रांची। नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास का विजन प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, खनन और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में विशेष सहयोग की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का स्रोत नहीं, बल्कि विकसित भारत-2047 का महत्वपूर्ण साझेदार बनना चाहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश की औद्योगिक प्रगति में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन राज्य ने विस्थापन और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़कर ही वास्तविक विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने तथा झारखंड में उद्योग, खेल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय मदद की मांग की। राज्य की चुनौतियां सामने रखीं। उन्होंने बताया कि राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास अपना भवन नहीं है, फिर भी पोषण अभियान और सरकार की ‘सामार’ योजना के जरिए कुपोषण और स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी आई है। सभी बच्चों को प्रतिदिन एक अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य अपने संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से अब आईआईटी, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन होने लगे हैं। उन्होंने केंद्र से पीएमश्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं को एकीकृत करने का आग्रह किया। कौशल विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि बिरसा कौशल विकास कार्यक्रम के तहत राज्य के अधिकांश प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना के तहत राज्य में 1,276 दवा दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि और नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति में तेजी लाने का आग्रह किया। साथ ही राज्य में एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की योजना की भी जानकारी दी। खेलों में झारखंड एक्सीलेंट और बेहतरी की संभावना खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और तीरंदाजी में झारखंड की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हॉकी एवं फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और खेल संघों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। सिंचाई में सहयोग की जरूरत कृषि और जल संसाधन के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं तथा बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.5 लाख एकड़ में फलदार पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन की लंबित राशि जल्द उपलब्ध कराने और सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की। सीएम हेमंत सोरेन के संबोधन की 5 मुख्य बाते मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक झारखंड को केवल खनिज आधारित राज्य नहीं, बल्कि Manufacturing Hub, Green Economy और Knowledge Economy के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षा और आंगनबाड़ी पर जोर राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास भवन नहीं है, फिर भी कुपोषण में कमी आई है। सरकार 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवन बना रही है और 80 CM Schools of Excellence के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार झारखंड हर साल 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और AI, EV, Robotics जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष फोकस है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की पहल पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए 1,276 दवा दुकानें संचालित की जा रही हैं। राज्य AI-enabled Digital State Health Profile बनाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार हो सके। केंद्र से वित्तीय और विकास संबंधी मांगे मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने तथा झारखंड में उद्योग, खेल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय सहयोग की मांग की।
रांची। ऐसे अपराधी जो झारखंड से भाग कर विदेशों में छुपे हैं और वहीं से अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहे हैं, अब उनकी खैर नहीं है। ऐसे गैंगस्टरों और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य की CID और केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह से रेस हैं। झारखंड से विदेश फरार अपराधियों को प्रत्यर्पण संधि के तहत वापस भारत लाने के लिए इंटरपोल और NCB ( नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत फरार अपराधियों को अपराध की प्रकृति के आधार पर चार विशेष श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सीआईडी मुख्यालय ऐसे सभी अपराधियों का डेटा बेस तैयार कर रहा है। इसमें सभी जिलों के एसपी भी सहयोग कर रहे हैं। इसे डेटा बेस को सीआईडी की ओर से इंटरपोल को भेजा जायेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। 