नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के छह दिवसीय दौरे पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि दौरे का उद्देश्य हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकी और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि और लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अहम समझौतों पर चर्चा हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष फोकस रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वार्षिक अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपनी विशेष K9 डॉग स्क्वॉड टीमों को यात्रा मार्गों, बेस कैंपों और पवित्र गुफा क्षेत्र में तैनात किया है। इन विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर और ट्रैकर डॉग्स का मुख्य कार्य विस्फोटकों का पता लगाना, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करना और यात्रा मार्गों को सुरक्षित बनाना है। क्या है यह चार पैरों वाले ‘K9 योद्धा’? CRPF के ये चार पैरों वाले ‘K9 योद्धा’ बम निरोधक दस्तों और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ मिलकर बालटाल और पहलगाम मार्गों, ट्रांजिट कैंपों, काफिले के रास्तों, हेलीपैड तथा संवेदनशील स्थलों पर लगातार एंटी-सबोटाज जांच कर रहे हैं। इसके अलावा, कठिन पहाड़ी इलाकों में खोज एवं बचाव अभियानों के लिए भी इन डॉग्स को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए K9 टीमों के साथ निगरानी ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और आधुनिक सर्विलांस तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पूरे यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। पूर्व महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार CRPF के पूर्व महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार, K9 इकाइयों की तीव्र सूंघने की क्षमता उन्हें पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विस्फोटकों और छिपे हुए खतरों का पता लगाने में सक्षम बनाती है। यही वजह है कि हर संवेदनशील स्थान पर तीर्थयात्रियों के पहुंचने से पहले डॉग स्क्वॉड द्वारा गहन जांच की जा रही है। इस वर्ष की 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने "ऑपरेशन शिव" के तहत एक लाख से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 670 से अधिक कंपनियां, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड में कार्य कर रही हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल की। डॉक्टरों ने नियमित वेतन, सेवा सुरक्षा और 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। हड़ताल का असर राजधानी के कई सरकारी अस्पतालों और मोहल्ला क्लीनिकों की स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला। वेतन और सेवा शर्तों को लेकर नाराजगी प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने समय पर वेतन भुगतान, 7वें वेतन आयोग का लाभ, नौकरी की सुरक्षा और स्थायी नियुक्ति की मांग दोहराई। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार सरकार के सामने मांगें रखने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर हड़ताल के कारण कई सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं को जारी रखा गया ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। मरीजों को सामान्य जांच और परामर्श के लिए इंतजार करना पड़ा। सरकार से जल्द समाधान की उम्मीद NHM डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जा सकता है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डॉक्टरों की मांगों पर विचार किया जा रहा है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
