Election News

BJP leaders celebrating unopposed victory in Maharashtra MLC elections with supporters and party flags
बंगाल-असम के बाद महाराष्ट्र में भी BJP का दबदबा, विधान परिषद चुनाव में 6 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

Maharashtra Vidhan Parishad Election: बंगाल और असम में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखा दी है। महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव में पार्टी के 6 उम्मीदवार निर्विरोध जीतकर सदन में पहुंचे हैं। सोमवार (4 मई) को हुए चुनाव में कुल 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिससे राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो गई है। किन नेताओं को मिली जीत निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में उपसभापति नीलम गोरहे, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे और पूर्व मंत्री बी. काडू जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। भाजपा की ओर से सुनील विनायक कर्जतकर, माधवी नाइक, संजय नत्थूजी भेंडे, विवेक बिपिंदादा कोल्हे और प्रमोद शांताराम जठार जैसे उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं। कैसे हुआ निर्विरोध चुनाव इस चुनाव के लिए कुल 14 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें चार निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे। लेकिन आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण इन सभी निर्दलीयों के नामांकन रद्द कर दिए गए। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा, जिसके चलते सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। विपक्ष को सीमित सफलता जहां भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटें जीतीं, वहीं शिवसेना (UBT) को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा। बाकी सीटें सहयोगी दलों और अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं। राजनीतिक संकेत क्या हैं? महाराष्ट्र में यह नतीजे साफ संकेत देते हैं कि महायुति गठबंधन का दबदबा बरकरार है। बंगाल और असम के बाद महाराष्ट्र में भी भाजपा की मजबूती पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाती है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Tamil Nadu politics
विजय की जीत पर परिवार में जश्न, पिता बोले- तमिलनाडु में आएगा बड़ा बदलाव

चेन्नई/पुडुचेरी, एजेंसियां। तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती नजर आ रही है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित कर लिया है और बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचती दिख रही है। वहीं, पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन बढ़त बनाए हुए है।   तमिलनाडु में टीवीके का शानदार प्रदर्शन 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। शुरुआती रुझानों में टीवीके 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सत्ता के बेहद करीब नजर आ रही है। एआईएडीएमके और डीएमके क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी कोलाथुर सीट से पीछे चल रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।   विजय के घर जश्न का माहौल रुझानों के सामने आते ही विजय के घर पर जश्न का माहौल बन गया है। उनके परिवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और विजय राज्य में नई राजनीति की शुरुआत करेंगे। उनकी बहन और पिता ने भरोसा जताया कि विजय युवाओं की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।   पुडुचेरी में NDA की बढ़त कायम पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन एक बार फिर सरकार बनाता दिख रहा है। यहां AINRC, बीजेपी और सहयोगी दल बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस और अन्य दल पीछे नजर आ रहे हैं।   बड़े नेताओं की साख दांव पर इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा में ही उनकी पार्टी का प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बन गया है। वहीं डीएमके और कांग्रेस के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का संकेत भी माना जा रहा है।   क्या होगा आगे? फिलहाल रुझान टीवीके के पक्ष में हैं, लेकिन अंतिम नतीजों का इंतजार बाकी है। यदि यही रुझान परिणाम में बदलते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Mamata Banerjee inspects strong room ahead of West Bengal election countin
“EVM से छेड़छाड़ हुई तो जान की बाजी लगा देंगे” – स्ट्रॉन्गरूम दौरे के बाद ममता बनर्जी की चेतावनी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी तनाव और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने के बाद EVM में कथित गड़बड़ी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। 3 घंटे तक किया निरीक्षण ममता बनर्जी ने सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया, जो भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का वितरण केंद्र है। यहां EVM और मतपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने करीब 3 घंटे से ज्यादा समय तक अंदर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। “जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे” स्ट्रॉन्गरूम से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी ने कहा, “अगर कोई EVM मशीन चुराने या मतगणना में छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे। मैं पूरी जिंदगी लड़ती रहूंगी।” उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उन्हें शक हुआ, जिसके चलते उन्होंने खुद मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। ‘हेरफेर’ के आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षित है, लेकिन कुछ जगहों पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना चुनाव सामग्री को खोला गया, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। केंद्रीय बलों पर आरोप ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका। हालांकि, उन्होंने उम्मीदवार के रूप में अपने अधिकारों का हवाला दिया, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पार्टी प्रतिनिधियों के साथ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काउंटिंग से पहले बढ़ा विवाद 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। एक ओर टीएमसी लगातार सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को खारिज कर रही है। अब सबकी नजरें काउंटिंग डे पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि आरोपों और दावों के बीच जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।  

surbhi मई 1, 2026 0
West Bengal Elections 2026
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण में सुबह 9 बजे तक 18.39% मतदान

