पुणे: चर्चित पुणे मर्डर केस में आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल ने मामले को लेकर कई नए दावे किए हैं। साहिल का कहना है कि सिया प्रॉपर्टी कारोबारी केतन अग्रवाल से शादी कर उनके साथ अपना भविष्य बनाना चाहती थी और उसने खुद उनसे कहा था कि उसका चेतन चौधरी से कोई रिश्ता नहीं है। पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि सिया और चेतन एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। पुलिस के अनुसार, सिया की शादी पहले से केतन अग्रवाल से तय होने के कारण दोनों ने कथित तौर पर केतन की हत्या की साजिश रची। इस मामले में सिया और चेतन पर 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। 'सिया ने कहा था, पूरी जिंदगी केतन के साथ बिताना चाहती हूं' एक मीडिया इंटरव्यू में साहिल गोयल ने दावा किया कि सिया ने उनसे स्पष्ट कहा था कि वह केवल केतन अग्रवाल से शादी करना चाहती है। साहिल के मुताबिक, सिया ने उनसे कहा था कि चेतन के साथ उसका कोई संबंध नहीं है और उसने कसम खाकर भरोसा दिलाया था कि शादी के बाद वह कभी चेतन से संपर्क नहीं रखेगी। इसी वजह से उन्होंने सिया और चेतन के पुराने रिश्ते के बारे में परिवार में किसी को कुछ नहीं बताया। 'शादी को लेकर बेहद खुश थी सिया' साहिल ने दावा किया कि सिया अपनी शादी की तैयारियों को लेकर काफी उत्साहित थी। उनके अनुसार, वह केतन के साथ प्री-वेडिंग फोटोशूट की योजना बना रही थी और घंटों वीडियो कॉल पर शादी और फोटोशूट से जुड़ी तैयारियों पर चर्चा करती थी। उन्होंने कहा कि सिया ने फोटोशूट के लिए पसंदीदा गाने और लोकेशन भी चुन ली थीं और नई जिंदगी को लेकर उत्साहित दिखाई देती थी। 'चेतन को लेकर असमंजस में थी' साहिल के अनुसार, सिया चेतन चौधरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर असमंजस में थी। उन्होंने दावा किया कि सिया यह तय नहीं कर पा रही थी कि चेतन के साथ संबंध जारी रखे या पूरी तरह खत्म कर दे। साहिल का कहना है कि सिया ने उनसे कहा था कि वह और चेतन सिर्फ दोस्त हैं और उनके बीच ऐसा कोई रिश्ता नहीं है जो उसकी शादी में बाधा बने। पुलिस की जांच जारी दूसरी ओर, पुलिस की जांच का निष्कर्ष फिलहाल अलग है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न गवाहों के बयानों तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। फिलहाल, साहिल गोयल के बयान उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी पुष्टि जांच एजेंसियों या अदालत द्वारा नहीं की गई है।
रांची। ऐसे अपराधी जो झारखंड से भाग कर विदेशों में छुपे हैं और वहीं से अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहे हैं, अब उनकी खैर नहीं है। ऐसे गैंगस्टरों और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य की CID और केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह से रेस हैं। झारखंड से विदेश फरार अपराधियों को प्रत्यर्पण संधि के तहत वापस भारत लाने के लिए इंटरपोल और NCB ( नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत फरार अपराधियों को अपराध की प्रकृति के आधार पर चार विशेष श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सीआईडी मुख्यालय ऐसे सभी अपराधियों का डेटा बेस तैयार कर रहा है। इसमें सभी जिलों के एसपी भी सहयोग कर रहे हैं। इसे डेटा बेस को सीआईडी की ओर से इंटरपोल को भेजा जायेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। 4 श्रेणियों में बांटे गए अपराधी इंटरपोल और एनसीबी ने अपराधियों को उनके द्वारा किए गए अपराधों के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया है. श्रेणी 1 : काउंटर टेररिज्म (आतंकवाद विरोधी मामले) और संगठित अपराध श्रेणी 2 : नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों और ड्रग्स की तस्करी) से संबंधित अपराध श्रेणी 3 : आर्थिक अपराध ( वित्तीय धोखाधड़ी ) श्रेणी 4 : साइबर क्राइम, मानव तस्करी और अन्य गंभीर मामले। अपराधियों की कुंडली तैयार करने के लिए 6 मुख्य बिंदु विदेशों में छिपे अपराधियों को कानूनी रूप से दबोचने के लिए CID बेहद पुख्ता सबूत जुटा रही है। 24 जिलों के एसपी से निम्नलिखित छह मुख्य बिंदुओं पर अपराधियों का प्रोफाइल मांगा गया है। फरार अपराधी का पूरा नाम और उसका स्थायी – अस्थायी पता। पिता का नाम और अपराधी की सही जन्म तिथि। अपराधी का पासपोर्ट नंबर और उसका हालिया रंगीन (कलर) फोटोग्राफ। फरार अपराधी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों (केस) का पूरा विवरण। अपराधी का वर्तमान लोकेशन या वह किस देश/जगह पर छिपा है, इसकी जानकारी संबंधित केस में वांटेड अपराधी का फिंगरप्रिंट (यदि पुलिस रिकॉर्ड में उपलब्ध हो)। झारखंड के 3 बड़े गैंगस्टर जो विदेश से चला रहे हैं गैंग झारखंड पुलिस के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती तीन गैंगस्टर बने हुए हैं, जो विदेश में बैठकर झारखंड में रंगदारी, हत्या