Gold Prices

Reserve Bank of India headquarters with gold bars and foreign exchange reserve charts showing a sharp decline.
Forex Watch: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर बड़ी गिरावट, सोने के रिजर्व की वैल्यू में भारी कमी

मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 9.985 अरब डॉलर की कमी आई है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 711 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आई कमजोरी मानी जा रही है, जिससे आरबीआई के गोल्ड रिजर्व के मूल्य पर सीधा असर पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.62 अरब डॉलर पर पहुंचा आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारी गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया है। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में हुई बढ़ोतरी हालांकि कुल भंडार में गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला। समीक्षा सप्ताह के दौरान भारत की फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में 846 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद FCA का कुल आकार बढ़कर 544.290 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियां कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट बीते सप्ताह सोने की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर आरबीआई के स्वर्ण भंडार पर पड़ा। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.754 अरब डॉलर की कमी आई। अब देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 16.7 प्रतिशत है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल रिजर्व पर पड़ता है। SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली गिरावट आरबीआई के मुताबिक: विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 11 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है। क्या है विदेशी मुद्रा भंडार? विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए किया जाता है।  

surbhi जून 20, 2026 0
Gold jewelry displayed amid rising gold and silver import figures
India Gold Import: पीएम मोदी की अपील से पहले सोने के आयात में जबरदस्त उछाल, चांदी का इंपोर्ट 157% बढ़ा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में सोने और चांदी के आयात के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। Narendra Modi द्वारा लोगों से एक साल तक सोने की खरीद टालने की अपील से पहले अप्रैल महीने में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में बड़ी तेजी दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत का सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत उछलकर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। ऊंची कीमतों के बावजूद बढ़ा गोल्ड इंपोर्ट बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेश और ज्वेलरी डिमांड के चलते आयात में तेजी बनी रही। सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसका असर आयात पर दिखाई दे सकता है। वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि शुल्क बढ़ने से उपभोग आधारित मांग में कमी आ सकती है और गोल्ड इंपोर्ट घट सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चांदी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में आने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। चांदी के आयात में रिकॉर्ड तेजी वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात करीब 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण सिल्वर इंपोर्ट में तेज उछाल देखा गया है। बढ़ा व्यापार घाटा अप्रैल में सोने और चांदी के बढ़े आयात का असर देश के व्यापार घाटे पर भी पड़ा। भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सरकार का फोकस अब विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने पर है। भारत में कहां से आता है सबसे ज्यादा सोना? Switzerland भारत का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर बना हुआ है। देश के कुल गोल्ड इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद United Arab Emirates की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और South Africa की करीब 10 प्रतिशत है। अप्रैल में सिर्फ स्विट्जरलैंड से भारत का आयात 26.73 प्रतिशत बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत, China के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता माना जाता है। देश में गोल्ड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Titan jewellery showroom amid sharp fall in jewellery stocks after PM Modi’s gold buying appeal
PM मोदी की अपील के बाद टूटे ज्वेलरी शेयर, Titan समेत कई कंपनियों में बड़ी गिरावट

Titan के शेयरों में 6% से ज्यादा की गिरावट Titan Company के शेयर सोमवार को शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। कंपनी का शेयर करीब 283 रुपये गिरकर 4,230 रुपये तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान शेयर ने 4,220 रुपये का निचला स्तर भी छुआ। बाजार में यह गिरावट उस वक्त देखने को मिली जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से एक साल तक शादी के लिए सोना खरीदने से बचने की अपील की। PM मोदी के बयान से क्यों बढ़ी चिंता? हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का जिक्र करते हुए लोगों से ईंधन की बचत करने और शादी के लिए सोना खरीदने से परहेज करने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और सोना आयात करता है। इन दोनों की खरीद डॉलर में होती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार को आशंका है कि अगर सोने की खरीद में कमी आती है तो ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है, खासकर शादी के सीजन में। Titan के साथ दूसरे ज्वेलरी शेयर भी लुढ़के Kalyan Jewellers और Senco Gold समेत कई ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। Senco Gold के शेयर करीब 9% टूटे Kalyan Jewellers में लगभग 8% की गिरावट आई Titan के शेयर 6% से ज्यादा फिसले इस बिकवाली ने पूरे ज्वेलरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया। मजबूत नतीजों के बावजूद क्यों टूटा Titan? दिलचस्प बात यह रही कि Titan Company ने हाल ही में मजबूत तिमाही नतीजे जारी किए थे। कंपनी का Q4FY26 कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 35 प्रतिशत बढ़कर 1,179 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 871 करोड़ रुपये था। इसके अलावा कंपनी की कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,300 करोड़ रुपये रही। EBIT में भी 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद निवेशकों ने भविष्य में सोने की मांग घटने की आशंका को ज्यादा गंभीरता से लिया। सोने के आयात और रुपये पर दबाव चिंता की वजह रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत हर महीने औसतन 60 टन सोना आयात कर रहा था, जिसकी लागत करीब 6 अरब डॉलर प्रति माह रही। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल के बीच बढ़ता गोल्ड इंपोर्ट भारत के ट्रेड बैलेंस और रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसी वजह से बाजार में ज्वेलरी सेक्टर को लेकर फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है।  

surbhi मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0