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण में आज 142 सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह 9 बजे तक लगभग 18.39% वोटिंग दर्ज की गई। यह चरण काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर मुकाबला हो रहा है, खासकर भवानीपुर में ममता बनर्जी  और सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं।   मतदान वाले जिले और उम्मीदवारों की स्थिति इस चरण में हुगली, हावड़ा, कोलकाता, नदिया, उत्तर 24 परगना, पूर्वी बर्धमान और दक्षिण 24 परगना जिलों में वोट डाले जा रहे हैं। कुल 1448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 218 महिलाएं और 266 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं। इन सीटों पर करीब 3.21 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं।   राजनीतिक माहौल और आरोप-प्रत्यारोप टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने मतदान प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और दावा किया कि उनकी पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी। दूसरी ओर, कई इलाकों से तनाव और गड़बड़ी की खबरें भी सामने आई हैं।   तनाव और सुरक्षा घटनाएं पूर्व बर्धमान के बुदबुद में केंद्रीय बलों पर लाठीचार्ज के आरोप लगे हैं, जबकि बदुरिया सीट पर ‘डमी EVM’ के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है।   हाई-प्रोफाइल टकराव भवानीपुर में एक अनोखी स्थिति देखने को मिली, जहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी बेहद करीब मौजूद रहे, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
Bengal Elections 2026
Bengal Elections 2026: दूसरे चरण का मतदान जारी, 142 सीटों पर हो रही वोटिंग

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को शुरू हो गया है। इस चरण में 294 सीटों वाली विधानसभा की शेष 142 सीटों पर वोटिंग हो रही है। मतदान राज्य के छह जिलों में जारी है, जिनमें राजधानी कोलकाता भी शामिल है। निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।   कुल 1,448 उम्मीदवार है  इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है। लगभग 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। आयोग के अनुसार, इन 142 सीटों पर कुल 3,21,73,837 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इस चरण में भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है।   विशेष मतदाता क्या है? विशेष मतदाताओं की बात करें तो 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3,243 मतदाता, 85 वर्ष से अधिक उम्र के 1,96,801 वरिष्ठ नागरिक, 146 एनआरआई मतदाता और 39,961 सर्विस वोटर भी इस चरण में मतदान कर रहे हैं। सभी मतदाताओं को EPIC फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
Petrol and diesel prices remain unchanged in India despite post-election hike rumours and crude oil volatility
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ा अपडेट: चुनाव के बाद भी नहीं बढ़ेंगे दाम, सरकार ने किया साफ इनकारपे

ट्रोल-डीजल रेट में बदलाव नहीं देश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग समाप्त होने से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फैली अटकलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। चुनाव के बाद भी दाम बढ़ने की अटकलों पर विराम सरकारी बयान के अनुसार, 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में मतदान समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं, जिसके कारण पहले से ही बाजार में चिंता का माहौल है। अफवाहों पर सरकार की चेतावनी पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कुछ राज्यों में कीमत बढ़ने की अफवाहों के चलते लोगों ने पैनिक बाइंग शुरू कर दी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार– कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं कुछ जगहों पर मांग 30% से ज्यादा बढ़ गई सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की तेल कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव सरकारी तेल कंपनियां मौजूदा दरों पर भारी नुकसान झेल रही हैं। अनुमानित दैनिक घाटा करीब ₹2,400 करोड़ पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर का नुकसान डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर तक का घाटा इसके बावजूद सरकार ने कीमतें स्थिर रखी हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और सप्लाई बाधाओं के कारण तेल बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। 2022 से स्थिर हैं खुदरा ईंधन के दाम भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल: ₹94.77 प्रति लीटर डीजल: ₹87.67 प्रति लीटर हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू रेट के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। सरकार ने क्या कहा? पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है। पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त भंडार आपूर्ति व्यवस्था सामान्य किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार कर दिया है, लेकिन वैश्विक बाजार और तेल कंपनियों के घाटे को देखते हुए आगे स्थिति पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल आम जनता को राहत जरूर मिली है, लेकिन तेल बाजार की अस्थिरता चिंता का कारण बनी हुई है।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
CRPF personnel seize cash during West Bengal Assembly Election 2026 polling operations
बंगाल चुनाव में बड़ी कार्रवाई: पोलिंग एजेंट से नकदी बरामद, अब तक 481 करोड़ की जब्ती

