Pension News

PFRDA launches AI-powered Pension Sahayak platform for faster pension grievance redressal in multiple Indian languages.
PFRDA ने लॉन्च किया AI आधारित 'पेंशन सहायक', अब चुटकियों में होगी पेंशन से जुड़ी शिकायतों का समाधान

PFRDA Pension Sahayak: पेंशनधारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने 'पेंशन सहायक' नाम से एक नया AI-आधारित शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह नया सिस्टम पुराने Central Grievance Management System (CGMS) की जगह लेगा और पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बनाएगा। यह आधुनिक प्लेटफॉर्म वेब, मोबाइल और व्हाट्सऐप जैसी सेवाओं को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में जोड़ता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा। 22 भारतीय भाषाओं में मिलेगी सुविधा 'पेंशन सहायक' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें Bhashini AI का इंटीग्रेशन किया गया है। इसके जरिए यूजर्स 22 भारतीय भाषाओं में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इतना ही नहीं, जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा और ऑडियो फॉर्मेट में भी सुना जा सकेगा। 'पेंशन सहायक' की 5 बड़ी खूबियां 1. PRAN और पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं अब यूजर्स सिर्फ अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP के जरिए लॉगिन कर सकेंगे। इसके लिए PRAN या पासवर्ड की आवश्यकता नहीं होगी। 2. एक मोबाइल नंबर से जुड़े सभी अकाउंट एक साथ दिखेंगे अगर किसी व्यक्ति के एक ही मोबाइल नंबर से कई PRAN जुड़े हैं, तो लॉगिन के बाद सभी अकाउंट्स एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगे। अटल पेंशन योजना (APY) के वे सदस्य जिन्होंने अपना PRAN नंबर भूल गए हैं, वे भी आसानी से उसे खोज सकेंगे। 3. स्थानीय भाषा में वॉइस कमांड से शिकायत दर्ज करने की सुविधा यूजर्स अपनी पसंदीदा भाषा में बोलकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसी भाषा में जवाब भी प्राप्त कर सकते हैं। 4. शिकायत का स्वतः एस्केलेशन यदि तय समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो सिस्टम स्वतः ही मामले को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा देगा। 5. समाधान से असंतुष्ट होने पर एक क्लिक में आगे बढ़ेगा मामला अगर यूजर दिए गए समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह केवल एक क्लिक के जरिए मामले को ओम्बड्समैन या NPS ट्रस्ट के पास भेज सकता है। साथ ही समाधान की गुणवत्ता को रेटिंग देने की सुविधा भी उपलब्ध है। पुराने सिस्टम से कितना अलग है नया प्लेटफॉर्म? पुराना CGMS सिस्टम अपेक्षाकृत पारंपरिक था और उपयोगकर्ताओं को तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती थी। वहीं नया 'पेंशन सहायक' पूरी तरह AI-संचालित, वॉइस-सक्षम और यूजर-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म है। अब पेंशनधारकों को सिर्फ अपनी समस्या बतानी होगी, बाकी का काम सिस्टम खुद संभालेगा। इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान बनने की उम्मीद है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Pension Payment
बिहार में हर माह 10 तारीख को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा पेंशन

पटना, एजेंसियां। बिहार में अब हर महीने 10 तारिख को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि का भुगतान किया जाएगा। इसे लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक की। इस दौरान मौके पर मौजूद सभी पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए की हर हाल में पेंशन के लाभुकों के खाते में 10 तारीख को पैसे ट्रांसफर हो जाने चाहिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जानेवाली सेवाओं की तकनीक के माध्यम से गहन निगरानी करने के भी निर्देश दिए। कमजोर और वंचित वर्गों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ सीएम ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र जितना अच्छा बनेगा, बच्चों का विकास भी उतना ही अच्छा होगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविकाओं और शत प्रतिशत लक्षित बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में स्टेटिंग और वेस्टिंग के आंकड़ों में सुधार करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परवरिश योजना सहित अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाया जाए। उन्होंने योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाओं और सहायता राशि की पुनर्समीक्षा करने पर जोर देते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन को और सुदृढ़ बनाने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से सहयोग की संभावनाएं तलाश की जाएं। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने तथा योजनाओं के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया, ताकि कमजोर और वंचित वर्गों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। लोगों को कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को लाइसेंस जारी करने, अनुमति प्रदान करने और निरीक्षण जैसी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। बैठक में उन्होंने कहा कि उद्योगों, निवेशकों, स्टार्टअप्स और आम नागरिकों को सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त कर बिहार में निवेश और व्यवसाय के लिए सुगम वातावरण तैयार करने पर बल दिया।

Unknown जून 2, 2026 0
Government employees discuss OPS, NPS and UPS pension options amid 8th Pay Commission talks
8वें वेतन आयोग में उठी नई मांग: कर्मचारियों को OPS, NPS और UPS में चुनने का मिले विकल्प

