मॉस्को, एजेंसियां। रूस पर यूक्रेन के बड़े पैमाने पर किए गए ड्रोन हमलों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमलों के दौरान मॉस्को क्षेत्र के नोगिंस्क स्थित एक ऑयल डिपो में भी भीषण आग लग गई। रूसी अधिकारियों ने बताया कि कई ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन कुछ ने अपने लक्ष्य को निशाना बनाया, जिससे व्यापक नुकसान हुआ। वेयरहाउस पर हमला सबसे घातक साबित हुआ रूसी अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ा नुकसान ताम्बोव क्षेत्र के कोतोव्स्क में स्थित Wildberries के लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस पर हुए ड्रोन हमले में हुआ, जहां सात कर्मचारियों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। मॉस्को क्षेत्र के इलेक्ट्रोस्टाल स्थित एक अन्य वेयरहाउस में भी ड्रोन हमले से कई लोग घायल हुए। ऑयल डिपो में लगी आग, अस्पताल खाली कराया गया मॉस्को के पास नोगिंस्क में ड्रोन हमले के बाद एक ऑयल डिपो में आग लग गई। आग की लपटें तेजी से फैलने के कारण आसपास के इलाके को खाली कराया गया और एहतियातन पास के एक मातृत्व अस्पताल से मरीजों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया। दमकल की कई टीमें घंटों तक आग बुझाने में जुटी रहीं। यूक्रेन ने बताया सैन्य लक्ष्य यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि हमलों का लक्ष्य रूस की उन लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और गोदामों को बनाना था, जहां ड्रोन निर्माण और नेविगेशन सिस्टम के लिए प्रतिबंधित विदेशी उपकरणों की आपूर्ति की जाती है। यूक्रेन का दावा है कि यह कार्रवाई रूस की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई। रूस ने बढ़ाई सुरक्षा, तनाव और गहराया हमलों के बाद रूस ने मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई हवाई अड्डों पर उड़ानों को अस्थायी रूप से प्रभावित किया गया, जबकि वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा गया है। लगातार बढ़ रहे ड्रोन हमलों के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए बड़ा ड्रोन हमला किया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुए इस हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग और धुएं के गुबार देखे गए, जबकि सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। चार वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसे यूक्रेन के सबसे बड़े ड्रोन अभियानों में से एक माना जा रहा है। रूस का दावा- 555 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रातभर में यूक्रेन की ओर से भेजे गए 555 ड्रोन को नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार: लगभग 200 ड्रोन मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। अधिकांश ड्रोन को राजधानी तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ा दी है। मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर गिरे कई ड्रोन मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर कई ड्रोन गिरे। अधिकारियों ने तत्काल किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। यह रिफाइनरी रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए इसे रणनीतिक दृष्टि से भी बड़ा हमला माना जा रहा है। चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हमले के कारण: कई उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी हुई। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हाल के महीनों में रूस में ड्रोन हमलों के बाद हवाई यातायात प्रभावित होने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जेलेंस्की बोले- रूस के हमलों का यह जायज जवाब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के हमलों ने एक बार फिर मॉस्को क्षेत्र और रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। जेलेंस्की ने कहा, “यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से जायज जवाब है। यह रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाले ठिकानों के खिलाफ हमारी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।” उन्होंने यह भी बताया कि: मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर इस सप्ताह दूसरी बार हमला किया गया। रोस्तोव ओब्लास्ट और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप और मैक्रों से बातचीत के बाद यूक्रेन का बड़ा कदम यह हमला ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और वार्ता की हैं। जेलेंस्की ने कहा कि: बातचीत यूक्रेन के लिए बेहद अहम रही। युद्ध की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद है। जी-7 देशों ने यूक्रेन को भविष्य में भी हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया है। जी-7 देशों ने दोहराया समर्थन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हाल के दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि जी-7 देश एक