चुनाव आयोग की सख्ती, पूरे राज्य में अवैध धन और सामग्री पर कड़ा प्रहार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य भर में चलाए गए सघन अभियान के दौरान अब तक 481 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पोलिंग एजेंट के पास से नकदी बरामद सबसे चौंकाने वाली घटना मुर्शिदाबाद जिले के मुराराई विधानसभा क्षेत्र में सामने आई, जहां मतदान के दिन ही CRPF जवानों ने एक पोलिंग एजेंट के पास से 1.65 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए। यह कार्रवाई बूथ संख्या 137 पर की गई। 181 जगहों पर छापेमारी, नशीले पदार्थ भी जब्त चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यभर में 181 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान शराब, बीयर और स्पिरिट सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 55 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। अब तक 481 करोड़ से ज्यादा की जब्ती चुनाव आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक: 29 करोड़ रुपये नकद 108 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब 57 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं 179 करोड़ रुपये के फ्रीबीज (मुफ्त वितरण सामग्री) जब्त किए जा चुके हैं। हथियार और विस्फोटक भी बरामद सुरक्षा एजेंसियों ने चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। अब तक: 384 अवैध हथियार 1232 बम 595 कारतूस 216 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। लाखों पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत पूरे राज्य में अभियान चलाकर लाखों अवैध पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई है। कोलकाता, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी जारी निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आगामी चरणों में भी आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi enjoys boat ride on Hooghly River during Bengal election campaign
बंगाल चुनाव के बीच हुगली में PM मोदी की नाव यात्रा, नाविकों से मिले, खुद खींचीं तस्वीरें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार सुबह Hooghly River में नाव की सवारी कर चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया। हुगली नदी में नौकायन करते हुए पीएम मोदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में प्रधानमंत्री नाव पर बैठे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नदी के मनोरम दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया। इस दौरान उन्होंने नाविकों से बातचीत की और स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की। गंगा को बताया बंगाल की आत्मा पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि हर बंगाली के लिए गंगा का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा है, जिसका पवित्र जल एक पूरी सभ्यता की शाश्वत भावना को अपने साथ बहाता है। नाविकों और मॉर्निंग वॉकर्स से संवाद प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें नाव चलाने वाले मेहनतकश लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। इसके अलावा, हुगली तट पर सुबह टहलने आए लोगों से भी उन्होंने बातचीत की। पीएम मोदी ने कहा कि हुगली के तट पर बिताया गया समय मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विकास और बंगालवासियों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.66 प्रतिशत मतदान हुआ था। अब दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में पीएम मोदी की यह नाव यात्रा राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले भी पीएम मोदी झाड़ग्राम में चुनावी रैली के बाद अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचकर स्थानीय स्वाद का आनंद लेते नजर आए थे। अब हुगली में उनकी नाव यात्रा चर्चा का नया केंद्र बन गई है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
West Bengal map
बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण में दागी और धनी उम्मीदवारों का दबदबा, BJP के 70% प्रत्याशी दागी, TMC सबसे अमीर

