नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो इससे पहले केवल MS धोनी के नाम था। सैमसन अब सीएसके के लिए एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए हैं। छह गेंदों में टूटा धोनी का रिकॉर्ड धोनी ने आईपीएल 2013 में 16 पारियों में 461 रन बनाए थे। सैमसन को यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए केवल 12 रन की जरूरत थी और उन्होंने महज छह गेंदों में 15 रन बनाकर यह उपलब्धि हासिल कर ली। हैदराबाद के खिलाफ सैमसन ने 13 गेंदों में 27 रन बनाए, जिसमें पांच चौके और एक छक्का शामिल रहा। शानदार फॉर्म में हैं सैमसन इस सीजन सैमसन का बल्ला लगातार रन उगल रहा है। उन्होंने 13 मैचों में 477 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 164 से ज्यादा का रहा है, जबकि औसत भी लगभग 48 का है। सैमसन ने इस सीजन दो शतक और एक अर्धशतक भी लगाया है। सीएसके में धोनी का दबदबा कायम सीएसके के लिए विकेटकीपर बल्लेबाजों की बात करें तो टॉप-10 में ज्यादातर रिकॉर्ड धोनी के नाम हैं। 2013, 2018 और 2019 में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को कई मैच जिताए थे। लंबे समय तक यह रिकॉर्ड अटूट माना जा रहा था, लेकिन सैमसन ने अपने आक्रामक अंदाज से इसे पीछे छोड़ दिया। खास क्लब में शामिल हुए सैमसन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए एक सीजन में 100 से ज्यादा रन बनाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाजों की सूची में अब केवल तीन नाम हैं—धोनी, पार्थिव पटेल और संजू सैमसन। हालांकि, टॉप रिकॉर्ड अब सैमसन के नाम दर्ज हो चुका है।
आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स का 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi अपने धमाकेदार प्रदर्शन से क्रिकेट जगत को हैरान कर रहा है। जिस आक्रामक अंदाज में वह बल्लेबाजी कर रहे हैं, उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि वह इस सीजन में आईपीएल इतिहास के कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। पंजाब किंग्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में वैभव ने महज 16 गेंदों में 43 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 5 छक्के और 3 चौके शामिल थे। उनकी इस पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदला, बल्कि दिग्गजों के रिकॉर्ड पर भी खतरे की घंटी बजा दी है। क्रिस गेल का ‘महारिकॉर्ड’ खतरे में आईपीएल इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड Chris Gayle के नाम है, जिन्होंने 2012 में 59 छक्के लगाए थे। लेकिन इस सीजन वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 9 मैचों में ही 37 छक्के जड़ दिए हैं। उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह रिकॉर्ड अब ज्यादा दूर नहीं लगता। वहीं Abhishek Sharma का 2024 में 42 छक्कों का आंकड़ा भी खतरे में है, जिसे वैभव जल्द पार कर सकते हैं। दुनिया के टॉप गेंदबाज भी नहीं बच पाए वैभव की बल्लेबाजी की सबसे खास बात उनका निडर रवैया है। उन्होंने Jasprit Bumrah और Josh Hazlewood जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाजों के खिलाफ भी आक्रामक खेल दिखाया है। उनका आत्मविश्वास और बड़े शॉट खेलने की क्षमता उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाती है। रिकॉर्डतोड़ स्ट्राइक रेट और ऑरेंज कैप की दौड़ वैभव सूर्यवंशी इस सीजन 238.10 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट और 44.44 की औसत से रन बना रहे हैं। वह ऑरेंज कैप की रेस में भी सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही वह आईपीएल इतिहास के पहले बल्लेबाज बन गए हैं, जिन्होंने एक ही सीजन में 230+ के स्ट्राइक रेट से 400 रन का आंकड़ा पार किया है। RR के लिए गेम-चेंजर बनते वैभव Yashasvi Jaiswal के साथ उनकी साझेदारी राजस्थान रॉयल्स के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। दोनों की आक्रामक शुरुआत ने टीम को कई मैचों में मजबूत स्थिति दिलाई है। IPL में एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के (Top Records) 59 – क्रिस गेल (2012) 52 – आंद्रे रसेल (2019) 51 – क्रिस गेल (2013) 44 – क्रिस गेल (2011) 42 – अभिषेक शर्मा (2024)
आईपीएल 2026 के 34वें मुकाबले में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब Sai Sudharsan ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। Gujarat Titans के इस युवा सलामी बल्लेबाज ने Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ खेलते हुए लीग में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का कारनामा किया। बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में खेले गए इस मुकाबले में सुदर्शन ने 58 गेंदों में 100 रनों की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 5 छक्के जड़े और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। 