रोम: ईरान संघर्ष के दौरान इटली की भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और NATO महासचिव मार्क रुटे के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। रुटे के एक बयान के बाद इटली की राजनीति में हलचल मच गई, जिसके बाद मेलोनी सरकार को लगातार सफाई देनी पड़ी। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और NATO प्रमुख के बयान से देश की भूमिका को लेकर गलत संदेश गया। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इटली और प्रधानमंत्री मेलोनी की आलोचना कर रहे हैं। ऐसे में रोम ने अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए विदेश मंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक को सामने उतार दिया। कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब NATO महासचिव मार्क रुटे ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि ईरान संघर्ष के दौरान इटली ने लगभग 500 अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रुटे के इस बयान के बाद इटली में विपक्षी दलों ने मेलोनी सरकार को घेर लिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार लगातार यह दावा करती रही कि इटली युद्ध से दूर रहा, जबकि NATO प्रमुख का बयान कुछ और कहानी बता रहा है। मेलोनी बोलीं- इटली युद्ध का हिस्सा नहीं था फ्रांस-इटली शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पष्ट किया कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इटली ने केवल अमेरिका के साथ पहले से मौजूद द्विपक्षीय समझौतों के तहत तकनीकी और लॉजिस्टिक सहयोग दिया था। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि इटली की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर सीधे हमले करने के लिए किया गया। मेलोनी ने कहा कि अगर इटली वास्तव में युद्ध का हिस्सा होता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इटली के सहयोग को लेकर नाराजगी जाहिर नहीं करते। NATO प्रमुख पर साधा निशाना मेलोनी ने कहा कि मार्क रुटे ने अलग-अलग तरह की सैन्य उड़ानों और तकनीकी सहयोग को एक साथ जोड़कर पेश किया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि संभव है कि NATO प्रमुख आगामी शिखर सम्मेलन से पहले सहयोगी देशों की एकजुटता दिखाना चाहते हों, लेकिन ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। ईरान से सीधे की गई बातचीत विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की। ताजानी ने ईरान को भरोसा दिलाया कि इटली किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था और उसने अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी। इसके साथ ही उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की अपील की ताकि वहां फंसे इटली के व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सके। रक्षा मंत्री ने भी पेश किए आंकड़े इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के दौरान सिगोनेला और एवियानो सैन्य ठिकानों से हुई उड़ानों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इसके आधिकारिक आंकड़े मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक भी किया जा सकता है। NATO ने भी दी सफाई विवाद बढ़ने के बाद NATO की ओर से भी स्पष्टीकरण जारी किया गया। NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि मार्क रुटे का बयान केवल तकनीकी और लॉजिस्टिक सुविधाओं के संदर्भ में था। उनका आशय यह बिल्कुल नहीं था कि इटली ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य हमलों में भाग लिया। ईरान का कड़ा रुख इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि यदि कोई देश किसी तीसरे देश को किसी अन्य राष्ट्र पर हमला करने के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराता है, तो उसे भी आक्रामक कार्रवाई माना जाना चाहिए। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि NATO प्रमुख के बयान में इटली और रोमानिया का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया था। ट्रंप लगातार कर रहे हैं इटली की आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से इटली के रुख की लगातार आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय सहयोगियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के अमेरिकी प्रयासों में पर्याप्त सहयोग नहीं दिया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी, जिससे अमेरिकी लॉजिस्टिक व्यवस्था प्रभावित हुई। G7 सम्मेलन के बाद और बढ़ी दूरी हालिया G7 शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई। ट्रंप ने दावा किया था कि जॉर्जिया मेलोनी उनके साथ बार-बार तस्वीर खिंचवाना चाहती थीं और इटली में उनकी लोकप्रियता लगातार घट रही है। मेलोनी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता से रिश्तों पर नहीं, बल्कि इटली के राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर आधारित है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों को "पूरी तरह मनगढ़ंत और अनावश्यक" बताया। क्यों अहम है यह विवाद? यह विवाद केवल इटली और NATO के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ईरान संघर्ष को लेकर पश्चिमी देशों के भीतर मौजूद मतभेद भी सामने आए हैं। एक ओर NATO सहयोगी देशों की एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इटली अपनी छवि को युद्ध से दूर रखने और ईरान के साथ राजनयिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।
