मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में आने वाले कारोबारी सत्रों के लिए निवेशकों की नजर अब विदेशी निवेशकों (FPI/FII) की गतिविधियों और नए IPO पर टिकी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश का रुख और प्राथमिक बाजार में आने वाले नए इश्यू, दोनों ही बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विदेशी निवेशकों की चाल पर रहेगी नजर जून महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की थी, जबकि डेट मार्केट में निवेश जारी रहा। इसके बावजूद हाल के कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बाजार के प्रति बढ़ा है। अब बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि विदेशी निवेशक फिर से भारतीय इक्विटी बाजार में खरीदारी बढ़ाते हैं या नहीं। IPO बाजार में भी बढ़ी हलचल प्राथमिक बाजार में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं। Kusumgar समेत कई कंपनियों के IPO अगले सप्ताह खुलने वाले हैं, जबकि अन्य मेनबोर्ड और SME इश्यू भी निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत लिस्टिंग और अच्छी सब्सक्रिप्शन शेयर बाजार के सेंटीमेंट को और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। वैश्विक संकेतों पर भी बाजार की नजर विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक बाजारों का रुख भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित करेगा। यदि विदेशी निवेश में सुधार जारी रहता है और IPO बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है।
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और शांति की उम्मीद से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,300 अंक के ऊपर कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:22 बजे सेंसेक्स 487.81 अंक (0.63%) की बढ़त के साथ 77,989.93 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 156.80 अंक (0.65%) मजबूत होकर 24,332.50 के स्तर पर पहुंच गया। IT सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। सबसे ज्यादा तेजी HCL Technologies के शेयर में दर्ज की गई, जिसमें 4 प्रतिशत से अधिक उछाल आया। इसके अलावा Tech Mahindra, Infosys, TCS, Tata Steel, Sun Pharma, Bajaj Finserv और UltraTech Cement जैसे दिग्गज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार की तेजी को और मजबूती दी। इन शेयरों में दिखी गिरावट बाजार की तेजी के बावजूद कुछ शेयर दबाव में रहे। Mahindra & Mahindra के शेयर में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा SBI, Kotak Mahindra Bank, IndiGo, Titan, Adani Ports और Asian Paints जैसे शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10 बजे तक प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— HCL Technologies: +4.31% Tech Mahindra: +2.81% Tata Steel: +2.78% Sun Pharma: +2.07% BEL: +1.88% Eternal: +1.75% Trent: +1.56% Bajaj Finserv: +1.55% TCS: +1.33% UltraTech Cement: +1.23% वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयर— Mahindra & Mahindra: -0.95% SBI: -0.67% Kotak Mahindra Bank: -0.38% IndiGo: -0.34% Titan: -0.33% Adani Ports: -0.28% ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। Nifty Midcap Index करीब 0.21% चढ़ा। Nifty Smallcap Index में लगभग 0.47% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Metal और Nifty IT सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। दूसरी ओर Nifty Bank और Nifty PSU Bank अपेक्षाकृत कमजोर रहे। निवेशकों का बढ़ा भरोसा विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद, विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को लगातार तीसरे दिन बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार का सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और आईटी शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स 500 अंक से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 24,300 के ऊपर मजबूती से बना रहा। आईटी शेयरों ने बाजार को दी मजबूती बाजार की तेजी में आईटी सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा। एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसके अलावा कुछ बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार को मजबूती दी। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी भी बाजार के पक्ष में रही। इन शेयरों पर रही निवेशकों की नजर आज के कारोबार में बजाज फाइनेंस, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), मारिको, अडानी एंटरप्राइजेज और पीबी फिनटेक जैसे शेयर निवेशकों के फोकस में रहे। कंपनियों के तिमाही कारोबारी अपडेट और बेहतर प्रदर्शन के संकेतों से इन शेयरों में गतिविधि बढ़ी है। विशेषज्ञों की राय बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि निफ्टी मौजूदा स्तरों के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया है। बीएसई सेंसेक्स 200 अंकों से अधिक चढ़कर 77,000 के ऊपर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 ने 24,000 का स्तर पार कर लिया है। पिछले कारोबारी सत्र में हुई गिरावट के बाद आज बाजार में रिकवरी देखने को मिली है। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में खरीदारी आज के कारोबार में HDFC Bank, Maruti Suzuki और अन्य बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HDFC Bank में प्रबंधन स्तर पर हुए बदलाव और Maruti Suzuki के शेयरों में करीब 3% की तेजी ने बाजार को मजबूती दी है। बैंकिंग इंडेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता रहा। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा एशियाई बाजारों में मजबूती, अमेरिकी टेक शेयरों में रिकवरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इन शेयरों पर रही खास नजर आज के कारोबार में HDFC Bank, Bajaj Auto, BPCL, Hindustan Unilever, Tata Motors, JSW Energy, Biocon, BHEL और City Union Bank जैसे शेयर निवेशकों के फोकस में रहे। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सत्रों में इन शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों (FII) के निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि सकारात्मक माहौल बना रहा तो बाजार में तेजी आगे भी जारी रह सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 29 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त और मिले-जुले रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने के बाद बीएसई सेंसेक्स लाल निशान में फिसल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बने रहने में सफल रहा। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 47.96 अंक यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 77,052.51 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 13.55 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 24,069.55 पर बना रहा। इस दौरान इटरनल और ट्रेंट के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए टॉप गेनर्स की सूची में जगह बनाई। ईरान-अमेरिका तनाव का बाजार पर असर बाजार की सुस्त शुरुआत के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव रहा। सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली। तेल महंगा होने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसका असर घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दिया। विशेषज्ञों का नजरिया अब भी सकारात्मक हालांकि बाजार की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक और निकट अवधि की तस्वीर अब भी मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के 24,000 के स्तर से ऊपर बने रहने की संभावना है। उनका मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और भारतीय रुपये में मजबूती बनी रहती है, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले संकेत भी निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहे। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स करीब 1.9 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे मजबूत रहा। चीन का शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 भी बढ़त में कारोबार करते दिखे। वहीं, अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी मजबूती दर्ज की गई। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि यही बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। पिछले कारोबारी सत्र में मुनाफावसूली के दबाव के बावजूद बाजार ने शानदार वापसी की और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक उछल गया। वहीं, निफ्टी भी 24,100 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के कारण देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत में बीएसई का सेंसेक्स 367.18 अंक की बढ़त के साथ 77,358.40 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 104.75 अंक चढ़कर 24,126.40 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में आईटी और एविएशन सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एचसीएल टेक और इंडिगो के शेयर करीब दो-दो प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी सबसे बड़ा सहारा विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। ब्रेंट क्रूड का भाव घटकर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो पिछले चार महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में कमी से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है और इससे कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। वैश्विक संकेतों से भी मिला समर्थन जापान के निक्केई और टोपिक्स सूचकांकों में 1.3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे। हालांकि हांगकांग के हैंग सेंग, शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में कुछ दबाव देखने को मिला। आगे भी बनी रह सकती है तेजी बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। निवेशकों का सुधरता भरोसा आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार को और मजबूती दे सकता है।
नई दिल्ली: ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Advit Jewels का आईपीओ 23 जून से निवेशकों के लिए खुल गया और पहले ही दिन इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली। आईपीओ खुलने के शुरुआती तीन घंटों के भीतर ही रिटेल कैटेगरी में यह चार गुना से अधिक सब्सक्राइब हो गया, जिससे निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर उत्साह साफ नजर आ रहा है। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए लगभग 165 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके तहत करीब 1.19 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। निवेशक इस आईपीओ में 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि शेयरों की संभावित लिस्टिंग 1 जुलाई को हो सकती है। क्या है प्राइस बैंड और निवेश की शर्तें? Advit Jewels ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड 130 रुपये से 138 रुपये प्रति शेयर तय किया है। एक लॉट में 100 शेयर शामिल हैं। रिटेल निवेशक न्यूनतम एक लॉट और अधिकतम 14 लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। क्या करती है Advit Jewels? जयपुर स्थित Advit Jewels अपने प्रसिद्ध 'Rambhajo' ब्रांड के तहत हाथ से तैयार की जाने वाली कुंदन, पोल्की, डायमंड और स्टडेड ज्वैलरी का निर्माण और सप्लाई करती है। कंपनी B2B मॉडल के तहत डीलर्स और रिटेलर्स को सेवाएं देने के साथ-साथ कस्टमाइज्ड ऑर्डर पर भी ज्वैलरी तैयार करती है। आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने कर्ज को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और अन्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में मजबूत संकेत आईपीओ खुलने के साथ ही ग्रे मार्केट में भी Advit Jewels के शेयरों की मांग तेज दिखाई दी। दोपहर 12 बजे तक कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 65 रुपये पहुंच गया था। 