शिक्षा

करियर चुनाव के समय छात्र अक्सर करते हैं ये चूक

Career Planning After 12th: 12वीं के बाद क्या करें? इन 8 गलतियों की वजह से बर्बाद हो सकता है छात्रों का करियर

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 15, 2026 0
Career path guidance for students after 12th
Career Counseling for students

12वीं की परीक्षा के परिणाम आने के बाद हर छात्र के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जो उसके पूरे भविष्य की दिशा तय करता है। यह वह समय होता है जब छात्र 'क्या करें और क्या न करें' की कशमकश में होते हैं। अक्सर देखा गया है कि सही जानकारी के अभाव में या सामाजिक दबाव के कारण छात्र ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें जीवनभर भुगतना पड़ता है। 12वीं के बाद क्या करें, यह सवाल जितना सरल दिखता है, इसका उत्तर उतना ही जटिल है। एक गलत निर्णय न केवल आपके कीमती साल बर्बाद कर सकता है, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, करियर का चुनाव करते समय सावधानी और गहन शोध की आवश्यकता होती है।

करियर चयन में क्यों होती हैं गलतियां?

अधिकांश छात्र करियर चयन की प्रक्रिया को केवल एक 'कोर्स' चुनने तक सीमित समझते हैं। वास्तव में, यह आपकी क्षमताओं, रुचियों और बाजार की भविष्य की मांगों के बीच संतुलन बिठाने की प्रक्रिया है। छात्र अक्सर जल्दबाजी में या बिना किसी ठोस आधार के निर्णय लेते हैं। जागरूकता की कमी और करियर काउंसलिंग तक पहुंच न होना इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, वर्तमान में विकल्पों की भरमार ने भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

 

⚠️ ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी

नीचे उन प्रमुख गलतियों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिनसे हर छात्र को 12वीं के बाद बचना चाहिए:

1. बिना सोचे-समझे और बिना रिसर्च के करियर चुनना (Lack of Research)

अक्सर छात्र किसी विशेष कोर्स की लोकप्रियता देखकर उसमें प्रवेश ले लेते हैं। उन्हें उस कोर्स के पाठ्यक्रम, भविष्य के कार्यक्षेत्र और आवश्यक कौशल की जानकारी नहीं होती।

  • वास्तविक स्थिति: उदाहरण के लिए, एक छात्र केवल 'डेटा साइंस' के नाम से प्रभावित होकर कोर्स चुन लेता है, लेकिन उसे यह नहीं पता होता कि इसमें उच्च स्तर के गणित और सांख्यिकी की आवश्यकता होती है। बाद में रुचि न होने के कारण वह पढ़ाई में पिछड़ने लगता है।
  • प्रभाव: इससे छात्र का मनोबल गिरता है और बीच में ही पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ जाती है।
  • समाधान: किसी भी कोर्स को चुनने से पहले उसके सिलेबस, जॉब मार्केट और भविष्य की संभावनाओं पर गहन शोध करें। प्रोफेशनल करियर काउंसलर से बात करना भी एक अच्छा विकल्प है।

2. दोस्तों या समाज के दबाव में निर्णय लेना (Peer and Social Pressure)

भारत में आज भी 'भीड़ चाल' की प्रवृत्ति देखी जाती है। यदि किसी छात्र के सभी दोस्त इंजीनियरिंग या मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं, तो वह भी रुचि न होते हुए भी उसी दिशा में चल पड़ता है।

  • वास्तविक स्थिति: एक छात्र जिसकी रुचि रचनात्मक लेखन या ललित कला (Fine Arts) में है, वह केवल इसलिए इंजीनियरिंग में दाखिला ले लेता है क्योंकि उसके माता-पिता और दोस्त ऐसा कह रहे हैं।
  • प्रभाव: छात्र कभी भी अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त नहीं कर पाता और हमेशा असंतुष्ट रहता है।
  • समाधान: 'Career kaise choose kare' का सबसे सही उत्तर अपनी अंतरात्मा और क्षमता को पहचानना है। दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी विशिष्ट योग्यता (USP) पर ध्यान दें।

