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Nirjala Ekadashi 2026 Parana Guide

निर्जला एकादशी 2026: व्रत पारण का शुभ समय, संपूर्ण विधि और पद्म पुराण में बताए गए नियम

surbhi जून 25, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu during Nirjala Ekadashi with kalash, tulsi leaves and traditional rituals
Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Parana Time

नई दिल्ली: सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशी व्रतों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे अत्यंत विशेष स्थान दिया गया है। पद्म पुराण और धर्मशास्त्रों में भी इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि महाभारत काल में भीमसेन ने इसी व्रत का पालन किया था। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण करना आवश्यक माना गया है।

निर्जला एकादशी व्रत पारण का शुभ समय

धार्मिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।

व्रत पारण का शुभ समय:
सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक

धर्मशास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर व्रत खोलना शुभ माना जाता है। समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

क्यों खास है निर्जला एकादशी?

मान्यता है कि जो व्यक्ति सभी एकादशी व्रत नहीं कर पाता, वह श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत रखकर वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना की जाती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह व्रत पापों का नाश करने वाला, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला और मोक्षदायक माना गया है।

पद्म पुराण के अनुसार व्रत पारण की संपूर्ण विधि

1. प्रातःकाल स्नान और शुद्धि

द्वादशी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. भगवान विष्णु की पूजा

स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। पूजा में गंध, धूप, दीप, पुष्प और सुंदर वस्त्र अर्पित करें।

3. जल कलश का संकल्प

पद्म पुराण में जल से भरे घड़े के दान का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के समय जल से भरे कलश का संकल्प करें।

4. मंत्र का उच्चारण

जल के घड़े का संकल्प करते समय यह मंत्र बोलें—

"देवदेव हृषीकेश संसारार्णवतारक।
उदकुम्भप्रदानेन नय मां परमां गतिम्॥"

अर्थ: हे संसार सागर से पार लगाने वाले भगवान हृषीकेश! इस जलघट के दान से मुझे परम गति प्रदान करें।

5. दान और ब्राह्मण भोजन

पूजन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

6. व्रत पारण

ब्राह्मण भोजन और पूजा के पश्चात स्वयं व्रत का पारण करें। परंपरा के अनुसार व्रत सबसे पहले जल और तुलसी दल ग्रहण करके खोला जाता है। इसके बाद सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है।

व्रत करने से क्या मिलता है फल?

पद्म पुराण के अनुसार विधिपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत और द्वादशी पर पारण करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्ति प्राप्त करता है। साथ ही उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद, सुख-समृद्धि, पारिवारिक खुशहाली और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Nirjala Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसे पूरे वर्ष की 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और व्रती पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखते हैं। इसलिए इसे सबसे कठिन और सबसे फलदायी एकादशी भी कहा जाता है। कब है निर्जला एकादशी 2026? पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून 2026, बुधवार को शाम 6:13 बजे से होगा और इसका समापन 25 जून 2026, गुरुवार को शाम 8:10 बजे पर होगा। उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। तिथि समय एकादशी तिथि प्रारंभ 24 जून 2026, शाम 6:13 बजे एकादशी तिथि समाप्त 25 जून 2026, शाम 8:10 बजे निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026, गुरुवार क्यों माना जाता है निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ? शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी का महत्व अत्यंत विशेष है। पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु का स्मरण और उपवास करने से मनुष्य को बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और पूजा का फल अक्षय माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत से मेरु पर्वत के समान बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। भीमसेनी एकादशी क्यों कहलाती है? निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में से भीमसेन अपनी प्रबल भूख के कारण नियमित व्रत नहीं रख पाते थे। तब उन्होंने महर्षि वेदव्यास से ऐसा उपाय पूछा, जिससे उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सके। महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर निर्जल रहकर व्रत करने का उपदेश दिया। भीमसेन ने इस कठिन व्रत का पालन किया और उन्हें वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हुआ। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाने लगा। क्यों मिलता है 24 एकादशियों के बराबर फल? धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो लोग पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का व्रत करने में सक्षम नहीं होते, उनके लिए निर्जला एकादशी विशेष महत्व रखती है। कहा जाता है कि केवल इस एक व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से वर्षभर में आने वाली सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी व्रत की विधि प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु का पूजन करें। पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। दिनभर अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखें। विष्णु मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जरूरतमंदों को दान करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

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Zodiac symbols representing weekly career and financial horoscope predictions for June 22 to 28, 2026.

