नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व और चुनाव चिन्ह को लेकर बढ़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है। आयोग ने ममता बनर्जी गुट और बागी गुट से 6 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे तक दावे, प्रति-दावे और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं। दोनों गुटों से मांगे गए दावे और दस्तावेज चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक चुनाव, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं , पार्टी के संविधान और 'जुड़वां फूल' चुनाव चिन्ह पर अपने दावे के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग दोनों पक्षों की ओर से दाखिल किए जाने वाले रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा। चुनाव चिन्ह पर बना है मुख्य विवाद बागी गुट का दावा है कि उसे पार्टी के अधिकांश विधायकों और पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है, इसलिए वही असली टीएमसी है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संविधान और संगठनात्मक ढांचे के आधार पर खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बता रहा है। 6 जुलाई के बाद होगी अगली कार्रवाई निर्धारित समय सीमा तक दोनों पक्षों के जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। आवश्यकता पड़ने पर आयोग अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा और इसके बाद पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा। राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर टीएमसी से जुड़े इस विवाद पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग का फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पार्टी के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे SIR ट्रिब्यूनल को एक और झटका लगा है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले भी एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश इस ट्रिब्यूनल से अलग हो चुके हैं। स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने खराब स्वास्थ्य के कारण ट्रिब्यूनल में अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का निर्णय लिया। उनके इस्तीफे के बाद ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। पहले भी दे चुके हैं जज इस्तीफा इससे पहले मई में T. S. Sivagnanam ने भी SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दिया था। लगातार दो वरिष्ठ न्यायाधीशों के हटने से ट्रिब्यूनल के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था गठन SIR ट्रिब्यूनल का गठन Supreme Court of India के निर्देश पर तत्कालीन Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश Sujoy Paul द्वारा किया गया था। इस ट्रिब्यूनल का उद्देश्य मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों के मामलों की जांच करना और उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर उचित निर्णय देना है। 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी ट्रिब्यूनल के सामने करीब 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी है। इनमें उन लोगों के आवेदन शामिल हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं। दस्तावेजों की जांच की जा रही है और कई आवेदकों से फोन के माध्यम से भी संपर्क किया जा रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से भी जुड़ा रहा नाम सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग इससे पहले पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती मामले की जांच से भी जुड़े रहे हैं। उनकी अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर कथित भर्ती अनियमितताओं का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई थी। ट्रिब्यूनल से उनके इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी बताई गई है और इसे किसी अन्य विवाद से नहीं जोड़ा गया है।
बेंगलुरु: साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। बेंगलुरु की एक अदालत ने उनके खिलाफ तीसरी बार गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। मामला कर्नाटक समेत तीन राज्यों की चार अलग-अलग मतदाता सूचियों में उनके नाम दर्ज होने के आरोप से जुड़ा है। 17 फरवरी को जारी हुआ था समन बेंगलुरु के वकील के. दिलीप कुमार द्वारा दायर याचिका के आधार पर अदालत ने पहले 17 फरवरी 2026 को पुलिस आयुक्त के माध्यम से समन जारी किया था। हालांकि, दिए गए पते पर अभिनेता उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद 17 मार्च को अदालत ने पहला गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए कहा कि आरोपी अपने पते पर नहीं मिला और घर खाली करने की सूचना प्राप्त हुई है। दो बार पहले भी जारी हो चुका है NBW मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल 2026 को हुई, लेकिन उस दिन भी प्रकाश राज अदालत में पेश नहीं हुए। इसके बाद दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। 