Jharkhand High Court

Jharkhand High Court
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जेल विभाग की 81% रिक्तियां 6 महीने में भरने के निर्देश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जेल विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने राज्य सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को निर्देश दिया है कि जेल विभाग में लगभग 81% रिक्त पदों को छह महीने के भीतर भरने की प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है।   कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?   सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि झारखंड के जेल विभाग में स्वीकृत पदों का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा खाली है। इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से जेलों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के प्रबंधन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल भर्ती प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है।   सरकार और आयोगों को क्या निर्देश दिए गए?   हाईकोर्ट ने कहा कि: सभी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी की जाए। भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। राज्य सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियां समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।   जेल प्रशासन पर पड़ेगा सकारात्मक असर   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भर्ती पूरी होती है तो जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, कर्मचारियों पर कार्यभार कम होगा और कैदियों के पुनर्वास व प्रबंधन में भी सुधार आएगा।   भर्ती की तैयारी पर रहेगी नजर   अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और भर्ती एजेंसियों पर हैं कि वे अदालत के आदेश का पालन करते हुए तय समय सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी कर पाती हैं या नहीं। यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे के निर्देश जारी कर सकती है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Jharkhand High Court
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आचार संहिता उल्लंघन मामले में FIR रद्द

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में वर्ष 2014 में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन मामले की प्राथमिकी (FIR) को निरस्त कर दिया। इस फैसले के साथ ही मुख्यमंत्री के खिलाफ इस मामले में चल रही समस्त कानूनी कार्रवाई पर पूरी तरह विराम लग गया है।   क्या था पूरा मामला? यह मामला 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान कथित आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा था। आदित्यपुर थाना में कांड संख्या 418/2014 के तहत हेमंत सोरेन के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। उनकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह दलील दी गई थी कि दर्ज प्राथमिकी और उस पर आधारित कार्रवाई कानून सम्मत नहीं है।   पहले ही ट्रायल पर लग चुकी थी रोक मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निचली अदालत में चल रही ट्रायल प्रक्रिया पर पहले ही रोक लगा दी थी। अंतिम सुनवाई में अदालत ने दोनों पक्षों याचिकाकर्ता हेमंत सोरेन और राज्य सरकार की दलीलें तथा उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन किया। इसके बाद याचिका स्वीकार करते हुए FIR निरस्त करने का आदेश दिया गया।   राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह मामला करीब एक दशक से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ था। अब FIR रद्द होने के बाद इसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत और राज्य की राजनीति में अहम घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Ranchi Roof Top Bar
देर रात रांची के रूफटॉप बार में पहुंची पुलिस भागने लगे लड़के-लड़कियां

रांची। राजधानी रांची के लालपुर इलाके में देर रात पुलिस ने एक रूफटॉप बार बंद करा दिया। बताया जा रहा है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बार में गतिविधियां जारी थीं, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।  तेज संगीत के साथ नाच-गाना हो रहा था प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बार में उस समय तेज संगीत बज रहा था और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही वहां मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई। कुछ ही देर में युवक युवतियां बाहर निकलने लगे, जिससे आसपास के क्षेत्र में वाहनों का दबाव बढ़ गया। नाबालिगों की मौजूदगी की भी जांच जानकारी के अनुसार पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि बार परिसर में कुछ नाबालिग मौजूद हो सकते थे। इस पहलू की जांच की जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित बार के खिलाफ देर रात तक संचालन और तेज ध्वनि में संगीत बजाने को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार प्रबंधन कई बार निर्धारित समय और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी करता रहा है। उनका कहना है कि देर रात तक चलने वाली गतिविधियों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और आसपास के इलाके में असुविधा का माहौल बनता है। हाईकोर्ट पहले भी जता चुका है चिंता ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाल के दिनों में झारखंड हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि रात के समय तेज ध्वनि वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आदेशों के उल्लंघन पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। ऐसे में लालपुर स्थित बार में देर रात तक संगीत और संचालन जारी रहने की घटना ने एक बार फिर शहर में नियमों के अनुपालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Summer Skin Care Tips
Summer Skin Care Tips: गर्मी में चेहरे पर भूलकर भी न लगाएं ये 5 चीजें

