Higher Education

Ranchi University Data Science Courses
रांची विश्वविद्यालय में पहली बार शुरू होगी डेटा साइंस की पढ़ाई

रांची। रांची विश्वविद्यालय (आरयू) अपने शैक्षणिक ढांचे में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में 17 जून को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। इनमें प्रोफेशनल विभागों को स्कूल मॉडल में बदलने, नए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने, करियर काउंसिलिंग सेंटर की स्थापना, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम लागू करने और विभिन्न पाठ्यक्रमों में संशोधन जैसे अहम निर्णय शामिल हैं।   पहली बार शुरू होगी डेटा साइंस की पढ़ाई बता दे  रांची विश्वविद्यालय पहली बार एमएससी डेटा साइंस और एमए/एमएससी स्टैटिस्टिक्स के नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए इन कोर्सों को तैयार किया गया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल से लैस कर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।   स्कूल मॉडल के तहत बदलेगी विभागों की पहचान इतना ही नहीं नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय के चार प्रोफेशनल और वोकेशनल विभागों को 'यूनिवर्सिटी स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस) का नाम बदलकर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज किया जाएगा। वहीं एमसीए और एमएससी आईटी विभागों का विलय कर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बनाया जाएगा। इसके अलावा मास कम्युनिकेशन विभाग को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन तथा लीगल स्टडीज विभाग को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।   नई शिक्षा नीति के अनुरूप होंगे बदलाव बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की नई गाइडलाइन के अनुरूप पाठ्यक्रमों और प्रमाणपत्रों के स्वरूप में बदलाव पर भी निर्णय लिया जाएगा। साथ ही करियर काउंसिलिंग सेंटर, दो नए विशेष केंद्रों की स्थापना और गुमला के कार्तिक उरांव कॉलेज सहित अन्य संस्थानों में शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार के प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं।

anjali kumari जून 12, 2026 0
RU Admissions
RU: 24 कॉलेजों की 43,530 सीटों के लिए चांसलर पोर्टल पर आवेदन शुरू

रांची। रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) प्रशासन ने अपने अंतर्गत आने वाले 24 अंगीभूत कॉलेजों की 43,530 सीटों पर स्नातक (UG) एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र 2026-30 (चार वर्षीय रेगुलर कोर्स) और वोकेशनल कोर्स सत्र 2026-29 के लिए शुरू की गई है। इच्छुक छात्र चांसलर पोर्टल के माध्यम से 12 जून से 29 जून तक ऑनलाइन आवेदन भर सकेंगे। बड़ा बदलाव: बॉटनी और जूलॉजी की बजाय 'लाइफ साइंस'...   स्नातक स्तर पर इस सत्र से एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब बॉटनी और जूलॉजी को अलग-अलग विषय के रूप में हटाकर 'लाइफ साइंस' के तहत शामिल कर दिया गया है। ऐसे में इस वर्ष एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को बॉटनी या जूलॉजी के बजाय 'लाइफ साइंस' विषय के लिए आवेदन करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत लिए गए इस फैसले का असर सिर्फ अंगीभूत कॉलेजों तक ही सीमित नहीं रहेगा। आरयू से संबद्ध और अल्पसंख्यक कॉलेजों में नामांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले से चल रही है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहले ही बॉटनी और जूलॉजी विषय चुनकर आवेदन कर दिया है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद, इन पहले से आए आवेदनों को भी नई प्रणाली के अनुरूप लाइफ साइंस में समायोजित किया जाएगा।   एडमिशन शेड्यूल (यूजी)   आवेदन की शुरुआत: 12 जून आवेदन की अंतिम तिथि: 29 जून फर्स्ट सेलेक्शन लिस्ट: 3 जुलाई डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: 4 से 14 जुलाई 24 कॉलेजों में सीटों की संख्या 1    मारवाड़ी कॉलेज    3700 2    केओ कॉलेज गुमला    3240 3    रांची वीमेंस कॉलेज    3210 4    एसएसएम कॉलेज    3100 5    बीएस कॉलेज लोहरदगा    2940 6    बिरसा कॉलेज खूंटी    2640 7    आरएलएसवाई कॉलेज    2640 8    पीपीके कॉलेज बुंडू    2580 9    डोरंडा कॉलेज    2440 10    मांडर कॉलेज    2100 11    सिमडेगा कॉलेज सिमडेगा    2040 12    जेएन कॉलेज    1740 13    केसीबी कॉलेज बेड़ो    1740 14    बीएन जलान कॉलेज सिसई    1320 15    डिग्री कॉलेज, खिजरी    900 16    डिग्री कॉलेज सिल्ली    900 17    डिग्री कॉलेज विष्णुपुर    900 18    डिग्री कॉलेज तोरपा    900 19    डिग्री कॉलेज कोलेबिरा    900 20    मॉडल कॉलेज गुमला    720 21    वीमेंस कॉलेज गुमला    720 22    वीमेंस कॉलेज खूंटी    720 23    वीमेंस कॉलेज लोहरदगा    720 24    वीमेंस कॉलेज सिमडेगा    720

anjali kumari जून 12, 2026 0
Indian currency notes with digital misinformation alert and RBI fact check verification notice.
Fact Check: क्या 30 जून से भारत में चलेंगे प्लास्टिक के नोट? RBI ने वायरल दावों की बताई सच्चाई

