पुणे: मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 15 सेकेंड के इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले की जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है। वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नाइटक्लब में फोन पर बातचीत का वीडियो बताया जा रहा है कि यह वीडियो दिसंबर 2025 का है। वीडियो में सिया गोयल एक नाइटक्लब में दिखाई दे रही हैं। उनके हाथ में बीयर की बोतल जैसी वस्तु नजर आती है और वह मोबाइल फोन पर किसी से बात करती दिख रही हैं। वीडियो की शुरुआत में सिया फोन उठाकर "कौन?" कहती हैं। तेज संगीत के कारण वह एक कान पर हाथ रखकर कॉल सुनने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह कथित तौर पर गुस्से में कहती सुनाई देती हैं, "पहले चीट करता है, फिर मुझे ही कॉल करता है।" जांच में नया एंगल वीडियो सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि सिया गोयल उस समय किससे बात कर रही थीं। साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि उन्होंने जिस व्यक्ति पर धोखा देने का आरोप लगाया, वह कौन था और क्या उसका इस मामले से कोई संबंध है। अभी तक पुलिस ने इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। शराब पीने को लेकर भी चर्चा पिछले सप्ताह कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पुलिस हिरासत के दौरान सिया गोयल ने बीयर की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस द्वारा मना किए जाने के बाद उन्होंने दोबारा ऐसी मांग नहीं की। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि उन्हें शराब पीने की आदत थी। परिवार ने आरोपों को बताया गलत सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने इन सभी दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के शराब पीने, पार्टी करने या बीयर मांगने संबंधी बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी बेटी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच जारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।
पुणे: चर्चित पुणे मर्डर केस में आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल ने मामले को लेकर कई नए दावे किए हैं। साहिल का कहना है कि सिया प्रॉपर्टी कारोबारी केतन अग्रवाल से शादी कर उनके साथ अपना भविष्य बनाना चाहती थी और उसने खुद उनसे कहा था कि उसका चेतन चौधरी से कोई रिश्ता नहीं है। पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि सिया और चेतन एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। पुलिस के अनुसार, सिया की शादी पहले से केतन अग्रवाल से तय होने के कारण दोनों ने कथित तौर पर केतन की हत्या की साजिश रची। इस मामले में सिया और चेतन पर 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। 'सिया ने कहा था, पूरी जिंदगी केतन के साथ बिताना चाहती हूं' एक मीडिया इंटरव्यू में साहिल गोयल ने दावा किया कि सिया ने उनसे स्पष्ट कहा था कि वह केवल केतन अग्रवाल से शादी करना चाहती है। साहिल के मुताबिक, सिया ने उनसे कहा था कि चेतन के साथ उसका कोई संबंध नहीं है और उसने कसम खाकर भरोसा दिलाया था कि शादी के बाद वह कभी चेतन से संपर्क नहीं रखेगी। इसी वजह से उन्होंने सिया और चेतन के पुराने रिश्ते के बारे में परिवार में किसी को कुछ नहीं बताया। 'शादी को लेकर बेहद खुश थी सिया' साहिल ने दावा किया कि सिया अपनी शादी की तैयारियों को लेकर काफी उत्साहित थी। उनके अनुसार, वह केतन के साथ प्री-वेडिंग फोटोशूट की योजना बना रही थी और घंटों वीडियो कॉल पर शादी और फोटोशूट से जुड़ी तैयारियों पर चर्चा करती थी। उन्होंने कहा कि सिया ने फोटोशूट के लिए पसंदीदा गाने और लोकेशन भी चुन ली थीं और नई जिंदगी को लेकर उत्साहित दिखाई देती थी। 'चेतन को लेकर असमंजस में थी' साहिल के अनुसार, सिया चेतन चौधरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर असमंजस में थी। उन्होंने दावा किया कि सिया यह तय नहीं कर पा रही थी कि चेतन के साथ संबंध जारी रखे या पूरी तरह खत्म कर दे। साहिल का कहना है कि सिया ने उनसे कहा था कि वह और चेतन सिर्फ दोस्त हैं और उनके बीच ऐसा कोई रिश्ता नहीं है जो उसकी शादी में बाधा बने। पुलिस की जांच जारी दूसरी ओर, पुलिस की जांच का निष्कर्ष फिलहाल अलग है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न गवाहों के बयानों तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। फिलहाल, साहिल गोयल के बयान उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी पुष्टि जांच एजेंसियों या अदालत द्वारा नहीं की गई है।
Pune Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक नया और अहम खुलासा सामने आया है। पुलिस की फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल ने कथित हत्या से महज 34 मिनट पहले अपने प्रेमी और सह-आरोपी चेतन चौधरी से एक लंबी फोन पर बातचीत की थी। जांच एजेंसियां इस कॉल को पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल कड़ी मान रही हैं और इसे कथित साजिश का निर्णायक सबूत मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं। हत्या से पहले हुई 34 मिनट की कॉल पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल फॉरेंसिक जांच से पता चला है कि 18 जून को लोहागढ़ किले में वारदात से कुछ समय पहले सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच बातचीत हुई थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस कॉल के दौरान दोनों ने कथित तौर पर अंतिम रणनीति पर चर्चा की थी। सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत उस समय हुई जब सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल के साथ किले पर मौजूद थी। व्यू-पॉइंट की लोकेशन साझा करने का शक जांच में पुलिस को आशंका है कि कॉल के दौरान सिया ने चेतन को उस व्यू-पॉइंट