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान त्वचा को अधिक संवेदनशील बना देता है। ऐसे में कई लोग इंस्टेंट ग्लो पाने या दाग-धब्बे हटाने के लिए सोशल मीडिया पर बताए गए घरेलू नुस्खों और ब्यूटी टिप्स को अपनाने लगते हैं। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ चीजें गर्मियों में चेहरे पर लगाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है। स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सही स्किनकेयर रूटीन अपनाने के साथ-साथ ऐसी चीजों से बचना भी जरूरी है, जो स्किन की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाती हैं।   इन चीजों से रखें दूरी विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में नींबू का रस सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है, जिससे जलन, लालिमा और पिगमेंटेशन की समस्या हो सकती है। इसी तरह टूथपेस्ट को पिंपल्स पर लगाने का घरेलू उपाय भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को ड्राई और इरिटेट कर सकते हैं, जिससे सूजन और जलन बढ़ सकती है।   बेकिंग सोडा का pH स्तर त्वचा के प्राकृतिक pH से अलग होता है। इसे चेहरे पर लगाने से स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है और त्वचा रूखी व संवेदनशील बन सकती है।   स्क्रब और ऑयल-बेस्ड प्रोडक्ट्स का भी रखें ध्यान गर्मी में बार-बार स्क्रब करने से त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सन डैमेज और रेडनेस का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, भारी ऑयल-बेस्ड क्रीम और प्रोडक्ट्स रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे मुंहासे, ब्लैकहेड्स और चिपचिपाहट की समस्या बढ़ सकती है।   विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में हल्के, नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स, नियमित सनस्क्रीन, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार अपनाकर त्वचा को स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार रखा जा सकता है।

anjali kumari जून 22, 2026 0
Bokaro Child Missing
बोकारो से लापता मासूम पुरी में मिला, पुलिस ने पांच दिन में किया सकुशल बरामद

बोकारो। बोकारो जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र के कुर्मीडीह से 6 जून को लापता हुए एक बच्चे को पुलिस ने ओडिशा के पुरी से सकुशल बरामद कर लिया है। त्वरित कार्रवाई, तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के दम पर पुलिस ने महज पांच दिनों के भीतर बच्चे का पता लगाकर उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। बरामदगी के समय बच्चे की मां भी मौके पर मौजूद थीं।   तीन विशेष टीमों ने चलाया सर्च अभियान बच्चे के लापता होने की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना के निर्देश पर तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। टीमों ने बच्चे की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस ने बोकारो रेलवे स्टेशन सहित कुल आठ रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।   जांच के दौरान फुटेज में बच्चा पहले बोकारो रेलवे स्टेशन और फिर मुरी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके संभावित यात्रा मार्ग का पता लगाते हुए ओडिशा के पुरी तक तलाश अभियान चलाया, जहां से उसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया।   हाईकोर्ट की गंभीरता को देखते हुए हुई त्वरित कार्रवाई मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की और कम समय में बच्चे को सुरक्षित खोज निकाला।   पारिवारिक परिस्थितियों के कारण भटका बच्चा प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चे के पिता अमित गुप्ता एक आपराधिक मामले में जेल में बंद हैं, जबकि उसकी मां दिल्ली में नौकरी करती हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चा मानसिक रूप से परेशान होकर घर छोड़कर चला गया था।   पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों पर नियमित ध्यान दें और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Jharkhand High Court TGT
हाईकोर्ट ने TGT मामले से जुड़े मीना कुमारी प्रकरण में इंटरवेनर्स आवेदन किया स्वीकार, JSSC को पक्षकार बनाने का निर्देश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को TGT (स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक) नियुक्ति से जुड़े मीना कुमारी प्रकरण में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में हस्तक्षेप के लिए दायर सभी इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन (I.A.) को स्वीकार करते हुए इंटरवेनर्स को अपील में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का महत्वपूर्ण निर्देश दिया।  इंटरवेनर्स की ओर से रखी गई दलील सुनवाई के दौरान इंटरवेनर्स की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता चंचल जैन ने दलील दी कि ये वे अभ्यर्थी हैं, जिनके मामले TGT नियुक्ति प्रकरण में मीना कुमारी के साथ ही निस्तारित हुए थे। हालांकि, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा इनके खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई थी। लेकिन, इस मुख्य अपील में आने वाले फैसले का सीधा असर इनके हितों पर पड़ सकता था, जिसके चलते इन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। JSSC को संशोधन का निर्देश हाईकोर्ट ने JSSC को आवश्यक संशोधन करते हुए सभी स्वीकृत इंटरवेनर्स को अपील में औपचारिक तौर पर पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने संशोधित अपील की एक सॉफ्ट कॉपी दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। राज्य सरकार और JSSC के संशोधन आवेदन को भी मंजूरी अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और JSSC द्वारा दायर संशोधन आवेदन को भी मंजूरी दे दी है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 30 जून को होगी।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Ramesh Singh Munda
रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में बड़ा मोड़, आरोपी राम मोहन सिंह मुंडा को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत

