Puja Vidhi

Devotees worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi on Padmini Ekadashi during Adhik Maas fasting rituals
पद्मिनी एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Devotees puja Lord Hanuman with flowers and sindoor on Telugu Hanuman Jayanti festival
कब है तेलुगु हनुमान जयंती 2026? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

हनुमान जयंती भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। जहां उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगु हनुमान जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 12 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा। तिथि और मुहूर्त दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026, दोपहर 3:24 बजे दशमी तिथि समाप्त: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे तेलुगु परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। 41 दिनों की दीक्षा परंपरा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि 41 दिनों की दीक्षा के रूप में मनाया जाता है। इस दीक्षा की शुरुआत: 2 अप्रैल 2026 समापन: 12 मई 2026 (हनुमान जयंती) भक्त इस अवधि में संयम, व्रत और विशेष पूजा का पालन करते हैं। दक्षिण भारत में हनुमान जी का महत्व हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। रामायण के अनुसार, कर्नाटक के अंजनाद्रि पर्वत को उनका जन्मस्थान माना जाता है। दक्षिण भारत में हनुमान जी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है: कर्नाटक: हनुमंथा, आंजनेय आंध्र-तेलंगाना: हनुमंतुडु, आंजनेयुडु तमिलनाडु: आंजनेयार पूजा विधि (सरल तरीके से) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं हनुमान जी को सिंदूर, चोला, फूल, फल, पान, गुड़-चना अर्पित करें हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद बांटें विशेष महत्व तेलुगु हनुमान जयंती पर की गई पूजा से साहस, शक्ति और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है। अगर आप दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती मनाना चाहते हैं, तो 12 मई 2026 का दिन बेहद खास है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाती है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Lord Narasimha with lamps, flowers, and sacred mantras on Narasimha Jayanti
नरसिंह जयंती 2026: आज करें चमत्कारी आरती और शक्तिशाली मंत्रों का पाठ

हिंदू धर्म में नरसिंह जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान भगवान नृसिंह की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, आरती और मंत्रों का जाप करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट होकर अधर्म का नाश किया था। इसलिए इस दिन की गई सच्चे मन से उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान नरसिंह की आरती ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जनका ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी। अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी। दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे। शिवजी जय-जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ श्रद्धापूर्वक करें इन मंत्रों का जाप आपत्ति निवारक नरसिंह मंत्र ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥ नरसिंह गायत्री मंत्र ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नरसिंह प्रचोदयात्॥ संपत्ति बाधा नाशक मंत्र ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूऱय॥ ऋण मोचक नरसिंह मंत्र ॐ क्रोध नरसिंहाय नृम नमः॥ क्या है इस दिन का महत्व? नरसिंह जयंती पर व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भय समाप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान नृसिंह अपने भक्तों की हर बाधा को दूर कर उन्हें साहस और सुरक्षा प्रदान करते हैं।    

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
Devotees performing puja of Goddess Sita and Lord Ram with flowers, lamps, and offerings
सीता नवमी 2026 आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता जानकी का महत्व

आज मनाई जा रही है सीता नवमी हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज, 25 अप्रैल 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। इसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं। यह पर्व नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त इस वर्ष नवमी तिथि 24 अप्रैल की शाम 7:21 बजे शुरू होकर 25 अप्रैल की शाम 6:27 बजे तक रहेगी। माता सीता की पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसे करें माता सीता की पूजा सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र से सजी चौकी पर माता सीता और भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। जल से भरा कलश रखें। माता सीता को सिंदूर, अक्षत, फूल, माला और श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीराम को चंदन, पुष्प और प्रसाद चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं। सीता चालीसा, व्रत कथा और मंत्रों का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें। सीता नवमी का धार्मिक महत्व माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। भक्त अपने घर की खुशहाली, संतान सुख और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हैं। नारी शक्ति की प्रेरणा हैं माता सीता माता सीता का जीवन साहस, आत्मसम्मान और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों का साथ नहीं छोड़ा। वनवास, रावण द्वारा अपहरण और कठिन परीक्षाओं के बावजूद उन्होंने अद्भुत संयम दिखाया। आत्मनिर्भरता का अद्भुत उदाहरण लव-कुश के पालन-पोषण में माता सीता ने एकल माता के रूप में जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन बताता है कि स्त्री हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। सीता नवमी का संदेश सीता नवमी हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति हमारे भीतर होती है। त्याग, धैर्य और आत्मविश्वास से जीवन की हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही माता जानकी का अमर संदेश है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Devotees worship Maa Baglamukhi with yellow flowers, turmeric garlands and traditional rituals on Jayanti
बगलामुखी जयंती 2026: आज मां पीताम्बरा की पूजा, जानें क्यों पड़ा यह दिव्य नाम