की सटीक जानकारी दी, जहां वह केतन के साथ मौजूद थी। अधिकारियों का मानना है कि उसने आसपास मौजूद लोगों की स्थिति की जानकारी भी साझा की, ताकि कथित वारदात को अंजाम देने में कोई बाधा न आए। पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है। डिलीट किए गए चैट और वॉइस नोट्स रिकवर करने की कोशिश जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर पिछले तीन महीनों के व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम संदेश और वॉइस नोट्स डिलीट कर दिए थे। अब साइबर फॉरेंसिक टीम मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा रिकवर करने में जुटी है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्य से दोनों के बीच हुई बातचीत और कथित साजिश की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। हर डिजिटल सबूत की हो रही जांच पुणे ग्रामीण पुलिस की तकनीकी टीम अब रिकवर किए गए डेटा, मोबाइल लोकेशन, इंटरनेट आईपी एड्रेस और कॉल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियां इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में मजबूत सबूत के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि यदि डिजिटल रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं तो इससे यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि वारदात अचानक नहीं, बल्कि पहले से बनाई गई योजना के तहत अंजाम दी गई थी। शादी नहीं करना चाहती थी सिया: पुलिस पुलिस के अनुसार, सिया गोयल नवंबर में होने वाली अपनी शादी से खुश नहीं थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी वजह से उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश रची। आरोप है कि 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में सिया ने केतन को खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। जांच अभी जारी पुलिस लगातार डिजिटल फॉरेंसिक, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
पुणे: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल ने दावा किया है कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह विग पहनता था। पुलिस का कहना है कि सिया के बयान और उसके मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं। पूछताछ में सिया ने बताई शादी से इनकार की वजह मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को हुई पूछताछ में सिया गोयल ने पुलिस को बताया कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसके सिर पर बाल नहीं थे और वह विग पहनता था। सिया ने यह भी कहा कि उसने परिवार की नाराजगी के डर से शादी से इनकार नहीं किया। पुलिस के अनुसार, दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी और नवंबर में शादी प्रस्तावित थी। विवाह समारोह के लिए राजस्थान के एक पैलेस की बुकिंग भी की जा चुकी थी, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च होने थे। मोबाइल चैट ने सिया के दावों पर खड़े किए सवाल लोनावला ग्रामीण पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान सिया ने दावा किया कि उसने पहले ही केतन को शादी न करने की इच्छा बता दी थी। उसके अनुसार, केतन हर बार कहता था कि अब बहुत देर हो चुकी है और रिश्ता तोड़ना संभव नहीं है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए दोनों के मोबाइल फोन से मिली चैट इस दावे का समर्थन नहीं करती। शुरुआती जांच में दोनों के बीच सामान्य मंगेतर की तरह बातचीत और प्रेमपूर्ण संदेश मिले हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सिया के मौजूदा बयान पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लग रहे हैं। सभी बयानों का इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से मिलान किया जा रहा है। हर एंगल से जांच कर रही है पुलिस पुलिस का कहना है कि जांच किसी एक पहलू तक सीमित नहीं है। डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, आरोपियों के बयान और तकनीकी सबूतों का विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। 18 जून को हुई थी केतन अग्रवाल की मौत जानकारी के अनुसार, 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन अग्रवाल की मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा माना गया, लेकिन बाद में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सिया गोयल अपनी जिंदगी के इस दौर में शादी नहीं करना चाहती थी और परिवार के दबाव में उसने यह रिश्ता स्वीकार किया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। सिया गोयल और चेतन चौधरी पुलिस हिरासत में मामले में पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और उसके दोस्त चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल 29 जून तक पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच जारी है। जांच जारी, अभी आरोप साबित होना बाकी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल ने अपनी बेटी को लेकर भावुक लेकिन सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि अदालत में सिया के खिलाफ हत्या के आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे कानून के अनुसार सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक पिता होने के बावजूद वह न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की रियायत नहीं चाहते। 'अब भी यकीन नहीं कि मेरी बेटी ऐसा कर सकती है' समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में प्रवीण गोयल ने कहा कि उन्हें आज भी विश्वास नहीं हो रहा कि उनकी बेटी ऐसा अपराध कर सकती है। उन्होंने बताया कि सिया की गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा और उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा, "मेरी बेटी ने कभी मुझसे झूठ नहीं बोला। वह हमेशा सही रास्ते पर चली। इसलिए उस पर लगे आरोपों पर यकीन करना मेरे लिए बेहद मुश्किल है।" 