बार फिर उसके समर्थन में एकजुट दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश: यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखेंगे। उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। रूस के खिलाफ प्रभावी जवाबी कार्रवाई के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगे। आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं पुतिन इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर दूर स्थित कजान में आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। रूस इस मंच के माध्यम से एशियाई देशों के साथ: व्यापार, निवेश, और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। चार साल से अधिक समय से जारी है युद्ध रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। संघर्ष अब केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के भीतर गहराई तक हमले करने की क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस अपनी वायु रक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के आधार पर यूक्रेन के साथ समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शांति समझौते के लिए यूक्रेन को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। ट्रंप के प्रस्ताव पर रूस की सकारात्मक प्रतिक्रिया रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और वह उन प्रस्तावों पर आगे बढ़ने को तैयार है जिन पर अलास्का के एंकरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चर्चा हुई थी। पुतिन ने कहा कि यदि यूक्रेन भी इन प्रस्तावों को स्वीकार करता है तो संघर्ष का समाधान अपेक्षाकृत जल्दी संभव हो सकता है। उनके अनुसार, रूस बातचीत के रास्ते को बंद नहीं करना चाहता, लेकिन समझौता दोनों पक्षों की सहमति से ही संभव होगा। रूस की प्रमुख शर्तें क्या हैं? रूसी पक्ष के अनुसार संभावित समझौते के लिए कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति आवश्यक होगी: यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र पर रूस के नियंत्रण को स्वीकार करना होगा। खेरसोन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों में रूसी दावों को मान्यता देनी होगी। यूक्रेन को नाटो सदस्यता की दिशा में आगे नहीं बढ़ना होगा। सुरक्षा और सीमा संबंधी कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बनानी होगी। इन शर्तों पर यूक्रेन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुतिन को एक खुला पत्र लिखकर सीधे संवाद का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए आमने-सामने बातचीत और पूर्ण युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर दिया। जेलेंस्की ने कहा कि स्थायी शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने पुतिन को व्यक्तिगत बैठक का प्रस्ताव भी दिया है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि उसे यह पत्र प्राप्त हो चुका है। युद्ध के मैदान में रूस का दावा पुतिन ने दावा किया कि रूसी सेना विभिन्न मोर्चों पर लगातार बढ़त बनाए हुए है। उनके अनुसार, हाल के महीनों में रूस ने हजारों वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया है। रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि लुहांस्क क्षेत्र पर लगभग पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है, जबकि दोनेत्स्क और ज़ापोरिज्जिया के बड़े हिस्सों पर भी रूसी सेना का नियंत्रण है। यूरोप की भूमिका पर रूस का सवाल पुतिन ने यूरोपीय देशों की मध्यस्थता क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो देश लंबे समय से रूस की रणनीतिक हार की बात करते रहे हैं, उनके लिए निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाना कठिन होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहता। शांति वार्ता में क्यों आया ठहराव? रूस और यूक्रेन के बीच जिनेवा, इस्तांबुल और अबू धाबी सहित कई स्थानों पर पहले भी वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। फरवरी 2022 में शुरू हुआ युद्ध अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और लाखों लोगों को प्रभावित कर चुका है। ट्रंप के प्रस्ताव, पुतिन की प्रतिक्रिया और जेलेंस्की की नई पहल के बाद एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। क्या जल्द खत्म हो सकता है युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि शांति समझौते की संभावना तभी बढ़ेगी जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी अधिकतम मांगों में लचीलापन दिखाएं। फिलहाल रूस और यूक्रेन के रुख में बड़ा अंतर बना हुआ है, लेकिन हालिया बयानों ने भविष्य में वार्ता की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है।
