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JEE Main 2026 Answer Key Sparks Major Row

JEE Main 2026 Answer Key विवाद: 300 से ज्यादा सवालों पर आपत्ति, शिक्षा मंत्रालय सख्त

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Students appearing for JEE Main 2026 exam amid controversy over provisional answer key errors
JEE Main 2026 Answer Key Controversy

 

इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 को लेकर इस बार बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सेशन-2 की प्रोविजनल आंसर-की में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, जहां 300 से अधिक सवालों के जवाबों को छात्रों ने चुनौती दी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Ministry of Education ने सख्त रुख अपनाया है और जांच के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, 5 अप्रैल को हुई शिफ्ट-2 के केमिस्ट्री पेपर की आंसर-की में कई गलतियां पाई गईं। छात्रों ने बड़े पैमाने पर इन उत्तरों को चुनौती दी, जिसके बाद National Testing Agency (NTA) हरकत में आया।

  • कुल 9 शिफ्ट में परीक्षा आयोजित हुई
  • हर शिफ्ट में 75 सवाल
  • कुल मिलाकर 675 सवालों की आंसर-की जारी हुई
  • इनमें से लगभग आधे सवालों पर आपत्ति दर्ज की गई

एक्सपर्ट कमेटी करेगी समीक्षा

NTA ने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है, जो:

  • सभी चैलेंज किए गए सवालों की समीक्षा करेगी
  • सही जवाब तय करेगी
  • और उसी आधार पर फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी

शिक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि फाइनल आंसर-की में किसी भी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए

हर साल क्यों उठता है विवाद?

JEE Main में आंसर-की विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। हर साल:

  • बड़ी संख्या में छात्र उत्तरों को चुनौती देते हैं
  • कुछ सवाल ड्रॉप किए जाते हैं
  • और कई बार आंसर-की में बदलाव भी होता है

इस साल भी पहले सेशन में:

  • मैथ्स के 2 सवाल
  • फिजिक्स के 7 सवाल
    ड्रॉप किए गए थे, जबकि 5 उत्तरों में बदलाव किया गया था।

रिजल्ट और आगे की प्रक्रिया

  • JEE Main 2026 सेशन-2 का रिजल्ट 20 अप्रैल तक जारी हो सकता है
  • इसके बाद JEE Advanced के लिए आवेदन शुरू होंगे
  • रजिस्ट्रेशन: 23 अप्रैल से 2 मई तक
  • परीक्षा तिथि: 17 मई 2026

JEE Main के फाइनल रिजल्ट के आधार पर लगभग 2.5 लाख उम्मीदवार JEE Advanced के लिए क्वालिफाई करेंगे।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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पटना: बिहार में होने वाली बहुप्रतीक्षित BPSC सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) परीक्षा 2026 कल यानी 14 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इस बार इस भर्ती में 10 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जिससे यह राज्य की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो गई है। परीक्षा से ठीक पहले उम्मीदवारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है–पेपर में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे? इस चिंता को दूर करते हुए परीक्षा आयोजित करने वाले अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने खुद परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। आयोग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पॉडकास्ट के जरिए यह जानकारी दी है, ताकि अभ्यर्थी अंतिम समय में सही दिशा में तैयारी कर सकें। परीक्षा में कैसे होंगे सवाल? परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, सामान्य अध्ययन (General Studies) का दायरा व्यापक होगा। हालांकि इसमें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, अर्थशास्त्र और राजनीति जैसे विषय शामिल होंगे, लेकिन प्रश्न पूरी तरह सीमित नहीं होंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि: “जीके डिफाइंड है, लेकिन जीएस पूरी तरह सीमित नहीं है। इसमें वह सब कुछ पूछा जा सकता है जो एक पढ़े-लिखे व्यक्ति को सामान्य रूप से पता होना चाहिए।” इसका मतलब है कि उम्मीदवारों को सिर्फ रटने के बजाय अवधारणात्मक समझ और व्यापक ज्ञान पर ध्यान देना होगा। जनरल एप्टीट्यूड और भाषा पर खास फोकस जनरल एप्टीट्यूड सेक्शन को दो हिस्सों में बांटा गया है: रीजनिंग मेंटल एबिलिटी इसके अलावा, हिंदी और अंग्रेजी भाषा का पेपर बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। परीक्षा नियंत्रक ने साफ कहा कि अगर अभ्यर्थी इन भाषा पेपर्स में न्यूनतम अंक हासिल नहीं करते हैं, तो बाकी विषयों में अच्छे अंक लाने के बावजूद मेरिट लिस्ट में जगह नहीं मिलेगी। एग्जाम पैटर्न और मार्किंग स्कीम परीक्षा तीन प्रमुख हिस्सों में आयोजित होगी: सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी कुल अंक: 100 अवधि: 2 घंटे न्यूनतम योग्यता: 30% सामान्य अध्ययन (GS) कुल अंक: 100 अवधि: 2 घंटे सामान्य योग्यता (Aptitude) कुल अंक: 100 अवधि: 2 घंटे महत्वपूर्ण: हर गलत उत्तर पर 1/3 अंक की निगेटिव मार्किंग लागू होगी। इसलिए उम्मीदवारों को अनुमान के आधार पर उत्तर देने से बचने की सलाह दी गई है। अभ्यर्थियों के लिए अंतिम रणनीति परीक्षा से एक दिन पहले विशेषज्ञों की सलाह है कि उम्मीदवार: बेसिक कॉन्सेप्ट्स को रिवाइज करें करेंट अफेयर्स और सामान्य जानकारी पर नजर डालें मॉक टेस्ट के आधार पर समय प्रबंधन सुधारें और सबसे जरूरी–घबराहट से बचें और आत्मविश्वास बनाए रखें

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