Fashion Trends 2026

Modern Bandhani outfits showcasing traditional tie-dye craftsmanship in contemporary everyday fashion
Bandhani अब सिर्फ शादियों तक सीमित नहीं, रोजमर्रा के फैशन का बन रही हिस्सा

भारतीय पारंपरिक वस्त्र कला बंधनी (Bandhani), जो कभी केवल शादियों, त्योहारों और खास धार्मिक अवसरों तक सीमित मानी जाती थी, अब आधुनिक फैशन की दुनिया में नई पहचान बना रही है। राजस्थान और गुजरात की सदियों पुरानी यह टाई-एंड-डाई कला अब युवाओं की रोजमर्रा की वॉर्डरोब में जगह बना रही है। डिजाइनर्स इसे नए अंदाज में पेश कर रहे हैं, जिससे बंधनी का दायरा पारंपरिक साड़ियों और घाघरों से निकलकर शर्ट, को-ऑर्ड सेट, ड्रेसेस, काफ्तान और जैकेट्स तक पहुंच गया है। परंपरा से जुड़ी है गहरी सांस्कृतिक पहचान बंधनी केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। खासतौर पर गुजरात और राजस्थान में इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व है। लाल रंग की बंधनी दुल्हनों के लिए शुभ मानी जाती है, जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। वहीं पीले रंग की बंधनी नए जीवन और शुभ शुरुआत से जुड़ी होती है। गुजराती दुल्हनों के पारंपरिक परिधान घरचोला में बंधनी की विशेष भूमिका आज भी बरकरार है। डिजाइनर्स ने बदला बंधनी का रूप पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय डिजाइनर्स और फैशन लेबल्स ने बंधनी को आधुनिक फैशन से जोड़ने का काम किया है। स्पोर्ट्सवियर से लेकर कैजुअल वियर तक, बंधनी को नए सिल्हूट्स में पेश किया जा रहा है। फैशन ब्रांड्स जैसे NorBlack NorWhite ने इसे एक्टिववियर तक पहुंचाया, जबकि Abraham & Thakore ने अपनी मिनिमलिस्ट डिजाइन भाषा के जरिए बंधनी को डेली वियर का हिस्सा बनाया। वहीं Péro, Dyelogue और 11.11 जैसे लेबल्स इसे समकालीन फैशन में नए प्रयोगों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। नई पीढ़ी को क्यों पसंद आ रही है बंधनी? Dyelogue की संस्थापक रचिता पारेख के अनुसार, बंधनी को हमेशा केवल अवसर विशेष के कपड़े के रूप में देखा जाता था। लेकिन उन्होंने इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आसान और आरामदायक रूप में डिजाइन किया। काफ्तान, शर्ट और हल्के सिल्हूट्स ने युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाई। इसके अलावा बंधनी के कई परिधान ऐसे होते हैं जिन्हें बार-बार इस्त्री करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे वे यात्रा और नियमित उपयोग के लिए भी सुविधाजनक बन जाते हैं। आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन 11.11 के सह-संस्थापक शनि हिमांशु का मानना है कि बंधनी को आधुनिक बनाने का मतलब उसकी तकनीक बदलना नहीं, बल्कि उसके उपयोग का संदर्भ बदलना है। उनके अनुसार, बंधनी की असली पहचान उन कारीगरों के हाथों में है जो पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं। यदि उसी तकनीक को आधुनिक परिधानों पर लागू किया जाए तो यह नई पीढ़ी तक पहुंच सकती है, बिना अपनी आत्मा खोए। सबसे बड़ी चुनौती: असली बंधनी को बचाए रखना विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग के साथ बाजार में प्रिंटेड बंधनी की संख्या भी बढ़ी है, जो असली हस्तनिर्मित बंधनी का विकल्प बनकर सामने आ रही है। लेकिन असली बंधनी हजारों छोटे-छोटे हाथ से बांधे गए गांठों की मेहनत का परिणाम होती है। यही कारण है कि उच्च गुणवत्ता वाली बंधनी आज भी महंगी और दुर्लभ होती जा रही है। कारीगरों की संख्या घटने और श्रम लागत बढ़ने के कारण इस कला को संरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि शर्ट, टॉप और को-ऑर्ड सेट जैसे उत्पादों ने इसे अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। बंधनी का बदलता भविष्य आज बंधनी केवल शादियों और त्योहारों की पहचान नहीं रह गई है। यह ऑफिस मीटिंग, दोस्तों के साथ आउटिंग, छुट्टियों और कैजुअल फैशन का भी हिस्सा बन रही है। डिजाइनर्स का मानना है कि परंपरा और प्रयोग दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते कारीगरों और शिल्प की मूल भावना को केंद्र में रखा जाए। एक समय जो वस्त्र केवल खास मौकों का इंतजार करता था, वह अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है।  

