India Foreign Policy

PM Modi Foreign Visit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से तीन देशों के दौरे पर जाएंगे, इंडो-पैसिफिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के छह दिवसीय दौरे पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि दौरे का उद्देश्य हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।   तीनों देशों के शीर्ष नेताओं से होगी मुलाकात   दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकी और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।   न्यूजीलैंड दौरा रहेगा सबसे खास   यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि और लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अहम समझौतों पर चर्चा हो सकती है।   व्यापार और निवेश पर रहेगा विशेष जोर   ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष फोकस रहेगा।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi departs for a three-day official visit to Seychelles to attend the island nation's 50th National Day celebrations and hold high-level bilateral meetings.
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स रवाना, 11 साल बाद दूसरा दौरा; राष्ट्रीय दिवस समारोह में होंगे मुख्य अतिथि

  नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स के लिए रवाना हो गए। 27 से 29 जून तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान वह सेशेल्स की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री की यह पिछले 11 वर्षों में सेशेल्स की दूसरी यात्रा है। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2015 में इस हिंद महासागर द्वीपीय देश का दौरा किया था। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति से द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों, हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को भी संबोधित करेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री सेशेल्स की संसद को संबोधित करेगा। प्रधानमंत्री वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। सेशेल्स की लगभग 1.35 लाख की आबादी में करीब 12 हजार लोग भारतीय मूल के हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8 से 9 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत-सेशेल्स संबंधों के 50 वर्ष पूरे रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर होगा। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करना उनके लिए सम्मान की बात होगी और यह दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संसदीय परंपराओं का प्रतीक है। हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा फोकस भारत के लिए सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेशेल्स भारत के 'विजन महासागर (MAHASAGAR)' का प्रमुख सहयोगी है और दोनों देश समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान समुद्री निगरानी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। 2015 के दौरे में मजबूत हुए थे रक्षा संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले मार्च 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था। उस समय भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की थी, जिससे उसकी तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत हुई। इसी यात्रा के दौरान भारत की सहायता से विकसित तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का भी उद्घाटन किया गया था। यह परियोजना हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की निगरानी बढ़ाने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। इंदिरा गांधी के बाद मोदी का दूसरा ऐतिहासिक दौरा सेशेल्स की यात्रा करने वाली पहली भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1976 में देश की स्वतंत्रता के बाद वहां का दौरा किया था और 1981 में दोबारा सेशेल्स गई थीं। इसके बाद करीब 34 वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस द्वीपीय राष्ट्र की यात्रा नहीं की। वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया और अब 2026 का यह दौरा भारत-सेशेल्स संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक सहयोग के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi to visit Seychelles for a three-day state visit and attend the National Day Golden Jubilee celebrations.
PM Modi Seychelles Visit: 27 जून से सेशेल्स दौरे पर रहेंगे प्रधानमंत्री मोदी, हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर होगा दौरा विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर करेंगे। अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा की जाएगी और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे शामिल प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के 50वें वर्ष के समारोह में विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी समारोह में भाग लेंगे, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग और मजबूत रणनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। संसद को करेंगे संबोधित, भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की संसद को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वह वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे। भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान रहेगा। हिंद महासागर में भारत का अहम साझेदार है सेशेल्स सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। भारत की 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति, समुद्री सुरक्षा रणनीति और ग्लोबल साउथ देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में सेशेल्स की अहम भूमिका मानी जाती है। यही वजह है कि इस यात्रा को क्षेत्रीय रणनीति और हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2015 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहली सेशेल्स यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स की यात्रा पर गए थे। लगभग एक दशक बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और समुद्री सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
India and Iran energy cooperation discussions during meeting with Iranian oil minister in New Delhi
भारत-ईरान के बीच बढ़ सकता है ऊर्जा सहयोग, दिल्ली पहुंचे ईरानी तेल मंत्री ने दिए बड़ी ट्रेड डील के संकेत

