future mobility

Futuristic smart car with AI dashboard and 5G connectivity showcasing the future of connected automobile technology.
AI और 5G से बदल जाएगी ऑटो इंडस्ट्री, अब कार नहीं ‘स्मार्ट कंप्यूटर’ खरीदेंगे लोग

दुनिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब कारें सिर्फ इंजन, गियरबॉक्स और मेटल बॉडी तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि तेजी से “कंप्यूटर ऑन व्हील्स” में बदलती जा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G, क्लाउड कंप्यूटिंग, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर अब भविष्य की गाड़ियों की पहचान बनने वाले हैं। यही वजह है कि टेक कंपनियां और ऑटो कंपनियां मिलकर ऐसे व्हीकल तैयार कर रही हैं, जो खुद अपडेट होंगे, ड्राइवर की आदतों को समझेंगे और आने वाले समय में बिना ड्राइवर के भी चल सकेंगे। बदल रही है ऑटो इंडस्ट्री की पूरी परिभाषा पहले कार कंपनियों की पहचान उनके इंजन, डिजाइन और माइलेज से होती थी, लेकिन अब मुकाबला डिजिटल एक्सपीरियंस, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी पर आ गया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, कनेक्टेड कार, ऑटोनॉमस ड्राइविंग और शेयर मोबिलिटी जैसे ट्रेंड्स पूरी इंडस्ट्री को नई दिशा दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स इसे CASE ट्रांसफॉर्मेशन कहते हैं, यानी Connected, Autonomous, Shared और Electric मॉडल। आज कई ऑटो कंपनियां बड़ी टेक कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही हैं। Google, Microsoft, NVIDIA, Qualcomm और Ericsson जैसी कंपनियां अब कारों के डिजिटल भविष्य को तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भारत में भी MG Motor की MG Hector जैसी गाड़ियों में इंटरनेट बेस्ड फीचर्स, AI सपोर्ट और क्लाउड कनेक्टिविटी पहले ही देखने को मिल चुकी है। वहीं Tata Motors अपने कनेक्टेड व्हीकल्स में AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा रही है। 5G और AI बदल देंगे ड्राइविंग का अनुभव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में 5G तकनीक ड्राइविंग एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल सकती है। हाई-स्पीड इंटरनेट की मदद से गाड़ियां रियल टाइम डेटा शेयर करेंगी, लाइव ट्रैफिक अपडेट लेंगी और कई फैसले खुद ले पाएंगी। ऑटोनॉमस यानी सेल्फ-ड्राइविंग कारों में भी 5G की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। Volvo और Ericsson ने 5G सपोर्टेड सिस्टम पर टेस्टिंग भी की है, जहां गाड़ियों को लगातार लाइव मैप डेटा मिलता रहा। इससे भविष्य में सेल्फ-ड्राइविंग कारों की सुरक्षा और सटीकता बेहतर हो सकती है। अब कार कंपनियों को टेक कंपनी की तरह सोचना होगा ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कार की असली वैल्यू सिर्फ उसके हार्डवेयर से तय नहीं होगी, बल्कि उसमें मिलने वाले सॉफ्टवेयर, AI फीचर्स और डिजिटल सर्विसेज ज्यादा अहम होंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक भविष्य में कारों में हार्डवेयर का हिस्सा घटकर करीब 40 प्रतिशत तक रह सकता है, जबकि सॉफ्टवेयर और कंटेंट की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी। यानी ग्राहक अब सिर्फ इंजन और माइलेज नहीं, बल्कि OTA अपडेट, ऐप कंट्रोल, AI बेस्ड सिस्टम और स्मार्ट फीचर्स भी देखेंगे। Tesla, Xiaomi और Apple क्यों बदल रहे हैं भविष्य? Tesla ने दुनिया को दिखाया कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल का कॉम्बिनेशन कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। अब Xiaomi, Sony और Apple जैसी कंपनियां भी EV और स्मार्ट मोबिलिटी सेक्टर में तेजी से दिलचस्पी दिखा रही हैं। भारत में Ather Energy और Ola Electric जैसे स्टार्टअप्स टेक बेस्ड मोबिलिटी मॉडल पर फोकस कर रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि बड़े स्तर पर भरोसेमंद कार मैन्युफैक्चरिंग अब भी आसान काम नहीं है। टेक कंपनियों के पास सॉफ्टवेयर और AI की ताकत जरूर है, लेकिन बड़े पैमाने पर सुरक्षित और भरोसेमंद वाहन बनाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। भविष्य में कार नहीं, मोबिलिटी सर्विस खरीदेंगे लोग ऑटो इंडस्ट्री तेजी से “Car as a Service” मॉडल की तरफ बढ़ रही है। यानी भविष्य में लोग गाड़ी खरीदने के बजाय जरूरत के हिसाब से उसका इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद कर सकते हैं। कारें स्मार्ट डिवाइस की तरह काम करेंगी, जहां एंटरटेनमेंट, सब्सक्रिप्शन सर्विस, ऐप बेस्ड फीचर्स और डेटा सर्विस नई कमाई का जरिया बनेंगी। हालांकि इसके साथ साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। क्योंकि जितनी ज्यादा कारें इंटरनेट से जुड़ेंगी, उतना ही डेटा चोरी और नेटवर्क सिक्योरिटी का खतरा भी बढ़ सकता है। भारत में क्यों अहम है यह बदलाव? भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटो मार्केट्स में शामिल है और यहां टेक्नोलॉजी तेजी से अपनाई जा रही है। कनेक्टेड कार, ADAS, ऐप कंट्रोल और EV फीचर्स अब धीरे-धीरे आम ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। आने वाले दशक में भारतीय सड़कों पर ऐसी गाड़ियां दिखाई दे सकती हैं, जो लगातार इंटरनेट से जुड़ी रहेंगी, खुद अपडेट होंगी और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल देंगी।  