'दोषी साबित हुई तो सबसे कड़ी सजा मिले' प्रवीण गोयल ने कहा कि अगर अदालत में सिया के खिलाफ सभी आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे बिना किसी रियायत के कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "एक पिता होने के बावजूद मैं न्याय के रास्ते में नहीं आऊंगा। अगर मेरी बेटी दोषी है तो उसे वही सजा मिलनी चाहिए जिसकी वह हकदार है।" भावुक होकर कही बड़ी बात बातचीत के दौरान प्रवीण गोयल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि सिया दोषी साबित होती है तो उसे उसी लोहागढ़ किले पर ले जाकर उसी जगह से धक्का दे देना चाहिए, जहां से पुलिस के अनुसार केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दिया गया था। यह उनके भावनात्मक बयान का हिस्सा था। अंतिम फैसला अदालत और भारतीय कानून के अनुसार ही होगा। क्या है पूरा मामला? पुलिस के अनुसार, 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि दोनों ने केतन को किले के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि मामले की जांच जारी है।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में मंगलवार रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। महज कुछ मिनट की बहस ने एक 22 वर्षीय युवक की जान ले ली। फर्स्ट क्लास डिब्बे में सफर कर रहे युवक पर एक सहयात्री ने कथित तौर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान मयंक लोहार के रूप में हुई है, जो अंधेरी पश्चिम स्थित एक रिटेल स्टोर में सेल्समैन के तौर पर कार्यरत थे। घटना मंगलवार देर रात चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल ट्रेन में हुई। काम से लौटते समय हुआ हमला जानकारी के अनुसार, मयंक लोहार अपनी ड्यूटी समाप्त करने के बाद रात करीब 10:42 बजे अंधेरी स्टेशन से विरार की ओर जाने वाली लोकल ट्रेन में सवार हुए थे। उस दिन मुंबई में मानसून की पहली तेज बारिश हुई थी, जिसके कारण ट्रेनों में सामान्य से अधिक भीड़ थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, मयंक फर्स्ट क्लास डिब्बे के दरवाजे के पास खड़े थे। वहीं एक अन्य यात्री, जिसकी पहचान 30 वर्षीय सुवर्णा के रूप में हुई है, भी उसी स्थान पर मौजूद था। दरवाजे को लेकर शुरू हुई कहासुनी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रेन के दरवाजे को खुला रखने और बंद करने को लेकर दोनों यात्रियों के बीच बहस शुरू हुई थी। बारिश के कारण कुछ यात्री दरवाजा बंद रखना चाहते थे, जबकि अन्य लोग भीड़ और घुटन से बचने के लिए उसे खुला रखने के पक्ष में थे। अंधेरी से बोरीवली के बीच यह बहस लगातार बढ़ती गई और देखते ही देखते दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सीने और पेट पर किए कई वार पुलिस के मुताबिक, विवाद के दौरान आरोपी ने अपने पास मौजूद धारदार हथियार निकाल लिया और मयंक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में मयंक के सीने और पेट पर कई गंभीर वार किए गए। गंभीर रूप से घायल मयंक ट्रेन के डिब्बे में ही गिर पड़े। सहयात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल मदद की कोशिशें शुरू की गईं। बोरीवली पहुंचते ही फरार हुआ आरोपी बताया जा रहा है कि रात करीब 11:04 बजे ट्रेन बोरीवली स्टेशन पहुंची। इसी दौरान आरोपी ट्रेन के पूरी तरह रुकने से पहले ही नीचे कूद गया और स्टेशन पर मौजूद भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची तथा घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीसीटीवी और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर जांच पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। रेलवे स्टेशनों और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की पहचान हो चुकी है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल मुंबई लोकल में हुई इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोजाना लाखों लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने वाली लोकल ट्रेनों में इस तरह की हिंसक घटना ने यात्रियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता करार दिया है। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत और बढ़ गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और गहरी हो गई है। एकनाथ शिंदे बोले- 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी छह बागी सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने के साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौन-कौन से सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल? शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में शामिल हैं: Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Sanjay Jadhav (परभणी) Sanjay Dina Patil (मुंबई उत्तर-पूर्व) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omprakash Raje Nimbalkar (धाराशिव) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) ये सभी सांसद कुछ दिन पहले आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। दीपक केसरकर बोले- NDA और होगा मजबूत शिवसेना नेता Deepak Kesarkar ने सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, "यह कदम महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ाएगा और आने वाले चुनावों में महायुति को और मजबूती प्रदान करेगा।" उद्धव ठाकरे ने बुलाई थी आपात बैठक सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले Uddhav Thackeray ने मुंबई में पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी में संभावित टूट को रोकने पर चर्चा हुई थी। छह सांसदों के जाने से शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है। 