पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने “हमलों पर पछतावा” नहीं जताते, तब तक जंग जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आखिरी दम तक करेगा। उन्होंने तेहरान के सिविल और डिफेंस ठिकानों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की असली वजह बताया। IRGC का पलटवार: इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। खैबर शिकन, इमाद और सज्जील जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कामिकाज़े ड्रोन से हमले तेल अवीव, रामत गन और नेगेव के सैन्य केंद्र टारगेट बीरशेबा में लॉजिस्टिक और कमांड हेडक्वार्टर पर सीधा प्रहार ईरान का दावा है कि इन हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया। ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में बदलाव, जल्द होगी डील” इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक: ईरान में “नई लीडरशिप” आ चुकी है पुरानी व्यवस्था और खामेनेई अब सीन से बाहर अमेरिका की बातचीत “सही लोगों” से जारी ईरान ने तेल-गैस से जुड़ा बड़ा “तोहफा” दिया ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर ईरान का हमला अराघची ने पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि: यूक्रेन और गाजा के मामलों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है हालांकि, उन्होंने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमीयर की सराहना की, जिन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस की चेतावनी: न्यूक्लियर खतरा बढ़ा रूस ने भी इस तनाव पर चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों को बेहद खतरनाक बताया। रूस के मुताबिक: न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान हुआ तो बड़ा पर्यावरणीय संकट हो सकता है यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा
कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमले की खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में गैस कंपनियों के स्टॉक्स दबाव में आ गए। गुरुवार को Petronet LNG और GAIL (India) के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। Petronet LNG और GAIL के शेयरों में गिरावट कारोबार के दौरान Petronet LNG का शेयर लगभग 5.85% तक टूटकर 274.55 रुपये के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। वहीं GAIL (India) का शेयर भी करीब 3.15% गिरकर 146.2 रुपये तक फिसल गया। पिछले दो सत्रों में तेजी दिखाने वाले इन स्टॉक्स में अचानक आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हमले से क्यों बढ़ी चिंता? कतर का रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी दुनिया का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यात केंद्र माना जाता है। यहां से वैश्विक LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा जाता है। कतर अधिकारियों के अनुसार, इस इलाके पर ईरान की ओर से मिसाइल हमला किया गया, जिसमें कई हमले नाकाम किए गए, लेकिन एक मिसाइल टकराने से नुकसान हुआ। इसके बाद आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी QatarEnergy ने बताया कि कई LNG सुविधाएं प्रभावित हुई हैं और वहां बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वैश्विक सप्लाई पर असर, भारत भी प्रभावित रास लाफान वैश्विक गैस सप्लाई का अहम केंद्र है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ता है। भारत की कंपनियां जैसे Petronet LNG LNG आयात पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने की आशंका से इन कंपनियों के मार्जिन और भविष्य की लागत पर असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर है। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाने के बाद हालात और बिगड़ गए। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा प्रतिष्ठान भी निशाने पर आ सकते हैं। इसी कड़ी में अब यह हमला क्षेत्रीय संकट को और गहरा करता दिख रहा है। अमेरिका की चेतावनी अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अगर कतर की LNG सुविधाओं पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को 18 दिन हो चुके हैं, जहां ईरान लगातार इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। लेकिन इस पूरी जंग में एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में है- ईरान ने अब तक अपने लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? क्या यह कमजोरी है या सोची-समझी सैन्य रणनीति? ईरान की एयरफोर्स: पुरानी ताकत, सीमित क्षमता ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक एयर फोर्स (IRIAF) के पास कागजों पर 400-600 विमान जरूर हैं, लेकिन इनमें से केवल 200-230 के आसपास ही फाइटर जेट हैं। इनमें से ज्यादातर विमान 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले खरीदे गए थे, जब ईरान के पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका से अच्छे संबंध थे। ईरान के प्रमुख लड़ाकू विमान: F-14 Tomcat – दुनिया में अब सिर्फ ईरान के पास सक्रिय F-4 Phantom II और F-5 Tiger II – 1960-70 के दशक के MiG-29 और Su-24 – सीमित संख्या में स्वदेशी जेट: Kowsar और Saeqeh विशेषज्ञों के अनुसार, ये स्वदेशी जेट भी आधुनिक नहीं बल्कि पुराने अमेरिकी डिजाइनों के अपग्रेडेड संस्करण हैं। क्यों नहीं उतार रहा ईरान अपने फाइटर जेट? 1. तकनीकी रूप से पिछड़े विमान ईरान के अधिकांश जेट पुराने हैं और उनमें आधुनिक रडार, स्टेल्थ और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की कमी है। इसके मुकाबले इजरायल के पास F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ जेट हैं, जो रडार से बच निकलते हैं। 2. एयर डिफेंस का बड़ा खतरा अमेरिका और इजरायल के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम हैं जैसे: Iron Dome Patriot Missile System ऐसे में ईरानी जेट दुश्मन के इलाके में घुसते ही मार गिराए जा सकते हैं। 3. स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस की समस्या अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को पुराने जेट्स के लिए जरूरी पार्ट्स नहीं मिलते। इससे कई विमान सिर्फ सीमित समय तक ही उड़ान भर सकते हैं या पूरी तरह निष्क्रिय हैं। 