Khyber Pakhtunkhwa

French woman and her five children rescued in Pakistan after allegedly living in isolation for nearly a decade.
पाकिस्तान में 10 साल तक कथित कैद में रही फ्रांसीसी महिला और पांच बच्चों को मिली आजादी, बेटे की बहादुरी से खुला राज

  इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फ्रांसीसी महिला और उसके पांच बच्चे कथित तौर पर लगभग एक दशक तक अलग-थलग और कैद जैसी परिस्थितियों में रहने को मजबूर रहे। परिवार को तब राहत मिली, जब महिला के एक बेटे ने किसी तरह घर से बाहर निकलकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी क्षेत्र बारा का है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार को लंबे समय तक बाहरी दुनिया से काटकर रखा गया था और महिला के पति पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। बेटे ने पुलिस तक पहुंचाई जानकारी अधिकारियों के मुताबिक, परिवार के एक बच्चे ने साहस दिखाते हुए घर से बाहर निकलकर पुलिस को अपनी स्थिति के बारे में बताया। सूचना मिलने के बाद 18 जून को पुलिस ने संबंधित घर पर छापा मारा। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो 54 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक सिल्वी यास्मीना और उनके पांच बच्चे एक छोटे और जर्जर कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिवार की हालत बेहद खराब थी और कुछ सदस्यों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए। रेस्क्यू के बाद सभी को तत्काल पेशावर स्थित महिला आश्रय गृह में भेजा गया, जहां उन्हें चिकित्सा और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला ने लगाए गंभीर आरोप जांच के दौरान सिल्वी यास्मीना ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें और उनके बच्चों को वर्षों तक स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार नहीं मिला। महिला के अनुसार, परिवार को लगातार भय और दबाव में रखा गया तथा पति द्वारा नियमित रूप से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें लगने लगा था कि उनका और उनके बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है। महिला ने कहा कि परिवार को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग कर दिया गया था। बच्चों की पढ़ाई भी हुई प्रभावित पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार के सदस्यों को अन्य लोगों से मिलने-जुलने की अनुमति नहीं थी। महिला ने बताया कि 2014 में ऑस्ट्रेलिया से पाकिस्तान आने के बाद परिवार पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे। जानकारी के मुताबिक, परिवार के दो बड़े बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट गई, जबकि पाकिस्तान में जन्मे तीन छोटे बच्चों का कभी किसी स्कूल में दाखिला नहीं कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर इसका गंभीर असर पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में हुई थी शादी पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, सिल्वी यास्मीना और उनके पति की मुलाकात ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। दोनों ने वर्ष 2003 में विवाह किया था और कुछ वर्षों तक वहीं रहे। बाद में 2014 में परिवार अपने दो बड़े बच्चों के साथ पाकिस्तान आ गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पाकिस्तान आने के बाद परिवार किन परिस्थितियों में रह रहा था और कथित उत्पीड़न कब से शुरू हुआ। पति हिरासत में, जांच जारी पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न सबूत जुटाए जा रहे हैं तथा मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। इस बीच, फ्रांसीसी दूतावास को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। महिला और उनके बच्चों ने फ्रांस लौटने की इच्छा जताई है। संबंधित अधिकारियों के बीच उनकी वापसी को लेकर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मानवाधिकारों को लेकर उठे सवाल इस घटना ने पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लंबे समय तक घरेलू हिंसा और सामाजिक अलगाव का एक गंभीर मामला माना जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Police personnel outside a Gurudwara in Pakistan after elderly Sikh couple were shot dead by unidentified gunmen.
पाकिस्तान में गुरुद्वारे के भीतर बुजुर्ग सिख दंपती की हत्या, हमलावरों ने घुसकर मारी गोली; अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक गुरुद्वारे के भीतर बुजुर्ग सिख दंपती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मर्दान जिले के ख्वाजा गंज बाजार स्थित गुरुद्वारे में बुधवार को अज्ञात हमलावरों ने घुसकर 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी असमा वंती की हत्या कर दी। दोनों दंपती गुरुद्वारे की देखभाल का कार्य करते थे। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर सिख समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुद्वारे में घुसकर की गई फायरिंग पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावर गुरुद्वारे में दाखिल हुए और दंपती पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर मर्दान जिले में हुई। सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू 1122 की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी गई। सुरक्षा में बड़ी चूक, ड्यूटी पर नहीं था पुलिसकर्मी प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई है। घटना के समय गुरुद्वारे की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद नहीं था। इसके अलावा, परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) भी काम नहीं कर रहा था, जिससे हमलावरों की पहचान करने में जांच एजेंसियों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव, कई पहलुओं से जांच दंपती के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मर्दान जिला मुख्यालय अस्पताल भेज दिया गया है। मर्दान के जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) मसूद अहमद और एसएसपी (इन्वेस्टिगेशन) मारिया मुस्तफा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है और हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। फिलहाल हत्या के पीछे का मकसद स्पष्ट नहीं हो पाया है। खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर ने की घटना की निंदा खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने घटना को ‘दुखद’ और ‘निंदनीय’ करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि मर्दान के गुरुद्वारे में सिख समुदाय के बुजुर्ग दंपती की हत्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पीड़ित परिवार और सिख समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। अकाल तख्त ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और खैबर पख्तूनख्वा सरकार से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिख समुदाय पहले से ही अल्पसंख्यक है और गुरुद्वारे के भीतर हुई यह हत्या बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना है। उन्होंने कहा, "यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक वास्तव में सुरक्षित हैं?" अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल गुरुद्वारे के भीतर बुजुर्ग सिख दंपती की हत्या ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान में सिख, हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जाती रही है। इस घटना के बाद सिख संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त संरक्षण देने की मांग की है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Security personnel and rescue teams at blast site after suicide attack in Pakistan’s Khyber Pakhtunkhwa
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती हमला, 8 लोगों की मौत, 35 से ज्यादा घायल