surbhi जून 4, 2026 0
Janhvi Kapoor stuns in a hand-painted blue chiffon saree by Manish Malhotra
Manish Malhotra की हैंड-पेंटेड शिफॉन साड़ी में दिखा एलिगेंस और मॉडर्न ड्रेपिंग का परफेक्ट मेल

बॉलीवुड अभिनेत्री Janhvi Kapoor ने अपनी आगामी स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म Peddi के प्रमोशन्स की शुरुआत बेहद खूबसूरत और एलिगेंट अंदाज में की। इस दौरान उन्होंने मशहूर डिजाइनर Manish Malhotra की डिजाइन की हुई पेरिविंकल ब्लू रंग की साड़ी पहनी, जिसने फैशन लवर्स के बीच तुरंत चर्चा बटोर ली। फ्रेंच शिफॉन फैब्रिक ने दिया फ्लोई और ड्रीमी लुक यह साड़ी हल्के फ्रेंच शिफॉन फैब्रिक से तैयार की गई थी, जो अपने फ्लोई और सॉफ्ट टेक्सचर के लिए जानी जाती है। साड़ी की सबसे खास बात इसका हैंड-पेंटेड डिजाइन था, जिसमें ब्लू के अलग-अलग टोन इस्तेमाल किए गए थे। इन शेड्स ने साड़ी को मार्बल-इंस्पायर्ड फिनिश दी, जो इसे बेहद यूनिक और मॉडर्न बना रही थी। जहां आजकल भारी एम्ब्रॉयडरी और स्टोनवर्क ट्रेंड में हैं, वहीं जाह्नवी की इस साड़ी ने बिना किसी भारी सजावट के केवल रंग और फैब्रिक के दम पर अपना प्रभाव छोड़ा। फ्रिंज डिटेलिंग ने बढ़ाया मॉडर्न टच साड़ी के पल्लू पर फ्रिंज डिटेलिंग दी गई थी, जिसने पूरे लुक को समकालीन और स्टाइलिश टच दिया। इसके साथ उन्होंने मैचिंग दुपट्टा भी कैरी किया, जिसमें भी फ्रिंज बॉर्डर थी। मनिष मल्होत्रा ने शिफॉन को अपना पसंदीदा फैब्रिक बताते हुए कहा कि यह भारतीय सिनेमा और फैशन का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि साल 2026 “द ड्रेप” का साल है और दुनिया भर में भारतीय दुपट्टा और ड्रेपिंग स्टाइल से प्रेरणा ली जा रही है। ब्लू जेमस्टोन ज्वेलरी ने किया लुक को कंप्लीट जाह्नवी कपूर ने अपने लुक को ब्लू टोन जेमस्टोन ज्वेलरी के साथ कंप्लीट किया। उन्होंने डायमंड और टैंज़नाइट स्टड ईयररिंग्स और रिंग पहनी, जबकि रूबी और सैफायर ब्रेसलेट ने पूरे लुक में एक रिच कॉन्ट्रास्ट जोड़ा। ग्लॉसी मेकअप और हाई पोनीटेल बना आकर्षण का केंद्र मेकअप की बात करें तो उन्होंने ग्लॉसी न्यूड लिप्स, मेटैलिक आईशैडो और हाईलाइटर के साथ डीवी फिनिश लुक चुना। वहीं उनके बालों को स्लीक हाई पोनीटेल में स्टाइल किया गया था, जिसने पूरे आउटफिट को और भी ग्लैमरस बना दिया। 2026 में मिनिमल ड्रेप्स बन सकते हैं नया फैशन ट्रेंड फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जाह्नवी कपूर का यह लुक आने वाले वेडिंग और फेस्टिव सीजन के लिए नया ट्रेंड सेट कर सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो मिनिमल लेकिन स्टेटमेंट ड्रेप्स पसंद करते हैं।  

