Jharkhand CM

CM Hemant and kalpana Jonha Falls
पत्नी व विधायक कल्पना सोरेन संग जोन्हा फॉल पहुंचे सीएम हेमंत सोरेन

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को रांची से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जोन्हा फॉल पहुंचे। इस दौरान उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहीं। हरी-भरी वादियों, घने जंगलों और कल-कल बहती जलधारा के बीच मुख्यमंत्री ने कुछ समय प्रकृति की गोद में बिताया। उन्होंने जोन्हा फॉल की मनमोहक सुंदरता का आनंद लिया, स्थानीय फलों का स्वाद चखा और वहां मौजूद लोगों से आत्मीयता से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रकृति से जुड़ाव और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।   'झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार' जोन्हा फॉल की प्राकृतिक छटा की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां की हरियाली, झरने तथा शांत वातावरण पूरे देश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि जोन्हा फॉल की निर्मल जलधारा और प्राकृतिक सौंदर्य यह एहसास कराता है कि झारखंड वास्तव में प्रकृति का अनुपम उपहार है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि राज्य की प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनका आनंद ले सकें।   पर्यटकों का स्वागत, मानसून में और बढ़ी जोन्हा फॉल की रौनक मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का हर कोना अपनी अलग प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है और राज्य आने वाले सभी पर्यटकों का खुले दिल से स्वागत करता है। उन्होंने लोगों से झारखंड के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने की अपील भी की। रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित जोन्हा फॉल, जिसे गौतमधारा के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। करीब 140 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है। मानसून के मौसम में इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जिससे यह झारखंड पर्यटन की प्रमुख पहचान बन जाता है।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Rural Development Schemes
झारखंड में अब दीदी कैफ़े की मचेगी धूम

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में ग्रामीण विकास विभाग की कार्य प्रगति की समीक्षा की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों और 2026-27 की कार्य योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाकर विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पंचायतें राज्य के सर्वांगीण विकास की पहली कड़ी हैं, इसलिए योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह  भी मौजूद रहीं।   ग्रामीण आवास योजनाओं में तेजी लाने का निर्देश मुख्यमंत्री ने अबुआ आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवास योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में जो परिवार आवासविहीन हैं या जर्जर मिट्टी के घरों में रह रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर योजनाओं का लाभ दिया जाए।   महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष जोर मुख्यमंत्री ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) को महिला स्वयं सहायता समूहों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार चाहती है कि महिलाएं खेती के साथ-साथ सोलर पावर उत्पादन, हनी उत्पादन और अन्य रोजगारोन्मुख गतिविधियों में भी आगे आएं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 5 हजार नए सखी मंडलों के गठन की प्रक्रिया चल रही है, जिससे करीब 60 हजार परिवारों को जोड़ा जाएगा। साथ ही सखी मंडलों के लिए बैंकों से 5 हजार करोड़ रुपये ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।   पलाश मार्ट और बाजार विस्तार पर फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों और दूसरे राज्यों में भी पलाश मार्ट जैसे बिक्री केंद्र खोलने की योजना पर काम तेज करने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि रांची के कांके रोड स्थित नए पलाश मार्ट भवन का निर्माण अंतिम चरण में है और इस वर्ष छह नए पलाश मार्ट शुरू करने का लक्ष्य है।   जल संचय और सिंचाई योजनाओं को मिलेगी गति बैठक में जल संचय और लिफ्ट इरिगेशन योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसके बिना सिंचाई योजनाएं सफल नहीं हो सकतीं। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर वाटर मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश दिए।   बिरसा हरित ग्राम योजना से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। उन्होंने किसानों को बागवानी के लिए प्रेरित करने और जिलावार डाटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

Unknown मई 28, 2026 0
Hemant soren
CM हेमंत का निर्देश- किसानों को पानी की न हो दिक्कत