रोम/वॉशिंगटन: जी7 शिखर सम्मेलन से जुड़ा एक कथित बयान अमेरिका और इटली के बीच नए विवाद की वजह बनता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कथित दावे पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कथित तौर पर दावा किया था कि जी7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए आग्रह किया था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे "मनगढ़ंत" और "तथ्यहीन" बताया। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने कभी ऐसी कोई गुजारिश की और न ही इटली को किसी से इस प्रकार की मिन्नतें करने की आवश्यकता है। वीडियो संदेश जारी कर दिया जवाब मेलोनी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के दावे पूरी तरह काल्पनिक हैं। इटली और मैं किसी से मिन्नतें नहीं करते।" उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आवश्यक होता है और इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला किया। इटली सरकार ने जताई नाराजगी इटली सरकार ने भी ट्रंप के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने इसे इटली और उसके प्रधानमंत्री के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के नेताओं के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध दर्ज कराने के लिए ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा भी रद्द कर दी है। क्या था ट्रंप का कथित दावा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत के दौरान जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र करते हुए दावा किया कि जी7 शिखर सम्मेलन में उन्होंने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए अनुरोध किया था। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने "तरस खाकर" इसके लिए सहमति दी। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही व्हाइट हाउस की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। सहयोगी देशों के साथ व्यवहार पर सवाल मेलोनी ने अपने बयान में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध आपसी सम्मान और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। दोनों देशों की सरकारों की ओर से अभी तक द्विपक्षीय संबंधों पर किसी औपचारिक असर की घोषणा नहीं की गई है।
फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच हुई छोटी-सी मुलाकात इंटरनेट पर छा गई है। वैश्विक मुद्दों पर गंभीर बैठकों के बीच दोनों नेताओं की यह अनौपचारिक बातचीत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। जब सभी नेता पारंपरिक ग्रुप फोटो के लिए एकत्रित हो रहे थे, तभी पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी ने एक-दूसरे का मुस्कुराते हुए अभिवादन किया। 'हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं' वीडियो में जॉर्जिया मेलोनी प्रधानमंत्री मोदी को देखकर मुस्कुराते हुए कहती हैं, "आपसे दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लगा।" इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं।" बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी दोनों की सोशल मीडिया लोकप्रियता का जिक्र किया, जिस पर मेलोनी ने हंसते हुए सहमति जताई और अपनी बात दोहराई। दोनों नेताओं की यह हल्की-फुल्की बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। क्या है 'Melodi' ट्रेंड? सोशल मीडिया पर 'Melodi' (मेलोडी) नाम पिछले कुछ वर्षों से काफी लोकप्रिय है। यह शब्द 'Meloni' और 'Modi' के नामों को मिलाकर बनाया गया है। इस ट्रेंड की शुरुआत 2023 में दुबई में आयोजित COP28 के दौरान हुई थी। उस समय जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए कैप्शन लिखा था, "Good friends at COP28 #Melodi" इसके बाद 'Melodi' हैशटैग इंटरनेट पर वायरल हो गया और दोनों नेताओं की तस्वीरों और मुलाकातों पर मीम्स, फैन एडिट्स और मजेदार पोस्ट की बाढ़ आ गई। जब पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की थी 'Melody' टॉफी पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे के दौरान 'Melodi' ट्रेंड को एक नया और दिलचस्प मोड़ मिला था। रोम में मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को 'Melody' नाम की टॉफी का पैकेट उपहार में दिया था। इस अनोखे तोहफे को देखकर मेलोनी हंस पड़ी थीं और उन्होंने कहा था, "प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक बहुत अच्छी टॉफी लाए हैं... मेलोडी।" यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और कुछ ही घंटों में करोड़ों लोगों ने इसे देखा था। इंटरनेट पर फिर ट्रेंड कर रही है 'Melodi' जी7 शिखर सम्मेलन में हुई ताजा मुलाकात के बाद 'Melodi' एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों नेताओं के दोस्ताना और सहज व्यवहार को लेकर इंटरनेट यूजर्स लगातार मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यह बातचीत पूरी तरह हल्के-फुल्के अंदाज में हुई, लेकिन इससे एक बार फिर यह साबित हो गया कि वैश्विक राजनीति की गंभीर बैठकों के बीच भी कुछ पल ऐसे होते हैं, जो लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं।
एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जहां दुनिया के प्रमुख नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, यूक्रेन युद्ध, सुरक्षा और भू-राजनीतिक संकटों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की, वहीं नेताओं की कुछ अनौपचारिक बातचीत भी सुर्खियों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की रही, जिन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने पिछले एक महीने से सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया है। '1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी', मेलोनी ने किया खुलासा बैठक शुरू होने से पहले जॉर्जिया मेलोनी ने बताया कि उन्होंने उस दिन तीन कप कॉफी पी है। इस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने उनसे पूछा कि इतनी कॉफी क्यों? जवाब में मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "खुद को जगाए रखने के लिए।" इसके बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने सुबह सिगरेट पी है? इस पर मेलोनी ने जवाब दिया, "मैंने 