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 से भारत में कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक करेंसी शुरू कर दी जाएगी। वीडियो में यह भी कहा गया है कि 10, 20, 50 और 100 रुपये के मौजूदा नोट धीरे-धीरे बंद कर दिए जाएंगे। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इन दावों को पूरी तरह फर्जी बताया है। सोशल मीडिया पर क्या किया जा रहा है दावा? वायरल वीडियो में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार और RBI जल्द ही पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने वाले हैं और 30 जून 2026 तक पुराने कागजी नोटों को बदल दिया जाएगा। वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित आवाज का भी इस्तेमाल किया गया है। क्या है वायरल दावे की सच्चाई? इन दावों के सामने आने के बाद प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने फैक्ट चेक जारी कर स्थिति स्पष्ट की। RBI के हवाले से बताया गया कि फिलहाल कागज के नोटों को वापस लेने या उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी लाने की कोई योजना नहीं है। PIB ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो डिजिटल रूप से एडिट किया गया है और उसमें किए गए दावे भ्रामक हैं। लोगों से क्या अपील की गई? सरकार ने लोगों से अपील की है कि नोटों और बैंकिंग से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी संदेश या वीडियो को बिना जांचे-परखे साझा न करें। अगर किसी को सरकार से जुड़ा कोई संदिग्ध या फर्जी कंटेंट दिखाई देता है, तो उसकी शिकायत @PIBFactCheck के माध्यम से की जा सकती है। किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट? दुनिया के कई देशों में पॉलीमर आधारित नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। प्लास्टिक के नोट कैसे बनते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, ये नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बल्कि पॉलीमर सामग्री, विशेष रूप से पॉलीप्रोपलीन से बनाए जाते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं तथा जल्दी खराब नहीं होते।  

surbhi जून 11, 2026 0
MGM Medical College
जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव मिली मंजूरी

रांची। झारखंड में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान रिम्स रांची में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में रिम्स प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है।   केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए प्रति सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत रिम्स में UG सीटों को 180 से बढ़ाकर 250, PG सीटों को 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटों को 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है।   MGM और धनबाद मेडिकल कॉलेज को मिल चुकी मंजूरी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, धनबाद मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 100 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 19 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को भी भारत सरकार की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।   PPP मॉडल पर बनेंगे नए छात्रावास रिम्स-टू परियोजना के तहत छात्रावास निर्माण के लिए नई रणनीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हॉस्टल निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के वायबिलिटी गैप फंड (VGF) से सहायता लेने की योजना है। इससे सरकारी खर्च कम होगा और छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।   चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम सीटों में बढ़ोतरी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से झारखंड में मेडिकल शिक्षा को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे राज्य के छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

anjali kumari जून 11, 2026 0
IGNOU M.Sc Climate Change
क्लाइमेट चेंज में करियर बनाने का सुनहरा मौका, IGNOU ने शुरू किया नया M.Sc. कोर्स

पटना, एजेंसियां । जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने एमएससी इन क्लाइमेट चेंज कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके साथ ही इग्नू इस विषय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने वाली देश की पहली ओपन यूनिवर्सिटी बन गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 जुलाई 2026 तक इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।   दो वर्षीय कोर्स, 80 क्रेडिट की संरचना विश्वविद्यालय के अनुसार यह दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम है, जिसमें कुल 80 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) होना आवश्यक है। खास बात यह है कि पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थी चाहें तो पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज भी प्राप्त कर सकते हैं।   जलवायु संकट से निपटने के लिए तैयार होंगे विशेषज्ञ इग्नू ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का वैज्ञानिक, व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान विकसित करने वाले प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना है। दुनिया भर में बढ़ते तापमान, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय संकटों को देखते हुए इस कार्यक्रम को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।   पाठ्यक्रम में शामिल होंगे महत्वपूर्ण विषय एमएससी क्लाइमेट चेंज कोर्स में विद्यार्थियों को जलवायु विज्ञान, जलवायु जोखिम, अनुकूलन एवं शमन रणनीतियां, पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके अलावा जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा प्रणाली, कृषि, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, कचरा प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, पर्यावरण कानून और जलवायु आकलन जैसे महत्वपूर्ण विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।   छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए अवसर इग्नू ने छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों से इस पाठ्यक्रम में नामांकन लेने की अपील की है। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह कार्यक्रम युवाओं को जलवायु परिवर्तन की वास्तविक चुनौतियों को समझने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार करेगा।

anjali kumari जून 10, 2026 0
IIT Bombay campus featured as top engineering institute in IIRF Ranking 2026.
इंजीनियरिंग में IIT बॉम्बे नंबर-1, यूनिवर्सिटी कैटेगरी में JNU टॉप, IIRF Ranking 2026 जारी

देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की बहुप्रतीक्षित IIRF (Indian Institutional Ranking Framework) Ranking 2026 जारी कर दी गई है। इस वर्ष की रैंकिंग में इंजीनियरिंग, यूनिवर्सिटी और मैनेजमेंट शिक्षा के क्षेत्र में देश के प्रमुख संस्थानों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इंजीनियरिंग श्रेणी में Indian Institute of Technology Bombay ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि यूनिवर्सिटी कैटेगरी में Jawaharlal Nehru University शीर्ष पर रही। वहीं मैनेजमेंट संस्थानों में Indian Institute of Management Ahmedabad ने अपना दबदबा कायम रखा है। IIRF रैंकिंग उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन कई महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर करती है। इनमें शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य, उद्योगों के साथ सहयोग, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, अंतरराष्ट्रीय पहचान और छात्रों के भविष्य के अवसर शामिल हैं। इस वर्ष की रैंकिंग में IIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों का वर्चस्व स्पष्ट रूप से देखने को मिला। इंजीनियरिंग में IIT बॉम्बे का जलवा इंजीनियरिंग संस्थानों की सूची में Indian Institute of Technology Bombay ने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद Indian Institute of Technology Delhi, Indian Institute of Technology Madras, Indian Institute of Technology Kanpur और Indian Institute of Technology Kharagpur को शीर्ष संस्थानों में जगह मिली। टॉप 10 IIT संस्थान (IIRF 2026) रैंक संस्थान 1 IIT बॉम्बे 2 IIT दिल्ली 3 IIT मद्रास 4 IIT कानपुर 5 IIT खड़गपुर 6 IIT रुड़की 7 IIT हैदराबाद 8 IIT गुवाहाटी 9 IIT (BHU) 10 IIT इंदौर यूनिवर्सिटी कैटेगरी में JNU शीर्ष पर यूनिवर्सिटी श्रेणी में Jawaharlal Nehru University ने पहला स्थान हासिल किया। विश्वविद्यालय ने अपने मजबूत रिसर्च रिकॉर्ड, अकादमिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया भी टॉप संस्थानों में शामिल University of Delhi और Jamia Millia Islamia ने भी इस वर्ष की रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन किया है। दोनों संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रिसर्च और बेहतर प्लेसमेंट रिकॉर्ड के लिए लंबे समय से जाने जाते हैं। मैनेजमेंट शिक्षा में IIM अहमदाबाद अव्वल मैनेजमेंट संस्थानों की श्रेणी में Indian Institute of Management Ahmedabad शीर्ष स्थान पर रहा। संस्थान लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध और प्लेसमेंट प्रदर्शन के लिए पहचान बना रहा है। छात्रों के लिए IIRF रैंकिंग कॉलेज और विश्वविद्यालय चुनने का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। यह रैंकिंग संस्थानों की शिक्षा गुणवत्ता, रिसर्च क्षमता, प्लेसमेंट अवसरों और उद्योग जगत से जुड़ाव का व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है।  

surbhi जून 3, 2026 0
Ranchi University Admission
डीएसपीएमयू और रांची यूनिवर्सिटी में यूजी एडमिशन प्रक्रिया शुरू

रांची। 12 वीं पास विद्यार्थियों के लिए खुशखबरी है। रांची विश्वविद्यालय और डीएसपीएमयू  में नए शैक्षणिक सत्र 2026-30 के लिए स्नातक नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। छात्रों के लिए चांसलर पोर्टल खोल दिया गया है, जिसके माध्यम से यूजी रेगुलर और वोकेशनल कोर्स में आवेदन किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवेदन की अंतिम तिथि, चयन सूची जारी करने और कक्षाएं शुरू करने की तारीखों की भी घोषणा कर दी है। डीएसपीएमयू ने पहली बार स्नातक सत्र 2026-30 के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की है। साथ ही विश्वविद्यालय ने यह भी निर्णय लिया है कि नई कक्षाएं 3 अगस्त 2026 से शुरू कर दी जाएंगी। राज्य सरकार ने भी सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई तक नामांकन प्रक्रिया हर हाल में पूरी कर ली जाए, ताकि शैक्षणिक सत्र नियमित रह सके।   26 जून को जारी होगी पहली चयन सूची डीएसपीएमयू में आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू कर दी गई है। छात्र 13 जून 2026 तक चांसलर पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पहली चयन सूची 26 जून 2026 को जारी की जाएगी। इसके बाद चयनित छात्रों का दस्तावेज सत्यापन और नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दूसरी ओर रांची विश्वविद्यालय के कुछ अंगीभूत कॉलेजों में क्लस्टर सिस्टम को लेकर चल रहे विवाद के कारण नामांकन प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है। हालांकि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कई अल्पसंख्यक और संबद्ध कॉलेजों में आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।   अल्पसंख्यक कॉलेजों में भी आवेदन शुरू जबकि, विश्वविद्यालय अंतर्गत अल्पसंख्यक कॉलेज संत जेवियर्स कॉलेज, गोस्सनर कॉलेज, निर्मला कॉलेज, मौलाना आजाद कॉलेज, योगदा सत्संग कॉलेज और अन्य सहित संबद्ध कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया चांसलर पोर्टल से शुरू कर दी गई है।  विश्वविद्यालय की अधिसूचना के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 13 जून तय की गई है। पहली चयन सूची 18 जून को जारी होगी, जबकि दस्तावेज सत्यापन और नामांकन प्रक्रिया 19 से 30 जून तक चलेगी।

Unknown मई 28, 2026 0
cm samrat announcement
CM सम्राट ने किया ऐलान : बिहार में शिक्षा के लिए जमीन देने वालों पर बनेंगे डिग्री कॉलेज