4 श्रेणियों में बांटे गए अपराधी इंटरपोल और एनसीबी ने अपराधियों को उनके द्वारा किए गए अपराधों के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया है. श्रेणी 1 : काउंटर टेररिज्म (आतंकवाद विरोधी मामले) और संगठित अपराध श्रेणी 2 : नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों और ड्रग्स की तस्करी) से संबंधित अपराध श्रेणी 3 : आर्थिक अपराध ( वित्तीय धोखाधड़ी ) श्रेणी 4 : साइबर क्राइम, मानव तस्करी और अन्य गंभीर मामले। अपराधियों की कुंडली तैयार करने के लिए 6 मुख्य बिंदु विदेशों में छिपे अपराधियों को कानूनी रूप से दबोचने के लिए CID बेहद पुख्ता सबूत जुटा रही है। 24 जिलों के एसपी से निम्नलिखित छह मुख्य बिंदुओं पर अपराधियों का प्रोफाइल मांगा गया है। फरार अपराधी का पूरा नाम और उसका स्थायी – अस्थायी पता। पिता का नाम और अपराधी की सही जन्म तिथि। अपराधी का पासपोर्ट नंबर और उसका हालिया रंगीन (कलर) फोटोग्राफ। फरार अपराधी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों (केस) का पूरा विवरण। अपराधी का वर्तमान लोकेशन या वह किस देश/जगह पर छिपा है, इसकी जानकारी संबंधित केस में वांटेड अपराधी का फिंगरप्रिंट (यदि पुलिस रिकॉर्ड में उपलब्ध हो)। झारखंड के 3 बड़े गैंगस्टर जो विदेश से चला रहे हैं गैंग झारखंड पुलिस के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती तीन गैंगस्टर बने हुए हैं, जो विदेश में बैठकर झारखंड में रंगदारी, हत्या और धमकी का सिंडिकेट चला रहे हैं। प्रिंस खान (धनबाद) : धनबाद के वासेपुर का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान इस सूची में सबसे ऊपर है। पुलिस इनपुट के अनुसार, वह वर्तमान में पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहीं से धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में अपना रंगदारी का नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। राहुल दुबे (रामगढ़) : मूल रूप से रामगढ़ जिले का रहने वाला राहुल दुबे भी विदेश से ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। जांच एजेंसियां लगातार इसके वर्तमान लोकेशन को ट्रैक करने का प्रयास कर रही हैं। राहुल सिंह (लातेहार) : लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र का निवासी राहुल सिंह भी विदेश फरार है। इसके पहले अजरबैजान में छिपे होने की पुख्ता जानकारी थी, लेकिन हालिया इनपुट के अनुसार वह अब वहां से भी भाग निकला है। पुलिस उसकी नई लोकेशन का पता लगा रही है। पंजाब का ड्रग्स तस्कर दलजिंदर’ इंग्लैंड फरार इन तीन गैंगस्टरों के अलावा, मूल रूप से पंजाब का रहने वाला दलजिंदर सिंह पलामू जिले में दर्ज ड्रग्स तस्करी (नारकोटिक्स) के एक बड़े मामले में वांछित है। झारखंड पुलिस को खुफिया जानकारी मिली है कि वह वर्तमान में इंग्लैंड में शरण लिए हुए है। CID इसकी भी श्रेणी तय कर प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटी है।
रांची। नगड़ी में बन रहे रिम्स 2 के विरोध में आदिवासी संगठन गुरुवार को सड़क पर उतरे। इस आंदोलन में आदिवासी समाज, किसान और ग्रामीण शामिल हुए। इनका आक्रोश सड़कों पर फूटा। हजारों की संख्या में लोग नगड़ी से मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च के लिए निकले, रास्ते में उन्हें जगह जगह रोका गया, लेकिन ये लोग नदी और खेत से होते हुए मोराबादी पहुंच गए। अब प्रशासन ने उन्हें ऑक्सीजन पार्क के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया है। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और अपने नारेबाजी कर रहे हैं। आजीविका छीनने का आरोप प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर उनकी खेती-किसानी और आजीविका छीन रही है। उनका कहना है कि जिस जमीन पर रिम्स-2 बनाने की योजना है, वह इलाके की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि में शामिल है, जहां सैकड़ों परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में अस्पताल निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के भविष्य पर सीधा प्रहार होगा। बंजर या गैरकृषि भूमि पर बने रिम्स-2.. प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके लिए बंजर या गैर-कृषि भूमि का चयन किया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि जब राज्य में अन्य वैकल्पिक जमीन उपलब्ध है, तो फिर उपजाऊ खेतों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। खेतो और नदी के रास्ते मोरहाबादी पहुंचे रोक के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई ग्रामीण खेतों और नदी के रास्ते होते हुए ऑक्सीजन पार्क तक पहुंचे। उनका आरोप है कि मार्च को रोकने के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग आंदोलन स्थल तक पहुंचने में सफल रहे। कांके ब्लॉक में भी रोका गयाः आदिवासी संगठनों और नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आदिवासी समाज के लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च शुरू किया, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कांके के ब्लॉक चौक के पास रोक दिया। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का नहीं बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और भविष्य का सवाल है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन को खत्म करना स्वीकार नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों को प्रशासन ने रोका प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने रैली में भाग लिया. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को प्रशासन ने कांके ब्लॉक चौक के समीप बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके बाद रैली को कांके प्रखंड कार्यालय की ओर डायवर्ट करने का प्रयास किया गया।