1698 – ब्रिटेन के थॉमस सेवरी ने पहले व्यवसायिक स्टीम इंजन का पेटेंट हासिल किया। 1751 – स्वीडन के रसायनशास्त्री और खदान विशेषज्ञ फ्रेडरिक क्रोन्स्टलर निकेल नामक धातु का पता लगाने में सफल हुए। 1760 – मराठा सेना ने दिल्ली पर कब्जा किया। 1776 - संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। 1778 – पर्शिया ने अर्जेटिना के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1789 - ईस्ट इंडिया कंपनी ने पेशवा और निजाम के साथ टीपू सुल्तान के खिलाफ संधि की। 1819 – अमेरिका ने पहला बचत बैंक ‘बैंक ऑफ सेविंग इन न्यूयॉर्क’ शुरू हुआ। 1827 - न्यूयॉर्क से दास प्रथा को समाप्त किया गया। 1828 - लॉर्ड विलियम बेंटिंक कलकत्ता (अब कोलकाता) नए गवर्नर-जनरल के रूप में अपना प्रशासन शुरू करने के लिए यूनाइटेड किंगडम के राजा जॉर्ज IV के स्थान पर भारत आए। 1865 - मशहूर अंग्रेजी उपन्यास एलिस इन वंडरलैंड का प्रकाशन हुआ। 1881 - सिलिगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच टाॅय ट्रेन की शुरुआत हुई। 1884 – स्टॉक एक्सचेंज दाउ जोंस ने अपना पहला स्टॉक इंडेक्स प्रकाशित किया। 1886 - कनाडा की पहली अंतरमहाद्वीपीय ट्रेन ब्रिटिश कोलंबिया के पोर्ट मूडी पहुँची। 1886 - फ्रांस ने अमेरिका को स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का तोहफा दिया। 1914 - बर्दुन का युद्ध समाप्त हुआ। 1934 - लियो जिलार्ड ने परमाणु बम के चेन रिएक्शन का पेटेंट कराया। 1946 – द्वीप समूह फिलीपीन को अमरिका से स्वतंत्रता मिली। 1947 - ब्रिटिश पार्लियामेंट के सामने भारतीय स्वतंत्रता बिल का प्रस्ताव रखा गया था। जिसके तहत देश का भारत और पाकिस्तान में बंटवारा हुआ। 1962 – फ्रांस के राष्ट्रपति ने अलजीरिया की आजादी की घोषणा की। 1970 – 105 यात्रियों वाला हवाई जहाज स्पेन में लापता हो गया। 1986 - प्रसिद्ध क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने 115 टेस्ट मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया। 1996 - रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन पुन: चार वर्ष हेतु राष्ट्रपति निर्वाचित। 1997 - अमेरिकी यान 'सोजर्नर' मंगल ग्रह पर पहुँचा। 1998 - चेक गणराज्य की याना नावोत्ना ने विम्बलडन टेनिस का एकल ख़िताब जीता। 1998 - जापान ने मंगल ग्रह के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए 'प्लेनेट-बी' नामक अपना प्रथम अंतराग्रहिक मिशन भेजा। 1998 - ब्रिटेन के एक पावरबोट 'द केवल एंड वायरलेस एडवेंचर' ने 74 दिन 20 घंटे व 38 मिनट में यात्रा पूरी करके सबसे शीघ्र विश्व भ्रमण का रिकार्ड तोड़ा। 1999 - लिएंडर पेस और महेश भूपति ने विम्बल्डन में पुरुष युगल का खिताब जीता। 2001 - भारत द्वारा पाकिस्तान के नागरिकों (बंदियों) की रिहाई के निर्देश। 2003 - पाकिस्तान में शिया मस्जिद पर हुए हमले में 44 मारे गये। 2005 - आस्ट्रेलिया में डाल्फ़िन की एक नई प्रजाति स्नबफ़िन खोजी गई। 2007 - वेबसाइट सेंटिडो कॉमन के मुताबिक मैक्सिको के कॉर्लोस स्लिम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने। 2008 - लगभग आठ साल बाद चीन की मुख्य भूमि और ताईवान के बीच नियमित सीधी विमान सेवा का पहला विमान ताइवान के तायोयुआन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। 2010 - एक परीक्षा पत्र में कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के आरोप की वजह से आठ हमलावरों ने केरल के प्रोफ़ेसर जोसेफ़ पर हमला कर उनके हाथ काट दिए। 2012 - यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन ‘सर्न’ ने हिग्स बोसॉन कणों के खोज की घोषणा की। 2013 – मिस्र की सेना ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी का तख्तापलट किया। 2013 - अमेरिका के शिकागो शहर में गोलीबारी की घटना में 12 की मौत हुई और 60 घायल हुए। 2015 - चिली ने पहली बार कोपा अमेरिका फुटबाल खिताब जीता। 2019 - भारत की स्प्रिंटर हिमा दास ने पोलैंड में पोजनान एथलेटिक्स ग्रां प्री में महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 2019 - नासा ने ओरियन कैप्सूल के लिए एक लॉन्च-एबॉर्ट सिस्टम का परीक्षण एसेंट एबॉर्ट -2 का सफल परीक्षण किया। 2020 - जर्मन फुटबॉल कप : बायर्न म्यूनिख ने बायर लीवरकुसेन को 4-2 से हराकर सबसे ज्यादा 20वीं बार खिताब जीता। 2021 - पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2021 - दक्षिणी फिलीपींस में सैन्य विमान C-130 क्रेश हुआ , 92 लोग सवार थे, लगभग 17 की मौत व 40 घायल हुए। 