Kolkata Police

Kolkata Police escort accused Ranjit Singh after his arrest over alleged objectionable social media posts against Prime Minister Narendra Modi and Suvendu Adhikari.
पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला गिरफ्तार, 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया आरोपी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कसबा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कसबा थाना पुलिस ने आरोपी रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अलीपुर अदालत ने आरोपी को 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। नस्कर हाट इलाके से हुई गिरफ्तारी पुलिस के अनुसार, आरोपी रंजीत सिंह को नस्कर हाट इलाके से गिरफ्तार किया गया। उस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ अभद्र और भ्रामक टिप्पणियां पोस्ट करने का आरोप है। अदालत में सरकारी पक्ष ने रखा कड़ा रुख रविवार को आरोपी को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील शुभाशीष भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि आरोपी लगातार सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री और राज्य के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहा था। सरकारी पक्ष ने कहा कि आरोपी की टिप्पणियों का उद्देश्य केवल नेताओं की छवि धूमिल करना नहीं था, बल्कि समाज में भ्रम, अशांति और भ्रामक सूचनाएं फैलाना भी था। पुलिस हिरासत की मांग मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी वकील ने आरोपी की पुलिस हिरासत की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि यह जांच करना आवश्यक है कि आरोपी ने यह गतिविधि अकेले की या इसके पीछे किसी संगठित समूह अथवा साजिश का हाथ है। 27 जून तक पुलिस कस्टडी अलीपुर अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रंजीत सिंह को 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया है। सोशल मीडिया अकाउंट और फोन रिकॉर्ड की जांच शुरू पुलिस अब आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स, मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आपत्तिजनक पोस्ट के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या सुनियोजित अभियान तो नहीं था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Rewarded woman Maoist leader Shakuntala Mahato surrenders at Kolkata Police Headquarters with a firearm and ammunition.
कोलकाता में 10 लाख की इनामी महिला नक्सली शकुंतला महतो का सरेंडर, हथियार और कारतूस किए जमा

  कोलकाता: झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सक्रिय रही 10 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली शकुंतला महतो ने कोलकाता में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। महिला माओवादी ने लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में एक हथियार और 46 कारतूस के साथ सरेंडर किया। लालबाजार में किया आत्मसमर्पण, पुलिस ने दी जानकारी कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने जानकारी दी कि शकुंतला महतो भाकपा (माओवादी) की जोनल कमेटी की सदस्य रही है और लंबे समय से पूर्वी भारत के नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय थी। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद सरकार की नीति के अनुसार उसके पुनर्वास और कानूनी औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 2001 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी शकुंतला महतो जानकारी के अनुसार, झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी की रहने वाली शकुंतला महतो वर्ष 2001 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। इसके बाद वह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रही। हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील आत्मसमर्पण के बाद शकुंतला महतो ने कहा कि उसने सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में हिंसा का रास्ता छोड़ा है। उन्होंने अन्य माओवादियों से भी अपील की कि वे मुख्यधारा में लौट आएं और विकास की प्रक्रिया में शामिल हों। शकुंतला महतो ने कहा, “जो लोग अभी भी संगठन में हैं, वे हिंसा छोड़कर समाज में वापस आएं। सरकार पुनर्वास और बेहतर जीवन के अवसर दे रही है।” नक्सली नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका का दावा पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शकुंतला महतो माओवादी संगठन के भीतर कई गतिविधियों और रणनीतिक योजनाओं में शामिल रही थी। उसे झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई नक्सल गढ़ों में सक्रिय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। बेलपहाड़ी, घाटशिला और सारंडा में रही सक्रिय अधिकारियों ने बताया कि वह बेलपहाड़ी, दलमा, घाटशिला, पारसनाथ, बुंडू-तमाड़ और सारंडा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रही। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते कई माओवादी या तो मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए हैं। नक्सल आंदोलन पर प्रभाव, सरेंडर बढ़ने के संकेत पुलिस का मानना है कि लगातार हो रहे सरेंडर और गिरफ्तारियों से नक्सली नेटवर्क कमजोर हो रहा है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में और भी माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
kolkata police
बंगाल में कानून व्यवस्था पर बड़ा फोकस, कोलकाता पुलिस कर रही सीआरपीएफ जैसी तैयारी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब कोलकाता पुलिस को केंद्रीय सुरक्षा बलों की तर्ज पर आधुनिक दंगा-निरोधक उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य पुलिस बल को दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र बलों के समान तकनीकी और सुरक्षा संसाधनों से लैस करना है।   यह फैसला 18 मई को कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में हुई पत्थरबाजी की घटना के बाद लिया गया है। उस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 26 मई को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय का दौरा किया और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर कानून व्यवस्था की समीक्षा की।   बेहतर सुरक्षा उपकरणों पर जोर बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि दंगों और भीड़ नियंत्रण से निपटने के लिए पुलिस के पास अत्याधुनिक उपकरण होने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि कोलकाता पुलिस को वही स्तर के उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिनका इस्तेमाल दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ जैसे बल करते हैं।   मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कोलकाता पुलिस ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता संयुक्त आयुक्त (आधुनिकीकरण) नीलांजन बिस्वास कर रहे हैं। समिति को मौजूदा उपकरणों की समीक्षा कर नए संसाधनों की जरूरत का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है।   15 दिनों में रिपोर्ट देगी समिति समिति हेलमेट, बॉडी प्रोटेक्टर, दंगा-रोधी ढाल, गैर-घातक हथियार, आंसू गैस प्रणाली, रबर बुलेट, वाटर कैनन और वज्र दंगा-रोधी वाहनों जैसे उपकरणों का अध्ययन करेगी। इसके बाद केंद्रीय बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों से तुलना कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।   अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान उपकरण खराब नहीं हैं, लेकिन बदलते हालात को देखते हुए आधुनिक और अधिक सुरक्षित संसाधनों की जरूरत महसूस की जा रही है। समिति को अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपनी होगी, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

