटवर्क और कथित सरगनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मान रही है। सीमावर्ती जिलों पर खास फोकस कैबिनेट बैठक में सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते जनसंख्या पैटर्न को भी गंभीर विषय बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा मजबूत करना राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है। भूमि एवं राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि BSF को जमीन सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए ताकि बाड़बंदी के काम में और देरी न हो। केंद्र के साथ संयुक्त अभियान की तैयारी राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाने की तैयारी में भी है। इसके तहत सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसके अलावा जनगणना और केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को तेजी से लागू करने का फैसला भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक संदेश भी साफ भाजपा सरकार के इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने लगातार सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और गौ-तस्करी को बड़ा मुद्दा बनाया था। अब सत्ता में आने के बाद सरकार ने पहली कैबिनेट में ही इस दिशा में बड़ा फैसला लेकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि बंगाल में कानून-व्यवस्था और सीमा प्रबंधन को लेकर नई नीति अपनाई जाएगी।
Suvendu Adhikari Mission 60 Percent Vote: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है. नंदीग्राम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा आने वाले समय में बंगाल में अपना वोट शेयर 46 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जायेगी. बंगाल में विकास की राजनीति का दावा शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब विकास की राजनीति को नई गति मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में ऐसा विकास होगा कि भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को करीब 46 प्रतिशत वोट मिले हैं और आने वाले वर्षों में यह समर्थन 60 प्रतिशत के पार पहुंच सकता है. शुभेंदु ने इसे भाजपा के “दीर्घकालिक राजनीतिक मिशन” का हिस्सा बताया. 10 दिन में छोड़ेंगे एक सीट भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत दर्ज करने के बाद अब शुभेंदु अधिकारी को नियम के मुताबिक एक सीट छोड़नी होगी. इस पर उन्होंने कहा कि वे अगले 10 दिनों के भीतर एक सीट से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा कि किस सीट को बरकरार रखा जायेगा, इसका फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा. शुभेंदु ने कहा कि वे दोनों क्षेत्रों की जनता के आभारी हैं और किसी भी क्षेत्र की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे. “2011 के परिवर्तन का हिस्सा था, अब असली परिवर्तन होगा” अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने 2011 के राजनीतिक बदलाव का भी जिक्र किया, जब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभायी थी. उन्होंने कहा कि वह 2011 के परिवर्तन का हिस्सा थे, लेकिन अब बंगाल में “वास्तविक परिवर्तन” का दौर शुरू होगा. शुभेंदु ने दावा किया कि भाजपा ऐसा काम करेगी कि राज्य में पार्टी की सरकार “100 साल तक” बनी रहे. कार्यकर्ताओं से शांति बनाये रखने की अपील भाजपा नेता ने पार्टी कार्यकर्ताओं से फिलहाल विजय जुलूस और उत्सव से दूरी बनाये रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही आधिकारिक रूप से जश्न मनाया जाये. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अनुशासन और शांति बनाये रखने को कहा. साथ ही टीएमसी शासन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. नंदीग्राम में पूजा और शहीद कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. इसके अलावा उन्होंने चुनावी हिंसा में मारे गये भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य के हर वर्ग और क्षेत्र तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाया जायेगा. शुभेंदु के “मिशन-60” बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गयी है और विपक्षी दलों में हलचल बढ़ गयी है.