मुंबई, एजेंसियां। Vaibhav Suryavanshi : वैभव सूर्यवंशी को भारत के टी-20 टीम में जगह मिल गई है। यह खबर तब सामने आई जब बीसीसीआई ने इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे पर जाने के लिए टीम इंडिया की घोषणा की। वैभव सूर्यवंशी को पहली बार टीम इंडिया में जगह मिली है, जो उनके आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम है। वैभव सूर्यवंशी अभी श्रीलंका में इंडिया ए की टीम के साथ हैं। IPL 2026 में किया शानदार प्रदर्शन वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। वे आईपीएल में सबसे अधिक रन (776) बनाने वाले खिलाड़ी बने थे। उनका स्ट्राइक रेट (237.30) भी सबसे ज्यादा था और उन्होंने छक्के (72) भी सबसे अधिक मारे थे। वैभव सूर्यवंशी अभी महज 15 साल के हैं। उनके प्रदर्शन पर क्रिकेट के दिग्गजों की नजर थी और सभी एक सुर में यह मांग कर रहे थे कि वैभव को टीम इंडिया में जगह दी जाए। बिहार के रहने वाले हैं वैभव सूर्यवंशी वैभव सूर्यवंशी बिहार के समस्तीपुर के जिले के रहने वाले हैं। उन्हें अपने पिता से क्रिकेट की कोंचिंग मिली है। वे बचपन से ही क्रिकेट में रुचि लेते हैं और अभी उनकी शिक्षा भी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने 10वीं का बोर्ड भी नहीं दिया है।
सेंट पीटर्सबर्ग: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वतंत्रता की सराहना करते हुए कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और अपने फैसले स्वयं करता है। पुतिन ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है और किसी बाहरी दबाव या निर्देश के आधार पर नीतियां नहीं बनाई हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस के साथ भारत के ऊर्जा और आर्थिक संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों में लगातार चर्चा हो रही है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का किया उल्लेख फोरम के दौरान बोलते हुए पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के निर्णय लेने के अधिकार और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान किया जाना चाहिए। रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देशों को अपने हितों के अनुसार नीतियां तय करने का अधिकार है और इस सिद्धांत पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। रूस-भारत संबंधों को बताया मजबूत पुतिन ने भारत को रूस का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग जारी है और यह संबंध आपसी हितों तथा विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूस और भारत के बीच सहयोग को प्रभावित करने के लिए किसी प्रकार का बाहरी दबाव प्रभावी नहीं होगा। रूसी तेल खरीद को लेकर चर्चा में रहे थे भारत-अमेरिका संबंध पिछले कुछ वर्षों में रूस से तेल आयात को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कई बार चर्चा हुई है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जबकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी। भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसकी विदेश नीति और आर्थिक फैसले राष्ट्रीय हितों तथा ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं के आधार पर तय किए जाते हैं। वैश्विक मंच पर फिर चर्चा में भारत की विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को आगे बढ़ा रहा है। रूस, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखने की भारत की नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने दावा किया है कि रूस ने राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सरकारी इमारतें, रिहायशी इलाके और स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीसरी बार इस्तेमाल हुई ओरेश्निक मिसाइल जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने कीव क्षेत्र के बिला त्सेरक्वा इलाके को निशाना बनाने के लिए ओरेश्निक मिसाइल दागी। यूक्रेन का दावा है कि यह चार साल से जारी युद्ध में तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया है। रूस इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो और जनवरी 2026 में लवीव क्षेत्र में भी ओरेश्निक मिसाइल इस्तेमाल कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पहले दावा कर चुके हैं कि ओरेश्निक मिसाइल मैक-10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से हमला कर सकती है और गहरे भूमिगत बंकरों को भी तबाह करने में सक्षम है। रूस ने 600 ड्रोन और 90 मिसाइल दागने का दावा यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने संयुक्त हमले में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट या इंटरसेप्ट कर दिया। कई मिसाइलें राजधानी कीव और आसपास के इलाकों तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। स्कूल और रिहायशी इलाके बने निशाना कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख Tymur Tkachenko के अनुसार, राजधानी के कम से कम नौ जिलों में हमलों से नुकसान हुआ है। वहीं कीव के मेयर Vitali Klitschko ने कहा कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया, जहां लोग शरण लिए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी रात सायरन बजते रहे और शहर के कई हिस्सों में विस्फोटों के बाद धुआं उठता दिखाई दिया। रूस ने हमले की पुष्टि की रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई रूस के अंदर यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक रूस की नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है। रूसी भाषा में “ओरेश्निक” का मतलब “हेज़लनट का पेड़” होता है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद तेज गति और गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता मानी जाती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तेज रफ्तार वाली मिसाइलों को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना बेहद मुश्किल होता है।
रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान प्रेस वार्ता में उन्होंने एक व्यक्ति को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर सख्त लेकिन मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। हालांकि लावरोव की टिप्पणी गंभीर लहजे में शुरू हुई, लेकिन बाद में उन्होंने ऐसा मजाक किया कि वहां मौजूद लोग हंस पड़े। प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ? बताया जा रहा है कि घटना प्रेस वार्ता शुरू होने से ठीक पहले की है। वायरल वीडियो में लावरोव अपनी बात रख रहे थे, तभी उनकी नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो मोबाइल फोन पर बात कर रहा था। इस पर उन्होंने पहले अंग्रेजी में कहा, “क्या आप यहां से थोड़ा हट सकते हैं?” इसके बाद उन्होंने दोबारा कहा, “या तो आप हट जाइए या आपका फोन।” ‘मैं मजाक नहीं कर रहा हूं’ जब संबंधित व्यक्ति ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी, तो लावरोव थोड़े सख्त नजर आए। उन्होंने कहा, “क्या आप यहां से जा सकते हैं? मैं मजाक नहीं कर रहा हूं।” वीडियो में इसके बाद लावरोव इधर-उधर देखते दिखाई देते हैं, मानो सुरक्षा कर्मियों या स्टाफ से बात कर रहे हों। फिर आया ‘गन’ वाला मजाक कुछ ही सेकंड बाद लावरोव ने माहौल हल्का करते हुए कहा, “अगर आपने अपना फोन सरेंडर नहीं किया, तो वे बंदूक निकाल लेंगे।” उनकी यह टिप्पणी सुनते ही वहां मौजूद लोग हंस पड़े। सोशल मीडिया पर अब यही क्लिप तेजी से शेयर की जा रही है। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ने इसे लावरोव का ‘ड्राई ह्यूमर’ बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे प्रेस कार्यक्रम में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश माना। हालांकि, जिस व्यक्ति को यह टिप्पणी कही गई, उसकी पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। BRICS बैठक में शामिल होने भारत आए थे लावरोव सर्गेई लावरोव 14-15 मई को आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत आए थे। इस बैठक में Seyed Abbas Araghchi समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है। सख्त बयानों के लिए जाने जाते हैं लावरोव रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर सर्गेई लावरोव अक्सर अपने सख्त और तीखे बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। दिल्ली में उनकी यह हल्की-फुल्की लेकिन सख्त टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का नया विषय बन गई है।
Ukraine के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने आरोप लगाया है कि रूसी सेना ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मिशन से जुड़े वाहनों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया। उन्होंने कहा कि हमला जानबूझकर किया गया और रूस को पूरी जानकारी थी कि वाहन संयुक्त राष्ट्र मिशन से जुड़े हैं। UN मिशन के वाहनों पर दो ड्रोन हमले जेलेंस्की के मुताबिक, रूस ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs (OCHA) से जुड़े वाहनों पर दो FPV ड्रोन हमले किए। उन्होंने बताया कि हमले के समय मिशन प्रमुख समेत संयुक्त राष्ट्र के आठ कर्मचारी वाहनों में मौजूद थे। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। सभी कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खेरसॉन क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि हमला कोराबेल्नी जिले में हुआ, जहां मानवीय सहायता मिशन सक्रिय था। ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’ स्थानीय अधिकारी प्रोकुडिन ने आरोप लगाया कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए सहायता मिशन के वाहनों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “रूस उन लोगों के खिलाफ भी लड़ाई जारी रखे हुए है, जो जरूरतमंदों की मदद करने का काम कर रहे हैं।” रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी चिंता रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान मानवीय सहायता एजेंसियों और नागरिक क्षेत्रों पर हमलों को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने पहले भी नागरिक और राहत मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि यूक्रेन युद्ध, ड्रोन हमलों और तख्तापलट की आशंकाओं के बीच उनकी सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कर दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, हालात ऐसे बन चुके हैं कि पुतिन अब लंबे समय तक जमीन के नीचे बने हाई-सिक्योरिटी बंकरों में रहकर काम कर रहे हैं. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बड़ा दावा ब्रिटिश अखबार Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) ने पिछले कुछ महीनों में पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है. यूरोपीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पुतिन अब पहले की तुलना में ज्यादा अलग-थलग हो गए हैं और सार्वजनिक गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी कम हो गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद से ही पुतिन का दायरा सीमित होने लगा था, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा चिंताएं कई गुना बढ़ गईं. ड्रोन हमलों ने बढ़ाई चिंता रिपोर्ट में यूक्रेन के कथित ड्रोन ऑपरेशन “स्पाइडरवेब” का भी जिक्र किया गया है. दावा है कि पिछले साल यूक्रेनी ड्रोन ने आर्कटिक सर्कल के पास रूसी एयरफील्ड्स को निशाना बनाया था, जिससे क्रेमलिन की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं. सूत्रों के मुताबिक, मार्च तक रूस को तख्तापलट और ड्रोन हमलों का खतरा और ज्यादा गंभीर लगने लगा था. इसके बाद पुतिन की यात्राएं सीमित कर दी गईं और उनसे मिलने वालों की जांच बेहद सख्त कर दी गई. बंकर में बिताते हैं लंबा समय? रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन दक्षिणी रूस के क्रास्नोदार क्षेत्र में बने एक सुरक्षित बंकर में कई-कई हफ्तों तक रहते हैं और वहीं से सरकारी कामकाज और युद्ध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करते हैं. यह भी दावा किया गया है कि रूसी सरकारी मीडिया कई बार पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो प्रसारित कर सामान्य माहौल दिखाने की कोशिश करता है, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि सब कुछ सामान्य है. करीबी लोगों पर भी कड़ी निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि पुतिन के बेहद करीबी लोगों के लिए भी सख्त सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं. उनके रसोइयों, फोटोग्राफरों और बॉडीगार्ड्स तक को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा: इंटरनेट वाले मोबाइल फोन रखने पर रोक है उनके घरों में CCTV निगरानी बढ़ाई गई है व्यक्तिगत संपर्क और आवाजाही सीमित कर दी गई है रूस की ओर से नहीं आई आधिकारिक पुष्टि हालांकि, इन दावों पर रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. क्रेमलिन ने पहले भी पुतिन की सेहत और सुरक्षा से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को खारिज किया है. लेकिन यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने, रूस के भीतर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और लगातार ड्रोन हमलों के बीच यह साफ है कि मॉस्को अब किसी भी तरह के खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहता.
रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान An-26 मंगलवार को क्रीमिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 23 यात्री और 6 क्रू मेंबर शामिल थे। दुर्घटना के बाद किसी के भी जीवित बचने की खबर नहीं है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, विमान से पहले संपर्क टूट गया था। इसके कुछ समय बाद पता चला कि विमान चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे के कारणों की जांच जारी है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है। जांच जारी, तकनीकी खराबी की आशंका रूसी अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के पीछे असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल तकनीकी खामी को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। An-26 विमान की खासियत An-26 सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे एंटोनोव कंपनी ने विकसित किया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इस विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान के परिवहन के लिए किया जाता है। यह विमान अपनी खास क्षमता के लिए जाना जाता है, जिसमें छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। यही कारण है कि इसका उपयोग दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता रहा है। इसके पीछे मौजूद बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। पुराना डिजाइन, उठते रहे हैं सवाल करीब 50 साल पुराने डिजाइन वाले इस विमान की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले भी इस तरह के विमानों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। हालांकि, आज भी कई देशों की वायुसेनाएं इसका उपयोग कर रही हैं, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।