नई दिल्ली: भारत और Iran के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय शुरू होने के संकेत मिले हैं। ब्रिक्स देशों की ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेने भारत पहुंचे ईरानी पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad ने कहा है कि ईरान भारत के साथ आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान को भारत और ईरान के बीच तेल, गैस और निवेश से जुड़ी संभावित बड़ी साझेदारियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार ईरान नई दिल्ली पहुंचने के बाद मोहसिन पाकनेजाद ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद मजबूत रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। ईरानी मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों की बैठकों के साथ-साथ भारत के अधिकारियों के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में ऊर्जा, निवेश और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि ईरान भारत के साथ हर संभव आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, खासकर तेल और गैस क्षेत्र में। तेल और गैस सेक्टर पर रहेगा फोकस ईरानी प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है— कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त निवेश की संभावनाएं पेट्रोकेमिकल उद्योग में साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते वैश्विक ऊर्जा बाजार की वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है, जबकि ईरान विशाल तेल और गैस भंडार वाला देश है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिबंधों और 60 दिन की छूट पर भी चर्चा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े सवाल पर ईरानी तेल मंत्री ने कहा कि वर्तमान में ईरान को 60 दिनों की छूट प्राप्त है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर विस्तृत जानकारी बैठकों के समापन के बाद साझा की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद अपने आर्थिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह साझेदारी? भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए स्रोतों और साझेदारियों की तलाश कर रहा है। यदि भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत होता है, तो इससे— भारत को तेल और गैस की आपूर्ति में विविधता मिलेगी। ऊर्जा आयात लागत कम करने में मदद मिल सकती है। दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नया आयाम मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के बाद बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में: Brent Crude लगभग 72.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। WTI Crude लगभग 69.19 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा। तेल कीमतों में यह गिरावट ऊर्जा आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।  

surbhi जून 25, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi welcomes the US-Iran peace agreement and reopening of the Strait of Hormuz to restore stability in West Asia.
ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर क्या बोले पीएम मोदी? पश्चिम एशिया में स्थिरता की जताई उम्मीद

  नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर बनी सहमति का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और कई देशों में लोगों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति, स्थिरता, व्यापार और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शेष विवादित मुद्दों पर बातचीत के माध्यम से एक टिकाऊ और व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। 19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर मध्यस्थ देशों और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर आगे अलग दौर की बातचीत होगी। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जलडमरूमध्य को तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा। अमेरिका पहले भी संकेत दे चुका था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पुनः खुलने के साथ ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है, ताकि वह तेल निर्यात बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सके। ईरान ने कहा- औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही होगा अमल ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि तेहरान औपचारिक हस्ताक्षर से पहले समझौते को लागू नहीं करेगा। उनके अनुसार, कतर की मध्यस्थता में 14 घंटे से अधिक चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस सहमति तक पहुंचे। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस घटनाक्रम को अमेरिका के साथ युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

Deepshikha जून 16, 2026 0
Vaibhav Suryavanshi
वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, टीम इंडिया में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने

मुंबई, एजेंसियां। Vaibhav Suryavanshi : वैभव सूर्यवंशी को भारत के टी-20 टीम में जगह मिल गई है। यह खबर तब सामने आई जब बीसीसीआई ने इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे पर जाने के लिए टीम इंडिया की घोषणा की। वैभव सूर्यवंशी को पहली बार टीम इंडिया में जगह मिली है, जो उनके आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम है। वैभव सूर्यवंशी अभी श्रीलंका में इंडिया ए की टीम के साथ हैं। IPL 2026 में किया शानदार प्रदर्शन वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। वे आईपीएल में सबसे अधिक रन (776) बनाने वाले खिलाड़ी बने थे। उनका स्ट्राइक रेट (237.30) भी सबसे ज्यादा था और उन्होंने छक्के (72) भी सबसे अधिक मारे थे। वैभव सूर्यवंशी अभी महज 15 साल के हैं। उनके प्रदर्शन पर क्रिकेट के दिग्गजों की नजर थी और सभी एक सुर में यह मांग कर रहे थे कि वैभव को टीम इंडिया में जगह दी जाए। बिहार के रहने वाले हैं वैभव सूर्यवंशी वैभव सूर्यवंशी बिहार के समस्तीपुर के जिले के रहने वाले हैं। उन्हें अपने पिता से क्रिकेट की कोंचिंग मिली है। वे बचपन से ही क्रिकेट में रुचि लेते हैं और अभी उनकी शिक्षा भी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने 10वीं का बोर्ड भी नहीं दिया है।

Unknown जून 6, 2026 0
Russian President Vladimir Putin speaking at SPIEF 2026 while praising India's independent foreign policy.
SPIEF 2026 में पुतिन का भारत पर बड़ा बयान, बोले- राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है भारत