आज श्रद्धा से मनाई जा रही बगलामुखी जयंती आज, 24 अप्रैल 2026 को देशभर में Baglamukhi Jayanti श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं, वाणी में शक्ति आती है और जीवन में विजय प्राप्त होती है। दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी को आठवां स्थान प्राप्त है। मां बगलामुखी को क्यों कहते हैं पीताम्बरा? मां बगलामुखी को 'पीताम्बरा देवी' के नाम से भी जाना जाता है। 'पीत' यानी पीला और 'अम्बर' यानी वस्त्र। मान्यता है कि देवी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है और वे सदैव पीले वस्त्र धारण करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में जब भयंकर तूफान से सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई थीं। उस समय उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी और पीतवर्ण था। यही कारण है कि उन्हें पीताम्बरा कहा जाता है। पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व मां बगलामुखी की आराधना में पीले रंग का विशेष स्थान है। भक्त पूजा के दौरान: पीले वस्त्र धारण करते हैं पीले फूल अर्पित करते हैं हल्दी की माला चढ़ाते हैं पीले नैवेद्य का भोग लगाते हैं धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीला रंग ऊर्जा, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। बगलामुखी जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष तिथि का समय इस प्रकार है: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026, रात 8:49 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 7:21 बजे उदया तिथि: 24 अप्रैल 2026 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक मां बगलामुखी की पूजा से क्या मिलता है? धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की कृपा से शत्रुओं पर विजय मिलती है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली बनती है। विशेष रूप से न्यायालय, प्रतियोगी परीक्षा और विवादों में सफलता के लिए उनकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Devotees offering prayers to River Ganga during Ganga Saptami with diyas and flowers on riverbank
गंगा सप्तमी 2026: घर बैठे ऐसे करें पूजा, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

  आज मनाई जा रही है पावन गंगा सप्तमी वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाया जाने वाला Ganga Saptami इस वर्ष 23 अप्रैल को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित होकर भगवान Shiva की जटाओं में विराजी थीं। इस दिन गंगा स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा और स्नान का शुभ मुहूर्त गंगा सप्तमी के दिन शुभ कार्यों के लिए दो प्रमुख समय बताए गए हैं– ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:20 बजे से 5:04 बजे तक मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक इन समयों में स्नान, पूजा और दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। घर पर ऐसे पाएं गंगा स्नान का पुण्य अगर आप गंगा तट पर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही सरल विधि से गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं– सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्नान के पानी में गंगाजल मिलाएं और ‘हर-हर गंगे’ का उच्चारण करें। ‘गंगे च यमुने चैव…’ मंत्र का जप करते हुए स्नान करने से पवित्रता बढ़ती है। घर के मंदिर में मां गंगा की प्रतिमा या गंगाजल से भरा कलश स्थापित करें। फल, फूल और मिठाई अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करें। ‘गंगा चालीसा’ का पाठ करें और अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें। दान का विशेष महत्व इस दिन दान करना बेहद पुण्यदायी माना गया है। अपनी क्षमता अनुसार– अनाज वस्त्र जल जरूरतमंदों को दान करने से मां गंगा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मां गंगा के प्रभावशाली मंत्र पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है– ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः गंगा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा...   गंगा सप्तमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य कमाने का विशेष अवसर है। यदि आप श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करते हैं, तो घर बैठे भी गंगा स्नान का फल प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन किया गया स्नान, जप और दान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लेकर आता है।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Devotees पूजा Lord Narasimha with lamps and flowers during Narasimha Jayanti ritual
नरसिंह चतुर्दशी 2026: कब है व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा विधि