11 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा साई सुदर्शन ने IPL इतिहास में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो पहले Chris Gayle के नाम था। सुदर्शन: 47 पारियां गेल: 48 पारियां गेल ने यह उपलब्धि 2015 में हासिल की थी और अब 11 साल बाद सुदर्शन ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। खास उपलब्धि: गुजरात टाइटंस के दूसरे बल्लेबाज सुदर्शन, Gujarat Titans के लिए 2000 रन पूरे करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि टीम के कप्तान Shubman Gill ने हासिल की थी। शानदार करियर आंकड़े 24 वर्षीय सुदर्शन ने 2022 में आईपीएल डेब्यू किया था और अब तक 47 मैचों की 47 पारियों में 2028 रन बना चुके हैं। औसत: 47 स्ट्राइक रेट: 147 शतक: 3 अर्धशतक: 13 उन्होंने 2025 सीजन में 759 रन बनाकर ऑरेंज कैप भी अपने नाम की थी। मैच का हाल टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस को सुदर्शन और शुभमन गिल ने जबरदस्त शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए 128 रनों की साझेदारी की। हालांकि, सुदर्शन की शानदार पारी के बावजूद मैच Royal Challengers Bengaluru ने 5 विकेट से जीत लिया।
IPL का मंच हमेशा से नए सितारों को जन्म देने के लिए जाना जाता है, लेकिन जब महज 15 साल का खिलाड़ी दुनिया के बड़े-बड़े गेंदबाजों के सामने बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी करता है, तो क्रिकेट जगत चौंक उठता है। इस समय चर्चा के केंद्र में हैं Vaibhav Suryavanshi, जिनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने अनुभवी खिलाड़ियों को भी चुनौती दे दी है। वहीं दूसरी ओर Abhishek Sharma लंबे समय से अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन IPL 2026 में दोनों के प्रदर्शन की तुलना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कम उम्र में बड़ा धमाका वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में IPL डेब्यू कर इतिहास रच दिया। 14 साल की उम्र में मैदान पर उतरकर उन्होंने पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर अपनी निडरता का परिचय दिया। दूसरी तरफ, अभिषेक शर्मा ने 2018 में अपने डेब्यू मैच में ही 46 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक क्रिकेट की झलक दिखाई है। IPL 2026: आंकड़ों की सीधी टक्कर मौजूदा सीजन में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। 4 मैचों में 200 रन औसत: 50.00 स्ट्राइक रेट: 266.67 18 चौके और 18 छक्के उनकी 26 गेंदों में 78 रनों की पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। वहीं अभिषेक शर्मा भी पीछे नहीं हैं: 4 मैचों में 129 रन औसत: 32.25 स्ट्राइक रेट: 218.64 28 गेंदों में 74 रन की विस्फोटक पारी हालांकि आंकड़ों के हिसाब से इस समय वैभव बढ़त बनाए हुए हैं। करियर आंकड़े क्या कहते हैं? वैभव ने IPL 2025 में 7 मैचों में 252 रन बनाए थे, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 206.55 रहा। कम मैचों में ही उन्होंने अपनी छाप छोड़ दी। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा का अनुभव कहीं ज्यादा है। उन्होंने अब तक 81 मैचों में 1945 रन बनाए हैं, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 165.81 रहा है। पावरप्ले में तेजी से रन बनाने में उनका कोई मुकाबला नहीं रहा। क्या बदल रहा है भारतीय टी20 का भविष्य? अभिषेक शर्मा ने जिस तरह आक्रामक बल्लेबाजी की नई परिभाषा गढ़ी, वैभव सूर्यवंशी उसी राह पर चलते हुए उसे और आगे ले जाते दिख रहे हैं। इतनी कम उम्र में इस स्तर की निडरता यह संकेत देती है कि भारतीय टी20 क्रिकेट का भविष्य और भी आक्रामक और रोमांचक होने वाला है।
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में कोलकाता नाइटराइडर्स की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। टीम को अपने पहले दो मुकाबलों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है, जिसके साथ ही 14 साल पुराना एक शर्मनाक रिकॉर्ड फिर दोहराया गया है। लगातार दो हार से टूटा रिकॉर्ड कोलकाता नाइटराइडर्स को पहले मैच में मुंबई इंडियंस ने 6 विकेट से हराया, जबकि दूसरे मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद ने 65 रनों से करारी शिकस्त दी। इस हार के साथ KKR के नाम एक अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया-टीम 2012 के बाद पहली बार IPL सीजन के शुरुआती दो मैच लगातार हारी है। यानी पूरे 14 साल बाद ऐसी खराब शुरुआत देखने को मिली है। सनराइजर्स के खिलाफ क्यों हारी KKR? दूसरे मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 226 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। हेनरिक क्लासेन – 52 रन अभिषेक शर्मा – 48 रन ट्रेविस हेड – 46 रन इसके जवाब में कोलकाता नाइटराइडर्स की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। अंगकृष रघुवंशी – 52 रन (29 गेंद) रिंकू सिंह – 35 रन फिन एलन – 28 रन (7 गेंद) इनके अलावा कोई बल्लेबाज टिक नहीं पाया, जिसके चलते टीम 65 रन से मैच हार गई। कप्तान पर बढ़ा दबाव इस सीजन में अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में उतर रही KKR पर अब दबाव साफ नजर आ रहा है। लगातार दो हार के बाद टीम को जल्द ही वापसी करनी होगी, वरना प्लेऑफ की राह मुश्किल हो सकती है। क्या कर पाएगी KKR वापसी? IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में शुरुआत भले ही खराब हो, लेकिन वापसी के कई मौके मिलते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कोलकाता नाइटराइडर्स अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है और अगले मैच में जीत हासिल कर पाती है या नहीं।