1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी है।" उनके इस जवाब पर बैठक में मौजूद नेताओं ने तालियां बजाकर और बधाई देकर उनका उत्साह बढ़ाया। मार्क कार्नी ने पूछा- निकोटीन पैच लगाया क्या? कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची और यूरोपीय संघ के अन्य प्रतिनिधियों ने मेलोनी को धूम्रपान छोड़ने के लिए बधाई दी। खुशी जाहिर करते हुए मेलोनी ने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। इसी दौरान मार्क कार्नी ने मजाकिया अंदाज में पूछा, "क्या आपने निकोटीन पैच लगाया है?" उनके इस सवाल पर वहां मौजूद सभी नेता हंस पड़े और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। नेताओं ने साझा किए धूम्रपान छोड़ने के अनुभव सिगरेट छोड़ने को लेकर बातचीत आगे बढ़ी तो कई नेताओं ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बताया कि उन्होंने 2005 में धूम्रपान छोड़ दिया था। इस पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पूछा कि क्या उसके बाद कभी सिगरेट पी? कोस्टा ने जवाब दिया, "कभी नहीं, 21 साल हो गए।" इस बातचीत ने जी7 जैसे गंभीर मंच पर नेताओं का एक मानवीय और सहज पक्ष भी सामने ला दिया। जी7 में फिर चर्चा में आया 'मेलोडी' मोमेंट जी7 सम्मेलन के दौरान एक और दिलचस्प पल तब देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पारंपरिक 'फैमिली फोटो' से पहले आमने-सामने आए। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी सोशल मीडिया पर 'मेलोडी' (Meloni + Modi) नाम से वायरल हो चुकी है। मुलाकात के दौरान मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "आपसे फिर मिलकर अच्छा लगा।" बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान इंस्टाग्राम का जिक्र किया। इस पर मेलोनी ने तुरंत जवाब दिया, "हां, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं।" उनकी इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग हंस पड़े। जी7 में कौन-कौन से देश हुए शामिल? जी7 समूह में दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। इस वर्ष मेजबान फ्रांस ने भारत, ब्राजील, केन्या, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और अन्य साझेदार देशों को भी विशेष आमंत्रित राष्ट्र के रूप में बुलाया था। सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख रहीं, लेकिन नेताओं के ये अनौपचारिक और हल्के-फुल्के पल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। इसी क्रम में इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को लगातार 4,399 दिन का कार्यकाल पूरा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही वह भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर दी शुभकामनाएं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए लिखा कि यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने हाल ही में रोम में हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच शुरू हुई विशेष रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। मेलोनी ने विश्वास जताया कि भारत और इटली के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के नागरिकों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी साबित होगा। रोम में हुई मुलाकात रही थी चर्चा का केंद्र मई 2026 में रोम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात ने व्यापक चर्चा बटोरी थी। दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी उत्साह देखने को मिला था। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की थी। भारत और इटली के बीच संबंधों को नई दिशा देने के लिए कई पहलुओं पर सहमति भी बनी थी। यूरोपीय परिषद प्रमुख ने भी जताई खुशी यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष António Costa ने भी प्रधानमंत्री मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कोस्टा ने कहा कि इस वर्ष आयोजित भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक ने दोनों पक्षों के सहयोग को नई मजबूती प्रदान की है और भविष्य में यह साझेदारी और अधिक व्यापक होगी। मोदी के नाम दर्ज हुआ नया राजनीतिक कीर्तिमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 और 2024 के आम चुनावों में जीत हासिल कर उन्होंने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। मोदी देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार इतने लंबे समय तक पद पर रहते हुए यह रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही वे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री भी हैं, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। 12 वर्षों में भाजपा का राष्ट्रीय विस्तार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने देश के कई नए क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत की है। पार्टी ने विभिन्न सामाजिक वर्गों और राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अपना प्रभाव लगातार विस्तारित किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय राजनीति में लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व की मिसाल के रूप में भी देखा जाएगा।