  कब है नरसिंह चतुर्दशी? नरसिंह चतुर्दशी, जिसे नरसिंह जयंती भी कहा जाता है, इस साल 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने चौथे अवतार भगवान नरसिंह के रूप में प्रकट होकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। हिंदू पंचांग के मुताबिक: चतुर्दशी तिथि शुरू: 29 अप्रैल 2026, शाम 07:51 बजे चतुर्दशी तिथि समाप्त: 30 अप्रैल 2026, रात 09:12 बजे व्रत और पूजा: 30 अप्रैल (उदया तिथि के आधार पर) पूजा का शुभ मुहूर्त नरसिंह भगवान का प्राकट्य संध्या काल में हुआ था, इसलिए इस दिन शाम के समय पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त: शाम 04:17 बजे से 06:56 बजे तक यह समय भगवान की आराधना और व्रत पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। कैसे करें पूजा? जानें आसान विधि नरसिंह चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से पूजा करने से विशेष फल मिलता है। पूजा की प्रक्रिया इस प्रकार है: सुबह स्नान कर साफ और संभव हो तो पीले वस्त्र पहनें हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद) से अभिषेक करें चंदन, पीले फूल, धूप और दीप अर्पित करें भगवान को केसरयुक्त दूध, फल और मिठाई का भोग लगाएं नरसिंह मंत्रों का जाप करें और प्रह्लाद कथा का पाठ करें अंत में कपूर से आरती कर पूजा पूर्ण करें धार्मिक महत्व और मान्यता मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भय, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। भगवान नरसिंह अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्ति की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Devotees worship Lord Vishnu during Mohini Ekadashi with tulsi leaves, lamps, and traditional offerings.
Mohini Ekadashi 2026: 26 या 27 अप्रैल कब है? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

  हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोहिनी एकादशी 2026 सही तारीख साल 2026 में मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल (सोमवार) को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि शुरू: 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल शाम 6:15 बजे उदया तिथि (सूर्योदय के अनुसार) के आधार पर व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा मुहूर्त: सुबह 9:02 बजे से 10:40 बजे तक व्रत पारण (व्रत खोलने का समय) पारण तिथि: 28 अप्रैल 2026 समय: सुबह 5:43 बजे से 8:21 बजे तक पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप) सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा/तस्वीर स्थापित करें भगवान को स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं चंदन तिलक लगाएं, धूप-दीप जलाएं तुलसी दल, फल, नारियल, मिठाई अर्पित करें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें अंत में आरती करें और जरूरतमंदों को दान दें क्या है धार्मिक मान्यता? मोहिनी एकादशी का संबंध उस कथा से है जब भगवान विष्णु ने “मोहिनी” रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया और असुरों को भ्रमित किया। यह दिन बुराइयों, मोह और गलत संगति से मुक्ति पाने का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा का संदेश एक कथा के अनुसार, एक पापी युवक ने ऋषि के कहने पर यह व्रत किया और उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। इससे यह सीख मिलती है कि सही समय पर किया गया एक अच्छा कर्म इंसान की दिशा बदल सकता है। क्यों खास है यह व्रत? सहस्र गौदान के बराबर पुण्य पापों से मुक्ति बुद्धि और विवेक में वृद्धि जीवन की समस्याओं से छुटकारा जीवन के लिए सीख मोहिनी अवतार हमें सिखाता है कि केवल ताकत ही नहीं, बल्कि सही समय पर लिया गया समझदारी भरा निर्णय ही असली जीत दिलाता है। मोहिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सही निर्णय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला पर्व है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Devotees performing Kalashtami night worship of Lord Kaal Bhairav with oil lamps and offerings.
Kalashtami 2026: 9 या 10 अप्रैल? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

