1786 – बंगाल के पहले गवर्नर जनरल वॉरेन हैस्टिंग्स के खिलाफ भ्रष्टाचार के नये मामले शुरू हुए। 1788 – मैरी लैंड अमेरिकी संविघान की पुस्टि करने वाला सातवां राज्य बना। 1829 – यूरोपीय देश नीदरलैंड की संसद ने नये प्रेस कानून पारित किये। 1847 – जार्ज बी. वेशन अमेरिका के न्यूयाॅर्क न्यायालय में जाने वाले पहले अश्वेत नागरिक बने। 1901 – बेल्जियम और नीदरलैंड के बीच पहला फुटबाल मैच खेला गया जिसमें बेल्जियम ने 8-0 से बाजी मारी। 1910 – इंग्लैंड में क्लोड ग्राहम व्हाइट नाम के पायलट ने पहली बार रात में विमान उड़ाया। 1914 – अमेरिका में वेस्ट वर्जीनिया के एस्सेल्स इलाके में एक कोयला खदान हादसे में 181 लोगों की मौत हुई। 1916 – बीजी तिलक ने भारतीय गृह नियम लीग की स्थापना की। 1932 – इंसानो के लिए पीत ज्वर का टीका विकसित करने की घोषणा की गई। 1935 – रूस की राजधानी मॉस्को में भूमिगत मेट्रो ट्रेन की शुरुआत हुई। 1945 – इटली के तानाशाह बेनितो मुसोलिनी, उनकी प्रेमिका क्लारा पेटाची और उसके सहयोगियों की हत्या हुई। 1952 - भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना हुई। 1956 – फ्रांस के आखिरी सैनिक ने वियतनाम छोड़ स्वदेश वापसी की। 1964 – जापान आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) में शामिल हुआ। 1969 – फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति चार्ल्स डी. गॉल ने अपने पद से इस्तीफा दिया। 1986 – सोवियत संघ ने हादसे के दो बाद स्वीकारा कि 25 अप्रैल को यूक्रेन के चेरनोबिल में परमाणु रिसाव हुआ। 1995 – दक्षिण काेरिया में मेट्रो में गैस विस्फोट होने से 103 लाेगों की मौत हुई। 1995 – श्रीलंकाई विमान बीएई-748 के पलाली कस्बे में दुर्घटनाग्रस्त होने से 52 लोगों की मौत हुई। 1999 - अमेरिकी वैज्ञानिक डाक्टर रिचर्ड सीड द्वारा एक वर्ष के अंदर मानव क्लोन बनाने की घोषणा । 1999 - विश्वभर में हज़ारों कम्प्यूटरों को चेर्नोबिल वायरस ने ठप्प किया। 2001 – अमेरिकी बिजनेसमैन डेनिस एंथनी पहले अंतरिक्ष पर्यटक बने। 2001 - पहला अंतरिक्ष सैलानी टेनिस टीटो अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना। 2002 - बुकर पुरस्कार का नया नाम 'मैन बुकर प्राइज फ़ॉर फ़िक्शन' रखा गया, पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ के जनमत संग्रह को वैध करार दिया। 2003 – दुनिया भर में कर्मचारी सुरक्षा और स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। इसी दिन काम के दौरान मारे गए मजदूरों को भी याद किया जाता है। 2004 - थाबोम्बेकी ने दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। 2004 - थाइलैंड में पुलिस चौकी पर हमले में 122 लोगों की मृत्यु। 2007 – श्रीलंका का हराकर आॅस्ट्रेलिया चौथी बार विश्व चैंपियन बना। 2008 - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरों) ने पीएसएलवी-सी9 के साथ 10 सैटेलाइट एक साथ छोड़कर एक नया इतिहास रचा। 2008 - मलेशिया में भारतीय मूल के दस सांसदों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। 2008 - पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो को मरणोपरान्त प्रतिष्ठित टिपरी इंटरनेशनल पुरस्कार प्रदान किया गया। 2019 - चीन-पाकआर्थिक कॉरिडोर के तहत दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हुए हस्ताक्षर। 2019 - इंडोनेशिया में जबरदस्त बाढ़ से 10 की मौत , हजारों लोग बेघर हुए। 2019 - पेइचिंग में भारत निशानेबाजी विश्व कप में तीन स्वर्ण और एक रजत जीत कर पदक तालिका में शीर्ष स्थान पर। 2019 - करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के करीब खुदाई में मिला 500 साल पुराना कुआं। 2019 - 17 वर्षीय भारतीय छात्रा ने मिसाल कायम की ,प्रवेश के लिए सात अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चयनित। 2019 - हिसार की रहने वाली 16 वर्ष की शिवांगी पाठक ने सबसे कम उम्र में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया । 2020 - केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए "पीटरबर्ग क्लाइमेट डायलॉग" के 11वें सत्र में भाग लिया। 2020 - एशियाई विकास बैंक ने कोविड-19 महामारी से लड़ाई में मदद के लिए भारत को डेढ़ अरब डॉलर के ऋण की मंजूरी दी। 2021 - बंगलादेश में ढाका और कई हिस्सों में सुबह 08: 21पर आए भूकंप की रियक्टर पैमाने पर तीव्रता 6 अंक थी। 2021 - सिंगापुर सरकार ने भारत की कोविड महामारी को दौरान मदद के लिए 256 ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे। 2022 - अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत में हुए दो अलग - अलग विस्फोटों में करीब 9 लोगों की मौत व करीब 13 अन्य घायल हुए। 2022 - प्रधानमंत्री ने उद्योगपति रतन टाटा के साथ असम के लिए 7 नए कैंसर अस्पतालों की आधारशिला रखी व 6 कैंसर अस्पतालों का उद्घाटन किया। 2022 - भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने किशनगढ़ हवाई अड्डे पर गगन आधारित एलपीवी दृष्टिकोण प्रक्रिया का उपयोग करके सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया। 2023 - PM मोदी ने देश को 91 FM ट्रांसमीटर्स की सौगात दी। 2023 - युद्धग्रस्त सूडान से 754 और भारतीय स्वदेश लौटे। 2023 - रूस ने यूक्रेन के कई शहरों में मिसाइल हमले किए जिनमें 25 लोगों की मौत हुई व 17 घायल हुए। 2023 - विश्व बैंक ने बांग्लादेश में तीन नई परियोजनाओँ के लिए एक अरब 25 लाख डॉलर का कर्ज मंजूर किया। 2024 - ओक्लाहोमा में कम से कम 37 रात्रिकालीन बवंडरों के कारण व्यापक तबाही व चार लोगों की मौत हुई। 28 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति 1791 - हरि सिंह नलवा - महाराजा रणजीत सिंह के सेनाध्यक्ष (कन्फर्म नहीं)। 1897 - ये जियानयिंग - चीन में सेना प्रमुख के अध्यक्ष थे। 1924 - केनेथ कौंडा - ज़ाम्बिया के पहले राष्ट्रपति थे। 1929 - भानु अथैया - भारतीय फ़िल्मों की प्रसिद्ध ड्रेस डिज़ाइनर। 1940 - समीर रंजन बर्मन - त्रिपुरा के भूतपूर्व सातवें मुख्यमंत्री थे। 1971 – हिंदी फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक निखिल आडवाणी का जन्म हुआ। 1981 - अनुप्रिया पटेल भारत की सोलहवीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर सीट से सांसद व सबसे युवा मंत्री। 28 अप्रॅल को हुए निधन 1719 - फ़र्रुख़ सियर - एक मुग़ल बादशाह था (कन्फर्म नहीं)। 1740 - बाजीराव प्रथम, मराठा साम्राज्य का महान् सेनानायक था। 1740 - मस्तानी - बाजीराव प्रथम की दूसरी पत्नी थी (कन्फर्म नहीं)। 1955 - थ्रिस्सुर वेंगाराम सुन्दरम अयंगर - भारतीय उद्योगपति और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अग्रणी उद्यमी थे। 1992 - विनायक कृष्ण गोकाक - 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित कन्नड़ भाषा के प्रमुख साहित्यकारों में से एक। 2020 - लिवरपूल के पूर्व खिलाड़ी माइकल रॉबिन्सन का निधन। 2021 - अंतरिक्ष यात्री माइकल कॉलिन्स (90) का निधन हुआ। 2022 - बॉलीवुड, दक्षिण भारतीय और अंग्रेजी फिल्म अभिनेता सलीम गौस (70) का निधन हुआ। 2023 - प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एन. गोपालाकृष्णन (68) का निधन हुआ। 2023 - ब्रिटिश आधुनिक पेंटाथलीट और ओलंपिक चैंपियन जेरेमी रॉबर्ट " जिम " फॉक्स ओबीई (81) का निधन हुआ। 2023 - न्यूजीलैंड नेटबॉल कोच और प्रशासक ताइनी मारेमारे जैमिसन ओबीई (95) का निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी युद्ध अपराधी विलियम कैली जूनियर (80) का निधन हुआ। 28 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री दामोदर देवता तिथि (आसाम , पंचांगभेद)। वज्रेश्वरी पालकी। गुरु श्री अंगददेव जयन्ती (प्राचीनमतानुसार)। श्री कुन्थुनाथ जी जन्म - तप - मोक्ष (जैन , बैशाख शुक्ल प्रतिपदा)। श्री समीर रंजन बर्मन जन्म दिवस। श्री विनायक कृष्ण गोकाक स्मृति दिवस। विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस { World Day for Safety and Health at Work (UN , ILO)}. कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।