Strait of Hormuz

US Iran conflict escalation with Marco Rubio statement on final phase of military operation
US-Iran युद्ध अंतिम चरण में, ‘फिनिश लाइन दिख रही है’: मार्को रुबियो

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल कर रहा है और अब ऑपरेशन अपने अंतिम पड़ाव में है। रुबियो ने कहा, “हम अपने हर लक्ष्य पर तय समय से आगे चल रहे हैं। अब हमें फिनिश लाइन साफ दिखाई दे रही है।” उन्होंने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को आधुनिक दौर का बेहद कुशल सैन्य अभियान बताते हुए कहा कि इसे इतिहास में इसकी टैक्टिकल क्षमता के लिए याद किया जाएगा। सैन्य लक्ष्यों को किया स्पष्ट रुबियो ने उन अटकलों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका के लक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की वायुसेना, नौसेना, मिसाइल फैक्ट्रियों और लॉन्च सिस्टम को निष्क्रिय करना था, जिसमें अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है। ईरान पर सख्त टिप्पणी विदेश मंत्री ने ईरान की तुलना उत्तर कोरिया से करते हुए कहा कि वह ऐसे रास्ते पर था, जहां उसकी मिसाइलें सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अपनी जनता के संसाधनों का इस्तेमाल विकास के बजाय हथियारों और आतंकवाद पर किया, जिससे देश की हालत खराब हो गई है। कूटनीति पर भी दिया जवाब युद्ध को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने कूटनीतिक रास्तों को पूरी तरह अपनाया था। “राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा बातचीत को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन ईरान को बातचीत के नाम पर समय बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जा सकती,” उन्होंने कहा। रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान के पास 60% संवर्धित यूरेनियम रखने का कोई उचित कारण नहीं है और यह सीधे तौर पर परमाणु हथियार कार्यक्रम की ओर इशारा करता है। होर्मुज और NATO पर सख्त रुख रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र बताते हुए कहा कि वहां वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही रोकना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। साथ ही NATO पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए गठबंधन के तहत अपने यूरोपीय ठिकानों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो यह व्यवस्था एकतरफा बनकर रह जाएगी।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Oil tankers passing through Strait of Hormuz amid rising Middle East tensions
युद्ध के बीच ईरान का बड़ा फैसला: भारत समेत ‘मित्र देशों’ को ही मिलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति

मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान ने एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल “मित्र देशों” को ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति देगा। इस फैसले में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस और इराक जैसे देशों को शामिल किया गया है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास द्वारा साझा बयान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद इन देशों के जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दी गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र की चिंता और अपील संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो यह वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित करेगा। खासकर खेती के मौसम में इसका असर और भी गहरा हो सकता है। गुटेरेस ने साफ तौर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान से अपील की कि वे तुरंत युद्ध को समाप्त करें। उन्होंने कहा कि बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और वैश्विक आर्थिक संकट को रोकने का एकमात्र तरीका यही है। पश्चिमी देशों के लिए बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि उनके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है। यदि यहां कोई बड़ा अवरोध आता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ेगा। बढ़ता तनाव और संभावित खतरे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने इस जलमार्ग को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ईरान द्वारा संभावित जवाबी कार्रवाई और समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण की कोशिशों ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Iran US tensions escalate as military bases and sanctions dominate ceasefire negotiation demands
ईरान की सख्त शर्तें: US बेस बंद करो, पाबंदियां हटाओ - तभी होगी बातचीत

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम (ceasefire) बातचीत के लिए कड़ी शर्तें रख दी हैं। तेहरान ने साफ कहा है कि जब तक खाड़ी क्षेत्र (Gulf) में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद नहीं किया जाता और उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध (sanctions) पूरी तरह नहीं हटाए जाते, तब तक वह किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा। ईरान की मुख्य मांगें ईरान ने बातचीत से पहले कई अहम शर्तें सामने रखी हैं: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पूरी तरह बंद किए जाएं ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए वित्तीय मुआवजा दिया जाए हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का अधिक नियंत्रण हो इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूली का अधिकार भविष्य में किसी भी हमले को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी सख्ती के बीच नरमी के संकेत हालांकि सार्वजनिक तौर पर ईरान कड़ा रुख दिखा रहा है, लेकिन अंदरखाने कुछ लचीलापन भी दिख रहा है: 5 साल के लिए बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने पर विचार यूरेनियम संवर्धन (enrichment) कम करने की संभावना IAEA को सेंट्रीफ्यूज निरीक्षण की अनुमति 60% समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक पर बातचीत की तैयारी हिज़्बुल्लाह, हमास जैसे प्रॉक्सी समूहों से समर्थन खत्म करने पर चर्चा ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर शक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर भी ईरान ने अविश्वास जताया है। ईरान का कहना है कि पहले भी कई बार बातचीत के बीच हमले हुए हैं, इसलिए वह “फिर से धोखा” नहीं खाना चाहता। क्यों है अविश्वास? पिछले साल जून में, परमाणु वार्ता से ठीक पहले इजरायल ने US समर्थन से हमला किया हाल ही में जेनेवा में बातचीत के बाद भी सैन्य कार्रवाई जारी रही कैसे शुरू हुआ युद्ध? ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब एक संयुक्त US-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने: इराक, कतर, UAE, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए भारी नुकसान ईरान में अब तक 2300 से ज्यादा लोगों की मौत इनमें 1300 से अधिक नागरिक करीब 200 बच्चे (12 साल से कम उम्र) भी शामिल

