रांची। झारखंड में 30 जून से चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं की कई महत्वपूर्ण शंकाओं का समाधान किया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए नया रंगीन फोटो देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, रिकॉर्ड को अद्यतन रखने और नए ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) पर नई तस्वीर प्राप्त करने के लिए हाल का पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो देने की सलाह दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार चुनाव आयोग के अनुसार, गणना प्रपत्र (Enumeration Form) में फिलहाल वही तस्वीर छपी है, जो पहले से आयोग के रिकॉर्ड में उपलब्ध है। कई मतदाताओं की तस्वीरें काफी पुरानी होने के कारण उन्हें नई फोटो देने का अनुरोध किया जा रहा है। यदि कोई मतदाता घर पर मौजूद नहीं है या नौकरी, पढ़ाई अथवा अन्य कारणों से राज्य से बाहर है, तो उसके परिवार का कोई सदस्य हाल की रंगीन फोटो चिपकाकर फॉर्म जमा कर सकता है। बीमार या किसी अन्य कारण से लाइव फोटो नहीं दे पाने वाले मतदाताओं के लिए भी यही सुविधा उपलब्ध रहेगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाताओं को दो क्यूआर-कोड आधारित गणना प्रपत्र दिए जा रहे हैं, जो प्रत्येक मतदाता के लिए अलग-अलग और पूर्व-भरे हुए हैं। ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति का फॉर्म इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यदि पहली प्रति भरते समय खराब हो जाए, तो दूसरी प्रति की फोटो कॉपी लेकर उसे पहली प्रति के रूप में दोबारा भरा जा सकता है। अगर दोनों प्रतियां गलती हो जाएं, तो मतदाता ईसीआईनेट (ECINet) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की जिन मतदाताओं को ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई हो, वे अपने बीएलओ की मदद से संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) से नई प्रति प्राप्त कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे फॉर्म भरते समय सावधानी बरतें और समय पर प्रक्रिया पूरी करें, ताकि मतदाता सूची अद्यतन करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
रांची। राजधानी रांची के कई इलाकों में शनिवार को निर्धारित विकास और रखरखाव कार्यों के चलते बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने जरूरी काम पहले ही पूरा कर लें, ताकि बिजली कटौती के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। विभाग के अनुसार, सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर परियोजना, विद्युत लाइनों के रखरखाव और पेड़ों की डालियों की छंटाई के कारण अलग-अलग समय पर विभिन्न क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। सिरमटोली फ्लाईओवर कार्य से कई इलाके प्रभावित सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर के लिए यूटिलिटी शिफ्टिंग कार्य के कारण सरकारी बस स्टैंड और पटेल चौक विद्युत उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। इस दौरान स्टेशन रोड, ओवरब्रिज क्षेत्र, सिरमटोली चौक, बहुबाजार चौक, बसरटोली, कठर टोली, गणपत नगर, धुमसा टोली और आसपास के इलाकों के उपभोक्ता प्रभावित होंगे। इन क्षेत्रों में भी रहेगी बिजली बाधित तेतरी फीडर क्षेत्र में पेड़ों की डालियों की छंटाई के कारण सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। इससे कोचभोग, तेतरी, खरसीदाग, लालखटंगा और आसपास के क्षेत्रों के लोग प्रभावित होंगे। वहीं, 11 केवी लटमा फीडर में आरडीएसएस योजना के तहत एलटी कन्वर्जन कार्य होने के कारण पटेल नगर क्षेत्र में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली नहीं रहेगी। इसके अलावा अशोकनगर विद्युत आपूर्ति अवर प्रमंडल के मेन रोड फीडर में पेड़ों की डालियों की छंटाई के चलते सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक न्यू एजी कोऑपरेटिव कॉलोनी, कडरू, डीएवी कपिलदेव मैदान और आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। समय पर बहाल होगी बिजली विद्युत विभाग ने बताया कि सभी कार्य शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं। निर्धारित कार्य पूरा होते ही संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य रूप से बहाल कर दी जाएगी। उपभोक्ताओं से सहयोग और आवश्यक तैयारियां पहले से कर लेने की अपील की गई है।
रांची। झारखंड के लोगों को जल्द ही डाक सेवाओं में बड़ी सुविधा मिलने वाली है। डाक विभाग राज्य के चार प्रमुख शहरों रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में नई प्रीमियम डाक डिलीवरी सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभाग ने डाक निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही इन शहरों में ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और समयबद्ध डिलीवरी सेवा उपलब्ध होगी। देश के छह महानगरों में मिल चुकी है सफलता डाक विभाग ने इस प्रीमियम सेवा की शुरुआत मार्च 2026 में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे छह महानगरों में की थी। विभाग के अनुसार, वहां इस सेवा को लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे झारखंड सहित अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है। रियल