3. सिर्फ सैलरी पैकेज को आधार बनाना (Choosing Only for Money)

यह सच है कि आर्थिक स्थिरता जरूरी है, लेकिन केवल अधिक वेतन के लालच में करियर चुनना जोखिम भरा हो सकता है।

  • वास्तविक स्थिति: आईटी सेक्टर में भारी पैकेज देखकर कई छात्र कोडिंग में रुचि न होने के बावजूद सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग चुन लेते हैं।
  • प्रभाव: उच्च वेतन मिलने के बावजूद, कार्य के प्रति जुनून न होने के कारण छात्र 'बर्नआउट' का शिकार हो जाते हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है।
  • समाधान: ऐसे क्षेत्र का चुनाव करें जहां आपकी रुचि और बाजार की मांग का मिलन हो। यदि आप अपने काम में माहिर हैं, तो पैसा स्वतः ही पीछे आता है।

4. रेगुलर एजुकेशन के बजाय डिस्टेंस लर्निंग को प्राथमिकता देना (Preferring Distance over Regular)

आजकल कई छात्र समय बचाने या घर बैठे डिग्री पाने के लिए डिस्टेंस या प्राइवेट मोड को चुनते हैं, जो उनके करियर के लिए बड़ी चूक साबित हो सकती है।

  • विशेषज्ञों की राय: नियमित शिक्षा (Regular Education) सिर्फ पढ़ाई नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास की एक प्रक्रिया है।
  • प्रभाव: डिस्टेंस लर्निंग में छात्र कैंपस लाइफ, पीयर लर्निंग (साथियों से सीखना), लैब वर्क और नेटवर्किंग से वंचित रह जाते हैं। नियोक्ताओं (Employers) की नजर में भी रेगुलर डिग्री की साख अधिक होती है।
  • समाधान: तकनीकी और व्यावहारिक विषयों के लिए हमेशा रेगुलर कॉलेज ही चुनें। अनुशासन और टीम वर्क जैसी स्किल्स केवल क्लासरूम के माहौल में ही सीखी जा सकती हैं।

5. छोटे शहर या छोटे कॉलेज तक सीमित रहना (Limiting to Small Towns/Colleges)

कई बार छात्र सुविधा या घर से दूरी के डर से अपने स्थानीय कॉलेज में ही प्रवेश ले लेते हैं, जिससे उन्हें आवश्यक एक्सपोजर नहीं मिल पाता।

  • वास्तविक स्थिति: एक प्रतिभाशाली छात्र छोटे शहर के ऐसे कॉलेज से ग्रेजुएशन करता है जहां न तो प्लेसमेंट सेल है और न ही इंडस्ट्री के साथ कोई जुड़ाव।
  • प्रभाव: बड़े शहरों और प्रतिष्ठित संस्थानों में मिलने वाला नेटवर्किंग अवसर और कॉन्फिडेंस छोटे कॉलेजों में अक्सर नहीं मिल पाता।
  • समाधान: शिक्षा के लिए बड़े शहरों और अच्छे संस्थानों की ओर रुख करने से डरे नहीं। वहां का माहौल आपको प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है।

6. सरकारी और निजी स्कॉलरशिप योजनाओं को नजरअंदाज करना (Ignoring Scholarships)

कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण अच्छे कोर्स नहीं चुन पाते, क्योंकि उन्हें उपलब्ध स्कॉलरशिप के बारे में जानकारी नहीं होती।

  • प्रभाव: छात्र अपनी योग्यता से कम स्तर के कोर्स में प्रवेश लेने को मजबूर हो जाते हैं।
  • समाधान: केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ कई निजी संस्थान मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देते हैं। इनके लिए आवेदन प्रक्रियाओं और पात्रता की जानकारी पहले से रखें।

7. अनुभवी लोगों और शिक्षकों की सलाह को नजरअंदाज करना (Ignoring Mentors)