12 जून 2026 को तीसरी बार उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई 2026 को होगी। चार अलग-अलग मतदाता सूचियों में नाम होने का आरोप यह विवाद 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ, जब प्रकाश राज ने बेंगलुरु सेंट्रल सीट से चुनाव लड़ा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र (कर्नाटक) के अलावा अभिनेता का नाम तमिलनाडु के वेलाचेरी विधानसभा क्षेत्र और तेलंगाना के सेरिलिंगमपल्ली क्षेत्र की मतदाता सूची में भी दर्ज है। आरोप है कि कुल चार अलग-अलग मतदाता सूचियों में उनका नाम मौजूद है। भारतीय चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, कोई भी नागरिक केवल एक ही स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत हो सकता है। प्रकाश राज ने आरोपों को बताया गलत प्रकाश राज पहले भी इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि वह केवल तमिलनाडु में अपने मतदान अधिकार का इस्तेमाल करते हैं और अन्य राज्यों की मतदाता सूची में नाम होने के दावे गलत हैं। हाल ही में एक और विवाद में फंसे थे अभिनेता हाल ही में आंध्र प्रदेश के तिरुपति में भी उनके खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभिनेता के कुछ सार्वजनिक बयानों से हिंदू देवी-देवताओं और रामायण से जुड़ी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। यह शिकायत भाजपा नेता और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी द्वारा दर्ज कराई गई थी। आने वाली फिल्में वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रकाश राज हाल ही में तमिल फिल्म 'कालिदास 2' और तेलुगु फिल्मों 'सीता पायनम', 'एस सरस्वती' तथा 'डकैत: ए लव स्टोरी' में नजर आए थे। आने वाले समय में वह हिंदी फिल्म 'दृश्यम 3', तेलुगु फिल्म 'स्पिरिट', 'वाराणसी' और तमिल फिल्म 'जना नायगन' में दिखाई देंगे।
रांची। मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए 13 और 14 जून को सभी बूथों पर विशेष कैंप लगेगा। इस दौरान वोटर्स की मैपिंग की जायेगी। रांची के मतदाताओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक बार फिर 'विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम' के तहत विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने जिले के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर 13 और 14 जून को दो दिवसीय विशेष कैंप लगाने का निर्देश दिया है। सुबह 8 से दोपहर 4 बजे तक तैनात रहेंगी बीएलओ इस विशेष अभियान के तहत सभी बूथों पर सुबह 8:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मतदाता सूची के साथ उपस्थित रहेंगी। हालांकि, जो बीएलओ जनगणना कार्य में भी लगी हुई हैं, वे दोपहर 1:00 बजे तक ही कैंप में मौजूद रहेंगी। मतदाताओं और उनके परिवार की होगी मैपिंग डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, त्रुटिहीन और अप-टू-डेट (अद्यतन) करने के लिए यह महाअभियान चलाया जा रहा है। कैंप के दौरान मतदाताओं के निवास, पहचान एवं अन्य आवश्यक जानकारियों का भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाएगा। कागजात लाना अनिवार्य जिन मतदाताओं ने अभी तक अपनी और अपने परिवार की मैपिंग नहीं कराई है, वे इस कैंप में जाकर इसे पूरा करा सकते हैं। इसके लिए मतदाताओं को बीएलओ द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेजों (पहचान और पते का प्रमाण) के साथ अपने-अपने मतदान केंद्र पर पहुंचना होगा। 15 जून तक चलेगी मैपिंग की प्रक्रिया इधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (रिवीजन) से पूर्व मतदाताओं की मैपिंग की यह प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी। इसके बाद अगले चरण में इन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) की छपाई और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) का कार्य शुरू किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तीसरे चरण के तहत घर-घर सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) मतदाताओं के घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण, संग्रह और सत्यापन करेंगे। आयोग के अनुसार, इस चरण में 3.68 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने बताया कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है, ताकि सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल किए जा सकें और अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें। ओडिशा में सबसे अधिक मतदाता चारों राज्यों में कुल 3.67 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। इनमें ओडिशा में सबसे अधिक 3.34 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। राज्य में पुनरीक्षण कार्य के लिए 38,123 बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) और 8,391 बूथ स्तरीय एजेंटों (BLA) की तैनाती की गई है। वहीं, मिजोरम में 8.75 लाख, सिक्किम में 4.71 लाख और मणिपुर में 20.92 लाख मतदाता इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। 