2022 के बाद फिर बड़ा राजनीतिक झटका गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। अब लोकसभा सांसदों के इस दलबदल ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विधान परिषद चुनाव में भी महायुति की बड़ी जीत इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में भी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने अपनी राजनीतिक बढ़त साबित की। सीटों का प्रदर्शन: भाजपा: 11 सीटें शिवसेना (शिंदे): 3 सीटें एनसीपी (अजित पवार): 2 सीटें नासिक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार Gokul Gite ने शिवसेना उम्मीदवार Narendra Darade को हराकर महायुति के लिए एकमात्र झटका दिया। किन नेताओं ने दर्ज की जीत? निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में शामिल हैं: Ravindra Phatak Dushyant Chaturvedi Aniket Tatkare Vikram Kakade Arun Lakhani Prajakt Tanpure वहीं भाजपा के अन्य विजयी उम्मीदवारों में सुहास शीर्षत, अविनाश ब्राह्मणकर, धैर्यशील कदम, राजेंद्र राउत, बसवराज पाटिल, राजीव पोतदार, नंदकिशोर महाजन, प्रवीण पोटे और अमर राजुरकर शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और विधान परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। जहां NDA का कुनबा और मजबूत दिखाई दे रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के अस्तित्व और संगठनात्मक एकजुटता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
लखनऊ, एजेंसियां। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया। हादसे में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन हर पहलू की गहन जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में एसी के कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी अलग से पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। चार अधिकारी निलंबित, चार आरोपी गिरफ्तार प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने पर बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इमारत मालिक, पेट शॉप संचालक, एनीमेशन सेंटर संचालक और एक किरायेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। वेयरहाउस से शुरू हुई थी आग सोमवार दोपहर अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत के प्रथम तल पर बने वेयरहाउस में आग लगने की सूचना मिली थी। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर, एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन संचालित थे, जहां कई छात्र फंस गए। 15 छात्रों की मौत, कई घायल दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने घंटों तक रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन तब तक 15 छात्रों की जान जा चुकी थी। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के लिए इमारत से कूदने वाले नौ छात्रों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संगठन में जारी बगावत के बीच बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को उन पर भरोसा नहीं है, तो वे पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं। उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “अगर आपको मुझ पर विश्वास नहीं है, तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं। किसी और को शिवसेना का अध्यक्ष बना दीजिए।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे संकट के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने संबोधन में ठाकरे ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहां “एक पार्टी व्यवस्था और बिना चुनाव” जैसी स्थिति बन सकती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। बागी सांसदों को लेकर जताई चिंता, मांगी माफी कार्यक्रम में ठाकरे ने उन मतदाताओं से माफी भी मांगी जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के सांसदों को वोट दिया था, लेकिन अब उनके बगावत करने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं में अभी भी उत्साह बना हुआ है और शिवसेना की विचारधारा मजबूत है। कांग्रेस में विलय की अटकलों पर विराम पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना का किसी पार्टी में विलय का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भाजपा के साथ लंबे समय तक गठबंधन किया, लेकिन कभी भी विलय नहीं किया। छह सांसदों के बगावत से संकट गहराया शिवसेना (UBT) इस समय गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच संगठन में हलचल तेज हो गई है। ये सांसद हाल ही में पार्टी की संसदीय बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। भाजपा पर लगाए आरोप पार्टी नेता अंबादास दानवे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की भूमिका का आरोप लगाया है। वहीं संजय राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों को मंत्री पद और आर्थिक प्रलोभन दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसदों के शामिल नहीं होने से पार्टी में नई टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। बैठक से गायब रहे 6 सांसद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसद अनुपस्थित रहे। इससे यह संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा गया है और बागी सांसद अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। अनुपस्थित सांसदों के नाम: Sanjay Jadhav (परभणी) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omraje Nimbalkar (धाराशिव) Sanjay Patil (मुंबई नॉर्थ ईस्ट) ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त करेंगे’ : संजय राउत बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने कहा कि पार्टी का व्हिप जारी होने के बावजूद छह सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, "जो सांसद पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें हम गद्दार