Inflation

Urban Indian middle-class family managing rising expenses despite earning a six-figure monthly salary
क्या अब 1 लाख रुपये महीना कमाना भी काफी नहीं? बदलती जिंदगी ने बढ़ाई भारत के मिडिल क्लास की चिंता

कभी सफलता की पहचान थी छह अंकों वाली सैलरी, अब उठ रहे हैं सवाल एक समय था जब हर महीने 1 लाख रुपये या उससे अधिक कमाना आर्थिक सफलता की पहचान माना जाता था। यह अच्छी नौकरी, स्थिर भविष्य और आरामदायक जीवन का प्रतीक समझा जाता था। लेकिन अब तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह धारणा कमजोर पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में बेंगलुरु के एक आईटी प्रोफेशनल के अतिरिक्त आय के लिए टैक्सी चलाने की खबर ने देशभर के लाखों नौकरीपेशा लोगों का ध्यान खींचा। यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि शहरी भारत के उस वर्ग की चिंता को दर्शाती है जो अच्छी कमाई के बावजूद आर्थिक सुरक्षा को लेकर असमंजस में है। बढ़ती आय के साथ और तेजी से बढ़ रहे खर्च देश के बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे में रहने की लागत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में देखने को मिला है: घरों का किराया और प्रॉपर्टी की कीमतें बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल खर्च बीमा प्रीमियम वाहन और होम लोन की ईएमआई दैनिक जीवन की बढ़ती लागत नतीजतन, वेतन बढ़ने के बावजूद अधिकांश परिवारों के पास बचत के लिए अपेक्षाकृत कम पैसा बच रहा है। ज्यादा कमाई, लेकिन कम आर्थिक संतोष विशेषज्ञों का मानना है कि आज की पीढ़ी अपने माता-पिता की तुलना में कहीं अधिक कमाई कर रही है, लेकिन आर्थिक रूप से खुद को उतना सुरक्षित महसूस नहीं करती। ईएमआई, स्कूल फीस, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य जिम्मेदारियों के बाद आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। यही वजह है कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। साइड इनकम का बढ़ता ट्रेंड बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल की तरह अब कई नौकरीपेशा लोग अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं। आज बड़ी संख्या में लोग: फ्रीलांसिंग कर रहे हैं ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं कंसल्टिंग सेवाएं दे रहे हैं निवेश और ट्रेडिंग कर रहे हैं छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं इनमें से अधिकांश लोग आर्थिक संकट में नहीं हैं, बल्कि बढ़ती आकांक्षाओं और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या समस्या सैलरी की है या बढ़ती उम्मीदों की? विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि केवल महंगाई ही समस्या नहीं है, बल्कि जीवनशैली की अपेक्षाएं भी काफी बदल गई हैं। आज का शहरी मध्यम वर्ग एक साथ कई लक्ष्य हासिल करना चाहता है: अपना घर खरीदना बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लेना नियमित छुट्टियां मनाना नई तकनीक और गैजेट्स खरीदना निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग करना इन सभी जरूरतों को एक ही आय के जरिए पूरा करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया ने भी बढ़ाया दबाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लोगों की जीवनशैली और सफलता की परिभाषा बदल दी है। लक्जरी घर, विदेश यात्राएं, महंगी कारें और हाई-एंड लाइफस्टाइल अब लगातार लोगों की स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इससे कई बार लोग अपनी तुलना समाज के सबसे संपन्न वर्ग से करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक असंतोष का एक कारण यह भी है कि सफलता का पैमाना लगातार बदल रहा है। आर्थिक असुरक्षा केवल मानसिक नहीं, वास्तविक भी है आज के शहरी परिवारों के सामने कई वित्तीय जिम्मेदारियां एक साथ मौजूद हैं। उन्हें: घर की लागत संभालनी है बच्चों की उच्च शिक्षा की योजना बनानी है बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनना है रिटायरमेंट फंड तैयार करना है मेडिकल आपात स्थितियों के लिए बचत करनी है इसी वजह से अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा की भावना बनी रहती है। बदल गया है मिडिल क्लास का सपना मध्यम वर्ग के सपने आज भी वही हैं—स्थिर नौकरी, अपना घर, बच्चों की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित रिटायरमेंट। लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज आर्थिक सुरक्षा केवल अधिक कमाने से नहीं, बल्कि बेहतर वित्तीय योजना, अनुशासित बचत और समझदारी से निवेश करने से मिलेगी। 1 लाख रुपये महीना आज भी भारत के अधिकांश लोगों के लिए एक बड़ी आय मानी जाती है। लेकिन बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई, जीवनशैली के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अच्छी सैलरी ही आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दे सकती है? आज के भारत में जवाब शायद "नहीं" है। अब आर्थिक सफलता केवल कमाई पर नहीं, बल्कि उस कमाई को संभालने और बढ़ाने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Congress leader Udit Raj criticizes government policies on economy, jobs and inflation during media interaction.
PM मोदी के कार्यकाल पर उदित राज का हमला, आर्थिक आंकड़ों और विकास के दावों पर उठाए सवाल