West Bengal Election Violence 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में हिंसा का दौर लगातार जारी है. अलग-अलग जिलों से गोलीबारी, बमबाजी, हत्या और राजनीतिक हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पूरे राज्य की राजनीति में सनसनी फैला दी है. वहीं हावड़ा, कमरहट्टी, बशीरहाट और आसनसोल में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. मध्यमग्राम में शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या बुधवार रात करीब 11:15 बजे मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ पर अंधाधुंध फायरिंग की गयी. हमलावरों ने उन्हें चार गोलियां मारीं, जिनमें तीन गोलियां उनके सीने में लगीं. गंभीर हालत में उन्हें वीवी सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस हमले में उनका ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका इलाज जारी है. हावड़ा के उलुबेड़िया में बमबाजी, 45 लोग गिरफ्तार हावड़ा जिले के उलुबेड़िया में बुधवार को हिंसा भड़क उठी. बीरशिवपुर इलाके में तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ के बाद दो गुटों के बीच जमकर बमबाजी हुई. इलाके में अफरा-तफरी मच गयी और बाजार बंद हो गये. इस दौरान पांच राहगीर घायल हो गये. उदयनारायणपुर में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या की खबर सामने आयी, जबकि श्यामपुर में एक टीएमसी नेता के घर लूटपाट का आरोप लगा. पुलिस ने मामले में 45 लोगों को गिरफ्तार किया है. कमरहट्टी में भाजपा कार्यकर्ता के घर हमला उत्तर 24 परगना के कमरहट्टी में भाजपा कार्यकर्ता गोविंद झा के घर पर करीब 50 लोगों ने हमला कर दिया. आरोप है कि लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से लैस हमलावरों ने घर का दरवाजा तोड़ दिया और परिवार के सदस्यों की पिटाई की. पीड़ित परिवार ने तृणमूल समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया है. पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गयी है. बताया जा रहा है कि हमले के बाद परिवार दहशत में है. आसनसोल और पश्चिम बर्धमान में भी तनाव आसनसोल और पश्चिम बर्धमान जिले में भी चुनाव बाद हिंसा के आरोप लगे हैं. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त डॉ. प्रणव कुमार से मुलाकात कर जिले में हिंसा, लूटपाट और पार्टी कार्यालयों पर कब्जे के आरोप लगाये. टीएमसी नेताओं का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की जा रही है और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आयी हैं. बशीरहाट में भाजपा कार्यकर्ता को गोली मारी उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में भाजपा कार्यकर्ता रोहित राय को गोली मार दी गयी. घायल रोहित राय ने आरोप लगाया कि वह पार्टी का झंडा लगा रहा था, तभी तृणमूल समर्थक वहां पहुंचे और उस पर फायरिंग कर दी. गोली उसके पेट में लगी है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. प्रशासन की अपील, लेकिन हालात तनावपूर्ण राज्य प्रशासन और पुलिस लगातार शांति बनाये रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. भाजपा ने इन घटनाओं को लोकतंत्र पर हमला बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कई घटनाओं को स्थानीय विवाद और भाजपा की अंदरूनी लड़ाई करार दिया है. 9 मई को होने वाले शपथ ग्रहण से पहले बंगाल की राजनीतिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है.
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के आसनसोल से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को 10 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लालच देकर जाल में फंसाया यह घटना रविवार दोपहर की है, जब लाल बाजार इलाके के पास दो छोटी बच्चियां (उम्र 5 और 10 वर्ष) कच्चे आम चुनने के लिए सरकारी क्वार्टरों की ओर गई थीं। आरोपी जवान, जिसकी पहचान रमाकांत विश्वकर्मा (40) के रूप में हुई है, ने बच्चियों को अधिक आम देने का प्रलोभन दिया। वह उन्हें अपनी स्कूटी पर बैठाकर एक सुनसान क्वार्टर में ले गया, जहाँ उसने बड़ी बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची की बहादुरी और लोगों का गुस्सा बच्ची द्वारा शोर मचाए जाने पर आरोपी घबराकर मौके से फरार हो गया। जैसे ही यह खबर स्थानीय निवासियों तक पहुँची, क्षेत्र में भारी जनाक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों ने: शीतलपुर गेट नंबर 3 पर सड़क जाम कर दी। CISF कैंप के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई पीड़िता के पिता और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई। आरोपी जवान को कुछ ही घंटों के भीतर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस के अनुसार: आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपी चुनाव ड्यूटी पर नहीं, बल्कि कोयला खदानों की सुरक्षा के नियमित कार्य में तैनात था। वर्तमान में स्थिति को देखते हुए पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर बम से भरा बोरा बरामद होने के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच National Investigation Agency (NIA) को सौंप दी है। यह घटना मतदान से ठीक पहले सामने आने के कारण राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। क्या है पूरा मामला? ताजा घटना उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के मझेरैत इलाके की है, जहां एक परित्यक्त घर से बमों से भरा बोरा मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बमों को निष्क्रिय किया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद उसी क्षेत्र में एक और जगह से कुल 9 नए बम बरामद किए गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। NIA जांच का आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय, जिसकी जिम्मेदारी Amit Shah के पास है, ने इस मामले में बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए NIA जांच के आदेश दिए हैं। चुनाव आयोग ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य पुलिस को विशेष अभियान चलाने और दोषियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। आरोप-प्रत्यारोप तेज इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। Indian Secular Front (ISF) ने आरोप लगाया है कि All India Trinamool Congress (TMC) के कार्यकर्ताओं ने इलाके में अशांति फैलाने के लिए बम छिपाए थे। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है कि ISF कार्यकर्ताओं ने ही पार्टी को बदनाम करने के लिए यह साजिश रची है। इलाके में तनाव, सुरक्षा बढ़ाई गई लगातार बम बरामद होने की घटनाओं से भांगड़ और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्रीय बलों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए जांच एजेंसियों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शांति निकेतन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महिदापुर इलाके में, एक होम (आश्रय गृह) में रहने वाली नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मभूमि पर हुई इस दरिंदगी ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। "काकू, मैं आपकी बेटी जैसी हूं": पीड़िता की रुलाई अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रही पीड़िता ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। पीड़िता के अनुसार, आरोपी वे लोग थे जिन्हें वह 'काकू' (चाचा) कहकर बुलाती थी और पिता समान मानती थी। नाबालिग ने बताया कि वह दरिंदों के सामने गिड़गिड़ाती रही और उनके पैर पकड़कर गुहार लगाती रही कि वह उनकी अपनी बेटी की तरह है। लेकिन उन हैवानों पर मासूम की चीखों का कोई असर नहीं हुआ; वे उसकी बेबसी का मजाक उड़ाते रहे और बारी-बारी से उसके साथ कुकर्म किया। प्रमुख घटनाक्रम और ग्रामीणों का आक्रोश आंदोलन की चेतावनी: घटना की खबर मिलते ही महिदापुर के ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने शांति निकेतन थाने का घेराव किया और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। अल्टीमेटम: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर सभी अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। अस्पताल में इलाज: पीड़िता की गंभीर शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे बोलपुर उप-मंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिसिया कार्रवाई की स्थिति मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच तेज कर दी गई है और संदिग्धों की पहचान भी कर ली गई है। हालांकि, ताजा जानकारी मिलने तक आधिकारिक रूप से किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीण इस बात से सबसे अधिक आहत हैं कि यह घटना विश्व भारती जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निकट घटी है, जो शांति और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। करीब 92 फीसदी मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है या फिर Mamata Banerjee एक बार फिर वापसी करेंगी? या Narendra Modi का बंगाल फतह का सपना पूरा होगा? रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई धड़कनें पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 91.78 फीसदी मतदान हुआ। पिछले चुनाव की तुलना में यह करीब 9 फीसदी अधिक है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। टीएमसी और बीजेपी दोनों इसे अपने पक्ष में बता रही हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में एक पुरानी कहावत है–"ज्यादा वोटिंग का मतलब हमेशा सत्ता परिवर्तन नहीं होता।" क्या SIR बना गेमचेंजर? इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। मृतक, पलायन कर चुके और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटने से कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई। ऐसे में मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से ऊपर गया। यानी सिर्फ प्रतिशत देखकर नतीजों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इतिहास क्या कहता है? 