Ranchi Municipal Corporation

retired employees protest
रांची नगर निगम के 400 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में 20% तक कटौती, निगम कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन

रांची। रांची नगर निगम एक बार फिर अपने फैसले को लेकर विवादों में है। इस बार मामला करीब 400 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में 20 प्रतिशत तक की कटौती का है। तीन महीने के इंतजार के बाद सोमवार को पेंशनभोगियों के खातों में राशि भेजी गई, लेकिन अधिकांश कर्मचारियों की पेंशन में 5 हजार से 12 हजार रुपये तक की कटौती कर दी गई। इससे नाराज पेंशनभोगी निगम कार्यालय पहुंच गए और नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।   नगर आयुक्त से की मुलाकात अवध बिहारी तिवारी के नेतृत्व में सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने नगर आयुक्त सुशांत गौरव से मुलाकात कर पेंशन में की गई कटौती पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना पूर्व सूचना उनके अधिकारों में कटौती की गई है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर आयुक्त ने कर्मचारियों को बताया कि पेंशन में कटौती का निर्णय नगर विकास विभाग के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। उन्होंने पेंशनभोगियों को अपनी आपत्ति और मांग विभाग के समक्ष रखने की सलाह दी।   नौ साल पुराने फैसले पर बदला रुख मामले की पड़ताल में एक दिलचस्प तथ्य भी सामने आया है। वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची नगर निगम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के समान पेंशन देने का निर्णय लागू किया था। उस समय गठित समिति में तत्कालीन उप नगर आयुक्त संजय कुमार ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। अब, करीब नौ वर्ष बाद, जब वही संजय कुमार अपर नगर आयुक्त के पद पर हैं, तो पेंशन में कटौती के निर्णय पर भी उनकी सहमति बताई जा रही है। इस बदलाव को लेकर पेंशनभोगियों के बीच नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ गए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशन में की गई कटौती वापस नहीं ली गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल नगर निगम का कहना है कि वह विभागीय निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई कर रहा है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
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मानसून से पहले रांची नगर निगम की बड़ी तैयारी, जलजमाव रोकने के लिए  एक्शन मोड में प्रशासन

रांची। झारखंड में मानसून के आगमन से पहले रांची नगर निगम पूरी तरह सतर्क हो गया है। हर वर्ष बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलजमाव, नालों के उफान और घरों में पानी घुसने जैसी समस्याओं को देखते हुए इस बार निगम ने पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। नगर निगम का लक्ष्य शहर को जलजमाव की समस्या से राहत दिलाना और मानसून के दौरान बेहतर जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।   नगर निगम के अनुसार शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई युद्धस्तर पर की जा रही है। नालों से गाद निकालकर उनकी जल वहन क्षमता बढ़ाई जा रही है ताकि भारी बारिश के दौरान पानी का प्रवाह बाधित न हो। साथ ही नालों के किनारों पर उगी झाड़ियों और घास की भी नियमित सफाई कराई जा रही है।   संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी कोकर चौक, सफायर अस्पताल क्षेत्र, महावीर नगर, खोरहाटोली और बांधगाड़ी जैसे जलजमाव प्रभावित इलाकों को विशेष फोकस में रखा गया है। इन क्षेत्रों में नालियों के चौड़ीकरण, अवरोध हटाने और अतिरिक्त जल निकासी व्यवस्था विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। निगम का मानना है कि समय रहते इन स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने से बारिश के दौरान परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।   अतिक्रमण पर होगी सख्त कार्रवाई नालों पर बढ़ते अतिक्रमण को भी निगम ने जलजमाव की बड़ी वजह माना है। इसके लिए ड्रोन मैपिंग और जमीनी सर्वे के माध्यम से अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके अलावा नालियों को जाम करने, निर्माण सामग्री फेंकने या सड़क पर पानी बहाने वालों के खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी की गई है।   नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि पिछले वर्षों में जलजमाव वाले सभी स्थानों की समीक्षा कर विशेष रणनीति बनाई गई है। निगम का उद्देश्य केवल राहत कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे समस्या उत्पन्न ही न हो। अब मानसून की पहली तेज बारिश के साथ इन तैयारियों की असली परीक्षा होगी।

Unknown जून 8, 2026 0
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जनगणना 2027 की तैयारी में रांची नगर निगम बना राज्य का मॉडल

रांची। रांची नगर निगम को जनगणना 2027 की तैयारियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना संचालन निदेशालय, झारखंड द्वारा प्रशंसा पत्र भेजा गया है। निदेशालय ने निगम की सक्रियता, समयबद्ध कार्यशैली और तकनीकी दक्षता की सराहना की है। झारखंड जनगणना संचालन के निदेशक Prabhat Kumar ने नगर आयुक्त Sushant Gaurav को भेजे पत्र में कहा कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों में रांची नगर निगम ने राज्यभर में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से HLB Geo-tagging और HLB Demarcation जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को गंभीरता और दक्षता के साथ पूरा किया गया है।   लगभग 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण 27 अप्रैल 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, रांची नगर निगम ने अपने अधिकांश कार्य लगभग 100 प्रतिशत पूरे कर लिए हैं। निदेशालय ने इसे राज्य के अन्य शहरी निकायों के लिए प्रेरणादायक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, HLB Geo-tagging और Demarcation जनगणना प्रक्रिया की आधारशिला हैं, इसलिए इनका समय पर और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन बेहद जरूरी था।   आने वाले चरणों में भी अहम भूमिका निदेशालय ने निगम की पूरी टीम की सराहना करते हुए आगामी चरणों में भी इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा जताई है। आने वाले दिनों में Self Enumeration, मकान सूचीकरण और मकानों की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे, जिनमें नगर निगम की भूमिका अहम रहेगी। नगर निगम प्रशासन ने इस उपलब्धि का श्रेय अधिकारियों, सुपरवाइजरों, फील्ड कर्मचारियों और तकनीकी टीम को दिया है।    निगम के अनुसार  निगम के अनुसार, डिजिटल तकनीक, बेहतर समन्वय और टीमवर्क के कारण यह सफलता संभव हुई। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि यह सम्मान कर्मचारियों की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम है तथा भविष्य में भी रांची नगर निगम देश के लिए एक आदर्श शहरी मॉडल के रूप में कार्य करता रहेगा।