  सेंट पीटर्सबर्ग: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वतंत्रता की सराहना करते हुए कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और अपने फैसले स्वयं करता है। पुतिन ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है और किसी बाहरी दबाव या निर्देश के आधार पर नीतियां नहीं बनाई हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस के साथ भारत के ऊर्जा और आर्थिक संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों में लगातार चर्चा हो रही है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का किया उल्लेख फोरम के दौरान बोलते हुए पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के निर्णय लेने के अधिकार और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान किया जाना चाहिए। रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देशों को अपने हितों के अनुसार नीतियां तय करने का अधिकार है और इस सिद्धांत पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। रूस-भारत संबंधों को बताया मजबूत पुतिन ने भारत को रूस का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग जारी है और यह संबंध आपसी हितों तथा विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूस और भारत के बीच सहयोग को प्रभावित करने के लिए किसी प्रकार का बाहरी दबाव प्रभावी नहीं होगा। रूसी तेल खरीद को लेकर चर्चा में रहे थे भारत-अमेरिका संबंध पिछले कुछ वर्षों में रूस से तेल आयात को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कई बार चर्चा हुई है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जबकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी। भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसकी विदेश नीति और आर्थिक फैसले राष्ट्रीय हितों तथा ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं के आधार पर तय किए जाते हैं। वैश्विक मंच पर फिर चर्चा में भारत की विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को आगे बढ़ा रहा है। रूस, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखने की भारत की नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Congress leader Jairam Ramesh criticizes Modi government over India’s stance on Israel and West Asia conflict
इज़राइल मुद्दे पर कांग्रेस  महासचिव जयराम रमेश  का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला

कांग्रेस ने इज़राइल और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल के प्रति कथित रूप से एकतरफा समर्थन भारत की पारंपरिक विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और ऐतिहासिक रुख के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन की नीति पर चलता रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार इस परंपरा से दूर जाती दिखाई दे रही है। नेतन्याहू के कथित बयान का हवाला देकर कांग्रेस ने उठाए सवाल यह राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब जयराम रमेश ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक कथित बयान का हवाला दिया। कांग्रेस नेता के अनुसार, नेतन्याहू ने एक सम्मेलन में कहा था कि दुनिया के कई देशों में इज़राइल की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन भारत अब भी उसके समर्थन में खड़ा है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल के सबसे मजबूत वैश्विक समर्थकों में शामिल नजर आते हैं। कांग्रेस ने लगाया गाजा और ईरान मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व की लक्षित हत्या की कभी सार्वजनिक निंदा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि गाजा में जारी इज़राइली सैन्य अभियान, लेबनान पर हमलों और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के कथित विस्थापन जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार ने खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जयराम रमेश ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा की जाती है। फरवरी 2026 की मुलाकात का भी किया जिक्र कांग्रेस नेता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की फरवरी 2026 में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस मुलाकात के कुछ समय बाद इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। कांग्रेस ने सीधे तौर पर इन घटनाओं के बीच किसी संबंध का दावा नहीं किया, लेकिन सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल जरूर उठाए। ‘यह पूरे भारत की राय नहीं’, कांग्रेस ने कहा जयराम रमेश ने कहा कि नेतन्याहू का यह कहना कि भारत इज़राइल के समर्थन में खड़ा है, पूरी तरह सही नहीं है। उनके मुताबिक, यह प्रधानमंत्री मोदी और उनके राजनीतिक तंत्र का नजरिया हो सकता है, लेकिन देश के करोड़ों लोग फिलिस्तीनी जनता के प्रति सहानुभूति रखते हैं और पश्चिम एशिया में शांति तथा न्यायपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जनता हमेशा मानवाधिकार, शांति और संतुलित कूटनीति के साथ खड़ी रही है। केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख बताने की मांग कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, गाजा की स्थिति, ईरान-इज़राइल तनाव और फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना चाहिए और किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकार की ओर से अभी नहीं आया जवाब कांग्रेस के आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Pakistani journalist Najam Sethi comments on Marco Rubio’s India visit and US-India diplomatic relations.
‘ट्रंप की स्थिति कमजोर, इसलिए भारत को मनाने भेजे गए रूबियो’, पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी का दावा