और धमकी का सिंडिकेट चला रहे हैं। प्रिंस खान (धनबाद) : धनबाद के वासेपुर का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान इस सूची में सबसे ऊपर है। पुलिस इनपुट के अनुसार, वह वर्तमान में पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहीं से धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में अपना रंगदारी का नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। राहुल दुबे (रामगढ़) : मूल रूप से रामगढ़ जिले का रहने वाला राहुल दुबे भी विदेश से ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। जांच एजेंसियां लगातार इसके वर्तमान लोकेशन को ट्रैक करने का प्रयास कर रही हैं। राहुल सिंह (लातेहार) : लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र का निवासी राहुल सिंह भी विदेश फरार है। इसके पहले अजरबैजान में छिपे होने की पुख्ता जानकारी थी, लेकिन हालिया इनपुट के अनुसार वह अब वहां से भी भाग निकला है। पुलिस उसकी नई लोकेशन का पता लगा रही है। पंजाब का ड्रग्स तस्कर दलजिंदर’ इंग्लैंड फरार इन तीन गैंगस्टरों के अलावा, मूल रूप से पंजाब का रहने वाला दलजिंदर सिंह पलामू जिले में दर्ज ड्रग्स तस्करी (नारकोटिक्स) के एक बड़े मामले में वांछित है। झारखंड पुलिस को खुफिया जानकारी मिली है कि वह वर्तमान में इंग्लैंड में शरण लिए हुए है। CID इसकी भी श्रेणी तय कर प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटी है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव की है, जहां पुलिस की छापेमारी के दौरान ग्रामीणों और आरोपित के परिजनों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। इस हमले में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी साइबर पुलिस जानकारी के अनुसार, चामलिटी गांव निवासी साइबर अपराधी चुरामण मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद गिरिडीह साइबर थाना की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी। पुलिस ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, चुरामण मंडल को इसकी भनक लग गई। भीड़ ने किया विरोध, आरोपी भाग निकला पुलिस के पहुंचते ही आरोपी और उसके सहयोगियों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी मौके का फायदा उठाकर चुरामण मंडल अपने साथियों के साथ फरार हो गया। कई लोगों पर दर्ज हुआ मामला अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान ने बताया कि साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए हमला कर दिया। इस मामले में 5 से 7 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और अपराधी को भगाने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार साइबर अपराधी चुरामण मंडल और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज के बाद अब कांचड़ापाड़ा का एक इंग्लिश मीडियम स्कूल भी जांच के दायरे में आ गया है। कारण स्कूल से 1.77 करोड़ रुपये नकद बरामद होने से सनसनी फैल गई है। जांच के दौरान स्कूल परिसर के एक कमरे से बड़ी मात्रा में नकदी के अलावा कंडोम के पैकेट और एक सुसज्जित बेडरूम भी मिला। इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है और स्कूल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रातभर चली नोटों की गिनती पुलिस को स्कूल के अकाउंट्स विभाग से नकदी से भरे कई पैकेट मिले। बरामद राशि इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ा। बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक चली गिनती के बाद कुल 1.77 करोड़ रुपये मिलने की पुष्टि हुई। मामले में अकाउंट्स विभाग के तीन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बेडरूम और आपत्तिजनक सामान मिलने से बढ़ी जांच तलाशी के दौरान अधिकारियों को कार्यालय के पास एक एयर कंडीशंड और पूरी तरह सुसज्जित कमरा मिला, जिसमें बिस्तर, अलमारी और अन्य सुविधाएं मौजूद थीं। अलमारी की जांच में कंडोम के पैकेट मिलने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्कूल परिसर में इस तरह की व्यवस्था किस उद्देश्य से की गई थी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू स्थानीय विधायक संदीप दास ने मामले को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि स्कूल में भारी मात्रा में नकदी छिपाकर रखी गई थी। उन्होंने कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। स्कूल प्रबंधन ने दी सफाई स्कूल के प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने कहा कि बरामद नकदी छात्रों की एडमिशन फीस से संबंधित है, जिसे विभिन्न कारणों से बैंक में जमा नहीं कराया जा सका था। वहीं कमरे में मिले बिस्तर को उन्होंने बीमार छात्रों के आराम के लिए बनाए गए कक्ष का हिस्सा बताया। कंडोम पैकेट मिलने पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जाएगी कि वे वहां कैसे पहुंचे। जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। नकदी के स्रोत, कमरे के उपयोग और बरामद सामान के संबंध में कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