पटना, एजेंसियां। बिहार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि जिन लोगों द्वारा डिग्री कॉलेज खोलने के लिए जमीन दान दी जाएगी, उनके नाम पर कॉलेज या उसके किसी हिस्से का नाम रखा जाएगा। यह घोषणा उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान की गई।   211 प्रखंडों में शुरू होगी डिग्री की पढ़ाई मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 211 ऐसे प्रखंड, जहां अभी तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां 1 जुलाई से डिग्री स्तर की पढ़ाई शुरू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के विद्यार्थियों को उनके क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें दूसरे शहरों में जाने की परेशानी न उठानी पड़े।   विक्रमशिला यूनिवर्सिटी के लिए जल्द मिलेगी जमीन बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रस्तावित विक्रमशिला यूनिवर्सिटी के लिए राज्य सरकार जल्द ही केंद्र सरकार को जमीन उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने देश की प्रमुख ओपन यूनिवर्सिटीज का अध्ययन कर बिहार में भी नई ओपन यूनिवर्सिटी स्थापित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए।   आंशिक सहयोग करने वालों को भी सम्मान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति कॉलेज निर्माण में आंशिक सहयोग करता है, तो उसके नाम पर भी कॉलेज के किसी हिस्से का नामकरण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि नए कॉलेज ऐसे स्थानों पर बनाए जाएं जहां विद्यार्थियों को पहुंचने में सुविधा हो।   टॉप यूनिवर्सिटीज से होगा समझौता उच्च शिक्षा विभाग को देश की शीर्ष 10 यूनिवर्सिटीज के साथ एमओयू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि बिहार के कॉलेजों को बेहतर शैक्षणिक सहयोग और गुणवत्ता मिल सके। बैठक में विभागीय सचिव राजीव रौशन ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, शिक्षकों के पद सृजन और विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी।

Unknown मई 27, 2026 0
Business professional studying management research concepts highlighting the growing popularity of DBA degree programs.
MBA और PhD के बाद बढ़ा DBA का क्रेज, जानिए क्या है यह ‘पावर डिग्री’

आज के समय में कॉरपोरेट दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ ही प्रोफेशनल एजुकेशन का ट्रेंड भी बदलता जा रहा है। लंबे समय तक Master of Business Administration और Doctor of Philosophy को मैनेजमेंट की सबसे बड़ी डिग्री माना जाता था, लेकिन अब एक नई डिग्री तेजी से लोकप्रिय हो रही है – DBA यानी Doctor of Business Administration। DBA को बिजनेस और मैनेजमेंट सेक्टर की हाई-लेवल डॉक्टरेट डिग्री माना जाता है। खास बात यह है कि इस डिग्री को पूरा करने के बाद उम्मीदवार अपने नाम के आगे “Dr.” भी लगा सकते हैं। क्या है DBA? Doctor of Business Administration यानी DBA एक प्रोफेशनल डॉक्टरेट डिग्री है, जिसे खासतौर पर अनुभवी कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स और सीनियर मैनेजर्स के लिए डिजाइन किया गया है। यह डिग्री उन लोगों के लिए होती है जो बिजनेस की वास्तविक समस्याओं पर रिसर्च करना चाहते हैं और अपने प्रैक्टिकल अनुभव को अकादमिक पहचान देना चाहते हैं। इसमें पढ़ाई का फोकस सिर्फ थ्योरी पर नहीं, बल्कि रियल बिजनेस चैलेंज को सॉल्व करने पर होता है। MBA और DBA में क्या अंतर है? MBA क्या है? Master of Business Administration एक पोस्टग्रेजुएट डिग्री है, जिसे ज्यादातर छात्र ग्रेजुएशन के बाद या शुरुआती वर्क एक्सपीरियंस के साथ करते हैं। इस कोर्स में: मैनेजमेंट के बेसिक्स बिजनेस स्ट्रेटेजी मार्केटिंग फाइनेंस लीडरशिप जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। DBA कैसे अलग है? Doctor of Business Administration MBA से कहीं अधिक एडवांस और हाई-लेवल डिग्री मानी जाती है। DBA में एडमिशन के लिए आमतौर पर: MBA डिग्री 3 से 5 साल का कॉरपोरेट अनुभव जरूरी माना जाता है। यह कोर्स उन लोगों के लिए होता है जो: CXO लेवल तक पहुंचना चाहते हैं इंटरनेशनल बिजनेस लीडरशिप में जाना चाहते हैं रिसर्च और कॉरपोरेट स्ट्रेटेजी में विशेषज्ञ बनना चाहते हैं क्या DBA के बाद ‘Doctor’ लगा सकते हैं? हां, DBA एक मान्यता प्राप्त डॉक्टरेट लेवल की डिग्री है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद उम्मीदवार अपने नाम के आगे “Dr.” लगा सकते हैं। कॉरपोरेट और इंटरनेशनल बिजनेस कम्युनिटी में DBA होल्डर्स को काफी सम्मान दिया जाता है और इन्हें कई मामलों में PhD होल्डर्स के बराबर माना जाता है। भारत में कहां से कर सकते हैं DBA? भारत में कई बड़े संस्थान DBA या इसके समकक्ष प्रोग्राम ऑफर करते हैं। प्रमुख संस्थान Indian Institute of Management Ahmedabad Indian Institute of Management Bangalore Indian Institute of Management Calcutta यहां Executive FPM प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं, जिन्हें DBA के बराबर माना जाता है। Indian School of Business यहां Executive DBA (EDBA) प्रोग्राम उपलब्ध है। SP Jain Institute of Management and Research BITS Pilani upGrad Symbiosis International University ये प्लेटफॉर्म विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर ऑनलाइन DBA प्रोग्राम भी ऑफर करते हैं। DBA करने के क्या फायदे हैं? कॉरपोरेट दुनिया में हाई-लेवल पहचान CXO और टॉप लीडरशिप रोल्स के अवसर रिसर्च और कंसल्टिंग करियर में फायदा इंटरनेशनल नेटवर्किंग “Doctor” टाइटल का सम्मान

surbhi मई 22, 2026 0
IIM Ranchi campus celebrates entry into QS Executive MBA Rankings 2026 globally
IIM रांची का ग्लोबल मंच पर परचम: QS Executive MBA Ranking 2026 में पहली बार बनाई जगह