138 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर यह लगभग 47 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। यदि ग्रे मार्केट का यह रुझान जारी रहता है, तो लिस्टिंग के समय निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि GMP केवल एक संकेतक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट्स की राय रिसर्च फर्म Equivision ने इस आईपीओ को 'सब्सक्राइब' रेटिंग दी है। फर्म के अनुसार कंपनी की मजबूत राजस्व वृद्धि, बढ़ती लाभप्रदता और संगठित ज्वैलरी बाजार में मजबूत उपस्थिति इसकी प्रमुख ताकत हैं। साथ ही टियर-1 और टियर-2 शहरों में विस्तार की रणनीति को भी सकारात्मक माना गया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी दर्ज की। शुरुआती गिरावट के बाद मजबूत खरीदारी के दम पर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.32%) की बढ़त के साथ 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 अंक (0.34%) चढ़कर 24,168 के स्तर के पार पहुंच गया। सुबह दबाव में खुला बाजार, दिन में हुई तेज रिकवरी कारोबार की शुरुआत में बाजार लाल निशान में खुला था, जिसका कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियां और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका रही। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों की चौतरफा खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी और शुरुआती दबाव पूरी तरह खत्म हो गया। सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मिश्रित लेकिन मजबूत बाजार में अधिकतर सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। रियल्टी, हेल्थकेयर, केमिकल्स और फार्मा सेक्टर ने तेजी को सबसे अधिक सपोर्ट दिया। बैंकिंग सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को स्थिरता प्रदान की। हालांकि, आईटी सेक्टर आज सबसे बड़ा पिछड़ने वाला क्षेत्र रहा, जहां भारी बिकवाली के कारण दबाव बना रहा। इन स्टॉक्स ने दिखाया दम कुछ प्रमुख शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में करीब 6% की तेजी देखी गई, जबकि इंडिगो के शेयरों में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल में गिरावट से मिला सपोर्ट बाजार की मजबूती का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी रहा। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिली और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। सस्ते तेल और चुनिंदा खरीदारी ने बाजार को वैश्विक दबाव से बचाने में अहम भूमिका निभाई। लगातार पांचवें दिन की तेजी इस बात का संकेत है कि घरेलू बाजार की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और निवेशक अभी भी भारतीय इक्विटी में भरोसा बनाए हुए हैं।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे कारोबारी दिन मजबूत बढ़त दर्ज की। टेक्नोलॉजी और घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर्स में जोरदार खरीदारी के दम पर बाजार हरे निशान में बंद हुआ। निवेशकों की सकारात्मक धारणा के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत बढ़त बीएसई सेंसेक्स 544.15 अंक यानी 0.71% की छलांग लगाकर 76,808.48 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 135.25 अंक यानी 0.57% की बढ़त के साथ 23,989.15 पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा सत्र है जब भारतीय बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है। आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में तेजी बाजार की इस तेजी में आईटी सेक्टर ने सबसे अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही मीडिया सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर्स ने भी मामूली बढ़त के साथ बाजार को सहारा दिया। हिंदुस्तान यूनिलीवर और एनटीपीसी के शेयरों में करीब 2% की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट मिला। कुछ सेक्टर्स में दबाव भी रहा जहां एक ओर बाजार में तेजी रही, वहीं मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और सीमेंट सेक्टर्स में कमजोरी देखने को मिली। इन सेक्टर्स में बिकवाली के दबाव ने बाजार की बढ़त को कुछ हद तक सीमित रखा। ग्लोबल बाजारों का मिला-जुला रुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आज मिला-जुला रुझान देखने को मिला। एशियाई बाजारों में जापान और हांगकांग में गिरावट रही, जबकि कुछ अन्य इंडेक्स स्थिर रहे। यूरोपीय बाजार भी लगभग सपाट बंद हुए। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू मांग और मजबूत सेक्टोरल सपोर्ट के दम पर बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में घरेलू मांग का बढ़ता असर विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय बाजार अब वैश्विक सुस्ती के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था और टेक सेक्टर्स के दम पर मजबूती दिखा रहा है। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में भी चुनिंदा सेक्टर्स बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमत घटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिससे बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में S&P BSE Sensex 306.22 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,570.55 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 72.95 अंक या 0.31 प्रतिशत चढ़कर 23,926.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। ईरान-अमेरिका समझौते से कच्चे तेल में गिरावट बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की खबर रही। इससे लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक संघर्ष की आशंकाएं कम हुईं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसलकर 82.