investigation update

Chatra gang rape
चतरा जिले के टंडवा में नाबालिग को मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म,  पुलिस ने दो को दबोचा

चतरा। झारखंड के चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित आम्रपाली परियोजना प्रभावित एक गांव में 18 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई है। घटना सोमवार शाम की बताई जा रही है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।   घर के बाहर से ले गए सुनसान जगह पीड़िता की मां के बयान के अनुसार सोमवार शाम करीब सात बजे युवती घर के बाहर थी। इसी दौरान दो युवक वहां पहुंचे और उसे घर के नजदीक एक सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया। घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। परिजनों को जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई।   FIR दर्ज, दोनों आरोपी गिरफ्तार पीड़िता की मां के बयान के आधार पर टंडवा थाना में कांड संख्या 146/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। टंडवा के इंस्पेक्टर पप्पू शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में केरेडारी थाना क्षेत्र के पचड़ा निवासी अर्जुन साव और बिहार निवासी कन्हैया कुमार शामिल हैं। आरोपियों में से एक पीड़िता के गांव में ही डेरा लेकर रह रहा था, जिससे पहचान में आसानी हुई।   मेडिकल जांच जारी, निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए चतरा भेजा है। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस संवेदनशील मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Lohagarh Fort Case
लोहागढ़ किला केस: गार्ड के बयान ने खोली पोल, चेतन की हूडी और सिया का तालमेल संदेह के घेरे में

पुणे, एजेंसियां। लोनावला स्थित लोहागढ़ किले पर 18 जून को हुई केतन अग्रवाल की मौत का मामला लगातार नए खुलासों के साथ चर्चा में बना हुआ है। टिकट काउंटर पर तैनात सुरक्षा गार्ड धीरज जाधव के बयान ने जांच को एक नई और अहम दिशा दे दी है।   गार्ड ने बताई 18 जून की सच्चाई सुरक्षा गार्ड धीरज जाधव के अनुसार उसने केतन अग्रवाल, उसकी मंगेतर सिया गोयल और बाद में पहुंचे चेतन चौधरी तीनों को किले पर देखा था। गार्ड ने चेतन के व्यवहार को संदिग्ध बताते हुए कहा कि तेज गर्मी के बावजूद उसने हूडी पहन रखी थी और स्टाफ की बातों को लगातार नजरअंदाज कर रहा था।   CCTV फुटेज में सिया और चेतन के बीच तालमेल के संकेत जांच एजेंसियों के मुताबिक CCTV फुटेज में सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच आपसी तालमेल के संकेत मिले हैं। आरोप है कि ट्रेकिंग के दौरान केतन को जानबूझकर खाई में धक्का दिया गया, जबकि शुरुआत में इस घटना को महज एक हादसा बताकर टाल दिया गया था।   हत्या का शक, दोनों आरोपी हिरासत में पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों को हिरासत में लेकर जांच तेज कर दी है। जो मामला पहले दुर्घटना लग रहा था, वह अब हत्या की साजिश की ओर इशारा कर रहा है। गार्ड का बयान और CCTV साक्ष्य इस केस में निर्णायक कड़ी साबित हो सकते हैं।

anjali kumari जून 25, 2026 0
salary scam
झारखंड: पशुपालन विभाग वेतन घोटाले में CID का शिकंजा, ₹3 करोड़ की अवैध निकासी की जांच हुई तेज

रांची। झारखंड के पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपये की अवैध वेतन निकासी से जुड़े मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच तेज कर दी है। सरकारी खजाने से करीब तीन करोड़ रुपये की अवैध निकासी के आरोपों की तह तक पहुंचने के लिए एसआईटी अब मुख्य आरोपी और विभाग के लेखापाल मुनिंद्र कुमार को अदालत से रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी का उद्देश्य इस पूरे घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों और सहयोगियों की भूमिका का भी खुलासा करना है।   रांची और रामगढ़ के मामलों को जोड़ा गया CID ने रांची और रामगढ़ में दर्ज दोनों मामलों को दोबारा पंजीकृत (री-रजिस्टर्ड) कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र में करीब 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला दर्ज है, जबकि रामगढ़ में 34.25 लाख रुपये के फर्जी वेतन भुगतान का मामला सामने आया था। जांच के अनुसार, अगस्त 2021 से जनवरी 2022 के बीच फर्जी आईडी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी राशि विभिन्न निजी बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।   डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच एसआईटी अब उस कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजेगी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी वेतन बिल तैयार करने में किया गया था। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों से पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क और शामिल लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी।   रिमांड पर होगी पूछताछ मुख्य आरोपी मुनिंद्र कुमार फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में बंद है। CID उसे रिमांड पर लेकर यह जानने की कोशिश करेगी कि घोटाले में किन अधिकारियों, कर्मचारियों या बाहरी लोगों की भूमिका थी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि अवैध रूप से निकाली गई राशि कहां-कहां भेजी गई और उसका इस्तेमाल किन संपत्तियों या रियल एस्टेट निवेश में किया गया।   जांच एजेंसी का मानना है कि पूछताछ और डिजिटल विश्लेषण के बाद इस बहुचर्चित घोटाले में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं तथा अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

anjali kumari जून 19, 2026 0
Abhishek Banerjee
हस्ताक्षर जालसाजी केस: अभिषेक बनर्जी के जवाब से खुश नहीं CID, दोबारा पेश होने का दिया आदेश

