मुंबई की कस्टम मोटरसाइकिल वर्कशॉप Mean Green Customs ने Royal Enfield Continental GT 650 को एक ऐसे फ्यूचरिस्टिक अवतार में पेश किया है, जिसने बाइक प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ‘Neon Discipline’ नाम से तैयार की गई यह कस्टम बाइक साइबरपंक थीम पर आधारित है और अपने अनोखे डिजाइन, ट्रांसपेरेंट बॉडी पार्ट्स तथा आधुनिक लाइटिंग सेटअप के कारण चर्चा में है। यह कस्टम बिल्ड 2024 मॉडल Continental GT 650 पर आधारित है। पहली नजर में इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह वही बाइक है जो शोरूम से निकलती है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि बाइक के मैकेनिकल डीएनए को लगभग वैसा ही रखा गया है, जिससे इसकी मूल राइडिंग फील बरकरार रहे। डिजाइन में दिखा साइबरपंक टच इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा बॉडीवर्क है। Mean Green Customs ने बाइक के टैंक शराउड्स को ट्रांसपेरेंट एक्रेलिक से तैयार किया है, जिससे टैंक का अंदरूनी हिस्सा भी दिखाई देता है। यही थीम रियर काउल और बेल्ली पैन तक जारी रहती है, जो बाइक को भविष्य की किसी साइंस-फिक्शन मशीन जैसा लुक देती है। बेस पेंट स्कीम में ब्लैक और सिल्वर रंग का इस्तेमाल किया गया है। इसके ऊपर रेड, पिंक और पर्पल रंगों की ट्रिपल स्ट्राइप डिजाइन पूरी बाइक को एक अलग पहचान देती है। सीट की स्टिचिंग भी इसी कलर पैटर्न को फॉलो करती है, जिससे पूरा डिजाइन एकरूप नजर आता है। स्टॉक राइडिंग फील को रखा बरकरार कस्टमाइजेशन के बावजूद बाइक के मुख्य मैकेनिकल पार्ट्स में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं। फ्रेम पूरी तरह स्टॉक रखा गया है। फ्रंट और रियर सस्पेंशन फैक्ट्री सेटअप के साथ हैं। ब्रेकिंग सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया गया। 648cc पैरेलल-ट्विन इंजन को मूल रूप में बनाए रखा गया है। हालांकि, बाइक के रियर सबफ्रेम को थोड़ा छोटा किया गया है और पिलियन फुटपेग माउंट्स हटाए गए हैं। इसके अलावा फ्रंट फोर्क्स को एडजस्ट कर बाइक का फ्रंट थोड़ा नीचे लाया गया है, जिससे इसका स्टांस अधिक आक्रामक दिखाई देता है। नया LED सेटअप बना आकर्षण का केंद्र फैक्ट्री हेडलाइट को हटाकर उसकी जगह 12 अलग-अलग LED एलिमेंट्स वाली कस्टम यूनिट लगाई गई है। इसके साथ स्लिम आफ्टरमार्केट इंडिकेटर्स भी दिए गए हैं, जो बाइक के फ्रंट प्रोफाइल को और अधिक शार्प बनाते हैं। स्पीडोमीटर की पोजिशन भी बदली गई है। अब यह हैंडलबार के बीच में नहीं बल्कि थोड़ा आगे और नीचे, राइडर के बाएं घुटने के सामने लगाया गया है, जो इसे एक अलग रेसिंग कैरेक्टर देता है। टायर और एग्जॉस्ट में भी बदलाव बाइक में Shinko E-705 टायर्स लगाए गए हैं। फ्रंट में 120/70R17 और रियर में 170/60R17 साइज का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा स्टॉक एग्जॉस्ट की जगह कस्टम हाई-माउंटेड स्क्रैम्बलर-स्टाइल एग्जॉस्ट लगाया गया है, जो इसके साइबरपंक लुक को और अधिक दमदार बनाता है। इंजन में हल्का अपग्रेड परफॉर्मेंस के मोर्चे पर भी कुछ बदलाव किए गए हैं। बाइक में BMC हाई-फ्लो एयर फिल्टर लगाया गया है और कस्टम ट्यूनिंग की गई है। इसका उद्देश्य ज्यादा पावर निकालना नहीं बल्कि इंजन की ब्रीदिंग क्षमता बढ़ाना और थ्रॉटल रिस्पॉन्स को अधिक स्मूद बनाना है। Pink Panther ग्राफिक बना खास आकर्षण इस कस्टम बिल्ड की एक दिलचस्प डिटेल फ्यूल कैप पर बना Pink Panther ग्राफिक है। यह छोटा सा एलिमेंट बाइक के गंभीर और फ्यूचरिस्टिक डिजाइन में एक अलग पहचान जोड़ता है। कुल मिलाकर ‘Neon Discipline’ इस बात का शानदार उदाहरण है कि किसी क्लासिक कैफे रेसर को उसकी मूल पहचान बनाए रखते हुए भी पूरी तरह नए युग की मशीन में बदला जा सकता है। यह कस्टम GT 650 भारतीय कस्टम बाइकिंग संस्कृति में एक अनोखी और यादगार पेशकश के रूप में देखी जा रही है।
लैटिन अमेरिका में भारत की कारोबारी और रणनीतिक मौजूदगी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में भारत की प्रतिष्ठित मोटरसाइकिल कंपनी रॉयल एनफील्ड ने पनामा में अपने तीन नए मॉडल लॉन्च किए हैं।