12वीं के छात्र अक्सर खुद को बहुत परिपक्व समझने लगते हैं और अपने माता-पिता या शिक्षकों के अनुभव को पुराना मानकर खारिज कर देते हैं।

  • वास्तविक स्थिति: शिक्षक छात्र की कमजोरियों और ताकतों को करीब से देखते हैं। उनकी सलाह छात्र को सही रास्ता दिखा सकती है।
  • प्रभाव: अनुभवहीनता में लिया गया फैसला अक्सर गलत दिशा में ले जाता है।
  • समाधान: अपने बड़ों से संवाद करें। वे भले ही आधुनिक करियर के तकनीकी पहलुओं को न समझें, लेकिन वे जीवन के व्यावहारिक पक्ष और आपकी प्रकृति को बेहतर समझते हैं।

8. सिर्फ डिग्री पर ध्यान देना, स्किल्स पर नहीं (Degree vs. Skills)

डिग्री केवल एक प्रवेश पास (Entry Pass) है, लेकिन नौकरी आपके कौशल (Skills) के आधार पर मिलती है।

  • वास्तविक स्थिति: छात्र 3-4 साल केवल परीक्षा पास करने में लगा देते हैं, लेकिन व्यावहारिक कौशल जैसे कम्युनिकेशन, क्रिटिकल थिंकिंग या सॉफ्टवेयर स्किल्स पर ध्यान नहीं देते।
  • प्रभाव: डिग्री होने के बावजूद छात्र बेरोजगार रह जाते हैं क्योंकि वे इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते।
  • समाधान: कोर्स के साथ-साथ इंटर्नशिप, ऑनलाइन सर्टिफिकेशन और व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दें।

 

अनुभव आधारित दृष्टिकोण (Expert Insights)

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 12वीं के बाद का समय "संक्रमण काल" होता है। करियर काउंसलर्स के अनुसार, "Career mistakes after 12th" का सबसे बड़ा कारण यह है कि छात्र खुद को एक्सप्लोर नहीं करते।

एक अनुभवी करियर एक्सपर्ट के अनुसार:

"आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां एक्सपोजर और नेटवर्किंग की भूमिका 70% है और किताबी ज्ञान की 30%। इसलिए, छात्रों को ऐसे संस्थानों का चुनाव करना चाहिए जो उन्हें इंटर्नशिप, गेस्ट लेक्चर्स और इंडस्ट्री विजिट के अवसर प्रदान करें। रेगुलर मोड में पढ़ाई करना छात्र के व्यक्तित्व में जो अनुशासन लाता है, वह डिस्टेंस एजुकेशन में संभव नहीं है।"

कई सफल पेशेवरों के अनुभव बताते हैं कि उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में शहर से बाहर निकलकर जो संघर्ष किया, उसी ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। बड़े संस्थानों का वातावरण आपको वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है।

 

करियर चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान (Actionable Checklist)

  • स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment): अपनी रुचियों, क्षमताओं और मूल्यों की एक सूची बनाएं।
  • बाजार की मांग: देखें कि अगले 5-10 वर्षों में किन स्किल्स की मांग अधिक होगी (जैसे AI, रिन्यूएबल एनर्जी, साइकोलॉजी)।
  • कोर्स की मान्यता: सुनिश्चित करें कि कॉलेज या यूनिवर्सिटी UGC/AICTE द्वारा मान्यता प्राप्त हो।
  • करियर काउंसलिंग: यदि भ्रम हो, तो किसी पेशेवर काउंसलर की सलाह लेने में संकोच न करें।
  • इंटर्नशिप के अवसर: कॉलेज चुनते समय उसके पिछले प्लेसमेंट और इंटर्नशिप रिकॉर्ड की जांच करें।
  • फाइनेंशियल प्लानिंग: कोर्स की फीस और रहने के खर्च का सही आकलन करें।
  • बैकअप प्लान: हमेशा एक प्लान-बी तैयार रखें ताकि मुख्य लक्ष्य न मिलने पर साल खराब न हो।

