मुंबई: अभिनेता वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर स्टारर रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai' बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए हुए है। डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने रिलीज के पांचवें दिन यानी पहले मंगलवार को लगभग ₹3.50 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म का कुल भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ₹30.50 करोड़ नेट तक पहुंच गया है। Day 5 पर हल्की बढ़त सोमवार को फिल्म ने ₹3.25 करोड़ का कारोबार किया था, जबकि डिस्काउंट ऑफर्स वाले मंगलवार को कलेक्शन में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली और फिल्म ने करीब ₹3.50 करोड़ की कमाई की। अब तक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिन कलेक्शन Day 1 ₹7.75 करोड़ Day 2 ₹7.50 करोड़ Day 3 ₹8.50 करोड़ Day 4 ₹3.25 करोड़ Day 5 ₹3.50 करोड़ (अनुमानित) कुल ₹30.50 करोड़ नेट पहले सप्ताह में ₹35 करोड़ तक पहुंच सकती है फिल्म मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए माना जा रहा है कि फिल्म अपने पहले सप्ताह का समापन लगभग ₹35 करोड़ नेट के आसपास कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म का लाइफटाइम बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ₹50 से ₹60 करोड़ के बीच रह सकता है। वरुण धवन की पिछली फिल्मों जैसी राह फिल्म का प्रदर्शन वरुण धवन की पिछली रिलीज 'Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari' के ट्रेंड से मिलता-जुलता माना जा रहा है। हालांकि यह कलेक्शन किसी बड़े ब्लॉकबस्टर की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन फिल्म के लिए एक सम्मानजनक प्रदर्शन माना जा सकता है। OTT प्लेटफॉर्म्स का असर? फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि पोस्ट-पैंडेमिक दौर में रोमांटिक कॉमेडी और मिड-बजट फिल्मों को सिनेमाघरों में दर्शक जुटाने में मुश्किल हो रही है। इसकी एक बड़ी वजह तेजी से बढ़ती OTT खपत और कम समय में फिल्मों का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो जाना भी माना जा रहा है।
वरुण धवन की बहुप्रतीक्षित रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai आज 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। रिलीज के साथ ही फिल्म का पहला रिव्यू भी सामने आ गया है। जाने-माने ट्रेड एनालिस्ट Taran Adarsh ने फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार देते हुए इसे एक मनोरंजन से भरपूर फैमिली एंटरटेनर बताया है। तरण आदर्श ने की डेविड धवन की तारीफ रिव्यू में तरण आदर्श ने कहा कि निर्देशक David Dhawan ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हल्की-फुल्की कॉमेडी और मनोरंजक फिल्मों के मामले में उनकी पकड़ आज भी बरकरार है। उनके मुताबिक, यह फिल्म दर्शकों को रोजमर्रा के तनाव से दूर ले जाकर हंसाने और मनोरंजन करने का काम करती है। अगर दर्शक फिल्म में तर्क और वास्तविकता की बजाय मनोरंजन की तलाश में सिनेमाघर पहुंचते हैं, तो उन्हें निराशा नहीं होगी। तरण आदर्श का कहना है कि डेविड धवन की फिल्मों की पहचान हमेशा से रोमांस, कॉमेडी, गलतफहमियों, रंगीन किरदारों और संगीत के मिश्रण से रही है और इस फिल्म में भी वही सफल फॉर्मूला देखने को मिलता है। कहानी में कॉमेडी और मनोरंजन का तड़का रिव्यू के अनुसार फिल्म की कहानी तेज गति से आगे बढ़ती है और अधिकांश कॉमिक सीक्वेंस दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं। मजेदार डायलॉग, हास्यपूर्ण स्थितियां और बड़े पर्दे के लिए तैयार किया गया ट्रीटमेंट फिल्म को मनोरंजक बनाता है। कई ऐसे दृश्य हैं जो दर्शकों को खुलकर हंसने का मौका देते हैं। हालांकि तरण आदर्श ने यह भी कहा कि लगभग दो घंटे की अवधि वाली फिल्म के दूसरे भाग में कुछ दृश्य थोड़े लंबे महसूस हो सकते हैं, जिससे गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ती है। वरुण धवन की परफॉर्मेंस को मिली सराहना फिल्म में Varun Dhawan के अभिनय की विशेष रूप से तारीफ की गई है। तरण आदर्श के अनुसार, वरुण ने शानदार कॉमिक टाइमिंग, ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ अपने किरदार को जीवंत बनाया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस किरदार के लिए वरुण धवन की कास्टिंग पर सवाल उठा रहे थे, उन्हें फिल्म देखने के बाद जवाब मिल जाएगा। मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े ने भी जीता दिल फिल्म की दोनों प्रमुख अभिनेत्रियों Mrunal Thakur और Pooja Hegde को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। दोनों ने अपनी स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय से कहानी को मजबूती दी है। सपोर्टिंग कास्ट ने बढ़ाया फिल्म का मनोरंजन फिल्म में Jimmy Shergill, Mouni Roy, Chunky Pandey, Maniesh Paul और Rajesh Kumar ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा Johnny Lever, Rajpal Yadav, Ali Asgar, Manoj Pahwa और Kubbra Sait छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदारों में नजर आते हैं, जो फिल्म के हास्य तत्व को और मजबूत बनाते हैं। कैसी है फिल्म? पहले रिव्यू के आधार पर कहा जा सकता है कि ‘है जवानी तो इश्क होना है’ एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को लॉजिक नहीं बल्कि मनोरंजन देने के उद्देश्य से बनाई गई है। अगर आप हल्की-फुल्की कॉमेडी, रोमांस और फैमिली एंटरटेनमेंट पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।