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य में बहने वाली नदियों के जल को यहीं संरक्षित करना चाहिए, जिससे सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो। जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक करते हुए उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों को खेती में पानी की समस्या नहीं होनी चाहिए। अधिकारी इस दृष्टिकोण से काम करें। कहा, कृषि कार्य में सिंचाई जल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखें, इसमें कोई कोताही नहीं हो। खेतों तक पहुंचाये पानी मुख्यमंत्री ने खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए समर्पित और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। पाइपलाइन आधारित सिंचाई योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसके कार्यों में तेजी लाने को कहा। कहा कि इससे पेयजल आपूर्ति एवं सिंचाई दोनों उद्देश्यों की पूर्ति होगी। इन बिंदुओं पर भी दिये निर्देश बैठक में राज्य की सिंचाई योजनाओं, मेगा लिफ्ट परियोजनाओं, पाइपलाइन आधारित योजनाओं, बांधों एवं बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जल संसाधन विभाग की सभी योजनाओं को समय पर पूरा करें, जिससे राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन पर भी रोक लगेगी। नदी जल संरक्षण पर जोर मुख्यमंत्री ने नदी जल संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं बनाने पर जोर दिया तथा नदी जल को छोटे-छोटे जलाशयों में लिफ्ट कर सिंचाई कार्यों में उपयोग करने के निर्देश दिए। तालाबों में जल उपलब्धता सुनिश्चित कर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने बताई। मुख्यमंत्री को योजनाओं की स्थिति बताई गई जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने इस मौके पर विभाग द्वारा संचालित परियोजनाओं की स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। बैठक में जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह एवं विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे। इन योजनाओं को रिपर्ट तलब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चांडिल बांध, खरकई बराज, ईंचा बांध, सोन-कनहर पाइपलाइन सिंचाई योजना, सिकटिया, मसलिया-रानीश्वर, पीरटांड़ मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना पर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। पलामू पाइपलाइन सिंचाई योजना (पैकेज-1 एवं 2), भीमखंडा माइक्रो लिफ्ट योजना, खरकई बायी मेगा लिफ्ट योजना, भैरवा जलाशय, कोनार सिंचाई परियोजना, पुनासी जलाशय एवं गुमानी बराज योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में पलामू के लिए अमानत बराज योजना, गिरिडीह के लिए गांडेय मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना, खूंटी के चाराडीह-उलीहातू योजना, सिमडेगा के कोनपाला मेगा लिफ्ट योजना, पूर्वी सिंहभूम के पटमदा-बोड़ाम मेगा लिफ्ट योजना तथा सरायकेला-खरसावां के नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना पर चर्चा हुई।

Unknown मई 26, 2026 0
CM Hemant Soren
एक्शन में सीएम हेमंत-राजस्व और GST बढ़ाने को लेकर सख्त निर्देश जारी

रांची।  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरे एक्शन में हैंष सोमवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में वित्त एवं वाणिज्य-कर विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें राज्य की वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रह, बजट प्रबंधन और विभागीय योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।  इन बिंदुओं पर हुई समीक्षा बैठक में बजट प्रावधान, राजस्व लक्ष्य, पूंजीगत प्राप्तियां, स्थापना व्यय और केंद्र सरकार से मिलने वाले सहायता अनुदान की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंचे, इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर योजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए। अवैध खनन पर रोक का निर्देश समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि खनन राजस्व के मामले में झारखंड की स्थिति पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ से बेहतर बनी हुई है। राज्य में खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और निगरानी के कारण राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर संतोष जताते हुए अवैध खनन पर कड़ी निगरानी और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।   बायोमैट्रिक और ई-गवर्नेंस पर जोर मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों में बायोमैट्रिक सिस्टम को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी। साथ ही विभागीय प्रक्रियाओं को डिजिटल और आसान बनाने के निर्देश भी दिए गए। GST और कर संग्रह बढ़ाने की रणनीति वाणिज्य-कर विभाग की समीक्षा में GST, VAT, प्रोफेशनल टैक्स और अन्य करों की वसूली पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कर चोरी रोकने, करदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और तकनीकी निगरानी प्रणाली को मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल व्यवस्था से राज्य के राजस्व में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है। GST और कर संग्रह बढ़ाने की रणनीति वाणिज्य-कर विभाग की समीक्षा में GST, VAT, प्रोफेशनल टैक्स और अन्य करों की वसूली पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कर चोरी रोकने, करदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और तकनीकी निगरानी प्रणाली को मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल व्यवस्था से राज्य के राजस्व में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है। बैठक में ये रहे शामिल बैठक में मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, वित्त सचिव प्रशांत कुमार और वाणिज्य-कर विभाग के सचिव अमित कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Unknown मई 25, 2026 0
CM Hemant Soren
CM हेमंत करेंगे विभागों की समीक्षा, होगा ताबड़तोड़ एक्शन