अप्रैल 2026 में पड़ने वाली कालाष्टमी को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम बना हुआ है। कई लोग 9 अप्रैल को व्रत रखने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ 10 अप्रैल को। ऐसे में पंचांग के आधार पर सही तिथि और पूजा का शुभ समय जानना बेहद जरूरी है। हिंदू धर्म में हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव का प्राकट्य हुआ था। इस व्रत को रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-शांति आती है। सही तिथि क्या है? वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 10 अप्रैल 2026 की रात 11:15 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत उदयातिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त काल भैरव की पूजा रात में करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार 10 अप्रैल को रात 9:00 बजे से 11:00 बजे तक पूजा का सबसे शुभ समय रहेगा। कालाष्टमी पूजा विधि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। फिर काल भैरव का अभिषेक कर उन्हें तिलक लगाएं। पूजा में काले तिल, सरसों का तेल, गुड़, काली उरद, कच्चा दूध और मीठी रोटी अर्पित करें। दीप जलाकर आरती करें और अंत में शिव चालीसा एवं भैरव चालीसा का पाठ करें। विशेष उपाय इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। (Disclaimer: यह जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।)  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Devotee offering water to Moon during Chaitra Purnima under night sky
चैत्र पूर्णिमा 2026: आज चंद्रमा को अर्घ्य, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जिसमें पूजा, व्रत, दान और स्नान का अत्यंत पुण्य फल बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और हनुमान जी की उपासना की जाती है। इस वर्ष 1 अप्रैल 2026 को व्रत और चंद्र पूजन किया जाएगा, जबकि 2 अप्रैल को स्नान-दान और हनुमान जयंती मनाई जाएगी। तिथि और शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे व्रत और चंद्र अर्घ्य: 1 अप्रैल (संध्या समय) स्नान-दान और हनुमान जयंती: 2 अप्रैल (उदयातिथि के अनुसार) शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन पूर्णिमा की तिथि शाम और रात में रहती है, उसी दिन व्रत और चंद्रमा की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि चैत्र पूर्णिमा की शाम चंद्रोदय के समय अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना जाता है। चांदी या तांबे के पात्र में जल लें उसमें कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी चीनी मिलाएं चंद्रमा को देखते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें अंत में हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करें प्रमुख मंत्र ॐ सोमाय नमः ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ॐ क्लीं सोम मंत्राय नमः ॐ नमः शशांकशेखराय नियम और सावधानियां तामसिक भोजन से बचें (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) क्रोध और विवाद से दूर रहें अर्घ्य के बाद सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध, वस्त्र) का दान करें सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण करें धार्मिक महत्व मान्यता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रदेव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं। इस दिन अर्घ्य देने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही, यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाने वाला माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Hanuman Jayanti celebration
हनुमान जयंती 2026: 2 अप्रैल को करें ये 5 आसान उपाय, दूर होंगे संकट और मिटेगा मंगल दोष