झारखंड के लिए गर्व की बात है कि Indian Institute of Management Ranchi ने पहली बार प्रतिष्ठित QS Executive MBA Ranking 2026 में अपनी जगह बना ली है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब IIM रांची वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है। देश में चौथा स्थान, ग्लोबल और एशिया-पैसिफिक में भी मजबूत उपस्थिति इस रैंकिंग में Indian Institute of Management Ranchi ने भारत के अन्य IIMs के बीच चौथा स्थान हासिल किया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर इसे 201+ बैंड में जगह मिली है और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में 33वां स्थान प्राप्त हुआ है। QS Executive MBA Ranking दुनिया की सबसे विश्वसनीय और प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल रैंकिंग्स में से एक मानी जाती है। किन मानकों पर होती है रैंकिंग? QS Executive MBA Ranking में संस्थानों का मूल्यांकन कई अहम मानकों पर किया जाता है, जिनमें प्लेसमेंट पैकेज, अकादमिक प्रतिष्ठा, करियर ग्रोथ, प्रोफेशनल प्रोफाइल और स्टूडेंट डाइवर्सिटी शामिल हैं। सरल शब्दों में, यह रैंकिंग इस बात का आकलन करती है कि किसी संस्थान से पढ़ाई के बाद छात्रों को कितने बेहतर करियर अवसर मिलते हैं और इंडस्ट्री में उनकी वैल्यू कितनी बढ़ती है। करियर ग्रोथ और इंडस्ट्री कनेक्शन बने सफलता की कुंजी IIM रांची ने इस रैंकिंग में सभी पैरामीटर पर प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, खासकर करियर आउटकम्स में इसकी मजबूती साफ नजर आती है। यहां से पढ़ने वाले प्रोफेशनल्स को बेहतर सैलरी ग्रोथ, प्रमोशन के अवसर और मजबूत इंडस्ट्री एक्सपोजर मिलता है। संस्थान की सफलता के पीछे उसकी इंडस्ट्री से गहरी साझेदारी और रिसर्च-ओरिएंटेड अप्रोच अहम भूमिका निभाती है। Indian Institute of Management Ranchi अपने छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक बिजनेस परिस्थितियों का अनुभव भी देता है। ग्लोबल कोलैबोरेशन और आधुनिक पाठ्यक्रम के जरिए संस्थान लगातार अपने शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठा रहा है। Executive MBA प्रोग्राम: प्रोफेशनल्स के लिए खास डिजाइन IIM रांची का Executive MBA प्रोग्राम विशेष रूप से कामकाजी पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। यह दो वर्षीय कोर्स है, जिसमें प्रवेश के लिए कम से कम 3 साल का कार्य अनुभव जरूरी होता है। इस कार्यक्रम में फाइनेंस, मार्केटिंग, ऑपरेशंस, स्ट्रेटेजी और ह्यूमन रिसोर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ कई वैकल्पिक विषय भी शामिल हैं, जिससे छात्र अपनी जरूरत और करियर लक्ष्यों के अनुसार पढ़ाई को कस्टमाइज कर सकते हैं।  

surbhi मई 1, 2026 0
Romanian scholarship opportunity for Indian students offering free education, stay, and monthly stipend in Europe
विदेश में पढ़ाई का सुनहरा मौका: Romania ने भारतीय छात्रों के लिए खोले स्कॉलरशिप के दरवाजे, खर्च भी उठाएगी सरकार

विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। यूरोप का खूबसूरत देश Romania अब भारतीय छात्रों को अपने यहां पढ़ने और रिसर्च करने का शानदार मौका दे रहा है। अकादमिक वर्ष 2026-27 के लिए रोमानिया सरकार ने विशेष स्कॉलरशिप की घोषणा की है, जिसके तहत छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रहने और खाने का खर्च भी दिया जाएगा। यह पहल भारत और रोमानिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का हिस्सा है। Ministry of Education India के माध्यम से छात्रों का नामांकन किया जाएगा, जबकि अंतिम चयन रोमानिया की सरकार करेगी। कितनी अवधि की होगी स्कॉलरशिप? रोमानिया सरकार कुल 20 महीने की स्कॉलरशिप ऑफर कर रही है। हर छात्र को 3 महीने से 10 महीने तक की अवधि के लिए मौका मिलेगा समर कोर्स (रोमानियाई भाषा, संस्कृति और सभ्यता) के लिए अलग से 2 स्कॉलरशिप भी उपलब्ध हैं ध्यान देने वाली बात यह है कि यह स्कॉलरशिप फुल डिग्री (बैचलर्स/मास्टर्स/पीएचडी) के लिए नहीं, बल्कि एक्सचेंज प्रोग्राम और रिसर्च ट्रेनिंग के लिए है। स्कॉलरशिप में क्या-क्या फायदे मिलेंगे? इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को कई बड़े लाभ दिए जाएंगे: यूनिवर्सिटी एडमिशन और ट्यूशन फीस पूरी तरह माफ हॉस्टल में रहने की सुविधा, जिसका खर्च सरकार उठाएगी हर महीने 925 लेई (लगभग 20,000 रुपये) का भत्ता बीमारी की स्थिति में मुफ्त मेडिकल सुविधा किन शर्तों को पूरा करना होगा? छात्र के पास रोमानियाई यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर होना जरूरी है बैचलर्स या मास्टर्स एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए रोमानियाई भाषा का सर्टिफिकेट अनिवार्य है यह स्कॉलरशिप केवल भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध है कैसे करें आवेदन? इच्छुक छात्र SAKSHAT Portal पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है।