कोलकाता: Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों में दागी और करोड़पति प्रत्याशियों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले ADR और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच द्वारा 1,475 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में सामने आया कि: कुल 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं 294 उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप (हत्या, हत्या का प्रयास, दुष्कर्म आदि) इनमें 19 पर हत्या और 98 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज दागी उम्मीदवारों में BJP सबसे आगे पार्टीवार आंकड़े भी काफी चौंकाने वाले हैं: BJP: 70% (152 में से 106 उम्मीदवार दागी) TMC: 43% उम्मीदवारों पर केस CPI(M): 43% Congress: 26% 66 सीटें ‘रेड अलर्ट’ घोषित रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण की 152 सीटों में से 66 सीटों को ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है। इन सीटों पर तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। धनबल में TMC सबसे आगे सिर्फ बाहुबल ही नहीं, धनबल के मामले में भी चुनाव काफी भारी दिख रहा है: उम्मीदवारों की औसत संपत्ति: 1.34 करोड़ रुपये TMC उम्मीदवार सबसे अमीर, औसत संपत्ति 5.70 करोड़ रुपये कुल 309 उम्मीदवार (21%) करोड़पति महिला प्रतिनिधित्व अब भी कम रिपोर्ट में महिला भागीदारी को लेकर निराशाजनक तस्वीर सामने आई है: कुल 1,478 उम्मीदवारों में सिर्फ 167 महिलाएं (11%) टिकट वितरण में महिलाओं को अब भी सीमित अवसर कब होगी वोटिंग? West Bengal की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में होगा: पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल नतीजे: 4 मई ADR की रिपोर्ट ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में “विनिंग एबिलिटी” को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस बार साफ छवि को प्राथमिकता देते हैं या फिर धनबल और बाहुबल का असर बरकरार रहता है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Supreme Court of India hearing West Bengal SIR voter list case ahead of elections today
सुप्रीम कोर्ट में आज बंगाल SIR मामले की सुनवाई, चुनाव से पहले अहम फैसला संभव

Supreme Court of India आज West Bengal में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह मामला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेहद अहम माना जा रहा है। किस पीठ के सामने होगी सुनवाई? सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ के सामने होगी। 13 अप्रैल की कार्यसूची में इस मामले को सूचीबद्ध किया गया है। चुनाव आयोग पहले ही दे चुका है अंतिम सूची Election Commission of India ने 9 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है। बंगाल में चुनाव: 23 और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई SIR और ‘स्थगन’ का मतलब क्या? मतदाता सूची के “स्थगन” का मतलब है कि अब इस चुनाव के लिए नई एंट्री नहीं की जा सकती। यानी जो नाम सूची में नहीं है, वह इस बार वोट नहीं डाल सकेगा। मालदा केस पर भी सुनवाई कोर्ट Malda में SIR प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले पर भी सुनवाई करेगा। इस मामले में पहले ही National Investigation Agency (NIA) को जांच सौंपने का आदेश दिया जा चुका है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Asaduddin Owaisi addressing a rally after AIMIM announced contesting West Bengal elections independently.
AIMIM ने तोड़ा गठबंधन, बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी

West Bengal Elections 2026: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) से गठबंधन तोड़ दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अब अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। क्यों टूटा गठबंधन? AIMIM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि: हुमायूं कबीर के बयान पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाते ऐसे बयानों से मुस्लिम समुदाय की छवि पर सवाल उठते हैं पार्टी ने कहा कि वह किसी भी विवादित या समुदाय को नुकसान पहुंचाने वाले बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती। बंगाल में अकेले लड़ने का ऐलान AIMIM ने स्पष्ट किया: अब किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ा जाएगा पार्टी ने यह भी कहा कि बंगाल के मुसलमान आज भी सबसे गरीब और उपेक्षित वर्गों में हैं, और उनके लिए ठोस काम नहीं हुआ है। कौन हैं हुमायूं कबीर? पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता दिसंबर में पार्टी से निष्कासित इसके बाद बनाई जनता उन्नयन पार्टी हाल ही में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर मस्जिद की नींव रखने को लेकर चर्चा में विवादों में कबीर TMC ने एक वीडियो साझा कर दावा किया कि हुमायूं कबीर ने कथित तौर पर अल्पसंख्यकों को गुमराह करने के लिए BJP से पैसे लेने की बात कही हालांकि: BJP ने इस वीडियो से पल्ला झाड़ लिया हुमायूं कबीर ने भी सफाई देते हुए आरोपों को खारिज किया चुनाव की तारीखें 23 और 29 अप्रैल: मतदान 4 मई: नतीजे

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths during assembly elections in Assam, Kerala, and Puducherry.
असम-केरल-पुडुचेरी में जबरदस्त वोटिंग, कई रिकॉर्ड टूटे

असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार (9 अप्रैल) को हुए मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम 6 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तीनों जगहों पर अच्छी वोटिंग दर्ज की गई। कहां कितना हुआ मतदान? पुडुचेरी: 89.08% (सबसे ज्यादा) असम: 85.04% केरल: 77.38% असम में टूटा पिछला रिकॉर्ड असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर करीब 85.04% मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के 82.04% से ज्यादा है। इस बार राज्य में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है: बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में कांग्रेस करीब 10 साल बाद वापसी की उम्मीद में सीटों के हिसाब से अलग-अलग ट्रेंड असम में अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में काफी अंतर देखने को मिला: सबसे ज्यादा: दलगांव – 94.57% सबसे कम: अमरी – 70.40% इस चरण में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए। केरल और पुडुचेरी में भी लंबी कतारें केरल: सभी 140 सीटों पर शाम 6 बजे तक वोटिंग खत्म हुई, लेकिन कई जगहों पर लोग लाइन में लगे रहे। समय से पहले पहुंचे मतदाताओं को टोकन देकर बाद में भी वोट डालने दिया गया। पुडुचेरी: 30 सीटों पर वोटिंग शाम 6 बजे खत्म हुई, लेकिन यहां भी देर तक लोग लाइन में खड़े रहे और उन्हें मतदान का मौका दिया गया।

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths during heavy rain in Assam Assembly Elections 2026.
Assam Election 2026 LIVE: भारी बारिश में भी वोटिंग जारी, पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज (9 अप्रैल) सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए हो रहे इस चुनाव में खराब मौसम के बावजूद मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बारिश के बीच भी वोटिंग का जोश कई इलाकों में भारी बारिश के बावजूद लोग वोट डालने निकल रहे पोलिंग स्टेशन के बाहर लंबी-लंबी कतारें मतदाता लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे चुनाव की बड़ी बातें कुल 126 सीटों पर एक ही चरण में मतदान 722 उम्मीदवार मैदान में 2.50 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र 1.25 करोड़ महिलाएं 318 थर्ड जेंडर मतदाता 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्य मुकाबला बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधी टक्कर बीजेपी तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में कांग्रेस 2016 के बाद फिर से सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में बड़े उम्मीदवार मैदान में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल नेता अखिल गोगोई AJP के लुरिनज्योति गोगोई नेताओं की अपील हिमंता बिस्वा सरमा वोट डालने के लिए घर से निकले प्रियंका गांधी ने लोगों से अपील की- “अपने राज्य, जमीन और भविष्य के लिए वोट करें” पोलिंग बूथ पर खास इंतजाम मेडिकल सुविधा उपलब्ध शिशुओं के लिए पालना और स्तनपान कक्ष दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर इमरजेंसी के लिए एम्बुलेंस तैनात

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Abhishek Banerjee addressing a political rally in West Bengal criticizing BJP and Narendra Modi
धर्म की राजनीति पर अभिषेक बनर्जी का हमला, बोले- ‘विकास बनाम दमन’ की लड़ाई है चुनाव

पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी सरगर्मी के बीच Abhishek Banerjee ने भाजपा और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने चुनावी रैलियों में धर्म की राजनीति को “छलावा” करार देते हुए इसे जनता को गुमराह करने की रणनीति बताया। कोलकाता और उत्तर बंगाल के कई इलाकों-नाटाबाड़ी, जलपाईगुड़ी और कुमारग्राम-में जनसभाओं को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि “विकास बनाम दमन” की सीधी लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म को केवल राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है। धार्मिक राजनीति पर सवाल Abhishek Banerjee ने प्रधानमंत्री मोदी के कूचबिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे मदनमोहन मंदिर तक दर्शन करने नहीं गए, जिससे उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठता है। बनर्जी ने इसे “राजनीतिक दिखावा” बताया और कहा कि भाजपा का धर्म से वास्तविक जुड़ाव नहीं, बल्कि चुनावी लाभ से है। ‘डबल इंजन सरकार’ पर निशाना तृणमूल नेता ने भाजपा के “डबल इंजन सरकार” के नारे को भी आड़े हाथों लिया। उनका आरोप था कि भाजपा के सांसद और विधायक जनता से कटे हुए हैं और चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया। उन्होंने नारायणी बटालियन, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय और पर्यटन विकास जैसी अधूरी परियोजनाओं का मुद्दा उठाया। राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने सड़क, पुल, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक योजनाओं का हवाला दिया। ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘खाद्य साथी’, ‘युवा साथी’ और ‘बांग्लार बाड़ी’ जैसी योजनाओं को आम जनता के लिए लाभकारी बताया। चाय बागान मजदूरों के लिए बड़ा वादा जलपाईगुड़ी की रैली में बनर्जी ने चाय बागान मजदूरों की दैनिक मजदूरी ₹250 से बढ़ाकर ₹300 करने का वादा दोहराया। इसके साथ ही किसानों के लिए सस्ते बीज, कोल्ड स्टोरेज और ₹30,000 करोड़ के कृषि निवेश की घोषणा भी की गई। महंगाई और केंद्र पर आरोप महंगाई को बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने गैस, पेट्रोल, खाद और जरूरी वस्तुओं के बढ़ते दामों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही नागरिकता और अन्य मुद्दों के जरिए लोगों को डराने का आरोप भी लगाया। बनर्जी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि यह चुनाव “पहचान और अधिकार” की लड़ाई है और जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में चौथी बार तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनेगी।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Sunetra Pawar files nomination in Baramati bypoll; asset details spark political debate in Maharashtra
बारामती उपचुनाव: सुनेत्रा पवार की 122 करोड़ संपत्ति चर्चा में, पवार परिवार में दौलत की तुलना से सियासत गरम