surbhi मई 25, 2026 0
Woman styling a midi dress with trendy sandals for a chic summer fashion look
इस समर Midi Dress और Sandals की जोड़ी बना रही है सबसे बड़ा फैशन ट्रेंड, जानिए 6 स्टाइलिश तरीके

गर्मियों के फैशन में कुछ कॉम्बिनेशन ऐसे होते हैं जो हर सीजन में क्लासिक बने रहते हैं, और इस बार midi dress और sandals की जोड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में है। चाहे ब्रंच डेट हो, बीच वेकेशन, ऑफिस के बाद की पार्टी या वीकेंड आउटिंग-मिडी ड्रेस के साथ सही सैंडल्स आपके पूरे लुक को बेहद एलिगेंट और ट्रेंडी बना सकते हैं। इस सीजन फैशन वर्ल्ड में फ्लोरल प्रिंट्स, बॉडी-हगिंग सिल्हूट, कॉटन मिडी ड्रेसेस और स्लिप स्टाइल ड्रेस का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। वहीं sandals में minimalist designs, clogs, woven styles और heeled flip-flops लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। आइए जानते हैं इस समर midi dress को sandals के साथ स्टाइल करने के 6 आसान और फैशनेबल तरीके। ब्लैक मिडी ड्रेस के साथ मिनिमलिस्ट सैंडल्स क्लासिक ब्लैक मिडी ड्रेस के साथ स्ट्रैपी या मिनिमल सैंडल्स बेहद सॉफिस्टिकेटेड लुक देते हैं। यह कॉम्बिनेशन डिनर डेट, इवनिंग पार्टी या फॉर्मल इवेंट्स के लिए परफेक्ट माना जा रहा है। इस लुक को छोटे हैंडबैग और गोल्ड जूलरी के साथ पूरा किया जा सकता है। स्ट्रैपलेस ड्रेस के साथ क्लॉग सैंडल्स अगर आप आराम और स्टाइल दोनों चाहती हैं, तो strapless midi dress के साथ clog sandals शानदार विकल्प हो सकते हैं। यह लुक समर वेकेशन और कैजुअल आउटिंग के लिए काफी ट्रेंडी माना जा रहा है। फिटेड ड्रेस के साथ पीप-टो सैंडल्स बॉडी-फिटेड midi dress के साथ peep-toe sandals आपके लुक को बेहद ग्लैमरस बना सकते हैं। यह स्टाइल खासतौर पर पार्टी या नाइट आउट के लिए पसंद किया जा रहा है। न्यूट्रल शेड्स के sandals इस लुक को और एलिगेंट बनाते हैं। बोहो ड्रेस के साथ हील्ड सैंडल्स फ्लोई और प्रिंटेड boho midi dress के साथ heeled sandals का कॉम्बिनेशन समर फैशन का बड़ा ट्रेंड बन चुका है। बीच वेकेशन, म्यूजिक फेस्टिवल या डे आउटिंग के लिए यह स्टाइल बेहद परफेक्ट माना जा रहा है। डेनिम ड्रेस के साथ वूवन सैंडल्स डेनिम midi dress के साथ woven sandals कैजुअल और स्टाइलिश दोनों फील देते हैं। यह लुक डे-टू-डे फैशन के लिए आसान और कम्फर्टेबल विकल्प बनता जा रहा है। स्लिप ड्रेस के साथ हील्ड फ्लिप-फ्लॉप्स साटन या स्लिप midi dress के साथ heeled flip-flops इस सीजन का सबसे मॉडर्न और chic फैशन ट्रेंड माना जा रहा है। यह कॉम्बिनेशन मिनिमल मेकअप और sleek accessories के साथ बेहद शानदार नजर आता है। इस समर फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि midi dress और sandals की सही pairing न सिर्फ कम्फर्ट देती है, बल्कि effortless stylish look भी तैयार करती है। यही वजह है कि यह कॉम्बिनेशन इस सीजन वार्डरोब का जरूरी हिस्सा बन चुका है।  

surbhi मई 23, 2026 0
Celebrities showcasing soft feminine and structured fashion looks
जैकलीन से जाह्नवी तक: इस हफ्ते फैशन में दिखा क्लास और मॉडर्न ट्विस्ट का परफेक्ट संगम