2022 - दिल्ली विधानसभा ने वेतन, भत्ता और पेंशन संशोधन विधेयक 2022 पारित किया , राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाना शेष। 2022 - हिमाचल के कुल्लू में बस खाई में गिरी, स्कूली बच्चों समेत 12 लोगों की मौत, कई जख्मी हुए। 2022 - अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर शिकागो में फ्रीडम डे परेड के दौरान हुई फायरिंग 222 में 9 लोगों की मौत हुई व 57 लोग घायल हुए। 2023 - महाराष्ट्र में मुंबई-आगरा हाईवे पर होटल में कंटेनर घुसा व 38 को कुचला ,10 की मौत हुई। 2023 - अजीत अगरकर भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चनयकर्ता बने। 2023 - पंचायती राज मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक संपन्न हुई। 2024 - एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भाषण दिया। 2024 - दो दिवसीय ग्लोबल इंडियाएआई शिखर सम्मेलन 2024 सम्पन्न हुआ। 2025 - पीएम मोदी को त्रिनिदाद और टोबैगो के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार "द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो से नवाजा गया। 2025 - IND vs ENG टेस्ट मैच: एजबेस्टन में चल रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन भारतीय टीम ने 587 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। 4 जुलाई को जन्मे व्यक्ति 1897 - अल्लूरी सीताराम राजू - प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी। 1898 - गुलज़ारीलाल नन्दा - भारत के भूतपूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री। 1912 - दक्षिणायनी वेलायुधन एक भारतीय सांसद और उत्पीड़ित वर्गों के नेता थे । 1916 - नसीम बानो, हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री। 1933 - आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल - के. रोसैया। 1943 - विमलेश कांति वर्मा - भाषाविज्ञान, कोश निर्माण, पाठालोचन, अनुवाद और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले भारतीय। 1945 - सुशील कुमार - हिन्दी फ़िल्मों के अभिनेता। 1954 - एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी भारत के २१वें नौसेनाध्यक्ष थे। 1956 - लक्ष्मीकांत यशवंत पारसेकर गोवा के एक राजनेता। 1997 - चिराग शेट्टी एक भारतीय पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी। 4 जुलाई को हुए निधन 1760 : मीर जाफर के बेटे मिरान की गंडक नदी के किनारे बिजली गिरने से मौत हुई। 1857 - धन सिंह गुर्जर भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी थे। 1902 - स्वामी विवेकानन्द - साहित्य, दर्शन और इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान। 1904 – अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनिज़्म के संस्थापक थ्योडोर हर्टज़ल का निधन हुआ। 1963 - पिंगलि वेंकय्या- भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक। 1978 - अम्मु स्वामीनाथन - भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक सेनानी और भारत की संविधान सभा के लिए चुनी जाने वाली महिला सदस्य थीं (कन्फर्म नहीं)। 1982- भरत व्यास, बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार। 2022 - वयोवृद्ध बंगाली फिल्म निर्देशक, तरुण मजूमदार (92) का निधन हुआ। 2023 - फ्रांसीसी फुटबॉल खिलाड़ी जॉर्जिस बेरेटा (77) का निधन हुआ। 2025 - पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मुनीश्वर चंदर डावर (डॉ. एम.सी. डावर , 79) का निधन हुआ। 2025 - कुशल कॉन्सर्ट वायलिन वादक (संगीतकार) श्रीमती राज कौर रंधावा (राजकुमारी कौर रंधावा , 88) का निधन हुआ। 4 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री यादवराव महाराज पुण्यतिथि धापेवाडा (नागपुर)। चेहल्लुम / अरबईन (Arbaeen इस्लाम) शोक पर्व। श्री के. रोसैया जयन्ती। स्वामी विवेकानंद पुण्य तिथि। श्री अल्लूरी सीताराम राजू जयन्ती। श्री गुलज़ारीलाल नन्दा जयन्ती। श्री पिंगलि वेंकय्या समृति दिवस। अमेरिका स्वतंत्रता दिवस। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता (को ऑपरेटिव) दिवस (जुलाई के पहले शनिवार को)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।