टाइम ट्रैकिंग और SMS अलर्ट की सुविधा नई प्रीमियम डाक सेवा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। इसके तहत ग्राहक पार्सल या महत्वपूर्ण दस्तावेज की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक हर चरण की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्हें एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल टाइम स्टेटस अपडेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे ग्राहक अपने पार्सल की मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर रख सकेंगे और डिलीवरी की सटीक जानकारी हासिल कर पाएंगे। समयबद्ध और सुरक्षित डिलीवरी पर रहेगा जोर डाक विभाग का कहना है कि इस नई सेवा का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों और जरूरी पार्सलों की तेज, सुरक्षित और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था से डाक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी, जिससे ग्राहकों का अनुभव भी बेहतर होगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में इस सेवा की शुरुआत कर दी जाएगी। इसके बाद इन शहरों के लोग आधुनिक तकनीक से लैस प्रीमियम डाक डिलीवरी सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
रांची। झारखंड ने वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2023-24 के फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में राज्य ने देश के शीर्ष तीन राज्यों में जगह बनाई है। झारखंड को ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में झारखंड के साथ ओडिशा और गोवा भी शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य के मजबूत वित्तीय अनुशासन, प्रभावी राजस्व प्रबंधन और संतुलित व्यय नीति का परिणाम मानी जा रही है। राजस्व संग्रह और खर्च प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, झारखंड ने अपने कुल राजस्व में कर से प्राप्त आय का हिस्सा 60 प्रतिशत से अधिक बनाए रखा है। इसके साथ ही राज्य ने गैर-कर राजस्व बढ़ाने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। बेहतर संसाधन जुटाने और खर्च पर नियंत्रण की नीति ने राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाया है। राज्य सरकार ने राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के निर्धारित तीन प्रतिशत की सीमा से नीचे बनाए रखा है। वहीं आधारभूत संरचना और दीर्घकालिक विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को जीएसडीपी के लगभग चार से पांच प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा गया, जिससे विकास परियोजनाओं को मजबूती मिली है। कर्ज प्रबंधन में भी झारखंड की स्थिति मजबूत फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में झारखंड का प्रदर्शन कर्ज प्रबंधन के मामले में भी संतुलित रहा है। राज्य का कुल कर्ज जीएसडीपी के 25 प्रतिशत से कम है और ब्याज भुगतान का बोझ भी नियंत्रित स्तर पर है। इससे राज्य की वित्तीय स्थिरता और जिम्मेदार आर्थिक प्रबंधन का संकेत मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नीति आयोग के फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में झारखंड का शीर्ष तीन राज्यों में शामिल होना राज्य की आर्थिक मजबूती का प्रमाण है। यह उपलब्धि निवेश, आधारभूत संरचना के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रांची। झारखंड की पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल 14,231 करोड़ रुपये की अनुदान राशि मिलेगी। यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान सामने आई। इस राशि में 11,385 करोड़ रुपये बेसिक ग्रांट और 2,846 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में दिए जाएंगे। कार्यशाला में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने झारखंड का पक्ष रखते हुए केंद्र सरकार से अनुदान राशि समय पर जारी करने और 15वें वित्त आयोग की बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। समय पर फंड मिलने से विकास योजनाओं को मिलेगी गति मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पंचायतों को समय पर अनुदान नहीं मिलने से ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से परफॉर्मेंस ग्रांट के वितरण में भी उदारता बरतने का आग्रह किया। उनके अनुसार, 16वें वित्त आयोग की यह राशि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को अधिक सक्षम बनाएगी तथा स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और जनसेवाओं में तेजी आएगी। राजस्व क्षमता बढ़ाने में सहयोग की जरूरत मंत्री ने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों में पंचायतों की अपनी राजस्व संग्रहण क्षमता अभी सीमित है। ऐसे में वित्त आयोग को केवल प्रदर्शन के आधार पर अनुदान तय करने के बजाय राज्यों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था मजबूत करने, राजस्व संग्रहण बढ़ाने और तकनीकी क्षमता विकसित करने के लिए अतिरिक्त सहयोग की मांग की। अनुदान के उपयोग को लेकर उठाए सवाल दीपिका पांडेय सिंह ने यह भी कहा कि पूर्व वित्त आयोगों की बची हुई राशि के उपयोग या उसे वापस करने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। इससे नई अनुदान राशि प्राप्त करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। कार्यशाला में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल तथा झारखंड पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी भी मौजूद रहीं।