  इस हफ्ते बॉलीवुड और इंटरनेशनल फैशन सर्किट में सॉफ्ट फेमिनिन स्टाइल और स्ट्रक्चर्ड टेलरिंग का दिलचस्प मेल देखने को मिला। कहीं लेस और पर्ल्स की नजाकत थी तो कहीं क्लीन कट सिल्हूट्स का बोलबाला। कुल मिलाकर, इस हफ्ते के बेस्ट लुक्स में क्लासिक फैशन को नए अंदाज में पेश किया गया। जैकलीन फर्नांडिस का एलिगेंट लेस लुक Jacqueline Fernandez ने Manish Malhotra के डिजाइन किए हुए लेसी आउटफिट को चुना, जिसमें साटन बेस पर शीयर लेस ओवरले और पर्ल डिटेलिंग ने इसे बेहद खूबसूरत बना दिया। हाई नेक और स्कैलप्ड हेम के साथ यह आउटफिट साड़ी पल्लू जैसा इफेक्ट देता नजर आया। फिगर-हगिंग स्कर्ट के साथ पूरा लुक बेहद फेमिनिन और ग्रेसफुल दिखा। जाह्नवी कपूर का पावरफुल टेलर्ड स्टाइल Janhvi Kapoor ने Elie Saab का टॉप-टू-टो टोप मोनोक्रोम लुक कैरी किया। ओवरसाइज़्ड डबल-ब्रेस्टेड ब्लेज़र और ड्रेप्ड हॉल्टर टॉप के साथ यह आउटफिट स्ट्रक्चर और सॉफ्टनेस का परफेक्ट बैलेंस बना रहा था। Ferragamo हील्स और Miu Miu सनग्लासेस ने इसे मॉडर्न टच दिया। जाह्नवी का ओल्ड हॉलीवुड ग्लैमर जाह्नवी ने Sabina Bilenko के Autumn/Winter 2025 कलेक्शन से स्ट्रैपलेस गाउन भी पहना। न्यूड बेस पर फ्लोरल एम्ब्रॉयडरी और क्रिस्टल डिटेलिंग के साथ केप-जैकेट ने इस लुक को क्लासिक हॉलीवुड वाइब दी। रोज़े का ड्रामेटिक व्हाइट गाउन Rosé ने Khaite का व्हाइट गाउन पहना, जिसमें शीयर लेस टॉप और वॉल्यूमिनस स्कर्ट का कॉम्बिनेशन देखने को मिला। ब्लैक बो डिटेल और Tiffany & Co. गाला इवेंट में उनका लुक बेहद स्टाइलिश और एलिगेंट रहा। नीता अंबानी का ट्रेडिशनल रॉयल लुक Nita Ambani ने Swadesh की बनारसी सिल्क साड़ी पहनी, जिसमें गोल्ड मोटिफ्स की रिच डिटेलिंग थी। Anamika Khanna की चैंटिली लेस ब्लाउज ने लुक में सॉफ्टनेस जोड़ी। मृणाल ठाकुर का सिंपल और एलीगेंट स्टाइल Mrunal Thakur ने Mimamsaa की ब्लैक साड़ी पहनी, जिसमें गोल्ड बॉर्डर का हल्का सा टच था। Stoffa के कोल्हापुरी और मिनिमल ज्वेलरी के साथ उनका लुक बेहद सिंपल लेकिन क्लासी रहा।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Trendy cut work design on a simple women's suit, giving a boutique and stylish look.
सिंपल सूट को दें बुटीक वाला लुक! ट्राई करें ये ट्रेंडी ‘कट वर्क’ डिजाइन, हर कोई करेगा तारीफ