Marco Rubio के भारत दौरे को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने की वजह से अमेरिका भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से रूबियो को भारत भेजा गया, ताकि प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत सरकार को संतुष्ट किया जा सके। भारत दौरे पर क्या बोले नजम सेठी सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो क्लिप में नजम सेठी एक टीवी चर्चा के दौरान कहते दिखाई दे रहे हैं कि अमेरिका को अब भारत के साथ अपने संबंध फिर से मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, टेक सेक्टर और चुनावी फंडिंग में भारतीय समुदाय की बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है।” “भारत ने अमेरिका को संदेश दिया” नजम सेठी ने दावा किया कि भारत ने रूबियो के स्वागत को लेकर प्रोटोकॉल के जरिए अमेरिका को नाराजगी का संकेत दिया। उनके मुताबिक, जब रूबियो भारत पहुंचे तो S. Jaishankar उन्हें रिसीव करने नहीं गए और उनकी जगह विदेश मंत्रालय के एक निचले स्तर के अधिकारी को भेजा गया। सेठी ने कहा कि यह भारत की तरफ से अमेरिका को संदेश देने का तरीका था कि “हम आपसे खुश नहीं हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि भारत पहले से ही अमेरिका का बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रोफेशनल्स और इंडियन-अमेरिकन समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेठी के मुताबिक, ईरान संघर्ष के दौरान भारत अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और Israel के करीब दिखाई दिया, लेकिन अमेरिका ने खुलकर भारत की सराहना नहीं की। इसी वजह से अब रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने मोदी की खुलकर की तारीफ भारत दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने मंच से ट्रंप से फोन पर बात कराई। इस दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं और भारत अमेरिका पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। विदेश मंत्री का पद क्यों अहम माना जाता है? अमेरिका में विदेश मंत्री का पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है। Marco Rubio वर्तमान ट्रंप प्रशासन में प्रमुख कूटनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति के बाद सत्ता के उत्तराधिकार क्रम में विदेश मंत्री चौथे स्थान पर होता है। ऐसे में किसी देश की यात्रा और वहां शीर्ष नेताओं से मुलाकात को अमेरिकी विदेश नीति के बड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है। भारत दौरे के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी और एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।  

surbhi मई 25, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses India-Nordic Summit in Norway alongside Nordic leaders
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, बोले- आतंकवाद पर ‘नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स’

Narendra Modi ने Norway में आयोजित तीसरे India-Nordic Summit के बाद आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता या दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आतंकवाद पर हमारा स्पष्ट और एकजुट रुख है — नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स।” भारत और नॉर्डिक देश ‘नेचुरल पार्टनर्स’ पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश स्वाभाविक साझेदार हैं और टेक्नोलॉजी दोनों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों के संबंधों में तेजी से प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले एक दशक में भारत में नॉर्डिक निवेश 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। वैश्विक शांति और नियम-आधारित व्यवस्था पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे Ukraine का युद्ध हो या पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत हमेशा शांति और जल्द समाधान के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में भारत और नॉर्डिक देश मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। रिसर्च, स्टार्टअप और इनोवेशन में बढ़ेगा सहयोग पीएम मोदी ने कहा कि अनुसंधान और इनोवेशन भारत-नॉर्डिक साझेदारी का अहम आधार बन चुके हैं। दोनों पक्ष विश्वविद्यालयों, रिसर्च लैब्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सहयोग को और मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक और ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी है। स्वच्छ ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी पर खास फोकस शिखर सम्मेलन में स्थिरता, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती तकनीक, ब्लू इकोनॉमी और हरित विकास जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों की साझेदारी लगातार अधिक मजबूत और गतिशील होती जा रही है, जो भविष्य में वैश्विक विकास और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के साथ तकनीकी साझेदारी पीएम मोदी ने कहा कि भारत नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता को अपनी प्रतिभा और नवाचार क्षमता के साथ जोड़कर वैश्विक समाधान विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि: Sweden की उन्नत विनिर्माण और रक्षा तकनीक Finland की दूरसंचार और डिजिटल विशेषज्ञता Denmark की साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य तकनीक को भारत की तकनीकी क्षमता के साथ जोड़कर दुनिया के लिए भरोसेमंद समाधान तैयार किए जाएंगे। कौशल विकास और प्रतिभा आवागमन पर भी सहमति प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसर भी विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Donald Trump and Xi Jinping meeting in Beijing amid rising focus on US-China relations
ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा ग्लोबल समीकरण? अमेरिका-चीन की बढ़ती नज़दीकी पर भारत की नजर