रांची। झारखंड के चर्चित पूर्व मंत्री और तमाड़ के तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट ने मामले के आरोपी राम मोहन सिंह मुंडा को जमानत दे दी है। अदालत ने उनकी ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।   जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में आरोपी पक्ष और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत में आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि वह अब इस मामले में सरकारी गवाह (एप्रूवर) बन चुका है और उसकी गवाही भी पूरी हो चुकी है। साथ ही मुकदमे की सुनवाई अभी जारी है।   2008 में हुई थी पूर्व मंत्री की हत्या यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 65/2008 से जुड़ा हुआ है। 9 जुलाई 2008 को तमाड़ के तत्कालीन विधायक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था। मामले की प्राथमिकी बुंडू थाना में दर्ज की गई थी।   एनआईए ने संभाली थी जांच हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई थी। जांच के दौरान एनआईए ने कई अहम साक्ष्य जुटाए और साजिश से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। इसी क्रम में 8 जुलाई 2016 को राम मोहन सिंह मुंडा को गिरफ्तार किया गया था।   2017 में बने सरकारी गवाह मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 23 नवंबर 2017 को एनआईए ने राम मोहन सिंह मुंडा को एप्रूवर घोषित कर दिया। इसके बाद उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया और अदालत में अपनी गवाही भी दर्ज कराई। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी, जबकि राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें मामले के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

Unknown जून 9, 2026 0
HC order teacher jobs
झारखंड में टीजीटी शिक्षकों के बचे 2034 पदों पर होगी नियुक्ति, हाईकोर्ट  ने दिया आदेश

रांची। झारखंड के टीजीटी अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में टीजीटी शिक्षकों के खाली रह गये 2034 पदों पर नियुक्ति जल्द की जायेगी। हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी को प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों के 2034 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया फिर शुरू करने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अब तीन जुलाई को अगली सुनवाई होगी। 156 अभ्यर्थियों ने दायर की थी अवमानना याचिका मो. ताल्हा समेत 156 अभ्यर्थियों ने यह अवमानना याचिका दायर की है। इसमें मीना कुमारी प्रकरण में 1 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने का आग्रह किया गया है। इस मामले में कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था। जेएसएससी ने लेटर पेटेंट अपील दाखिल की थी अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि इस आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया। 2034 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जेएसएससी ने 26 सितंबर 2025 को लेटर पेटेंट अपील दाखिल की थी। लेकिन किसी कारणवश उस पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है।

Unknown मई 23, 2026 0
jharkhand high court
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 54 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर रद्द