रांची। झारखंड में लापता बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया है। राज्य के सभी 24 जिलों के थानों को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सीआईडी की पहल पर लागू की गई इस व्यवस्था के तहत अब झारखंड पुलिस देशभर के लापता और बरामद बच्चों के राष्ट्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ गई है। इससे बच्चों की पहचान, ट्रैकिंग और बरामदगी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होगी। सीसीटीएनएस ऑपरेटर करेंगे राष्ट्रीय रिकॉर्ड से मिलान नई व्यवस्था के तहत सभी थानों के सीसीटीएनएस ऑपरेटर किसी भी बरामद या अज्ञात बच्चे के हुलिए, फोटो और अन्य विवरण का मिलान मिशन वात्सल्य पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड से करेंगे। यह केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैक चाइल्ड’ जैसी प्रणालियों को एक साथ जोड़ता है। इससे अलग-अलग राज्यों की पुलिस और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में तेजी आएगी और बच्चों की जल्द पहचान संभव हो सकेगी। रांची विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद ठाकुर ने कहा रांची विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद ठाकुर ने कहा कि मिशन वात्सल्य पोर्टल झारखंड पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगा। उनके अनुसार, लापता बच्चों की तलाश में समय सबसे अहम होता है और यह पोर्टल विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाकर बच्चों की सुरक्षित बरामदगी की संभावना को मजबूत करेगा। साथ ही मानव तस्करी जैसी गंभीर घटनाओं पर भी प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच झारखंड में 3,025 बच्चे लापता हुए। इनमें से 2,788 बच्चों को बरामद कर लिया गया, जबकि 237 बच्चे अब भी लापता हैं। वर्ष 2025 में अकेले 717 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए। वहीं रांची में जनवरी से जून 2026 के बीच 42 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 34 को सुरक्षित बरामद किया जा चुका है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सीआईडी ने सभी थानों को पोर्टल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रांची। झारखंड के चार प्रमुख शहरों - रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो में जल्द ही डाक विभाग की प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा शुरू हो सकती है। इस संबंध में विभाग ने डाक निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन शहरों के लोगों को पार्सल और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तेज, सुरक्षित और समयबद्ध डिलिवरी की सुविधा उपलब्ध होगी। नई सेवा का उद्देश्य डाक वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाना है। देश के छह शहरों में सफल रहा प्रयोग डाक विभाग ने मार्च 2026 में इस प्रीमियम सेवा की शुरुआत देश के छह बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में की थी। विभाग के अनुसार, इन शहरों में सेवा को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और डिलिवरी की गुणवत्ता तथा समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे दूसरे राज्यों के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है। आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। इसके तहत ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल-टाइम स्टेटस अपडेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे ग्राहक अपने पार्सल या महत्वपूर्ण दस्तावेज की बुकिंग से लेकर अंतिम डिलिवरी तक हर चरण की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। पारदर्शी ट्रैकिंग व्यवस्था से डिलिवरी प्रक्रिया पर भरोसा भी बढ़ेगा। मंजूरी के बाद शुरू होगी सेवा डाक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सेवा के लागू होने से झारखंड के इन चार शहरों में डाक वितरण पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। विशेष रूप से जरूरी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण पार्सलों की समय पर डिलिवरी सुनिश्चित करने में यह सेवा अहम भूमिका निभाएगी। विभाग को उम्मीद है कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो के लोग इस आधुनिक प्रीमियम डाक सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी में पिछले कुछ वर्षों से लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार को प्रशासन ने बंद कर दिया है। बाजार के कारण सुबह और शाम के समय इलाके में लगातार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी, जिससे आम लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने अचानक हाट बाजार पर रोक लगा दी। जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन के इस फैसले के विरोध में शनिवार को सैकड़ों सब्जी विक्रेता सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित दुकानदारों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाजार को दोबारा शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि हाट बंद होने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। क्या कह रहे दुकानदार? विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मोरहाबादी इलाके में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे दुकानदारों को शांत कराने का प्रयास किया और उन्हें वैकल्पिक स्थान पर दुकान लगाने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक बाजार दोबारा शुरू करने पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन और दुकानदारों के बीच समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