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का चीन दौरा वैश्विक राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। करीब नौ वर्षों बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति Beijing पहुंचा है। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और भारत के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिख रही, जबकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने अमेरिका की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर, भारत और China के बीच भी सीमाई और रणनीतिक मुद्दों को लेकर भरोसे की कमी बनी हुई है। ऐसे में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बढ़ती नरमी और सकारात्मक संकेतों को भारत बेहद ध्यान से देख रहा है। तनाव के बाद दिखी नरमी पिछले कई महीनों से अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ विवाद, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक तनाव जारी था। इसके बावजूद ट्रंप ने शी जिनपिंग को “महान नेता” और “मित्र” कहकर संबंधों में नरमी का संकेत दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब टकराव के बजाय स्थिर संबंधों की दिशा में बढ़ना चाहती हैं। हालांकि इसे सीधे तौर पर भारत के खिलाफ नहीं माना जा रहा, लेकिन इसके रणनीतिक असर को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। भारत के लिए क्यों अहम है यह समीकरण? भारत लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाकर चलने की नीति अपनाता रहा है। भारत की कोशिश रहती है कि उसके किसी भी देश से रिश्ते दूसरे देश के खिलाफ न दिखें। India के लिए अमेरिका और चीन दोनों ही बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। तकनीक, रक्षा, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में भारत की दोनों देशों पर अलग-अलग स्तर पर निर्भरता भी है। भारत लगातार बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और “मल्टीपोलर एशिया” की बात करता रहा है। लेकिन मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका का वैश्विक प्रभाव और एशिया में चीन की बढ़ती ताकत भारत के लिए रणनीतिक संतुलन की चुनौती पैदा करती है। एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं? भारत-अमेरिका संबंधों के विशेषज्ञ और रणनीतिक मामलों के जानकार Ashley Tellis ने पहले भी इस मुद्दे पर चिंता जताई थी। उन्होंने अपने एक लेख में लिखा था कि ट्रंप की नीतियों से पैदा हुई अनिश्चितताएं भारत को असहज करती हैं और इससे अमेरिका के साथ गहरी साझेदारी को लेकर भारत की सतर्कता बढ़ती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत की रणनीतिक हिचकिचाहट केवल ट्रंप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की पुरानी विदेश नीति और खुद महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा से जुड़ी हुई है। टेलिस के मुताबिक, चीन की बढ़ती ताकत और उसका आक्रामक रुख भारत के लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती है। ऐसे में अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी भारत की आवश्यकता बनी रहेगी, क्योंकि अकेले भारत के लिए चीन का संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। भारत के सामने संतुलन की चुनौती विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका और चीन के संबंधों में स्थिरता आती है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी पड़ सकता है। भारत को ऐसे माहौल में अपनी विदेश नीति को बेहद संतुलित और व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ाना होगा। फिलहाल नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि ट्रंप-शी मुलाकात केवल कूटनीतिक नरमी तक सीमित रहती है या आने वाले समय में यह वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करती है।  

surbhi मई 15, 2026 0
India New Zealand deal
10 साल बाद हुई भारत-न्यूजीलैंड के बीच मेगा ‘डील’

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आधिकारिक मुहर लग गई है। लगभग एक दशक से चल रही बातचीत के बाद हुए इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस दौरान Piyush Goyal और न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में करार पर हस्ताक्षर हुए।   भारतीय उत्पादों को मिलेगा टैक्स-फ्री एक्सेस इस समझौते के तहत भारत के टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना शुल्क (टैक्स-फ्री) प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वहीं न्यूजीलैंड के ऊन, लकड़ी और समुद्री उत्पादों को भी भारत में टैक्स छूट मिलेगी।   युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे FTA का सबसे बड़ा लाभ युवाओं को मिलेगा। समझौते के तहत 5,000 भारतीय पेशेवरों को विशेष वीजा के जरिए तीन साल तक न्यूजीलैंड में काम करने का मौका मिलेगा। आईटी, हेल्थ, शिक्षा, कंस्ट्रक्शन और फाइनेंस सेक्टर के युवाओं के लिए यह सुनहरा अवसर है। साथ ही योग, आयुष और भारतीय शेफ जैसे पारंपरिक कौशल को भी अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा।   20 अरब डॉलर निवेश की संभावना इस समझौते से भारत में विदेशी निवेश का रास्ता भी खुलेगा। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से करीब 20 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है। इससे उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के क्षेत्र में तेजी आएगी।   किसानों के हितों की सुरक्षा सरकार ने इस डील में संतुलन बनाते हुए डेयरी, चीनी और कुछ संवेदनशील सेक्टर्स को इससे बाहर रखा है। इसका उद्देश्य भारतीय किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है।

Unknown अप्रैल 27, 2026 0
India sends humanitarian aid supplies including relief kits to Afghanistan after earthquake and floods crisis
अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए आगे आया भारत, भेजी बड़ी राहत सामग्री