Pakistan के Khyber Pakhtunkhwa प्रांत में मंगलवार को बड़ा आत्मघाती हमला हुआ। लक्की मारवत जिले के नौरंग बाजार इलाके में हुए इस विस्फोट में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे ऑटो रिक्शा में धमाका किया। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा अधिकारी और महिला समेत कई लोगों की मौत अधिकारियों के अनुसार मृतकों में दो सुरक्षा अधिकारी और एक महिला भी शामिल हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। धमाका नौरंग बाजार के फाटक चौक इलाके में हुआ, जो उस समय काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र था। गंभीर घायलों को पेशावर और बन्नू रेफर किया गया घायलों को पहले सराय नौरंग के तहसील मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में जिन लोगों की हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें Bannu और Peshawar के अस्पतालों में रेफर किया गया। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक कई घायलों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। अस्पतालों में आपातकाल घोषित विस्फोट के बाद इलाके के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई। सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को तत्काल ड्यूटी पर बुलाया गया। राहत एवं बचाव एजेंसी Rescue 1122 की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री Mohammad Suhail Afridi ने घटना पर दुख जताते हुए पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज समेत हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। बाजार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि हमले के पीछे शामिल नेटवर्क की तलाश जारी है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Rescue teams and security forces at blast site after deadly explosion in Pakistan’s Khyber Pakhtunkhwa province.
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बड़ा बम धमाका, 9 की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

Pakistan के अशांत प्रांत Khyber Pakhtunkhwa में मंगलवार को एक बड़ा बम धमाका हुआ, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 23 लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धमाका लक्की मारवत जिले के एक भीड़भाड़ वाले बाजार में हुआ। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के कई दुकानें और वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। मरने वालों में दो ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं। कैसे हुआ धमाका? पुलिस के मुताबिक, विस्फोटकों से लदे एक लोडर रिक्शा में धमाका हुआ। घटना उस समय हुई जब बाजार में काफी भीड़ थी। धमाके के तुरंत बाद: बचाव दल मौके पर पहुंचे घायलों को नौरंग अस्पताल ले जाया गया इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी गई Rescue 1122 की टीमों ने राहत और बचाव अभियान चलाया। जांच में जुटी पुलिस और बम निरोधक टीम घटना के बाद पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने पूरे इलाके को घेर लिया और सबूत जुटाने शुरू कर दिए। स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में मदद की और बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करते दिखाई दिए। आसिम मुनीर और शहबाज सरकार पर फिर दबाव यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान में लगातार आतंकी घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे Asim Munir और Shehbaz Sharif की सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि खैबर पख्तूनख्वा और बन्नू जैसे इलाकों में लगातार हो रहे हमले पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। बन्नू हमले के बाद बढ़ा तनाव इस धमाके से कुछ दिन पहले ही बन्नू जिले में फतेह खेल पुलिस चौकी पर बड़ा कार बम हमला हुआ था, जिसमें कम से कम 15 पुलिसकर्मी मारे गए थे। उस हमले के बाद पाकिस्तान ने Afghanistan पर गंभीर आरोप लगाए थे। पाकिस्तान का दावा है कि: हमले की साजिश अफगानिस्तान में बैठे आतंकियों ने रची अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए हो रहा है इसी मामले में पाकिस्तान ने अफगान चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर विरोध दर्ज कराया था। पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ने के संकेत पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने हालिया बयान में कहा कि देश “निर्णायक जवाबी कार्रवाई” का अधिकार रखता है। इस बयान को पाकिस्तान और अफगान तालिबान शासन के बीच बढ़ते तनाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। क्यों अहम है खैबर पख्तूनख्वा? Khyber Pakhtunkhwa लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों और उग्रवादी हमलों से प्रभावित रहा है। अफगान सीमा से लगे इस इलाके में: पुलिस चौकियों सुरक्षा बलों बाजारों और सार्वजनिक स्थानों को अक्सर निशाना बनाया जाता रहा है। ताजा धमाके ने एक बार फिर पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय अस्थिरता को उजागर कर दिया है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0