रांची। झारखंड में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई है। अगले चार दिनों में बारिश की उम्मीद भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले चार दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 7 जुलाई तक कई इलाकों में बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है। इससे बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। खेती पर दिखने लगा असर बारिश की कमी के कारण धान समेत खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, प्रशासन किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने और मौसम के अनुसार खेती से जुड़े निर्णय लेने की सलाह दे रहा है। रांची समेत कई जिलों को मिल सकती है राहत मौसम विभाग के अनुसार रांची, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, धनबाद और आसपास के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस भरी गर्मी से भी लोगों को राहत मिलने की संभावना है।
रांची। झारखंड में नकली विदेशी शराब बनाने के मामले में पूर्व राजद (RJD) एमएलसी सुबोध राय की गिरफ्तारी के बाद बिहार और झारखंड की पुलिस सक्रिय हो गई है। रांची के ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में झारखंड पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त छापेमारी के दौरान कथित तौर पर चल रही नकली शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब, नकली लेबल और अन्य सामग्री बरामद की गई। मामले में सुबोध राय के अलावा उनके निजी चालक देवेंद्र भगत और कर्मचारी रविकांत को भी गिरफ्तार किया गया है। लालू यादव से रहा है पुराना राजनीतिक संबंध सुबोध राय बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। वह वर्ष 2016 से 2022 तक वैशाली से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) रहे। उनका आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से लंबे समय से राजनीतिक जुड़ाव रहा है। हालांकि, 2022 के विधान परिषद चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनकी गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। नामी ब्रांड के नकली लेबल लगाकर बेची जाती थी शराब प्रारंभिक जांच के अनुसार फैक्ट्री में कम गुणवत्ता वाली शराब तैयार कर उस पर विदेशी ब्रांडों के नकली लेबल लगाए जाते थे। शराब की बोतलों पर "For Sale Only in UP" अंकित किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस शराब की आपूर्ति उत्तर प्रदेश के अलावा शराबबंदी वाले बिहार सहित अन्य राज्यों में भी की जाती थी। इससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई, अब बिहार पुलिस भी जांच में जुटी रांची पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में भी इसी फैक्ट्री पर छापेमारी कर अवैध शराब बरामद की गई थी और फैक्ट्री को नोटिस जारी कर बंद कराया गया था। हालांकि, बाद में यहां फिर से शराब का उत्पादन शुरू हो गया। इधर, वैशाली के पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा ने बताया कि बिहार में इस मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस फैक्ट्री से बिहार के किन-किन जिलों में अवैध शराब की आपूर्ति की जाती थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पैतृक संपत्ति के विवाद ने रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना को जन्म दिया। पुंदाग ओपी थाना क्षेत्र में बड़े भाई पर अपने छोटे भाई और उसकी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने की कोशिश करने का आरोप लगा है। घटना बुधवार देर रात इमामबाड़ा के पास की बताई जा रही है। घायल दंपति की पहचान सलीम अंसारी और उनकी पत्नी इशरत जहां के रूप में हुई है। दोनों गंभीर रूप से झुलस गए हैं और रांची के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज जारी है। खिड़की से पेट्रोल छिड़ककर लगाई आग पुलिस के अनुसार, देर रात सलीम अंसारी अपनी पत्नी के साथ कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान उनके बड़े भाई लतीफ अंसारी कथित तौर पर खिड़की के पास पहुंचे और कमरे के भीतर पेट्रोल छिड़कने के बाद आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा कमरा आग की लपटों से घिर गया। आग की तपिश से दोनों की नींद खुली और उन्होंने किसी तरह कमरे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन तब तक वे गंभीर रूप से झुलस चुके थे। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जमीन विवाद बना हमले की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में आरोपी ने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। घायलों के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी लतीफ अंसारी के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सीसीटीवी और फोरेंसिक जांच में जुटी पुलिस पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि वारदात के दौरान की गतिविधियों और किसी अन्य संभावित आरोपी की भूमिका का पता लगाया जा सके। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से अहम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर संपत्ति विवाद को लेकर बढ़ती हिंसा और पारिवारिक रिश्तों में दरार को उजागर कर दिया है।