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में परीक्षा संचालन से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर केवल सरकारी कर्मियों को ही इनविजिलेटर (वीक्षक) के रूप में नियुक्त किया जाएगा। पूरी परीक्षा प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रवेश से पहले सघन फ्रिस्किंग की जाएगी और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके अलावा परीक्षा से एक दिन पहले सभी परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज कर सील कर दिया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके। भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परीक्षा के दिन शहर में सुचारु यातायात और भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख चौक-चौराहों तथा परीक्षा केंद्रों के बाहर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। 8 केंद्रों पर होगी परीक्षा, 4 हजार से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल जिले के छह शिक्षण संस्थानों में कुल आठ परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 4,000 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षार्थियों को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश मिलेगा। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इन केंद्रों पर आयोजित होगी परीक्षा परीक्षा एलबीएसएम कॉलेज करनडीह, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी, द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेंस, राजकीय आदिवासी हाई स्कूल सीतारामडेरा और एलबीएसएम कॉलेज गोलमुरी सहित कुल आठ केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। अधिकारियों ने की तैयारियों की समीक्षा बैठक में सिटी एसपी ललित मीणा, एसडीएम धालभूम अर्णव मिश्रा, एएसपी ऋषभ त्रिवेदी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राहुलजी आनंदजी समेत विभिन्न कॉलेजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और कदाचारमुक्त तरीके से संपन्न कराना है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड स्थित ढोढराही गांव आज एक दर्दनाक पहचान के साथ चर्चा में है। अनुसूचित जाति बहुल इस गांव में टीबी (क्षय रोग) ने पिछले एक दशक में 20 से अधिक पुरुषों की जान ले ली है, जिसके कारण गांव को अब ‘विधवाओं का गांव’ कहा जाने लगा है। गांव में लगभग 25 परिवार रहते हैं, जिनमें से 20 से अधिक परिवारों की महिलाएं विधवा हो चुकी हैं। मजदूरी के लिए जाते थे बाहर, बीमारी बन गई मौत की वजह ग्रामीणों के अनुसार, गांव के अधिकांश पुरुष बिहार के रोहतास जिले के करवंदिया क्षेत्र में स्टोन माइंस में मजदूरी करने जाते थे। वहीं काम करने के दौरान कई लोग बीमार पड़े और बाद में उनकी मौत हो गई। वर्ष 2016-17 के बाद से टीबी के मामलों में तेजी आई और एक-एक कर कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य काल के गाल में समा गए। महिलाओं पर परिवार की जिम्मेदारी पति की मौत के बाद गांव की महिलाएं अब मजदूरी, महुआ चुनने और ईंट-भट्ठों में काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। कई बच्चों को भी कम उम्र में मजदूरी करनी पड़ रही है। कुछ परिवार गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर पलायन कर चुके हैं, जिसके कारण कई घरों में ताले लटके हुए हैं। सवालों के घेरे में बीमारी का कारण ग्रामीणों का कहना है कि टीबी से सबसे ज्यादा पुरुषों की मौत हुई है, जबकि महिलाओं और बच्चों में ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं। वर्ष 2022 में हुए स्वास्थ्य सर्वे में गांव में तीन टीबी मरीज मिले थे, लेकिन इसके बाद कोई बड़ा मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया। स्वास्थ्य विभाग करेगा विशेष जांच पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि गांव में विशेष मेडिकल कैंप लगाया जाएगा। एक्स-रे और स्क्रीनिंग के जरिए सभी ग्रामीणों की जांच होगी। विभाग यह भी पता लगाएगा कि मौतें केवल टीबी से हुईं या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी जिम्मेदार है। गांव की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण जीवन की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरायकेला-खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले के फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। जिला स्पोर्ट्स एसोसिएशन (DSA) की ओर से आयोजित जिला फुटबॉल लीग 2026 का शुभारंभ 1 जुलाई से होने जा रहा है। प्रतियोगिता का आयोजन बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला और अर्जुना स्टेडियम, खरसावां में किया जाएगा। लीग में जिले की 25 पुरुष और 6 महिला टीमें हिस्सा लेंगी, जिससे खेल प्रेमियों को रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। बैठक में तय हुई प्रतियोगिता की रूपरेखा प्रतियोगिता के सफल आयोजन को लेकर अर्जुना स्टेडियम, खरसावां में जिला स्पोर्ट्स एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। वरीय उपाध्यक्ष उमेश कुमार सिंहदेव की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजीकृत 25 पुरुष टीमों को पांच समूहों में विभाजित किया गया। साथ ही मैचों के संचालन, रेफरी