 

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. 12वीं के बाद सबसे अच्छा करियर क्या है? सबसे अच्छा करियर वह है जो आपकी रुचि (Passion) और योग्यता (Skill) के मेल से बना हो। विज्ञान के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग/मेडिकल के अलावा डेटा साइंस और बायोटेक अच्छे विकल्प हैं, जबकि कॉमर्स के लिए CA, CS या डेटा एनालिटिक्स और आर्ट्स के लिए लॉ, डिजाइनिंग या मास कम्युनिकेशन बेहतरीन विकल्प हैं।

2. क्या डिस्टेंस एजुकेशन (Distance Education) सही है? अगर आप किसी मजबूरी (जैसे नौकरी या अत्यधिक आर्थिक तंगी) में हैं, तभी डिस्टेंस एजुकेशन चुनें। अन्यथा, एक्सपोजर और बेहतर सीखने के लिए रेगुलर कोर्स हमेशा श्रेष्ठ होता है।

3. करियर कैसे चुनें (Career kaise choose kare)? करियर चुनने के लिए पहले अपनी रुचि पहचानें, फिर उस क्षेत्र के विशेषज्ञों से बात करें, विभिन्न कोर्सेज की तुलना करें और फिर अपनी क्षमता के अनुसार निर्णय लें।

4. क्या 12वीं के बाद गैप लेना सही है? यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा (जैसे NEET/JEE) की तैयारी के लिए बहुत गंभीर हैं, तो एक साल का गैप लिया जा सकता है। लेकिन बिना किसी ठोस लक्ष्य के गैप लेना भविष्य में नुकसानदेह हो सकता है।

5. कॉलेज चुनते समय सबसे महत्वपूर्ण क्या है? कॉलेज की फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, एलुमनाई नेटवर्क (Alumni Network) और प्लेसमेंट रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

12वीं के बाद लिया गया आपका एक सही फैसला आपकी सफलता की नींव रख सकता है, वहीं एक गलत निर्णय संघर्ष के रास्ते खोल सकता है। यह समय भावुक होने का नहीं, बल्कि व्यावहारिक और तार्किक होने का है। सामाजिक दबाव और भेड़-चाल से बचकर, अपनी क्षमताओं को पहचानें और एक ऐसा रास्ता चुनें जिसमें आप न केवल सफल हों, बल्कि खुश भी रहें। याद रखें, करियर एक दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा है; इसकी शुरुआत सही दिशा में होनी अनिवार्य है।

 

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। किसी भी कोर्स या कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले आधिकारिक वेबसाइटों और विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य करें।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

शिक्षा

View more
Candidates checking AIIMS NORCET 2026 result online on official website after exam results announcement
AIIMS NORCET 2026 Result: 51 हजार से अधिक उम्मीदवार सफल, स्टेज-II के लिए 14,527 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट

नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती के लिए आयोजित AIIMS Nursing Officer Recruitment Common Eligibility Test (NORCET) 2026 का रिजल्ट आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। लंबे समय से परिणाम का इंतजार कर रहे उम्मीदवार अब संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट aiimsexams.ac.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। AIIMS द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस परीक्षा के लिए कुल 97,149 उम्मीदवारों को सीट आवंटित की गई थी, जिनमें से 92,026 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 51,451 उम्मीदवारों को क्वालिफाई घोषित किया गया है। इसके अलावा, स्टेज-II परीक्षा के लिए 14,527 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह परीक्षा 11 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी और अब चयनित अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी स्टेज-II में शामिल होना होगा, जो 30 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी। कटऑफ भी जारी रिजल्ट के साथ AIIMS ने कैटेगरी वाइज कटऑफ पर्सेंटाइल भी जारी कर दी है। अनारक्षित (UR): 93.5887683 पर्सेंटाइल EWS: 78.9831134 पर्सेंटाइल OBC: 84.2077239 पर्सेंटाइल SC: 81.9605328 पर्सेंटाइल ST: 74.4746050 पर्सेंटाइल PwBD उम्मीदवारों के लिए अलग से कटऑफ निर्धारित की गई है। ऐसे चेक करें रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट aiimsexams.ac.in पर जाएं होमपेज पर Recruitment सेक्शन में क्लिक करें “AIIMS NORCET Result 2026” लिंक खोलें रिजल्ट PDF में अपना रोल नंबर सर्च करें भविष्य के लिए PDF डाउनलोड कर लें इस बार बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के सफल होने से स्टेज-II में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Students and school staff submitting CBSE Class 10 LOC application online on computer portal for 2026 exam process

