Blinkit एजेंट के साथ विवाद पर 10 दिन बाद सामने आईं एक्ट्रेस फिल्म Uri: The Surgical Strike में नजर आ चुकीं Riva Arora ने एक डिलीवरी एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्ट्रेस ने दावा किया कि Blinkit के एक डिलीवरी एजेंट ने उनके और उनके परिवार के साथ बदसलूकी की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। यह घटना 26 अप्रैल की बताई जा रही है, लेकिन अब जाकर उन्होंने इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। घर के बाहर शुरू हुआ विवाद रीवा अरोड़ा के मुताबिक, घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की है, जब Blinkit का डिलीवरी एजेंट उनके घर ऑर्डर लेकर पहुंचा। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही एजेंट का व्यवहार रूखा और अनुचित था। एक्ट्रेस ने कहा कि जब उन्होंने एजेंट के रवैये पर प्रतिक्रिया दी तो मामला शांत होने के बजाय और बिगड़ गया। उनकी मां निशा अरोड़ा ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि एजेंट लगातार बदतमीजी करता रहा। लिफ्ट में भी जारी रही अभद्रता रीवा ने बताया कि जब उनकी बहन की मुलाकात एजेंट से लिफ्ट में हुई, तब भी वह आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता रहा। परिवार ने कई बार उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं। एक्ट्रेस के अनुसार, “यह सिर्फ एक बार की टिप्पणी नहीं थी। वह लगातार हमारे लिए अपमानजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था।” मामला बढ़ने पर पुलिस को बुलाया गया रीवा अरोड़ा ने कहा कि बहस पहले घर के दरवाजे पर शुरू हुई और बाद में नीचे तक पहुंच गई। जब एजेंट वहां से जाने की कोशिश करने लगा, तब परिवार ने उसे रोक लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि Mumbai Police मौके पर जल्दी पहुंची और तुरंत कार्रवाई की। फिलहाल मामला संबंधित अधिकारियों के जरिए देखा जा रहा है। Blinkit से भी की गई शिकायत एक्ट्रेस ने यह भी पुष्टि की कि इस मामले में Blinkit के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्तर पर जवाबदेही तय होना भी जरूरी है और वे अब कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही हैं। कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं रीवा अरोड़ा Riva Arora ने कम उम्र में ही कई बड़ी फिल्मों में काम किया है। वह Bharat और Gunjan Saxena: The Kargil Girl जैसी फिल्मों में भी दिखाई दे चुकी हैं।
साउथ सुपरस्टार Allu Arjun और निर्देशक Atlee की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Raaka’ को लेकर चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। अभिनेत्री Deepika Padukone की दूसरी प्रेग्नेंसी की खबर सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि फिल्म में उनका रोल छोटा कर दिया जाएगा या उन्हें रिप्लेस किया जा सकता है। अब फिल्म के निर्माताओं ने इन सभी अफवाहों को खारिज कर दिया है। मेकर्स ने दी सफाई फिल्म से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ‘Raaka’ की शूटिंग तय योजना के अनुसार जारी है और दीपिका पादुकोण इस प्रोजेक्ट में एक बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। टीम के अनुसार, सेट पर काम पूरी ऊर्जा के साथ चल रहा है और किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी जारी शूटिंग दीपिका पादुकोण ने हाल ही में अपने पति Ranveer Singh के साथ दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा की, जिससे उनके फैंस काफी खुश हैं। इसके बावजूद, वह ‘Raaka’ की शूटिंग जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेत्री फिल्म में एक्शन सीक्वेंस भी शूट कर रही