रांची। झारखंड हाई कोर्ट  ने पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर से जुड़े एक अहम मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने W.P (S) No. 1781 of 2025 पर सुनवाई करते हुए 54 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि इन तबादलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश (ज्ञापांक 238/पी, दिनांक 24.02.2025) को भी निरस्त कर दिया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी प्रभावित पुलिसकर्मियों को पुनः धनबाद जिले में योगदान कराया जाए।   राहत के लिए दर-दर भटके, अंततः कोर्ट से मिली न्याय यह मामला उन पुलिसकर्मियों से जुड़ा है, जिन्हें “प्रशासनिक दृष्टिकोण” का हवाला देकर अलग-अलग जिलों में ट्रांसफर किया गया था। उन्होंने कई स्तरों पर अपनी शिकायत रखी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। अंततः निराश होकर सभी ने नए स्थानों पर योगदान दे दिया, लेकिन न्याय के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।   कोर्ट ने कहा—बिना ठोस आधार ट्रांसफर अनुचित सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी का ट्रांसफर बिना ठोस कारण और नियमों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाए नहीं किया जा सकता। यह निर्णय न केवल संबंधित पुलिसकर्मियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।   पुलिस एसोसिएशन ने उठाए पारदर्शिता के मुद्दे झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि “प्रशासनिक दृष्टिकोण” के नाम पर कई बार मनमाने तरीके से तबादले किए जाते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि इससे पुलिसकर्मियों के परिवार और मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ता है। डीजीपी से स्पष्ट गाइडलाइन की मांग एसोसिएशन ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से ट्रांसफर प्रक्रिया के लिए स्पष्ट और पारदर्शी गाइडलाइन जारी करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।

Unknown अप्रैल 28, 2026 0
IAS Vinay Chaubey
वनभूमि घोटाला केस में IAS विनय चौबे की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, अब फैसला आना बाकी

हजारीबाग। झारखंड हाईकोर्ट में हजारीबाग वनभूमि घोटाला मामले से जुड़े आरोपी आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।   एसीबी और बचाव पक्ष ने रखी दलीलें सुनवाई के दौरान ACB ने अदालत में कहा कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो आरोपी की भूमिका को संदिग्ध बनाते हैं। एसीबी ने यह भी तर्क दिया कि मामले की गहराई से जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि विनय चौबे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उनके वकीलों ने कहा कि अब तक कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया है, जो आरोपों को साबित कर सके।   जमानत की मांग और सहयोग का आश्वासन बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोपी को हिरासत में रखने का कोई ठोस आधार नहीं है और उन्हें राहत दी जानी चाहिए।   ACB केस से जुड़ा मामला यह मामला एसीबी हजारीबाग द्वारा दर्ज कांड संख्या 11/2025 से संबंधित है, जिसमें वनभूमि से जुड़े कथित घोटाले और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच की जा रही है।   फैसले पर टिकी निगाहें सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट जमानत मंजूर करता है या जांच को प्राथमिकता देते हुए याचिका खारिज करता है।

Unknown अप्रैल 23, 2026 0
mining ban Jharkhand
झारखंड हाईकोर्ट ने जंगलों से 500 मीटर के दायरे में खनन पर लगाई रोक

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जंगलों से 500 मीटर के दायरे में खनन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर यह फैसला सुनाया है।  250 मीटर का कानून रद्द कोर्ट ने संरक्षित जंगलों के आसपास पत्थर खनन और क्रशर लगाने की न्यूनतम दूरी 250 मीटर के कानून को रद्द कर दिया है। अब जंगलों से 500 मीटर के दायरे के बाहर ही खनन की अनुमति मिलेगी।   पुरानी व्यवस्था फिर से लागू मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि पहले तय 250 मीटर की दूरी पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2015 और 2017 की अधिसूचनाओं को खारिज करते हुए पुरानी व्यवस्था यानी 500 मीटर की दूरी फिर से लागू कर दी है। कोर्ट ने कहा कि 250 मीटर का नियम पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं है और यह बिना ठोस आधार के तय किया गया था।