व्यवस्था और अन्य तैयारियों पर चर्चा की गई। सरायकेला और खरसावां में बंटे मुकाबले लीग के तहत ग्रुप ए और ग्रुप बी की कुल 10 टीमें बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला में अपने मैच खेलेंगी। वहीं शेष 15 टीमों के मुकाबले अर्जुना स्टेडियम, खरसावां में आयोजित किए जाएंगे। इससे दोनों क्षेत्रों के फुटबॉल प्रेमियों को स्थानीय स्तर पर मैच देखने का अवसर मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंचबैठक में डीएसए सचिव मोहम्मद दिलदार समेत कई पदाधिकारी, रेफरी और विभिन्न क्लबों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आयोजकों का कहना है कि यह लीग जिले की युवा फुटबॉल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें प्रतिस्पर्धी मंच उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। फुटबॉल प्रेमियों में उत्साह प्रतियोगिता की घोषणा के बाद खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। जिले के कई प्रतिष्ठित क्लब इस लीग में भाग लेंगे, जिससे मुकाबले और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह टूर्नामेंट स्थानीय खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और बड़े स्तर तक पहुंचने का सुनहरा अवसर साबित होगा।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव की है, जहां पुलिस की छापेमारी के दौरान ग्रामीणों और आरोपित के परिजनों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। इस हमले में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी साइबर पुलिस जानकारी के अनुसार, चामलिटी गांव निवासी साइबर अपराधी चुरामण मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद गिरिडीह साइबर थाना की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी। पुलिस ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, चुरामण मंडल को इसकी भनक लग गई। भीड़ ने किया विरोध, आरोपी भाग निकला पुलिस के पहुंचते ही आरोपी और उसके सहयोगियों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी मौके का फायदा उठाकर चुरामण मंडल अपने साथियों के साथ फरार हो गया। कई लोगों पर दर्ज हुआ मामला अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान ने बताया कि साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए हमला कर दिया। इस मामले में 5 से 7 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और अपराधी को भगाने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार साइबर अपराधी चुरामण मंडल और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी (RU) ने स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2025-27 में नामांकन प्रक्रिया को लेकर नया शेड्यूल जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पहली मेरिट लिस्ट 13 जून को प्रकाशित की जाएगी। शेड्यूल में किए गए इस बदलाव के बाद हजारों छात्र-छात्राओं की निगाहें अब पहली मेरिट सूची पर टिकी हुई हैं। मेरिट लिस्ट के बाद होगा दस्तावेज सत्यापन विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि पहली मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को निर्धारित समय के भीतर संबंधित पीजी विभागों और कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी जरूरी प्रमाण पत्र और दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि नामांकन के समय किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया पर जोर रांची यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से शेड्यूल में बदलाव किया गया है। विश्वविद्यालय चरणबद्ध तरीके से नामांकन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराएगा। जिन छात्रों का नाम पहली मेरिट सूची में शामिल नहीं होगा, उन्हें आगामी मेरिट लिस्ट का इंतजार करना होगा। कॉलेजों और विभागों में बढ़ी तैयारियां पहली मेरिट लिस्ट की नई तारीख घोषित होने के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न पीजी विभागों और संबद्ध कॉलेजों में तैयारियां तेज हो गई हैं। छात्र-छात्राएं भी लगातार प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि सभी प्रक्रियाएं तय समय के अनुसार पूरी की जाएंगी। छात्रों से आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और पोर्टल पर जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी से बचते हुए विश्वविद्यालय के निर्देशों का पालन करें, ताकि नामांकन प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2026 का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। उम्मीदवार इसे आधिकारिक वेबसाइट jpsc.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा का आयोजन 14 जून 2026 को किया जाएगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थियों को अपने लॉगिन विवरण का उपयोग करना होगा। आयोग ने सभी उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर लें और उसमें दी गई जानकारी जैसे परीक्षा केंद्र, समय और निर्देश ध्यान से जांच लें। बिना एडमिट कार्ड के किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रांची। झारखंड में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA) नया ‘जियाडा रेगुलेशन 2026’ लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसी दिशा में रांची के रेडिसन ब्लू होटल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें उद्योग संगठनों और उद्यमियों से सुझाव लिए गए। जियाडा के प्रबंध निदेशक Varun Ranjan ने उद्यमियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाना और निवेशकों की समस्याओं का समाधान करना है। 