14 मई से शुरू हुआ था तीसरा चरण निर्वाचन आयोग ने 14 मई से 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का तीसरा चरण शुरू किया था। वर्तमान चरण में मतदाताओं से आवश्यक जानकारी एकत्र की जाएगी। मतदाता अपने भरे हुए गणना प्रपत्र BLO के माध्यम से जमा कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन जमा करने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र 28 जून या उससे पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को प्राप्त हो जाएंगे, उनके नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। समय सीमा चूकने वालों को भी मिलेगा अवसर निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो मतदाता निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने प्रपत्र जमा नहीं कर पाएंगे, वे दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान निर्धारित घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 भरकर नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। मतदाताओं से सहयोग की अपील आयोग ने सभी पात्र नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी और चुनाव अधिकारियों को सहयोग देने की अपील की है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूचियां अधिक समावेशी, अद्यतन और विश्वसनीय बनेंगी। निर्वाचन आयोग ने दोहराया कि पात्रता तिथि पर 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक भारतीय नागरिक, जो
Asaduddin Owaisi ने हैदराबाद में पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक जनसभा के दौरान मतदाताओं से SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि 25 जून से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के तहत चुनाव अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन और संबंधित फॉर्म वितरित किए जाएंगे। ओवैसी ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं। SIR को लेकर क्या कहा? ओवैसी के अनुसार: चुनाव आयोग ने प्रक्रिया के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen ने भी अपने कार्यकर्ताओं को बूथ लेवल एजेंट के रूप में नियुक्त किया है। मतदाताओं को सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि मताधिकार और नागरिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि वे लोगों को डराने या भावनाएं भड़काने के लिए नहीं बोल रहे हैं, बल्कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसका सीधा संबंध नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से है। सड़क पर नमाज को लेकर भी दिया बयान अपने संबोधन में ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि सड़कों पर नमाज अदा करने पर आपत्ति है, तो समान मानदंड सभी धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों पर लागू होने चाहिए। उनका तर्क था कि नियम और कानून सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों और उनसे जुड़े प्रतिबंधों पर चर्चा करते समय समानता का सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए। SIR क्या है? SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत: मतदाता सूची का सत्यापन किया जाता है। नए मतदाताओं का पंजीकरण किया जाता है। मृत, स्थानांतरित या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाया जाता है। ओवैसी ने लोगों से अपील की कि वे अपने मतदाता रिकॉर्ड की जांच करें और सत्यापन प्रक्रिया में पूरा सहयोग दें ताकि भविष्य में मतदान संबंधी किसी समस्या का सामना न करना पड़े।
रांची। झारखंड में वर्ष 2027 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके तहत झारखंड पिछड़ा वर्ग आयोग जुलाई 2026 से ‘ट्रिपल टेस्ट’ की प्रक्रिया शुरू करेगा। यही प्रक्रिया पंचायत चुनाव में ओबीसी-1, ओबीसी-2 और ओबीसी महिला सीटों के आरक्षण का आधार बनेगी। पंचायती राज विभाग के निर्देश पर आयोग पंचायत स्तर पर सर्वे और आंकड़ों का संग्रह करेगा। इस दौरान ओबीसी आबादी, उनकी राजनीतिक भागीदारी और पंचायतों में प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे। आयोग की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि किन पंचायतों और सीटों को ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा। आयोग में कर्मचारियों की कमी, एजेंसी करेगी मदद पिछड़ा वर्ग आयोग फिलहाल कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया समय पर पूरी करने के लिए आयोग बाहरी एजेंसी की मदद ले सकता है। इससे पहले नगर निकाय चुनावों के दौरान भी आयोग ने निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी थी। 2022 में बड़ा मुद्दा बना था ओबीसी आरक्षण गौरतलब है कि वर्ष 2022 के पंचायत चुनाव में ट्रिपल टेस्ट पूरा नहीं होने के कारण ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ओबीसी के लिए प्रस्तावित सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलकर चुनाव कराया गया था। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने तत्कालीन सरकार को घेरा था और यह बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था। चुनाव से पहले पूरे करने होंगे जरूरी मानक सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव से पहले आयोग को तीन अहम कार्य पूरे करने होंगे। इसमें ओबीसी जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का डेटा तैयार करना, कुल आरक्षण को 50 प्रतिशत की सीमा में रखना और पंचायतों में रोटेशन के आधार पर सीटों का आरक्षण तय करना शामिल है। पंचायत चुनाव में वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए सीधे मतदान होगा, जबकि उपमुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होगा। इसको लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा ने अपना प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है। पार्टी की चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशी उतारने का फैसला हुआ। इसी बीच सत्तारूढ़ झामुमो ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है। भाजपा की चुनाव समिति की बैठक में कहा गया कि पार्टी को चुनाव लड़ना चाहिए। एक सीट पर सशक्त उम्मीदवार देना चाहिए। पार्टी और उसके सहयोगी दलों को मिलाकर 24 वोट हैं। जीत के लिए सिर्फ चार वोट की जरूरत है। सभी विधायकों से राष्ट्रहित में आग्रह किया जाए कि वे पीएम नरेंद्र मोदी को और मजबूत करें, जिससे झारखंड सहित पूरे देश का विकास हो। बैठक में पार्टी की रणनीति को लेकर भी चर्चा हुई। साथ ही जेएलकेएम विधायक जयराम महतो, आजसू, जदयू व लोजपा (आर) के विधायकों व प्रदेश अध्यक्षों के साथ भी बैठक करने पर सहमति बनी। दावा-पार्टी का कार्यकर्ता ही चुनाव लड़ेगा बैठक के बाद प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने कहा कि कोई बाहरी नहीं, पार्टी का कार्यकर्ता ही राज्यसभा चुनाव लडेगा। झामुमो के हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देने की आशंका पर उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही महागठबंधन का अपने विधायकों पर से भरोसा खत्म हो गया है। झारखंड में राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त की शुरुआत महागठबंधन की पार्टियों ने ही की थी। झामुमो ने आयोग को लिखा पत्र इधर, झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है। कहा है कि गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं। लेकिन, एनडीए के पास सिर्फ 24 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए काफी नहीं है। ऐसे में भाजपा के प्रत्याशी उतारने पर विधायकों को प्रभावित करने के लिए आर्थिक प्रलोभन, बाहरी दबाव या अन्य अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। झामुमो ने आयोग से निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त माहौल में राज्यसभा चुनाव कराने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने सीबीआई, ईडी, राज्य खुफिया निदेशालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी सतर्क रखने का आग्रह किया है। मतलब साफ है, झारखंड में राज्यसभा की एक सीट को लेकर सियासी घमासान स्क्रिप्ट तैयार दिख रही है। आनेवाले दिनों रोमांचक संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रांची। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत 23 मई से जिले के सभी मतदान केंद्रों पर अन-मैप्ड मतदाताओं की सूची प्रकाशित की जाएगी। यह सूची लगातार दो सप्ताह तक मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित रहेगी, ताकि ऐसे मतदाता जिनका नाम वर्तमान मतदाता सूची में वर्ष 2003 के गहन पुनरीक्षण वाली सूची से लिंक या मैप नहीं हो पाया है, वे इसकी जांच कर सकें। बूथ पर जाकर जांच ले अपना नाम निर्वाचन विभाग के अनुसार अन-मैप्ड मतदाता वे हैं, जिनके नाम का पुराने अभिलेखों से सत्यापन या मिलान अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे मतदाताओं को अपने संबंधित मतदान केंद्र पर जाकर सूची में अपना नाम अवश्य जांचना चाहिए। सूची में नाम होने पर तुरंत बीएलओ से मिले यदि किसी मतदाता का नाम अन-मैप्ड सूची में शामिल है, तो उन्हें अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) से संपर्क कर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे, ताकि मैपिंग की प्रक्रिया पूरी की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि सूची का प्रदर्शन मतदाताओं की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। समय पर मैपिंग नहीं होने की स्थिति में भविष्य में मतदाता सूची से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए संबंधित मतदाताओं को निर्धारित अवधि के भीतर अपने नाम का सत्यापन कराना जरूरी है। निर्वाचन आयोग ने की अपील राज्य निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित सूची का अवलोकन करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति मिलने पर तत्काल बीएलओ को सूचित करें। इससे मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने में मदद मिलेगी तथा आगामी चुनावों में मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्या करें मतदाता • 23 मई से अपने मतदान केंद्र पर जाकर अन-मैप्ड सूची में नाम जांचें। • नाम मिलने पर संबंधित बीएलओ से संपर्क करें। • आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग कराएं। • दो सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी करें, ताकि मतदाता रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट हो सके। • लिस्ट में होगा नाम तो बीएलओ से संपर्क कर पूरी करानी होगी मैपिंग प्रक्रिया