रांची। झारखंड में ई-कल्याण पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि जारी होने में लगातार हो रही देरी से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सत्र 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के लिए आवेदन करने वाले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को अब तक छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं मिला है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के सामने कॉलेज फीस, हॉस्टल शुल्क, किराया और अन्य शैक्षणिक खर्चों का संकट खड़ा हो गया है। कई छात्र पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिली है, जिससे विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। फीस जमा करने और पढ़ाई जारी रखने में हो रही परेशानी रांची सहित राज्य के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि ई-कल्याण छात्रवृत्ति उनके लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण सहारा है। समय पर राशि नहीं मिलने के कारण कई छात्रों को फीस जमा करने, हॉस्टल का किराया चुकाने और अन्य खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। छात्र संगठनों ने कई बार संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपा और सोशल मीडिया के माध्यम से भी सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ओबीसी छात्रों पर सबसे ज्यादा असर, बजट पर भी उठे सवाल जानकारी के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है। छात्रों का आरोप है कि फंड जारी होने में देरी और विभागीय स्तर पर लापरवाही के कारण भुगतान अटका हुआ है। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में छात्रवृत्ति मद के लिए करीब 39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि यह राशि वास्तविक जरूरत की तुलना में काफी कम है। सरकार से जल्द समाधान की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता तुषार दुबे ने कहा कि सरकार अन्य योजनाओं का भुगतान समय पर कर रही है, लेकिन विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबित है। वहीं शोधार्थी चंदन कुमार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की। इस पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि कुछ जिलों के लिए राशि जारी कर दी गई है और पूरे मामले की समीक्षा कर जल्द स्थिति स्पष्ट की जाएगी। छात्र अब सरकार से लंबित छात्रवृत्ति राशि जल्द जारी करने और ई-कल्याण पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग कर रहे हैं।
रांची। रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) जमीन घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद कुमार महतो को पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड और मुख्य साजिशकर्ता बताया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी अधिग्रहित जमीन की अवैध खरीद-बिक्री में उसकी अहम भूमिका रही है। गवाह के बयान से मजबूत हुई जांच एसीबी ने जांच के दौरान सोनमैती देवी का बयान दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि प्रमोद कुमार महतो उन प्रॉपर्टी डीलरों में शामिल था, जिन्होंने उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में अंगूठे का निशान लगाने के लिए बुलाया था। सोनमैती देवी के अनुसार, जमीन का एक हिस्सा उनके नाम पर था। जांच में एसीबी को यह भी पता चला है कि रिम्स के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन की बिक्री की पूरी प्रक्रिया में प्रमोद महतो ने उनकी सक्रिय रूप से मदद की थी। फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेची गई जमीन जांच एजेंसी के अनुसार, जमीन की बिक्री को वैध दिखाने के लिए फर्जी वंशावली तैयार की गई और वार्ड पार्षद के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर दस्तावेज बनाए गए। एसीबी का मानना है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया ताकि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचा जा सके। धोखाधड़ी का पुराना मामला भी आया सामने जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पटना निवासी कामिनी रंजन के नाम 17.35 डिसमिल जमीन की बिक्री के लिए करीब 45.72 लाख रुपये का सेल डीड तैयार किया गया था, लेकिन उन्हें कभी जमीन का कब्जा नहीं मिला। इसके बाद वर्ष 2020 में कामिनी रंजन ने पटना की अदालत में प्रमोद कुमार महतो के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि पैसा लौटाने के लिए दिया गया चेक भी बाउंस हो गया था। एसीबी ने प्रमोद कुमार महतो को पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किया है, लेकिन वह अब तक एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। इससे जांच एजेंसी का संदेह और गहरा गया है। वहीं, इस मामले में पहले ही एक बिल्डर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। ताजा मामला बरियातू थाना क्षेत्र का है, जहां थाना परिसर के पीछे दिनदहाड़े एक महिला से बाइक सवार बदमाशों ने सोने की चेन झपट ली और फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। सब्जी खरीदकर घर लौट रही थीं महिला जानकारी के अनुसार, घटना अर्पण विला, विद्यापति मार्ग स्थित तेतर टोली गेट के पास की है। पीड़ित महिला सब्जी खरीदकर अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान अपाचे बाइक पर सवार दो बदमाश उनके पास पहुंचे। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। मौका मिलते ही एक बदमाश ने महिला के गले से सोने की चेन झपट ली और दोनों तेज रफ्तार से फरार हो गए। अचानक हुई इस वारदात से महिला घबरा गईं और शोर मचाया, लेकिन तब तक आरोपी आंखों से ओझल हो चुके थे। थाना के पास वारदात से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल घटना बरियातू थाना के बेहद करीब होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराजगी और भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब थाना के आसपास ही अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं, तो शहर के अन्य इलाकों में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाकर जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस से जल्द कार्रवाई कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। लगातार बढ़ रही छिनतई की घटनाओं ने खासकर महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।
रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई पूरी सुरक्षा व्यवस्था वापस लौटा दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में कटौती से जुड़े एक पत्र के बाद मंत्री ने नाराजगी जताते हुए यह फैसला लिया। पिछले पांच दिनों से वह बिना सुरक्षा कर्मियों के ही सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में भी वह बिना सुरक्षा के पहुंचे। हालांकि, वह अभी भी मंत्री के तौर पर आवंटित सरकारी वाहन का उपयोग कर रहे हैं। सुरक्षा वाहन कम करने के पत्र से बढ़ी नाराजगी जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने वित्त विभाग को पत्र भेजकर मंत्री की सुरक्षा में तैनात एक वाहन वापस लेने का निर्देश दिया था। अब तक उनकी सुरक्षा में चार वाहन और 16 सुरक्षा कर्मी तैनात थे। यह पत्र वित्त विभाग के संयुक्त सचिव के माध्यम से वित्त मंत्री तक पहुंचा। पत्र मिलने के बाद मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही लौटाने का निर्णय लिया। 'तीन गाड़ियों में 16 जवानों की तैनाती व्यावहारिक नहीं' सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री का मानना था कि यदि एक वाहन वापस ले लिया जाता है तो 16 सुरक्षा कर्मियों को केवल तीन वाहनों में समायोजित करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने सुरक्षा में तैनात सभी कर्मियों और सुरक्षा वाहनों को वापस भेज दिया। फिलहाल वह बिना सरकारी सुरक्षा के ही अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, मंत्री के इस फैसले को लेकर विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं।
रांची। रांची सदर अस्पताल में दवा आपूर्ति से जुड़े टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जिस एजेंसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति में विफल रहने के कारण कई बार नोटिस और शोकॉज जारी किया गया, उसी एजेंसी को बाद में “संतोषजनक कार्य एवं आचरण” का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उसे दूसरी दवा की आपूर्ति का नया टेंडर भी मिल गया। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, वीके ड्रग्स एंड कंपनी को ई-टेंडर के माध्यम से एंटी रैबीज वैक्सीन की हजारों वायल की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय में कंपनी ने कुल मांग का केवल लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 3200 वायल ही उपलब्ध कराए। वैक्सीन की कमी का सीधा असर डॉग बाइट के मरीजों पर पड़ा और अस्पताल प्रबंधन को दूसरी कंपनी से वैक्सीन खरीदकर मरीजों का इलाज कराना पड़ा। आपूर्ति में देरी को लेकर एजेंसी ने दिया नोटिस आपूर्ति में देरी को लेकर 16 मार्च और 25 अप्रैल 2026 को एजेंसी को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद 12 मई को सिविल सर्जन ने शोकॉज नोटिस जारी कर पूछा कि निविदा शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज 17 दिन बाद, 29 मई को उसी एजेंसी को कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जिसमें उसके काम और आचरण को संतोषजनक बताया गया। मामले में स्टोर इंचार्ज अनिल कुमार ने कहा कि उन्होंने उपाधीक्षक के निर्देश पर फाइल आगे बढ़ाई थी, जबकि उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह ने इससे अनभिज्ञता जताते हुए किसी भी भूमिका से इनकार किया। दूसरी ओर, सिविल सर्जन ने सफाई दी कि अनुभव प्रमाण पत्र एजेंसी के पुराने कार्य रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया गया, क्योंकि पहले उसने