झारखंड

झारखंड पात्रता परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, 14 जून को होगा एग्जाम

anjali kumari जून 11, 2026 0
JET admit card
JET admit card

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2026 का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। उम्मीदवार इसे आधिकारिक वेबसाइट jpsc.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा का आयोजन 14 जून 2026 को किया जाएगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थियों को अपने लॉगिन विवरण का उपयोग करना होगा। आयोग ने सभी उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर लें और उसमें दी गई जानकारी जैसे परीक्षा केंद्र, समय और निर्देश ध्यान से जांच लें। बिना एडमिट कार्ड के किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

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District Football League 2026
1 जुलाई से होगा सरायकेला-खरसावां जिला फुटबॉल लीग 2026 का आगाज

सरायकेला-खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले के फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। जिला स्पोर्ट्स एसोसिएशन (DSA) की ओर से आयोजित जिला फुटबॉल लीग 2026 का शुभारंभ 1 जुलाई से होने जा रहा है। प्रतियोगिता का आयोजन बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला और अर्जुना स्टेडियम, खरसावां में किया जाएगा। लीग में जिले की 25 पुरुष और 6 महिला टीमें हिस्सा लेंगी, जिससे खेल प्रेमियों को रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।   बैठक में तय हुई प्रतियोगिता की रूपरेखा प्रतियोगिता के सफल आयोजन को लेकर अर्जुना स्टेडियम, खरसावां में जिला स्पोर्ट्स एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। वरीय उपाध्यक्ष उमेश कुमार सिंहदेव की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजीकृत 25 पुरुष टीमों को पांच समूहों में विभाजित किया गया। साथ ही मैचों के संचालन, रेफरी व्यवस्था और अन्य तैयारियों पर चर्चा की गई।   सरायकेला और खरसावां में बंटे मुकाबले लीग के तहत ग्रुप ए और ग्रुप बी की कुल 10 टीमें बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला में अपने मैच खेलेंगी। वहीं शेष 15 टीमों के मुकाबले अर्जुना स्टेडियम, खरसावां में आयोजित किए जाएंगे। इससे दोनों क्षेत्रों के फुटबॉल प्रेमियों को स्थानीय स्तर पर मैच देखने का अवसर मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंचबैठक में डीएसए सचिव मोहम्मद दिलदार समेत कई पदाधिकारी, रेफरी और विभिन्न क्लबों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आयोजकों का कहना है कि यह लीग जिले की युवा फुटबॉल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें प्रतिस्पर्धी मंच उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है।   फुटबॉल प्रेमियों में उत्साह प्रतियोगिता की घोषणा के बाद खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। जिले के कई प्रतिष्ठित क्लब इस लीग में भाग लेंगे, जिससे मुकाबले और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह टूर्नामेंट स्थानीय खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और बड़े स्तर तक पहुंचने का सुनहरा अवसर साबित होगा।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Giridih police

गिरिडीह में साइबर अपराधी को छुड़ाने के लिए पुलिस पर हमला, आरोपी फरार

Ranchi University PG admissions

रांची यूनिवर्सिटी का नया शेड्यूल जारी, PG नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

MGM Medical College

जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव मिली मंजूरी

travel time reduced
सिल्ली-ईलू ट्रैक से रांची से कोलकाता जाने में 1 घंटा कम लगेगा

रांची। सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध भूमि पर लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व रेलवे की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से रांची, टाटानगर तथा कोलकाता के बीच रेल यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। नहीं होगा इंजन का रिवर्सल अभी रांची से मुरी होकर कोलकाता और टाटा की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर इंजन रिवर्सल करना पड़ता है, जिसमें करीब 35 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा सिल्ली से मुरी तक पहुंचने में भी लगभग 10 मिनट लगते हैं। साथ ही मुरी से इलू पहुंचने में करीब 15 मिनट लगते हैं। नई बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को मुरी जंक्शन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का लगभग 1 घंटे का समय बचेगा। ट्रेनों का परिचालन भी अधिक तेज एवं सुविधाजनक होगा और मुरी स्टेशन का लोड भी घटेगा। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके मीणा ने बताया कि परियोजना का कार्य लगातार जारी है और मार्च 2028 के निर्धारित लक्ष्य से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 1.47 हेक्टेयर सरकारी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है और यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। वहीं 9.57 हेक्टेयर रैयती भूमि के अधिग्रहण के लिए जिला भूमि अधिग्रहण विभाग को भुगतान कर दिया गया है। रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सिल्ली स्टेशन पर बढ़ रहीं सुविघाए सिल्ली स्टेशन पर भी सुविधाएं बढ़ रहीं हैं। सिल्ली रेलवे स्टेशन का भी तेजी से विस्तारीकरण किया जा रहा है। स्टेशन पर परिचालन संबंधी कार्यों को बेहतर बनाने के लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन के चालू होने का सबसे बड़ा लाभ सिल्ली क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। अभी टाटानगर और कोलकाता मार्ग की ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को मुरी जाना पड़ता है। नई लाइन बनने के बाद उन्हें मुरी जाने की जरूरत नहीं होगी। रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि ईलू-सिल्ली बाईपास रेलवे लाइन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर रिवर्सल और अतिरिक्त परिचालन समय से बचाते हुए सीधा मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और इसके पूरा होने के बाद रेल संचालन अधिक सुगम एवं प्रभावी हो जाएगा। साथ ही यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। हटिया-ओरगा लाइन का निरीक्षण हटिया-ओरगा डबल रेललाइन परियोजना के अंतिम चरण में 12.5 किमी. लंबे कानारोवां-टाटी सेक्शन का महत्वपूर्ण निरीक्षण किया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने इसका गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रांची करुणा निधि सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Dark clouds and rainfall over Jharkhand as thunderstorms and heavy rain alerts are issued.

झारखंड में 11 जून से बदलेगा मौसम, कई जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट

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Jharkhand Weather: 11 जून से बदलेगा मौसम, कई जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट

रांची। झारखंड में भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में 11 जून से प्री-मानसून गतिविधियां तेज होंगी और कई जिलों में आंधी, वज्रपात तथा बारिश की संभावना है। राजधानी रांची में बुधवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। खूंटी में 11 मिमी और रांची व आसपास के इलाकों में लगभग 3 मिमी बारिश दर्ज की गई।   कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने 11 जून के लिए रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं, वज्रपात और बारिश की संभावना जताई गई है। रांची में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।   12 जून को कई इलाकों में भारी बारिश के आसार 12 जून को बोकारो, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और दुमका जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं रांची, खूंटी, हजारीबाग, कोडरमा, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में आंधी, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इन जिलों के लिए भी मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।   13 जून को भी जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार 13 जून को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। दुमका, जामताड़ा, देवघर, धनबाद, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है।   चार दिन बाद झारखंड में दस्तक देगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून अगले चार दिनों में संताल परगना क्षेत्र के रास्ते झारखंड में प्रवेश कर सकता है। इसके साथ ही राज्यभर में बारिश की गतिविधियां बढ़ने और तापमान में गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।

abhishek singh जून 11, 2026 0
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