आज के समय में हर महिला चाहती है कि उसका लुक सिंपल होने के बावजूद स्टाइलिश और अलग दिखे। सूट एक ऐसा आउटफिट है जो हर मौके-ऑफिस, कॉलेज, फंक्शन या कैजुअल डे आउट-के लिए परफेक्ट माना जाता है। लेकिन कई बार साधारण सूट में वो “डिजाइनर टच” नहीं होता, जो उसे खास बना सके। ऐसे में कट वर्क डिजाइन आपके सिंपल सूट को भी मिनटों में बुटीक जैसा लुक दे सकता है। यह न सिर्फ आपके आउटफिट को आकर्षक बनाता है, बल्कि आपके स्टाइल को भी एक नया ट्विस्ट देता है। क्यों ट्रेंड में है कट वर्क डिजाइन? कट वर्क डिजाइन इन दिनों फैशन इंडस्ट्री में काफी ट्रेंड कर रहा है क्योंकि: यह सिंपल कपड़ों को भी रिच और डिटेल्ड लुक देता है ज्यादा हैवी एम्ब्रॉयडरी के बिना भी स्टाइलिश फील आता है हर उम्र और हर मौके के लिए आसानी से कैरी किया जा सकता है इन जगहों पर करवाएं कट वर्क और बदलें पूरा लुक 1. फ्रंट पैनल कट वर्क सूट के फ्रंट में फ्लोरल, पत्तीदार या ज्योमेट्रिक डिजाइन ✔ सिंपल सूट लगेगा पार्टी वियर ✔ फर्स्ट इम्प्रेशन होगा शानदार 2. साइड स्लिट कट वर्क साइड स्लिट पर हल्का या फैंसी कट वर्क ✔ स्ट्रेट कुर्तों में देता है शार्प लुक ✔ वॉक करते समय आता है फ्लो और स्टाइल 3. फैंसी बैक कट वर्क बैक पर हार्ट, राउंड या डिजाइनर शेप ✔ फंक्शन और पार्टी में बनेगा सेंटर ऑफ अट्रैक्शन ✔ पीछे से भी मिलेगा स्टाइलिश लुक 4. नेकलाइन कट वर्क बोट नेक, डीप नेक या राउंड नेक पर डिजाइन ✔ चेहरे को देता है एलिगेंट फ्रेम ✔ मिनिमल में भी दिखेगा क्लासी 5. फ्रंट मिड स्लिट डिजाइन बीच में स्लिट और किनारों पर कट वर्क ✔ ट्रेंडी और मॉडर्न अपील ✔ इंडो-वेस्टर्न लुक के लिए परफेक्ट 6. स्लीव्स कट वर्क फुल या ¾ स्लीव्स पर कट वर्क ✔ सिंपल सूट में जोड़ता है डिटेलिंग ✔ नेट या कॉटन फैब्रिक पर दिखता है खास 7. दामन और दुपट्टा कट वर्क हेमलाइन और दुपट्टे पर बॉर्डर डिजाइन ✔ पूरा आउटफिट लगेगा रॉयल ✔ शादी या फेस्टिव वियर के लिए बेस्ट कौन-सा फैब्रिक और कलर चुनें? कॉटन और रेयॉन: डेली वियर के लिए बेस्ट जॉर्जेट और शिफॉन: पार्टी लुक के लिए परफेक्ट नेट फैब्रिक: कट वर्क को और हाइलाइट करता है रंगों में पेस्टल, व्हाइट, ब्लैक और डीप टोन (मैरून, नेवी) कट वर्क के साथ ज्यादा उभरकर आते हैं। ध्यान रखने वाली जरूरी बातें बहुत ज्यादा कट वर्क न करवाएं, वरना लुक ओवर हो सकता है फैब्रिक मजबूत हो, ताकि कट वर्क साफ दिखे आउटफिट के हिसाब से डिजाइन चुनें (डेली vs पार्टी) सही टेलर या बुटीक का चुनाव बेहद जरूरी है

surbhi मार्च 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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