झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जेल विभाग की 81% रिक्तियां 6 महीने में भरने के निर्देश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जेल विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने राज्य सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को निर्देश दिया है कि जेल विभाग में लगभग 81% रिक्त पदों को छह महीने के भीतर भरने की प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है।   कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?   सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि झारखंड के जेल विभाग में स्वीकृत पदों का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा खाली है। इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से जेलों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के प्रबंधन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल भर्ती प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है।   सरकार और आयोगों को क्या निर्देश दिए गए?   हाईकोर्ट ने कहा कि: सभी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी की जाए। भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। राज्य सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियां समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।   जेल प्रशासन पर पड़ेगा सकारात्मक असर   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भर्ती पूरी होती है तो जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, कर्मचारियों पर कार्यभार कम होगा और कैदियों के पुनर्वास व प्रबंधन में भी सुधार आएगा।   भर्ती की तैयारी पर रहेगी नजर   अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और भर्ती एजेंसियों पर हैं कि वे अदालत के आदेश का पालन करते हुए तय समय सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी कर पाती हैं या नहीं। यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे के निर्देश जारी कर सकती है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Ranchi Roof Top Bar
देर रात रांची के रूफटॉप बार में पहुंची पुलिस भागने लगे लड़के-लड़कियां

रांची। राजधानी रांची के लालपुर इलाके में देर रात पुलिस ने एक रूफटॉप बार बंद करा दिया। बताया जा रहा है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी बार में गतिविधियां जारी थीं, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।  तेज संगीत के साथ नाच-गाना हो रहा था प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बार में उस समय तेज संगीत बज रहा था और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही वहां मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई। कुछ ही देर में युवक युवतियां बाहर निकलने लगे, जिससे आसपास के क्षेत्र में वाहनों का दबाव बढ़ गया। नाबालिगों की मौजूदगी की भी जांच जानकारी के अनुसार पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि बार परिसर में कुछ नाबालिग मौजूद हो सकते थे। इस पहलू की जांच की जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित बार के खिलाफ देर रात तक संचालन और तेज ध्वनि में संगीत बजाने को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार प्रबंधन कई बार निर्धारित समय और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी करता रहा है। उनका कहना है कि देर रात तक चलने वाली गतिविधियों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और आसपास के इलाके में असुविधा का माहौल बनता है। हाईकोर्ट पहले भी जता चुका है चिंता ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाल के दिनों में झारखंड हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि रात के समय तेज ध्वनि वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आदेशों के उल्लंघन पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। ऐसे में लालपुर स्थित बार में देर रात तक संगीत और संचालन जारी रहने की घटना ने एक बार फिर शहर में नियमों के अनुपालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Summer Skin Care Tips
Summer Skin Care Tips: गर्मी में चेहरे पर भूलकर भी न लगाएं ये 5 चीजें

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान त्वचा को अधिक संवेदनशील बना देता है। ऐसे में कई लोग इंस्टेंट ग्लो पाने या दाग-धब्बे हटाने के लिए सोशल मीडिया पर बताए गए घरेलू नुस्खों और ब्यूटी टिप्स को अपनाने लगते हैं। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ चीजें गर्मियों में चेहरे पर लगाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है। स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सही स्किनकेयर रूटीन अपनाने के साथ-साथ ऐसी चीजों से बचना भी जरूरी है, जो स्किन की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाती हैं।   इन चीजों से रखें दूरी विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में नींबू का रस सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है, जिससे जलन, लालिमा और पिगमेंटेशन की समस्या हो सकती है। इसी तरह टूथपेस्ट को पिंपल्स पर लगाने का घरेलू उपाय भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को ड्राई और इरिटेट कर सकते हैं, जिससे सूजन और जलन बढ़ सकती है।   बेकिंग सोडा का pH स्तर त्वचा के प्राकृतिक pH से अलग होता है। इसे चेहरे पर लगाने से स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है और त्वचा रूखी व संवेदनशील बन सकती है।   स्क्रब और ऑयल-बेस्ड प्रोडक्ट्स का भी रखें ध्यान गर्मी में बार-बार स्क्रब करने से त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सन डैमेज और रेडनेस का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, भारी ऑयल-बेस्ड क्रीम और प्रोडक्ट्स रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे मुंहासे, ब्लैकहेड्स और चिपचिपाहट की समस्या बढ़ सकती है।   विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में हल्के, नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स, नियमित सनस्क्रीन, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार अपनाकर त्वचा को स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार रखा जा सकता है।

anjali kumari जून 22, 2026 0
Bokaro Child Missing
बोकारो से लापता मासूम पुरी में मिला, पुलिस ने पांच दिन में किया सकुशल बरामद