surbhi मई 21, 2026 0
Bajaj Chetak hydrogen scooter concept showcasing futuristic eco-friendly mobility with claimed 280Km driving range
Bajaj Chetak Hydrogen Scooter: क्या अब पानी से चलेगा स्कूटर? 280Km रेंज के दावे ने बढ़ाई हलचल

भारतीय टू-व्हीलर बाजार तेजी से बदल रहा है और अब चर्चा एक ऐसी तकनीक की हो रही है, जो आने वाले वर्षों में स्कूटर इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती है। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी Bajaj Auto अपने लोकप्रिय Bajaj Chetak के नए हाइड्रोजन वर्जन पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्कूटर हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी से लैस हो सकता है और एक बार में करीब 280 किलोमीटर तक की रेंज देने का दावा किया जा रहा है। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो यह सिर्फ इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के लिए ही नहीं बल्कि पूरे टू-व्हीलर मार्केट के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। खास बात यह है कि इसे लेकर “पानी से चलने वाले स्कूटर” जैसी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इलेक्ट्रिक के बाद अब हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी पर दांव Bajaj पहले ही अपने इलेक्ट्रिक चेतक के जरिए ईवी मार्केट में मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब कंपनी अगला कदम हाइड्रोजन मोबिलिटी की दिशा में बढ़ाती दिख रही है। माना जा रहा है कि कंपनी ने इस तकनीक से जुड़े पेटेंट पर पहले ही काम शुरू कर दिया था और अब इसकी शुरुआती जानकारी सामने आने लगी है। यह नया स्कूटर पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है। यही वजह है कि इसे मौजूदा इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से अलग और ज्यादा एडवांस माना जा रहा है। आखिर कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी? हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया कर बिजली तैयार की जाती है। यही बिजली स्कूटर की मोटर को पावर देती है। इस प्रक्रिया में प्रदूषण बेहद कम होता है और मुख्य रूप से पानी ही उप-उत्पाद के रूप में निकलता है। हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में “एक लीटर पानी से 280Km” जैसे दावे किए जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी रूप से स्कूटर सीधे पानी से नहीं चलता। पहले हाइड्रोजन तैयार करनी होती है, जिसके बाद फ्यूल सेल सिस्टम काम करता है। कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक टेक्निकल डिटेल्स साझा नहीं की हैं। डिजाइन रहेगा रेट्रो, फीचर्स होंगे हाईटेक नई हाइड्रोजन चेतक का डिजाइन मौजूदा इलेक्ट्रिक चेतक की तरह क्लासिक और रेट्रो स्टाइल में रखा जा सकता है। चेतक की पहचान उसके पुराने आइकॉनिक लुक से जुड़ी रही है और कंपनी उसी पहचान को बरकरार रख सकती है। फीचर्स की बात करें तो इसमें डिजिटल स्मार्ट डिस्प्ले, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, नेविगेशन सपोर्ट, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, आधुनिक सेफ्टी सिस्टम और बेहतर राइडिंग मोड्स मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इसे प्रीमियम सेगमेंट में उतार सकती है। लॉन्च और कीमत को लेकर क्या संकेत मिले? फिलहाल कंपनी ने न तो इसकी लॉन्च डेट की पुष्टि की है और न ही कीमत का आधिकारिक ऐलान किया है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ग्राहक इसे लगभग 20 हजार रुपये की डाउन पेमेंट के साथ बुक कर सकते हैं। अगर Bajaj इस स्कूटर को बड़े स्तर पर लॉन्च करती है, तो यह भारत में हाइड्रोजन आधारित टू-व्हीलर सेगमेंट की शुरुआत मानी जा सकती है। क्या भारत में सफल होगी हाइड्रोजन स्कूटर टेक्नोलॉजी? भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में हाइड्रोजन आधारित स्कूटर एक वैकल्पिक समाधान बन सकता है। लेकिन इसकी सफलता कई अहम बातों पर निर्भर करेगी– हाइड्रोजन फ्यूल की उपलब्धता रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक की लागत सुरक्षा मानक आम ग्राहकों के लिए कीमत दुनिया की कई बड़ी ऑटो कंपनियां अब इलेक्ट्रिक के साथ-साथ हाइड्रोजन मोबिलिटी पर भी तेजी से काम कर रही हैं। ऐसे में Bajaj का यह कदम संकेत देता है कि भविष्य का भारतीय टू-व्हीलर बाजार सिर्फ बैटरी आधारित ईवी तक सीमित नहीं रहेगा। पूरा ऑटो सेक्टर अब इस बात पर नजर लगाए बैठा है कि क्या हाइड्रोजन चेतक वास्तव में सड़कों पर उतर पाएगा और क्या यह तकनीक आम लोगों के लिए व्यावहारिक साबित होगी।  