Giorgia Meloni ने Narendra Modi की मौजूदगी में हिंदी बोलकर सभी का ध्यान खींच लिया। इटली दौरे के दौरान मेलोनी ने हिंदी में कहा— “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मेलोनी ने हिंदी में क्या कहा? इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारतीय शब्द है जो भारत और इटली के रिश्तों को बहुत अच्छी तरह व्यक्त करता है— “परिश्रम”। उन्होंने कहा: “परिश्रम का अर्थ है कड़ी मेहनत। भारत में एक लोकप्रिय कहावत है— परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। यानी मेहनत ही सफलता का रास्ता बनाती है।” मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली अपने संबंधों को इसी सोच और सहयोग के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारत-इटली रिश्तों को मिली नई दिशा भारत और इटली के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नई तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। पीएम मोदी ने क्या कहा? संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में रोम पहुंचे थे। मेलोनी से मुलाकात के दौरान उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मिले मोदी अपने इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी ने Sergio Mattarella से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने: व्यापार प्रौद्योगिकी स्वच्छ ऊर्जा संस्कृति और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। तेजी से बढ़ा भारत-इटली व्यापार इटली में भारतीय दूतावास के मुताबिक, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। साल 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14.25 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें: भारत का निर्यात: 8.55 अरब यूरो इटली का भारत को निर्यात: 5.70 अरब यूरो रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मेलोनी का हिंदी बोलने वाला वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे भारत-इटली संबंधों की बढ़ती नजदीकी का प्रतीक बताया है।
रोम, एजेंसियां। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच खास दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। रोम में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प पल तब सामने आया, जब पीएम मोदी ने मेलोनी को भारत की मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की। इस खास तोहफे को लेकर मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में धन्यवाद कहा और लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए “बहुत, बहुत अच्छी टॉफी” लेकर आए। सोशल मीडिया पर मेलोनी का यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों ने इसे भारत-इटली के मजबूत होते रिश्तों और दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री का प्रतीक बताया। डिनर टेबल पर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा रोम में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने बताया कि भारत और इटली के संबंध अब नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। डिनर के बाद दोनों नेताओं ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का भी दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किए जा रहे हैं। ‘इंडो-मेडिटेरेनियन’ साझेदारी को नई दिशा भारत और इटली ने अपने रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताते हुए एक साझा विजन भी पेश किया है। “इटली एंड इंडिया: ए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर द इंडो-मेडिटेरेनियन” शीर्षक से जारी संयुक्त लेख में दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। रक्षा, एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है। यह दौरा भारत-इटली संबंधों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
Narendra Modi और Giorgia Meloni के बीच बढ़ती दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो गई। मेलोनी ने इस खास गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहती नजर आईं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “बहुत बढ़िया टॉफी” गिफ्ट की है। इटली दौरे पर पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंचे हैं। यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है। भारत और इटली इस समय “जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के तहत अपने संबंधों को नई मजबूती देने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कोलोसियम में साथ दिखे मोदी और मेलोनी रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी के साथ मशहूर Colosseum का दौरा भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि रोम पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर किया और फिर ऐतिहासिक कोलोसियम घूमने गए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत-इटली सहयोग पर होगी अहम बातचीत बुधवार को पीएम मोदी और मेलोनी के बीच औपचारिक वार्ता होने वाली है। इसमें: व्यापार और निवेश रक्षा सहयोग क्लीन एनर्जी इनोवेशन साइंस और टेक्नोलॉजी सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। रोम में दिखी काशी की झलक पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान यह भी बताया कि इटालियन कलाकार Giampaolo Tomassetti ने उन्हें वाराणसी की एक खूबसूरत पेंटिंग भेंट की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति टोमासेटी का लगाव चार दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वैदिक संस्कृति और Mahabharata से जुड़ी कई कलाकृतियों पर काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘मेलोडी डिप्लोमेसी’ पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने को सोशल media पर लोग “मेलोडी डिप्लोमेसी” कहकर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुर्खियां बटोर चुकी है।
Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंच गए हैं। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के साथ एक सेल्फी साझा कर उनका खास अंदाज में स्वागत किया। मेलोनी ने पोस्ट में लिखा, “Welcome to Rome, my friend!” यानी “रोम में स्वागत है, मेरे दोस्त!” दोनों नेताओं की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और भारत-इटली संबंधों की गर्मजोशी की चर्चा हो रही है। रोम एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इटली के उप प्रधानमंत्री Antonio Tajani ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय भी एयरपोर्ट और होटल के बाहर मौजूद रहे। पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की। IMEC और रणनीतिक साझेदारी पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि इस यात्रा के दौरान वह इटली के राष्ट्रपति Sergio Mattarella और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य फोकस भारत-इटली सहयोग को और मजबूत करना होगा, खासकर ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा ‘संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029’ की समीक्षा भी की जाएगी। FAO मुख्यालय का भी करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वह Food and Agriculture Organization (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे। इस दौरान वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर चर्चा होगी। होटल में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक रोम स्थित होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य, भारतीय वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय परंपरा की झलक दिखाई गई। पीएम मोदी Anantara Palazzo Naiadi Rome Hotel में ठहरे हैं। होटल और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। क्या रहेगा पीएम मोदी का कार्यक्रम? इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले Quirinal Palace जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला से होगी। इसके बाद Villa Doria Pamphili में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय शिखर बैठक आयोजित होगी। दोनों नेता भारतीय और इटालियन उद्योग समूहों के प्रमुखों के साथ वर्किंग लंच में भी शामिल होंगे। G7 के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा यह जून 2024 में आयोजित G7 Summit 2024 के बाद पीएम मोदी की पहली द्विपक्षीय इटली यात्रा है। वह जॉर्जिया मेलोनी के विशेष निमंत्रण पर इटली पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत और इटली के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। भारत-इटली रिश्ते लगातार मजबूत भारत और इटली के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक, निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली ने भारत में 3.66 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच Narendra Modi 15 मई से छह दिनों के विदेश दौरे पर निकलेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री United Arab Emirates, Netherlands, Sweden, Norway और Italy का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के रणनीतिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत करना माना जा रहा है। UAE से होगी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे की शुरुआत यूएई से करेंगे, जहां उनकी मुलाकात Mohamed bin Zayed Al Nahyan से होगी। दोनों नेताओं के बीच: ऊर्जा सहयोग व्यापार और निवेश पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति भारतीय समुदाय के हित जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साथ ही वहां 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, इसलिए प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूएई को यात्रा का पहला पड़ाव बनाना भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। नीदरलैंड में टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड के दौरे पर रहेंगे। यह 2017 के बाद उनकी दूसरी यात्रा होगी। इस दौरान उनकी मुलाकात: Willem-Alexander Máxima Zorreguieta Rob Jetten से होगी। इस यात्रा में रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। भारत और यूरोप के बीच सप्लाई चेन और हाई-टेक सहयोग को मजबूत करना भी इस दौरे का अहम हिस्सा माना जा रहा है। स्वीडन में AI और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा 17 से 18 मई तक पीएम मोदी स्वीडन के दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा Ulf Kristersson के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों देशों के बीच जिन क्षेत्रों पर चर्चा होगी, उनमें: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ग्रीन ट्रांजिशन स्टार्टअप रक्षा और अंतरिक्ष क्लाइमेट चेंज उभरती तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टर्सन, Ursula von der Leyen के साथ “European Round Table for Industry” को भी संबोधित करेंगे। नॉर्वे में नॉर्डिक समिट 18 से 19 मई तक प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा होगी। इस दौरान मोदी मुलाकात करेंगे: Harald V Sonja of Norway Jonas Gahr Støre से। इस यात्रा में व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और ब्लू इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। इटली दौरे के साथ होगा समापन अपने दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 19 से 20 मई तक इटली जाएंगे। यह यात्रा Giorgia Meloni के निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी: Sergio Mattarella से मुलाकात करेंगे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे भारत और इटली के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर बातचीत होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली गए थे। क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा? विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह दौरा भारत और यूरोप के बीच साझेदारी को नई मजबूती देगा। ऐसे समय में जब: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा हुआ है वैश्विक सप्लाई चेन दबाव में है ऊर्जा सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनी हुई है यूरोप नई आर्थिक साझेदारियां तलाश रहा है भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।