प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए भारत ने एक बार फिर मानवता का परिचय दिया है। बाढ़ और भूकंप के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां के लोगों की सहायता के लिए मानवीय मदद और आपदा राहत (HADR) सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के लोग भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में भारत ने तुरंत सहायता पहुंचाने का फैसला लिया और राहत सामग्री भेजी। भारत द्वारा भेजी गई इस सहायता में रोज़मर्रा के इस्तेमाल की कई जरूरी चीजें शामिल हैं। इनमें किचन सेट, सफ़ाई का सामान, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। ये सभी सामान खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हैं, जिनके घर या बुनियादी सुविधाएं आपदा में प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी राहत सामग्री न केवल प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने और सामान्य जीवन की ओर लौटने में भी मदद करती है। तिरपाल और प्लास्टिक शीट जैसे सामान अस्थायी आश्रय बनाने में मददगार होते हैं, वहीं स्लीपिंग बैग और किचन सेट रोजमर्रा के जीवन को सुगम बनाते हैं। भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और भारत समय-समय पर वहां के लोगों की मदद करता रहा है। इससे पहले भी भारत ने खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य आवश्यक सहायता भेजी है। रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है और इस चुनौतीपूर्ण समय में हर संभव मानवीय सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर भारत आगे भी मदद जारी रख सकता है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देता है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
External Affairs Minister S Jaishankar addressing India’s stance on Middle East crisis
“भारत दलाल देश नहीं”: S. Jaishankar का दो टूक संदेश, पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट रुख

नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई अहम सर्वदलीय बैठक में भारत ने अपनी कूटनीतिक स्थिति साफ कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट कहा कि भारत वैश्विक राजनीति में “दलाल देश” की भूमिका नहीं निभा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब Shehbaz Sharif ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश करते हुए बातचीत की मेजबानी की इच्छा जताई है।   बैठक में क्या हुआ? यह उच्चस्तरीय बैठक रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें गृह मंत्री Amit Shah, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सरकार ने विपक्ष को जानकारी दी कि भारत की प्राथमिकता इस समय दो अहम मुद्दे हैं: खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना   पाकिस्तान की भूमिका पर सरकार का जवाब बैठक में विपक्ष ने पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल उठाए। इस पर S. Jaishankar ने कहा कि पाकिस्तान का यह रोल नया नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 1980 के दशक से ही अमेरिका-ईरान संवाद में पाकिस्तान एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को “नई रणनीति” के रूप में देखना सही नहीं होगा।   कूटनीतिक स्तर पर भारत की पहल सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से बातचीत में स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को जल्द समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है। भारत ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी है और आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।   अंतरराष्ट्रीय स्थिति और बढ़ती जटिलता पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को और जटिल बना दिया है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये बैकचैनल कूटनीति में सक्रिय बताए जा रहे हैं ईरान ने सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार किया है अमेरिका ने सीमित समय के लिए हमलों पर रोक के संकेत दिए हैं इस बीच, क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ रहा है।   सरकार बनाम विपक्ष: आरोप-प्रत्यारोप जहां सरकार ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता का बचाव किया, वहीं विपक्ष ने इसे “अपर्याप्त प्रतिक्रिया” बताया और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addressing Lok Sabha on Middle East crisis and evacuation of Indian citizens
लोकसभा में प्रधानमंत्री का बयान: मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की रणनीति, 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटे

नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पर देश का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था से लेकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा तक महसूस किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें ईरान, अमेरिका और इजरायल शामिल हैं। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत में भी गैस आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है। भारत के सामने बहुआयामी चुनौतियां प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि यह संकट भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और मानवीय-तीनों स्तरों पर गंभीर चुनौतियां लेकर आया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के व्यापारिक और ऊर्जा संबंध गहरे हैं, और कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देते हुए अब तक लगभग 3.75 लाख भारतीयों को खाड़ी देशों से सुरक्षित वापस लाने में सफलता हासिल की है। इसे सरकार की बड़ी मानवीय और कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा संकट से निपटने की रणनीति प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत पहले से ही 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है और मौजूदा संकट के बाद वैकल्पिक स्रोतों की खोज को और तेज किया गया है। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने LPG और अन्य ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका, रूस और नाइजीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ाया है। बावजूद इसके, कुछ क्षेत्रों में गैस की कमी की आशंका बनी हुई है, हालांकि सरकार का दावा है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। वैश्विक शांति की अपील प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के देश इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है। भारत भी कूटनीतिक स्तर पर शांति और स्थिरता के पक्ष में लगातार प्रयास कर रहा है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Shashi Tharoor speaking at event amid debate over India’s stance on Iran-Israel conflict
ईरान-इजरायल युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर ने सोनिया गांधी के बयान से बनाई दूरी, सरकार की चुप्पी का किया बचाव