महाराष्ट्र की सियासत में बारामती उपचुनाव ने नया मोड़ ले लिया है। नामांकन के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामों ने पवार परिवार की संपत्ति को लेकर बहस छेड़ दी है। Sunetra Pawar की कुल संपत्ति करीब ₹122 करोड़ सामने आई है, जो उनके ससुर Sharad Pawar की घोषित संपत्ति (करीब ₹61 करोड़) से लगभग दोगुनी है। हालांकि परिवार के भीतर तुलना करें तो Sunetra Pawar अपनी ननद Supriya Sule से अभी भी पीछे हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग ₹167 करोड़ बताई गई है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद बारामती की सियासत में ‘परिवार बनाम संपत्ति’ की चर्चा तेज हो गई है। इस बीच चुनावी मुकाबला भी अब दिलचस्प हो गया है। Indian National Congress ने बारामती सीट से अधिवक्ता आकाश विश्वनाथ मोरे को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया है। पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया, जिससे मुकाबला अब एकतरफा नहीं रहा। बारामती सीट लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ मानी जाती रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar ने यहां से लगातार आठ बार जीत हासिल की थी। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई और अब उनकी पत्नी Sunetra Pawar इस उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही हैं। पहले इस सीट पर निर्विरोध जीत की चर्चा थी, लेकिन कांग्रेस के मैदान में आने से अब सीधा और कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है। इस चुनाव में अब केवल राजनीतिक विरासत ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की संपत्ति और छवि भी अहम मुद्दा बनती दिख रही है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, बारामती और राहुरी सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में यह चुनाव और भी ज्यादा हाई-प्रोफाइल होने की संभावना है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Ajmer Ranchi weekly special train
गर्मियों में अजमेर-रांची के बीच चलेगी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन

रांची। गर्मी की छुट्टियों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अजमेर और रांची के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इससे ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।  17 अप्रैल से 10 जुलाई तक चलेगी गाड़ी संख्या 09619 अजमेर-रांची साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन 17 अप्रैल से 10 जुलाई तक चलेगी। यह ट्रेन हर शुक्रवार रात 11:05 बजे अजमेर से चलेगी और रविवार सुबह 7:30 बजे रांची पहुंचेगी।    रांची से अजमेर जाने का समय गाड़ी संख्या 09620 रांची-अजमेर स्पेशल ट्रेन 19 अप्रैल से 12 जुलाई तक चलेगी। यह ट्रेन हर रविवार सुबह 10:50 बजे रांची से रवाना होगी और सोमवार शाम 6:35 बजे अजमेर पहुंचेगी।    ट्रेन में मिलेंगी ये सुविधाए इस स्पेशल ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए सेकेंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कुल 20 कोच लगाए जाएंगे।    यात्रियों को फायदा  रेलवे के इस फैसले से झारखंड और राजस्थान के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Anjali Kumari अप्रैल 8, 2026 0
Election campaign rallies stopping with Election Commission symbol and voters awareness visuals in Assam Kerala Puducherry
असम, केरल और पुडुचेरी में आज थमेगा चुनाव प्रचार, साइलेंस पीरियड लागू

असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार का शोर आज थम जाएगा। चुनाव आयोग ने मंगलवार शाम 5 बजे से ‘साइलेंस पीरियड’ लागू करने का ऐलान किया है। इन राज्यों में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। क्या होता है साइलेंस पीरियड? ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 126 के तहत- मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर पूरी तरह रोक लग जाती है कोई भी पार्टी या उम्मीदवार रैली, जनसभा, जुलूस डोर-टू-डोर कैंपेन भाषण या प्रचार गतिविधि नहीं कर सकते इसके अलावा- टीवी, सोशल मीडिया, SMS, कॉल के जरिए वोट मांगना भी प्रतिबंधित रहेगा ओपिनियन पोल और सर्वे के प्रसारण पर भी रोक रहेगी बाहरी कार्यकर्ताओं को जाना होगा चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि- जो राजनीतिक कार्यकर्ता संबंधित राज्य के मतदाता नहीं हैं उन्हें प्रचार खत्म होते ही इलाका छोड़ना होगा स्टालिन का केंद्र पर हमला तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पुडुचेरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- पुडुचेरी की विधानसभा 14 बार राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव पास कर चुकी है इसके बावजूद केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया स्टालिन ने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) देने की मांग दोहराई। केरल में वोटर्स को जागरूक करने का अनोखा तरीका केरल में मुख्य चुनाव अधिकारी रतन यू. केलकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है- इसमें वे अधिकारियों के साथ समुद्र किनारे डांस करते नजर आ रहे हैं यह वीडियो युवाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाया गया है अन्य राजनीतिक हलचल अभिषेक बनर्जी (TMC) ने पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दिया लिएंडर पेस को ‘X’ कैटेगरी सुरक्षा मिली (हाल ही में BJP जॉइन की) असम CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी ने कांग्रेस के खिलाफ FIR दर्ज कराई तमिलनाडु चुनाव अपडेट 234 सीटों पर 7,000+ उम्मीदवारों ने नामांकन किया नामांकन की जांच: 7 अप्रैल नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Congress leaders announcing West Bengal Election 2026 candidate list at AICC meeting press conference
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कांग्रेस ने जारी की 284 उम्मीदवारों की पहली सूची, बहरमपुर से अधीर रंजन, भवानीपुर में ममता बनर्जी को चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए कुल 284 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। यह सूची नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की पार्लियामेंटरी बोर्ड की दो दिवसीय बैठक के बाद जारी की गई। इस सूची में पार्टी ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों-उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक-राजनीतिक समीकरण साधे जा सकें। प्रमुख सीटों पर दिग्गजों की तैनाती कांग्रेस की सूची में सबसे चर्चित नाम Adhir Ranjan Chowdhury का है, जिन्हें उनके गढ़ बहरमपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। अधीर रंजन चौधरी लंबे समय से इस क्षेत्र में पार्टी का मजबूत चेहरा रहे हैं और उन्होंने पहले ही यहां से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। भवानीपुर में त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी भवानीपुर सीट इस बार सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गई है। यहां मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को मैदान में उतारा है। इस सीट पर नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari की मौजूदगी से मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है। अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवार नंदीग्राम से शेख जरियातुल हुसैन को टिकट दिया गया है खड़गपुर सदर में भाजपा नेता Dilip Ghosh के खिलाफ डॉ. पापिया चक्रवर्ती मैदान में हैं संदेशखाली (ST) सीट से युधिष्ठिर भुइयां को उम्मीदवार बनाया गया है डायमंड हार्बर से गौतम भट्टाचार्य, सिंगूर से बरुण कुमार मलिक और रायगंज से मोहित सेनगुप्ता को मौका मिला है क्षेत्रीय समीकरणों पर खास ध्यान कांग्रेस ने अपनी रणनीति में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे पारंपरिक गढ़ों में मुस्लिम उम्मीदवारों और पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है। वहीं उत्तर बंगाल की चाय बागान सीटों-जैसे कालचीनी और मदारीहाट-पर जनजातीय चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। सिलीगुड़ी से आलोक धारा और दार्जिलिंग से माधव राय को टिकट देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह सूची राज्य में पार्टी की मौजूदगी को मजबूत करने और प्रमुख सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Uttar Pradesh assembly building with discussion on increasing seats from 403 to 605 amid delimitation talks
UP में बढ़ सकती है विधानसभा सीटें! 403 से बढ़कर 605 होने की चर्चा, जानिए पूरा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मौजूदा 403 सीटों के मुकाबले भविष्य में यह संख्या बढ़कर 605 तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव में लागू नहीं होगा। क्यों बढ़ सकती हैं सीटें? यह चर्चा संभावित परिसीमन (Delimitation) और नारी वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित बदलावों के कारण शुरू हुई है। सूत्रों के मुताबिक: लोकसभा और विधानसभा सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी हो सकती है यूपी में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं विधानसभा सीटें 403 से बढ़कर 605 होने का अनुमान 2027 चुनाव पर क्या असर? 2027 के विधानसभा चुनाव पुरानी 403 सीटों पर ही होंगे सीटों में बढ़ोतरी परिसीमन के बाद लागू होगी संभावना है कि 2032 के बाद नए ढांचे पर चुनाव हो आबादी के हिसाब से क्यों जरूरी? यूपी में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण: एक विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या काफी बढ़ गई है आंकड़ों पर नजर: 1952: 347 सीटें, प्रति सीट ~1.82 लाख आबादी 1973: 425 सीटें, प्रति सीट ~2.8 लाख वर्तमान (403 सीट): प्रति सीट ~4.95 लाख आबादी अगर 605 सीटें होती हैं तो: प्रति सीट आबादी घटकर करीब 3.30 लाख रह जाएगी जिलों में क्या होगा बदलाव? अभी 75 जिलों में औसतन 3-5 विधानसभा सीटें हैं बढ़ोतरी के बाद यह संख्या 6-8 सीट प्रति जिला हो सकती है बड़े और छोटे विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़े क्षेत्र: साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर (7-12 लाख मतदाता) छोटे क्षेत्र: महोबा, सीसामऊ