Unknown अप्रैल 22, 2026 0
Jharkhand High Court building with focus on crackdown against illegal hospitals and clinics
‘अवैध अस्पतालों’ पर सख्ती: झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, 4 महीने में मांगी रिपोर्ट

झारखंड में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अस्पतालों और क्लीनिकों पर अब सख्ती तय है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010 को सख्ती से लागू किया जाए। कोर्ट ने कहा कि बिना पंजीकरण कोई भी अस्पताल या क्लीनिक संचालित नहीं होना चाहिए।   कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “कानून है, लेकिन पालन कमजोर” हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें एमएस सोनक और दीपक रोशन शामिल थे, ने कहा कि राज्य में कानून तो मौजूद है, लेकिन उसका क्रियान्वयन बेहद ढीला और अप्रभावी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कानून बनने के बाद भी उसका पालन नहीं होता, तो यह व्यवस्था को कमजोर करता है और कानूनहीनता को बढ़ावा देता है।   4 महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक को निर्देश दिया है कि राज्यभर में कानून लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट चार महीने के भीतर पेश की जाए। साथ ही, सरकार द्वारा दायर हलफनामे को अधूरा बताते हुए कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि उसमें जरूरी जानकारियों की कमी है।   बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने पर रोक हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि: बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट संचालित नहीं हो सभी अस्पतालों और क्लीनिकों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्टर को अपडेट रखा जाए इसके साथ ही जिला स्तर पर पंजीकरण प्राधिकरण को सक्रिय करने और अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है।   फ्लाइंग स्क्वायड बनाने का सुझाव कोर्ट ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि अवैध अस्पतालों पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की “फ्लाइंग स्क्वायड” टीम बनाई जाए, जो समय-समय पर जांच कर सके और नियमों का पालन सुनिश्चित कराए।   पहले भी मांगी गई थी पूरी जानकारी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि: राज्य में कितने अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति क्या है लेकिन सरकार की ओर से दी गई जानकारी को कोर्ट ने अपर्याप्त बताया।   जनहित याचिका से उठा मामला यह मामला जनहित याचिका के जरिए सामने आया था, जिसे राजीव रंजन ने दायर किया था। उन्होंने अपने पिता की 2017 में एक निजी अस्पताल में हुई मौत को लेकर चिकित्सा लापरवाही और निगरानी की कमी का मुद्दा उठाया था।   स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल इस पूरे मामले ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद अब यह देखना अहम होगा कि सरकार कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और अवैध अस्पतालों पर लगाम लगाती है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Tata Steel Rs 493 crore GST
टाटा स्टील का 493 करोड़ रुपये का जीएसटी मामला पहुंचा झारखंड हाईकोर्ट

रांची। टाटा स्टील ने 493.35 करोड़ रुपये के जीएसटी विवाद को लेकर Jharkhand High Court का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी ने जमशेदपुर स्थित जीएसटी आयुक्त के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसे भारी टैक्स, जुर्माना और ब्याज चुकाने का निर्देश दिया गया था। यह मामला वित्त वर्ष 2018-19 से 2022-23 के जीएसटी ऑडिट से जुड़ा हुआ है। जीएसटी विभाग का नोटिस जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कर विभाग रांची ने जून 2025 में कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी कर 1007.54 करोड़ रुपये की कथित देनदारी पर जवाब मांगा था। कंपनी ने इसमें से 514.19 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था, जिसके बाद विवादित राशि 493.35 करोड़ रुपये रह गई। जुर्माना और ब्याज का आदेश 18 दिसंबर 2025 को जमशेदपुर के जीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त ने आदेश जारी करते हुए कंपनी को 493.35 करोड़ रुपये के टैक्स के अलावा 638.82 करोड़ रुपये का जुर्माना और ब्याज चुकाने का निर्देश दिया। टाटा स्टील का पक्ष कंपनी का कहना है कि अधिकारियों ने उसके स्पष्टीकरण और तर्कों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया। कंपनी के अनुसार उसके पास मजबूत कानूनी आधार और तथ्य मौजूद हैं, जिसके आधार पर इस देनदारी को चुनौती दी गई है। इसी को लेकर कंपनी ने 11 मार्च को झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की। बाजार को दी जानकारी नियामक फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी ने Securities and Exchange Board of India (सेबी) के दिशा-निर्देशों के तहत शेयर बाजार को इस कानूनी कार्रवाई की जानकारी दे दी है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