Unknown मई 29, 2026 0
ED officials conduct raids in Kolkata and Murshidabad over alleged extortion racket linked to ex-IPS officer
बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, पूर्व IPS अफसर से जुड़े कथित उगाही रैकेट की जांच तेज

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया। ईडी ने कथित उगाही रैकेट से जुड़े मामले में कोलकाता और मुर्शिदाबाद समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई अपराधी बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक कारोबारी के घर, एक होटल और कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर छापा मारा। इसके अलावा जांच एजेंसी की एक टीम मुर्शिदाबाद जिले के कांडी स्थित शांतनु सिन्हा विश्वास के घर भी पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई जगहों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी देखी गई, ताकि तलाशी अभियान के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ईडी ने इस मामले में कुल नौ ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की है। जांच के दायरे में एमडी अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और मुर्शिदाबाद स्थित अन्य संदिग्ध ठिकाने भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कथित उगाही नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसके जरिए बड़े स्तर पर अवैध वसूली की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कुछ प्रभावशाली लोगों और स्थानीय संपर्कों से भी जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद कार्रवाई ईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर शुक्रवार को यह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और उगाही से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि यह मामला कथित उगाही और अवैध वसूली से जुड़ा है, जिसमें अपराधियों और कुछ पुलिस अधिकारियों के बीच कथित संबंधों की जांच की जा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई है, उनकी तरफ से भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? ईडी की टीमें फिलहाल सभी स्थानों पर सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।  

surbhi मई 22, 2026 0
AIMIM leader Waris Pathan reacts to Kolkata road namaz controversy during media interaction
कोलकाता नमाज विवाद पर AIMIM के वारिस पठान का बयान, बोले- ‘हिंदू करें तो ठीक, मुसलमान पढ़े तो दिक्कत क्यों?’

