Garment Industry

Modern textile manufacturing unit under PM MITRA scheme showcasing integrated textile production and apparel industry in India.
$350 अरब की टेक्सटाइल महाशक्ति बनने की तैयारी में भारत, PM MITRA पार्कों से बदलेगी कपड़ा उद्योग की तस्वीर

नई दिल्ली: भारत सदियों से अपनी समृद्ध वस्त्र परंपरा के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कश्मीर का पश्मीना, असम का मूंगा रेशम, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी, मध्य प्रदेश की चंदेरी और सूरत का टेक्सटाइल उद्योग भारतीय शिल्प और कौशल की पहचान रहे हैं। अब केंद्र सरकार इसी विरासत को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़कर भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में 4,445 करोड़ रुपये के बजट के साथ PM MITRA (Mega Integrated Textile Region and Apparel) योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य पूरे टेक्सटाइल वैल्यू चेन को एक ही परिसर में विकसित कर उत्पादन लागत कम करना, निर्यात बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है टेक्सटाइल उद्योग भारत का वस्त्र एवं परिधान उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। GDP में लगभग 2.3% योगदान औद्योगिक उत्पादन में 13% हिस्सेदारी कुल निर्यात में करीब 12% योगदान लगभग 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। क्यों महसूस हुई नए मॉडल की जरूरत? अब तक भारत का टेक्सटाइल उद्योग अलग-अलग राज्यों में बिखरा हुआ था। कपास उत्पादन, धागा निर्माण, बुनाई, प्रोसेसिंग, गारमेंट निर्माण और निर्यात जैसी गतिविधियां अलग-अलग स्थानों पर होने के कारण— उत्पादन लागत बढ़ती थी। समय अधिक लगता था। लॉजिस्टिक्स महंगे पड़ते थे। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती थी। सरकार का मानना है कि एकीकृत टेक्सटाइल पार्क इन चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। PM MITRA योजना का '5F' विजन इस योजना की नींव प्रधानमंत्री मोदी के '5F' विजन पर आधारित है— Farm to Fiber Fiber to Factory Factory to Fashion Fashion to Foreign इस मॉडल का उद्देश्य किसानों, बुनकरों, उद्योगों और निर्यातकों को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ना है, जिससे पूरी सप्लाई चेन अधिक तेज, सस्ती और प्रतिस्पर्धी बन सके। सात राज्यों में विकसित हो रहे हैं PM MITRA पार्क देशभर में कुल 7 PM MITRA पार्क विकसित किए जा रहे हैं। ग्रीनफील्ड परियोजनाएं: विरुधुनगर (तमिलनाडु) नवसारी (गुजरात) कलबुर्गी (कर्नाटक) धार (मध्य प्रदेश) लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ब्राउनफील्ड परियोजनाएं: वारंगल (तेलंगाना) अमरावती (महाराष्ट्र) इन पार्कों में 1,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, गारमेंट निर्माण और निर्यात से जुड़ी इकाइयों को एक साथ विकसित किया जाएगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर PM MITRA पार्कों में उद्योगों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें— प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर रेडी-टू-मूव फैक्ट्री शेड समर्पित बिजली सब-स्टेशन निरंतर जलापूर्ति कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) Zero Liquid Discharge (ZLD) तकनीक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी इन सुविधाओं से उत्पादन लागत कम होगी, लॉजिस्टिक्स तेज होंगे और पर्यावरणीय मानकों का बेहतर पालन किया जा सकेगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा सरकार के अनुसार, PM MITRA योजना के तहत अब तक लगभग 69,899 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 27,658 करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतर चुका है। अनुमान है कि प्रत्येक पार्क से करीब 3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। सातों पार्क मिलकर 21 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। 2030 तक 350 अरब डॉलर का लक्ष्य सरकार का लक्ष्य है कि 'Vision 2030' के तहत भारत के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को 350 अरब डॉलर के वैश्विक उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। PM MITRA पार्क इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की आधारशिला माने जा रहे हैं, जो भारत को वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में और मजबूत स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Indian textile workers at a garment factory amid concerns over cotton import duty and export slowdown
CITI Report: 11% आयात शुल्क से संकट में भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री, 2030 लक्ष्य पर मंडराया खतरा

कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता पर बड़ा असर (CITI) की नई रिपोर्ट ने भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कपास पर लगाया गया 11 प्रतिशत आयात शुल्क भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर मौजूदा नीतियों में बदलाव नहीं हुआ, तो भारत के लिए 2030 तक 350 अरब डॉलर के टेक्सटाइल सेक्टर लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। बदलती नीतियों से उद्योग परेशान रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच सरकार ने कपास आयात शुल्क हटाया था, लेकिन 1 जनवरी 2026 से इसे फिर लागू कर दिया गया। इस तरह की अस्थिर नीति के कारण टेक्सटाइल मिलों और उद्योगों को भविष्य की योजना बनाने में परेशानी हो रही है। उद्योग जगत का कहना है कि लगातार बदलते नियम निवेश और उत्पादन दोनों को प्रभावित कर रहे हैं। एशियाई देशों से मुकाबले में पिछड़ रहा भारत रिपोर्ट के अनुसार एशिया के कई प्रतिस्पर्धी देशों में कपास आयात पूरी तरह ड्यूटी-फ्री है। ऐसे में भारतीय कपड़ा कंपनियों की लागत बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे पड़ रहे हैं। इसी वजह से भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर दबाव बढ़ता जा रहा है। कपड़ा निर्यात में आई गिरावट रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का टेक्सटाइल निर्यात 2.2 प्रतिशत घटकर 35.79 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लागत कम नहीं हुई और नीति स्थिर नहीं बनी, तो निर्यात लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। CITI ने सरकार को दिए बड़े सुझाव ₹1,500 करोड़ का बफर फंड रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपये का समर्थन भारतीय कपास निगम (CCI) को दे, ताकि उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास उपलब्ध कराया जा सके। चीन की तरह रणनीतिक भंडार CITI ने चीन मॉडल की तर्ज पर भारत में भी 3 महीने की खपत के बराबर कपास का रिजर्व स्टॉक बनाने की सलाह दी है। इससे कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकेगा। ब्याज में राहत की मांग रिपोर्ट में नवंबर से मार्च के पीक सीजन के दौरान खरीदारी के लिए ‘कपास मूल्य स्थिरीकरण कोष’ बनाने और उद्योगों को ब्याज दरों में 5 प्रतिशत तक राहत देने की सिफारिश की गई है। ‘5F Vision’ का भी किया जिक्र CITI चेयरमैन Ashwin Chandran ने कहा कि किसान और टेक्सटाइल उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने सरकार के “5F Vision” – Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign – को भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत कपड़ा उद्योग किसानों के लिए सबसे बड़ा और स्थायी बाजार तैयार कर सकता है। उत्पादन लागत और पैदावार भी चिंता का विषय रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में कपास की पैदावार कई वर्षों से लगभग स्थिर बनी हुई है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। इसका असर किसानों की आय और उद्योग दोनों पर पड़ रहा है।  

surbhi मई 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0