surbhi मार्च 25, 2026 0
DMK alliance leaders finalize Tamil Nadu election seat sharing ahead of April 23 assembly polls
Tamil Nadu Election: डीएमके का सीट बंटवारा लगभग पूरा, आज VCK के साथ होगा फाइनल समझौता

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। अब सिर्फ VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची) के साथ समझौता बाकी है, जिसे आज फाइनल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन और बिजली मंत्री एस.एस. शिवशंकर ने बताया कि DMK और VCK के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। किसे कितनी सीटें मिलीं? DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है- कांग्रेस: 28 सीटें भाकपा (CPI): 5 सीटें माकपा (CPM): 5 सीटें एमडीएमके: 4 सीटें IUML, MMK, KMDK: 2-2 सीटें कई दौर की बातचीत के बाद वाम दलों के साथ भी सहमति बन गई है। 23 अप्रैल को होंगे चुनाव तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। DMK ने शुरू किया प्रचार अभियान DMK ने पहले ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है और गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। क्या है राजनीतिक मायने? सीट बंटवारे का लगभग पूरा होना यह संकेत देता है कि DMK गठबंधन चुनाव से पहले एकजुट दिखना चाहता है। VCK के साथ समझौता होते ही गठबंधन पूरी तरह तैयार हो जाएगा।    

surbhi मार्च 24, 2026 0
Asaduddin Owaisi and Humayun Kabir announcing alliance for West Bengal elections 2026 at public event
बंगाल चुनाव 2026: हुमायूं कबीर और ओवैसी का गठबंधन, तीसरे मोर्चे की राजनीति को नई दिशा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण उभरता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ हाथ मिलाकर आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बड़ा राजनीतिक गठबंधन किया है। यह गठबंधन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ तीसरा विकल्प खड़ा करना है। हैदराबाद से गठबंधन का ऐलान इस राजनीतिक गठबंधन की घोषणा हैदराबाद में एक सभा के दौरान ओवैसी ने की। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन बंगाल में गरीबों, वंचितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। ओवैसी ने इसे “अन्याय और अभाव के खिलाफ संयुक्त लड़ाई” बताया। लंबे समय से सहयोगी की तलाश हुमायूं कबीर ने पिछले वर्ष 22 दिसंबर को अपनी पार्टी का गठन किया था और तब से ही वे एक मजबूत सहयोगी की तलाश में थे। उन्होंने वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों से भी संपर्क साधा, लेकिन बात नहीं बन पाई। आखिरकार AIMIM के साथ यह गठबंधन आकार ले पाया। सीट शेयरिंग पर नजर गठबंधन के बाद अब सबसे अहम सवाल सीट बंटवारे को लेकर है। हुमायूं कबीर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि लगभग 150 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि AIMIM और आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच सीटों को लेकर बातचीत जारी है और जल्द ही अंतिम फार्मूला सामने आ सकता है। किन क्षेत्रों पर खास फोकस AIMIM ने पिछले कुछ वर्षों में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में यह गठबंधन इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकता है। क्या बदलेगा चुनावी गणित? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन बंगाल में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणामों में ही स्पष्ट होगा।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0