  नई दिल्ली: कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के लंबे कार्यकाल और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास और अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों को लेकर भ्रामक तस्वीर पेश कर रही है तथा वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उदित राज ने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन उसके कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण, प्रति व्यक्ति आय और आर्थिक अवसरों में सुधार जैसे मानकों से किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जनता इन मुद्दों पर जवाब चाहती है। GDP आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना कांग्रेस नेता ने आर्थिक आंकड़ों और विकास दर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है और आर्थिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं रखती। उदित राज ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक आंकड़ों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचनाओं का जवाब देने के बजाय राजनीतिक मुद्दों को अधिक प्रमुखता देती है। रोजगार और महंगाई को बताया बड़ा मुद्दा कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के सामने रोजगार, महंगाई, उत्पादन, निर्यात-आयात और बढ़ते कर्ज जैसे मुद्दे सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। उनके अनुसार, इन विषयों पर व्यापक बहस और ठोस नीतिगत कदमों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था का आकलन जाति, धर्म या राजनीतिक नारों के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक संकेतकों और आम नागरिक के जीवन स्तर में सुधार के आधार पर किया जाना चाहिए। लंबे कार्यकाल पर भी उठाए सवाल उदित राज ने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकार से लोगों की अपेक्षाएं अधिक होती हैं। उनके अनुसार, ऐसे कार्यकाल का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि रोजगार के अवसर कितने बढ़े, महंगाई पर कितना नियंत्रण हुआ और आम लोगों की आय में कितना सुधार आया। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा के बीच अर्थव्यवस्था, विकास दर और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज बनी हुई है। सत्तारूढ़ पक्ष जहां अपनी आर्थिक उपलब्धियों को रेखांकित कर रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के दावों पर लगातार सवाल उठा रहा है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Congress president Mallikarjun Kharge criticizes LPG price hike, questioning government over rising household expenses.
एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी पर खरगे का केंद्र पर हमला, बीजेपी नेताओं से पूछा- अब सिलेंडर लेकर सड़क पर क्यों नहीं बैठते?

  नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महंगाई के मुद्दे पर घेरा और कई सवाल उठाए। रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इसी बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। महंगाई पर बीजेपी की चुप्पी पर उठाए सवाल मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान महंगाई के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं। उन्होंने पूछा कि जो नेता पहले गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर बैठते थे, वे आज बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। खरगे ने कहा कि घरेलू एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है और इससे मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। प्रधानमंत्री के दावों पर उठाया सवाल कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें पश्चिम एशिया संकट के दौरान कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं, तो फिर घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि क्यों हो रही है। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उज्ज्वला योजना को लेकर भी घेरा खरगे ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लाभार्थी परिवार उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बावजूद नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों परिवार गैस सिलेंडर दोबारा भरवाने में सक्षम नहीं हैं, तो यह बढ़ती कीमतों और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का संकेत है। कांग्रेस ने उठाए तीन प्रमुख सवाल अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से तीन प्रमुख सवाल पूछे— पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति के दावों के बाद भी गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? बड़ी संख्या में उज्ज्वला लाभार्थी सिलेंडर रिफिल क्यों नहीं करा पा रहे हैं? महंगाई के मुद्दे पर पहले विरोध करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं? चार महीनों में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर एलपीजी कीमतों में यह वृद्धि पिछले चार महीनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। मार्च 2026 में भी घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। ताजा बढ़ोतरी के बाद चार महीनों के भीतर घरेलू सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बढ़ती गैस कीमतें आम लोगों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों का असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Domestic LPG cylinders stacked at a distribution center after latest cooking gas price hike in India.
घरेलू गैस सिलेंडर फिर महंगा, विपक्ष का केंद्र सरकार पर हमला; महंगाई को लेकर बढ़ी सियासी गर्मी

  नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। केंद्र सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 7 जून से लागू हो गई हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले मार्च 2026 में प्रति सिलेंडर 60 रुपये का इजाफा किया गया था। इस तरह चार महीनों के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने साधा निशाना कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लगातार बढ़ रही गैस की कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रही है और इसका सीधा असर मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त इंतजाम किए थे, तो घरेलू उपभोक्ताओं को बार-बार मूल्य वृद्धि का सामना क्यों करना पड़ रहा है। आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई और स्थिर आय के बीच घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि परिवारों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। शरद पवार ने भी जताई नाराजगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर सीधे आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। पवार ने दावा किया कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है और जनता चुनावों में अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है। भाजपा पर विपक्ष का दोहरा रवैया अपनाने का आरोप महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा महंगाई के मुद्दे पर सरकारों को घेरती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं। रसोई बजट पर असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस बढ़ोतरी को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और आयात लागत में बदलाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Trucks loaded with goods at a transport hub as freight charges rise due to higher fuel prices
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर: 1 जून से बढ़ेगा माल भाड़ा, रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बाद वाराणसी के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद खाद्य और दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। 1 जून से माल भाड़े में 20 फीसदी बढ़ोतरी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी मुद्दे पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से माल भाड़े में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नई दरें 1 जून से लागू होंगी। इसका असर देश के विभिन्न हिस्सों से वाराणसी की मंडियों तक आने वाले ट्रांसपोर्ट वाहनों पर पड़ेगा। व्यापारियों ने जताई महंगाई बढ़ने की आशंका व्यापारियों का मानना है कि माल ढुलाई खर्च बढ़ने का सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि परिवहन लागत बढ़ती है तो कारोबारियों को अतिरिक्त खर्च उपभोक्ताओं तक पहुंचाना पड़ सकता है। व्यापारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में कई जरूरी वस्तुओं के दाम 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। चीनी, दाल, तेल और सूखे मेवे हो सकते हैं महंगे व्यापारियों ने बताया कि जिन वस्तुओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से होती है, उन पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है। इनमें चीनी, दाल, सरसों, खाद्य तेल, बादाम और अन्य किराना उत्पाद शामिल हैं। माल ढुलाई महंगी होने से इन वस्तुओं की खरीद लागत बढ़ेगी, जिसका असर खुदरा बाजार में भी देखने को मिल सकता है। पूर्वांचल की बड़ी मंडी है विशेश्वरगंज वाराणसी की विशेश्वरगंज मंडी पूर्वांचल की प्रमुख थोक मंडियों में गिनी जाती है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी मात्रा में कृषि और खाद्य उत्पाद पहुंचते हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाला सामान इसी मंडी के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचता है। ऐसे में माल भाड़े में वृद्धि का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन लागत बढ़ने पर सप्लाई चेन का खर्च भी बढ़ जाता है। यदि माल भाड़े में 20 प्रतिशत तक वृद्धि लागू होती है, तो आने वाले हफ्तों में रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Congress criticises Modi government over sharp commercial LPG price hike
LPG के दाम बढ़े तो कांग्रेस का हमला–‘Inflation Man Modi’, कहा- जारी है वसूली

देश में कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “Inflation Man Modi” करार दिया है। ₹993 की बढ़ोतरी पर घमासान शुक्रवार (1 मई) को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में ₹993 तक की बढ़ोतरी की गई। नई दिल्ली में इसकी नई कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। कांग्रेस का आरोप–‘मोदी की वसूली जारी’ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि “Inflation Man Modi फिर सक्रिय हो गए हैं” और कमर्शियल सिलिंडर बार-बार महंगे किए जा रहे हैं। कांग्रेस के मुताबिक, 1 जनवरी से 1 मई के बीच कमर्शियल LPG सिलिंडर के दाम कुल ₹1,518 तक बढ़ चुके हैं। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि साल के अभी 8 महीने बाकी हैं और “मोदी की वसूली जारी है।” कारोबारियों पर बढ़ेगा दबाव कांग्रेस ने दावा किया कि इस बढ़ोतरी से छोटे-बड़े कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और फूड इंडस्ट्री से जुड़े व्यवसायों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। घरेलू LPG में राहत हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल 913 रुपये बनी हुई है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Commercial LPG cylinder and 5 kg Chhotu cylinder with revised prices
कमर्शियल LPG सिलिंडर महंगा, 5 किलो वाला ‘छोटू’ हुआ महंगा–खर्च बढ़ने के आसार

देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल LPG सिलिंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले ‘छोटू’ (FTL) सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। कमर्शियल सिलिंडर में भारी उछाल नई दरों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। नई दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर अब 3,071.50 रुपये हो गई है। 5 किलो वाला ‘छोटू’ भी महंगा सिर्फ बड़े सिलिंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह सिलिंडर छोटे दुकानदारों, ढाबों और सीमित व्यावसायिक उपयोग के लिए ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वही सिलिंडर है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है। किन पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? कमर्शियल LPG महंगा होने का सीधा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा: रेस्टोरेंट और होटल बेकरी और फूड आउटलेट कैटरिंग सर्विस छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता आमतौर पर ऐसे व्यवसाय बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। क्यों बढ़ती हैं कीमतें? 5 किलो वाला FTL सिलिंडर सब्सिडी फ्री होता है और इसकी कीमत बाजार के हिसाब से तय होती है। इसलिए इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर जल्दी देखने को मिलता है। क्या आगे और बढ़ सकती है महंगाई? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमर्शियल LPG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका असर खाने-पीने की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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