बॉलीवुड अभिनेता Varun Dhawan इन दिनों अपनी आगामी फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसी बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह बॉलीवुड के दिग्गज सितारों की मिमिक्री करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो में हुई एक छोटी सी गलती ने उन्हें ट्रोलर्स के निशाने पर ला दिया। क्या है वायरल वीडियो में? सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वरुण धवन कुछ लोगों के साथ बातचीत करते दिखाई देते हैं। वीडियो का कॉन्सेप्ट यह है कि अगर बॉलीवुड सितारे क्रिकेट मैदान पर उतरें तो उनका अंदाज कैसा होगा। इस दौरान वरुण से पूछा जाता है कि अगर Salman Khan बल्लेबाजी करें तो वह कैसे खेलेंगे। सवाल सुनते ही वरुण हाथ में बैट लेकर सलमान खान की स्टाइल कॉपी करने लगते हैं। इसके बाद वह Shah Rukh Khan का मशहूर बाहें फैलाने वाला पोज भी देते हैं और अंत में Govinda के अंदाज में डांस स्टेप्स करके दिखाते हैं। वीडियो में मौजूद लोग उनकी एक्टिंग देखकर हंसते और एन्जॉय करते नजर आते हैं। आखिर किस बात पर भड़के यूजर्स? वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की नजर एक ऐसी बात पर गई, जिसने ट्रोलिंग को जन्म दे दिया। दरअसल, सलमान खान वास्तविक जीवन में बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं, जबकि वरुण धवन ने उनकी नकल करते हुए दाएं हाथ से बैटिंग की एक्टिंग की। यही बात सलमान के फैंस को पसंद नहीं आई। कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने लिखा कि अगर किसी स्टार की मिमिक्री कर रहे हैं तो उसकी बेसिक जानकारी तो होनी चाहिए। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि "सलमान भाई लेफ्टी हैं, ये भी नहीं पता?" वहीं कुछ यूजर्स ने वरुण की परफॉर्मेंस को ओवरएक्टिंग बताते हुए आलोचना की। हालांकि, कई फैंस ने इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया गया हल्का-फुल्का वीडियो बताते हुए ट्रोलिंग को जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया भी करार दिया। 5 जून को रिलीज होगी नई फिल्म वर्कफ्रंट की बात करें तो वरुण धवन की आगामी फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म का निर्देशन उनके पिता David Dhawan ने किया है, जो लंबे समय से कॉमेडी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में वरुण के साथ Mrunal Thakur और Pooja Hegde मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। इसके अलावा Maniesh Paul, Chunky Pandey, Jimmy Shergill और Mouni Roy भी फिल्म का हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा में बना वीडियो फिल्म की रिलीज से पहले यह वीडियो इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोर रहा है। जहां कुछ लोग वरुण की मिमिक्री स्किल्स की तारीफ कर रहे हैं, वहीं सलमान खान के फैंस उनकी छोटी सी गलती को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
बॉलीवुड अभिनेता Varun Dhawan और अभिनेत्री Mrunal Thakur की बहुप्रतीक्षित फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से चर्चा में बनी इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म का फर्स्ट लुक 13 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट में भी अहम बदलाव किया है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। फिल्म के फर्स्ट लुक में Varun Dhawan का एनर्जेटिक अंदाज और Mrunal Thakur की फ्रेश स्क्रीन प्रेजेंस देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर इस झलक को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। फिल्म का टोन हल्का-फुल्का, मनोरंजक और पूरी तरह फैमिली एंटरटेनमेंट वाला नजर आ रहा है। इस फिल्म की एक और बड़ी खासियत है कि इसका निर्देशन दिग्गज फिल्ममेकर David Dhawan ने किया है। इससे पहले Varun Dhawan और David Dhawan की जोड़ी ‘मैं तेरा हीरो’ और ‘जुड़वा 2’ जैसी सफल फिल्मों में साथ काम कर चुकी है। यह उनकी तीसरी फिल्म है, जिससे दर्शकों को एक बार फिर हिट कॉमेडी की उम्मीद है। फिल्म में Pooja Hegde और Mouni Roy भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे फिल्म का स्टार पावर और बढ़ गया है। रिलीज डेट में बदलाव पहले यह फिल्म 12 जून 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसे प्रीपोन कर दिया है। नई घोषणा के अनुसार, Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai अब 22 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यानी दर्शकों को अब इस फिल्म के लिए कम इंतजार करना पड़ेगा। फर्स्ट लुक और रिलीज डेट में बदलाव के साथ ही फिल्म ने रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत चर्चा बना ली है। अब देखना होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।