साप्ताहिक आर्थिक और करियर राशिफल (22 से 28 जून 2026): बुधदेव की कृपा से बढ़ेगी तरक्की, बैंक बैलेंस में भी होगा इजाफा

Numerology chart with numbers 1 to 9 representing daily predictions for 20 June 2026.
Ank Jyotish 20 June 2026: मूलांक 2 वालों के बड़े काम होंगे आसान, मूलांक 8 को काम और आराम में बनाना होगा संतुलन

नई दिल्ली: अंक ज्योतिष के अनुसार आज 20 जून 2026, शनिवार का दिन विशेष महत्व रखता है। 20 तारीख का मूलांक (2+0) मिलाकर 2 बनता है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। वहीं शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है। ऐसे में आज सभी मूलांक पर चंद्रमा और शनि की संयुक्त ऊर्जा का प्रभाव रहेगा। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का दिन सहयोग, भावनात्मक संतुलन, रिश्तों में मधुरता और पुराने मनमुटाव को दूर करने का संदेश देता है। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लिए कैसा रहेगा आज का दिन। मूलांक 1 (1, 10, 19, 28): विचार साझा करने से मिलेगा लाभ आज टीमवर्क के जरिए बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें और किसी भी काम में जल्दबाजी से बचें। वरिष्ठों के साथ विनम्र व्यवहार बनाए रखें। लकी नंबर: 2, 9 लकी रंग: सफेद, क्रीम सुझाव: सच्चा नेतृत्व करुणा से आता है। मूलांक 2 (2, 11, 20, 29): बड़े काम भी आसानी से होंगे पूरे आज आपकी समझदारी और शांत स्वभाव मुश्किल कार्यों को भी आसान बना सकता है। पार्टनरशिप और बातचीत के मामलों में सफलता मिलने के संकेत हैं। दूसरों की मदद करने से मानसिक संतुष्टि मिलेगी। लकी नंबर: 2, 9 लकी रंग: सिल्वर, पर्ल व्हाइट सुझाव: अपने दिल और अंतर्ज्ञान पर भरोसा रखें। मूलांक 3 (3, 12, 21, 30): रचनात्मक कार्यों में मिलेगी सफलता आपकी रचनात्मक सोच लोगों को प्रभावित करेगी। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। पुरानी गलतफहमियों को दूर करने का अच्छा समय है। लकी नंबर: 3, 9 लकी रंग: पीला, लैवेंडर सुझाव: अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें। मूलांक 4 (4, 13, 22, 31): परिवार को भी दें समय आज योजनाओं में बदलाव संभव है। परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। काम के साथ परिवार के लिए समय निकालना जरूरी होगा। लकी नंबर: 4, 2 लकी रंग: ग्रे, हल्का नीला सुझाव: स्थिरता और संवेदनशीलता दोनों जरूरी हैं। मूलांक 5 (5, 14, 23): सोच-समझकर लें फैसले नए लोगों से मुलाकात लाभदायक साबित हो सकती है। किसी भी वादे या निर्णय से पहले पूरी जानकारी लें। जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। लकी नंबर: 5, 2 लकी रंग: स्काई ब्लू, सफेद सुझाव: जागरूकता ही सफलता की कुंजी है। मूलांक 6 (6, 15, 24): घर का माहौल रहेगा सुखद आपकी सहानुभूति और सहयोगी स्वभाव रिश्तों में मिठास बढ़ाएगा। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी। दूसरों की मदद करते समय खुद का ध्यान रखना न भूलें। लकी नंबर: 6, 9 लकी रंग: गुलाबी, क्रीम सुझाव: खुद से भी उतना ही प्यार करें जितना दूसरों से करते हैं। मूलांक 7 (7, 16, 25): आत्ममंथन का दिन रिसर्च और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए दिन अनुकूल है। मन की बात अपनों के साथ साझा करें और बेवजह की चिंताओं से दूर रहें। लकी नंबर: 7, 2 लकी रंग: पर्पल, सिल्वर सुझाव: शांति में ही सही दिशा मिलती है। मूलांक 8 (8, 17, 26): काम और आराम में संतुलन बनाना जरूरी आज काम का दबाव अधिक महसूस हो सकता है, लेकिन आपकी मेहनत की सराहना होगी। आर्थिक मामलों को व्यवस्थित करने के लिए समय अच्छा है। परिवार को भी समय देना जरूरी रहेगा। लकी नंबर: 8, 9 लकी रंग: नेवी ब्लू, मरून सुझाव: सफलता के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है। मूलांक 9 (9, 18, 27): पुरानी नाराजगी छोड़ने का समय आज आपकी सकारात्मक सोच दूसरों को प्रेरित करेगी। पुराने विवाद और मनमुटाव समाप्त करने का प्रयास करें। किसी जरूरतमंद की मदद करने से मन को सुकून मिलेगा। लकी नंबर: 9, 2 लकी रंग: लाल, क्रिमसन रेड सुझाव: पुरानी कड़वाहट छोड़कर आगे बढ़ें।  

surbhi जून 20, 2026 0
Devotee performing Saturday rituals with oil lamp and Peepal tree for prosperity in business.

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Devotees offering prayers to Lord Kartikeya during Skanda Shashthi with lamps and flowers.

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