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को हस्ताक्षर जालसाजी मामले में एक बार फिर पश्चिम बंगाल सीआईडी ने तलब किया है। गुरुवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की गई, लेकिन जांच एजेंसी उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई। अधिकारियों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण सवालों पर अभिषेक ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी, जिसके चलते उन्हें 14 जून को दोपहर 12 बजे दोबारा पेश होने का नोटिस जारी किया गया है।   जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से सवाल किए, लेकिन कई बार अभिषेक बनर्जी ने "मुझे नहीं पता", "मैं नहीं कह सकता" या "इस बारे में जानकारी नहीं है" जैसे जवाब दिए। जांच एजेंसी का मानना है कि उनके बयानों में विसंगतियां हैं और कई अहम सवालों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिले। इसी कारण जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा पूछताछ आवश्यक समझी गई।   कोर्ट की राहत के बाद हुए थे पेश सीआईडी ने इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी को तीन बार समन भेजा था, लेकिन वे पेश नहीं हुए थे। मामला बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत से राहत मिलने के बाद अभिषेक दिल्ली से कोलकाता लौटे और सीधे सीआईडी मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे लंबी पूछताछ की गई। पूछताछ समाप्त होने के बाद उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और बिना कोई बयान दिए वहां से रवाना हो गए।   पूछताछ के बाद ममता बनर्जी से की मुलाकात पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी देर रात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंचे। वहां टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक हुई। हालांकि बैठक के विषय में किसी नेता ने आधिकारिक जानकारी नहीं दी। पार्टी नेताओं ने केवल इतना कहा कि मामला जांच के अधीन है और इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर 14 जून को होने वाली अगली पूछताछ पर टिकी है, जहां सीआईडी उनसे दोबारा अहम सवाल पूछेगी।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Gang-raped in Pakur
पाकुड़ में 12 साल की नाबालिग से गैंगरेप, 7 गिरफ्तार

पाकुड़। पाकुड़ जिले के महेशपुर में पुलिस ने एक गैंगरेप मामले का खुलासा किया है। इस मामले में दो नाबालिगों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी एसपी अनुदीप सिंह ने दी। एसपी ने बताया कि महेशपुर थाना क्षेत्र में 16 मई की रात एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ सात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। अनुसंधान के बाद गिरफ्तारी   महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में एक छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने वैज्ञानिक, मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान शुरू किया। छापेमारी के दौरान अविनाश सोरेन, बबूटा सोरेन, अंसार टुडू, बबनु हेंब्रम और कार्तिक मुर्मू को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में दो नाबालिगों को भी निरुद्ध किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित नाबालिग से आवश्यक जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला था और टीम को इसके त्वरित उद्भेदन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। फिलहाल, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

Unknown मई 18, 2026 0
NEET paper leak
नीट पेपर लीक में बड़ा खुलासा, मेडिकल कॉलेज का छात्र निकला मास्टरमाइंड