surbhi मार्च 25, 2026 0
US-Israel Iran war day 25 escalation with strikes, Gulf tension and Strait of Hormuz crisis
US-Israel vs Iran War Day 25: बातचीत के दावे पर टकराव, हमले जारी; खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग मंगलवार को 25वें दिन में प्रवेश कर गई। इस बीच शांति वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी दावे सामने आए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ” और “प्रोपेगेंडा” बताया है। ईरान बनाम अमेरिका: बातचीत या रणनीति? ट्रंप का दावा: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी, जल्द समझौते के संकेत ईरान का जवाब: बातचीत से इनकार, कहा- अमेरिका समय खरीदने की कोशिश कर रहा डेडलाइन: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसे अब 5 दिन बढ़ाया गया ट्रंप का कदम: ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए टाले विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती महंगाई और घरेलू दबाव के कारण ट्रंप इस युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। ईरान के अंदर क्या हो रहा है? तेहरान समेत कई शहरों में सरकार के समर्थन में रैलियां ईरान ने साफ किया- होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर रुख नहीं बदलेगा पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से बात कर शांति की अपील की खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा कुवैत: एक ही रात में 7 बार मिसाइल/ड्रोन अलर्ट सऊदी अरब: 20 ड्रोन हमले नाकाम बहरीन: लगातार चेतावनी सायरन ब्रिटेन: मिडिल ईस्ट में एयर डिफेंस सिस्टम भेजे खाड़ी देशों में सरकारें और आम लोग तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। इजराइल पर हमले और सिस्टम फेल ईरान ने इजराइल के उत्तरी हिस्से पर मिसाइल दागीं “डेविड्स स्लिंग” डिफेंस सिस्टम में खराबी, 2 मिसाइलें टकराईं हमले में कई लोग घायल इजराइली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और कहा कि सैन्य बढ़त को समझौते में बदला जा सकता है। लेबनान, इराक और सीरिया में जंग का विस्तार लेबनान: बेरूत के उपनगरों पर इजराइली हमला, हिज़्बुल्लाह को निशाना इराक: अमेरिका ने ईरान समर्थित गुट पर एयरस्ट्राइक की सीरिया: सैन्य बेस पर मिसाइल हमला विशेषज्ञों का कहना है कि इराक अब “सेकेंडरी बैटलफील्ड” बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, जिससे तेल सप्लाई पर बड़ा असर दक्षिण कोरिया: 70% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से, संकट गहराया जापान: 95% तेल इसी रास्ते से, इमरजेंसी जैसे हालात UAE: इसे “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका के अंदर भी हलचल व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत को लेकर कोई फाइनल फैसला नहीं पेंटागन ने मीडिया एक्सेस में बदलाव किया मॉरिटानिया में अमेरिकी दूतावास ने आतंकी खतरे का अलर्ट जारी किया

surbhi मार्च 24, 2026 0
Indian Navy warships deployed in Gulf of Oman escorting oil tankers amid Hormuz Strait crisis
होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: ओमान की खाड़ी में बढ़ेगी नौसेना की ताकत, सुरक्षित निकाले जाएंगे भारतीय जहाज

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन माने जाने वाले Strait of Hormuz में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने ऊर्जा और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने Indian Navy की तैनाती बढ़ाते हुए Gulf of Oman में अतिरिक्त युद्धपोत भेजने का फैसला किया है, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। 6 से 7 युद्धपोतों की तैनाती, सुरक्षा पर फोकस खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी को मजबूत करते हुए अब कुल युद्धपोतों की संख्या 6 से बढ़ाकर 7 की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चा तेल और LPG लेकर आने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। यह वही मार्ग है, जहां से Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar जैसे देशों से भारत को ऊर्जा आपूर्ति होती है। 22 भारतीय जहाज फंसे, बढ़ी चिंता हालिया तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग ठप हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 भारतीय झंडाधारी जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20% आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। नेवी की एस्कॉर्ट रणनीति, जहाजों को सुरक्षित निकाला जा रहा भारतीय नौसेना अब सक्रिय रूप से जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है। हाल ही में एक भारतीय युद्धपोत ने यूएई के फुजैरा पोर्ट से निकले एक तेल टैंकर को सुरक्षित भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचाया। इसके अलावा, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे LPG कैरियर भी करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं-जो मौजूदा संकट के बीच बड़ी राहत मानी जा रही है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत कार्रवाई यह पूरी तैनाती Operation Sankalp के तहत की जा रही है, जिसकी शुरुआत 2019 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर भरोसा बनाए रखना है। अदन की खाड़ी में भी लगातार मिशन भारतीय नौसेना सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। Gulf of Aden में भी 2008 से एंटी-पायरेसी मिशन चलाया जा रहा है, जहां हर समय एक युद्धपोत तैनात रहता है। यह मिशन समुद्री डकैती पर नजर रखने और भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभाता है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में भारत की यह रणनीतिक तैनाती बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
LPG gas agency amid supply shortage in India
LPG संकट गहराया: क्या आगे भी मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर? सरकार ने 10 दिनों में लिए बड़े फैसले, सप्लाई बनाए रखने की कोशिश

