Gulf Region

Indian External Affairs Minister S Jaishankar raises concerns over US Navy action affecting Indian sailors in Gulf waters.
US Navy हमले पर भारत का कड़ा विरोध, एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से कहा- ‘व्यावसायिक जहाजों पर घातक कार्रवाई उचित नहीं’

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का सख्त रुख खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत कर स्पष्ट कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की गहरी चिंता और विरोध अमेरिकी पक्ष के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। दो दिनों में दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया भारत सरकार ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बार भारत में अमेरिकी मिशन के प्रभारी अधिकारी (Charge d’Affaires) Jason Meeks को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। भारत ने इसे “टाला जा सकने वाला और दुखद नुकसान” बताया है। MT Settebello हमले में 3 भारतीयों की मौत सरकार के अनुसार, एमटी सेत्तेबेलो (MT Settebello) नामक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। जहाज पर कुल 24 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके अलावा अमेरिकी बलों ने ओमान तट के पास गिनी-बिसाउ ध्वज वाले टैंकर MT Jalveer के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइलें दागीं। इस जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय ने जताई गहरी चिंता विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। भारत ने अमेरिकी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तैनात उसकी सैन्य इकाइयां भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। पश्चिम एशिया संघर्ष का भारतीय नाविकों पर असर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस परिवहन होता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और नौसैनिक गतिविधियों ने न केवल समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Maritime security teams monitor vessel activity near Oman’s Shinas Port amid regional tensions.
ओमान के शिनास बंदरगाह के पास जहाज से जुड़ी नई घटना, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

  Muscat: ओमान के तट पर जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच गुरुवार को एक और समुद्री सुरक्षा घटना सामने आई है। शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मामले की निगरानी लगातार की जा रही है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावास ने दी जानकारी मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 11 जून को शिनास बंदरगाह के निकट एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना प्राप्त हुई है। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। दूतावास के अनुसार, स्थिति का आकलन किया जा रहा है और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। 24 घंटे के भीतर दूसरी समुद्री घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले को 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर समुद्री यातायात पर भी दिखाई दे रहा है, जिसके कारण क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में भारतीय मिशन भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह मामले से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है और स्थानीय प्रशासन से लगातार जानकारी प्राप्त कर रहा है। फिलहाल घटना की प्रकृति और उससे हुए संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ओमान और खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां हालात पर बारीकी से नजर रख रही हैं, जबकि क्षेत्र में जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
UAE fighter jets and Gulf region map amid rising Iran-UAE tensions after ceasefire
सीजफायर के बाद भी UAE ने किया ईरान पर हमला, रिपोर्ट में बड़ा दावा, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) की घोषणा के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सीजफायर के बाद ईरान के अंदर कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के कुछ दिनों बाद UAE ने ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर जवाबी हवाई कार्रवाई की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन स्थानों को निशाना बनाया गया उनमें फारस की खाड़ी स्थित लावन द्वीप की रिफाइनरी, होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम और अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास बंदरगाह शहर और असलुयेह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। ऊर्जा केंद्रों पर हमलों से बढ़ी चिंता रिपोर्ट के मुताबिक, असलुयेह ऊर्जा केंद्र पर हुए कथित हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। यह क्षेत्र ईरान के ऊर्जा उत्पादन और निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बताया गया है कि इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए अपने सहयोगियों पर दबाव डाला, ताकि ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को सीमित किया जा सके। अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय का दावा रिपोर्ट में मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि UAE ने ईरान के खिलाफ चलाए गए व्यापक सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय में काम किया। दावे के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद भी कुछ हफ्तों तक यह अभियान जारी रहा। हालांकि इन आरोपों पर UAE, अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खाड़ी देशों में बदली रणनीतिक स्थिति विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि UAE ने ईरान के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक आक्रामक रणनीति अपनाई है। जहां अधिकांश खाड़ी देश संघर्ष के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव से बचने की कोशिश करते रहे, वहीं UAE कथित तौर पर ईरान को सीधे जवाब देने वाले देशों में शामिल होता दिखाई देता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न तो UAE और न ही ईरान ने रिपोर्ट में बताए गए हमलों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में क्षेत्रीय घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी नए सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Iran claims air defense shot down enemy aircraft near Bushehr as US denies losing any military plane
ईरान का दावा- बुशेहर के पास अमेरिकी विमान मार गिराया, अमेरिका ने किया इस दावे को पूरी तरह खारिज