99 साल की लीज बहाल करने की उठी मांग बैठक में उद्योग संगठनों ने कई अहम सुझाव दिए। उद्यमियों का कहना था कि पहले औद्योगिक भूखंड 99 वर्षों की लीज पर दिए जाते थे, जिसे घटाकर 30 वर्ष कर दिया गया है। उन्होंने मांग की कि बिहार समेत अन्य राज्यों की तरह झारखंड में भी 99 साल की लीज व्यवस्था दोबारा लागू की जाए। इसके अलावा निवेशकों ने ‘प्लग एंड प्ले’ औद्योगिक परिसरों की मांग की, जहां विकसित भूमि, तैयार शेड, बिजली, पानी, सड़क और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों। स्वामित्व हस्तांतरण को आसान बनाने के लिए संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) के प्रावधान और औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए 10 प्रतिशत आवासीय सुविधा की भी मांग उठी। आदिवासी उद्यमियों की अनदेखी का आरोप जहां एक ओर उद्योग जगत नए रेगुलेशन को लेकर सुझाव दे रहा है, वहीं दूसरी ओर Tribal Indian Chamber of Commerce and Industry (TICC&I) ने बैठक में आमंत्रित नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। संगठन ने सरकार पर आदिवासी उद्यमियों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बैद्यनाथ मंडी ने कहा कि वर्ष 2019 में एसटी-एससी उद्यमियों को 50 प्रतिशत रियायत पर औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आज तक उसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड गठन के 25 वर्ष बाद भी आदिवासी समुदाय के लिए स्पष्ट उद्योग एवं व्यापार नीति नहीं बन पाई है। नए नियमों पर टिकी उद्योग जगत की नजर ‘जियाडा रेगुलेशन 2026’ को उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उद्योग जगत के साथ-साथ आदिवासी उद्यमी भी चाहते हैं कि नई नीति में सभी वर्गों की भागीदारी और हितों का संतुलित ध्यान रखा जाए, ताकि राज्य में समावेशी औद्योगिक विकास का रास्ता मजबूत हो सके।
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (Re-Evaluation) और सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्लेटफॉर्म पर शुरू कर दी है। बोर्ड का दावा है कि यह नया डिजिटल सिस्टम पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी है। इस प्लेटफॉर्म को विकसित करने में IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया है। 1.60 लाख से अधिक छात्रों ने किया आवेदन सीबीएसई के अनुसार, 2 जून से 7 जून के बीच 1.60 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है। छात्रों ने कुल 3.8 लाख से ज्यादा उत्तरों की दोबारा जांच की मांग की है। इससे पहले मई में चार लाख से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मांगी थीं। परीक्षकों को नहीं दिख रहे पुराने अंक नए OSM प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पुनर्मूल्यांकन करने वाले परीक्षकों को पहले दिए गए अंक दिखाई नहीं देते। उन्हें केवल वही उत्तर दिखते हैं जिन पर छात्र ने आपत्ति दर्ज की है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहती है। कई मामलों में एक ही उत्तर की जांच एक से अधिक विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है ताकि परिणाम अधिक सटीक हो सकें। कुछ छात्रों ने उठाए सवाल हालांकि नई प्रणाली के बीच कुछ छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें अभी तक अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त नहीं हुई हैं। कुछ विद्यार्थियों का कहना है कि कॉपियां देर से मिलने के कारण वे समय पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आपत्ति दर्ज नहीं कर सके। सोशल मीडिया पर भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन बोर्ड ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जुलाई में जारी हो सकता है संशोधित परिणाम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित परिणाम जुलाई 2026 में जारी किए जा सकते हैं। हालांकि सीबीएसई ने अभी तक इसकी आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की है। बोर्ड का मानना है कि नया OSM प्लेटफॉर्म मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाते हुए छात्रों को निष्पक्ष परिणाम उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रांची। झारखंड के स्कूली फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची ने 65वीं सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता 2026-27 के आयोजन की समय-सारिणी जारी कर दी है। राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रतियोगिता का आयोजन विद्यालय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। खिलाड़ियों को मिलेगा अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच शिक्षा विभाग के अनुसार इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में खेल भावना का विकास करना और उनकी प्रतिभा को राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। परिषद ने निर्देश दिया है कि सभी प्रतियोगिताएं निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित की जाएं। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इन विद्यालयों के विद्यार्थी ले सकेंगे भाग प्रतियोगिता में राज्य के सभी सरकारी विद्यालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय, अल्पसंख्यक विद्यालय, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय, मॉडल विद्यालय, उत्कृष्ट विद्यालय, प्रखंड स्तरीय आदर्श विद्यालय और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भाग ले सकेंगे। प्रतियोगिता बालक और बालिका दोनों वर्गों में आयोजित की जाएगी। बालिका वर्ग में अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणी के मुकाबले होंगे, जबकि बालक वर्ग में अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणियों के मैच खेले जाएंगे। यह है प्रतियोगिता का पूरा कार्यक्रम प्रतियोगिता की शुरुआत विद्यालय स्तर से होगी, जो 16 जून से 20 जून 2026 तक आयोजित की जाएगी। इसके बाद प्रखंड स्तरीय मुकाबले 23 से 30 जून, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 1 से 5 जुलाई और प्रमंडल स्तरीय प्रतियोगिता 8 से 12 जुलाई तक होगी। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 17 से 21 जुलाई तक आयोजित की जाएगी। चयनित खिलाड़ियों के लिए 25 जुलाई से 14 अगस्त तक राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शिविर लगाया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता 18 अगस्त से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित होगी। खेल प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच शिक्षा विभाग का मानना है कि सुब्रतो कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से राज्य के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर मिलेगा। यह प्रतियोगिता झारखंड के फुटबॉल खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रांची। झारखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम का रुख बदलने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य के कई क्षेत्रों में मेघ गर्जन, वज्रपात, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ ही झारखंड में भी प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने लगी हैं, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार मौसम विभाग के अनुसार, 6 जून को राज्य के कई हिस्सों में बादल गरजने, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि व्यापक बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा हो सकती है। राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 7 से 9 जून तक जारी रहेगा मौसम का असर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 जून को झारखंड के दक्षिणी और मध्य भागों में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ गर्जन और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। 8 जून को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं 9 जून को भी दक्षिणी और मध्य झारखंड में मेघ गर्जन और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। इस दौरान तेज हवाएं लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। 10 जून से प्री-मानसून बारिश के संकेत मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 10 जून से राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आने और मौसम सुहावना होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान भी राज्य के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा पाकुड़ जिले में 80 मिमी रिकॉर्ड की गई, जिससे मानसून की दस्तक के संकेत और मजबूत हुए हैं।
नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का खड़गपुर से रिश्ता सिर्फ नौकरी या क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रिश्ता इंसानियत, अपनापन और वफादारी की मिसाल भी बन गया। ‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धोनी ने अपने प्रोफेशनल जीवन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में की थी। इसी दौरान स्टेशन के पास मौजूद थॉमस टी स्टॉल उनकी पसंदीदा जगह बन गई थी। घंटों चाय की दुकान पर बैठते थे धोनी थॉमस के परिवार के मुताबिक, नौकरी और रेलवे क्रिकेट के बीच धोनी अक्सर अपने दोस्तों के साथ इस दुकान पर घंटों बैठते, चाय पीते और बातचीत करते थे। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यही शांत और साधारण युवक आगे चलकर विश्व क्रिकेट का सबसे सफल कप्तान बनेगा। कामयाबी के बाद भी नहीं भूले पुराने रिश्ते समय बीतने के साथ धोनी ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर भारतीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया। 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी खड़गपुर से उनका जुड़ाव कायम रहा। थॉमस की मुश्किल घड़ी में बने सहारा जब थॉमस को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक आया और वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे, तब धोनी ने अपने करीबी दोस्त रॉबिन के जरिए लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। परिवार का दावा है कि इलाज में भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई। इतना ही नहीं, जब थॉमस की चाय दुकान पर तोड़फोड़ का खतरा मंडराया, तब भी धोनी ने रेलवे अधिकारियों से बात कर दुकान को बचाने में मदद की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।