मानते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।" बागी सांसदों को भेजा जाएगा नोटिस पार्टी सांसद Arvind Sawant ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों को आज ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी बैठक में क्यों नहीं आए। ‘बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं’ संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, "पार्टी के व्हिप का उल्लंघन अनुशासनहीनता है। ये लोग बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं।" बीजेपी और शिंदे पर लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप संजय राउत ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party और एकनाथ शिंदे गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच देकर खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा, "जो जाना चाहते हैं, वे इस्तीफा देकर जाएं। वे शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, इसलिए जनता के साथ धोखेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।" एक और टूट की ओर बढ़ रही शिवसेना (यूबीटी) छह सांसदों की गैरमौजूदगी और पार्टी नेतृत्व के तीखे बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की संभावना बढ़ गई है। यदि ये सांसद अलग समूह बनाते हैं या शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
टीसीएस के नासिक कार्यालय में महिला कर्मचारी के कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण प्रयास मामले में दाखिल चार्जशीट में कई गंभीर खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता को मानसिक रूप से प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से धार्मिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। पीड़िता ने बयान में लगाए गंभीर आरोप चार्जशीट के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसे पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील और विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के वीडियो देखने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, उसे इस्लामिक धार्मिक व्याख्यानों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि इस्लाम अपनाने से उसका मानसिक तनाव कम हो जाएगा। मंदिर जाने और धार्मिक गतिविधियों से रोका गया बयान के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़िता से मंदिर जाना और धार्मिक भजन सुनना बंद करने के लिए कहा। उसे बार-बार यह समझाने की कोशिश की गई कि धार्मिक परिवर्तन से उसकी मानसिक स्थिति में सुधार होगा। शादी का झांसा और निजी जानकारी के दुरुपयोग का आरोप चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि मुख्य आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर कथित रूप से उसका शोषण किया। इसके साथ ही पीड़िता के बैंक खाते और यूपीआई पिन से जुड़ी जानकारी लेने का भी आरोप लगाया गया है। साजिश और नेटवर्क का दावा जांच में यह दावा किया गया है कि तौसीफ अत्तार और निदा खान ने पीड़िता को इस्लामिक धार्मिक सामग्री और वीडियो दिखाने में मदद की। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित मानसिक और धार्मिक प्रभाव बनाने की रणनीति का हिस्सा थी। AIMIM पार्षद का नाम भी चार्जशीट में चार्जशीट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर से AIMIM पार्षद मतीन पटेल पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने एक आरोपी को गिरफ्तारी से बचाने के लिए शरण दी थी। 106 गवाहों के बयान शामिल पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। टीसीएस की प्रतिक्रिया टीसीएस ने कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है। कंपनी ने कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। जांच जारी फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और जांच एजेंसियां सभी आरोपों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
Central Bureau of Investigation की जांच में NEET पेपर लीक मामले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG का प्रश्नपत्र पांच राज्यों में बेचा गया था। इनमें सबसे ज्यादा मामले Maharashtra से सामने आए हैं, जबकि Rajasthan दूसरे स्थान पर है। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त किए गए डिजिटल गैजेट्स की जांच के बाद यह जानकारी सामने आई है। एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है। महाराष्ट्र बना पेपर लीक का सबसे बड़ा केंद्र जांच में पता चला है कि पेपर लीक नेटवर्क का सबसे बड़ा संचालन महाराष्ट्र से हो रहा था। यहीं से कथित “क्वेश्चन बैंक” राजस्थान समेत अन्य राज्यों के छात्रों तक पहुंचाया गया। सीबीआई को महाराष्ट्र और राजस्थान में पेपर के प्रिंट निकालकर बेचने के सबूत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई लोगों ने प्रश्नपत्र आगे दूसरे छात्रों और अभिभावकों तक भी पहुंचाया, जिससे इसका दायरा काफी बढ़ गया। इसी कारण एजेंसी अभी यह तय नहीं कर पा रही है कि आखिर कितने छात्रों तक पेपर पहुंचा था। पेरेंट्स भी जांच एजेंसी के निशाने पर अब जांच केवल पेपर लीक करने वाले बिचौलियों और मास्टरमाइंड तक सीमित नहीं है। सीबीआई अब उन अभिभावकों की भी पहचान कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर भारी रकम देकर पेपर खरीदा था। एजेंसी उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनसे आरोपी शिवराज मोटेगांवकर, पी.वी. कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे के खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ऐसे सभी पेरेंट्स की सूची तैयार कर रही है, जिनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं। कई टीमें जांच में जुटीं सीबीआई की कई टीमें अलग-अलग स्तर पर जांच में लगी हुई हैं। दो टीमें उन संदिग्ध किरदारों के खिलाफ सबूत जुटा रही हैं, जिनकी भूमिका National Testing Agency (NTA) के बाहर मानी जा रही है। वहीं, तीन अन्य टीमें पेपर खरीदने वाले छात्रों और उनके परिजनों तक पहुंचने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, 20 मई की रात महाराष्ट्र से कार्रवाई की शुरुआत भी हो चुकी है और जल्द ही दूसरे राज्यों में भी छापेमारी हो सकती है। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार जांच एजेंसी अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा सात आरोपी महाराष्ट्र से हैं। सीबीआई का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और डिजिटल डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन व कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा रही है। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगी थीं। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। जांच में शुरुआती स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया। जांच का दायरा बढ़ने की संभावना सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। एजेंसी को शक है कि पेपर लीक नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें शिक्षा माफिया, बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
Western Railway ने मुंबई के Bandra East स्थित गरीब नगर इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई तेज कर दी है। रेलवे के अनुसार, अभियान का करीब 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस पर पथराव और बुलडोजर रोकने की कोशिश के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया। घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बुलडोजर रोकने की कोशिश, पुलिस पर पथराव मंगलवार को करीब 150 लोगों की भीड़ ने डिमोलिशन टीम और पुलिस पर हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और सीमेंट ब्लॉक फेंककर बुलडोजर रोकने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि हिंसा अचानक भड़का विरोध नहीं था, बल्कि एक “पूर्व-नियोजित साजिश” का हिस्सा प्रतीत होती है। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर गंभीर धाराएं लगाने की बात कही है, जिनमें हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा भी शामिल है। रेलवे की कार्रवाई क्यों जरूरी? पश्चिम रेलवे के अनुसार, बांद्रा स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित करीब 500 अवैध संरचनाओं को हटाया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि अब तक लगभग 5,000 वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। इस भूमि का उपयोग 5वीं और 6वीं रेल लाइन के विस्तार और Bandra Terminus के विकास के लिए किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना मुंबई की रेल कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मस्जिद गिराने को लेकर विवाद कार्रवाई के दौरान एक स्थानीय मस्जिद को गिराए जाने का मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया है। प्रतिवादियों के वकीलों ने दावा किया कि धार्मिक स्थल को बिना उचित दस्तावेजी प्रक्रिया के हटाया गया। उनका कहना है कि Bombay High Court के मूल आदेश में धार्मिक स्थलों को हटाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। वहीं, प्रभावित परिवारों ने ईद से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार से पहले बड़ी संख्या में परिवारों को बेघर कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही कार्रवाई रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पात्र परिवारों को पहले ही पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई 23 मई तक जारी रह सकती है। इलाके में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
ठाणे रेलवे स्टेशन के पास स्थित गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में गुरुवार तड़के भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक फायरमैन और एक सिक्योरिटी गार्ड ने जान गंवा दी, जबकि दो अन्य दमकलकर्मी घायल हो गए हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा। सुबह 3:45 बजे लगी आग अधिकारियों के मुताबिक, आग गुरुवार सुबह करीब 3:45 बजे गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में लगी। आग लगते ही दमकल विभाग ने “ब्रिगेड कॉल” घोषित कर दी, जिसका मतलब है कि हालात पर काबू पाने के लिए विभाग के अधिकतम संसाधनों को मौके पर भेजा गया। मार्केट कॉम्प्लेक्स में कपड़ों की दुकानों के अलावा सब्जी और फल मंडी भी मौजूद थी। आग की ऊंची लपटें और घना धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में आग ने बाजार के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दो की मौत, दो घायल प्रशांत रोडे ने बताया कि हादसे में एक फायरमैन और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हुई है। वहीं, क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ (RDMC) के प्रमुख यासीन तड़वी के अनुसार, दो अन्य दमकलकर्मी घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है। अधिकारियों ने बताया कि आग “मेजर फायर” श्रेणी की थी, जिसने पूरे बाजार क्षेत्र को प्रभावित किया। कपड़ों की दुकानों से तेजी से फैली आग दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाजार की कई दुकानों में बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। आग की वजह से कई दुकानों का सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत और बचाव अभियान जारी दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। पुलिस और प्रशासन ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Western Railway ने Bandra Terminus के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। Bombay High Court के निर्देशों के बाद शुरू किए गए इस अभियान के पहले दिन करीब 18 प्रतिशत अवैध झोपड़ियों को हटाया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। 