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Career path guidance for students after 12th
Career Planning After 12th: 12वीं के बाद क्या करें? इन 8 गलतियों की वजह से बर्बाद हो सकता है छात्रों का करियर

12वीं की परीक्षा के परिणाम आने के बाद हर छात्र के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जो उसके पूरे भविष्य की दिशा तय करता है। यह वह समय होता है जब छात्र 'क्या करें और क्या न करें' की कशमकश में होते हैं। अक्सर देखा गया है कि सही जानकारी के अभाव में या सामाजिक दबाव के कारण छात्र ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें जीवनभर भुगतना पड़ता है। 12वीं के बाद क्या करें, यह सवाल जितना सरल दिखता है, इसका उत्तर उतना ही जटिल है। एक गलत निर्णय न केवल आपके कीमती साल बर्बाद कर सकता है, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, करियर का चुनाव करते समय सावधानी और गहन शोध की आवश्यकता होती है। करियर चयन में क्यों होती हैं गलतियां? अधिकांश छात्र करियर चयन की प्रक्रिया को केवल एक 'कोर्स' चुनने तक सीमित समझते हैं। वास्तव में, यह आपकी क्षमताओं, रुचियों और बाजार की भविष्य की मांगों के बीच संतुलन बिठाने की प्रक्रिया है। छात्र अक्सर जल्दबाजी में या बिना किसी ठोस आधार के निर्णय लेते हैं। जागरूकता की कमी और करियर काउंसलिंग तक पहुंच न होना इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, वर्तमान में विकल्पों की भरमार ने भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।   ⚠️ ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी नीचे उन प्रमुख गलतियों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिनसे हर छात्र को 12वीं के बाद बचना चाहिए: 1. बिना सोचे-समझे और बिना रिसर्च के करियर चुनना (Lack of Research) अक्सर छात्र किसी विशेष कोर्स की लोकप्रियता देखकर उसमें प्रवेश ले लेते हैं। उन्हें उस कोर्स के पाठ्यक्रम, भविष्य के कार्यक्षेत्र और आवश्यक कौशल की जानकारी नहीं होती। वास्तविक स्थिति: उदाहरण के लिए, एक छात्र केवल 'डेटा साइंस' के नाम से प्रभावित होकर कोर्स चुन लेता है, लेकिन उसे यह नहीं पता होता कि इसमें उच्च स्तर के गणित और सांख्यिकी की आवश्यकता होती है। बाद में रुचि न होने के कारण वह पढ़ाई में पिछड़ने लगता है। प्रभाव: इससे छात्र का मनोबल गिरता है और बीच में ही पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ जाती है। समाधान: किसी भी कोर्स को चुनने से पहले उसके सिलेबस, जॉब मार्केट और भविष्य की संभावनाओं पर गहन शोध करें। प्रोफेशनल करियर काउंसलर से बात करना भी एक अच्छा विकल्प है। 2. दोस्तों या समाज के दबाव में निर्णय लेना (Peer and Social Pressure) भारत में आज भी 'भीड़ चाल' की प्रवृत्ति देखी जाती है। यदि किसी छात्र के सभी दोस्त इंजीनियरिंग या मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं, तो वह भी रुचि न होते हुए भी उसी दिशा में चल पड़ता है। वास्तविक स्थिति: एक छात्र जिसकी रुचि रचनात्मक लेखन या ललित कला (Fine Arts) में है, वह केवल इसलिए इंजीनियरिंग में दाखिला ले लेता है क्योंकि उसके माता-पिता और दोस्त ऐसा कह रहे हैं। प्रभाव: छात्र कभी भी अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त नहीं कर पाता और हमेशा असंतुष्ट रहता है। समाधान: 'Career kaise choose kare' का सबसे सही उत्तर अपनी अंतरात्मा और क्षमता को पहचानना है। दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी विशिष्ट योग्यता (USP) पर ध्यान दें। 3. सिर्फ सैलरी पैकेज को आधार बनाना (Choosing Only for Money) यह सच है कि आर्थिक स्थिरता जरूरी है, लेकिन केवल अधिक वेतन के लालच में करियर चुनना जोखिम भरा हो सकता है। वास्तविक स्थिति: आईटी सेक्टर में भारी पैकेज देखकर कई छात्र कोडिंग में रुचि न होने के बावजूद सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग चुन लेते हैं। प्रभाव: उच्च वेतन मिलने के बावजूद, कार्य के प्रति जुनून न होने के कारण छात्र 'बर्नआउट' का शिकार हो जाते हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है। समाधान: ऐसे क्षेत्र का चुनाव करें जहां आपकी रुचि और बाजार की मांग का मिलन हो। यदि आप अपने काम में माहिर हैं, तो पैसा स्वतः ही पीछे आता है। 4. रेगुलर एजुकेशन के बजाय डिस्टेंस लर्निंग को प्राथमिकता देना (Preferring Distance over Regular) आजकल कई छात्र समय बचाने या घर बैठे डिग्री पाने के लिए डिस्टेंस या प्राइवेट मोड को चुनते हैं, जो उनके करियर के लिए बड़ी चूक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की राय: नियमित शिक्षा (Regular Education) सिर्फ पढ़ाई नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास की एक प्रक्रिया है। प्रभाव: डिस्टेंस लर्निंग में छात्र कैंपस लाइफ, पीयर लर्निंग (साथियों से सीखना), लैब वर्क और नेटवर्किंग से वंचित रह जाते हैं। नियोक्ताओं (Employers) की नजर में भी रेगुलर डिग्री की साख अधिक होती है। समाधान: तकनीकी और व्यावहारिक विषयों के लिए हमेशा रेगुलर कॉलेज ही चुनें। अनुशासन और टीम वर्क जैसी स्किल्स केवल क्लासरूम के माहौल में ही सीखी जा सकती हैं। 5. छोटे शहर या छोटे कॉलेज तक सीमित रहना (Limiting to Small Towns/Colleges) कई बार छात्र सुविधा या घर से दूरी के डर से अपने स्थानीय कॉलेज में ही प्रवेश ले लेते हैं, जिससे उन्हें आवश्यक एक्सपोजर नहीं मिल पाता। वास्तविक स्थिति: एक प्रतिभाशाली छात्र छोटे शहर के ऐसे कॉलेज से ग्रेजुएशन करता है जहां न तो प्लेसमेंट सेल है और न ही इंडस्ट्री के साथ कोई जुड़ाव। प्रभाव: बड़े शहरों और प्रतिष्ठित संस्थानों में मिलने वाला नेटवर्किंग अवसर और कॉन्फिडेंस छोटे कॉलेजों में अक्सर नहीं मिल पाता। समाधान: शिक्षा के लिए बड़े शहरों और अच्छे संस्थानों की ओर रुख करने से डरे नहीं। वहां का माहौल आपको प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है। 