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार से राज्य के विभिन्न विभागों की समीक्षा करेंगे। इसे लेकर लंबी बैठकों का दौर भी चलेगा और ताबड़तोड़ एक्शन भी होंगे। यह बैठकें 25 मई से 11 जून तक रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के सभागार में होंगी।  होगी कामकाज की समीक्षा इन बैठकों में सरकार के प्रमुख विभागों के कामकाज, योजनाओं की प्रगति और बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार समीक्षा बैठकों में संबंधित विभागों के मंत्री, अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे। बैठकों का उद्देश्य विभागीय कार्यों की वास्तविक स्थिति जानना और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों को दूर करना है। पहले दिन इन विभागों की समीक्षा जानकारी के अनुसार समीक्षा बैठकों के पहले दिन जल संसाधन विभाग, वित्त विभाग और वाणिज्य-कर विभाग के कार्यों की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग और लंबित परियोजनाओं की स्थिति की विस्तार स जानकारी लेंगे। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री द्वारा की गई नई घोषणाओं और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति पर भी विशेष चर्चा होगी। अधिकारियों को योजनाओं के समयबद्ध और बेहतर क्रियान्वयन के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके। सरकार की कोशिश विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की है।

Unknown मई 25, 2026 0
SIR Meeting
SIR को लेकर हेमंत सोरेन करेंगे बड़ी बैठक

रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी दल Jharkhand Mukti Morcha (झामुमो) ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए 21 और 22 अप्रैल को रांची में अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल होंगे। बैठक में राज्यभर के जिलों से चुने गए पदाधिकारियों को बुलाया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति बनाई जा सके और SIR प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।   बिहार और बंगाल से सीखने की तैयारी झामुमो इस मुद्दे पर बिहार और पश्चिम बंगाल के हालिया अनुभवों से सीख लेने की योजना बना रहा है। पार्टी का कहना है कि इन राज्यों में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने की शिकायतें सामने आई थीं, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ा था।   गरीब और आदिवासी अधिकारों पर चिंता पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के जरिए गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोगों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।   भाजपा पर निशाना, कार्यकर्ताओं को अलर्ट झामुमो ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसकी नीतियां गरीब वर्ग को कमजोर करने वाली हैं। पार्टी ने दावा किया कि कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में राशन कार्ड रद्द किए जाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही झामुमो ने अपने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।   राज्य की राजनीति में बढ़ी हलचल SIR को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। झामुमो इसे अधिकार और सम्मान की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है, जबकि विपक्षी दल इस पर अलग रणनीति अपना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बन सकता है।

Unknown अप्रैल 21, 2026 0
Appointment Letters
63 CDPO और 237 महिला सुपरवाइजर को सीएम हेमंत आज देंगे नियुक्ति पत्र