Unknown मई 11, 2026 0
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रांची नगर निगम ने बदली परंपरा, अब सम्मान में मिलेगा सफाई का सामान

रांची। रांची नगर निगम में इन दिनों एक अलग और संदेशात्मक पहल चर्चा में है। नवनिर्वाचित मेयर रोशनी खलखो ने आगंतुकों से अपील की है कि वे मुलाकात के दौरान फूल-मालाओं और गुलदस्तों की जगह झाड़ू, डस्टबिन और सफाई से जुड़ी सामग्री भेंट करें। इस पहल का मकसद सिर्फ औपचारिक परंपरा बदलना नहीं, बल्कि लोगों के बीच स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश पहुंचाना है। नगर निगम का मानना है कि जो चीज समाज के काम आए, वही असली सम्मान और सार्थक उपहार है।   जमीन पर दिखने लगा असर, लेकिन बदलाव अभी अधूरा इस पहल का शुरुआती असर अब धीरे-धीरे जमीन पर दिखने लगा है। कई आगंतुकों ने मेयर के निर्देश का पालन करते हुए झाड़ू और डस्टबिन भेंट किए हैं, जो यह संकेत देता है कि लोग इस नई सोच को समझ रहे हैं और अपनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। हालांकि, दूसरी ओर कुछ लोग अब भी पुरानी परंपरा के तहत फूल और गुलदस्ते लेकर पहुंच रहे हैं। इससे साफ है कि यह बदलाव अभी शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह व्यवहार में उतरने में थोड़ा समय लगेगा।   सामाजिक संदेश के रूप में देखी जा रही पहल नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक निर्देश नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने की कोशिश है। उनका मानना है कि अगर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाए, तो यह पहल निगम कार्यालय तक सीमित न रहकर पूरे शहर में स्वच्छता आंदोलन का रूप ले सकती है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस कदम की सराहना करते हुए इसे एक व्यावहारिक और प्रेरणादायक पहल बताया है।   शहर में नई सोच का संकेत स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल खासकर युवाओं और छात्रों के बीच सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती है। यदि इसे गंभीरता से अपनाया गया, तो यह न केवल रांची नगर निगम बल्कि पूरे शहर के लिए एक नई और उपयोगी परंपरा बन सकती है। फिलहाल यह पहल बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है।

Unknown अप्रैल 7, 2026 0
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पहली बार रांची नगर निगम ने 100 करोड़ का टैक्स किया कलेक्शन

रांची। रांची नगर निगम ने शहरी वित्तीय प्रबंधन में नया मुकाम हासिल किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम का प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन पहली बार 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। 2013 में यह आंकड़ा केवल 5 करोड़ रुपये था, जबकि अब यह बढ़कर लगभग 101.99 करोड़ रुपये हो गया है। यह निगम की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।नगर आयुक्त सुशांत गौरव के नेतृत्व में पिछले छह महीनों में विशेष अभियान चलाया गया। इसी प्रयास का असर रहा कि अकेले मंगलवार को ही करीब 1.59 करोड़ रुपये जमा किए गए। अभियान में आयुक्त खुद फील्ड में सक्रिय रहे और प्रत्येक वार्ड की मॉनिटरिंग करते रहे। इस बार डिजिटल भुगतान ने भी कलेक्शन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। नागरिकों ने करीब 23 करोड़ रुपये ऑनलाइन जमा किए, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी। निगम ने शहर भर में डोर-टू-डोर सर्वे और सत्यापन अभियान चलाकर छूटे हुए और अज्ञात होल्डिंग्स की पहचान की। बड़े बकायेदारों पर कड़ी कार्रवाई की गई और डिजिटल सिस्टम के जरिए रियल टाइम ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई।   पिछले कुछ सालों में टैक्स कलेक्शन लगातार बढ़ा है  2020-21 में 51.35 करोड़, 2021-22 में 58.03 करोड़, 2022-23 में 67.78 करोड़, 2023-24 में 69.71 करोड़, 2024-25 में 83.57 करोड़ और अब 2025-26 में 101.99 करोड़। इस दौरान संपत्तियों की संख्या भी 1 लाख से बढ़कर 2.5 लाख से ज्यादा हो गई और टैक्स कलेक्शन दक्षता लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंची। नगर निगम का राजस्व बढ़ने से शहर के विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। सफाई, सड़क, पानी और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। भविष्य में जीआईएस मैपिंग और डेटा-बेस्ड सिस्टम को और मजबूत कर कलेक्शन को और पारदर्शी बनाने की योजना है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
नीरज कुमार रांची नगर निगम के नए डिप्टी मेयर के रूप में
नीरज कुमार बने रांची नगर निगम के नए डिप्टी मेयर

रांची। रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर पद के चुनाव में वार्ड 31 के पार्षद नीरज कुमार ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 39 वोट मिले, जिससे उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस जीत के साथ नीरज कुमार रांची के निर्वाचित डिप्टी मेयर बन गए हैं। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और परिणाम घोषित होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विशेष रूप से यह परिणाम नगर निगम की राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे शहर की आगामी नीतियों और विकास कार्यों पर असर पड़ने की संभावना है।

Unknown मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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