6. सरकारी और निजी स्कॉलरशिप योजनाओं को नजरअंदाज करना (Ignoring Scholarships) कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण अच्छे कोर्स नहीं चुन पाते, क्योंकि उन्हें उपलब्ध स्कॉलरशिप के बारे में जानकारी नहीं होती। प्रभाव: छात्र अपनी योग्यता से कम स्तर के कोर्स में प्रवेश लेने को मजबूर हो जाते हैं। समाधान: केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ कई निजी संस्थान मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देते हैं। इनके लिए आवेदन प्रक्रियाओं और पात्रता की जानकारी पहले से रखें। 7. अनुभवी लोगों और शिक्षकों की सलाह को नजरअंदाज करना (Ignoring Mentors) 12वीं के छात्र अक्सर खुद को बहुत परिपक्व समझने लगते हैं और अपने माता-पिता या शिक्षकों के अनुभव को पुराना मानकर खारिज कर देते हैं। वास्तविक स्थिति: शिक्षक छात्र की कमजोरियों और ताकतों को करीब से देखते हैं। उनकी सलाह छात्र को सही रास्ता दिखा सकती है। प्रभाव: अनुभवहीनता में लिया गया फैसला अक्सर गलत दिशा में ले जाता है। समाधान: अपने बड़ों से संवाद करें। वे भले ही आधुनिक करियर के तकनीकी पहलुओं को न समझें, लेकिन वे जीवन के व्यावहारिक पक्ष और आपकी प्रकृति को बेहतर समझते हैं। 8. सिर्फ डिग्री पर ध्यान देना, स्किल्स पर नहीं (Degree vs. Skills) डिग्री केवल एक प्रवेश पास (Entry Pass) है, लेकिन नौकरी आपके कौशल (Skills) के आधार पर मिलती है। वास्तविक स्थिति: छात्र 3-4 साल केवल परीक्षा पास करने में लगा देते हैं, लेकिन व्यावहारिक कौशल जैसे कम्युनिकेशन, क्रिटिकल थिंकिंग या सॉफ्टवेयर स्किल्स पर ध्यान नहीं देते। प्रभाव: डिग्री होने के बावजूद छात्र बेरोजगार रह जाते हैं क्योंकि वे इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते। समाधान: कोर्स के साथ-साथ इंटर्नशिप, ऑनलाइन सर्टिफिकेशन और व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दें।   अनुभव आधारित दृष्टिकोण (Expert Insights) शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 12वीं के बाद का समय "संक्रमण काल" होता है। करियर काउंसलर्स के अनुसार, "Career mistakes after 12th" का सबसे बड़ा कारण यह है कि छात्र खुद को एक्सप्लोर नहीं करते। एक अनुभवी करियर एक्सपर्ट के अनुसार: "आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां एक्सपोजर और नेटवर्किंग की भूमिका 70% है और किताबी ज्ञान की 30%। इसलिए, छात्रों को ऐसे संस्थानों का चुनाव करना चाहिए जो उन्हें इंटर्नशिप, गेस्ट लेक्चर्स और इंडस्ट्री विजिट के अवसर प्रदान करें। रेगुलर मोड में पढ़ाई करना छात्र के व्यक्तित्व में जो अनुशासन लाता है, वह डिस्टेंस एजुकेशन में संभव नहीं है।" कई सफल पेशेवरों के अनुभव बताते हैं कि उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में शहर से बाहर निकलकर जो संघर्ष किया, उसी ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। बड़े संस्थानों का वातावरण आपको वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है।   करियर चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान (Actionable Checklist) स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment): अपनी रुचियों, क्षमताओं और मूल्यों की एक सूची बनाएं। बाजार की मांग: देखें कि अगले 5-10 वर्षों में किन स्किल्स की मांग अधिक होगी (जैसे AI, रिन्यूएबल एनर्जी, साइकोलॉजी)। कोर्स की मान्यता: सुनिश्चित करें कि कॉलेज या यूनिवर्सिटी UGC/AICTE द्वारा मान्यता प्राप्त हो। करियर काउंसलिंग: यदि भ्रम हो, तो किसी पेशेवर काउंसलर की सलाह लेने में संकोच न करें। इंटर्नशिप के अवसर: कॉलेज चुनते समय उसके पिछले प्लेसमेंट और इंटर्नशिप रिकॉर्ड की जांच करें। फाइनेंशियल प्लानिंग: कोर्स की फीस और रहने के खर्च का सही आकलन करें। बैकअप प्लान: हमेशा एक प्लान-बी तैयार रखें ताकि मुख्य लक्ष्य न मिलने पर साल खराब न हो।   FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 1. 12वीं के बाद सबसे अच्छा करियर क्या है? सबसे अच्छा करियर वह है जो आपकी रुचि (Passion) और योग्यता (Skill) के मेल से बना हो। विज्ञान के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग/मेडिकल के अलावा डेटा साइंस और बायोटेक अच्छे विकल्प हैं, जबकि कॉमर्स के लिए CA, CS या डेटा एनालिटिक्स और आर्ट्स के लिए लॉ, डिजाइनिंग या मास कम्युनिकेशन बेहतरीन विकल्प हैं। 2. क्या डिस्टेंस एजुकेशन (Distance Education) सही है? अगर आप किसी मजबूरी (जैसे नौकरी या अत्यधिक आर्थिक तंगी) में हैं, तभी डिस्टेंस एजुकेशन चुनें। अन्यथा, एक्सपोजर और बेहतर सीखने के लिए रेगुलर कोर्स हमेशा श्रेष्ठ होता है। 3. करियर कैसे चुनें (Career kaise choose kare)? करियर चुनने के लिए पहले अपनी रुचि पहचानें, फिर उस क्षेत्र के विशेषज्ञों से बात करें, विभिन्न कोर्सेज की तुलना करें और फिर अपनी क्षमता के अनुसार निर्णय लें। 4. क्या 12वीं के बाद गैप लेना सही है? यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (जैसे NEET/JEE) की तैयारी के लिए बहुत गंभीर हैं, तो एक साल का गैप लिया जा सकता है। लेकिन बिना किसी ठोस लक्ष्य के गैप लेना भविष्य में नुकसानदेह हो सकता है। 5. कॉलेज चुनते समय सबसे महत्वपूर्ण क्या है? कॉलेज की फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, एलुमनाई नेटवर्क (Alumni Network) और प्लेसमेंट रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।   निष्कर्ष (Conclusion) 12वीं के बाद लिया गया आपका एक सही फैसला आपकी सफलता की नींव रख सकता है, वहीं एक गलत निर्णय संघर्ष के रास्ते खोल सकता है। यह समय भावुक होने का नहीं, बल्कि व्यावहारिक और तार्किक होने का है। सामाजिक दबाव और भेड़-चाल से बचकर, अपनी क्षमताओं को पहचानें और एक ऐसा रास्ता चुनें जिसमें आप न केवल सफल हों, बल्कि खुश भी रहें। याद रखें, करियर एक दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा है; इसकी शुरुआत सही दिशा में होनी अनिवार्य है।   अस्वीकरण: यह लेख सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। किसी भी कोर्स या कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले आधिकारिक वेबसाइटों और विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य करें।  