Maharashtra Vidhan Parishad Election: बंगाल और असम में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखा दी है। महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव में पार्टी के 6 उम्मीदवार निर्विरोध जीतकर सदन में पहुंचे हैं। सोमवार (4 मई) को हुए चुनाव में कुल 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिससे राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो गई है। किन नेताओं को मिली जीत निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में उपसभापति नीलम गोरहे, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे और पूर्व मंत्री बी. काडू जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। भाजपा की ओर से सुनील विनायक कर्जतकर, माधवी नाइक, संजय नत्थूजी भेंडे, विवेक बिपिंदादा कोल्हे और प्रमोद शांताराम जठार जैसे उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं। कैसे हुआ निर्विरोध चुनाव इस चुनाव के लिए कुल 14 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें चार निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे। लेकिन आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण इन सभी निर्दलीयों के नामांकन रद्द कर दिए गए। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा, जिसके चलते सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। विपक्ष को सीमित सफलता जहां भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटें जीतीं, वहीं शिवसेना (UBT) को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा। बाकी सीटें सहयोगी दलों और अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं। राजनीतिक संकेत क्या हैं? महाराष्ट्र में यह नतीजे साफ संकेत देते हैं कि महायुति गठबंधन का दबदबा बरकरार है। बंगाल और असम के बाद महाराष्ट्र में भी भाजपा की मजबूती पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाती है।
चेन्नई/पुडुचेरी, एजेंसियां। तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती नजर आ रही है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित कर लिया है और बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचती दिख रही है। वहीं, पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। तमिलनाडु में टीवीके का शानदार प्रदर्शन 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। शुरुआती रुझानों में टीवीके 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सत्ता के बेहद करीब नजर आ रही है। एआईएडीएमके और डीएमके क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी कोलाथुर सीट से पीछे चल रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। विजय के घर जश्न का माहौल रुझानों के सामने आते ही विजय के घर पर जश्न का माहौल बन गया है। उनके परिवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और विजय राज्य में नई राजनीति की शुरुआत करेंगे। उनकी बहन और पिता ने भरोसा जताया कि विजय युवाओं की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। पुडुचेरी में NDA की बढ़त कायम पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन एक बार फिर सरकार बनाता दिख रहा है। यहां AINRC, बीजेपी और सहयोगी दल बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस और अन्य दल पीछे नजर आ रहे हैं। बड़े नेताओं की साख दांव पर इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा में ही उनकी पार्टी का प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बन गया है। वहीं डीएमके और कांग्रेस के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का संकेत भी माना जा रहा है। क्या होगा आगे? फिलहाल रुझान टीवीके के पक्ष में हैं, लेकिन अंतिम नतीजों का इंतजार बाकी है। यदि यही रुझान परिणाम में बदलते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी तनाव और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने के बाद EVM में कथित गड़बड़ी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। 3 घंटे तक किया निरीक्षण ममता बनर्जी ने सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया, जो भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का वितरण केंद्र है। यहां EVM और मतपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने करीब 3 घंटे से ज्यादा समय तक अंदर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। “जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे” स्ट्रॉन्गरूम से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी ने कहा, “अगर कोई EVM मशीन चुराने या मतगणना में छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे। मैं पूरी जिंदगी लड़ती रहूंगी।” उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उन्हें शक हुआ, जिसके चलते उन्होंने खुद मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। ‘हेरफेर’ के आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षित है, लेकिन कुछ जगहों पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना चुनाव सामग्री को खोला गया, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। केंद्रीय