नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किया है। नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बदलाव को स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण तत्कालीन सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ा था। इसके बाद जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए आपातकाल लागू किया गया। इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को प्रमुखता एनसीईआरटी ने आपातकाल विरोधी आंदोलन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से शामिल किया है। पुस्तक के अनुसार, उनके नेतृत्व में बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों में छात्रों और नागरिकों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। लोकतंत्र की चुनौतियों पर भी चर्चा नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के अलावा फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। साथ ही ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नामक नया खंड जोड़ा गया है, जिससे छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकें। लोकतांत्रिक संस्थाओं और मीडिया की भूमिका पर जोर पुस्तक में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जवाबदेही और भूमिका को रेखांकित किया गया है। इसके अलावा 2024 के आम चुनाव, मतदाताओं की भागीदारी, पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण और स्थानीय लोकतंत्र के सफल उदाहरणों को भी शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र की व्यापक और व्यावहारिक समझ मिल सके।
757 – संत पॉल-I ने कैथोलिक पोप के रुप में अपने कार्यकाल की शुरुआत की। 1658 – औरंगजेब ने सामुगढ़ की लड़ाई में दारा शिकोह को पराजित किया। 1727 – पीटर-II 11 साल की उम्र में रूस का जार बना। 1733 - क्यूबेक सिटी में भारतीय दासों को रखने के लिए कनाडाई का अधिकार बरकरार रखा गया। 1790 - रोड आइलैंड ने संयुक्त राज्य के संविधान की पुष्टि की और ऐसा करने वाला 13 मूल राज्यों में से अंतिम राज्य बन गया। 1861 - हांगकांग जनरल चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना की गयी। 1874 - स्विट्ज़रलैंड में वर्तमान संविधान प्रभावी किया गया। 1915 - तोफिलोब्रागा पुर्तगाल के राष्ट्रपति बने। 1916 – यूएस के प्रेसिडेंट का आधिकारिक झंडा अपनाया गया। 1947 - फ्लुगेलैग द्वीपसमूह पर एक हवाई जहाज पहाड़ी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 25 लोग मारे गए। 1953 – एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने। 1959 – चार्ल्स दि गाल फ्रांस के राष्ट्रपति बने। 1970 – यूनाइटेड रुस ने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किया। 1983 - नील बोनेट ने चार्लोट मोटर स्पीडवे पर दुनिया के 24 वें दौड़ में अपनी जीत दर्ज कराई। 1985 – यूरोपीयन फुटबॉल कप के फाईनल को लेकर हुए दंगों में 39 खेलप्रेमी मरे। 1990 – दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में आए भीषण भूकंप से 56 मरे। 1990 - यूरोपीय बैंक पुनर्निर्माण और विकास (ईबीआरडी) की स्थापना। 1990 - बोरिस येल्तसिन सोवियत संघ के राष्ट्रपति निर्वाचित। 1999 - नाइजीरिया में नागरिक सत्ता की स्थापना। 2003 - ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर इराक के पुनर्निर्माण कार्यों का आकलन करने के लिए बसरा पहुँचे। 2004 - म्यांमार में चक्रवाती तूफ़ान ने 140 लोगों की जान ली। 2004 - पाकिस्तान ने परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान पर लगाये गये प्रतिबंधों में ढील दी। 2007 - जापान की रियो मोरी मिस यूनिवर्स 2007 बनीं। 2008 - भारतीय जनता पार्टी के नेता वीएस येदुरप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2008 - इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट माइस्पेस के साथ ई-मेल सम्बन्धी समझौता किया। 2008 - नेपाली सरकार ने राजतंत्र का अन्त कर गणतंत्र की घोषणा करते हुए शाही महलों सहित देश के सभी भागों से राजतंत्र के सभी चिह्न हटाते हुए राष्ट्रध्वज को मान्यता दी। 2010 - अमेरिका और भारत के बीच सितंबर 2008 में हुए 123 अग्रीमेंट में छोड़ दिए गए परमाणु ईंधन की रिप्रोसेसिंग के पहलू पर अमेरिकी प्रशासन ने सहमति का ऐलान किया। 2010 - भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हेनान प्रांत के लुओयांग में पहली सदी के प्राचीन श्वेताश्व व्हाइट हार्स मंदिर परिसर में भारतीय शैली से निर्मित एक बौद्ध मंदिर का लोकार्पण किया। 