बोकारो। बोकारो जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र के कुर्मीडीह से 6 जून को लापता हुए एक बच्चे को पुलिस ने ओडिशा के पुरी से सकुशल बरामद कर लिया है। त्वरित कार्रवाई, तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के दम पर पुलिस ने महज पांच दिनों के भीतर बच्चे का पता लगाकर उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। बरामदगी के समय बच्चे की मां भी मौके पर मौजूद थीं।   तीन विशेष टीमों ने चलाया सर्च अभियान बच्चे के लापता होने की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना के निर्देश पर तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। टीमों ने बच्चे की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस ने बोकारो रेलवे स्टेशन सहित कुल आठ रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।   जांच के दौरान फुटेज में बच्चा पहले बोकारो रेलवे स्टेशन और फिर मुरी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके संभावित यात्रा मार्ग का पता लगाते हुए ओडिशा के पुरी तक तलाश अभियान चलाया, जहां से उसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया।   हाईकोर्ट की गंभीरता को देखते हुए हुई त्वरित कार्रवाई मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की और कम समय में बच्चे को सुरक्षित खोज निकाला।   पारिवारिक परिस्थितियों के कारण भटका बच्चा प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चे के पिता अमित गुप्ता एक आपराधिक मामले में जेल में बंद हैं, जबकि उसकी मां दिल्ली में नौकरी करती हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चा मानसिक रूप से परेशान होकर घर छोड़कर चला गया था।   पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों पर नियमित ध्यान दें और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Jharkhand High Court TGT
हाईकोर्ट ने TGT मामले से जुड़े मीना कुमारी प्रकरण में इंटरवेनर्स आवेदन किया स्वीकार, JSSC को पक्षकार बनाने का निर्देश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को TGT (स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक) नियुक्ति से जुड़े मीना कुमारी प्रकरण में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में हस्तक्षेप के लिए दायर सभी इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन (I.A.) को स्वीकार करते हुए इंटरवेनर्स को अपील में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का महत्वपूर्ण निर्देश दिया।  इंटरवेनर्स की ओर से रखी गई दलील सुनवाई के दौरान इंटरवेनर्स की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता चंचल जैन ने दलील दी कि ये वे अभ्यर्थी हैं, जिनके मामले TGT नियुक्ति प्रकरण में मीना कुमारी के साथ ही निस्तारित हुए थे। हालांकि, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा इनके खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई थी। लेकिन, इस मुख्य अपील में आने वाले फैसले का सीधा असर इनके हितों पर पड़ सकता था, जिसके चलते इन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। JSSC को संशोधन का निर्देश हाईकोर्ट ने JSSC को आवश्यक संशोधन करते हुए सभी स्वीकृत इंटरवेनर्स को अपील में औपचारिक तौर पर पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने संशोधित अपील की एक सॉफ्ट कॉपी दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। राज्य सरकार और JSSC के संशोधन आवेदन को भी मंजूरी अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और JSSC द्वारा दायर संशोधन आवेदन को भी मंजूरी दे दी है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 30 जून को होगी।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Jharkhand High Court building with focus on crackdown against illegal hospitals and clinics
‘अवैध अस्पतालों’ पर सख्ती: झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, 4 महीने में मांगी रिपोर्ट

झारखंड में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अस्पतालों और क्लीनिकों पर अब सख्ती तय है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2010 को सख्ती से लागू किया जाए। कोर्ट ने कहा कि बिना पंजीकरण कोई भी अस्पताल या क्लीनिक संचालित नहीं होना चाहिए।   कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “कानून है, लेकिन पालन कमजोर” हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें एमएस सोनक और दीपक रोशन शामिल थे, ने कहा कि राज्य में कानून तो मौजूद है, लेकिन उसका क्रियान्वयन बेहद ढीला और अप्रभावी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कानून बनने के बाद भी उसका पालन नहीं होता, तो यह व्यवस्था को कमजोर करता है और कानूनहीनता को बढ़ावा देता है।   4 महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक को निर्देश दिया है कि राज्यभर में कानून लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट चार महीने के भीतर पेश की जाए। साथ ही, सरकार द्वारा दायर हलफनामे को अधूरा बताते हुए कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि उसमें जरूरी जानकारियों की कमी है।   बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने पर रोक हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि: बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट संचालित नहीं हो सभी अस्पतालों और क्लीनिकों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्टर को अपडेट रखा जाए इसके साथ ही जिला स्तर पर पंजीकरण प्राधिकरण को सक्रिय करने और अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है।   फ्लाइंग स्क्वायड बनाने का सुझाव कोर्ट ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि अवैध अस्पतालों पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की “फ्लाइंग स्क्वायड” टीम बनाई जाए, जो समय-समय पर जांच कर सके और नियमों का पालन सुनिश्चित कराए।   पहले भी मांगी गई थी पूरी जानकारी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि: राज्य में कितने अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति क्या है लेकिन सरकार की ओर से दी गई जानकारी को कोर्ट ने अपर्याप्त बताया।   जनहित याचिका से उठा मामला यह मामला जनहित याचिका के जरिए सामने आया था, जिसे राजीव रंजन ने दायर किया था। उन्होंने अपने पिता की 2017 में एक निजी अस्पताल में हुई मौत को लेकर चिकित्सा लापरवाही और निगरानी की कमी का मुद्दा उठाया था।   स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल इस पूरे मामले ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद अब यह देखना अहम होगा कि सरकार कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और अवैध अस्पतालों पर लगाम लगाती है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0