आईपीएल 2026 के 34वें मुकाबले में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब Sai Sudharsan ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। Gujarat Titans के इस युवा सलामी बल्लेबाज ने Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ खेलते हुए लीग में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का कारनामा किया।
बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में खेले गए इस मुकाबले में सुदर्शन ने 58 गेंदों में 100 रनों की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 5 छक्के जड़े और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई।
साई सुदर्शन ने IPL इतिहास में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो पहले Chris Gayle के नाम था।
गेल ने यह उपलब्धि 2015 में हासिल की थी और अब 11 साल बाद सुदर्शन ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
सुदर्शन, Gujarat Titans के लिए 2000 रन पूरे करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि टीम के कप्तान Shubman Gill ने हासिल की थी।
24 वर्षीय सुदर्शन ने 2022 में आईपीएल डेब्यू किया था और अब तक 47 मैचों की 47 पारियों में 2028 रन बना चुके हैं।
उन्होंने 2025 सीजन में 759 रन बनाकर ऑरेंज कैप भी अपने नाम की थी।
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस को सुदर्शन और शुभमन गिल ने जबरदस्त शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए 128 रनों की साझेदारी की। हालांकि, सुदर्शन की शानदार पारी के बावजूद मैच Royal Challengers Bengaluru ने 5 विकेट से जीत लिया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
आईपीएल 2026 के 34वें मुकाबले में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब Sai Sudharsan ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। Gujarat Titans के इस युवा सलामी बल्लेबाज ने Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ खेलते हुए लीग में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का कारनामा किया। बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में खेले गए इस मुकाबले में सुदर्शन ने 58 गेंदों में 100 रनों की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 5 छक्के जड़े और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। 11 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा साई सुदर्शन ने IPL इतिहास में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो पहले Chris Gayle के नाम था। सुदर्शन: 47 पारियां गेल: 48 पारियां गेल ने यह उपलब्धि 2015 में हासिल की थी और अब 11 साल बाद सुदर्शन ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। खास उपलब्धि: गुजरात टाइटंस के दूसरे बल्लेबाज सुदर्शन, Gujarat Titans के लिए 2000 रन पूरे करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि टीम के कप्तान Shubman Gill ने हासिल की थी। शानदार करियर आंकड़े 24 वर्षीय सुदर्शन ने 2022 में आईपीएल डेब्यू किया था और अब तक 47 मैचों की 47 पारियों में 2028 रन बना चुके हैं। औसत: 47 स्ट्राइक रेट: 147 शतक: 3 अर्धशतक: 13 उन्होंने 2025 सीजन में 759 रन बनाकर ऑरेंज कैप भी अपने नाम की थी। मैच का हाल टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस को सुदर्शन और शुभमन गिल ने जबरदस्त शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए 128 रनों की साझेदारी की। हालांकि, सुदर्शन की शानदार पारी के बावजूद मैच Royal Challengers Bengaluru ने 5 विकेट से जीत लिया।
एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने गुजरात टाइटंस (GT) को 5 विकेट से मात देकर शानदार जीत दर्ज की। यह मैच शुरुआत से ही हाई-स्कोरिंग और उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन अंत के ओवरों में गुजरात की कमजोर बल्लेबाजी और आरसीबी की सधी हुई गेंदबाजी ने पूरा खेल बदल दिया। गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने हार के बाद खुलकर अपनी टीम की खामियों को स्वीकार किया और बताया कि आखिर कहां मैच हाथ से निकल गया। आखिरी ओवर बने हार की सबसे बड़ी वजह: शुभमन गिल शुभमन गिल ने कहा कि गुजरात टाइटंस 16वें से 19वें ओवर के बीच पूरी तरह मैच पर पकड़ खो बैठी। उन्होंने बताया कि: 17वें, 18वें और 19वें ओवर में एक भी बाउंड्री नहीं लग सकी इसी वजह से टीम का स्कोर उम्मीद से काफी कम रह गया टीम जिस टोटल की ओर बढ़ रही थी, वह पूरा नहीं हो सका गिल के मुताबिक, यही वह निर्णायक मोड़ था जिसने मैच का रुख बदल दिया। मिडिल ओवर्स में भी नहीं मिला जरूरी ब्रेकथ्रू गिल ने गेंदबाजी विभाग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पावरप्ले के बाद टीम सही स्थिति में थी, लेकिन विकेट निकालने में नाकाम रही। उन्होंने स्वीकार किया कि: शुरुआती ओवर्स में प्रदर्शन ठीक रहा लेकिन मिडिल ओवर्स में दबाव बनाए नहीं रखा जा सका विकेट न मिलने की वजह से आरसीबी को वापसी का मौका मिल गया विराट कोहली का जीवनदान साबित हुआ टर्निंग पॉइंट मैच का एक अहम मोड़ तब आया जब विराट कोहली को शुरुआती ओवरों में जीवनदान मिला। वाशिंगटन सुंदर ने मोहम्मद सिराज की गेंद पर उनका आसान कैच छोड़ दिया, तब कोहली बिना खाता खोले खेल रहे थे। इसके बाद कोहली ने अपनी पारी को संभालते हुए आरसीबी को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। साई सुदर्शन की शतकीय पारी, फिर भी नहीं मिला फायदा गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 205/3 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। इसमें सबसे बड़ा योगदान रहा: साई सुदर्शन का 58 गेंदों पर शानदार 100 रन एक समय GT 16 ओवर में 170/2 पर थी और 220+ स्कोर की ओर बढ़ती दिख रही थी, लेकिन 16वें ओवर में सुदर्शन के आउट होने के बाद रनगति धीमी पड़ गई। आरसीबी की गेंदबाजी ने पलटा मैच आरसीबी के गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में कमाल का प्रदर्शन किया। सुयश शर्मा भुवनेश्वर कुमार जोश हेजलवुड इन तीनों ने मिलकर अगले ओवरों में गुजरात को पूरी तरह रोक दिया और लगातार तीन ओवरों में एक भी बाउंड्री नहीं दी, जिससे दबाव पूरी तरह आरसीबी की ओर चला गया।
मुंबई, एजेंसियां। IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने मुंबई इंडियंस (MI) को वानखेड़े स्टेडियम में 103 रनों के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया। यह IPL इतिहास में मुंबई इंडियंस की रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार है, जबकि चेन्नई की अब तक की सबसे बड़ी जीत भी बन गई है। 207 रन बनाकर CSK ने रखा मजबूत स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने 20 ओवर में 207 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से संजू सैमसन ने शानदार शतकीय पारी खेली और 54 गेंदों में 101 रन बनाए। उनकी इस पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। मुंबई की बल्लेबाजी ढही, 104 पर ऑलआउट लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की टीम पूरी तरह लड़खड़ा गई और 20 ओवर भी नहीं खेल सकी। पूरी टीम सिर्फ 104 रनों पर सिमट गई। चेन्नई के गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और लगातार विकेट लेते रहे। अकील होसेन बने गेंदबाजी के हीरो गेंदबाजी में इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर आए अकील होसेन ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 17 रन देकर 4 विकेट चटकाए और मुंबई की बल्लेबाजी को पूरी तरह तोड़ दिया। टूटे कई बड़े रिकॉर्ड इस जीत के साथ चेन्नई ने IPL में अपनी सबसे बड़ी जीत (103 रनों से) दर्ज की। वहीं मुंबई इंडियंस की यह रनों के अंतर से सबसे बड़ी हार बन गई। इससे पहले मुंबई की सबसे बड़ी हार 87 रनों की थी, जो 2013 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आई थी। CSK का दबदबा, MI पर भारी जीत इस मैच ने एक बार फिर साबित किया कि चेन्नई सुपर किंग्स बड़े मुकाबलों में दबदबा बनाने में माहिर है। वानखेड़े जैसे घरेलू मैदान पर इतनी बड़ी जीत ने MI को झटका दिया है, जबकि CSK के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि बन गई है।