इस लॉन्च को भारत की बढ़ती वैश्विक कारोबारी पहुंच और लैटिन अमेरिकी बाजार में भारतीय ब्रांड्स की मजबूत होती पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब पनामा और चीन के बीच संबंधों में लगातार तनाव बढ़ रहा है। भारतीय दूतावास की मौजूदगी में लॉन्च हुए नए मॉडल पनामा, निकारागुआ और कोस्टा रिका में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के राजदूत सुमित सेठ की मौजूदगी में रॉयल एनफील्ड की तीन नई मोटरसाइकिलों को लॉन्च किया गया। पनामा में लॉन्च किए गए नए मॉडलों में गोअन क्लासिक 350, हिमालयन 450 माना ब्लैक एडिशन और क्लासिक 650 शामिल हैं। भारतीय दूतावास ने इसे भारत की “एक्सपोर्ट स्टोरी” की बड़ी सफलता बताया और कहा कि चेन्नई से पनामा सिटी तक भारतीय ब्रांड्स की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। पनामा बना रॉयल एनफील्ड के लिए किफायती बाजार भारतीय दूतावास के मुताबिक, पनामा की खुली अर्थव्यवस्था और डॉलर आधारित मूल्य व्यवस्था के कारण यह क्षेत्र रॉयल एनफील्ड के लिए सबसे किफायती और संभावनाओं से भरे बाजारों में शामिल हो गया है। दूतावास ने कहा कि लैटिन अमेरिका में भारतीय कंपनियों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं और स्थानीय ग्राहकों के बीच भारतीय उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। 1901 से लगातार उत्पादन में बना हुआ है रॉयल एनफील्ड भारतीय दूतावास ने रॉयल एनफील्ड की ऐतिहासिक विरासत का भी उल्लेख किया। पोस्ट में कहा गया कि रॉयल एनफील्ड दुनिया के सबसे पुराने मोटरसाइकिल ब्रांड्स में से एक है, जो वर्ष 1901 से लगातार उत्पादन में बना हुआ है। पनामा में कंपनी की बढ़ती मौजूदगी को भारतीय ब्रांड्स पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत माना जा रहा है। व्यापार के साथ सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत कर रहा भारत भारत केवल व्यापारिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी पनामा में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। हाल ही में भारतीय दूतावास ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 के आयोजन की तस्वीरें भी साझा की थीं। यह कार्यक्रम ओल्ड पनामा सिटी के ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल पर आयोजित किया गया था। इसके अलावा दूतावास ने भारत और पनामा के रिश्तों को “5Ts ऑफ टुगेदरनेस” से जोड़ते हुए बताया था कि दोनों देशों को ट्रैडिशन, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म और टैलेंट आपस में जोड़ते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह में भी दिखी दोनों देशों की नजदीकी भारत और पनामा के बढ़ते संबंधों की झलक 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह में भी देखने को मिली थी। पनामा के राष्ट्रपति की ओर से मंत्री जुआन कार्लोस ओरिलाक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में करीब 500 मेहमानों ने भाग लिया और दोनों देशों की दोस्ती का जश्न मनाया गया। क्यों महत्वपूर्ण है पनामा? पनामा मध्य अमेरिका में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद रणनीतिक देश है, जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका को जोड़ता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान पनामा नहर (Panama Canal) है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है, जिससे जहाजों का सफर हजारों किलोमीटर कम हो जाता है। दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा इसी नहर से गुजरता है और हर साल करीब 14 हजार जहाज इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना पनामा पनामा नहर के कारण यह देश अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बन गया है। चीन ने पिछले एक दशक में पनामा में अपने निवेश और प्रभाव को तेजी से बढ़ाया था। वर्ष 2017 में पनामा ने ताइवान से संबंध खत्म कर चीन को आधिकारिक मान्यता दी थी और बाद में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना में शामिल होने वाला पहला लैटिन अमेरिकी देश बना। इसके बाद चीनी कंपनियों ने पनामा नहर के आसपास बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश किए। अमेरिका की चिंता के बाद बिगड़ने लगे चीन-पनामा संबंध 2024 के बाद अमेरिका ने पनामा में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जतानी शुरू की। वाशिंगटन को आशंका थी कि चीन व्यापारिक निवेश के जरिए रणनीतिक और सैन्य प्रभाव बढ़ा सकता है। इसके बाद अमेरिका ने पनामा पर चीन से दूरी बनाने का दबाव बढ़ाया। फरवरी 2025 में पनामा ने आधिकारिक तौर पर चीन की BRI परियोजना से खुद को अलग कर लिया। बाद में पनामा के सर्वोच्च न्यायालय ने चीनी कंपनी सीके हचिसन की सहायक कंपनी को दिए गए बंदरगाह संचालन समझौतों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया। भारत के लिए बढ़ रहा रणनीतिक और कारोबारी अवसर विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पनामा के बीच बढ़ती दूरी भारत के लिए नए कारोबारी और रणनीतिक अवसर पैदा कर सकती है। रॉयल एनफील्ड जैसे भारतीय ब्रांड्स की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत अब लैटिन अमेरिका में केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: भारत की प्रतिष्ठित दोपहिया निर्माता Royal Enfield ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पहली इलेक्ट्रिक बाइक Flying Flea C6 की झलक पेश कर दी है। यह लॉन्च कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से पेट्रोल इंजन वाली बाइक्स के लिए मशहूर ब्रांड अब EV सेगमेंट में प्रवेश कर चुका है। 1 रुपये में 3 Km: बेहद किफायती रनिंग कॉस्ट Flying Flea C6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम रनिंग कॉस्ट है। कंपनी के मुताबिक यह बाइक लगभग 1 रुपये में 3 किलोमीटर चल सकती है। IDC के अनुसार इसकी रेंज 154 किलोमीटर बताई जा रही है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा भी संभव होगी। बैटरी और चार्जिंग: फास्ट और किफायती इस इलेक्ट्रिक बाइक में 3.91 kWh की बैटरी दी गई है, जिसे लगभग 2 घंटे 16 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। चार्जिंग के दौरान करीब 4.6 kWh बिजली खर्च होती है। अगर बिजली की कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए, तो एक फुल चार्ज में 50 रुपये से भी कम खर्च आएगा–जो इसे बेहद किफायती बनाता है। कीमत और BaaS मॉडल का विकल्प Royal Enfield ने इस बाइक की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख तय की है। साथ ही कंपनी ने Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल भी पेश किया है, जिसके तहत ग्राहक इसे करीब ₹1.99 लाख में खरीद सकते हैं। इस मॉडल में बैटरी उपयोग और चार्जिंग विकल्पों को कस्टमाइज करने की सुविधा भी दी गई है। क्लासिक डिजाइन, मॉडर्न टेक्नोलॉजी Flying Flea C6 का डिजाइन कंपनी की क्लासिक विरासत को दर्शाता है, लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक का भी बेहतरीन समावेश किया गया है। यह बाइक उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो स्टाइल के साथ-साथ किफायत और पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं। EV सेगमेंट में बड़ा दांव Royal Enfield की यह पहल भारतीय EV बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है। Flying Flea C6 न सिर्फ पारंपरिक बाइक्स को चुनौती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी नई दिशा तय करने की क्षमता रखती है।
भारत की प्रतिष्ठित बाइक निर्माता Royal Enfield ने इलेक्ट्रिक सेगमेंट में बड़ा कदम रखते हुए अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Royal Enfield Flying Flea C6 लॉन्च कर दी है। Flying Flea ब्रांड के तहत पेश की गई यह बाइक न सिर्फ क्लासिक डिजाइन बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ बाजार में उतारी गई है। कीमत और उपलब्धता Flying Flea C6 की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख रखी गई है। हालांकि Battery-as-a-Service (BaaS) विकल्प के साथ इसकी कीमत घटकर ₹1.99 लाख तक आ जाती है। इसकी बुकिंग 10 अप्रैल दोपहर 12 बजे से शुरू हो जाएगी, जबकि डिलीवरी मई के अंत तक शुरू होने की संभावना है। शुरुआत में इसे बेंगलुरु में लॉन्च किया जाएगा और बाद में अन्य शहरों में उपलब्ध कराया जाएगा। रेंज और परफॉर्मेंस इस इलेक्ट्रिक बाइक में 15.4 kW का PMSM मोटर दिया गया है, जो 3.91 kWh बैटरी पैक से लैस है। रेंज: 154 Km (IDC) टॉप स्पीड: 115 Km/h 0-60 Km/h: सिर्फ 3.7 सेकंड चार्जिंग की बात करें तो ऑनबोर्ड चार्जर से बैटरी को 20% से 80% तक चार्ज करने में करीब 65 मिनट का समय लगता है। एडवांस फीचर्स Flying Flea C6 को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है: ऑल-LED लाइटिंग Google बेस्ड नेविगेशन वायरलेस फोन चार्जिंग कॉर्नरिंग ABS और ट्रैक्शन कंट्रोल Sport और Individual राइड मोड Individual मोड में राइडर अपनी जरूरत के अनुसार ABS, ट्रैक्शन कंट्रोल और थ्रॉटल रिस्पॉन्स को कस्टमाइज कर सकता है। डिजाइन और बिल्ड डिजाइन के मामले में यह बाइक Royal Enfield की पारंपरिक शैली से हटकर एक यूनिक और कॉम्पैक्ट लुक में आती है। एक्सपोज्ड फ्रेम गिर्डर-टाइप फ्रंट सस्पेंशन फ्लोटिंग सीट डिटैचेबल पिलियन सीट महज 124 किलोग्राम वजन के साथ यह कंपनी की अब तक की सबसे हल्की मोटरसाइकिल भी बन गई है। एल्युमिनियम केसिंग में रखा गया बैटरी पैक इसकी कूलिंग और एयरोडायनामिक्स को बेहतर बनाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।