हैं, हालांकि सभी जरूरी सावधानियों के साथ। पहले भी प्रेग्नेंसी में किया काम यह पहली बार नहीं है जब दीपिका प्रेग्नेंसी के दौरान काम कर रही हैं। इससे पहले, 2024 में अपनी पहली प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने फिल्म Kalki 2898 AD की शूटिंग की थी और प्रमोशनल इवेंट्स में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। ‘Raaka’ में दूसरी बार Atlee के साथ सहयोग ‘Raaka’ में दीपिका और Atlee की यह दूसरी साझेदारी है। फिल्म का अनाउंसमेंट वीडियो पहले ही रिलीज हो चुका है, जिसमें दीपिका के दमदार एक्शन अवतार की झलक देखने को मिली थी। वहीं, हाल ही में अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फिल्म से उनका फर्स्ट लुक भी सामने आया, जिसमें उनका फियरस अंदाज नजर आया। इसके अलावा, दीपिका जल्द ही Shah Rukh Khan की फिल्म ‘King’ के कुछ हिस्सों की शूटिंग भी पूरी करेंगी।
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Allu Arjun इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘राका’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इसी बीच उनके मुंबई शिफ्ट होने की खबरों ने भी जोर पकड़ लिया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अभिनेता ने मुंबई के पॉश जुहू इलाके में समुद्र के सामने एक लग्जरी अपार्टमेंट किराए पर लिया है, जिसका मासिक किराया करीब 16 लाख रुपये है। हालांकि, इन अटकलों पर अब उनके पिता Allu Aravind ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। मुंबई शिफ्ट की खबरों पर क्या बोले पिता? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल्लू अर्जुन ने जुहू तारा रोड पर लगभग 6,000 वर्ग फुट में फैला एक आलीशान 5BHK अपार्टमेंट किराए पर लिया है। बताया गया कि इस प्रॉपर्टी में स्विमिंग पूल, चार कार पार्किंग जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं और इसके लिए तीन साल का लीज एग्रीमेंट साइन किया गया है। लेकिन इन खबरों को खारिज करते हुए उनके पिता अल्लू अरविंद ने कहा कि अभिनेता का स्थायी ठिकाना Hyderabad ही है। उन्होंने साफ कहा कि फिल्म की शूटिंग के चलते मुंबई में अस्थायी रूप से रहना पड़ सकता है, लेकिन उनका घर और परिवार हैदराबाद में ही है। बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जुड़ाव को देखते हुए मुंबई शिफ्ट होने का सवाल ही नहीं उठता। जुहू में होंगे इन सितारों के पड़ोसी जिस इलाके में अपार्टमेंट लेने की बात कही जा रही है, वहां कई बड़े सितारे रहते हैं। इसमें Katrina Kaif-Vicky Kaushal और Anushka Sharma-Virat Kohli जैसे नाम शामिल हैं। ऐसे में अगर अल्लू अर्जुन यहां रहते हैं, तो वे बॉलीवुड के कई बड़े चेहरों के पड़ोसी बन सकते हैं। परिवार के लिए लिया गया था अपार्टमेंट? रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अल्लू अर्जुन चाहते थे कि उनकी पत्नी Sneha Reddy और बच्चे–अल्लू अयान और अल्लू अरहा–स्कूल की छुट्टियों में उनके साथ समय बिता सकें। इसी वजह से उन्होंने समुद्र के सामने वाली प्रॉपर्टी को चुना। हैदराबाद में बन रहा है नया आलीशान घर जहां एक तरफ मुंबई शिफ्ट होने की चर्चा है, वहीं दूसरी तरफ अभिनेता Hyderabad के जुबली हिल्स इलाके में अपने नए लग्जरी घर में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस घर में जल्द ही भव्य गृह प्रवेश समारोह आयोजित किया जाएगा। वर्कफ्रंट: ‘राका’ और बड़े प्रोजेक्ट्स की तैयारी अल्लू अर्जुन की अगली फिल्म ‘राका’ निर्देशक Atlee के साथ है, जिसमें उनके साथ Deepika Padukone नजर आएंगी। इसके अलावा वह निर्देशक Lokesh Kanagaraj के साथ भी एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने वाले हैं।