हिंदू धर्म में Hanuman Jayanti का विशेष महत्व है। इस वर्ष यह पावन पर्व 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन Hanuman का जन्म हुआ था, इसलिए इसे चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और कुंडली का मंगल दोष भी शांत होता है। हनुमान जयंती पर करें ये 5 प्रभावी उपाय 1. व्रत और राम नाम का जप इस दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करें और Ram का नाम जपें। रामचरितमानस, राम स्तुति या राम चालीसा का पाठ करने से बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 2. सिंदूर अर्पित करें हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं, भय दूर होता है और शत्रुओं पर विजय मिलती है। 3. हनुमान बाहुक और अष्टक का पाठ रोग, भय या संकट से मुक्ति के लिए हनुमान बाहुक और संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ करें। यह उपाय मानसिक और शारीरिक कष्टों को दूर करने में सहायक माना जाता है। 4. बजरंग बाण का पाठ (विशेष परिस्थिति में) यदि जीवन में गंभीर संकट हो, तो बजरंग बाण का पाठ किया जा सकता है। हालांकि इसे सामान्य परिस्थितियों में पढ़ने की सलाह नहीं दी जाती, लेकिन कठिन समय में यह अत्यंत प्रभावी माना गया है। 5. दान और भोग का महत्व हनुमान जयंती पर मसूर की दाल, गुड़, चना दाल और लाल वस्त्र का दान करें। साथ ही हनुमान जी को लड्डू और बूंदी का भोग लगाएं। इससे मंगल और शनि दोष शांत होते हैं। आस्था और विश्वास का पर्व हनुमान जयंती केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Hanuman Jayanti celebration day
हनुमान जयंती 2026: कब है बजरंगबली का जन्मोत्सव, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हनुमान जयंती 2026: तिथि और मुहूर्त साल 2026 में हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि आरंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे उदया तिथि के अनुसार पर्व: 2 अप्रैल 2026 शुभ मुहूर्त: 2 अप्रैल को सूर्योदय से लेकर सुबह 07:41 बजे तक पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा सामग्री हनुमान जी की कृपा पाने के लिए पूजा में इन चीजों का विशेष महत्व है: लाल कपड़ा और चौकी चमेली का तेल, सिंदूर, जनेऊ लाल फूल, चंदन, अक्षत बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चना, केला घी का दीपक, धूप, कपूर, गंगाजल तुलसी दल (भोग में अनिवार्य) पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ या लाल वस्त्र पहनें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराकर चमेली तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर फूल, फल, चंदन और अक्षत अर्पित करें। बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाएं, साथ में तुलसी दल जरूर रखें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में आरती कर सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करें। प्रमुख मंत्र ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय रामदूताय स्वाहा ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय सर्वरोगहराय रामदूताय स्वाहा इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। क्या है मान्यता? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर और भक्ति भाव से पूजा कर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Devotees performing Sheetala Ashtami puja with neem leaves and offerings to Goddess Sheetala
Sheetala Ashtami 2026: आज शीतला अष्टमी का पावन व्रत, आरोग्य की देवी माता शीतला की पूजा से मिलता है स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

  हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे कई स्थानों पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आरोग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा की कामना के साथ माता शीतला की पूजा और व्रत के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं और परिवार को स्वास्थ्य एवं सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता को देवी दुर्गा का ही एक पावन रूप माना जाता है। वे रोगों से रक्षा करने वाली और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। विशेष रूप से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए प्राचीन समय से ही शीतला माता की पूजा की जाती रही है।   शीतला अष्टमी व्रत और पूजा विधि शीतला अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को प्रातःकाल जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी स्थापित कर उस पर माता शीतला की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान माता को पुष्प, नीम की पत्तियां, हल्दी, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही गंगाजल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। शीतला माता को ठंडा और एक दिन पूर्व बनाया गया भोजन विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में मालपुआ, मिठाई, दही, और बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद भक्तों को शीतला माता की व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही देवी का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती कर पूजा संपन्न की जाती है। पूजा के समापन पर एक लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर घर के सभी कमरों और परिवार के सदस्यों पर छिड़कना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।   शीतला माता के प्रमुख मंत्र पूजा के दौरान माता शीतला के इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है- ॐ शीतलायै नमः।   ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।   शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥   वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनी-कलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥ इन मंत्रों के जप से देवी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को रोगों से मुक्ति तथा मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।   शीतला अष्टमी पर करें ये विशेष उपाय शास्त्रों के अनुसार शीतला माता को शीतल वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए इस दिन ठंडे जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि मौसम के बदलाव के दौरान शरीर के तापमान को संतुलित रखने में यह सहायक होती है। इसके अलावा शीतला अष्टमी की पूजा में हल्दी अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के बाद हल्दी का तिलक स्वयं लगाकर परिवार के अन्य सदस्यों को भी लगाना चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार हल्दी शुद्धता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु शीतला अष्टमी के दिन सच्चे मन से माता शीतला की पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0