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
Main entrance gate of Jamia Millia Islamia University with students walking on campus.
जामिया में चाहिए एंट्री? जानें एडमिशन प्रोसेस, कोर्स और प्लेसमेंट की पूरी डिटेल

दिल्ली स्थित Jamia Millia Islamia देश की सबसे प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में से एक है। हर साल हजारों छात्र यहां एडमिशन पाने का सपना देखते हैं, खासकर वे जो कम फीस में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा चाहते हैं। अपनी बेहतरीन फैकल्टी, विविध कोर्स और मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड के चलते जामिया छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। NIRF रैंकिंग 2025 में जामिया मिलिया इस्लामिया को 4वां स्थान मिला, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को दर्शाता है। आइए विस्तार से जानते हैं एडमिशन प्रक्रिया, उपलब्ध कोर्स और प्लेसमेंट की स्थिति। कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं? जामिया यूनिवर्सिटी में लगभग हर स्ट्रीम के कोर्स उपलब्ध हैं: ग्रेजुएशन: BA, BSc, BCom पोस्ट ग्रेजुएशन: MA, MSc, MCom प्रोफेशनल कोर्स: BTech, MTech लॉ: BA LLB मास कम्युनिकेशन PhD प्रोग्राम एडमिशन प्रोसेस कैसे होता है? जामिया में एडमिशन मुख्य रूप से दो तरीकों से होता है: यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम: कई कोर्स के लिए जामिया खुद एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करती है। CUET स्कोर के जरिए एडमिशन: अब कई कोर्स में Common University Entrance Test (CUET) के स्कोर के आधार पर भी दाखिला मिलता है। एडमिशन मेरिट और कटऑफ पर आधारित होता है, जो हर साल कोर्स और प्रतिस्पर्धा के अनुसार बदलती रहती है। प्लेसमेंट रिकॉर्ड कैसा है? जामिया का प्लेसमेंट रिकॉर्ड लगातार बेहतर रहा है। यहां हर साल कई बड़ी कंपनियां कैंपस में आती हैं, जैसे: TCS Accenture Tech Mahindra ICICI Bank मुख्य आंकड़े: हाईएस्ट पैकेज: लगभग 24 लाख रुपये मार्केटिंग फील्ड प्लेसमेंट (2025): 43% यह आंकड़े बताते हैं कि जामिया न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि करियर के लिहाज से भी एक मजबूत विकल्प है। एडमिशन के लिए ऐसे करें आवेदन जामिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं Admission सेक्शन खोलें रजिस्ट्रेशन करें आवेदन फॉर्म भरें जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें फीस जमा करें फॉर्म सबमिट कर प्रिंट निकाल लें 

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 6, 2026 0