बलों पर आरोप ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका। हालांकि, उन्होंने उम्मीदवार के रूप में अपने अधिकारों का हवाला दिया, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पार्टी प्रतिनिधियों के साथ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काउंटिंग से पहले बढ़ा विवाद 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। एक ओर टीएमसी लगातार सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को खारिज कर रही है। अब सबकी नजरें काउंटिंग डे पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि आरोपों और दावों के बीच जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण में आज 142 सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह 9 बजे तक लगभग 18.39% वोटिंग दर्ज की गई। यह चरण काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर मुकाबला हो रहा है, खासकर भवानीपुर में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। मतदान वाले जिले और उम्मीदवारों की स्थिति इस चरण में हुगली, हावड़ा, कोलकाता, नदिया, उत्तर 24 परगना, पूर्वी बर्धमान और दक्षिण 24 परगना जिलों में वोट डाले जा रहे हैं। कुल 1448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 218 महिलाएं और 266 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं। इन सीटों पर करीब 3.21 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं। राजनीतिक माहौल और आरोप-प्रत्यारोप टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने मतदान प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और दावा किया कि उनकी पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी। दूसरी ओर, कई इलाकों से तनाव और गड़बड़ी की खबरें भी सामने आई हैं। तनाव और सुरक्षा घटनाएं पूर्व बर्धमान के बुदबुद में केंद्रीय बलों पर लाठीचार्ज के आरोप लगे हैं, जबकि बदुरिया सीट पर ‘डमी EVM’ के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है। हाई-प्रोफाइल टकराव भवानीपुर में एक अनोखी स्थिति देखने को मिली, जहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी बेहद करीब मौजूद रहे, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को शुरू हो गया है। इस चरण में 294 सीटों वाली विधानसभा की शेष 142 सीटों पर वोटिंग हो रही है। मतदान राज्य के छह जिलों में जारी है, जिनमें राजधानी कोलकाता भी शामिल है। निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कुल 1,448 उम्मीदवार है इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है। लगभग 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। आयोग के अनुसार, इन 142 सीटों पर कुल 3,21,73,837 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इस चरण में भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है। विशेष मतदाता क्या है? विशेष मतदाताओं की बात करें तो 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3,243 मतदाता, 85 वर्ष से अधिक उम्र के 1,96,801 वरिष्ठ नागरिक, 146 एनआरआई मतदाता और 39,961 सर्विस वोटर भी इस चरण में मतदान कर रहे हैं। सभी मतदाताओं को EPIC फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
ट्रोल-डीजल रेट में बदलाव नहीं देश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग समाप्त होने से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फैली अटकलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। चुनाव के बाद भी दाम बढ़ने की अटकलों पर विराम सरकारी बयान के अनुसार, 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में मतदान समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं, जिसके कारण पहले से ही बाजार में चिंता का माहौल है। अफवाहों पर सरकार की चेतावनी पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कुछ राज्यों में कीमत बढ़ने की अफवाहों के चलते लोगों ने पैनिक बाइंग शुरू कर दी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार– कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं कुछ जगहों पर मांग 30% से ज्यादा बढ़ गई सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की तेल कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव सरकारी तेल कंपनियां मौजूदा दरों पर भारी नुकसान झेल रही हैं। अनुमानित दैनिक घाटा करीब ₹2,400 करोड़ पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर का नुकसान डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर तक का घाटा इसके बावजूद सरकार ने कीमतें स्थिर रखी हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और सप्लाई बाधाओं के कारण तेल बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। 2022 से स्थिर हैं खुदरा ईंधन के दाम भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल: ₹94.77 प्रति लीटर डीजल: ₹87.67 प्रति लीटर हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू रेट के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। सरकार ने क्या कहा? पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है। पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त भंडार आपूर्ति व्यवस्था सामान्य किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार कर दिया है, लेकिन वैश्विक बाजार और तेल कंपनियों के घाटे को देखते हुए आगे स्थिति पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल आम जनता को राहत जरूर मिली है, लेकिन तेल बाजार की अस्थिरता चिंता का कारण बनी हुई है।
चुनाव आयोग की सख्ती, पूरे राज्य में अवैध धन और सामग्री पर कड़ा प्रहार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य भर में चलाए गए सघन अभियान के दौरान अब तक 481 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पोलिंग एजेंट के पास से नकदी बरामद सबसे चौंकाने वाली घटना मुर्शिदाबाद जिले के मुराराई विधानसभा क्षेत्र में सामने आई, जहां मतदान के दिन ही CRPF जवानों ने एक पोलिंग एजेंट के पास से 1.65 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए। यह कार्रवाई बूथ संख्या 137 पर की गई। 181 जगहों पर छापेमारी, नशीले पदार्थ भी जब्त चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यभर में 181 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान शराब, बीयर और स्पिरिट सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 55 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। अब तक 481 करोड़ से ज्यादा की जब्ती चुनाव आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक: 29 करोड़ रुपये नकद 108 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब 57 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं 179 करोड़ रुपये के फ्रीबीज (मुफ्त वितरण सामग्री) जब्त किए जा चुके हैं। हथियार और विस्फोटक भी बरामद सुरक्षा एजेंसियों ने चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। अब तक: 384 अवैध हथियार 1232 बम 595 कारतूस 216 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। लाखों पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत पूरे राज्य में अभियान चलाकर लाखों अवैध पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई है। कोलकाता, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी जारी निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आगामी चरणों में भी आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार सुबह Hooghly River में नाव की सवारी कर चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया। हुगली नदी में नौकायन करते हुए पीएम मोदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में प्रधानमंत्री नाव पर बैठे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नदी के मनोरम दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया। इस दौरान उन्होंने नाविकों से बातचीत की और स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की। गंगा को बताया बंगाल की आत्मा पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि हर बंगाली के लिए गंगा का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा है, जिसका पवित्र जल एक पूरी सभ्यता की शाश्वत भावना को अपने साथ बहाता है। नाविकों और मॉर्निंग वॉकर्स से संवाद प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें नाव चलाने वाले मेहनतकश लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। इसके अलावा, हुगली तट पर सुबह टहलने आए लोगों से भी उन्होंने बातचीत की। पीएम मोदी ने कहा कि हुगली के तट पर बिताया गया समय मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विकास और बंगालवासियों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.66 प्रतिशत मतदान हुआ था। अब दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में पीएम मोदी की यह नाव यात्रा राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले भी पीएम मोदी झाड़ग्राम में चुनावी रैली के बाद अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचकर स्थानीय स्वाद का आनंद लेते नजर आए थे। अब हुगली में उनकी नाव यात्रा चर्चा का नया केंद्र बन गई है।
कोलकाता: Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों में दागी और करोड़पति प्रत्याशियों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले ADR और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच द्वारा 1,475 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में सामने आया कि: कुल 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं 294 उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप (हत्या, हत्या का प्रयास, दुष्कर्म आदि) इनमें 19 पर हत्या और 98 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज दागी उम्मीदवारों में BJP सबसे आगे पार्टीवार आंकड़े भी काफी चौंकाने वाले हैं: BJP: 70% (152 में से 106 उम्मीदवार दागी) TMC: 43% उम्मीदवारों पर केस CPI(M): 43% Congress: 26% 66 सीटें ‘रेड अलर्ट’ घोषित रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण की 152 सीटों में से 66 सीटों को ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है। इन