वॉशिंगटन: अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी पर करोड़ों डॉलर की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूर्व अधिकारी डेविड रश ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गोपनीय कार्यक्रम का सहारा लेकर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया और करीब 4 करोड़ डॉलर (लगभग 382 करोड़ रुपये) की संपत्ति जुटा ली। मामला तब सुर्खियों में आया जब संघीय जांच एजेंसियों ने उनके घर पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सैकड़ों सोने की ईंटें और कई लग्जरी घड़ियां बरामद की गईं। फर्जी गोपनीय मिशन बनाकर किया कथित खेल अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेविड रश पर आरोप है कि उन्होंने एक कथित फर्जी सरकारी कार्यक्रम तैयार किया और उसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मिशन के रूप में प्रस्तुत किया। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस कार्यक्रम को "कंटिन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट ऑपरेशंस" से जुड़ा बताया गया था। आमतौर पर इस तरह की योजनाएं युद्ध, बड़े आतंकी हमले, प्राकृतिक आपदा या राष्ट्रीय आपातकाल जैसी परिस्थितियों में सरकार के कामकाज को जारी रखने के लिए बनाई जाती हैं। अधिकारियों का आरोप है कि इसी संवेदनशील व्यवस्था की आड़ लेकर रश ने लंबे समय तक सरकारी संसाधनों और विशेष सुविधाओं तक पहुंच बनाई। छापेमारी में मिला सोने और नकदी का जखीरा संघीय जांच ब्यूरो (FBI) द्वारा वर्जीनिया स्थित आवास पर की गई छापेमारी में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। जांच एजेंसियों के अनुसार, घर से 303 सोने की ईंटें बरामद की गईं। इसके अलावा लगभग 20 लाख डॉलर नकद और कई महंगी लग्जरी घड़ियां भी मिलीं। अधिकारियों का मानना है कि बरामद संपत्ति कथित तौर पर उसी फर्जी कार्यक्रम के जरिए अर्जित की गई हो सकती है। संपत्ति के स्रोत और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच अभी जारी है। अदालत में 'मास्टर मैनिपुलेटर' बताया गया मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने डेविड रश को "मास्टर मैनिपुलेटर" करार दिया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने वर्षों तक अपने शैक्षणिक और पेशेवर रिकॉर्ड के बारे में भ्रामक जानकारी देकर विभिन्न सरकारी संस्थानों में प्रभावशाली पद हासिल किए। जांच एजेंसियों का दावा है कि रश ने अपने अनुभव और योग्यता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे उन्हें ऐसे संवेदनशील कार्यक्रमों तक पहुंच मिली जिनका दुरुपयोग बाद में किया गया। सहयोगियों की भूमिका की भी जांच अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस कथित योजना में अन्य लोग भी शामिल थे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि जिन सहयोगियों को इस कार्यक्रम से जोड़ा गया था, उन्हें कथित धोखाधड़ी की पूरी जानकारी नहीं थी। जांच एजेंसियां अब वित्तीय दस्तावेजों, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य संचार माध्यमों की पड़ताल कर रही हैं। CIA की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल मामले के सामने आने के बाद अमेरिकी खुफिया तंत्र की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक गंभीर संस्थागत विफलता मानी जाएगी। आलोचकों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय ढांचे का उपयोग कथित तौर पर वर्षों तक निजी लाभ के लिए किया जाना चिंताजनक है और इससे निगरानी तंत्र की कमजोरियां उजागर होती हैं। फिलहाल हिरासत में हैं डेविड रश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेविड रश वर्तमान में हिरासत में हैं। अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायाधीश का मानना है कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए उनके फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर उन्हें फिलहाल हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है। आगे और बढ़ सकती हैं मुश्किलें जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि मामले की पड़ताल आगे बढ़ने के साथ डेविड रश पर अतिरिक्त आरोप भी लगाए जा सकते हैं। वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन जैसे पहलुओं की अलग-अलग जांच की जा रही है। यदि आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों में अमेरिकी खुफिया तंत्र से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है।
