रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व महासचिव एवं युवा मोर्चा के संस्थापक स्वर्गीय दुर्ग सोरेन की 17वीं पुण्यतिथि दुर्गा सोरेन चौक रांची पर मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और स्व. सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी, पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे, मुश्ताक आलम, अंतू तिर्की, उमेश यादव, रामशरण विश्वकर्मा, तारकेश्वर महतो, वीरू साहू, अभय ढूंढो, सुनील टीका, शांति चामू, बाग कुजूर, पवन तिर्की, बिहारी गोप, उत्तम यादव एवं पवन जेडिया समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रांची। झारखंड के गोमिया क्षेत्र के पूर्व विधायक और बिहार-झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह को गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गोमिया प्रखंड के साड़म स्थित बोकारो नदी तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में समर्थक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। क्षेत्र के लोग अपने लोकप्रिय जननेता को नम आंखों से विदाई देने पहुंचे। श्मशान घाट पर सशस्त्र बलों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर दिवंगत नेता को सलामी दी। राजकीय सम्मान की प्रक्रिया पूरी होते ही पूरा साड़म क्षेत्र “माधव लाल अमर रहें” और “गोमिया का एक लाल कैसा हो माधव लाल जैसा हो” जैसे नारों से गूंज उठा। माहौल बेहद भावुक हो गया और समर्थकों की आंखें नम दिखाई दीं। कई मंत्री, नेता और अधिकारी रहे मौजूद अंतिम संस्कार में झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री Yogendra Prasad, बोकारो उपायुक्त Ajay Nath Jha, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Rajesh Thakur समेत कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा झामुमो जिलाध्यक्ष रतनलाल मांझी, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र राज, एसडीपीओ बेरमो बीएन सिंह, बीडीओ महादेव कुमार महतो और सीओ आफताब आलम भी उपस्थित रहे। क्षेत्र में शोक की लहर माधव लाल सिंह को क्षेत्र में गरीबों की आवाज और सामाजिक सरोकारों से जुड़े जननेता के रूप में जाना जाता था। उनके निधन से गोमिया सहित पूरे बोकारो क्षेत्र में शोक की लहर है। बुधवार को रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि माधव बाबू आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
रांची। झारखंड में CCTV इंस्टॉलेशन को लेकर नये घोटाले का आरोप लगा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर CCTV टेंडर में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में CCTV इंस्टॉलेशन की निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और यह मामला शराब घोटाले की तरह किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश जैसा दिख रहा है। शुरू हो गया टेंडर का खेल बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि पहले जारी की गई निविदा को निरस्त कर दिया गया, लेकिन अब दोबारा उसी तरह की निविदा निकाली गई है। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया को एक खास सिंडिकेट के अनुसार तैयार किया जा रहा है। पत्र में उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम का भी जिक्र किया और कहा कि कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर इस कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश हो रही है। बड़े अधिकारियों पर भी आरोप मरांडी ने अपने आरोपों में पूर्व आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल का नाम लेते हुए कहा कि जिस विभाग में पहले से भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारी रहे हों, वहां पारदर्शिता की उम्मीद कम ही है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि “जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, वो उतना बड़ा अधिकारी” वाली स्थिति राज्य में बन गई है। संविदा कर्मियों को धमकाने का आरोप पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर फाइल आगे बढ़वाई गई। मरांडी ने कहा कि पहले जहां कर्मचारियों को दो साल का सेवा विस्तार मिलता था, अब सिर्फ छह महीने का विस्तार दिया जा रहा है, ताकि विरोध की आवाज दबाई जा सके। दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि केवल निविदा रद्द करना काफी नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी राजनीतिक और प्रशासनिक लपट सरकार तक भी पहुंच सकती है।