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 80.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती बाजार को समर्थन दे रही है। हाल के दिनों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से सुधरकर 94.71 तक पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में AI आधारित निवेश थीम की मजबूती के कारण विदेशी निवेश का कुछ हिस्सा भारत से बाहर जा सकता है। आईटी सेक्टर बना बाजार का स्टार सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी आईटी : +1.43% निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : +0.91% निफ्टी मीडिया : +0.64% निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज : +0.42% वहीं मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर: HCLTech (+3.11%) Bajaj Finserv (+1.61%) Bajaj Finance (+1.60%) Hindustan Unilever (+1.55%) Tech Mahindra (+1.46%) Tata Consultancy Services (+1.44%) इसके अलावा Infosys, Bharti Airtel, HDFC Bank और Larsen & Toubro में भी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर कुछ बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank (-1.10%) UltraTech Cement (-0.56%) Tata Steel (-0.48%) Power Grid Corporation of India (-0.42%) Bharat Electronics Limited (-0.40%) मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बनी रही तेजी बाजार की मजबूती केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों की खरीदारी जारी रही। निफ्टी मिडकैप 50 : +0.35% निफ्टी मिडकैप 100 : +0.31% निफ्टी स्मॉलकैप 100 : +0.42% इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा बाजार के विभिन्न वर्गों में बना हुआ है। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी को समर्थन जरूर मिला है, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक AI रैली, घरेलू वैल्यूएशन, मानसून की प्रगति और महंगाई के आंकड़े प्रमुख रहेंगे।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ शुरुआत की। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 300.03 अंक (0.39%) की बढ़त के साथ 76,564.36 अंक पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 75.15 अंक (0.32%) चढ़कर 23,929.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से रुपया भी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे मजबूत होकर 94.53 पर पहुंच गया। आईटी और फाइनेंस शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार की तेजी में आईटी और वित्तीय कंपनियों की अहम भूमिका रही। शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में करीब दो-दो फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इन दिग्गज कंपनियों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली और निवेशकों का उत्साह बढ़ा। वेदांता डिमर्जर से खुली नई वैल्यू कॉर्पोरेट जगत में वेदांता समूह का डिमर्जर भी चर्चा का केंद्र रहा। समूह ने अपने कारोबार को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित कर निवेशकों के लिए लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त वैल्यू अनलॉक करने का दावा किया है। हालांकि, डिमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई नई कंपनियों के शेयर शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सके और कारोबार के दौरान उनमें कुछ गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्गठन की यह रणनीति लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतर मूल्य सृजित कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार शुरुआत की। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव कम होने की खबर के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक की तेजी के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 330 अंकों से ज्यादा चढ़कर कारोबार करता नजर आया। विदेशी मुद्रा बाजार में भी सकारात्मक माहौल रहा और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 53 पैसे मजबूत होकर खुला। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स में सूचीबद्ध कंपनियों में इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी में श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (TMPV) के शेयर प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। बाजार में खरीदारी का माहौल बनने से अधिकांश सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। एशियाई बाजारों में भी लौटी मजबूती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में भी शानदार तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक चढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी 4.3 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि ऑस्ट्रेलिया का ASX200 भी अच्छी बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वैश्विक निवेशकों ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। कच्चे तेल की कीमतों में राहत वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.45 डॉलर घटकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.95 डॉलर टूटकर 80.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में नरमी से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट जारी रहती है तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को मजबूत शुरुआत देखने को मिली। सोमवार की गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी से प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 418.98 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,943.24 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 123.85 अंक यानी 0.54 प्रतिशत चढ़कर 23,246.