IPL 2026 में भले ही लखनऊ सुपर जायंट्स को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इस मुकाबले में एक बड़ी उपलब्धि तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के नाम दर्ज हो गई। इकाना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में शमी ने पारी की पहली ही गेंद पर विकेट लेकर इतिहास रच दिया। पहली गेंद पर विकेट, बना दिया अनोखा रिकॉर्ड मोहम्मद शमी ने मैच की पहली गेंद पर ही केएल राहुल को आउट कर शानदार शुरुआत दिलाई। इसी के साथ शमी IPL इतिहास में 5 बार पहली गेंद पर विकेट लेने वाले इकलौते गेंदबाज बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने कई बड़े गेंदबाजों को पीछे छोड़ दिया है। प्रवीण कुमार, उमेश यादव, ट्रेंट बोल्ट, लसिथ मलिंगा, भुवनेश्वर कुमार, अशोक डिंडा और पैट कमिंस जैसे गेंदबाजों ने यह कारनामा 3-3 बार किया है, लेकिन शमी उनसे आगे निकल गए हैं। लखनऊ की बल्लेबाजी रही कमजोर मैच की बात करें तो लखनऊ सुपर जायंट्स की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई। टीम 18.4 ओवर में सिर्फ 141 रन पर सिमट गई। कप्तान ऋषभ पंत जल्दी आउट हो गए, जिससे टीम दबाव में आ गई। हालांकि मिचेल मार्श और अब्दुल समद ने कुछ हद तक संघर्ष करते हुए टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया, लेकिन यह स्कोर जीत के लिए काफी नहीं था। समीर रिजवी की दमदार पारी से दिल्ली की जीत 142 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत भी खराब रही। टीम ने शुरुआती झटके झेले, लेकिन इसके बाद समीर रिजवी ने शानदार जिम्मेदारी निभाई। रिजवी ने 47 गेंदों में नाबाद 70 रन बनाए, जबकि ट्रिस्टन स्टब्स ने 39 रनों की अहम पारी खेली। दोनों के बीच 119 रनों की साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया और दिल्ली को जीत दिलाई। रिकॉर्ड के बावजूद टीम को नहीं मिली जीत मोहम्मद शमी का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन टीम को जीत नहीं दिला सका, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर यह उपलब्धि उन्हें IPL के सबसे खास गेंदबाजों में शामिल करती है।
भारतीय क्रिकेट में एक नया सितारा तेजी से उभर रहा है। महज 15 साल की उम्र में Vaibhav Suryavanshi ने T-20 क्रिकेट में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है। Rajasthan Royals की ओर से खेलते हुए चेन्नई के खिलाफ मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 17 गेंदों में 52 रन की विस्फोटक पारी खेली और अपनी टीम को 8 विकेट से शानदार जीत दिलाई। इस दौरान उन्होंने 4 चौके और 5 छक्के लगाए, यानी अपनी पारी के 52 में से 46 रन केवल बाउंड्री से आए। शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज वैभव ने अपनी पारी की दूसरी ही गेंद पर छक्का जड़कर इरादे साफ कर दिए। उन्होंने Matt Henry की गेंद पर छक्का लगाकर शुरुआत की और फिर लगातार आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 15 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। T-20 में बनाया अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड इस पारी के साथ वैभव सूर्यवंशी T-20 इतिहास में 15 साल की उम्र में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। अब तक वह इस उम्र में कुल 67 छक्के जड़ चुके हैं, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। दिलचस्प बात यह है कि इस उम्र में बाकी खिलाड़ियों के कुल छक्के मिलाकर भी इस आंकड़े के करीब नहीं पहुंचते। IPL में भी बनाया बड़ा रिकॉर्ड वैभव ने IPL में भी एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने अपनी पहली 8 पारियों में 29 छक्के लगाकर सबसे ज्यादा सिक्स मारने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस मामले में उन्होंने Jake Fraser-McGurk को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 28 छक्के थे। इसके अलावा, वैभव IPL इतिहास में ऐसे पहले खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने एक ही फ्रेंचाइजी के लिए 18 गेंदों से कम में एक से ज्यादा बार अर्धशतक जड़ा है। भविष्य का सुपरस्टार? वैभव की इस धमाकेदार पारी ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा मैच विनर मिल सकता है। इतनी कम उम्र में उनका आत्मविश्वास, शॉट चयन और आक्रामकता उन्हें खास बनाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।