नियमित रूप से दवाओं की आपूर्ति की थी। एजेंसी ने आपूर्ति में देरी के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर अमेरिका-ईरान तनाव, परिवहन और पैकेजिंग लागत बढ़ने को जिम्मेदार बताया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। राज्य को एक साथ 11 नए जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही झारखंड में जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इससे पहले सोहराई-खोवर पेंटिंग राज्य का पहला जीआई टैग प्राप्त उत्पाद था। यह उपलब्धि झारखंड के पारंपरिक शिल्प, हस्तकला और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। झारक्राफ्ट ने राज्य के कई पारंपरिक उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नए जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में झारखंड तसर सिल्क साड़ियां एवं फैब्रिक, आदिवासी आभूषण, बांस की कलाकृतियां, डोकरा क्राफ्ट, कुचाई सिल्क साड़ियां और फैब्रिक, भागैया साड़ियां एवं फैब्रिक, दुमका चादर, बडोनी कठपुतलियां, पांची परहन पांची साड़ियां एवं फैब्रिक, केसरिया कलाकंद, बेनाम शिल्प और जादुपटिया पेंटिंग शामिल हैं। और कौन कौन से नाम हैं शामिल? झारखंड का तसर सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक, उत्कृष्ट बनावट और पारंपरिक बुनाई के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। वहीं, आदिवासी आभूषण राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और हस्तकला का अनूठा उदाहरण हैं। बांस की कलाकृतियां स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को दर्शाती हैं, जिनकी मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। इस कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए, झारक्राफ्ट राज्य के कई अन्य अनोखे उत्पादों के लिए जीआइ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी रखकर झारखंड के जीआई इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है।मंदार, पैतकर पेंटिंग, निमुचा (करनी) शॉल, देवघर पेड़ा, कुसुमी लाख, लाख की चूड़ियां, साल के बीज, महुआ के फूल, करंज के बीज, रागी, रुगड़ा और धुस्का जैसे उत्पादों के आवेदन फिलहाल जीआई रजिस्ट्री के पास जांच के लिए हैं।बता दे इन उत्पादों को भी जीआई टैग मिलने से झारखंड के हस्तशिल्प, कृषि और खाद्य उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्टता का प्रमाण होता है। यह एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो उत्पाद के नाम और पहचान की कानूनी सुरक्षा करता है। इससे न केवल उत्पादों की मौलिकता सुरक्षित रहती है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी मांग और मूल्य भी बढ़ता है। साथ ही उन कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक समुदायों को आर्थिक लाभ मिलता है, जिन्होंने पीढ़ियों से इन कलाओं और शिल्प परंपराओं को जीवित रखा है। कैसे मिलता है जीआई टैग? किसी उत्पाद के लिए GI TAG प्राप्त केने के लिए सबसे पहले तो आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करना होता है। जीआई टैग के लिए कोई भी व्यक्तिगत निर्माता, संगठन इसके लिए भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले Controller General of Patents, Designs and Trade Marks (CGPDTM) में आवेदन कर सकता है। साक्ष्यों के आधार पर CGPDTM उस उत्पाद के उचित मानकों का परीक्षण करती है। जैसे ही यह उत्पाद मानकों पर खरा उतरता है इसे GI टैग दिया जाता है।
रांची। झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और भविष्य की दिशा तय करने के उद्देश्य से 4 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। इसकी जानकारी राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने गुरुवार को रांची स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन झारखंड की भाषाई विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल होगी। पहली बार एक मंच पर आएंगे नौ भाषा समुदाय बंधु तिर्की ने बताया कि झारखंड राज्य गठन के बाद पहली बार नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के प्रतिनिधि एक साझा मंच पर एकत्र होंगे। इनमें संथाली, मुंडारी, हो, कुरुख, खड़िया, नागपुरी, पंचपरगानिया, खोरठा सहित अन्य भाषा समुदाय शामिल होंगे। उनका कहना था कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी इन भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित कार्य नहीं हो पाया है, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषाओं से दूर होती जा रही है। 