पटना, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। महाराष्ट्र के नासिक के बाद अब बिहार से भी गिरफ्तारी होने के बाद जांच और तेज हो गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बिहार में पकड़े गए आरोपी सीधे तौर पर पेपर लीक में शामिल थे या सॉल्वर गैंग के सदस्य थे। लेकिन पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।   नालंदा में वाहन जांच से खुला राज इस पूरे मामले का खुलासा बिहार के नालंदा जिले में पुलिस की गाड़ी चेकिंग के दौरान हुआ। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के मुताबिक, पावापुरी मोड़ के पास दो संदिग्ध गाड़ियों को रोका गया। काले रंग की स्कॉर्पियो में बैठे युवक खुद को एमबीबीएस सेकंड ईयर का छात्र बता रहे थे। तलाशी के दौरान पुलिस को नकदी, कई संदिग्ध दस्तावेज और मोबाइल फोन मिले। मोबाइल की जांच में NEET समेत अन्य परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, पैसों के लेन-देन के रिकॉर्ड और कई संदिग्ध चैट सामने आए। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होने से कथित सॉल्वर गैंग परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाया।   कौन है ‘राजा बाबू’? जांच के दौरान सबसे बड़ा नाम उज्जवल राज उर्फ ‘राजा बाबू’ का सामने आया। पुलिस के मुताबिक वह मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और Bhagwan Mahavir Institute of Medical Sciences (BMIMS) का 2022 बैच का छात्र है। पुलिस का कहना है कि राजा बाबू पिछले चार वर्षों से मेडिकल परीक्षाओं में लगातार फेल हो रहा था, लेकिन कॉलेज में बना हुआ था। जांच एजेंसियों को शक है कि वही पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी और कथित मास्टरमाइंड हो सकता है। उसके खिलाफ पहले से केस दर्ज है और CBI उसकी तलाश में जुटी हुई है।   इस गैंग में और कौन-कौन? राजगीर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार युवकों में अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, पंकज कुमार भी मेडिकल छात्र है और उसे इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी माना जा रहा है. वहीं राजा बाबू को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस का दावा है कि मोबाइल कॉल डिटेल्स से कई अहम सुराग मिले हैं. अभिभावकों, छात्रों और कथित सॉल्वरों के बीच लगातार बातचीत हो रही थी. अब इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है.   राजस्थान से शुरू हुआ था मामला इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले राजस्थान से हुआ था। वहां पुलिस ने दावा किया कि परीक्षा से पहले छात्रों को 410 सवालों वाला कथित ‘गेस पेपर’ दिया गया था, जिनमें से लगभग 120 सवाल असली परीक्षा में आ गए। 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। बिहार कनेक्शन सामने आने के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जांच का विषय बन गया है।

Unknown मई 13, 2026 0
PA murder case
बंगाल के CM शुभेंदु के PA हत्याकांड में 3 गिरफ्तार, बिहार के बक्सर, यूपी के बलिया से पकड़ाए

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदू अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में बिहार और यूपी से 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को बंगाल लाया जा रहा है। बंगाल CID ने बताया कि बिहार के बक्सर से मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य, जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया से राज सिंह को रविवार रात हिरासत में लिया गया। इन्हें सोमवार सुबह गिरफ्तार किया गया। राज सिंह शार्प शूटर बताया जा रहा है। 6 मई को चंद्रनाथ का मर्डर हुआ था बंगाल चुनाव के नतीजे आने के दो दिन बाद 6 मई को 42 साल के चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में हुई। हमलावर ने रथ की कार रुकवाकर कई राउंड फायरिंग की थी। रथ को सीने और पेट में तीन गोलियां लगी थीं। हमलावर के सुपारी किलर्स होने की आशंका बंगाल पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद रथ की हत्या में सुपारी किलर्स के शामिल होने की आशंका जताई थी। पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि रथ की हत्या प्लानिंग के तहत की गई और इसमें प्रोफेशनल शूटर शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने घटनास्थल से एक कार जब्त की, जिससे रथ की स्कॉर्पियो का पीछा किया गया था। कार की नंबर प्लेट फर्जी निकली। कार का चेसिस और इंजन नंबर मिटाया गया था। इसके अलावा, हमले में दो बाइक शामिल थीं। इनमें से एक मोटरसाइकिल भी घटनास्थल से करीब 4 किमी दूर चाय की दुकान के पास मिली। उस पर भी फर्जी रजिस्ट्रेशन था। दूसरी बाइक नहीं मिली है। शुभेंदु TMC में थे, तब से चंद्रनाथ उनके साथ थे चंद्रनाथ पहले एयरफोर्स में अफसर थे। VRS लेने के बाद कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। इसके बाद राजनीति में आ गए। सुवेंदु जब तृणमूल कांग्रेस में थे, तब से चंद्रनाथ उनके लिए काम कर रहे थे। उन्हें सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी लोगों में गिना जाता था। चंद्रनाथ 2019 में सुवेंदु की ऑफिशियल टीम का हिस्सा बने, तब सुवेंदु ममता बनर्जी सरकार में मंत्री थे। चंद्रनाथ ने भवानीपुर में सुवेंदु के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी संभाली थी। भवानीपुर वही सीट है जहां से सुवेंदु ने ममता बनर्जी को विधानसभा चुनाव में करीब 15 हजार वोटों से हराया है। चंद्रनाथ की मां भी शुभेंदु के साथ भाजपा में गई थी सुवेंदु की तरह चंद्रनाथ का परिवार भी पहले TMC से जुड़ा था। उनकी मां हाशी रथ ने TMC शासन के दौरान पूर्व मेदिनीपुर में स्थानीय पंचायत निकाय में पद संभाला था, लेकिन 2020 में सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा में शामिल हो गईं। चंद्रनाथ शांत स्वभाव और लो-प्रोफाइल थे। उन्होंने रहारा रामकृष्ण मिशन से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। कई सालों तक सुवेंदु के करीबी होने के बावजूद वह सुर्खियों से दूर ही रहते थे। चंद्रकात की सुवेंदु के साथ कोई फोटो नहीं है।

Unknown मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0