देश में रसोई गैस यानी LPG की किल्लत ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर Strait of Hormuz में भारतीय तेल और गैस टैंकरों के फंसे होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। Iran और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। आपूर्ति संकट, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं केंद्र सरकार ने साफ किया है कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रण में रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और अनावश्यक स्टॉकिंग से बचें। साथ ही, सरकार पाइपलाइन के जरिए गैस (PNG) के उपयोग को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है ताकि LPG पर निर्भरता कम हो सके। जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई LPG की किल्लत के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। देशभर में 12,000 से ज्यादा छापे   15,000 से अधिक सिलेंडर जब्त   आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई   इसके बावजूद कई जगहों पर लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में नजर आ रहे हैं और कुछ मामलों में ब्लैक में 3000 रुपये तक में सिलेंडर बिकने की खबरें हैं। सरकार का बैकअप प्लान स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं: घरेलू LPG उत्पादन में 40% तक बढ़ोतरी   राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त मिट्टी का तेल   15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने नए वितरण दिशा-निर्देश लागू किए   PNG नेटवर्क विस्तार को तेज करने के निर्देश   जिनके पास PNG कनेक्शन है, उन्हें LPG सरेंडर करने की सलाह   कमर्शियल यूजर्स के लिए नई नीति सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जो राज्य PNG नेटवर्क को तेजी से बढ़ाएंगे, उन्हें कमर्शियल LPG सप्लाई में 30% तक बढ़ोतरी दी जाएगी। होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्या घरों तक गैस मिलती रहेगी? सरकार ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और घरों तक गैस सप्लाई जारी रहेगी। ऑनलाइन बुकिंग 90% से ज्यादा हो चुकी है, और लोगों से अपील की गई है कि वे एजेंसियों पर भीड़ न लगाएं-सिलेंडर घर तक पहुंचाए जाएंगे। कब खत्म होगी किल्लत? हालांकि कुछ टैंकर भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन पहले की बाधाओं का असर अभी भी दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Iran US conflict escalation with drone strikes radar damage and rising military tension in Gulf region
ईरान-अमेरिका टकराव तेज: ड्रोन हमले, रडार तबाही और खाड़ी में बढ़ता सैन्य दबाव

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष और तीखा हो गया है। जंग के 18वें दिन दोनों पक्षों की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं, जबकि हालात यह संकेत दे रहे हैं कि टकराव जल्द थमता नजर नहीं आ रहा। अमेरिकी दावों के उलट, ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है और खाड़ी क्षेत्र में उसकी आक्रामक रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है।   ईरान का सख्त संदेश: ‘शुरू आपने किया, खत्म हम करेंगे’ ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फागरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे संदेश देते हुए कहा कि युद्ध का फैसला सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में होगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि: ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा   क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रह सकते हैं   युद्ध के अंत का फैसला ईरान करेगा, न कि अमेरिका   रणनीतिक झटका: AN/FPS-117 रडार सिस्टम तबाह ईरान ने ड्रोन हमले में अमेरिकी एयर डिफेंस नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के अल-क़ैसुमाह एयरपोर्ट पर तैनात लंबी दूरी के 3D रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। AN/FPS-117 रडार: यह रडार 400 किमी तक हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम   फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल ट्रैक करने में अहम   अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित   इस सिस्टम को निष्क्रिय करना अमेरिका की निगरानी क्षमता पर सीधा असर डाल सकता है।   MQ-9 Reaper ड्रोन को भारी नुकसान युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक ड्रोन MQ-9 Reaper को भी भारी नुकसान हुआ है। अब तक 10–11 ड्रोन गिराए जाने की खबर   ईरान और यमन दोनों मोर्चों पर नुकसान   यह ड्रोन निगरानी और सटीक हमले के लिए जाना जाता है   50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान और हेलफायर मिसाइल से लैस   विशेषज्ञों के अनुसार, यह नुकसान अमेरिकी ड्रोन फ्लीट का लगभग 10% तक हो सकता है, जो रणनीतिक दृष्टि से बड़ा झटका है।   जमीनी हकीकत बनाम राजनीतिक दावे जहां डोनाल्ड ट्रंप युद्ध में बढ़त का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी हालात इससे अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव चरम पर   बातचीत की संभावना फिलहाल कमजोर   क्षेत्रीय असर और बढ़ता खतरा इस संघर्ष का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सुरक्षा चिंताएं भी गहरा सकती हैं।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Jamshedpur marine engineer Ansh Tripathi returns after safely crossing Strait of Hormuz aboard LPG carrier Shivalik.
होर्मुज के खतरनाक रास्ते को पार कर आज वतन लौटेगा जमशेदपुर का बेटा अंश त्रिपाठी, परिवार की आंखों में खुशी के आंसू