सीटों पर तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। धनबल में TMC सबसे आगे सिर्फ बाहुबल ही नहीं, धनबल के मामले में भी चुनाव काफी भारी दिख रहा है: उम्मीदवारों की औसत संपत्ति: 1.34 करोड़ रुपये TMC उम्मीदवार सबसे अमीर, औसत संपत्ति 5.70 करोड़ रुपये कुल 309 उम्मीदवार (21%) करोड़पति महिला प्रतिनिधित्व अब भी कम रिपोर्ट में महिला भागीदारी को लेकर निराशाजनक तस्वीर सामने आई है: कुल 1,478 उम्मीदवारों में सिर्फ 167 महिलाएं (11%) टिकट वितरण में महिलाओं को अब भी सीमित अवसर कब होगी वोटिंग? West Bengal की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में होगा: पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल नतीजे: 4 मई ADR की रिपोर्ट ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में “विनिंग एबिलिटी” को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस बार साफ छवि को प्राथमिकता देते हैं या फिर धनबल और बाहुबल का असर बरकरार रहता है।
Supreme Court of India आज West Bengal में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह मामला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेहद अहम माना जा रहा है। किस पीठ के सामने होगी सुनवाई? सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ के सामने होगी। 13 अप्रैल की कार्यसूची में इस मामले को सूचीबद्ध किया गया है। चुनाव आयोग पहले ही दे चुका है अंतिम सूची Election Commission of India ने 9 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है। बंगाल में चुनाव: 23 और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई SIR और ‘स्थगन’ का मतलब क्या? मतदाता सूची के “स्थगन” का मतलब है कि अब इस चुनाव के लिए नई एंट्री नहीं की जा सकती। यानी जो नाम सूची में नहीं है, वह इस बार वोट नहीं डाल सकेगा। मालदा केस पर भी सुनवाई कोर्ट Malda में SIR प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले पर भी सुनवाई करेगा। इस मामले में पहले ही National Investigation Agency (NIA) को जांच सौंपने का आदेश दिया जा चुका है।
West Bengal Elections 2026: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) से गठबंधन तोड़ दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अब अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। क्यों टूटा गठबंधन? AIMIM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि: हुमायूं कबीर के बयान पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाते ऐसे बयानों से मुस्लिम समुदाय की छवि पर सवाल उठते हैं पार्टी ने कहा कि वह किसी भी विवादित या समुदाय को नुकसान पहुंचाने वाले बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती। बंगाल में अकेले लड़ने का ऐलान AIMIM ने स्पष्ट किया: अब किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ा जाएगा पार्टी ने यह भी कहा कि बंगाल के मुसलमान आज भी सबसे गरीब और उपेक्षित वर्गों में हैं, और उनके लिए ठोस काम नहीं हुआ है। कौन हैं हुमायूं कबीर? पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता दिसंबर में पार्टी से निष्कासित इसके बाद बनाई जनता उन्नयन पार्टी हाल ही में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर मस्जिद की नींव रखने को लेकर चर्चा में विवादों में कबीर TMC ने एक वीडियो साझा कर दावा किया कि हुमायूं कबीर ने कथित तौर पर अल्पसंख्यकों को गुमराह करने के लिए BJP से पैसे लेने की बात कही हालांकि: BJP ने इस वीडियो से पल्ला झाड़ लिया हुमायूं कबीर ने भी सफाई देते हुए आरोपों को खारिज किया चुनाव की तारीखें 23 और 29 अप्रैल: मतदान 4 मई: नतीजे
असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार (9 अप्रैल) को हुए मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम 6 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तीनों जगहों पर अच्छी वोटिंग दर्ज की गई। कहां कितना हुआ मतदान? पुडुचेरी: 89.08% (सबसे ज्यादा) असम: 85.04% केरल: 77.38% असम में टूटा पिछला रिकॉर्ड असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर करीब 85.04% मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के 82.04% से ज्यादा है। इस बार राज्य में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है: बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में कांग्रेस करीब 10 साल बाद वापसी की उम्मीद में सीटों के हिसाब से अलग-अलग ट्रेंड असम में अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में काफी अंतर देखने को मिला: सबसे ज्यादा: दलगांव – 94.57% सबसे कम: अमरी – 70.40% इस चरण में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए। केरल और पुडुचेरी में भी लंबी कतारें केरल: सभी 140 सीटों पर शाम 6 बजे तक वोटिंग खत्म हुई, लेकिन कई जगहों पर लोग लाइन में लगे रहे। समय से पहले पहुंचे मतदाताओं को टोकन देकर बाद में भी वोट डालने दिया गया। पुडुचेरी: 30 सीटों पर वोटिंग शाम 6 बजे खत्म हुई, लेकिन यहां भी देर तक लोग लाइन में खड़े रहे और उन्हें मतदान का मौका दिया गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।