surbhi मई 8, 2026 0
Waymo driverless taxi operating on London streets with AI technology and no human driver
2027 से यूके में ड्राइवरलेस टैक्सियां, बड़ा सवाल–क्या AI इंसानों से ज्यादा सुरक्षित है?

Waymo की रोबोटैक्सी अब London की सड़कों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए खुद चल रही हैं। अभी कुछ गाड़ियों में सेफ्टी के लिए इंसानी ड्राइवर मौजूद हैं, लेकिन आने वाले समय में पूरी तरह ड्राइवरलेस सिस्टम लागू करने की तैयारी है। क्या बदल रहा है? Waymo ने अपने ट्रायल को अगले स्तर पर पहुंचा दिया है। पहले गाड़ियों को इंसानी ड्राइवर मॉनिटर करते थे अब कई वाहन पूरी तरह AI से ऑपरेट हो रहे हैं कंपनी का लक्ष्य है कि सरकार की मंजूरी के बाद जल्द ही फुली ऑटोनॉमस सर्विस शुरू की जाए 2027 से मिलेगा फुल ड्राइवरलेस अनुभव Automated Vehicles Act के लागू होने के बाद 2027 से यूके में बिना ड्राइवर वाली टैक्सियों को आधिकारिक अनुमति मिल जाएगी। तब तक कंपनियां टेस्टिंग और सेफ्टी वैलिडेशन पर काम करती रहेंगी। क्या ये इंसानों से ज्यादा सुरक्षित हैं? Waymo का दावा है कि उसकी गाड़ियां इंसानी ड्राइवरों की तुलना में 92% कम गंभीर या जानलेवा दुर्घटनाओं में शामिल होती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है: एक सर्वे में सिर्फ 3% लोगों ने ड्राइवरलेस टैक्सी पर पूरा भरोसा जताया 79% लोग अब भी संदेह में हैं यानी तकनीक आगे बढ़ रही है, लेकिन लोगों का भरोसा अभी पीछे है। विवाद और सवाल भी ड्राइवरलेस तकनीक पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं है। पिछले साल San Francisco में Waymo की कार से एक पालतू बिल्ली (KitKat) की मौत का मामला सामने आया, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। कंपनी ने घटना पर खेद जताया और मुआवजा भी दिया। तकनीक बना भरोसा ड्राइवरलेस टैक्सियां भविष्य की झलक जरूर दिखाती हैं–कम दुर्घटनाएं, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और 24x7 सर्विस। लेकिन जब तक आम लोग इन पर भरोसा नहीं करते, तब तक इनका बड़े स्तर पर अपनाया जाना चुनौती बना रहेगा।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
राजनीति

तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

Deepshikha जून 6, 2026 0