  युद्ध के साये में निभाया देश का बड़ा दायित्व झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले सेकंड इंजीनियर Ansh Tripathi ने साहस और कर्तव्य की मिसाल पेश करते हुए खाड़ी क्षेत्र के तनावपूर्ण हालात के बीच खतरनाक Strait of Hormuz को पार किया। अंश Shipping Corporation of India के जहाज Shivalik LNG Carrier पर तैनात हैं और लगभग 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत लौट रहे हैं। जहाज सोमवार 16 मार्च को Mundra Port (गुजरात) पहुंचने वाला है। अंश की सुरक्षित वापसी की खबर से उनके परिवार, दोस्तों और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है।   26 नवंबर से शुरू हुआ था मिशन अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को जहाज ‘शिवालिक’ पर अपनी ड्यूटी जॉइन की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मिशन इतना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। जहाज को यूएई, कतर और सऊदी अरब से LPG लेकर भारत लौटना था। 13 मार्च का दिन सबसे कठिन था, क्योंकि इसी दिन जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना था। उस समय क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण हर पल खतरे की आशंका बनी हुई थी। जब जहाज ने सुरक्षित रूप से इस खतरनाक रास्ते को पार कर लिया, तब जाकर परिवार और देश के लोगों ने राहत की सांस ली।   पिता की आंखों में छलक पड़े आंसू अंश के पिता Mithilesh Kumar Tripathi, जो Uranium Corporation of India Limited से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं, ने भावुक होकर बताया कि पिछले कई दिन उनके परिवार के लिए बेहद कठिन रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें हर पल यह डर सता रहा था कि कहीं युद्ध की स्थिति में उनका बेटा किसी खतरे का शिकार न हो जाए। लेकिन अब जब यह खबर मिली कि जहाज सुरक्षित होर्मुज पार कर चुका है, तो ऐसा लग रहा है जैसे सीने से भारी बोझ उतर गया हो।   मां की दुआओं ने बचाया बेटा अंश की मां Chanda Tripathi ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वे लगातार भगवान से बेटे की सलामती की प्रार्थना कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जब भी मीडिया में समुद्री तनाव की खबरें देखती थीं तो दिल घबरा जाता था। अब जब बेटे के सुरक्षित होने की खबर मिली है, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं।   पत्नी और बेटे को इंतजार उस पल का अंश की पत्नी Chanda Mishra Tripathi, जो Tata Steel में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, पिछले कई दिनों से लगातार चिंता में थीं। उनका दो वर्षीय बेटा तनय अभी छोटा है, लेकिन घर के माहौल को देखकर वह भी पिता की कमी महसूस कर रहा था। अब परिवार उस पल का इंतजार कर रहा है जब अंश घर लौटेंगे और सब उनसे मिल सकेंगे।   रिश्तेदारों और परिचितों का लगा तांता अंश के घर पर इस समय रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लगा हुआ है। फोन लगातार बज रहे हैं और हर कोई उनकी कुशलता के बारे में जानकारी ले रहा है। जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाला यह परिवार अब गर्व और खुशी दोनों महसूस कर रहा है।   अंश त्रिपाठी का करियर स्कूली शिक्षा: Motilal Nehru Public School (2004) और Atomic Energy Central School Narwapahar (2008) उच्च शिक्षा: Birla Institute of Technology Mesra से 2012 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में Cochin Shipyard Limited से मरीन इंजीनियरिंग करियर: दिसंबर 2014 में Shipping Corporation of India में शामिल हुए   साहस की मिसाल बना यह मिशन युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालात के बीच खतरनाक समुद्री मार्ग से होकर देश के लिए ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करना आसान नहीं था। अंश त्रिपाठी की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात बन गई है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Drone attack near Dubai International Airport amid Iran-Israel tensions and rising Strait of Hormuz security concerns.
Iran War Update: Hormuz को लेकर ट्रंप का दबाव, दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला

  मध्य-पूर्व में जारी जंग के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। Donald Trump ने अपने सहयोगी देशों से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को सुरक्षित रखने के लिए मदद मांगी है। दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इधर United States और Israel ने Iran के कई शहरों-Tehran, Hamadan और Isfahan-पर हमले जारी रखे हैं। जवाब में ईरान भी मिसाइल और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई कर रहा है।   दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला Dubai International Airport के पास ड्रोन से जुड़े एक हमले के बाद ईंधन टैंक में आग लग गई। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया है।   सुरक्षा के तौर पर कुछ समय के लिए उड़ानों को रोक दिया गया और कई फ्लाइट्स को Al Maktoum International Airport डायवर्ट किया गया।   ईरान-इजराइल हमले जारी इजराइल ने तेहरान पर नई एयर स्ट्राइक की, कई जगह धुएं के गुबार देखे गए।   अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और करीब 1500 नागरिकों की मौत की खबर है।   ईरान ने कहा कि यह “थोपी गई जंग” है।   खाड़ी देशों में हाई अलर्ट Saudi Arabia ने पूर्वी क्षेत्र में 23 ड्रोन मार गिराने का दावा किया।   Bahrain, Qatar और Kuwait में भी ड्रोन और मिसाइल अलर्ट जारी किए गए।   तेल बाजार पर असर जंग के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Oil 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।   वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।   NATO सहयोगियों पर ट्रंप का दबाव NATO देशों से ट्रंप ने कहा कि अगर वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने में मदद नहीं करते तो गठबंधन का भविष्य “खराब” हो सकता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Indian LPG tankers pass through Strait of Hormuz after Iran permits safe passage amid Middle East tensions.
होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को मिली अनुमति, जयशंकर ने बताई कूटनीति की भूमिका

  पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ये दोनों जहाज अब भारत के तट की ओर बढ़ चुके हैं और जल्द ही अपने-अपने बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। भारतीय झंडे वाले ये गैस टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं। इनमें से ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है, जबकि ‘नंदा देवी’ कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा।   बातचीत से निकला समाधान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले में पर्दे के पीछे की कूटनीतिक कोशिशों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि यह अनुमति भारत और ईरान के बीच सीधे संवाद का नतीजा है। जयशंकर के अनुसार, तेहरान के साथ लगातार बातचीत के जरिए जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू कराना सबसे प्रभावी तरीका साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है और भारत अपने अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी बातचीत जारी रखेगा।   कोई ‘डील’ नहीं, रिश्तों का असर इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसके बदले में ईरान को भारत से कोई रियायत मिली है। इस पर जयशंकर ने साफ कहा कि यह किसी लेन-देन का मामला नहीं है। उनके मुताबिक भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और उसी भरोसे के आधार पर यह समाधान संभव हो पाया है।   प्रधानमंत्री की बातचीत का भी असर बताया जा रहा है कि भारतीय जहाजों को अनुमति मिलने से पहले नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की गई थी।   वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यही रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति दुनिया भर में होती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी, ऐसे में भारतीय जहाजों को अनुमति मिलना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
India LPG tanker Hormuz
होर्मुज में ईरान ने रोका भारतीय LPG टैंकर, 34 क्रू मेंबर फंसे

तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Iran ने India से जुड़े एक एलपीजी टैंकर को Strait of Hormuz के पास रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज में 34 सदस्यीय चालक दल मौजूद है और यह करीब 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर एलपीजी लेकर जा रहा था।   कुवैत से गुजरात जा रहा था जहाज जानकारी के अनुसार यह टैंकर Mina Al Ahmadi Port (कुवैत) से Deendayal Port Kandla (गुजरात) के लिए रवाना हुआ था। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव और 28 फरवरी से लागू समुद्री प्रतिबंधों के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ सका।   यूएई के पास खड़ा है टैंकर फिलहाल यह जहाज Mina Saqr Port के पास लंगर डाले खड़ा है और आगे बढ़ने की अनुमति का इंतजार कर रहा है। जहाज के कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा और क्रू मेंबर लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं।   15वें दिन में पहुंचा पश्चिम एशिया संघर्ष Israel, United States और Iran के बीच चल रहा टकराव अब और खतरनाक होता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष 15वें दिन में पहुंच चुका है। भारत सरकार ने कहा है कि क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति पर उसकी करीबी नजर बनी हुई है।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
Wall Street market decline amid rising oil prices and Iran war tensions.
ईरान युद्ध से बढ़ी महंगाई की आशंका, वॉल स्ट्रीट में गिरावट; अमेरिकी बाजारों में साप्ताहिक नुकसान

  तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निवेशकों में चिंता ईरान में जारी युद्ध और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। पूरे सप्ताह ऊर्जा बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर वॉल स्ट्रीट पर साफ दिखाई दिया। तीनों प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई और सप्ताह के अंत में बाजार नुकसान के साथ बंद हुआ।   प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांकों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा: Dow Jones Industrial Average 119.38 अंक यानी 0.26% गिरकर 46,558.47 पर बंद हुआ। S&P 500 40.43 अंक यानी 0.61% टूटकर 6,632.19 पर पहुंच गया। Nasdaq Composite 206.62 अंक यानी 0.93% गिरकर 22,105.36 पर बंद हुआ। वहीं स्मॉल-कैप शेयरों का सूचकांक Russell 2000 इस साल के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ।   तेल बाजार में अस्थिरता बनी बड़ी वजह वैश्विक तेल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव ने शेयर बाजार को प्रभावित किया। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल WTI क्रूड की कीमत 3.11 प्रतिशत बढ़कर 98.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड 2.67 प्रतिशत बढ़कर 103.14 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध और तेल आपूर्ति में संभावित बाधा के कारण ऊर्जा बाजार बेहद अस्थिर बना हुआ है।   होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है। इसके बाद ईरान ने दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल परिवहन के मार्ग माने जाने वाले Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी International Energy Agency ने भी चेतावनी दी है कि यह युद्ध वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान पैदा कर सकता है।   ब्याज दरों पर भी बढ़ी अनिश्चितता अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में कमजोरी के संकेत मिले हैं। चौथी तिमाही के GDP आंकड़ों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि टिकाऊ वस्तुओं की मांग भी कमजोर रही। हालांकि, इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि Federal Reserve अगले सप्ताह होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में कटौती करने की संभावना कम है, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को फिर से बढ़ा सकती हैं।   टेक और फाइनेंशियल शेयरों में दबाव S&P 500 के 11 प्रमुख सेक्टरों में से ज्यादातर गिरावट के साथ बंद हुए। टेक्नोलॉजी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई, जबकि यूटिलिटी सेक्टर में हल्की बढ़त दर्ज की गई। Adobe के शेयर लगभग 7.6% गिर गए, क्योंकि कंपनी के लंबे समय से CEO Shantanu Narayen के पद छोड़ने की खबर सामने आई। Meta Platforms के शेयर भी 3.8% टूट गए, क्योंकि कंपनी ने अपने AI मॉडल “Avocado” के लॉन्च को टाल दिया है। इसके अलावा S&P 500 के फाइनेंशियल सेक्टर में पूरे सप्ताह लगभग 3.4% की गिरावट दर्ज की गई।   बाजार में बिकवाली का दबाव न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से लगभग 1.9 गुना ज्यादा रही। वहीं नैस्डैक में भी गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों से काफी अधिक रही। सप्ताह के दौरान अमेरिकी एक्सचेंजों में औसतन 18.12 अरब शेयरों का कारोबार हुआ, जो पिछले 20 कारोबारी दिनों के औसत से थोड़ा कम है।   आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतें, ईरान युद्ध की स्थिति और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीति वॉल स्ट्रीट की दिशा तय करेंगे। यदि तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव बना रह सकता है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
US Marines deployed to Middle East near Strait of Hormuz amid rising Iran tensions.
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: Donald Trump ने 2500 मरीन सैनिक भेजने का दिया आदेश, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर खतरनाक योजना की चर्चा

