नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों को बुलाया, लेकिन चर्चा के बजाय उन्हें कई घंटों तक आवास पर ही नजरबंद रखा गया। दीपके के अनुसार, इस दौरान उनके प्रतिनिधियों के फोन भी ले लिए गए, जिससे पार्टी का उनसे संपर्क टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के बहाने उन्हें उलझाया गया, जबकि बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि यदि भीड़ को नियंत्रित करना उद्देश्य था तो पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र घायल हुए और इस कार्रवाई से अनावश्यक हिंसा हुई। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप दीपके ने दिल्ली पुलिस के कुछ पुरुष कर्मियों पर महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार तथा हिंसा का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोनम वांगचुक जारी रखेंगे अनशन दीपके ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो अनशन समाप्त करने पर विचार कर रहे थे, अब इसे जारी रखेंगे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई से वांगचुक आहत हैं और उन्होंने अपनी पत्नी के माध्यम से संदेश भेजकर अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है। सीजेपी ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त नहीं होगा और संगठन जल्द ही अपने अगले आंदोलन की रणनीति की घोषणा करेगा।
CJP Protest Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान सोमवार को हुए हंगामे के बाद कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की मानवीय तस्वीर को उजागर किया। कहीं सड़क पर बिखरी चप्पलें दिखीं, कहीं घायल और रोते हुए छात्र-छात्राएं नजर आए, तो कहीं भीड़ के बीच एक प्रदर्शनकारी बेहोश पड़ा दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के दौरान अपने अनुभव साझा किए और लाठीचार्ज के आरोप लगाए। 'सबसे आगे था, अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया' सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में 16 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी दावा करता है कि वह मार्च के दौरान सबसे आगे चल रहा था, तभी अचानक पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। छात्र का कहना है कि उसे बुरी तरह पीटा गया और वह समझ नहीं पा रहा कि उसकी गलती क्या थी। एक अन्य वीडियो में एक युवक अचेत अवस्था में दिखाई देता है, जिसके आसपास मौजूद लोग उसे संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश करते नजर आते हैं। रोती छात्रा ने सुनाई आपबीती एक अन्य वीडियो में एक छात्रा भावुक होकर बताती है कि वह सुबह से प्रदर्शन में शामिल थी। उसके अनुसार, पुलिस कार्रवाई शुरू होने के बाद वह वहां से निकलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इसी दौरान लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों को चोटें आईं। वीडियो में छात्रा रोते हुए पूरे घटनाक्रम का जिक्र करती दिखाई देती है। बिखरी चप्पलें बनीं अफरातफरी की गवाह प्रदर्शन के बाद सड़क पर बड़ी संख्या में चप्पलें और अन्य सामान बिखरा दिखाई दिया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे किन लोगों की थीं, लेकिन ये तस्वीरें प्रदर्शन के दौरान मची भगदड़ और अव्यवस्था की कहानी बयां करती नजर आईं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इन तस्वीरों को आंदोलन की सबसे मार्मिक तस्वीरों में से एक बताया। पुलिसकर्मी की पत्नी भी पहुंची प्रदर्शन में वायरल वीडियो में एक महिला ने बताया कि उनके पति दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं, लेकिन वह अपने बेटे के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। इसी वजह से वह प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं। उनका बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए कई दावे सोमवार की घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वीडियो और पोस्ट साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने चोट लगने, पुलिस कार्रवाई और आंदोलन के दौरान हुई अफरातफरी के अपने-अपने अनुभव बताए। इन वीडियो में छात्रों की चिंता, अभिभावकों की भावनाएं और आंदोलन के दौरान की अव्यवस्था साफ दिखाई देती है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई थी झड़प सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे थे। संसद मार्ग के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
CJP Parliament March: दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद राजधानी में पूरे दिन हाईवोल्टेज राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल खाली करा दिया। हालांकि देर शाम प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए और सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। इस दौरान पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बनाया गया मंच भी हटा दिया और धरना स्थल से ट्रैम्पोलिन, गद्दे, कालीन समेत अन्य सामान जब्त कर लिया। संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव सोमवार सुबह हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले। संसद मार्ग के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जंतर-मंतर से हटाया गया धरना संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को खाली कराया। पुलिस ने सोनम वांगचुक के अनशन के लिए बनाया गया मंच हटाने के साथ-साथ वहां रखा अन्य सामान भी जब्त कर लिया। हालांकि शाम होते-होते प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी की। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग रखी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मांगों पर विचार कर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? प्रदर्शनकारी संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी प्रतिबंध के रिहा किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। कथित NEET 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। कई छात्र संगठनों का मिला समर्थन इस आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, शिक्षक और कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद भड़की झड़प सुबह करीब 11 बजे संसद मार्ग पुलिस थाने के पास प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए प्रमुख बैरिकेड को हटाने की कोशिश की। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। पुलिस के अनुसार, कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी, जिससे कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया। हिरासत, इंटरनेट बंद और धारा 163 लागू अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। एहतियात के तौर पर नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। दोपहर बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर सार्वजनिक सभा और प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, केंद्रीय सचिवालय सहित पूरे लुटियंस दिल्ली इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात रहीं। दंगा-रोधी उपकरणों से लैस जवानों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। विपक्षी नेताओं ने भी जताया समर्थन प्रदर्शन के दौरान नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पांच मेट्रो स्टेशन रहे बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा। स्थिति सामान्य होने के बाद चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं बहाल कर दी गईं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद CJP (छात्र संगठन) और केंद्र सरकार के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपा। लगभग 10 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा और उन पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने उनकी सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि इन मुद्दों पर सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के साथ आंतरिक स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, बैठक में किसी भी मांग पर तत्काल फैसला या लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। सरकार की ओर से भी इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। CJP ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए। परीक्षा विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। यह बैठक ऐसे समय हुई जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और कार्रवाई की। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिनमें संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल बताए गए। बैठक के बाद सौरव दास ने कहा बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार ने संवाद की शुरुआत की है, लेकिन अब निर्णय सरकार को लेना है। वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। फिलहाल सरकार ने केवल मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या यह बातचीत किसी ठोस समाधान का मार्ग प्रशस्त कर पाती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान सोमवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। जंतर-मंतर से निकले प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच संसद मार्ग के पास झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। दिल्ली पुलिस के अनुसार दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव किया। झड़प में एक सब-इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। वहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अनावश्यक बल प्रयोग का आरोप लगाया। घटनास्थल पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की गाड़ी को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगा। संगठन का दावा है कि पुलिस ने उन्हें गाड़ी से उतारने की कोशिश की, जबकि बाद में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि अभिजीत दीपके को न तो हिरासत में लिया गया और न ही गिरफ्तार किया गया। उस समय गाड़ी में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि और दक्षिण भारत के एक अभिनेता भी मौजूद थे। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से छात्रों की बात सुनने की अपील की। वहीं, आप सांसद संजय सिंह, आतिशी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलन का समर्थन किया। उधर, CJP प्रतिनिधियों और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के बीच बातचीत भी जारी रही। संगठन ने वांगचुक की रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित रूप से आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजे की मांग दोहराई। फिलहाल राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में छात्रों के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) ने दावा किया है कि मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव, कैराना से सांसद इकरा हसन समेत पार्टी के कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बयान जारी कर इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया। पार्टी ने क्या कहा? पार्टी ने कहा कि छात्र अपनी समस्याओं और निष्पक्ष परीक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। सपा ने भाजपा सरकार पर छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है। इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया, जबकि बाहर छात्रों पर कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नीट परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। अखिलेश ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने और उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है, जिसके कारण छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। अखिलेश यादव ने क्या कहा? अखिलेश यादव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेज भी प्रदर्शनकारियों की बात सुनते थे और आज पूरी दुनिया गांधीजी का सम्मान करती है। उन्होंने सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की सलाह दी। वहीं, डिंपल यादव ने कहा कि देशभर के छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा और न्याय की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, किसान, युवा और पर्यावरण जैसे कई मुद्दों पर लोग परेशान हैं, लेकिन सरकार न तो शिकायतें सुन रही है और न ही समाधान निकाल रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से हिरासत के दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद अब 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का नेतृत्व उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो करेंगी। उन्होंने कहा कि वह अपने पति का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदर्शन में शामिल होंगी और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। "मैं सोनम वांगचुक का प्रतिनिधित्व करूंगी" न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उन्होंने वांगचुक को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यदि स्थानांतरण की मंजूरी मिल जाती तो वांगचुक भी मार्च में शामिल हो सकते थे। अब वह स्वयं उनके प्रतिनिधि के रूप में संसद मार्च में शामिल होंगी। छात्रों और अभिभावकों से की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील गीतांजलि आंग्मो ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों और अभिभावकों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी भी ऐसे तत्व से सावधान रहना होगा जो आंदोलन का माहौल बिगाड़ने या उसे अलग दिशा देने की कोशिश करे। उन्होंने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक अब भी अपना अनशन जारी रखना चाहते हैं। डॉक्टरों द्वारा तरल पदार्थ लेने की सलाह के बावजूद उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया है, हालांकि वे पानी पी रहे हैं। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि सरकार को वांगचुक के नेतृत्व में होने वाले संसद मार्च से डर है। उनके अनुसार, यदि वांगचुक स्वयं मार्च का नेतृत्व करते तो देशभर से बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन से जुड़ सकते थे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य को लेकर जताई जा रही चिंता केवल दिखावा है। हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉ. गीतांजलि आंग्मो की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग की थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के फैसले को मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने तत्काल अस्पताल बदलने की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। क्या है पूरा मामला? सोनम वांगचुक कथित NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। इस बीच संसद मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आह्वान पर आयोजित 'संसद मार्च' को देखते हुए जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 5,000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। जंतर-मंतर पर जुटने लगे प्रदर्शनकारी देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। हल्की बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं दिखा। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगा रहे हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। संसद मार्च की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। इलाके में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई और गिरफ्तारी की जा सकती है। तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस, CAPF और RAF की 25 से अधिक कंपनियों को तैनात किया गया है। स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी स्वयं पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग, चेकिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है। कई मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद संसद मार्च के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों पर अगले आदेश तक प्रवेश और निकास बंद कर दिया है। यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। बातचीत के लिए तैयार आंदोलनकारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रशासन ने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की पहल की है। उनके अनुसार संगठन संवाद के लिए तैयार है और अब फैसला सरकार को करना है। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक की तबीयत स्थिर है और उनका अनशन जारी है। चंद्रशेखर आजाद ने दिया समर्थन आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े हुए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है और इस मुद्दे को संसद के भीतर भी पूरी मजबूती से उठाया जाएगा। CJP का दावा- ऐतिहासिक होगा मार्च CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मार्च साबित होगा। उन्होंने कहा कि देशभर से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेगा। सोनम वांगचुक ने रखी हैं तीन शर्तें इस बीच अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही तय करती है या उनकी बात सांसदों तक पहुंचाने का रास्ता देती है, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। फिलहाल उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय का इंतजार है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।