Unknown मार्च 14, 2026 0
illegal coal mining and air pollution issue in Dhanbad district
अवैध कोयला खनन और प्रदूषण पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त, धनबाद DC-SSP और BCCL CMD को किया तलब

  झारखंड के Dhanbad में बढ़ते वायु प्रदूषण और अवैध कोयला खनन को लेकर Jharkhand High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने धनबाद के उपायुक्त, एसएसपी, नगर आयुक्त और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को तलब किया है। सभी अधिकारियों को 2 अप्रैल को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।   कोर्ट ने जताई प्रदूषण पर चिंता मामले की सुनवाई M. S. Sonak और Rajesh Shankar की खंडपीठ में हुई। अदालत ने कहा कि धनबाद में वायु गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब हो चुका है और अवैध खनन तथा कोयले के परिवहन के कारण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।   पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि Bharat Coking Coal Limited की ओर से इस संबंध में कई प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी हैं।   BCCL के CMD को भी अदालत में बुलाया कोर्ट ने BCCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है, ताकि वे इस समस्या के समाधान के लिए ठोस सुझाव दे सकें।   कोल डस्ट से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याएं अदालत ने कहा कि कोल डस्ट के कारण धनबाद में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।   BCCL ने बताया क्या कदम उठाए जा रहे BCCL की ओर से अधिवक्ता Amit Kumar Das ने अदालत को बताया कि बंद पड़ी खुली खदानों को भरकर वहां पार्क विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही अवैध खनन रोकने के लिए कई प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई हैं। हालांकि BCCL की ओर से यह भी कहा गया कि अवैध खनन रोकने के मामलों में पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।   जनहित याचिका में उठाया गया मुद्दा धनबाद में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर Gramin Ekta Manch की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि शहर में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रशासन और नगर निगम की ओर से पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारियों को अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Jharkhand High Court building in Ranchi after ordering CBI probe in ED vs Ranchi Police case.
ED बनाम रांची पुलिस मामला: हाईकोर्ट ने दिए CBI जांच के निर्देश

  झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और रांची पुलिस से जुड़े विवादित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने CBI को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश भी दिया है। इस मामले में अदालत ने 24 फरवरी को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।   क्या है पूरा मामला यह मामला रांची के एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा है। इसमें संतोष कुमार ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। FIR दर्ज होने के बाद रांची पुलिस ने ED कार्यालय में छापेमारी भी की थी। पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। ED ने अदालत से प्राथमिकी को रद्द करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की थी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया गया था।   23 करोड़ के गबन का आरोप दरअसल, संतोष कुमार पर करीब 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है, जो कथित पेयजल घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। ED ने इस मामले में उनके खिलाफ ECIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। ED के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को संतोष कुमार खुद पूछताछ के लिए ED कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ के दौरान वे अचानक उत्तेजित हो गए और पास में रखा जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उन्हें हल्की चोट आई। बाद में उन्होंने ED अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज कराया।   कोर्ट में किसने रखा पक्ष मामले की सुनवाई के दौरान ED की ओर से एस.वी. राजू, अधिवक्ता ए.के. दास और सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं। वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता दीपांकर ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत में दलीलें दीं। अहम बात: हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच CBI करेगी और नई प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0