बॉलीवुड अभिनेता Rajkummar Rao इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में पिता बने एक्टर ने अपनी नन्हीं बेटी को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। जहां आमतौर पर बच्चे के जन्म को परिवार की “किस्मत बदलने वाला” माना जाता है, वहीं राजकुमार राव ने इस सोच से अलग हटकर एक बेहद संवेदनशील और सोचने पर मजबूर करने वाला नजरिया पेश किया।
आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में Rajkummar Rao ने साफ कहा कि उनकी बेटी उनके जीवन में ढेर सारा प्यार लेकर आई है, लेकिन वह उसे अपनी सफलता का कारण नहीं मानते।
उन्होंने कहा कि जिंदगी में सफलता मेहनत, समय और किस्मत का मिश्रण होती है–इसे किसी एक व्यक्ति, खासकर एक छोटे बच्चे से जोड़ना सही नहीं है।
राजकुमार राव ने अपनी सोच को और स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपनी बेटी पर किसी भी तरह की उम्मीद या “लकी चार्म” का टैग नहीं डालना चाहते।
उनका मानना है कि हर बच्चे का अपना अलग व्यक्तित्व और जीवन होता है, जिसे उसे बिना किसी दबाव के जीने की आजादी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “बच्चों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उन्हें परिवार के लिए कुछ खास साबित करना है। उन्हें अपनी पहचान खुद बनाने का मौका मिलना चाहिए।”
इस बातचीत में Rajkummar Rao ने उस खास दिन का भी जिक्र किया जब उनकी बेटी का जन्म हुआ। उसी दिन उनकी पत्नी Patralekha को फिल्म ‘फुले’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था।
हालांकि, इस डबल खुशी को भी उन्होंने “सिर्फ एक प्यारा इत्तेफाक” बताया और साफ किया कि सफलता का असली श्रेय मेहनत और लगन को ही जाता है, न कि किसी संयोग को।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
23 अप्रैल 2026 | एंटरटेनमेंट डेस्क हॉरर-कॉमेडी फिल्मों के ट्रेंड के बीच भूत बंगला लगातार चर्चा में बनी हुई है। अक्षय कुमार की इस फिल्म ने भले ही वीकडेज में कमाई की रफ्तार थोड़ी धीमी की हो, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। छठे दिन की कमाई में गिरावट, लेकिन कुल कलेक्शन दमदार 17 अप्रैल को रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शकों से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला। इसके बावजूद फिल्म लगातार कमाई कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज के छठे दिन फिल्म ने लगभग 6.15 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। हालांकि यह आंकड़ा शुरुआती दिनों के मुकाबले कम है, लेकिन कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन अब 78.90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। फिल्म इंडस्ट्री में यह माना जाता है कि वीकडेज में कलेक्शन का गिरना सामान्य है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म का इस स्तर पर टिके रहना इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। 2026 की टॉप फिल्मों में बनाई जगह गिरावट के बावजूद ‘भूत बंगला’ ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। यह फिल्म अब साल 2026 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इससे आगे केवल धुरंधर 2 और बॉर्डर 2 जैसी बड़ी फिल्में हैं। यह उपलब्धि बताती है कि फिल्म ने अपने कंटेंट और स्टार पावर के दम पर दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है। तुलना और विवाद भी चर्चा में फिल्म की तुलना अन्य हॉरर-कॉमेडी फिल्मों से की जा रही है, खासकर भूल भुलैया 3 से। इस मुकाबले में ‘भूत बंगला’ थोड़ी पीछे नजर आती है। इसी बीच, फिल्म की एक्ट्रेस वामिका गब्बी की तुलना ऐश्वर्या राय बच्चन से किए जाने पर अक्षय कुमार ने खुलकर उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वामिका की अपनी अलग पहचान है और उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह खुद बनाई है। आगे क्या रहेगा ट्रेंड? फिल्म के कलेक्शन में गिरावट जरूर आई है, लेकिन ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि वीकेंड पर इसमें फिर उछाल देखने को मिल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो ‘भूत बंगला’ जल्द ही 100 करोड़ क्लब की ओर बढ़ सकती है।
हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइज़ी में से एक हेरा फेरी 3 को लेकर दर्शकों का इंतजार फिलहाल और लंबा होने वाला है। अभिनेता-निर्माता अक्षय कुमार ने साफ कर दिया है कि फिल्म पर काम अभी शुरू नहीं हो पाएगा और इसे बनने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है। अक्षय कुमार ने तोड़ी चुप्पी हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘हेरा फेरी 3’ फिलहाल नहीं बन रही है। अक्षय ने बताया कि फिल्म से जुड़े कई मुद्दे अब भी सुलझे नहीं हैं, जिसकी वजह से प्रोजेक्ट लगातार पीछे खिसक रहा है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि “शायद कुछ मंत्र पढ़ने पड़ेंगे ताकि सब ठीक हो जाए”, लेकिन मौजूदा स्थिति में फिल्म अगले एक साल तक शुरू होने की संभावना नहीं है। फैंस के साथ-साथ खुद अक्षय भी हैरान इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के टलने से जहां फैंस निराश हैं, वहीं अक्षय कुमार ने भी माना कि वह खुद इस स्थिति से हैरान हैं। उन्होंने कहा कि जब सही समय आएगा, तब फिल्म जरूर बनेगी, लेकिन उम्मीद है कि इसमें इतना समय न लग जाए कि कलाकार उम्रदराज हो जाएं। क्या स्टारकास्ट है देरी की वजह? काफी समय से यह चर्चा थी कि फिल्म में परेश रावल और सुनील शेट्टी के साथ तालमेल की समस्या इसकी देरी का कारण है। हालांकि अक्षय कुमार ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि तीनों कलाकार हाल ही में वेलकम टू द जंगल में साथ काम कर चुके हैं, जिससे साफ है कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है। क्यों खास है ‘हेरा फेरी’ फ्रेंचाइज़ी? हेरा फेरी और हेरा फेरी 2 ने भारतीय दर्शकों को खूब हंसाया और एक कल्ट स्टेटस हासिल किया। बाबूराव, राजू और श्याम की तिकड़ी आज भी दर्शकों की पसंदीदा है, यही वजह है कि तीसरे पार्ट को लेकर उम्मीदें बेहद ऊंची हैं। फिलहाल, ‘हेरा फेरी 3’ के फैंस को थोड़ा और इंतजार करना होगा, क्योंकि फिल्म की राह में अभी कई बाधाएं हैं जिन्हें पार करना बाकी है।
मुंबई, एजेंसियां। परशुराम जयंती के खास मौके पर होम्बले फिल्म्स ने अपनी चर्चित फ्रेंचाइजी 'महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स' की दूसरी फिल्म का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस नई फिल्म का नाम Mahavatar Parshuram रखा गया है, जिसकी रिलीज डेट दिसंबर 2027 तय की गई है। टाइटल पोस्टर ने बढ़ाया उत्साह मेकर्स ने फिल्म का टाइटल रिवील पोस्टर और मोशन पोस्टर जारी किया, जिसने दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। पोस्टर में एक शक्तिशाली योद्धा खून से सने परशु (फरसा) के साथ युद्धभूमि में खड़ा नजर आता है, जो फिल्म के भव्य और एक्शन से भरपूर होने का संकेत देता है। टैगलाइन—“जब धर्म का पतन होता है, तो परशु का उदय होता है” कहानी के गहरे पौराणिक आधार को दर्शाती है। पौराणिक गाथा का विस्तार फिल्म भगवान परशुराम की कथा पर आधारित होगी, जिन्हें अधर्म के विनाशक और संतुलन स्थापित करने वाली शक्ति के रूप में जाना जाता है। मोशन पोस्टर में भी इसी भाव को दर्शाया गया है, जहां युद्ध और विनाश के बीच एक दिव्य अवतार के उदय की झलक मिलती है। फ्रेंचाइजी का लंबा प्लान महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स की शुरुआत महावतार नरसिंह से हुई थी। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 2037 तक चलेगा, जिसमें कई पौराणिक किरदारों पर फिल्में बनाई जाएंगी, जैसे रघुनंदन, गोकुलानंद और कल्कि। निर्देशन और रिलीज प्लान फिल्म का निर्देशन आश्विन कुमार कर रहे हैं, जबकि निर्माण विजय किरागंदुर के नेतृत्व में हो रहा है। यह फिल्म हिंदी समेत कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मलयालम भाषाओं में रिलीज होगी, जिससे इसे पूरे भारत में बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।