CBSE सेकेंड बोर्ड परीक्षा 2026: LOC सबमिशन प्रक्रिया शुरू, 20 अप्रैल तक कर सकेंगे आवेदन

Students appearing for JEE Main 2026 exam amid controversy over provisional answer key errors

JEE Main 2026 Answer Key विवाद: 300 से ज्यादा सवालों पर आपत्ति, शिक्षा मंत्रालय सख्त

Free Education Scheme

उच्च शिक्षा के अनाथ व निःशक्त छात्रों की सालाना 10 लाख तक की फीस भरेगी सरकार भरेगी, 1 मई से आवेदन

Campus view highlighting student placements and academic excellence.
82 लाख के पैकेज से लेकर इंटरनेशनल ऑफर तक: जमशेदपुर के टॉप कॉलेजों ने बनाई नई पहचान

झारखंड का औद्योगिक शहर Jamshedpur अब केवल इंडस्ट्री के लिए ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के मजबूत केंद्र के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। यहां के कई प्रतिष्ठित संस्थान न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं, बल्कि छात्रों को इंटरनेशनल प्लेसमेंट तक के अवसर प्रदान कर रहे हैं। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए जमशेदपुर छात्रों की पहली पसंद बनता जा रहा है। मैनेजमेंट के लिए सबसे आगे XLRI मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए XLRI Xavier School of Management देश के शीर्ष संस्थानों में गिना जाता है। NIRF रैंकिंग 2025 में इसे टॉप मैनेजमेंट कॉलेजों में 10वां स्थान मिला है। प्लेसमेंट हाइलाइट्स: 576 छात्रों ने प्लेसमेंट में भाग लिया 145 कंपनियों ने भर्ती की 2 इंटरनेशनल ऑफर एवरेज पैकेज: ₹31.40 लाख इंटरनेशनल हाईएस्ट पैकेज: ₹1.10 करोड़ डोमेस्टिक हाईएस्ट पैकेज: ₹59 लाख यहां Amazon, Accenture, Deloitte जैसी बड़ी कंपनियां भर्ती के लिए आती हैं। इंजीनियरिंग के लिए NIT जमशेदपुर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में National Institute of Technology Jamshedpur प्रमुख विकल्प है। NIRF 2025 में इसे इंजीनियरिंग कैटेगरी में 82वीं रैंक मिली है। प्लेसमेंट रिकॉर्ड: हाईएस्ट पैकेज: ₹82 लाख टॉप रिक्रूटर्स: Microsoft, Samsung, Amazon यहां BTech के कई लोकप्रिय ब्रांच उपलब्ध हैं, जिनमें कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग शामिल हैं। विविध कोर्सेज के लिए नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी Netaji Subhas University Jamshedpur में UG, PG, डिप्लोमा और स्किल-बेस्ड कोर्सेज की विस्तृत रेंज उपलब्ध है। यह यूनिवर्सिटी UGC से मान्यता प्राप्त है और यहां टेक्निकल से लेकर मैनेजमेंट, साइंस और लॉ तक के कोर्स कराए जाते हैं। लड़कियों के लिए प्रमुख विकल्प: जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी Jamshedpur Women's University खासतौर पर छात्राओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह यूनिवर्सिटी UG, PG और PhD तक के कोर्स उपलब्ध कराती है। पारंपरिक शिक्षा के लिए JKS कॉलेज JKS College Jamshedpur, जो 1970 में स्थापित हुआ था, आज भी आर्ट्स और कॉमर्स के छात्रों के बीच लोकप्रिय है। यह कोल्हान यूनिवर्सिटी से संबद्ध है और BA, BCom जैसे कोर्स प्रदान करता है। मेडिकल और डेंटल शिक्षा में भी विकल्प Awadh Dental College and Hospital BDS और MDS कोर्स के लिए जाना जाता है। यहां एडमिशन NEET स्कोर के आधार पर होता है और हर साल सीमित सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। अन्य प्रमुख संस्थान इसके अलावा Karim City College, Tata Main Hospital Medical College जैसे कई संस्थान भी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Career path guidance for students after 12th

