मनीला, एजेंसियां। फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिंडानाओ द्वीप के पास आए शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचा दी। 8.1 तीव्रता के इस भूकंप के झटकों से कई इमारतें पलभर में धराशायी हो गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इमारतें ढहीं, लोग जान बचाकर भागे भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग घरों, स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर भागने लगे। कई शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक भवनों को नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में इमारतों के गिरने और लोगों के बीच फैली दहशत साफ देखी जा सकती है। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। सुनामी अलर्ट ने बढ़ाई चिंता भूकंप के बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने फिलीपींस के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों ने कुछ इलाकों में तीन मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई है। प्रशासन ने समुद्र तटों के पास रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। कई तटीय इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और राहत शिविर स्थापित किए गए। राहत और बचाव कार्य जारी सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। सड़कों में दरारें आने और भवनों को नुकसान पहुंचने से राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अभी सामने आना बाकी है। आफ्टरशॉक से लोगों में डर कायम मुख्य भूकंप के कुछ घंटों बाद 6.1 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई। कई परिवार रातभर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलीपींस 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं। इस बार का भूकंप हाल के वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में माना जा रहा है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद 10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Gaza Strip एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। ताजा हमलों में कम से कम सात फिलिस्तीनियों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं जब क्षेत्र में पहले से ही संघर्ष और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य गाज़ा के Bureij refugee camp में सुबह-सुबह एक ड्रोन हमले ने नागरिकों के एक समूह को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और राहत एजेंसियों के मुताबिक, मिसाइलें एक पुलिस पोस्ट के पास गिरीं, जिससे कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि Al-Aqsa Hospital में छह शव और कई घायल पहुंचाए गए, जबकि Al-Awda Hospital में एक और मृतक तथा दो घायल लाए गए। राहत कार्य में जुटी टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि हमले के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए थे। इसी के साथ दक्षिणी गाज़ा के Khan Younis इलाके में भी एक ड्रोन हमले में विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं। इलाके में लगातार गोलाबारी और टैंक फायरिंग की भी खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने हालिया हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हत्याएं और हमले यह दर्शाते हैं कि क्षेत्र में जवाबदेही की कमी बनी हुई है और नागरिकों की सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में है। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 72,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हाल के दिनों में भी हिंसा थमने के बजाय बढ़ती नजर आ रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और गहरी हो गई है। पश्चिमी तट यानी West Bank में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां छापेमारी और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। कई गांवों में आगजनी और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।