झारखंड

देर रात रांची के रूफटॉप बार में पहुंची पुलिस भागने लगे लड़के-लड़कियां

abhishek singh जून 22, 2026 0
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रांची। राजधानी रांची के लालपुर इलाके में देर रात पुलिस ने एक रूफटॉप बार बंद करा दिया। बताया जा रहा है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बार में गतिविधियां जारी थीं, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। 


तेज संगीत के साथ नाच-गाना हो रहा था


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बार में उस समय तेज संगीत बज रहा था और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही वहां मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई। कुछ ही देर में युवक युवतियां बाहर निकलने लगे, जिससे आसपास के क्षेत्र में वाहनों का दबाव बढ़ गया।


नाबालिगों की मौजूदगी की भी जांच


जानकारी के अनुसार पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि बार परिसर में कुछ नाबालिग मौजूद हो सकते थे। इस पहलू की जांच की जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित बार के खिलाफ देर रात तक संचालन और तेज ध्वनि में संगीत बजाने को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार प्रबंधन कई बार निर्धारित समय और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी करता रहा है। उनका कहना है कि देर रात तक चलने वाली गतिविधियों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और आसपास के इलाके में असुविधा का माहौल बनता है।


हाईकोर्ट पहले भी जता चुका है चिंता


ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाल के दिनों में झारखंड हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि रात के समय तेज ध्वनि वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आदेशों के उल्लंघन पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। ऐसे में लालपुर स्थित बार में देर रात तक संगीत और संचालन जारी रहने की घटना ने एक बार फिर शहर में नियमों के अनुपालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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BIT मेसरा और IIT खड़गपुर के बीच हुआ अहम समझौता, शोध और शिक्षा में बढ़ेगा सहयोग

रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (BIT) मेसरा और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर ने शोध, शिक्षा और संस्थागत क्षमता निर्माण को नई दिशा देने के लिए पांच वर्षों के महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना है। आवश्यकता पड़ने पर इस समझौते की अवधि आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाई जा सकेगी।   समझौते के तहत संयुक्त पीएचडी सुपरविजन, साझा प्रयोगशाला सुविधाओं का उपयोग, बौद्धिक संपदा (IP) विकास एवं व्यावसायीकरण, शोध परियोजनाएं, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। एमओयू पर BIT मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए।   छात्रों और शिक्षकों को मिलेंगे विश्वस्तरीय अवसर BIT मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि यह साझेदारी संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे छात्रों और शिक्षकों को विश्वस्तरीय शोध सुविधाओं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान और नवाचार को भी गति मिलेगी।   रिसर्च और इंटर्नशिप पर रहेगा फोकस समझौते के तहत मास्टर्स और पीएचडी छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर शोध सहयोग, ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन इंटर्नशिप, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों के लिए संयुक्त शोध प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। दोनों संस्थान फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, सेमिनार, कार्यशालाएं, GIAN कोर्स और माइक्रो-क्रेडिट कार्यक्रम भी मिलकर आयोजित करेंगे।   पूर्वी भारत में नवाचार को मिलेगी नई गति IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि यह सहयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप है। दोनों संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन और रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान करेंगे। इसके अलावा इंटीग्रेटेड एमटेक-पीएचडी और ड्यूल डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक संयुक्त कार्यान्वयन समिति बनाई जाएगी, जो हर छह महीने में प्रगति की समीक्षा करेगी।

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रांची। रांची के तुपुदाना ओपी क्षेत्र में एक 25 वर्षीय युवती का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। युवती का शव सड़क किनारे बरामद किया गया। मृतका मूल रूप से लातेहार जिले की रहने वाली बताई जा रही है और अरगोड़ा क्षेत्र में अपने पति के साथ रह रही थी। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है और दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है। 2 दिन से लापता थी युवती   पुलिस के अनुसार युवती दो दिनों से लापता थी। इस संबंध में अरगोड़ा थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। युवती के पति ने पुलिस को बताया था कि उसकी पत्नी 19 जून की रात घर से निकली थी और उसके बाद वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद खोजबीन शुरू की गई थी। सड़क किनारे मिला शव, जांच में जुटी एफएसएल टीम रविवार को तुपुदाना क्षेत्र में सड़क किनारे युवती का शव मिलने की सूचना पर पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है, ताकि मौत के कारणों और घटना की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवती आखिरी बार किसके साथ देखी गई थी और घटनास्थल तक कैसे पहुंची। स्थानीय लोगों के अनुसार युवती के साथ कोई अप्रिय घटना हुई हो सकती है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार हटिया डीएसपी नीरज कुमार ने बताया कि मामला प्रथम दृष्टया हत्या का प्रतीत हो रहा है। युवती की पहचान कर ली गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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रिम्स कैंटीन का खाना खाने के बाद मरीजों और परिजनों की तबीयत बिगड़ी, जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

रांची। रांची स्थित रिम्स में 20 जून की रात मरीजों को परोसे गए भोजन के बाद कई मरीजों और उनके परिजनों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। प्रभावित लोगों में उल्टी, पेट दर्द और दस्त जैसी शिकायतें देखी गईं, जिसके बाद उन्हें रिम्स के मेडिसिन विभाग में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। राहत की बात यह है कि सभी मरीज और परिजन फिलहाल खतरे से बाहर बताए गए हैं।   अंडे की गुणवत्ता पर संदेह, भोजन पर नहीं रिम्स प्रबंधन ने पूरे मामले को कैंटीन के भोजन से हुई फूड पॉइजनिंग मानने से इनकार किया है। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार के अनुसार, यदि भोजन पूरी तरह दूषित होता तो बड़ी संख्या में मरीज प्रभावित होते। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भोजन के साथ परोसे गए कुछ अंडों की गुणवत्ता में खराबी होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि केवल दो मरीजों और करीब 17 से 19 परिजनों में फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण पाए गए हैं।   दो दिन में रिपोर्ट देगी जांच समिति घटना की गंभीरता को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने पीएसएम विभाग की अध्यक्ष डॉ. शालिनी सुंदरम की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में माइक्रोबायोलॉजी और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर भी शामिल हैं। यह टीम अगले दो दिनों में पूरे मामले की जांच कर निदेशक और अधीक्षक को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।   हर पहलू की होगी जांच जांच समिति यह भी पता लगाएगी कि जिन मरीजों की तबीयत बिगड़ी, उन्होंने अस्पताल के भोजन के अलावा बाहर का कोई खाद्य पदार्थ तो नहीं खाया था। साथ ही, बीमार हुए परिजनों ने 20 जून की रात कौन-सा भोजन किया था, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। फिलहाल सभी प्रभावित लोगों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

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