23 मई तक चलेगा अभियान पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी Vineet Abhishek ने बताया कि यह पांच दिवसीय अभियान 23 मई तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य लगभग 5,300 वर्ग मीटर रेलवे भूमि को खाली कराना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रेलवे के अनुसार बांद्रा टर्मिनस के पुनर्विकास के तहत यहां एलिवेटेड रोड, बहुमंजिला इमारतें, आधुनिक प्लेटफॉर्म और रखरखाव सुविधाओं से युक्त एकीकृत परिसर विकसित करने की योजना है। रेलवे भूमि पर बनी थीं 500 झोपड़ियां अधिकारियों के मुताबिक गरीब नगर इलाके में रेलवे की जमीन पर करीब 500 अवैध झोपड़ियां बनी हुई थीं। अभियान के पहले दिन इनमें से लगभग 15 से 18 प्रतिशत झोपड़ियों को खाली कराया गया। रेलवे ने कहा कि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक प्रशासन, पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम तैनात की गई है। 2017 से चल रही थी कानूनी प्रक्रिया पश्चिम रेलवे के बयान के अनुसार इस मामले में सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत कार्रवाई 2017 से पहले शुरू की गई थी और 27 नवंबर 2017 को बेदखली के आदेश पारित किए गए थे। रेलवे ने बताया कि इस मामले में लगभग नौ वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया चली, जिसमें Bombay High Court और Supreme Court of India में सुनवाई भी शामिल रही। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने आदेश में चिन्हित पात्र संरचनाओं को संरक्षण देते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी थी। बाद में इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रखा गया। रेलवे का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए की जा रही है।
कथित स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी की पड़ताल में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें 70 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन और सैकड़ों ‘घोस्ट’ (फर्जी) बैंक अकाउंट्स का नेटवर्क सामने आया है। रूपाली चाकणकर के परिजनों को समन इस मामले में ED ने रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा चाकणकर और उनके बेटे तन्मय को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। दोनों को अगले सप्ताह एजेंसी के सामने पेश होना होगा संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन को लेकर पूछताछ की जाएगी प्रतिभा चाकणकर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनके नाम पर खोले गए खाते फर्जी हैं और उनके जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। ‘घोस्ट अकाउंट’ नेटवर्क कैसे काम करता था? जांच में समता नागरी सहकारी पतसंस्था के भीतर एक सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 134 से अधिक संदिग्ध फर्जी या ‘प्रॉक्सी’ अकाउंट एक ही मोबाइल नंबर से कई खाते संचालित अधिकांश खातों में अशोक खरात को नॉमिनी दिखाया गया ED के अनुसार, इन खातों को खोलने के लिए लोगों के आधार और पैन जैसे KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। 70 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध ट्रांजेक्शन एजेंसी ने 2022 से 2024 के बीच 70 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की पहचान की है। करीब 100 अकाउंट्स जांच के दायरे में 40 अकाउंट्स को FD की तरह इस्तेमाल किया गया 35.53 करोड़ रुपये जमा और 35.21 करोड़ रुपये निकाले गए इन खातों को कोड नंबर देकर फंड की आवाजाही को नियंत्रित किया जाता था, जिससे यह एक संगठित वित्तीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ‘लेयरिंग’ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का शक ED का मानना है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल ‘लेयरिंग’ तकनीक के लिए किया गया, जिसमें पैसों को कई खातों में घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाया जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर लोगों से दस्तावेज जुटाकर उनका दुरुपयोग किया गया। बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल एजेंसी ने पतसंस्था के निदेशक संदीप ओमप्रकाश कोयते को भी तलब किया है। जांच का फोकस इस बात पर है कि: एक ही मोबाइल नंबर से इतने खाते कैसे खोले गए? एक ही नॉमिनी होने के बावजूद सिस्टम ने अलर्ट क्यों नहीं किया? सहयोगी ने कबूला रोल जांच में एक अहम खुलासा तब हुआ जब खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके ने माना कि उसने खरात के निर्देश पर कई बार इन खातों में नकदी जमा कराई। नासिक तक फैला नेटवर्क मामले की जांच अब जगदंबा माता ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था तक पहुंच गई है, जहां 34 संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान हुई है। आगे की कार्रवाई ED आने वाले दिनों में: और संदिग्ध खाताधारकों से पूछताछ करेगी मनी ट्रेल को ट्रैक करेगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी
महाराष्ट्र के नासिक जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक कार के कुएं में गिर जाने से एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में 6 बच्चे भी शामिल हैं। कैसे हुआ हादसा? यह हादसा शुक्रवार रात करीब 10 बजे डिंडोरी कस्बे के शिवाजी नगर इलाके में हुआ। परिवार के सभी लोग एक कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रहे थे इसी दौरान उनकी कार संतुलन खोकर पास के कुएं में गिर गई रेस्क्यू ऑपरेशन घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। दो क्रेन और तैराकों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया आधी रात तक कार और सभी लोगों को कुएं से बाहर निकाला गया मृतकों की पहचान पुलिस के अनुसार, सभी मृतक डिंडोरी तालुका के इंदौर गांव के दरगुडे परिवार से थे। मृतकों में शामिल हैं: सुनील दत्तु दरगुडे (32) उनकी पत्नी रेशमा आशा अनिल दरगुडे (32) परिवार के 6 बच्चे (7 से 14 वर्ष आयु वर्ग) 5 लड़कियां 1 लड़का जांच जारी सभी शवों को डिंडोरी सरकारी अस्पताल भेजा गया है पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है हादसे के कारणों की जांच जारी है इलाके में शोक की लहर इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है। एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