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों को राहत दी है। इंडिगो और ट्रेंट समेत कई शेयरों में खरीदारी शुरुआती कारोबार में एविएशन और रिटेल सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई। इंडिगो और ट्रेंट के शेयर करीब दो प्रतिशत तक चढ़े। वहीं रुपये में भी मजबूती दर्ज की गई और भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 95.41 पर पहुंच गई। वैश्विक बाजारों से मिला सकारात्मक संकेत विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब एक प्रतिशत की गिरावट और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। एशियाई शेयर बाजारों में भी जोरदार रिकवरी देखने को मिली। एमएससीआई एशिया पैसिफिक इंडेक्स 1.3 प्रतिशत चढ़कर तीन दिनों की गिरावट को समाप्त करने में सफल रहा। अमेरिकी बाजार और एआई शेयरों से मिला समर्थन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी तकनीकी और चिप कंपनियों के शेयरों में सुधार से वैश्विक निवेश भावना मजबूत हुई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े शेयरों में तेजी ने भी बाजार को सहारा दिया। अमेरिकी सूचकांकों डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी मजबूती दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। आरबीआई की नीतियों और भू-राजनीतिक राहत का असर विशेषज्ञ अजय बग्गा के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक की एफसीएनआर(बी) संबंधी नीतिगत पहल से विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम होने से भी निवेशकों की चिंता घटी है। हालांकि विदेशी निवेशकों की हालिया बिकवाली के बावजूद बाजार में सुधार की संभावना बनी हुई है। एशियाई बाजारों में भी दिखी तेजी जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.73 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक करीब 5 प्रतिशत तक उछल गया। वहीं शंघाई बाजार में भी बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों और घरेलू कारकों के समर्थन से भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स कारोबार के दौरान 700 अंक से अधिक टूटकर 73,597.83 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 23,200 के नीचे फिसलकर लगभग 23,166.90 पर कारोबार करता दिखा। निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक स्तर पर बढ़े जोखिम से बचने के रुझान ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। आईटी, ऑटो और मेटल शेयरों में भारी बिकवाली गिरावट का सबसे अधिक असर आईटी, रियल्टी, मेटल और ऑटो सेक्टर पर दिखाई दिया। इन क्षेत्रों में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। दूसरी ओर, फार्मा, हेल्थकेयर और मीडिया जैसे डिफेंसिव सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहे और उन्होंने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। रुपये पर भी दबाव विदेशी बाजार में डॉलर की मजबूती और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण रुपया शुरुआती कारोबार में 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ी। ग्लोबल बाजारों में घबराहट एशियाई बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली। जापान के निक्केई फ्यूचर्स में 4.2 प्रतिशत, टोपिक्स में 2.7 प्रतिशत और हांगकांग के हैंग सेंग में 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। चीन और ऑस्ट्रेलिया के बाजार भी दबाव में रहे। यूरोप में यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स कमजोर रहे, जबकि अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में सीमित बदलाव दिखा। पश्चिम एशिया तनाव और तेल कीमतों का असर विश्लेषकों के अनुसार, लेबनान और इजरायल से जुड़ी घटनाओं तथा ईरान-इजरायल तनाव ने वैश्विक जोखिम बढ़ाया है। ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे ऊर्जा आयातक देशों के लिए चिंता बढ़ी। साथ ही, अमेरिकी टेक शेयरों की एआई-आधारित रैली कमजोर पड़ने और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा 8,776 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली ने भारतीय बाजार के मनोबल को और कमजोर किया
रांची। आजकल का युवा आर्थिक आजादी चाहता है। आज के समय में सिर्फ कमाई करना ही नहीं, बल्कि सही समय पर निवेश शुरू करना भी आर्थिक रूप से मजबूत बनने का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में निवेश शुरू करने से लंबे समय में बेहतर रिटर्न और मजबूत फाइनेंशियल प्लानिंग का फायदा मिल सकता है। क्यों जरूरी है जल्दी निवेश शुरू करना? विशेषज्ञों के मुताबिक, कम उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा समय का होता है। लंबे समय तक निवेश बने रहने से पैसा बढ़ने के ज्यादा मौके मिलते हैं और भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से हासिल किया जा सकता है। Compounding Effect देता है बड़ा फायदा निवेश की दुनिया में Compounding Effect को सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर माना जाता है। इसका मतलब है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने लगता है। यही वजह है कि जल्दी शुरुआत करने वाले निवेशकों को लंबे समय में बड़ा फायदा मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है और दूसरा 35 साल की उम्र में, तो पहले व्यक्ति को ज्यादा समय मिलने के कारण बेहतर ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। कम रकम से भी हो सकती है शुरुआत विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश शुरू करने के लिए बड़ी रकम जरूरी नहीं है। आज कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जहां छोटी राशि से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। निवेश के कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं? 1. SIP (Systematic Investment Plan): हर महीने तय राशि निवेश करने का आसान तरीका, जो लंबी अवधि में फायदेमंद माना जाता है। 2. Mutual Funds: पेशेवर फंड मैनेजमेंट के जरिए निवेश करने का विकल्प, जिसमें अलग-अलग जोखिम स्तर मौजूद होते हैं। 3. Fixed Deposit (FD): कम जोखिम पसंद करने वालों के लिए लोकप्रिय विकल्प, जहां तय ब्याज मिलता है। 4. PPF (Public Provident Fund): लंबी अवधि का निवेश विकल्प, जिसमें टैक्स लाभ भी मिलता है। 5. Stock Market: उच्च जोखिम और संभावित उच्च रिटर्न वाला विकल्प, जिसके लिए जानकारी जरूरी मानी जाती है। 6. Gold Investment: सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, जिसमें डिजिटल और फिजिकल दोनों तरीके मौजूद हैं। 7. Recurring Deposit (RD): हर महीने छोटी राशि जमा करने का आसान बैंकिंग विकल्प। जल्दी निवेश करने के फायदे लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का मौका Compounding का ज्यादा फायदा आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करना आसान इमरजेंसी और रिटायरमेंट प्लानिंग में मदद निवेश की आदत जल्दी विकसित होती है जोखिम को समझना भी जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश करते समय जोखिम, समय अवधि और वित्तीय लक्ष्य को समझना बहुत जरूरी होता है। बिना जानकारी के निवेश करने से आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। बदलते आर्थिक दौर में जल्दी निवेश शुरू करना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन सकता है। सही विकल्प चुनकर और नियमित निवेश करके लंबे समय में बेहतर आर्थिक स्थिति बनाई जा सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में बीता सप्ताह उतार-चढ़ाव भरा रहा। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और आरबीआई की नई आर्थिक अनुमान रिपोर्ट ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसके चलते प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट में बंद हुआ बाजार सप्ताह के अंत में बीएसई सेंसेक्स 532.40 अंक यानी 0.71 फीसदी गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 181.05 अंकों यानी 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। मिडकैप शेयरों में दबाव, स्मॉलकैप स्थिर निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स ने पिछले दो सप्ताह की तेजी का सिलसिला तोड़ते हुए 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की। इस दौरान सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे— PB Fintech ICICI Prudential AMC Patanjali Foods IREDA BHEL NALCO वहीं, मिडकैप श्रेणी में Vodafone Idea, Laurus Labs, NMDC और Federal Bank जैसे शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ। IFCI, Himadri Speciality Chemical, JBM Auto, Tata Technologies और Ola Electric Mobility जैसे शेयरों में 8% से 16% तक की तेजी देखने को मिली। मीडिया सेक्टर बना सबसे बड़ा विजेता सेक्टोरल इंडेक्स में मिश्रित रुख देखने को मिला। गिरावट वाले सेक्टर निफ्टी कैपिटल मार्केट्स: -3.6% FMCG: -2% इंफ्रा: लगभग -2% रियल्टी: लगभग -2% मेटल: लगभग -2% बढ़त वाले सेक्टर निफ्टी मीडिया: +7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: +1.7% PSU बैंक: +1.2% मीडिया इंडेक्स पूरे सप्ताह का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। बाजार पूंजीकरण में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट सप्ताह के दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। सबसे अधिक बाजार मूल्य गंवाने वाली कंपनियों में शामिल रहीं— रिलायंस इंडस्ट्रीज NTPC टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भारती एयरटेल वहीं, टाइटन, इंफोसिस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मार्केट वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की गई। लगातार तीसरे सप्ताह मजबूत हुआ रुपया भारतीय रुपया लगातार तीसरे सप्ताह मजबूती के साथ बंद हुआ। सप्ताह के अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया 94.94 पर पहुंच गया, जबकि पिछले सप्ताह यह 95 के स्तर पर था। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सप्ताह भर में 31,114.47 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार खरीदारी जारी रखकर बाजार को सहारा दिया। निवेशकों की नजर अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी? कच्चे तेल की कीमतों की दिशा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक संकेतक और कॉर्पोरेट नतीजे
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दिन के अंत तक प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों ने आरबीआई की नीतिगत घोषणाओं का आकलन करते हुए सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स और निफ्टी में आई गिरावट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 सूचकांक 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत फिसलकर 74,243.34 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में दोनों सूचकांकों ने बढ़त बनाई थी, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार नीचे आ गया। रेपो रेट यथावत, RBI का रुख रहा तटस्थ आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपना "तटस्थ" रुख कायम रखा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव के बजाय आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। तकनीकी स्तरों पर निफ्टी की नजर विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,450 से 23,550 का दायरा मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। यदि सूचकांक इस स्तर को पार कर स्थिरता बनाए रखता है, तो 23,750 से 23,800 तक की तेजी संभव है। वहीं गिरावट की स्थिति में 23,250 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.35 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.06 प्रतिशत कमजोर रहा। दूसरी ओर मीडिया सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त दर्ज की। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में हिंदाल्को, विप्रो और ट्रेंट शामिल रहे। रुपये में शानदार मजबूती शेयर बाजार की सुस्ती के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत प्रदर्शन किया। डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे की तेजी के साथ 94.93 के स्तर पर बंद हुआ। यह मजबूती आरबीआई द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और फॉरेक्स लिक्विडिटी मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद देखने को मिली। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की पहल आरबीआई ने अनिवासी भारतीयों (NRI) और प्रवासी भारतीय नागरिकों (OCI) के लिए इक्विटी निवेश सीमा बढ़ाने के साथ-साथ फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों का दायरा भी विस्तारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेश आकर्षित होगा और रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार आज शुक्रवार को मजबूत शुरुआत की। निवेशकों की खरीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स तथा एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। हालांकि बाजार की दिशा अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले पर टिकी हुई है, जिसकी घोषणा सुबह 10 बजे होनी है। सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत शुरुआत सुबह 9:32 बजे तक सेंसेक्स 197.90 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,557.91 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 51.41 अंक या 0.22 प्रतिशत चढ़कर 23,467.95 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का 23,400 के ऊपर बने रहना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है। इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स बने बाजार के हीरो शुरुआती कारोबार में आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। विशेष रूप से इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स के शेयर लगभग 2-2 प्रतिशत तक उछले। इन बड़े शेयरों की तेजी ने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। निवेशकों की नजर RBI के फैसले पर विश्लेषकों का मानना है कि बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है क्योंकि निवेशक RBI के नीति निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। ब्याज दरों, महंगाई, आर्थिक वृद्धि और तरलता से जुड़े संकेत बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे। यदि RBI की नीति बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहती है तो शेयर बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है। आगे क्या? आज का सबसे बड़ा ट्रिगर RBI की मौद्रिक नीति घोषणा है। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक की टिप्पणी से आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। ऐसे में दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को भारी गिरावट के साथ शुरुआत की। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी दिखाई और शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। शुरुआत में 500 अंकों से ज्यादा टूटा सेंसेक्स कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 284.51 अंक यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,061.66 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 67.25 अंक यानी 0.29 प्रतिशत टूटकर 23,338.35 अंक पर पहुंच गया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ खरीदारी लौटने लगी और बाजार में सुधार देखने को मिला। बाद में सेंसेक्स करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। इन शेयरों में दिखी मजबूती शुरुआती कमजोरी के बावजूद कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इनमें शामिल रहे— इटरनल टाइटन अडानी पोर्ट्स एशियन पेंट्स टेक महिंद्रा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स टीसीएस एनटीपीसी हिंदुस्तान यूनिलीवर इन शेयरों में आई मजबूती ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इन दिग्गज शेयरों पर रहा दबाव सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ खुले। सबसे ज्यादा दबाव ट्रेंट पर देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— ट्रेंट इन्फोसिस एचडीएफसी बैंक बजाज फिनसर्व इंडिगो सन फार्मा कोटक महिंद्रा बैंक एचसीएल टेक व्यापक बाजार का हाल मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.15 प्रतिशत की गिरावट सेक्टोरल सूचकांकों में सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और निजी बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया। वहीं दूसरी ओर— उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र तेल एवं गैस क्षेत्र रसायन क्षेत्र में सकारात्मक कारोबार देखने को मिला। रुपये में हल्की मजबूती इस बीच भारतीय मुद्रा में भी मामूली सुधार देखने को मिला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.69 के स्तर पर खुला। बाजार में गिरावट की वजह क्या रही? विश्लेषकों के अनुसार बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का रहा। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर दिखाई देता है। इसके अलावा निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों पर भी टिकी हुई है। ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि को लेकर आने वाले फैसले बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
भारत की प्रमुख नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग कंपनियों में शामिल CMR Green Technologies का बहुप्रतीक्षित आईपीओ आज निवेशकों के लिए खुल गया है। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार अमेरिका-ईरान तनाव के कारण दबाव में हैं, यह आईपीओ ग्रे मार्केट में मजबूत मांग के चलते निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। कंपनी 5 जून 2026 तक निवेशकों से आवेदन स्वीकार करेगी। बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज हाउसों की सकारात्मक राय के साथ बढ़ता ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) इस इश्यू को चर्चा में बनाए हुए है। क्या है आईपीओ का प्राइस बैंड? कंपनी ने आईपीओ के लिए 182 रुपये से 192 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट में 78 शेयर रखे गए हैं। यानी निवेश करने के लिए न्यूनतम आवेदन 78 शेयरों का करना होगा। कंपनी जुटाएगी 630 करोड़ रुपये कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Mohan Agarwal के अनुसार, इस इश्यू के जरिए कंपनी लगभग 630.88 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके तहत 3.28 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। क्या करती है कंपनी? फरीदाबाद स्थित CMR Green Technologies देश की सबसे बड़ी नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी एल्यूमिनियम, कॉपर, जिंक, स्टेनलेस स्टील और मैग्नीशियम जैसी धातुओं के स्क्रैप को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर दोबारा उपयोग योग्य बनाती है। कंपनी के ग्राहकों में भारत के कई बड़े ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग ब्रांड शामिल हैं, जिनमें Honda Cars India, Bajaj Auto, Hero MotoCorp, Royal Enfield, Maruti Suzuki और Jindal Stainless शामिल हैं। कैसी है कंपनी की वित्तीय स्थिति? कंपनी के वित्तीय आंकड़े मजबूत दिखाई देते हैं। दिसंबर 2025 तक नौ महीने की अवधि में शुद्ध लाभ: 162.39 करोड़ रुपये इसी अवधि में राजस्व: 6,291 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2024-25 में शुद्ध लाभ: 155.04 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्व: 6,696.66 करोड़ रुपये अनुमानित मार्केट कैप: 4,205 करोड़ रुपये मजबूत राजस्व और लगातार लाभप्रदता कंपनी की प्रमुख ताकत मानी जा रही है। GMP क्यों बना चर्चा का विषय? ग्रे मार्केट में इस आईपीओ की मांग लगातार बढ़ रही है। प्राइस बैंड घोषणा के दिन GMP: 24 रुपये उसी दिन शाम तक GMP: 33 रुपये आईपीओ खुलने के दिन GMP: 63 रुपये वर्तमान GMP के आधार पर शेयर लगभग 33% प्रीमियम पर लिस्ट होने की संभावना का संकेत मिल रहा है। हालांकि GMP केवल बाजार की भावना दर्शाता है और इसकी कोई आधिकारिक गारंटी नहीं होती। ब्रोकरेज हाउस की राय SBI Securities ने आईपीओ को "Subscribe" रेटिंग दी है। Kantilal Chhaganlal Securities ने "Apply for Long Term" की सलाह दी है। विश्लेषकों का मानना है कि रीसाइक्लिंग सेक्टर की बढ़ती संभावनाएं और कंपनी का स्थापित ग्राहक आधार इसे दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकता है। कब होगी लिस्टिंग? कंपनी के शेयरों को BSE और NSE पर सूचीबद्ध किया जाएगा। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार शेयरों की लिस्टिंग 10 जून 2026 को होने की संभावना है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? CMR Green Technologies का आईपीओ मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, स्थापित ग्राहक नेटवर्क और बढ़ते GMP के कारण बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहा है। हालांकि किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी के जोखिम, मूल्यांकन और अपने निवेश उद्देश्यों का आकलन करना जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 382.50 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,649.84 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 100.96 अंक चढ़कर 23,483.55 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कमजोरी के बाद बाजार ने दिखाई मजबूती कारोबार के दौरान बाजार में शुरुआत में दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स एक समय 73,815.12 तक फिसल गया था। हालांकि बाद में निवेशकों की खरीदारी लौटने से बाजार ने जोरदार वापसी की और दिन के अंत तक 1,000 अंकों से अधिक की रिकवरी दर्ज की। इससे पहले सोमवार को सेंसेक्स 508 अंक और निफ्टी 165 अंक गिरकर बंद हुए थे। आईटी शेयर बने बाजार के हीरो मंगलवार की तेजी में आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी भूमिका रही। बीएसई आईटी इंडेक्स 4.40 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। सबसे ज्यादा बढ़त टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में 6.53 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा इन्फोसिस 5.66 प्रतिशत, एचसीएल टेक 4.08 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 1.76 प्रतिशत चढ़े। आईटी कंपनियों के अलावा अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, एचडीएफसी बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एनटीपीसी, एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयर दबाव में रहे। वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी टेक कंपनियों के मजबूत नतीजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड तथा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी में बढ़ते निवेश ने आईटी शेयरों को मजबूती दी है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल और बड़े शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। निवेशकों की नजर आगे किन कारकों पर? हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 3,911 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, लेकिन बाजार की मजबूती बरकरार रही। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट और एशियाई तथा यूरोपीय बाजारों में सकारात्मक रुख ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेश, वैश्विक आर्थिक संकेतक और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा शेयर बाजार की अगली चाल तय करेगी। \
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।