बॉलीवुड अभिनेता Rajkummar Rao इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में पिता बने एक्टर ने अपनी नन्हीं बेटी को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। जहां आमतौर पर बच्चे के जन्म को परिवार की “किस्मत बदलने वाला” माना जाता है, वहीं राजकुमार राव ने इस सोच से अलग हटकर एक बेहद संवेदनशील और सोचने पर मजबूर करने वाला नजरिया पेश किया। ‘बेटी प्यार लाई है, किस्मत नहीं बदलती’ आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में Rajkummar Rao ने साफ कहा कि उनकी बेटी उनके जीवन में ढेर सारा प्यार लेकर आई है, लेकिन वह उसे अपनी सफलता का कारण नहीं मानते। उन्होंने कहा कि जिंदगी में सफलता मेहनत, समय और किस्मत का मिश्रण होती है–इसे किसी एक व्यक्ति, खासकर एक छोटे बच्चे से जोड़ना सही नहीं है। बेटी पर नहीं डालना चाहते किसी तरह का दबाव राजकुमार राव ने अपनी सोच को और स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपनी बेटी पर किसी भी तरह की उम्मीद या “लकी चार्म” का टैग नहीं डालना चाहते। उनका मानना है कि हर बच्चे का अपना अलग व्यक्तित्व और जीवन होता है, जिसे उसे बिना किसी दबाव के जीने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बच्चों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उन्हें परिवार के लिए कुछ खास साबित करना है। उन्हें अपनी पहचान खुद बनाने का मौका मिलना चाहिए।” खुशी का दिन, लेकिन ‘सिर्फ इत्तेफाक’ इस बातचीत में Rajkummar Rao ने उस खास दिन का भी जिक्र किया जब उनकी बेटी का जन्म हुआ। उसी दिन उनकी पत्नी Patralekha को फिल्म ‘फुले’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था। हालांकि, इस डबल खुशी को भी उन्होंने “सिर्फ एक प्यारा इत्तेफाक” बताया और साफ किया कि सफलता का असली श्रेय मेहनत और लगन को ही जाता है, न कि किसी संयोग को।
बॉलीवुड में इन दिनों सीक्वल का ट्रेंड जोरों पर है, और इसी बीच शाहिद कपूर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहिद अपनी हिट साई-फाई रोमांटिक फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ के सीक्वल की तैयारी में हैं-और इस बार कहानी में नया ट्विस्ट देखने को मिल सकता है। सीक्वल पर शुरू हुआ काम खबरों के अनुसार, फिल्म के दूसरे पार्ट की स्क्रिप्ट पर तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद है कि स्क्रिप्ट अगस्त 2026 तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद फिल्म की शूटिंग 2027 की शुरुआत में शुरू हो सकती है। पहले पार्ट को दर्शकों ने इसके यूनिक कॉन्सेप्ट-रोमांस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मेल-के लिए काफी पसंद किया था। स्टारकास्ट में बड़ा बदलाव! रिपोर्ट्स की मानें तो: शाहिद कपूर और कृति सेनन एक बार फिर लीड रोल में नजर आएंगे वहीं इस बार फिल्म में जाह्नवी कपूर की एंट्री हो सकती है अगर यह कास्ट फाइनल होती है, तो शाहिद और जाह्नवी पहली बार स्क्रीन शेयर करेंगे, जो फैंस के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। कहानी में क्या होगा खास? सूत्रों के मुताबिक, सीक्वल की कहानी वहीं से आगे बढ़ेगी जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। इस बार टेक्नोलॉजी और रिश्तों के बीच का टकराव और गहराई से दिखाया जा सकता है। बाकी प्रोजेक्ट्स में भी बिजी हैं शाहिद शाहिद कपूर के पास इस वक्त कई बड़े प्रोजेक्ट्स लाइनअप हैं: कॉकटेल 2 – रश्मिका मंदाना और कृति सेनन के साथ (जून 2026 रिलीज) फर्जी सीजन 2 ओ रोमियो रिपोर्ट्स ये भी कहती हैं कि इस सीक्वल का भविष्य काफी हद तक ‘कॉकटेल 2’ की सफलता पर निर्भर करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।