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की विदेश नीति पर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने हाल ही में भारत सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी से बचना बताया था। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और वहां हुए हमलों पर भारत की ओर से खुलकर प्रतिक्रिया न देने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। थरूर का अलग रुख, कहा-यह ‘मोरल सरेंडर’ नहीं अब इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री Shashi Tharoor ने अपनी ही पार्टी से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर भारत की चुप्पी को “मोरल सरेंडर” कहना गलत है। थरूर के अनुसार, यह चुप्पी दरअसल एक “रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट” यानी सोच-समझकर अपनाई गई कूटनीतिक रणनीति है, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठाए सवाल थरूर ने अपने लेख में यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन मूल्यों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है-जैसे शांति, आक्रामकता का विरोध और संप्रभुता का सम्मान। ‘हर बार खुलकर निंदा जरूरी नहीं’ हालांकि, इन आपत्तियों के बावजूद थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से निंदा करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। उनका मानना है कि कूटनीति में कई बार संतुलन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होता है। नेहरू की नीति का दिया उदाहरण थरूर ने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए Jawaharlal Nehru की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति नैतिकता से समझौता नहीं, बल्कि उस समय के वैश्विक हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका थी। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपना रहा है, जहां वह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों को साधता है। ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया रुख थरूर ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी- 1956 में हंगरी संकट   1968 में चेकोस्लोवाकिया   1979 में अफगानिस्तान   इन मामलों में भी भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाया था। राजनीतिक बहस तेज इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि ईरान-इजरायल युद्ध पर न सिर्फ सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार बदल रहे हैं।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
BRICS backdrop amid rising Iran Middle East tensions and diplomatic discussions.
Iran की BRICS में एकजुटता की मांग से बढ़ी India की कूटनीतिक चुनौती, पश्चिम एशिया संकट पर नई दुविधा

  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने BRICS देशों से एकजुटता की अपील की है, जिससे India के सामने कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। मौजूदा समय में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है और इस कारण संकट पर साझा रुख तय करना भारत के लिए जटिल हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच अब तक चार बार बातचीत हो चुकी है। हालिया बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारतीय विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar से पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर BRICS देशों की एकजुटता की मांग की।   मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की भी बातचीत इससे पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बात कर क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और असैन्य ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा व सामान की निर्बाध आपूर्ति भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।   रूस से भी हुई चर्चा पश्चिम एशिया संकट को लेकर Subrahmanyam Jaishankar ने रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov से भी फोन पर बातचीत की। माना जा रहा है कि BRICS देशों के बीच एक संतुलित और सभी के लिए स्वीकार्य संयुक्त बयान तैयार करने को लेकर प्रारंभिक स्तर पर चर्चा चल रही है।   BRICS में रुख तय करना मुश्किल विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS में साझा रुख तय करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके कई सदस्य सीधे तौर पर इस क्षेत्रीय तनाव से जुड़े हैं। इनमें Iran के साथ-साथ United Arab Emirates और Saudi Arabia भी शामिल हैं।   ईरान की क्या मांग ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के कथित हमलों के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा करने की अपील की और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में BRICS देशों की भूमिका को अहम बताया। इस साल के अंत में BRICS शिखर सम्मेलन भारत में प्रस्तावित है, ऐसे में पश्चिम एशिया संकट पर सदस्य देशों के बीच संतुलित रुख तय करना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Oil tanker Shenlong safely arrives at Mumbai Port amid Strait of Hormuz tensions.
जयशंकर की कूटनीति रंग लाई: हॉर्मुज पार कर मुंबई पहुंचा भारत के लिए तेल लेकर आया टैंकर

  नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत की कूटनीति ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के बावजूद सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आया टैंकर शेनलोंग सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। इस घटनाक्रम को भारत की प्रभावी कूटनीतिक पहल का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस सफलता के पीछे भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई महत्वपूर्ण बातचीत की अहम भूमिका रही। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी।   युद्ध के बीच सुरक्षित पहुंचा जहाज दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण Strait of Hormuz युद्ध का संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। हाल के दिनों में कई तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई थी। इसी माहौल में लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर शेनलोंग सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर रवाना हुआ था। जोखिम भरे समुद्री रास्ते को पार करते हुए यह जहाज सुरक्षित रूप से Mumbai Port पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि वह अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। ऐसे में भारत के लिए तेल लेकर आए जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत की संतुलित विदेश नीति और कूटनीतिक संवाद का परिणाम माना जा रहा है।   जयशंकर-अराघची की बातचीत से बना रास्ता सूत्रों के अनुसार जब ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही सीमित करने का संकेत दिया, तब भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल की। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर विस्तृत बातचीत की और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी जानकारी दी कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात और समुद्री सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया तथा संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देते हुए भारतीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पहल की। इसके साथ ही जयशंकर ने उसी दिन जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत कर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को साझा किया।   मुंबई में उतारा जा रहा कच्चा तेल यह विशाल तेल टैंकर बुधवार दोपहर लगभग 1 बजे Mumbai Port पहुंचा। बाद में शाम करीब 6 बजे इसे ‘जवाहर द्वीप’ टर्मिनल पर बर्थ किया गया। जहाज में लगभग 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है, जिसे मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा। जहाज पर भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के कुल 29 क्रू सदस्य सवार हैं। मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के डिप्टी कंजर्वेटर प्रवीण सिंह के मुताबिक जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसे पूरा होने में लगभग 36 घंटे लग सकते हैं।   संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हालांकि शेनलोंग का सुरक्षित पहुंचना राहत भरी खबर है, लेकिन समुद्री क्षेत्र में खतरा पूरी तरह टला नहीं है। शिपिंग महानिदेशालय के अनुसार करीब 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अब भी युद्ध क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। भारत ने अब तक अपनी कूटनीतिक पहल और समन्वय के जरिए देश महिमा, स्वर्ण कमल और विश्व प्रेरणा समेत सात जहाजों को सुरक्षित अरब सागर के जलक्षेत्र में पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय कूटनीति ही ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रही है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
India criticizes Pakistan at United Nations Security Council over Afghanistan airstrikes and terrorism
UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, अफगानिस्तान पर हमलों और आतंकवाद को लेकर घेरा

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई अहम बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। भारत ने कहा कि रमजान जैसे पवित्र महीने में ऐसे हमले करना और साथ ही इस्लामी एकजुटता की बातें करना गंभीर पाखंड है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने बैठक में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बात करने वाले देश अगर रमजान के दौरान नागरिकों पर हवाई हमले करते हैं, तो यह दोहरे मानदंड को दर्शाता है। उन्होंने बिना सीधे नाम लिए स्पष्ट संकेत दिया कि भारत की टिप्पणी Pakistan की कार्रवाई की ओर है।   नागरिकों की मौत पर जताई कड़ी चिंता भारत ने कहा कि अफगानिस्तान में हालिया हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 6 मार्च 2026 तक करीब 185 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। भारत ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, United Nations चार्टर और किसी भी देश की संप्रभुता के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन बताया।   आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप अपने संबोधन में P. Harish ने कहा कि आतंकवाद आज भी वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देश आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक हथियार के रूप में करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवादी संगठनों जैसे ISIS, Al-Qaeda, Lashkar-e-Taiba और Jaish-e-Mohammed के साथ-साथ इनके सहयोगी और प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत है। भारत ने हाल ही में हुए एक आतंकी हमले का भी जिक्र किया, जिसमें The Resistance Front ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में धार्मिक आधार पर हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।   अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता इस बैठक में अफगानिस्तान की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप विशेष प्रतिनिधि Georgette Gagnon ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव का असर अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सीमा बंद होने के कारण अफगानिस्तान के व्यापार पर भारी असर पड़ा है। फिलहाल ईरान के रास्ते व्यापार जारी है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते युद्ध और अस्थिरता के कारण वह भी प्रभावित हो रहा है। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगी हैं और पहले से कमजोर अफगान अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के अनुसार, अफगानिस्तान की दो प्रमुख सीमाओं पर बढ़ती अस्थिरता पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
India’s External Affairs Minister S Jaishankar speaking in Rajya Sabha on Middle East crisis
मिडिल ईस्ट संकट पर भारत सतर्क, ऊर्जा जरूरतों को लेकर सभी विभाग अलर्ट: एस जयशंकर

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Israel, Iran तथा United States के बीच जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सोमवार को Rajya Sabha में बयान देते हुए कहा कि भारत इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करता है। जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि Narendra Modi स्वयं स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सरकार की विभिन्न एजेंसियां हालात पर निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण आम जनजीवन और कारोबार दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भी चिंताएं बढ़ी हैं। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान में फंसे भारतीयों की मदद के लिए Embassy of India, Tehran लगातार काम कर रहा है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और इस विषय पर सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र के देश भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन मौजूदा संघर्ष की वजह से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील कर रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के नेतृत्व से संपर्क करना आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति हमेशा स्पष्ट रही है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध से नहीं बल्कि संवाद, संयम और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत का मानना है कि तनाव कम करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय सबसे जरूरी है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0