रांची। झारखंड में आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसी के तहत महिला एवं बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत 63 बाल विकास परियोजना प्रारूप (सीआईपीओ) और 237 महिला एवं बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत 237 महिला एवं बाल विकास संस्थान को पोर्टफोलियो पत्र जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रोजेक्ट भवन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्ताव पत्र प्रस्तुत करेंगे और नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से होगा।   जेपीएससी और जेएसएससी के जरिए चयन इन पदों पर नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से की गई है। सीडीपीओ पद के लिए कुल 64 अभ्यर्थियों की अनुशंसा विभाग को मिली थी, जिनमें से 63 को नियुक्ति पत्र दिया जा रहा है।   64 में 35 महिलाए सीडीपीओ पदों में चयनित 64 अभ्यर्थियों में 35 महिलाएं शामिल हैं। परीक्षा में 50 प्रतिशत यानी 32 पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे, लेकिन चयन प्रक्रिया में महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी इससे अधिक रही। अनारक्षित श्रेणी से 34, एससी से 2, एसटी से 21, बीसी-1 से 1 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से 6 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं।   महिला पर्यवेक्षिकाओं के 237 पदों पर नियुक्ति महिला पर्यवेक्षिका के कुल 444 पदों पर परीक्षा आयोजित हुई थी, जिनमें से 313 अभ्यर्थी ही चयनित हो सके। इनमें से 237 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के बाद नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। चयनित अभ्यर्थियों में अनारक्षित वर्ग से 138, एसटी से 72, एससी से 22, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 34, पिछड़ा वर्ग से 19 और ईडब्ल्यूएस से 28 अभ्यर्थी शामिल हैं। प्रोजेक्ट भवन में होगा कार्यक्रम नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम प्रोजेक्ट भवन सभागार में होगा, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे।   महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम सरकार का यह कदम महिला सशक्तिकरण और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विकास योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।

Unknown अप्रैल 21, 2026 0
Sido Kanhu martyrs tribute
"जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष हमारी प्रेरणा": मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के महान क्रांतिकारी वीर शहीद सिदो-कान्हू की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने वीर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले इन सपूतों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड की मिट्टी वीरों की भूमि रही है और यहां के महापुरुषों का संघर्ष आज भी समाज को नई ऊर्जा प्रदान करता है।   आदिवासियों और मूलवासियों के हक की ऐतिहासिक लड़ाई श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों की गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के आदिवासी एवं मूलवासी समाज ने अपने अधिकारों और अपनी पहचान के लिए उस दौर में बिगुल फूंका था, जब पूरे देश में आजादी की चेतना भी व्यापक रूप से जागृत नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने जो बलिदान दिए हैं, वे अद्वितीय हैं। उन्होंने बताया कि सिदो-कान्हू जैसे नायकों ने समाज को एकजुट कर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सिखाया, जिसका परिणाम है कि आज झारखंड अपनी विशिष्ट पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मजबूती से खड़ा है।   अन्याय और शोषण के विरुद्ध साहस का प्रतीक मुख्यमंत्री ने सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हुए विद्रोह की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन वीर भाइयों ने ब्रिटिश हुकूमत और तत्कालीन दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि शोषण और अत्याचार को जड़ से खत्म करने के लिए था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिदो-कान्हू द्वारा दिखाया गया साहस और स्वाभिमान का मार्ग आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सीख देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हक के लिए कैसे डटा रहा जाता है। सरकार इन महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।   राष्ट्रीय स्तर पर अमिट पहचान और गौरवशाली विरासत कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि सिदो-कान्हू की शहादत और उनकी जयंती का दिन भारत के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि समूचे देश में लोग इन महान क्रांतिकारियों की जन्मस्थली, प्रतिमाओं और शहादत स्थलों पर जाकर अपना सम्मान प्रकट कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों पर पूरे राष्ट्र को गर्व है जिन्होंने समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भावी पीढ़ियों को इन महापुरुषों के पदचिन्हों पर चलकर समाज के कल्याण और विकास में अपना योगदान देना चाहिए।   झारखंड के सपूतों के सपनों का राज्य बनाने का संकल्प समापन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों का आह्वान किया कि वे शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के संकल्प को दोहराएं। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसमें आदिवासियों-मूलवासियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। माल्यार्पण कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सिदो-कान्हू जैसे महापुरुषों की विरासत ही झारखंड की असली ताकत है और उनकी शिक्षाएं हमेशा राज्य के विकास की नीति का आधार बनी रहेंगी। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग मोरहाबादी मैदान पहुंचे थे, जहां सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई थीं।

Unknown अप्रैल 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0