4. लंबी दूरी और रिफ्यूलिंग की कमी ईरान और इजरायल के बीच सीधी सीमा नहीं है। ऐसे में जेट्स को लंबी दूरी तय करनी होगी, जिसके लिए हवा में ईंधन भरने (air-to-air refueling) की जरूरत होती है- इसमें ईरान कमजोर है। मिसाइल और ड्रोन: ईरान की असली ताकत जहां फाइटर जेट कमजोर हैं, वहीं ईरान ने मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी में भारी निवेश किया है। मुख्य हथियार: बैलिस्टिक मिसाइल: Fateh-110, Sejjil क्रूज मिसाइल: Soumar ड्रोन: Shahed-136 इनकी खासियत: लंबी दूरी तक सटीक हमला कम लागत (एक ड्रोन ~20,000 डॉलर) बड़ी संख्या में एक साथ इस्तेमाल इसके उलट, एक इंटरसेप्टर मिसाइल (जैसे पैट्रियट) की कीमत 30-40 लाख डॉलर तक होती है। यानी ईरान “कम लागत में ज्यादा नुकसान” की रणनीति अपना रहा है। रणनीति या मजबूरी? विशेषज्ञों का मानना है कि: यह पूरी तरह कमजोरी नहीं, बल्कि “असिमेट्रिक वॉरफेयर” (Asymmetric Warfare) की रणनीति है ईरान जानबूझकर अपने जेट्स को बचाकर रख रहा है ड्रोन और मिसाइल से दुश्मन के संसाधनों को थका रहा है ईरान का फाइटर जेट इस्तेमाल न करना उसकी कमजोरी कम, रणनीति ज्यादा दिखता है। वह सीधे हवाई युद्ध में उतरने के बजाय कम लागत वाले और प्रभावी हथियारों- मिसाइल और ड्रोन- के जरिए दबाव बना रहा है।
Iraq की राजधानी Baghdad में स्थित United States के दूतावास पर हमले की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दूतावास परिसर को निशाना बनाकर मिसाइल या ड्रोन से हमला किया गया, जिसके बाद इलाके में धुआं उठता देखा गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक एक मिसाइल दूतावास की इमारत से टकराई, जिसके बाद परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। हालांकि इस हमले में हुए नुकसान या हताहतों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार मिसाइल दूतावास परिसर के भीतर बने हेलिपैड पर गिरी। दूसरी ओर Agence France-Presse (AFP) ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि दूतावास पर एक ड्रोन के जरिए हमला किया गया। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में बगदाद में हुए एक अन्य हमले में Iran समर्थित दो लड़ाकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। माना जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह घटना हालात को और ज्यादा गंभीर बना सकती है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले की जांच में जुटी हैं और दूतावास के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच United Arab Emirates (UAE) ने मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी मीडिया के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा हमलों को रोकने के वीडियो क्लिप और कथित फर्जी वीडियो साझा करने के आरोप में 10 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने असली वीडियो के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए गए वीडियो और तस्वीरें भी विभिन्न वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की थीं। इन सभी मामलों को त्वरित सुनवाई के लिए अदालत भेज दिया गया है। 45 लोगों की गिरफ्तारी Abu Dhabi Police ने बताया कि देश पर हुए हालिया हमलों के दौरान वीडियो बनाने और कथित रूप से “गलत जानकारी फैलाने” के आरोप में अलग-अलग देशों के 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है और अफवाहें फैलाकर लोगों में डर का माहौल बना सकती है। ब्रिटिश नागरिक पर भी केस पिछले सप्ताह Dubai में साइबर अपराध कानून के तहत एक 60 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक पर भी मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन्होंने शहर के ऊपर उड़ती कथित Iran की मिसाइलों का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। साइबर कानून के तहत कई मामले मानवाधिकार संगठन Detained in Dubai की सीईओ Radha Stirling के मुताबिक, हाल में हुए मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में UAE के साइबर क्राइम कानून के तहत कम से कम 21 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिनमें किसी ऊंची रिहायशी इमारत, एक लग्ज़री होटल और Dubai International Airport के पास मलबा गिरने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। UAE अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी वीडियो या तस्वीर को साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
अमेरिका-इजराइल के साथ जंग के छठे दिन तेहरान का सख्त संदेश मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर इस्लामिक गणराज्य में सत्ता परिवर्तन की कोशिश की गई, तो वह इजराइल के डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बनाएगा। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Iranian Students' News Agency (आईएसएनए) ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। डिमोना परमाणु स्थल पर हमले की चेतावनी रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सैन्य अधिकारी ने साफ कहा कि यदि अमेरिका और इजराइल ईरान की मौजूदा व्यवस्था को हटाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो जवाब में इजराइल के परमाणु ठिकाने डिमोना को निशाना बनाया जाएगा। डिमोना स्थित परमाणु केंद्र को इजराइल के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों में गिना जाता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में हालात पहले से ही बेहद तनावपूर्ण हैं। इजराइल पर मिसाइलों की बौछार, लाखों लोग बंकरों में गुरुवार तड़के ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों की नई खेप दागी। हमले के बाद इजराइल के कई शहरों में सायरन बजने लगे और लाखों लोगों को बम शेल्टर में शरण लेनी पड़ी। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान की जंग छठे दिन में प्रवेश कर चुकी है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में भय और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। छठे दिन भी जारी संघर्ष मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिका के समर्थन से इजराइल की कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने हालात को और गंभीर बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता ईरान की डिमोना परमाणु स्थल पर हमले की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। परमाणु स्थलों को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश से बड़े पैमाने पर विनाश और पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हैं, जहां हालात तेजी से बदल रहे हैं और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज