Iran और Israel के बीच जारी युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि जंग अभी खत्म होने वाली नहीं है। ‘आधे से ज्यादा सैन्य लक्ष्य हासिल’ नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई अपने “आधे से ज्यादा लक्ष्य” हासिल कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रगति मिशन के लिहाज से है, समयसीमा के अनुसार नहीं। उन्होंने युद्ध समाप्त करने की कोई तय समय-सीमा बताने से इनकार किया, जिससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अभी जारी रहेगा। क्या है इजरायल की रणनीति? नेतन्याहू के अनुसार, मौजूदा ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। इसमें उसकी मिसाइल क्षमता, हथियार उद्योग और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया है। ‘ईरानी शासन अंदर से ढह सकता है’ इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि Iran का मौजूदा शासन अंदर से कमजोर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सीधे तौर पर उनका घोषित लक्ष्य नहीं है, बल्कि मौजूदा फोकस सैन्य क्षमताओं को खत्म करने पर है। अमेरिका का रुख और दबाव इस युद्ध में United States भी इजरायल के साथ खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले कहा था कि यह जंग 4 से 6 हफ्तों तक चल सकती है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष कुछ और हफ्तों तक जारी रह सकता है, क्योंकि इससे तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। बढ़ती चिंता: वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है-खासकर ऊर्जा बाजार, कूटनीतिक रिश्तों और क्षेत्रीय स्थिरता पर।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग मंगलवार को 25वें दिन में प्रवेश कर गई। इस बीच शांति वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी दावे सामने आए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ” और “प्रोपेगेंडा” बताया है। ईरान बनाम अमेरिका: बातचीत या रणनीति? ट्रंप का दावा: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी, जल्द समझौते के संकेत ईरान का जवाब: बातचीत से इनकार, कहा- अमेरिका समय खरीदने की कोशिश कर रहा डेडलाइन: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसे अब 5 दिन बढ़ाया गया ट्रंप का कदम: ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए टाले विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती महंगाई और घरेलू दबाव के कारण ट्रंप इस युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। ईरान के अंदर क्या हो रहा है? तेहरान समेत कई शहरों में सरकार के समर्थन में रैलियां ईरान ने साफ किया- होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर रुख नहीं बदलेगा पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से बात कर शांति की अपील की खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा कुवैत: एक ही रात में 7 बार मिसाइल/ड्रोन अलर्ट सऊदी अरब: 20 ड्रोन हमले नाकाम बहरीन: लगातार चेतावनी सायरन ब्रिटेन: मिडिल ईस्ट में एयर डिफेंस सिस्टम भेजे खाड़ी देशों में सरकारें और आम लोग तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। इजराइल पर हमले और सिस्टम फेल ईरान ने इजराइल के उत्तरी हिस्से पर मिसाइल दागीं “डेविड्स स्लिंग” डिफेंस सिस्टम में खराबी, 2 मिसाइलें टकराईं हमले में कई लोग घायल इजराइली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और कहा कि सैन्य बढ़त को समझौते में बदला जा सकता है। लेबनान, इराक और सीरिया में जंग का विस्तार लेबनान: बेरूत के उपनगरों पर इजराइली हमला, हिज़्बुल्लाह को निशाना इराक: अमेरिका ने ईरान समर्थित गुट पर एयरस्ट्राइक की सीरिया: सैन्य बेस पर मिसाइल हमला विशेषज्ञों का कहना है कि इराक अब “सेकेंडरी बैटलफील्ड” बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, जिससे तेल सप्लाई पर बड़ा असर दक्षिण कोरिया: 70% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से, संकट गहराया जापान: 95% तेल इसी रास्ते से, इमरजेंसी जैसे हालात UAE: इसे “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका के अंदर भी हलचल व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत को लेकर कोई फाइनल फैसला नहीं पेंटागन ने मीडिया एक्सेस में बदलाव किया मॉरिटानिया में अमेरिकी दूतावास ने आतंकी खतरे का अलर्ट जारी किया
नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पर देश का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था से लेकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा तक महसूस किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें ईरान, अमेरिका और इजरायल शामिल हैं। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत में भी गैस आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है। भारत के सामने बहुआयामी चुनौतियां प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि यह संकट भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और मानवीय-तीनों स्तरों पर गंभीर चुनौतियां लेकर आया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के व्यापारिक और ऊर्जा संबंध गहरे हैं, और कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देते हुए अब तक लगभग 3.75 लाख भारतीयों को खाड़ी देशों से सुरक्षित वापस लाने में सफलता हासिल की है। इसे सरकार की बड़ी मानवीय और कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा संकट से निपटने की रणनीति प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत पहले से ही 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है और मौजूदा संकट के बाद वैकल्पिक स्रोतों की खोज को और तेज किया गया है। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने LPG और अन्य ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका, रूस और नाइजीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ाया है। बावजूद इसके, कुछ क्षेत्रों में गैस की कमी की आशंका बनी हुई है, हालांकि सरकार का दावा है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। वैश्विक शांति की अपील प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के देश इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है। भारत भी कूटनीतिक स्तर पर शांति और स्थिरता के पक्ष में लगातार प्रयास कर रहा है।
भारतीय मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक गिरावट के साथ पहली बार 93 के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में रुपया भारतीय रुपया 93.15 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। क्यों आई रुपया में इतनी बड़ी गिरावट रुपये में यह तेज गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों के चलते देखने को मिली है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज होती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। ‘सेफ हेवन’ की ओर भाग रहे निवेशक वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है, जो लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर के मजबूत होने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है, जिसमें रुपया भी शामिल है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जब विदेशी निवेशक अपनी पूंजी निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे रुपये की गिरावट और तेज हो जाती है। अमेरिकी फेड की नीति भी बनी वजह फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख ने भी डॉलर को मजबूती दी है। इससे वैश्विक तरलता कम हो रही है और उभरते बाजारों में निवेश आकर्षण घट रहा है। भारत पर क्या होगा असर कमजोर होता रुपया और महंगा कच्चा तेल मिलकर भारत में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। खासकर ईंधन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी और आम लोगों की जेब पर भी बोझ पड़ेगा। आगे क्या देखें अब बाजार की नजर तीन अहम कारकों पर रहेगी- पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति कच्चे तेल की कीमतों का रुख भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित दखलअंदाजी अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह युद्ध उम्मीद से कहीं जल्दी समाप्त हो सकता है। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) करने की स्थिति में है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने अपने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। “ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई” नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान के तहत ईरान के उन कारखानों को निशाना बनाया गया है, जहां मिसाइल और परमाणु हथियारों के पुर्जे तैयार किए जाते थे। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन क्षमता “तेजी से नष्ट” की जा रही है सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है अभियान “तेजी से लक्ष्य हासिल कर रहा है” उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अमेरिका की भूमिका पर क्या कहा? नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध में खींचा है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं और अमेरिका-इजरायल के बीच गहरा तालमेल है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। गैस ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला नेतन्याहू ने यह भी बताया कि अमेरिका के अनुरोध पर इजरायल ने ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्रों पर आगे हमले फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पहले किए गए हमले इजरायल ने “स्वतंत्र रूप से” किए थे। युद्ध का विस्तार संभव, जमीनी कार्रवाई के संकेत अब तक यह संघर्ष मुख्य रूप से हवाई हमलों तक सीमित रहा है, लेकिन नेतन्याहू ने संकेत दिए कि जमीनी कार्रवाई (Ground Operation) भी संभव है। उन्होंने कहा कि इसके कई विकल्प मौजूद हैं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। ईरान के अंदर अस्थिरता का दावा नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व में अंदरूनी तनाव और अस्थिरता के संकेत भी दिए। उनका कहना है कि वहां सत्ता के भीतर खींचतान बढ़ रही है और स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह स्थिति किसी बड़े जनविद्रोह में बदलेगी या नहीं। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा सैन्य बढ़त के चलते यह युद्ध उम्मीद से जल्दी समाप्त हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत, क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक दबाव इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।
दक्षिणी लेबनान से सामने आया एक चौंकाने वाला वीडियो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का कारण बन गया है। वीडियो में रूसी स्टेट ब्रॉडकास्टर RT के पत्रकार स्टीव स्विनी लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे, तभी अचानक उनके बेहद करीब एक मिसाइल आकर गिरती है और जोरदार धमाके के साथ फट जाती है। यह घटना इतनी नजदीक हुई कि कुछ सेकंड के अंतर से उनकी जान बच गई। इस हमले में स्टीव स्विनी और उनके कैमरामैन अली रिदा घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। ‘PRESS’ चिह्न के बावजूद हमला, जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप RT के अनुसार, पत्रकारों की टीम दक्षिण लेबनान के अल-कासमिया ब्रिज के पास रिपोर्टिंग कर रही थी और उनके वाहन व उपकरणों पर स्पष्ट रूप से ‘PRESS’ का निशान था। बावजूद इसके, उन पर हमला हुआ। अली रिदा ने दावा किया कि यह हमला आकस्मिक नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया था। इस घटना को लेकर रूस ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रूस के विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह हमला संयोग नहीं हो सकता और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इजरायल का जवाब: पहले ही दी गई थी चेतावनी वहीं Israel Defense Forces (IDF) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, उसे पहले ही खाली करने की चेतावनी जारी की जा चुकी थी। IDF का कहना है कि ‘पर्याप्त समय’ देने के बाद ही सैन्य कार्रवाई की गई और उनकी सेना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत काम करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल पत्रकारों को निशाना नहीं बनाता। बढ़ते संघर्ष के बीच खतरनाक हालात यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिण लेबनान में हवाई और जमीनी हमले तेज हो चुके हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत से अब तक करीब 1,000 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। रूस-इजरायल तनाव और गहराया इस हमले के बाद रूस और इजरायल के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है। रूस ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस घटना की जांच की मांग की है, खासकर उस पृष्ठभूमि में जब हाल के महीनों में संघर्ष क्षेत्रों में कई पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि युद्ध क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकार कितने सुरक्षित हैं और क्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन वास्तव में हो रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका के भीतर भी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। Washington, D.C. में स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने के ऊपर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने के बाद Donald Trump प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। सैन्य बेस के ऊपर संदिग्ध ड्रोन, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, Fort McNair के ऊपर आसमान में कई बार अज्ञात ड्रोन देखे गए। यह वही हाई-सिक्योरिटी बेस है, जहां अमेरिका के शीर्ष अधिकारी रहते हैं, जिनमें विदेश मंत्री Marco Rubio और रक्षा मंत्री Pete Hegseth शामिल हैं। एक ही क्षेत्र में बार-बार ड्रोन देखे जाने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है और पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। क्या हमले की साजिश या निगरानी? फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन ड्रोन का उद्देश्य क्या था-संभावित हमला या सिर्फ निगरानी। हालांकि, The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी बड़े हमले की तैयारी का संकेत भी हो सकता है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं की गई है। मंत्रियों की सुरक्षा पर आपात बैठक घटना के बाद व्हाइट हाउस में उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई गई। सूत्रों के मुताबिक, Marco Rubio और Pete Hegseth को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि अभी वे अपने मौजूदा ठिकाने पर ही हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ी आशंका मध्य पूर्व में Iran और United States के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस घटना को गंभीरता से देखा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात और बिगड़े, तो हमले केवल विदेशी सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि अमेरिकी मुख्य भूमि भी निशाने पर आ सकती है। सुरक्षा में खामियां और बढ़ाए गए इंतजाम विशेषज्ञों के अनुसार, Fort McNair की एक बड़ी चुनौती यह है कि यह आम आबादी के काफी नजदीक स्थित है और यहां बफर जोन सीमित है। यही वजह है कि ड्रोन की गतिविधि का पता लगाना और रोकना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। घटना के बाद: अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं लॉकडाउन जैसी सुरक्षा प्रक्रियाएं लागू की गई हैं वैश्विक स्तर पर सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है क्या बढ़ सकता है खतरा? खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो अमेरिका के भीतर और भी संवेदनशील ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज