Samajwadi Party

student protests in Delhi
दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के बीच डिंपल यादव समेत कई सपा सांसद हिरासत में

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में छात्रों के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) ने दावा किया है कि मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव, कैराना से सांसद इकरा हसन समेत पार्टी के कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बयान जारी कर इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया।   पार्टी ने क्या कहा? पार्टी ने कहा कि छात्र अपनी समस्याओं और निष्पक्ष परीक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। सपा ने भाजपा सरकार पर छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है।   इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया, जबकि बाहर छात्रों पर कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नीट परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। अखिलेश ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने और उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है, जिसके कारण छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।   अखिलेश यादव ने क्या कहा? अखिलेश यादव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेज भी प्रदर्शनकारियों की बात सुनते थे और आज पूरी दुनिया गांधीजी का सम्मान करती है। उन्होंने सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की सलाह दी।   वहीं, डिंपल यादव ने कहा कि देशभर के छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा और न्याय की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, किसान, युवा और पर्यावरण जैसे कई मुद्दों पर लोग परेशान हैं, लेकिन सरकार न तो शिकायतें सुन रही है और न ही समाधान निकाल रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से हिरासत के दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Samajwadi Party MP Jaya Bachchan meets TMC chief Mamata Banerjee at her Kalighat residence in Kolkata, with TMC MP Derek O'Brien also present.
जया बच्चन ने कोलकाता में ममता बनर्जी से की मुलाकात, विपक्षी एकजुटता पर फिर शुरू हुई चर्चा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) की राज्यसभा सांसद Jaya Bachchan ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee से उनके कालीघाट स्थित आवास पर मुलाकात की। इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद Derek O'Brien भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह मुलाकात? यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब हाल ही में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Kiranmoy Nanda ने कोलकाता दौरे के दौरान तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की जनता अब ममता बनर्जी को नहीं चाहती। नंदा के इस बयान के बाद विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। चुनाव के बाद अखिलेश यादव भी पहुंचे थे कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav भी कोलकाता पहुंचे थे और उन्होंने ममता बनर्जी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। उस समय इस मुलाकात को तृणमूल कांग्रेस के प्रति समर्थन और विपक्षी एकजुटता के संकेत के रूप में देखा गया था। अब जया बच्चन की मुलाकात ने एक बार फिर दोनों दलों के बीच राजनीतिक संवाद को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की राय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं की सार्वजनिक आलोचना के बावजूद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर संवाद जारी है। ऐसे में यह मुलाकात संकेत देती है कि विपक्षी दल भविष्य की राजनीतिक रणनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बनाए रखने के इच्छुक हैं। कुणाल घोष ने क्या कहा? तृणमूल कांग्रेस के नेता Kunal Ghosh ने बैठक के बाद कहा कि ममता बनर्जी और जया बच्चन के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय मुद्दों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई तथा राष्ट्रहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। बैठक में किसी विशेष राजनीतिक रणनीति या भविष्य के गठबंधन को लेकर दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
SBSP chief Om Prakash Rajbhar addresses media and claims Samajwadi Party MPs are in touch with BJP and NDA leaders.
TMC, शिवसेना के बाद अब सपा में बड़ी टूट का दावा, ओपी राजभर बोले- कई सांसद BJP के संपर्क में

  उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि Samajwadi Party में जल्द बड़ी टूट हो सकती है और उसके कई सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा एनडीए के संपर्क में हैं। राजभर ने दावा किया कि हाल के दिनों में अन्य विपक्षी दलों में हुई टूट के बाद अब सपा के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर संसद के आगामी मानसून सत्र में दिखाई दे सकता है। 'कई सांसद भाजपा के संपर्क में' एएनआई से बातचीत में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पूर्वांचल के पिछड़े और दलित समुदाय से आने वाले सपा के कई सांसद पार्टी की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नेता भाजपा और एनडीए के साथ आने के इच्छुक हैं। राजभर ने कहा, "टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बाद अब समाजवादी पार्टी में भी बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। कई सांसद हमारे मंत्रियों और भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं।" मानसून सत्र में दिख सकता है असर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ने दावा किया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान सपा में बिखराव सामने आ सकता है। उनके अनुसार, कई सांसद विपक्ष का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि सपा प्रमुख Akhilesh Yadav की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, जिसके कारण कई नेता वैकल्पिक राजनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं। अखिलेश यादव का पलटवार ओम प्रकाश राजभर के दावे पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए राजभर पर पलटवार किया। अखिलेश यादव ने कहा, "भविष्यवाणी करने वाले पहले अपनी पार्टी की भविष्यवाणी करें। पता नहीं इस बार भाजपा उन्हें 75 सीटें दे रही है, 50 सीटें दे रही है या फिर केवल आश्वासन ही मिलेगा।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ओम प्रकाश राजभर ने पहले भी भाजपा गठबंधन में ज्यादा सीटें मिलने की अफवाह फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की थी। यूपी की राजनीति में बढ़ी अटकलें ओम प्रकाश राजभर के दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही समाजवादी पार्टी के किसी सांसद ने पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं। इसके बावजूद उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में संभावित पुनर्संरेखण और दल-बदल की चर्चाओं के बीच राजभर का यह बयान आने वाले महीनों में प्रदेश की सियासत को और गर्मा सकता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
CM Yogi Adityanath
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर पहली बार बोले सीएम योगी, कहा- SIT करेगी निष्पक्ष जांच

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और सच सामने लाया जाएगा।   "दूध का दूध, पानी का पानी करेगी SIT" जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी तथ्यों के आधार पर काम करेगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। योगी ने कहा, "SIT दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।"   श्रद्धालुओं की भावनाओं का रखें सम्मान   मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और संबंधित पक्षों से अपील की कि वे मामले पर बिना तथ्य के बयानबाजी न करें। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए ऐसी कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए जिससे भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हों।   विपक्ष पर साधा निशाना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों की चिंता करने का दावा कर रहे हैं, वही अतीत में कारसेवकों पर गोली चलाने के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में विकास कार्यों की अनदेखी हुई, जबकि वर्तमान सरकार धार्मिक स्थलों के विकास, गरीबों के कल्याण और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है।   वीरांगनाओं के सम्मान का भी किया उल्लेख योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं झलकारी बाई, अवंतीबाई और ऊदा देवी पासी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में विशेष पहल की गई है। उन्होंने बताया कि इन वीरांगनाओं के नाम पर पीएसी की तीन महिला बटालियन बनाई गई हैं, जिनमें केवल महिला अभ्यर्थियों की भर्ती की जाती है।   मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राम मंदिर से जुड़े विवाद की जांच निष्पक्ष होगी और सरकार पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करेगी।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Samajwadi Party MP Awadhesh Prasad addressing media over BJP claims and demanding transparency on Ram Temple donation issue.
चुनाव से पहले हार के डर से बौखलाई बीजेपी, बेतुकी बातें कर रही है: सपा सांसद अवधेश प्रसाद

  अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का डर अभी से सताने लगा है, इसलिए उसके नेता अनर्गल और बेतुकी बातें कर रहे हैं। 'सपा का कोई सांसद बीजेपी के संपर्क में नहीं' दरअसल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी का एक भी सांसद भाजपा में जाने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रही है। 'अखिलेश यादव की लोकप्रियता से घबराई बीजेपी' सपा सांसद ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और समाजवादी पार्टी के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे को देखकर भाजपा घबरा गई है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में संभावित हार की आशंका से भाजपा के नेता बौखलाहट में बयानबाजी कर रहे हैं। राम मंदिर मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा कथित चढ़ावा चोरी का मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट जनता के सामने लाई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और सरकार को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav addresses party leaders while announcing plans to challenge BJP in Gorakhpur ahead of UP Assembly Elections 2027.
योगी के गढ़ गोरखपुर में बीजेपी को घेरने की तैयारी में सपा, अखिलेश बोले- 2027 में कमल नहीं खिलने देंगे

  लखनऊ/गोरखपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस बार समाजवादी पार्टी गोरखपुर में बीजेपी को शून्य पर लाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। गोरखपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारी लखनऊ में पार्टी की बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जल्द ही गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जल्द ही सम्मेलन की तारीख की घोषणा करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा, "हमने संकल्प लिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर में बीजेपी को कड़ी चुनौती देंगे। जहां भी हमारी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा।" कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के सम्मान और उनके सुख-दुख में भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के दम पर पार्टी 2027 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर योगी सरकार को घेरा अखिलेश यादव ने योगी सरकार के दस साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा ने झूठे वादे करके जनता को गुमराह करने का काम किया है। प्रदेश के लोग बदलाव चाहते हैं और समाजवादी पार्टी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तैयार है।" ओपी राजभर के बयान पर भी किया पलटवार सपा प्रमुख ने मंत्री ओपी राजभर के हालिया बयान पर भी तंज कसा। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, "दाना और गाना, कब तक चलेगा ये अफसाना।" अखिलेश यादव के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर समेत पूर्वांचल में सपा की आक्रामक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें गोरखपुर में होने वाले प्रस्तावित कार्यकर्ता सम्मेलन और सपा की आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Thousands gather in Lucknow during Prateek Yadav’s emotional final journey to Baikunthdham crematorium
हजारों समर्थकों के बीच निकली प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा, बैकुंठधाम के लिए रवाना हुआ पार्थिव शरीर

लखनऊ में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई Prateek Yadav की अंतिम यात्रा गुरुवार को लखनऊ में भारी भीड़ और गमगीन माहौल के बीच निकाली गई। पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को बैकुंठधाम श्मशान घाट के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। शव वाहन पर लगी थी पेट्स के साथ तस्वीर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान शव वाहन को फूलों से सजाया गया था। वाहन पर उनके पालतू जानवरों के साथ की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आवास पर जुटे रहे। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि Dimple Yadav ने प्रतीक यादव को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya, मंत्री Om Prakash Rajbhar और भाजपा नेता प्रदीप सिंह समेत कई नेताओं ने अपर्णा यादव के आवास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी अपर्णा यादव के घर पहुंचे थे और परिवार को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जमने यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर और सिर पर कुछ चोटों के निशान भी मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ चोटें पुरानी बताई जा रही हैं, जबकि कुछ हाल की थीं। आगे की जांच के लिए विसरा और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। राजनीति से दूर रखते थे खुद को प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की Leeds University से पढ़ाई की थी। यादव परिवार से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी। वे रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे और लग्जरी कारों के शौकीन माने जाते थे। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों और यादव परिवार में शोक की लहर है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Prateek Yadav seen during a public event before his demise in Lucknow at age 38
मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन, 38 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और Akhilesh Yadav के सौतेले भाई Prateek Yadav का बुधवार को निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। परिवार और राजनीतिक गलियारों में उनके निधन की खबर से शोक की लहर फैल गई है। प्रतीक यादव भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी नेता Aparna Yadav के पति थे। सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ समय से चल रहे थे बीमार परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कुछ सप्ताह पहले उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान अखिलेश यादव भी उनसे मिलने पहुंचे थे। तबीयत में हल्का सुधार होने के बाद उन्हें घर वापस लाया गया था। अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ पोस्टमार्टम निधन के बाद प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George's Medical University भेजा गया। यहां डॉक्टरों के पैनल ने कड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान परिवार के सदस्य और करीबी लोग भी वहां मौजूद रहे। अखिलेश यादव ने याद किया आखिरी मुलाकात अखिलेश यादव पोस्टमार्टम सेंटर पहुंचे और डॉक्टरों से बातचीत की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने प्रतीक यादव को “बहुत अच्छा इंसान” बताया। उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य और कारोबार को लेकर काफी सजग रहते थे। अखिलेश यादव ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने उन्हें कारोबार पर ध्यान देने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार में नुकसान और मानसिक दबाव किसी व्यक्ति को अंदर से प्रभावित कर सकता है। राजनीति से दूर, बिजनेस और फिटनेस में सक्रिय थे प्रतीक हालांकि प्रतीक यादव देश के बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। उन्होंने ब्रिटेन की University of Leeds से पढ़ाई की थी और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। लखनऊ में वह ‘The Fitness Planet’ नाम से जिम भी चलाते थे और फिटनेस इंडस्ट्री में काफी सक्रिय थे। इसके अलावा वह ‘Jeev Ashray’ नाम की संस्था से भी जुड़े थे, जो आवारा कुत्तों के इलाज, भोजन और देखभाल का काम करती थी। पत्नी अपर्णा यादव के साथ विवाद भी आया था सामने इस साल की शुरुआत में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के रिश्तों को लेकर भी चर्चा हुई थी। जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट कर वैवाहिक विवाद की बात कही थी और तलाक लेने की बात भी लिखी थी। हालांकि बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई थी। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा था कि आपसी बातचीत के बाद विवाद खत्म हो गया है। इसके बाद उन्होंने परिवार के साथ छुट्टियों की तस्वीरें भी साझा की थीं। नेताओं ने जताया शोक प्रतीक यादव के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने भी दुख जताया।  

surbhi मई 13, 2026 0
Akhilesh Yadav with MK Stalin and Mamata Banerjee amid opposition alliance political tensions
स्टालिन और ममता के साथ तस्वीर शेयर कर अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर कसा तंज

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने एक बार फिर राजनीतिक संकेतों से भरी पोस्ट कर सियासी हलचल तेज कर दी है. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर M. K. Stalin और Mamata Banerjee के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कांग्रेस पर इशारों में निशाना साधा. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें.” इस एक लाइन को विपक्षी राजनीति और हाल के चुनावी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस के फैसले के बाद बढ़ी सियासी चर्चा अखिलेश यादव की यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में कांग्रेस ने चुनाव बाद डीएमके से दूरी बनाते हुए टीवीके (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया है. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव डीएमके के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद पार्टी ने अपना रुख बदल लिया. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इसके बाद सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक जोड़तोड़ जारी है. बंगाल के संदर्भ में भी बड़ा संदेश अखिलेश यादव की पोस्ट को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों पर विपक्षी दलों के बीच असहजता देखी गई थी. इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी थी कि वे तृणमूल कांग्रेस की हार का मजाक न उड़ाएं. विपक्षी एकता पर नया संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह पोस्ट विपक्षी दलों के बीच भरोसे और साथ निभाने का संदेश देने की कोशिश है. ममता बनर्जी और स्टालिन दोनों ही INDIA गठबंधन के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं, ऐसे में अखिलेश का यह बयान कांग्रेस की रणनीति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह पोस्ट विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की ओर भी इशारा कर रही है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Akhilesh Yadav speaking at a press briefing criticizing the women reservation bill and government policies.
महिला आरक्षण पर अखिलेश यादव का हमला, बोले– “PDA के हक को मारने की साजिश”

महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार की पहल पर सवाल उठाते हुए इसे “पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के अधिकारों को खत्म करने की साजिश” करार दिया है। केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर तेजी दिखाते हुए विशेष संसदीय सत्र बुलाए जाने के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X (पूर्व में ट्विटर)’ पर लंबी पोस्ट लिखकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। “जल्दबाजी में लाया जा रहा है बिल” Akhilesh Yadav ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरह जल्दबाजी में लाया जा रहा है, उससे केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लिखा कि भाजपा को अब “वोटरों का अकाल” पड़ गया है, इसलिए नए वर्गों को अपने पक्ष में लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। “जब पुराने समर्थक भाजपा से दूर हो रहे हैं, तब हर बार नए लोगों को लुभाने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं,” उन्होंने कहा। जनगणना और जातिगत आरक्षण का मुद्दा सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर जनगणना टाल रही है। उनके मुताबिक, “अगर जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की मांग भी उठेगी और उसके आधार पर आरक्षण की बात भी सामने आएगी, जिसे भाजपा कभी लागू नहीं करना चाहती।” उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल इसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है। PDA के अधिकारों पर चोट का आरोप अखिलेश यादव ने अपने “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)” फार्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें “A” यानी आधी आबादी (महिलाएं) भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तव में PDA वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है, जिससे सामाजिक न्याय का संतुलन बिगड़ सकता है। महिलाओं की स्थिति पर भी उठाए सवाल सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार में महिलाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महंगाई, बढ़ती गैस सिलेंडर कीमतें और रोजमर्रा के खर्चों ने महिलाओं की रसोई पर सीधा असर डाला है। “भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा परेशान अगर कोई है, तो वो महिलाएं ही हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब हो रही है, जिससे महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जमीनी उदाहरण देकर घेरा Akhilesh Yadav ने मेरठ और नोएडा की महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दर्द को समझना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार इस बिल को लेकर गंभीर है, तो इसे आम महिलाओं के बीच जाकर घोषित करना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके। “चुनावी चाल है महिला आरक्षण” सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर चुनाव से पहले इस तरह के बड़े मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि इस बार भी महिलाओं को केंद्र में रखकर वही “पुरानी राजनीतिक चाल” चली जा रही है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। महिला आरक्षण को लेकर Akhilesh Yadav का यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चुनावी विमर्श बनने वाला है। सपा इसे सामाजिक न्याय और PDA के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि केंद्र सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में सामने रख रही है।

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Shankaracharya Avimukteshwaranand speaking on politics, cow protection and meeting Akhilesh Yadav in Lucknow
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान: “सपा-कांग्रेस मुझे इस्तेमाल नहीं कर सकती, चाहे तो भाजपा दे साथ”

  Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने कहा है कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल द्वारा चुनाव में इस्तेमाल करना संभव नहीं है। उनका कहना है कि वे किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि गंगा संरक्षण और गोरक्षा जैसे धार्मिक व सामाजिक मुद्दों के लिए काम कर रहे हैं, जो पहले से ही Bharatiya Janata Party के भी प्रमुख विषय रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा चाहे तो इन मुद्दों पर उनका समर्थन कर सकती है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि न Samajwadi Party और न ही Indian National Congress इतनी चतुर है कि उन्हें चुनावी राजनीति में इस्तेमाल कर सके।   गोरक्षा के लिए ‘धर्मयुद्ध’ का ऐलान लखनऊ के हासेमऊ स्थित एक गोशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने गोरक्षा के लिए धर्मयुद्ध का आह्वान किया। इसी मौके पर उन्होंने “गो प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान” की शुरुआत करते हुए चतुरंगिणी सेना बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा के लिए समाज को संगठित होना होगा और जो लोग गाय को कष्ट पहुंचाते हैं, वे उनके अनुसार “वृत्रासुर” की श्रेणी में आते हैं। शंकराचार्य ने सरकारी गोशालाओं में गायों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई।   चतुरंगिणी सेना का उद्देश्य शंकराचार्य ने चतुरंगिणी सेना का अर्थ समझाते हुए कहा कि यह चार प्रमुख शक्तियों पर आधारित होगी- बुद्धि का बल   बाहुबल   धनबल   समर्पित सहयोगियों का बल   उन्होंने बताया कि इसमें साधु-संतों के साथ आम लोग भी शामिल होंगे और इसकी प्रेरणा चारों वेदों, प्रमुख संप्रदायों और चार पीठों के सहयोग से मिलेगी।   अखिलेश यादव ने लिया आशीर्वाद इस बीच Akhilesh Yadav ने लखनऊ में शंकराचार्य से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले संत-महात्माओं का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के आशीर्वाद से “नकली संतों का अंत” होगा और धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करने वालों का पर्दाफाश होगा।   अखिलेश का भाजपा पर हमला मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने कई राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी सरकार के समय गोरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए थे, जिनमें कन्नौज में राज्य का पहला गाय के दूध का प्लांट स्थापित करना भी शामिल था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने उस प्लांट को बंद कर दिया। इसके अलावा रसोई गैस संकट को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि गलत नीतियों की वजह से लोगों को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की स्थिति पैदा हो रही है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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हॉर्मुज पर महायुद्ध की आहट: ईरान ने अमेरिका को दी खुली चेतावनी, कहा- मदद करने वाले देशों को भी नहीं छोड़ेंगे

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0