2019 - अमेरिका ने भारतीय मुद्रा को निगरानी सूची से बाहर निकाला। 2019 - नवीन पटनायक ने लगातार पांचवीं बार ओडिशा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2020 - भारत और श्रीलंका ने सहयोग के नए रास्ते तलाशते हुए आपसी संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता की फिर पुष्टि की। 2020 - जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 23 लघु वन उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सूची में शामिल किया , इनमें वन तुलसी के बीज, वन जीरा, मशरूम, काला चावल और जोहर चावल जैसी वस्तुएं शामिल हैं। 2020 - ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका देशों के संगठन ब्रिक्स के टैक्स प्राधिकारियों के प्रमुखों की बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी मेजबानी फेडरल टैक्स सर्विस ऑफ़ रूस द्वारा की गई। 2021 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड के कारण अपने अभिभावक खो चुके बच्चों के लिए पीएम केयर्स बाल योजना की घोषणा की। 2022 - तारा एयरलाइंस का डीएचसी-6 ट्विन ओटर विमान नेपाल के मस्टैंग में दुर्घटनाग्रस्त होने से सभी 22 लोगों (16 नेपाली, 4 भारतीय व 2 जर्मन) की मौत हुई। 2022 - भारत और बांग्लादेश के बीच दो साल बाद ट्रेन सेवा बहाल हुई। 29 मई को जन्मे व्यक्ति👉 1724 - पोप बेनेडिक्ट तेरहवें जो पियोरो ऑरसिनी का जन्म हुआ जो की 245 वे पोप के रूप में सफल हुए। 1865 - रामानन्द चैटर्जी - पत्रकारिता जगत के एक पुरोगामी शख्सियत थे। 1906 - कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर - हिन्दी के जाने-माने निबंधकार। 1942 - हुल्लड़ मुरादाबादी एक हिंदी हास्य कवि थे। 1954 - पंकज कपूर -भारतीय अभिनेता (1961 का भी वर्णन मिलता है इसलिए कन्फर्म कर लें)। 1977 - लोगनाथन मुरुगन - अधिवक्ता , मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री । 29 मई को हुए निधन👉 1933 - लोकराम नयनराम शर्मा - भारत के स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और संगठनकर्त्ता। 1972 - पृथ्वीराज कपूर - हिंदी फ़िल्म और रंगमंच अभिनय के इतिहास पुरुष, जिन्होंने मुम्बई में 'पृथ्वी थिएटर' स्थापित किया। 1977 - सुनीति कुमार चटर्जी - भारत के प्रसिद्ध भाषाविद, साहित्यकार तथा विद्याशास्त्री 1987 - चौधरी चरण सिंह - भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री, जो किसानों की आवाज़ बुलन्द करने वाले प्रखर नेता माने जाते थे। 2014 - कार्लहेंज़ बॉम- ऑस्ट्रियाई अभिनेता। 2020 - वयोवृद्ध गीतकार योगेश गौड़ का निधन। 2020 - बेजान दारुवाला एक भारतीय लेखक और ज्योतिष थे। 2020 - छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी का निधन। 2021 - जाने-माने शिक्षाविद् और अन्ना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एम. अनंतकृष्णन का निधन हुआ। 2022 - मानसा में पंजाबी सिंगर और नेता सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या हुई। 2022 - पूर्व ब्रिटिश चैंपियन जॉकी लेस्टर पिगॉट (86) का निधन हुआ। 29 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉 🔅 श्री महेश्वरी जयन्ती ( ज्येष्ठ शुक्ल नवमी , माहेश्वरी समाज )। 🔅 गुरुदेव डॉ॰ रामचन्द्र दत्तात्रेय रानडे पुण्यतिथि (मराठी कलेण्डर अनुसार)। 🔅 चौ. चरणसिंह पुण्य दिवस। 🔅 श्री लोकराम नयनराम शर्मा स्मृति दिवस। 🔅 श्री पृथ्वीराज कपूर स्मृति दिवस। 🔅 अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस। 🔅 अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस (International Day of United Nations Peacekeepers)। 🔅 विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस (World Digestive Health Day)। कृपया ध्यान दें जी👉 यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
1679 – ब्रिटेन की संसद ने बन्दी प्रत्यक्षीकरण कानून पारित किया था, जिसे दुनिया का पहला मनुष्य की निजी आज़ादी का मानवाधिकार कानून माना जाता है। 1703 - पुर्तगाल महा संधि में शामिल हुआ। 1739 – मुगल बादशाह मोहम्मद शाह और ईरान के नादिर शाह के बीच हुई संधि के परिणामस्वरूप अफगानिस्तान, भारत से अलग हुआ। 1805 - नेपोलियन को इटली के राजा का ताज पहनाया गया। 1822 – नार्वे में चर्च में आग लगने से 122 लोगों की मौत हुई। 1828 - माना जाता है कि जंगली बच्चा कास्पर हॉसर नूरमबर्ग, जर्मनी में खोजा गया। 1889 – पहली बार एफिल टॉवर का एलिवेटर आम जनता के लिए खोला गया। 1896 - पहली अमेरिकी अंतः मेनहट्टन बीच पर साइकिल दौड़ का आयोजन किया गया। 1908 - लंदन में फ्रेंको-ब्रिटिश प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। 1926 – लेबनान में संविधान को अंगीकार किया गया। 1926 – हिमालय की गोद में बसे गढ़वाल में नरभक्षी तेंदुए के बड़े आतंक का अंत हुआ। 1938 – जर्मनी के वॉल्फ़्सबुर्ग शहर में अडोल्फ़ हिटलर ने फ़ॉक्सवैगन कार के कारखाने का शिलान्यास किया था। 1946 – अमेरिका में एच बम के लिए पेटेंट दायर किया गया। 1950 – ब्रिटेन में पेट्रोल खरीदने पर लगी सीमा को खत्म कर दिया गया। इससे पहले हर व्यक्ति को पेट्रोल खरीदने के लिए राशन कार्ड दिया जाता था। 1955 – चार्ल्स इवान्स ने दुनिया की तीसरे नम्बर की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कंचनजंघा पर विजय प्राप्त की थी, जिसकी ऊँचाई 8585 मीटर है। 1957 – बंबई (अब मुंबई) में जनता बीमा पॉलिसी की शुरुआत हुई। 1972 - अमेरिका ने नेवादा में परमाणु परीक्षण किया। 1972 - विलंड्रा नेशनल पार्क ऑस्ट्रेलिया में स्थापित किया गया। 1980 - दक्षिण कोरिया के सैन्य सरकारी बलों और समर्थक लोकतंत्र के प्रदर्शनकारियों ने 2,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया। 1983 – 7.7 रिएक्टर स्केल से जापान में आए भूकंप में 104 लोगों की मौत हुई। 1987 – श्रीलंका ने जाफना में तमिल विद्रोहियों के खिलाफ अभियान छेड़ा। 1994 – सिंगल माइकल जैक्सन ने एक्ट्रेस लिसा मैरी प्रेसले से शादी की। 1998 – जापान के सम्राट अकीहितो ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनके देश की ओर से दी गई यातनाओं पर दु:ख जताया। जापान ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 50,016 ब्रिटिश सिपाहियों को बंदी बनाया था जिनमें से 12,433 की या तो मौत हो गई या उन्हें कैद में मार दिया गया। 1999 – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत, जर्मनी और दक्षिण कोरिया के तीन उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। 1999 – सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने वनडे क्रिकेट में 318 रनों की साझेदारी का विश्व रिकार्ड बनाया। 2002 - चीन का विमान समुद्र में गिरा, 225 लोग मरे। 2006 – इंडोनेशिया के जावा में आए भूकंप के कारण 5700 से अधिक लोगों की मौत और लगभग दो लाख बेघर हुए। 2006 - विज्ञान जगत् में एक शोध के मुताबिक एड्स का विषाणु कैमरून में पाए जाने वाले चिपैंजिओं से फैला है। 2007 - भारत और जर्मनी के मध्य रक्षा समझौता सम्पन्न। 2008 - भारतीय स्टेट बैंक ने फ़सल ऋण बीमा को 50 हज़ार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया। 2008 - उत्तर प्रदेश सरकार ने अनाज व खाद्य तेलों की स्टॉक सीमा तय करने के सम्बन्ध में अधिसूचना जारी की। 2008 - मंगल ग्रह के अध्ययन हेतु फ़ीनिक्स यान मंगल ग्रह पर उतरा। 2008 - नेपाल सरकार ने नरेश ज्ञानेन्द्र के नारायणहिती महल को प्रतिबन्धित क्षेत्र घोषित किया। 2008 - कान फ़िल्म महोत्सव में फ़्रांसीसी फ़िल्म 'द क्लास एंतरे लेसमुर्स' को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का 'पाल्मे डी केयर' पुरस्कार प्रदान किया गया। 2010 - भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बी.एस.चौहान और न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने शादी किए बगैर एक साथ रहने वाले प्रेमी युगलों की संतानों को भी अपने मां-बाप की ओर से अर्जित सम्पत्ति में हिस्सा पाने का अधिकार स्वीकार किया। न्यायालय ने साथ ही उन्हें परंपरागत पैतृक संपत्ति पर उनके अधिकार को अस्वीकार किया। 2013 – मुंबई इंडियंस ने चेन्नई सुपरकिंग्स को हराकर आईपीएल ट्वंटी 20 खिताब अपने नाम किया। 2014 – भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 - स्विट्जरलैंड ने साझा की स्विस बैंकों के भारतीय ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी, 11 भारतीयों को नोटिस। 2019 - अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा डिवाइस तैयार किया जो व्यक्ति के पसीने, लार, खून या मूत्र से तनाव का कारण बनने वाले विभिन्न हार्मोन की जांच करने में सक्षम है। 2020 - भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रणनीतिक साझेदारी के तहत आपसी सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। 2020 - विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 रोगियों पर हाइड्रॉक्सी-क्लोरोक्वीन के क्लीनिकल ट्रॉयल अस्थायी रूप से स्थगित किये। 2021 - माली के अंतिम राष्ट्रपति ने हिरासत में रहते हुए इस्तीफा दिया और प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दिया। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चेन्नई में 31,500 करोड़ रुपये से अधिक की 11 परियोजनाओं का लोकार्पण किया और आधारशिला रखी। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आईएसबी, हैदराबाद के 20 साल पूरे होने के अवसर पर दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। 2022 - विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली के 22वे उपराज्यपाल के रूप शपथ ली। 26 मई को जन्मे व्यक्ति 1906 - रामकिंकर बैज - भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार थे। 1912 - छगनराज चौपासनी वाला - प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में से एक। 1932 - बेनू सेन - कोलकाता , एक भारतीय फोटोग्राफर थे। 1937 - मनोरमा (तमिल अभिनेत्री) - दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर हास्य अभिनेत्री। 1940 - सरताज सिंह - 'भारतीय जनता पार्टी' (भाजपा) के नेता। 1945 - विलासराव दगड़ोजीराव देशमुख- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री। 1946 - अरुणा रॉय - भारत बेहतर सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ राजनीतिज्ञ भी हैं। 1983 - सुशील कुमार पहलवान - 'बीजिंग ओलिंपिक' खेलों में भारत के लिए 'कांस्य पदक' विजेता। 26 मई को हुए निधन 1934 - चम्पक रमन पिल्लई - भारतीय राजनैतिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी थे। 1986 - श्रीकांत वर्मा - हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार, गीतकार, समीक्षक और राजनीतिज्ञ। 2017 - के. पी. एस. गिल - पंजाब के दो बार पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रहे थे। 2020 - हांगकांग की "ईस्ट नेट" रिपोर्ट के अनुसार, 26 मई को स्थानीय समय में, हांगकांग और मकाऊ के एक प्रसिद्ध देशभक्त उद्यमी होंगशेन हो (98) का निधन हुआ। 2021 - बहुमुखी प्रतिभा की धनी जानी-मानी चित्रकार, लेखक और कला समीक्षक अलका रघुवंशी का निधन हुआ। 26 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव क्रान्तिकारी श्री छगनराज चौपासनी वाला जयन्ती। श्री विलासराव दगड़ोजीराव देशमुख जयन्ती। पहलवान श्री सुशील कुमार जन्म दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में एक भावुक पल देखने को मिला। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंच पर मौजूद 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता Makhanlal Sarkar के पैर छुए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और गले लगाकर सम्मानित किया। यह दृश्य देखते ही पूरे समारोह में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कौन हैं माखनलाल सरकार? माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा के शुरुआती दौर के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। आजादी के बाद उन्होंने राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 1952 में कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान वे जनसंघ संस्थापक Syama Prasad Mukherjee के साथ मौजूद थे। उस समय उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। 1980 में भाजपा के गठन के बाद माखनलाल सरकार ने पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने एक साल के भीतर लगभग 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में उमड़ा जनसैलाब पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के शपथ ग्रहण समारोह में हजारों भाजपा समर्थक शामिल हुए। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा नजर आया। झारखंड समेत कई राज्यों और विदेशों से भी समर्थक इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से हेलीकॉप्टर के जरिए रेसकोर्स मैदान और फिर सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। खुले वाहन में सवार होकर उन्होंने समर्थकों का अभिवादन भी किया। बंगाल की राजनीति में नए दौर का संकेत भाजपा नेताओं का मानना है कि यह सिर्फ सरकार बदलने का क्षण नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। वहीं माखनलाल सरकार का सम्मान भाजपा द्वारा अपने पुराने कार्यकर्ताओं और वैचारिक विरासत को महत्व देने का संदेश भी माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।