Career Planning After 12th: 12वीं के बाद क्या करें? इन 8 गलतियों की वजह से बर्बाद हो सकता है छात्रों का करियर

Main entrance gate of Jamia Millia Islamia University with students walking on campus.

जामिया में चाहिए एंट्री? जानें एडमिशन प्रोसेस, कोर्स और प्लेसमेंट की पूरी डिटेल

SSC recruitment notification with students filling online application for government jobs on a laptop.

SSC Phase 14 Recruitment 2026: 3003 पदों पर बंपर भर्ती, 10वीं पास से ग्रेजुएट तक के लिए सुनहरा मौका

Ranchi University protest
लेट सेशन के खिलाफ रांची यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन

रांची। रांची यूनिवर्सिटी में लंबे समय से चली आ रही शैक्षणिक अव्यवस्थाओं को लेकर सोमवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। NSUI के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए।   सेशन लेट से परेशान छात्र छात्रों का कहना है कि लगातार सेशन लेट होने की वजह से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। समय पर डिग्री और अंकपत्र नहीं मिलने के कारण नौकरी और आगे की पढ़ाई में दिक्कतें आ रही हैं। कई छात्रों ने बताया कि सालों की मेहनत के बावजूद उन्हें समय पर रिजल्ट और सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे हैं।   “शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई” प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा हजारों छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को राज्य स्तर पर ले जाया जाएगा।   छात्र संगठनों ने कई अहम मांगें रखी हैं: लंबित सत्रों को नियमित किया जाए। सेमेस्टर परीक्षाओं का शेड्यूल जल्द जारी हो। पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी बने। अंक गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच हो। डिग्री और अंकपत्र समय पर दिए जाएं।   कॉपियां गायब होने पर भी उठे सवाल छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के गायब होने की घटनाओं पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों के खाली पद जल्द भरने और “एक व्यक्ति एक पद” नियम लागू करने की मांग भी उठाई गई।   बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी कहा कि कई कॉलेजों में अभी तक बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। गर्ल्स कॉमन रूम, साफ पानी, शौचालय, लाइब्रेरी, लैब, वाई-फाई और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं की कमी छात्रों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।   स्पेशल परीक्षा के रिजल्ट पर भी सवाल छात्रों ने सत्र 2017-20 और 2018-21 के स्पेशल एग्जाम के रिजल्ट जल्द जारी करने की मांग की। छात्र नेताओं ने साफ कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0
CBSE result 2026

इसी माह आयेगा CBSE 10वीं-12वीं का रिजल्ट!

BPSC AEDO Exam 2026 candidates preparing with exam pattern and guidelines announced by officials

BPSC AEDO Exam 2026: परीक्षा में कैसे आएंगे सवाल? खुद परीक्षा नियंत्रक ने बताया पूरा पैटर्न और रणनीति

IISER Kolkata campus showcasing modern research facilities and students engaged in scientific study.

IIT से अलग रास्ता: रिसर्च करियर के लिए क्यों बेहतर है IISER Kolkata? जानें कटऑफ और एडमिशन प्रोसेस

0 Comments

Top week

Ranchi University protest
शिक्षा

लेट सेशन के खिलाफ रांची यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?