नाशिक: कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi को सावरकर मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। नाशिक की अदालत ने इस मामले की पूरी कार्यवाही आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी है, जिसके बाद अब इस केस में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी के बयान को लेकर दर्ज किया गया था, जो उन्होंने अपनी Bharat Jodo Yatra के दौरान दिया था। अदालत के इस फैसले के साथ ही यह मामला पूरी तरह खत्म हो गया है। क्या था मामला नवंबर 2022 में राहुल गांधी महाराष्ट्र के वाशिम और अकोला जिलों में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पहुंचे थे। 17 नवंबर 2022 को अकोला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी Vinayak Damodar Savarkar से जुड़े कुछ दस्तावेज दिखाते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी के इसी बयान को आधार बनाकर नाशिक के सामाजिक कार्यकर्ता Devendra Bhutada ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचा और इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुईं। राहुल गांधी ने क्या कहा था कांग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार को लिखे गए एक पत्र का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि उन्होंने डर के कारण अंग्रेजों से माफी मांगी थी और बाद में पेंशन भी ली थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। अदालत ने किया अंतिम निपटारा राहुल गांधी के वकीलों के अनुसार, नाशिक के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले का अंतिम निपटारा करते हुए पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी है। इससे पहले जुलाई 2025 में अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में जमानत दी थी, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद यह केस पूरी तरह बंद हो गया है। कांग्रेस ने बताया बड़ी राहत नाशिक कोर्ट के इस फैसले के बाद Rahul Gandhi एक बड़े कानूनी विवाद से मुक्त हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने इसे बड़ी राहत बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले से मामले पर अब पूरी तरह विराम लग गया है।
4 साल के बच्चे को 45% तक झुलसन, पुलिस ने केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की महाराष्ट्र के Nagpur जिले के कोराडी इलाके में होली का त्योहार एक परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गया। चार साल के मासूम पर उसकी ही दादी ने कथित रूप से खौलता पानी डाल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है। यह घटना 3 मार्च को आरामशिन क्षेत्र के वार्ड नंबर-2 में हुई। समाचार एजेंसी Press Trust of India (पीटीआई) के अनुसार, बच्चा घर के बाहर रंग से भरी स्प्रे बोतल लेकर खेल रहा था। इसी दौरान उसने अनजाने में अपनी दादी सिंधु ठाकरे पर रंग छिड़क दिया। बताया जा रहा है कि उस समय दादी होलिका दहन के लिए गर्म किए गए पानी से बाल्टी भर रही थीं। रंग पड़ने से नाराज होकर उन्होंने गुस्से में वही खौलता पानी बच्चे पर उंडेल दिया। दर्द से चीख उठा मासूम, अस्पताल में भर्ती सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि काले रंग की साड़ी पहने महिला बाल्टी लेकर चल रही है। बच्चा उनके पास आकर रंग छिड़कने की कोशिश करता है। तभी महिला बाल्टी का पानी उस पर फेंक देती है। इसके बाद बच्चा दर्द से चिल्लाते हुए दूर भागता नजर आता है। घटना के तुरंत बाद एक अन्य महिला ठंडे पानी की बाल्टी लेकर आती है और बच्चे पर डालती है ताकि जलन कम हो सके। कुछ देर बाद दादी भी ठंडा पानी डालती दिखाई देती हैं। बच्चे ओम के शरीर के निचले हिस्से में गंभीर जलन हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, उसे करीब 45 प्रतिशत तक जलने की चोट आई है। फिलहाल उसे नागपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि महिला के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जांच जारी है। बाराबंकी में रंग को लेकर बवाल, 11 लोग घायल उधर उत्तर प्रदेश के Barabanki जिले में भी होली के दौरान विवाद हिंसा में बदल गया। रंग खेलने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि लाठी-डंडे और लोहे की रॉड तक चलने लगे। करीब 10 मिनट तक चले इस झगड़े में कम से कम 11 लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर हालात को काबू में किया। स्थानीय निवासी अवधेश ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष के लोग उसके घर में घुस आए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। जब वह और अन्य लोग रोकने पहुंचे तो उन्हें भी पीटा गया। फिलहाल पुलिस ने मामला शांत होने की बात कही है, लेकिन दोनों घटनाओं ने त्योहार की खुशियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्योहार की खुशियों में सावधानी जरूरी होली आपसी प्रेम और भाईचारे का पर्व है, लेकिन छोटी सी लापरवाही या गुस्सा बड़ी दुर्घटना में बदल सकता है। नागपुर और बाराबंकी की घटनाएं यही संदेश देती हैं कि त्योहार के दौरान संयम और सतर्कता बेहद जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।