2011 में भारी मतदान के बीच ममता बनर्जी ने लेफ्ट के 34 साल के शासन का अंत किया था। लेकिन 2016 और 2021 में मतदान कम होने के बावजूद टीएमसी सत्ता में लौटी। दूसरी ओर, 1984 में रिकॉर्ड मतदान के बावजूद कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही थी। वहीं 1989 में अपेक्षाकृत कम मतदान के बावजूद सत्ता बदल गई। मतलब साफ है–वोटिंग प्रतिशत अकेला पैमाना नहीं है। ममता के लिए क्या है चुनौती? ममता बनर्जी की सरकार को 15 साल पूरे हो चुके हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि, लक्ष्मी भंडार, मुफ्त राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं अभी भी टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। खासकर महिला वोटरों में ममता की पकड़ मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी की उम्मीदें क्यों बढ़ीं? बीजेपी पहली बार बंगाल में पूर्ण बहुमत का सपना देख रही है। पार्टी हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोध, NRC, घुसपैठ और केंद्र की योजनाओं को लेकर आक्रामक अभियान चला रही है। अगर बीजेपी को जीतना है, तो उसे हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण करना होगा। साथ ही, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन करना होगा। मुस्लिम वोट निर्णायक बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यदि यह वोट एकजुट होकर टीएमसी के पक्ष में जाता है, तो बीजेपी की राह कठिन हो सकती है। लेकिन अगर Asaduddin Owaisi या अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा। ज्यादा वोटिंग का असली मतलब इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि मतदाता उत्साहित है। वह बदलाव भी चाहता हो सकता है, और मौजूदा सरकार को बचाने के लिए भी निकल सकता है। वोटिंग का उछाल लोकतंत्र के लिए शानदार संकेत है, लेकिन नतीजों की गारंटी नहीं। आखिर बाजी किसके हाथ? फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी। ममता बनर्जी के पास मजबूत संगठन, महिला वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं का सहारा है। वहीं बीजेपी के पास मोदी फैक्टर, आक्रामक प्रचार और सत्ता विरोधी माहौल का भरोसा। 4 मई को ही तय होगा कि बंगाल में फिर "दीदी" का जादू चलेगा या "मोदी मैजिक" इतिहास रचेगा। अभी के लिए इतना तय है–बंगाल की लड़ाई बेहद रोमांचक और कांटे की है।
कोलकाता/हुगली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हुगली नदी के तट पर समय बिताया। अपने बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने न सिर्फ लोगों और नाविकों से मुलाकात की, बल्कि उन्होंने फोटोग्राफी में भी हाथ आजमाया। उन्होंने इस अनुभव की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं। हुगली तट पर पीएम मोदी का दौरा और जनता से संवाद पीएम मोदी सुबह हुगली नदी पहुंचे, जहां उन्होंने मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों और स्थानीय नाविकों से बातचीत की। उन्होंने नाविकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम बेहद प्रेरणादायक है। इस दौरान उन्होंने नदी के किनारे खड़े होकर कई तस्वीरें भी लीं, जिसमें उनकी फोटोग्राफी में रुचि देखने को मिली। सोशल मीडिया पर साझा की भावनाएं प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि गंगा का बंगाल की संस्कृति और आत्मा में विशेष स्थान है। उन्होंने इसे सभ्यता की शाश्वत चेतना से जोड़ते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर था। विकास और समृद्धि का संदेश पीएम मोदी ने अपने संदेश में पश्चिम बंगाल के विकास और बंगाली समाज की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। चुनावी माहौल में बढ़ी गतिविधि गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। पीएम मोदी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 4 मई को आएंगे नतीजे पूरे चुनावी प्रक्रिया के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, जहां वे लगातार जनता से संवाद कर रहे हैं और पार्टी के प्रचार को मजबूत कर रहे हैं।
रांची। रांची से बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन आज से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। दोनों नेता 18 से 20 अप्रैल तक विभिन्न जिलों में टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे। पुरुलिया से होगी प्रचार की शुरुआत 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची से हेलीकॉप्टर के जरिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के काशीपुर सहित कई क्षेत्रों में पहुंचेंगे। यहां वे तीन अलग-अलग स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखेंगे। कार्यक्रम के बाद उनका शाम तक रांची लौटने का कार्यक्रम है। तीन दिन तक जारी रहेगा प्रचार अभियान पार्टी के केंद्रीय सचिव अभिषेक प्रसाद पिंटू के अनुसार, 19 और 20 अप्रैल को भी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में टीएमसी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे। इस दौरान कई चुनावी रैलियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। झामुमो और टीएमसी के बीच मजबूत रणनीतिक गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पहले ही पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी और इस बार कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेता सीधे चुनावी मैदान में उतरकर टीएमसी के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रभाव वाले क्षेत्रों पर फोकस पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन क्षेत्रों में हेमंत और कल्पना सोरेन प्रचार करेंगे, वहां झामुमो का भी प्रभाव देखा जाता है। ऐसे में इसका सीधा लाभ टीएमसी उम्मीदवारों को मिल सकता है। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी एकता और क्षेत्रीय दलों के सहयोग की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।