2,500 प्रतिभागी करेंगे मंथन पूर्व मंत्री के अनुसार, इस कॉन्क्लेव में करीब 2,500 छात्र-छात्राएं, शोधार्थी, प्रोफेसर, भाषाविद, शिक्षाविद और विभिन्न भाषा समुदायों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, शिक्षा में उनके उपयोग, शोध की संभावनाओं तथा भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा होगी। साथ ही भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए सुझाव भी सामने आएंगे। भाषाई विरासत को सहेजने की पहल बंधु तिर्की ने विश्वास जताया कि यह राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि मातृभाषाओं का संरक्षण केवल सांस्कृतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है। उनका मानना है कि इस आयोजन से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस नीति निर्माण तथा भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत स्वयं एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र भरकर राज्यवासियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से समय पर एसआईआर प्रपत्र भरने और मतदाता सूची में दर्ज अपनी जानकारी का सत्यापन कराने की अपील की। इस अवसर पर उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपना एसआईआर फॉर्म भरकर अभियान में भागीदारी निभाई। हर पात्र मतदाता निभाए अपनी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है और शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित मतदाता सूची स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं सत्यापन कराने के साथ अपने परिवार, पड़ोस और समाज के अन्य पात्र मतदाताओं को भी एसआईआर अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। घर-घर पहुंच रहे हैं बीएलओ कार्यक्रम के दौरान 64-हटिया विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-290 की बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने अपना प्रपत्र भरा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत राज्यभर में बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। निर्वाचन अधिकारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम में रांची के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ)-सह-अपर समाहर्ता धनंजय, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन तथा बीएलओ वेरोनिका देवी सहित निर्वाचन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना है, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।
रांची। रांची के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कांके रोड से चिरौंदी को जोड़ने वाली नई सड़क परियोजना को योजना प्राधिकार समिति की मंजूरी मिल गई है। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस परियोजना को स्वीकृति दी गई। अब प्रशासनिक मंजूरी के लिए प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। इनर रिंग रोड का अहम हिस्सा होगी नई सड़क प्रस्तावित सड़क करीब 2.97 किलोमीटर लंबी होगी और रांची के इनर रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी। यह सड़क कांके रोड के झिरगाटोली क्षेत्र को सीधे चिरौंदी से जोड़ेगी। इसके बनने से पंडरा से बड़गाईं (बरियातू) तक इनर रिंग रोड का संपर्क और मजबूत होगा। वर्तमान में पंडरा से कांके रोड तक पहले चरण और चिरौंदी से लेम होते हुए बड़गाईं तक तीसरे चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि, कांके रोड से चिरौंदी तक का दूसरा चरण लंबित था। अब इस हिस्से को भी मंजूरी मिलने से पूरी परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा सीधा और आसान संपर्क नई सड़क बनने के बाद चिरौंदी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को कांके रोड पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। अभी लोगों को बोड़ेया, ब्लॉक चौक या मोरहाबादी मैदान होकर कांके रोड जाना पड़ता है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ जाते हैं। नई सड़क शुरू होने से यात्रा आसान होगी, ट्रैफिक दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। दूसरी सड़क परियोजना को भी मिली मंजूरी योजना प्राधिकार समिति ने बैठक में बरलंगा से गोला-मुरी तक 4.83 किलोमीटर सड़क निर्माण परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से रांची और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनेगी और शहरी बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।
रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 2 और 3 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से राज्य के कई जिलों में तेज हवा, वज्रपात और भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई को लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, राज्य के अन्य जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 3 और 4 जुलाई को भी अधिकांश क्षेत्रों में मौसम का यही रुख बना रहेगा। इसके अलावा 5 जुलाई को रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 6 जुलाई को भी रांची समेत कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। तापमान में उतार-चढ़ाव, कई जगह हुई अच्छी बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान रांची के अधिकतम तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि मेदिनीनगर के तापमान में 1.2 डिग्री की गिरावट आई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार को रामगढ़ में 60.5 मिमी, कोडरमा में 20 मिमी, जमशेदपुर में 4 मिमी और बहरागोड़ा में सर्वाधिक 84.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। हालांकि, 1 जून से 1 जुलाई तक राज्य में सामान्य 197.8 मिमी के मुकाबले केवल 99.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। रांची में अब भी 13 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जबकि गढ़वा और साहिबगंज में सबसे कम बारिश होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।