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि बुशेहर प्रांत के पास एक अमेरिकी विमान को मार गिराया गया है। अमेरिका ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट कहा है कि बुशेहर क्षेत्र में अमेरिका का कोई विमान नष्ट नहीं हुआ और ईरानी मीडिया की रिपोर्ट गलत है। ईरानी सरकारी टीवी ने “दुश्मन विमान” गिराने का किया दावा ईरान के सरकारी टीवी ने शुक्रवार 29 मई को दावा किया कि बुशेहर प्रांत के जाम इलाके में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने एक “दुश्मन विमान” को निशाना बनाकर मार गिराया। रिपोर्ट में जाम काउंटी के गवर्नर मसूद तंगस्तानी के हवाले से कहा गया कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक विमान को तबाह कर दिया। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, मसूद तंगस्तानी ने कहा कि रात के समय यह कार्रवाई की गई और इसके बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी हुई है। अमेरिका ने कहा- कोई विमान नहीं गिराया गया ईरानी दावों के सामने आने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। CENTCOM ने कहा कि ईरान में अमेरिकी विमान गिराए जाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं और उस क्षेत्र में अमेरिका का कोई विमान नष्ट नहीं हुआ है। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि बुशेहर प्रांत के ऊपर अमेरिकी सैन्य विमान गिराए जाने का दावा तथ्यहीन है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा तनाव यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और बयानबाजी में तेजी देखी गई है। इसी बीच युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर भी कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। युद्धविराम और जहाजों की आवाजाही पर चल रही बातचीत रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही आसान बनाने को लेकर बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और बातचीत जारी है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी बयानबाजी और सैन्य दावों से क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Satellite imagery showing damage at US military bases in the Middle East after reported Iranian strikes
Middle East War: ईरानी हमलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान! 8 देशों में 16 बेस क्षतिग्रस्त होने का दावा

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों में 8 देशों में फैले अमेरिका के कम से कम 16 सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य रणनीति और सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। CNN रिपोर्ट में बड़ा दावा CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जांच और सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने हालिया हमलों में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में खासतौर पर: एडवांस्ड रडार सिस्टम कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर एयरक्राफ्ट और सपोर्ट सिस्टम को टारगेट किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ठिकाने इतने ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए हैं कि वे फिलहाल आंशिक इस्तेमाल के लायक भी नहीं बचे। 8 देशों में फैले ठिकाने बने निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के जिन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के 8 अलग-अलग देशों में स्थित हैं। हालांकि सभी देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह अमेरिकी क्षेत्रीय सैन्य नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन ठिकानों का इस्तेमाल आमतौर पर: निगरानी अभियानों एयर ऑपरेशंस लॉजिस्टिक सपोर्ट क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय के लिए किया जाता है। मरम्मत या बंद? अमेरिका के सामने चुनौती रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और खाड़ी देशों के अधिकारियों के बीच इस बात पर मतभेद है कि इन ठिकानों की मरम्मत की जाए या कुछ को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। कुछ अधिकारी मानते हैं कि इन ठिकानों को दोबारा तैयार करना बेहद महंगा और समय लेने वाला होगा। वहीं, रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन बेस को छोड़ना अमेरिका के लिए क्षेत्रीय प्रभाव कम कर सकता है। महंगे सिस्टम को हुआ नुकसान ईरानी हमलों में जिन सिस्टम्स को नुकसान पहुंचा है, उनमें हाई-टेक रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिस्टम सीमित संख्या में उपलब्ध होते हैं और इन्हें बदलना काफी महंगा साबित हो सकता है। यही वजह है कि इन हमलों को सिर्फ सामरिक नहीं, बल्कि आर्थिक झटका भी माना जा रहा है। युद्ध में अमेरिका का भारी खर्च पेंटागन के कंट्रोलर जूल्स जे हर्स्ट III ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि ईरान के साथ संघर्ष में अब तक अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। हालांकि कुछ आकलनों के मुताबिक, वास्तविक खर्च 40 से 50 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। अमेरिकी मौजूदगी पर उठे सवाल मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी लंबे समय से उसकी रणनीतिक नीति का हिस्सा रही है। लेकिन लगातार हमलों और बढ़ते खर्च ने इस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। बढ़ता क्षेत्रीय तनाव ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। परमाणु विवाद, समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों में टकराव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आगे क्या? फिलहाल अमेरिका की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन रिपोर्ट्स के बाद यह साफ है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि अब सैन्य ढांचे को भी सीधे प्रभावित कर रहा है।

surbhi मई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 10, 2026 0