धनबाद। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में हुई भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हाई-प्रोफाइल हत्या के तार अब धनबाद से जुड़ रहे हैं। इस मामले की जांच अब झारखंड के धनबाद तक पहुंच गई है। बीते 6 मई की रात अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चंद्रनाथ की जान ले ली थी। इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब मौके से बरामद बाइक का नंबर एक सेलकर्मी के नाम पर दर्ज मिला। पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम तुरंत धनबाद के चासनाला पहुंची और संबंधित व्यक्ति से घंटों पूछताछ की। लेकिन, गहन छानबीन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद ये साफ हो गया कि सेलकर्मी का इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि शूटरों ने फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था। फर्जी नंबर प्लेट का खुलासा विभाष भट्टाचार्य ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर पर ही खड़ी है। जब पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की, तो पाया कि अपराधियों की बाइक और विभाष की बाइक के मॉडल और रंग में जमीन-आसमान का अंतर था। विभाष के कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज ने यकीन दिलाया कि वारदात के समय वे ड्यूटी पर थे। अपराधियों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए विभाष की बाइक के नंबर का क्लोन तैयार किया था। चंद्रनाथ रथ की कार को घेरकर बाइक और कार सवार अपराधियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस हमले में चंद्रनाथ रथ की मौत हो गई, जबकि उनका चालक गंभीर रूप से घायल हुआ। राज्य सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए सात सदस्यीय SIT का गठन किया है। असली अपराधियों की तलाश जारी विभाष भट्टाचार्य को निर्दोष पाए जाने पर पुलिस ने छोड़ दिया है। अब जांच का पूरा ध्यान उन शूटरों पर है जिन्होंने इतनी चालाकी से फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग किया। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधियों को विभाष की बाइक का नंबर कैसे मिला और इस बड़ी साजिश के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड कौन है। दरअसल, धनबाद में SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) का मुख्य कार्यालय चासनाला में स्थित हैं, जो कोलियरीज प्रभाग (Collieries Division) के अंतर्गत आते हैं। इसी ऑफिस में विभाष की पोस्टिंग है। विभाष ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर में ही खड़ी है। जब पुलिस ने विभाष के घर जाकर बाइक की जांच की और उनके कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज देखा तो पाया कि विभाष घटना के वक्त अपने कार्यालय में ड्यूटी पर थे। कोलकाता में किसने चलाई गोलियां ? चंद्रनाथ रथ हत्या मामला क्या है? पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई। 6 मई 2026 की रात लगभग 10:30 बजे मध्यमग्राम के दोहारिया में अपराधियों ने चंद्रनाथ की कार पर अंधाधुंध फायरिंग की। बाइक और कार से हमलावर आए थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था। अपराधियों की बाइक (WB 44D 1990) का नंबर झारखंड के धनबाद (चासनाला) में रहने वाले एक सेलकर्मी का निकला।
सीवान, एजेंसियां। बिहार के सीवान में सोमवार सुबह अचानक बड़ी पुलिस कार्रवाई हुई। इससे राज्य में हड़कंप मच गया है। यहां सीवान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और RJD विधायक ओसामा शहाब के आवास पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान DIG और SP समेत नगर थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही और पूरे इलाके को घेर लिया गया। पुलिस की यह कार्रवाई एक पुराने जमीन विवाद और कब्जे के आरोपों से जुड़ी बताई जा रही है। सर्च वारंट के साथ छापा शिकायत के आधार पर कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद टीम ने छापा मारा और घर के अंदर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सुबह 8 बजे से शुरू हुई छापेमारी जानकारी के मुताबिक पुलिस टीम ने सुबह करीब 8 बजे ओसामा शहाब के नए आवास को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद घर के अंदर तलाशी अभियान चलाया गया और पूछताछ भी की गई। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस कार्रवाई में सीवान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद शामिल रहे। DIG और SP के नेतृत्व में छापा DIG और SP की मौजूदगी में पूरी छापेमारी को अंजाम दिया गया, जिससे मामला और गंभीर माना जा रहा है। ओसामा शहाब पहले से ही कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं और हाल के दिनों में उन पर जमीन विवाद से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। अब इस ताजा रेड के बाद सीवान की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस कार्रवाई पर नजर बना ली है। छापेमारी के दौरान इलाके में आम लोगों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त बल तैनात रखा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।