देशभर में 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स संगठनों ने एक नई मांग उठाई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को National Pension System, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से अपनी पसंद की योजना चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब वेतन आयोग वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और रिटायरमेंट लाभों को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव ले रहा है। कर्मचारियों ने क्यों उठाई विकल्प की मांग? कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सभी कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतें और रिटायरमेंट प्लान अलग-अलग होते हैं। ऐसे में एक ही पेंशन मॉडल सभी पर लागू करना उचित नहीं है। पुरानी पेंशन योजना यानी OPS में रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती है, जो अंतिम वेतन और महंगाई भत्ते से जुड़ी होती है। वहीं NPS में पेंशन बाजार आधारित रिटर्न और जमा फंड पर निर्भर करती है। सरकार द्वारा शुरू की गई UPS योजना में गारंटीड पेंशन जैसी कुछ सुविधाएं दी गई हैं, लेकिन यह भी योगदान आधारित प्रणाली पर काम करती है। इसी वजह से कई कर्मचारी अभी भी OPS को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। पेंशन सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा कर्मचारी संगठनों के मुताबिक अब सरकारी कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा को लेकर है। कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें पहले से स्पष्ट हो कि सेवा समाप्ति के बाद उन्हें कितनी पेंशन मिलेगी। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि कुछ लोग निश्चित पेंशन चाहते हैं, जबकि कुछ कर्मचारी NPS या UPS जैसी योजनाओं में बने रहना पसंद कर सकते हैं। इसलिए विकल्प देने से कर्मचारियों को अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला लेने की स्वतंत्रता मिलेगी। क्या अभी बदल सकते हैं योजना? फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को OPS, NPS और UPS के बीच स्वतंत्र रूप से विकल्प बदलने की अनुमति नहीं है। 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त अधिकांश केंद्रीय कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं। ऐसे किसी भी बदलाव के लिए सरकार को नई नीति बनानी होगी और संबंधित आयोगों की सिफारिशों की जरूरत पड़ेगी। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हुई है। VRS कर्मचारियों को लेकर भी चर्चा पेंशन विकल्प के अलावा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले कर्मचारियों को लेकर भी नए सुझाव सामने आए हैं। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि VRS लेने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन को लेकर अनिश्चितता का सामना नहीं करना चाहिए। 8वें वेतन आयोग में जारी हैं बैठकें 8th Pay Commission देशभर में कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स समूहों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है। आयोग वेतन, पेंशन, भत्तों और सेवा शर्तों को लेकर सुझाव जुटा रहा है। हालांकि OPS, NPS और UPS में विकल्प देने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस मुद्दे ने वेतन आयोग की चर्चाओं में नई बहस जरूर छेड़ दी है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Senior citizens and workers promoting Atal Pension Yojana completing 11 years with 9 crore subscribers.
Atal Pension Yojana के 11 साल पूरे, करीब 9 करोड़ लोगों का बुढ़ापा हुआ सुरक्षित

भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना Atal Pension Yojana को शुरू हुए 11 साल पूरे हो गए हैं। साल 2015 में शुरू की गई यह योजना अब करोड़ों लोगों के बुढ़ापे का सहारा बन चुकी है। खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले गरीब, मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे कामगारों के लिए यह योजना बड़ी राहत साबित हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक इस योजना से करीब 8.96 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 135.14 लाख नए सब्सक्राइबर शामिल हुए, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। 2047 तक ‘Insurance for All’ लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम Narendra Modi ने साल 2047 तक “Insurance for All” का लक्ष्य रखा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए 9 मई 2015 को Atal Pension Yojana की शुरुआत की गई थी। धीरे-धीरे यह योजना भारत की सबसे बड़ी गारंटीकृत पेंशन योजनाओं में शामिल हो गई है। योजना के तहत जमा राशि और निवेश को देखें तो इसका Asset Under Management (AUM) अब ₹51,416 करोड़ तक पहुंच चुका है। किन लोगों के लिए शुरू की गई थी योजना? यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बनाई गई थी। ऐसे लोग जिनके पास रिटायरमेंट या बुढ़ापे में आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं होता, उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से इसे शुरू किया गया। इसमें 18 से 40 वर्ष तक की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक, जिसके पास बैंक या डाकघर में खाता हो, शामिल हो सकता है। हालांकि 1 अक्टूबर 2022 से आयकरदाता लोगों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। योजना में क्या मिलते हैं फायदे? Atal Pension Yojana के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर हर महीने ₹1,000 से लेकर ₹5,000 तक की गारंटीकृत पेंशन मिलती है। यह पेंशन केंद्र सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाती है। योजना के प्रमुख लाभ: 60 साल की उम्र के बाद आजीवन मासिक पेंशन सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद पति या पत्नी को समान पेंशन दोनों की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को जमा राशि वापस ऑटो डेबिट सुविधा के जरिए आसान भुगतान मासिक, त्रैमासिक और अर्धवार्षिक भुगतान विकल्प जरूरत के अनुसार योगदान राशि बढ़ाने या घटाने की सुविधा क्यों बढ़ रही है योजना की लोकप्रियता? भारत तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अनुमान है कि साल 2050 तक देश की करीब 20% आबादी 60 वर्ष से अधिक आयु की हो जाएगी। ऐसे में बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि Atal Pension Yojana जैसी योजनाएं भविष्य में करोड़ों लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभाएंगी।  

surbhi मई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0