हॉलीवुड अभिनेत्री Rebel Wilson ने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर बड़ी खुशखबरी साझा की है। उन्होंने अपनी पत्नी Ramona Agruma के साथ दूसरी बेटी का स्वागत किया है। कपल ने अपनी नवजात बच्ची का नाम Rose Estelle रखा है और सोशल मीडिया पर उसकी पहली तस्वीर भी शेयर की है। परिवार में आई नई खुशी 4 मई 2026 को इस खुशखबरी की घोषणा करते हुए कपल ने बताया कि अब उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह उनके लिए बेहद खास और भावुक पल है। पोस्ट के साथ शेयर की गई तस्वीर में उनकी बड़ी बेटी Royce Lillian अपनी नवजात बहन को गोद में लिए नजर आ रही हैं, जो फैंस को बेहद पसंद आ रही है। “Our little angels” – मां का इमोशनल पोस्ट रिबेल विल्सन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी दोनों बेटियों की तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “Our little angels” बताया। इस तस्वीर में दोनों बहनों की बॉन्डिंग साफ झलकती है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया। पहले भी सरोगेसी से बनी थीं मां कपल की पहली बेटी Royce Lillian का जन्म नवंबर 2022 में सरोगेसी के जरिए हुआ था। अब दूसरी बेटी के आगमन के साथ उनका परिवार और भी पूरा हो गया है। प्यार से शादी तक का सफर रिबेल और रमौना का रिश्ता जून 2022 में सार्वजनिक हुआ था। फरवरी 2023 में सगाई मार्च 2023 में ऑस्कर पार्टी में पहली रेड कार्पेट अपीयरेंस नवंबर 2024 में इटली में शादी उनकी लव स्टोरी काफी तेजी से आगे बढ़ी और अब वे दो बच्चों के साथ खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। फैंस दे रहे बधाइयां जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर फैंस और सेलेब्रिटीज ने कपल को बधाइयों से भर दिया। रिबेल विल्सन की यह नई पारी उनके जीवन के सबसे खूबसूरत अध्यायों में से एक मानी जा रही है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत के बाद पूर्वी भारत की राजनीति का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। इस बदलाव के बीच झारखंड अब एकमात्र ऐसा प्रमुख राज्य बचा है, जहां हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन की सरकार कायम है। ऐसे में झारखंड को “पूर्वी भारत का अंतिम किला” माना जा रहा है। झारखंड में बढ़ी राजनीतिक हलचल बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य चारों ओर से भाजपा या एनडीए शासित राज्यों से घिरा हुआ है बिहार, ओडिशा और अब बंगाल में भी भाजपा का प्रभाव बढ़ चुका है। इससे राज्य की मौजूदा सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की चर्चा है। क्या शुरू होगी ‘राजनीतिक घेराबंदी’? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब झारखंड में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है। वहीं JMM और उसके सहयोगी दल इसे चुनौती के रूप में देख रहे हैं। झामुमो नेताओं का दावा है कि वे राज्य में विपक्ष को मजबूती देने का काम करेंगे। गठबंधन के सामने चुनौतियां झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन झामुमो, कांग्रेस और राजद के सामने सबसे बड़ी चुनौती एकजुटता बनाए रखना है। राजनीतिक हलकों में दल-बदल, अंदरूनी मतभेद और केंद्र के साथ टकराव जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में सरकार की स्थिरता भी अहम सवाल बनी हुई है। आदिवासी वोट बैंक और विकास मुद्दे विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है, जो Hemant Soren की ताकत भी है। वहीं बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार के प्रदर्शन से ही जनता का समर्थन तय होगा। 2029 की राजनीति में अहम भूमिका झारखंड की 14 लोकसभा सीटें 2029 के आम चुनावों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यदि मौजूदा सरकार मजबूत रहती है, तो विपक्ष को पूर्वी भारत में आधार मिलेगा। वहीं अगर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो भाजपा का पूर्वी विस्तार और मजबूत हो सकता है।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के डिस्चार्च पिटीशन पर रांची के पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गयी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के 8.87 एकड़ भूमि घोटाले से संबंधित मनी लाउंड्रिंग को लेकर कोर्ट में डिस्चार्ज पिटीशन दायर कर रखा है। जानकारी के अनुसार कोर्ट में ED और हेमंत सोरेन की ओर से हुई बहस पूरी हो गयी। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को 8 मई तक लिखित रूप में भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। 5 दिसंबर 2025 को याचिका दाखिल की थी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व में कोर्ट में 5 दिसंबर 2025 को याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने अपने को बेदाग बताते हुए आरोप मुक्त करने का आग्रह किया था। उधर ईडी ने इस मामले में लगभग 10 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। भूमि घोटाले से जुड़े इस मामले में ईडी द्वारा कई आरोपियों के यहां छापेमारी की गयी थी। साथ ही कई को दफ्तर बुला कर पूछताछ की गयी थी। इसी मामले में ईडी ने हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। हालांकि 24 जून 2024 को हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गयी थी।