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के राजाबाजार इलाके में सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर हुए विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब Waris Pathan ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर कोई मुसलमान कुछ मिनटों के लिए सड़क पर नमाज पढ़ता है, तो इससे लोगों को परेशानी क्यों होती है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि मुसलमान मजबूरी में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करते हैं, शौक से नहीं। ‘5-10 मिनट की नमाज से किसे दिक्कत?’ न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में वारिस पठान ने कहा, “अगर कोई मुसलमान शुक्रवार के दिन 5-10 मिनट के लिए सड़क पर खड़े होकर नमाज पढ़ता है, तो इससे किसके पेट में दर्द होता है? मस्जिदों में जगह नहीं होती, इसलिए लोग बाहर आकर नमाज पढ़ लेते हैं।” उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति धूप, बारिश या सड़क पर खड़े होकर नमाज पढ़ना पसंद नहीं करता, लेकिन कई बार जगह की कमी के कारण ऐसा करना पड़ता है। ‘हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों पर सवाल नहीं उठते’ वारिस पठान ने दावा किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अन्य धर्मों के आयोजन भी होते हैं, लेकिन उन पर वैसी आपत्ति नहीं उठाई जाती। उन्होंने कहा, “हमने कई बार देखा है कि ट्रेनों में पूजा-पाठ होता है, गरबा होता है, एयरपोर्ट पर धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन मुसलमान नमाज पढ़ लें तो FIR दर्ज हो जाती है, लोगों को जेल भेज दिया जाता है। यह संविधान की बराबरी की भावना के खिलाफ है।” क्या है पूरा मामला? दरअसल, शुक्रवार को कोलकाता के राजाबाजार इलाके में कुछ लोगों ने सड़क पर नमाज अदा करने की कोशिश की थी। इसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई और यातायात भी प्रभावित हुआ। राज्य में नई सरकार बनने के बाद सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजन और सड़क जाम को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, अतिरिक्त पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया। राजनीतिक बयानबाजी तेज इस मुद्दे पर अब राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए हैं। AIMIM ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों का मुद्दा बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। मामले को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस लगातार तेज हो रही है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Heavy security deployment and traffic restrictions in Kolkata ahead of PM Modi’s visit and oath ceremony
PM Modi Kolkata Visit: शपथ ग्रहण से पहले कोलकाता में हाई अलर्ट, 16 घंटे तक  भारी वाहनों की एंट्री बंद

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोलकाता में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है. प्रधानमंत्री Narendra Modi के 9 मई के दौरे और Brigade Parade Ground में होने वाले भव्य समारोह को देखते हुए Kolkata Police ने विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. 16 घंटे तक भारी वाहनों पर रोक कोलकाता पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक शहर में भारी और मालवाहक वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी. हालांकि एलपीजी, ऑक्सीजन, दूध, दवा, फल-सब्जी और मछली जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट दी गई है. कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट ब्रिगेड परेड ग्राउंड और Victoria Memorial के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इस वजह से कई अहम मार्गों पर ट्रैफिक बंद या डायवर्ट रहेगा. इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा: एस्प्लेनेड खिदिरपुर रोड हॉस्पिटल रोड क्वींसवे एजेसी बोस रोड कैथेड्रल रोड पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इन रास्तों से बचें और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें. नो-पार्किंग जोन घोषित विक्टोरिया मेमोरियल और ब्रिगेड ग्राउंड के आसपास कई इलाकों को नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया है. नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी. बस और ट्राम सेवाएं भी प्रभावित मध्य कोलकाता और ब्रिगेड इलाके की ओर जाने वाली कई बस और ट्राम सेवाओं के रूट बदले जा सकते हैं. यात्रियों को देरी और ट्रैफिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है. पुलिस ने लोगों को मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह दी है. 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना प्रशासन को उम्मीद है कि शपथ ग्रहण समारोह में करीब 10 लाख लोग शामिल हो सकते हैं. इसे देखते हुए शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है. करीब 4 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और स्नाइपर्स के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है. ब्रिगेड ग्राउंड बना ‘नो-फ्लाई जोन’ सुरक्षा कारणों से ब्रिगेड परेड ग्राउंड को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है. निजी ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. नागरिकों के लिए पुलिस की अपील कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें. रियल-टाइम जानकारी के लिए पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर नजर रखने की सलाह दी गई है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0