रांची। झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव की आहट के साथ ही 'इंडी' गठबंधन के भीतर रार शुरू हो गई हैं। राज्य की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। वर्तमान में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, जिससे दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। हालांकि, विवाद इस बात पर है कि इन सीटों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? कांग्रेस जहां पिछले 'त्यागों' का हवाला देकर अपनी हिस्सेदारी मांग रही है, वहीं झामुमो सबसे बड़े दल के रूप में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है। कम से कम एक सीट चाहए कांग्रेस को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू के अनुसार पार्टी इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने तर्क दिया है कि पिछले तीन चुनावों में गठबंधन को केवल एक-एक सीट मिली थी और हर बार कांग्रेस ने झामुमो का समर्थन किया। अब जबकि गठबंधन की स्थिति मजबूत है, कांग्रेस उच्च सदन में अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। इस मसले पर पांच राज्यों के चुनावों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच निर्णायक बातचीत होने की उम्मीद है। झारखंड में राज्यसभा जीत का गणित झारखंड में खाली हो रही दो सीटों का समीकरण काफी दिलचस्प है। इनमें से एक सीट झामुमो के दिग्गज नेता शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हो रही है। 81 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन की ताकत और सीटों के बंटवारे फॉर्मूला जबर्दस्त है। सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थनः वर्तमान में सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। झामुमो के पास 34 विधायक हैं। कांग्रेस 16 विधायकों के साथ दूसरी बड़ी ताकत है। RJD के 4 और वामपंथी दलों के 2 विधायक भी इस समीकरण का हिस्सा हैं। संख्या बल के आधार पर गठबंधन आसानी से दोनों सीटें जीत सकता है, बशर्ते आपसी सहमति बने। कांग्रेस पीछे हटने के मूड में नही कांग्रेस इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है। पिछले तीन चुनावों में गठबंधन को केवल एक-एक सीट मिली थी और हर बार कांग्रेस ने झामुमो का समर्थन किया। अब जबकि गठबंधन की स्थिति मजबूत है, कांग्रेस उच्च सदन में अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। कांग्रेस पभारी के. राजू ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं। JMM की रणनीति से दबाव में बड़े दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) 34 विधायकों के साथ सदन का सबसे बड़ा दल है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीति में उनकी भूमिका सर्वोपरि है, इसलिए वे दोनों सीटों पर अपने ही प्रत्याशी उतारना चाहते हैं। झामुमो के रणनीतिकारों का तर्क है कि रिक्त हुई एक सीट उनके दिवंगत नेता की है, जिसे वे किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहेंगे। दूसरी सीट पर भी वे अपने जनाधार को देखते हुए दावा मजबूत कर रहे हैं। गठबंधन के भीतर बढ़ती असहजता राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर भविष्य के चुनावों और गठबंधन की स्थिरता पर पड़ सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं, लेकिन झामुमो का अड़ियल रुख खींचतान को और बढ़ा सकता है। अब सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की समन्वय बैठक पर टिकी हैं, जहां इस शक्ति प्रदर्शन का अंतिम फैसला होगा।
रांची। ED से जुड़े एक मामले में झारखंड सरकार को करारा झटका लगा है। झारखंड में ईडी के अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी की जांच को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआइ से कराने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। यानी इस मामले की सीबीआइ जांच जारी रहेगी। जांच में आयेगी तेजी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा और हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई जांच पर रोक लगाने की मांग की, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार नहीं किया। इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस पूरे प्रकरण की सघन जांच सीबीआई से कराई जाएगी। घोटाले के आरोपी ने ईडी अधिकारियों पर लगाया था आरोप विवाद की शुरुआत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मचारी संतोष कुमार की एक शिकायत से हुई थी। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संतोष कुमार ने आरोप लगाया था कि 12 जनवरी को रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इस शिकायत के आधार पर रांची के एयरपोर्ट थाना में ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद रांची पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए ईडी कार्यालय पहुंचकर छापेमारी की। इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। ईडी कार्यालय की सुरक्षा ईडी ने झारखंड पुलिस की इस कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में अवैध हस्तक्षेप और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 11 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि मामले की निष्पक्षता के लिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने न केवल पुलिस जांच पर रोक लगा दी थी, बल्कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अर्धसैनिक बलों को सौंपने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका के जरिए चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि पुलिस को अपनी जांच करने का अधिकार है।
गढ़वा। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ट्रेजरी घोटाले को लेकर कहा है कि साल 2000 से 2026 तक हुए सभी ट्रेजरी घोटालों की जांच कराई जाएगी और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार का एक-एक रुपया वापस लिया जाएगा, चाहे उसके लिए दोषियों की चल-अचल संपत्ति ही क्यों न जब्त करनी पड़े। घोटाले का आंकड़ा पहुंचा 30-40 करोड़ तक वित्त मंत्री ने बताया कि झारखंड में अब तक ट्रेजरी घोटाले का आंकड़ा 30 से 40 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इनमें सबसे ज्यादा मामले बोकारो और हजारीबाग से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से भी चर्चा हुई है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। 33 ट्रेजरी की होगी जांच मंत्री ने साफ किया कि राज्य के सभी 24 जिलों के 33 ट्रेजरी की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां-जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां सख्त कार्रवाई होगी और दोषियों से पूरी राशि वसूली जाएगी। संपत्ति जब्त कर होगी रिकवरी वित्त मंत्री ने दो टूक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो दोषियों की जमीन, मकान और अन्य संपत्ति जब्त कर सरकार का पैसा वापस लिया जाएगा। इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली है, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून 2026 को पूरा होने के बाद खाली होगी। ताजा राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विधानसभा में संख्या बल के आधार पर सत्ताधारी गठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में दिख रहा है, लेकिन JMM और कांग्रेस के बीच दावेदारी की खींचतान ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। क्या है सीटों का गणित झारखंड विधानसभा की मौजूदा तस्वीर में JMM, कांग्रेस, राजद और माले मिलाकर सत्ता पक्ष के पास पर्याप्त संख्या है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक उम्मीदवार को जीत के लिए 27–28 वोट की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में एक सीट पर JMM की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस भी अपना दावा मजबूत कर रही है। यही वजह है कि गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस बनाम JMM, असली पेच दूसरी सीट पर कांग्रेस का साफ संकेत है कि वह कम-से-कम एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतारना चाहती है। दूसरी ओर, JMM दोनों सीटों पर दावा ठोक रही है। हाल के महीनों में असम चुनाव में तालमेल न बनने और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों ने दोनों दलों के रिश्तों में हल्की खटास की चर्चा को और हवा दी है। अगर यह मतभेद बढ़ता है, तो दूसरी सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है। क्या BJP खेल बिगाड़ सकती है? भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। लेकिन अगर वह दूसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है और क्रॉस-वोटिंग या रणनीतिक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो मुकाबला कांटे का हो सकता है। फिलहाल पूरा खेल इस बात पर टिका है कि JMM और कांग्रेस साथ बैठकर फॉर्मूला निकालते हैं या नहीं। यही तय करेगा कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव सिर्फ औपचारिकता रहेगा या बड़ा राजनीतिक मुकाबला बनेगा।
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने बाबा भोलेनाथ और माता पार्वती की आरती उतारकर राज्य की सुख-समृद्धि और जनता के कल्याण की कामना की। इस दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य और समर्थक भी मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं से मुलाकात, बाजार का किया दौरा पूजा के बाद रघुवर दास ने मंदिर कार्यालय में स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने बासुकीनाथ बाजार का दौरा किया और दुकानदारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप मीडिया से बातचीत में उन्होंने राज्य की Hemant Soren सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। खासकर ‘मंईयां सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 18 से 50 वर्ष की महिलाओं को ₹2500 प्रतिमाह देने का वादा अधूरा है और कई लाभार्थी इससे वंचित हैं। विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सवाल रघुवर दास ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ था। उन्होंने संथाल परगना में एम्स, साहिबगंज गंगा पुल और एयरपोर्ट जैसी योजनाओं को उदाहरण बताया। उनके अनुसार वर्तमान सरकार में विकास की गति धीमी पड़ गई है। कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर चिंता उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। रघुवर दास ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और इससे आम लोगों में डर का माहौल बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। सीएम के बयान पर जताई आपत्ति पूर्व मुख्यमंत्री ने विधानसभा में धार्मिक टिप्पणियों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है और इस तरह की टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।