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 2500 मरीन सैनिकों को तैनात करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद रणनीतिक रूप से बेहद अहम जलमार्ग Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका की संभावित सैन्य योजना पर चर्चा तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना बेहद जोखिम भरी हो सकती है। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तेल निर्यात के प्रमुख केंद्र Kharg Island पर हमला किया है। इसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित द्वीपों पर कब्जा करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी नौसेना के पूर्व अधिकारी और रक्षा विशेषज्ञ Malcolm Nance ने इस संभावित योजना को “खतरनाक” बताते हुए कहा कि इसका विश्लेषण अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने करीब 40 साल पहले ही किया था। उनके मुताबिक, उस समय अनुमान लगाया गया था कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए कम से कम 6000 मरीन सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की जरूरत होगी।   पहले द्वीपों पर कब्जे की रणनीति नैंस के अनुसार, उस योजना के तहत सबसे पहले Larak Island, Hormuz Island और Qeshm Island पर कब्जा कर Bandar Abbas को चारों तरफ से घेरने की रणनीति थी। इसके बाद प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र को पार कर आगे बढ़ने की योजना बनाई गई थी। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि 1988 में जब ईरानी बारूदी सुरंगों से अमेरिकी जहाजों को खतरा हुआ था, तब भी अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई नहीं की थी।   ईरान की जवाबी कार्रवाई का खतरा नैंस के मुताबिक अगर अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो Islamic Revolutionary Guard Corps और बासिज बल पहाड़ी इलाकों से द्वीपों पर मिसाइल और आत्मघाती हमले कर सकते हैं। इसके अलावा ईरान पनडुब्बी ड्रोन, सुसाइड बोट और समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल भी कर सकता है।   रसद सप्लाई भी बड़ी चुनौती विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस अभियान की सप्लाई लाइन भी बड़ी समस्या बन सकती है। अमेरिकी सेना को अपने ठिकानों United Arab Emirates और Qatar से रसद सप्लाई करनी होगी, जो संभावित हमलों के निशाने पर आ सकते हैं। नैंस ने कहा कि इस तरह के विवादित और खतरनाक जलमार्ग से सप्लाई भेजना “पागलपन” जैसा कदम होगा।   होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों की आशंका हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा रहा है। हालांकि अगर पेंटागन इटली से एक्सपेडिशनरी सी बेस जहाज हिंद महासागर में तैनात करता है तो अमेरिका को कुछ रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना जल्दबाजी में बनाई गई प्रतीत होती है और इससे पूरे क्षेत्र में बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
LPG tanker ships waiting near Strait of Hormuz amid Middle East tensions before sailing to India
ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी तैयारी: 8 LPG टैंकर जल्द पार करेंगे होर्मुज, गैस की किल्लत की आशंका कम

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध हालात के बीच भारत ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, जल्द ही 8 LPG टैंकर Strait of Hormuz को पार कर भारत की ओर रवाना होंगे, जिससे देश में गैस संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल ये सभी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक पहले इंतजार कर रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत और ईरान के बीच लगातार बातचीत जारी है।   जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच कई दौर की फोन पर बातचीत हुई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय LPG टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिल सके और वे बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकें।   होर्मुज के पास खड़े हैं 8 टैंकर सरकारी सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय होर्मुज के पास खड़े हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों ने भारतीय जहाजों की आवाजाही में सहयोग का भरोसा दिया है। इसके साथ ही मानवीय पहलू पर भी बातचीत हो रही है। करीब 250 ईरानी नाविक फिलहाल भारत में हैं, जिन्हें रहने की सुविधा दी गई है और उनके स्वदेश लौटने की व्यवस्था की जा रही है।   सरकार ने बनाया संकट प्रबंधन प्लान ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार का क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (Crisis Management Group) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यह समूह तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है, ताकि देश में LPG कुकिंग गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे।   भारत की LPG आयात पर निर्भरता भारत अपनी कुल LPG जरूरतों का करीब 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आता है और अधिकांश शिपमेंट Strait of Hormuz के रास्ते ही भारत पहुंचते हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट देश की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।   नौसेना एस्कॉर्ट पर भी विचार सूत्रों के अनुसार, अगर हालात ज्यादा तनावपूर्ण होते हैं तो भारत अपने ईंधन से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना एस्कॉर्ट देने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Indian government boosts LPG and crude oil supply through alternative global routes amid Hormuz tensions.
LPG संकट से राहत की कोशिश: नए रास्तों से तेल-गैस की आपूर्ति बढ़ाने में जुटी सरकार

  नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। खासतौर पर रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने के बाद भारत सरकार एक्शन मोड में आ गई है। रसोई गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए सरकार और भारतीय ऊर्जा कंपनियां नए वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों की तलाश में जुट गई हैं। दरअसल, भारत खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता रहा है। लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के चलते इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंका के बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने की रणनीति तैयार की है।   रूस बना बड़ा वैकल्पिक स्रोत ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च के पहले 11 दिनों में रूस से भारत का तेल आयात करीब 50% बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जबकि फरवरी में यह लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। भारतीय कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation और Reliance Industries ने रूस से करीब 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल के सौदे किए हैं। हालांकि अब रूस तेल पर पहले जैसी छूट नहीं दे रहा है। इस बीच अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए भारत को अस्थायी छूट भी दी है।   अमेरिका से भी बढ़ी खरीद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने के लिए अमेरिका से भी तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी GAIL India ने अमेरिकी कंपनियों के साथ एलएनजी (LNG) की बड़ी डील की है, ताकि घरेलू बाजार में गैस की संभावित कमी को पूरा किया जा सके।   लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से भी आयात भारत अब ऐसे रास्तों से तेल मंगा रहा है जो Strait of Hormuz पर निर्भर नहीं हैं। पहली बार भारत ने दक्षिण अमेरिकी देश Guyana से सीधे कच्चे तेल की खरीद शुरू की है। बताया जा रहा है कि Indian Oil Corporation और Hindustan Petroleum ने वहां से करीब 40 लाख बैरल तेल मंगवाया है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका के Nigeria और Angola से भी अतिरिक्त तेल की खेप मंगाई जा रही है।   प्राकृतिक गैस के नए स्रोत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 25% तक की कमी को देखते हुए भारत ने कई नए देशों से संपर्क किया है। सरकार ने Algeria, Norway और Canada से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के लिए बातचीत शुरू की है। बताया जा रहा है कि नए स्रोतों से खरीदे गए दो बड़े एलएनजी कार्गो इस समय भारत की ओर आ रहे हैं।   होर्मुज पर निर्भरता घटाने की रणनीति भारत अब अपनी तेल जरूरतों का लगभग 70% हिस्सा ऐसे समुद्री मार्गों से मंगाने लगा है जो होर्मुज के बाहर हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा करीब 55% था। देश फिलहाल करीब 40 अलग-अलग देशों से तेल खरीद रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र, खासकर मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम की जा सके। साथ ही सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए रिफाइनरियों को गैस उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं।   भारत की ऊर्जा जरूरतें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी लगभग 88% तेल जरूरतें विदेशों से पूरी करता है। देश में प्रतिदिन करीब 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है। इसमें से लगभग 25 से 27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देशों से Strait of Hormuz के रास्ते आता रहा है। इसके अलावा भारत अपनी करीब 55% एलपीजी और लगभग 30% एलएनजी भी आयात करता है, जिसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, सीएनजी और घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट के बीच भारत द्वारा ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण भविष्य में आपूर्ति सुरक्षा के लिहाज से एक अहम रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Oil tanker Shenlong safely arrives at Mumbai Port amid Strait of Hormuz tensions.
जयशंकर की कूटनीति रंग लाई: हॉर्मुज पार कर मुंबई पहुंचा भारत के लिए तेल लेकर आया टैंकर

  नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत की कूटनीति ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के बावजूद सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आया टैंकर शेनलोंग सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। इस घटनाक्रम को भारत की प्रभावी कूटनीतिक पहल का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस सफलता के पीछे भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई महत्वपूर्ण बातचीत की अहम भूमिका रही। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी।   युद्ध के बीच सुरक्षित पहुंचा जहाज दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण Strait of Hormuz युद्ध का संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। हाल के दिनों में कई तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई थी। इसी माहौल में लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर शेनलोंग सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर रवाना हुआ था। जोखिम भरे समुद्री रास्ते को पार करते हुए यह जहाज सुरक्षित रूप से Mumbai Port पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि वह अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। ऐसे में भारत के लिए तेल लेकर आए जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत की संतुलित विदेश नीति और कूटनीतिक संवाद का परिणाम माना जा रहा है।   जयशंकर-अराघची की बातचीत से बना रास्ता सूत्रों के अनुसार जब ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही सीमित करने का संकेत दिया, तब भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल की। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर विस्तृत बातचीत की और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी जानकारी दी कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात और समुद्री सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया तथा संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देते हुए भारतीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पहल की। इसके साथ ही जयशंकर ने उसी दिन जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत कर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को साझा किया।   मुंबई में उतारा जा रहा कच्चा तेल यह विशाल तेल टैंकर बुधवार दोपहर लगभग 1 बजे Mumbai Port पहुंचा। बाद में शाम करीब 6 बजे इसे ‘जवाहर द्वीप’ टर्मिनल पर बर्थ किया गया। जहाज में लगभग 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है, जिसे मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा। जहाज पर भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के कुल 29 क्रू सदस्य सवार हैं। मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के डिप्टी कंजर्वेटर प्रवीण सिंह के मुताबिक जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसे पूरा होने में लगभग 36 घंटे लग सकते हैं।   संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हालांकि शेनलोंग का सुरक्षित पहुंचना राहत भरी खबर है, लेकिन समुद्री क्षेत्र में खतरा पूरी तरह टला नहीं है। शिपिंग महानिदेशालय के अनुसार करीब 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अब भी युद्ध क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। भारत ने अब तक अपनी कूटनीतिक पहल और समन्वय के जरिए देश महिमा, स्वर्ण कमल और विश्व प्रेरणा समेत सात जहाजों को सुरक्षित अरब सागर के जलक्षेत्र में पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय कूटनीति ही ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रही है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Iran leader Ali Larijani reacts to Donald Trump’s warning amid rising US-Iran tensions.
ईरान-अमेरिका टकराव और गहरा: ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, कहा-“सावधान रहें, कहीं आप ही खत्म न हो जाएं”

  मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। तीखी बयानबाज़ी और सैन्य कार्रवाई के बीच दोनों देशों के नेताओं के बीच शब्दों की जंग भी तेज हो गई है। ईरान के वरिष्ठ नेता और सुरक्षा मामलों के प्रभावशाली चेहरों में शामिल अली लारिजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक संदेश में लारिजानी ने ट्रंप के हालिया बयान का जवाब देते हुए लिखा, “आपसे भी अधिक शक्तिशाली लोग ईरान को खत्म नहीं कर पाए। अपने लिए सावधान रहें, कहीं ऐसा न हो कि आप ही समाप्त कर दिए जाएं।” यह बयान उस समय आया है जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी।   ट्रंप की सख्त चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि यदि ईरान ने दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बाधित करने की कोशिश की, तो अमेरिका पहले की तुलना में “20 गुना अधिक ताकत” से हमला करेगा। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि ऐसा हमला ईरान को इस स्थिति में पहुंचा सकता है कि वह दोबारा खड़ा भी न हो पाए। उन्होंने लिखा, “मौत, आग और तबाही उन पर बरसेगी-लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि स्थिति वहां तक न पहुंचे।” इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान के नए नेतृत्व से संतोष नहीं है और उनका मानना है कि मोजतबा खामेनेई “शांति से नहीं रह पाएंगे।”   नए नेतृत्व पर भी जताई नाराज़गी दरअसल, ईरान में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के पश्चात उनके दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। इस फैसले को लेकर अमेरिका की ओर से पहले ही असंतोष जताया जा चुका है। ट्रंप ने इससे पहले यह भी कहा था कि ईरान के नए नेता के चयन में अमेरिका की भी भूमिका होनी चाहिए, जैसा कि अतीत में कुछ देशों के राजनीतिक मामलों में अमेरिका का प्रभाव देखा गया है।   हमलों के बाद भड़का युद्ध मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद क्षेत्र में व्यापक संघर्ष शुरू हो गया। ईरान ने इस हमले के जवाब में इज़राइल और उसके सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। इस संघर्ष का असर अब कई खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है।   होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, वह क्षेत्र से तेल की आपूर्ति रोक सकता है। ईरानी अधिकारियों ने यहां तक कहा है कि वे “एक भी लीटर तेल के निर्यात” को रोक सकते हैं, खासकर उन देशों के लिए जो अमेरिका और इज़राइल का समर्थन कर रहे हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।   खाड़ी देशों में भी बढ़े हमले मंगलवार को ईरान ने इज़राइल और कई खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए नए हमले किए। बहरीन की राजधानी मनामा में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में 29 वर्षीय महिला की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए।   सऊदी अरब ने अपने पूर्वी तेल समृद्ध क्षेत्र में दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया।   कुवैत की नेशनल गार्ड ने छह ड्रोन को नष्ट करने की जानकारी दी।   वहीं संयुक्त अरब अमीरात के औद्योगिक शहर रुवैस में एक ड्रोन हमले के बाद पेट्रोकेमिकल संयंत्रों के पास आग लग गई, हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।   इज़राइल में भी अलर्ट इज़राइल में भी हमलों की आशंका के बीच अलर्ट जारी है। यरुशलम में सायरन बजने लगे और तेल अवीव के ऊपर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इज़राइली रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागे गए कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोकने की कोशिश की।   वैश्विक बाजारों पर असर मध्य पूर्व में बढ़ते इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चिंता बढ़ा दी है। तेल आपूर्ति में संभावित बाधा और युद्ध के फैलने की आशंका के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और शेयर बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है या होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई और तीखी बयानबाज़ी ने मध्य पूर्व को एक बार फिर गंभीर संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Rising Iran Israel conflict raises fears over Hormuz Strait oil supply
Iran-US-Israel War: ‘हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाएगा’, ईरान की चेतावनी; रूस ने भी जताई चिंता

  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran और Israel के बीच चल रहे संघर्ष का 11वां दिन है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है, जबकि इस युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस बीच Iran ने एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि अगर तनाव इसी तरह जारी रहा तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी जाएगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि “हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाने दिया जाएगा।”   तेहरान में धमाके, ईरान का जवाबी हमला रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल की ओर मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह हमला उस समय हुआ जब हाल ही में देश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की खबर सामने आई। वह पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं। दूसरी ओर इजराइली सेना ने कहा कि उसने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए हैं। इनमें मिसाइल लॉन्च साइट्स और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं।   लेबनान और कतर तक पहुंचा तनाव संघर्ष का असर अब पड़ोसी देशों तक भी फैलता दिख रहा है। Lebanon की राजधानी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है, जहां इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर हवाई हमले किए। इन इलाकों को Hezbollah से जुड़े ठिकानों के रूप में देखा जाता है। वहीं Qatar की राजधानी दोहा में भी धमाकों की खबरें सामने आईं। कतर के अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और तस्वीरें फैलाने के आरोप में 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने आरोप लगाया है कि दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में इजराइल द्वारा व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है।   वैश्विक बाजारों पर असर इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। वहीं यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते एशिया और यूरोप के कई प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।   खाड़ी देशों में भी बढ़ी सतर्कता इस संघर्ष के बीच Saudi Arabia ने बताया कि उसने शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराया। वहीं Bahrain ने भी ईरानी हमलों के बाद अपने ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।   ट्रंप-पुतिन की बातचीत इस बीच युद्ध को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। Donald Trump और Vladimir Putin के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। रूस की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए कुछ संभावित प्रस्तावों पर चर्चा की गई और साथ ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर भी चेतावनी दी गई। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में इस संघर्ष का कोई राजनीतिक या कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
US Navy warships patrolling Strait of Hormuz amid rising Iran-US tensions in Middle East
होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका ने ली, ईरान को दी चेतावनी

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच United States ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प जताया है। अमेरिका का कहना है कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा, क्योंकि Iran के साथ बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने अमेरिकी टीवी कार्यक्रम 60 Minutes को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी सेना पहले से ही ईरान की नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी सैन्य कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनी रहे और किसी भी तरह की बाधा वैश्विक व्यापार या ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित न करे। हेगसेथ के अनुसार, ईरान की नौसेना की क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। अमेरिकी सेना उन जहाजों और सैन्य संसाधनों को लगातार निशाना बना रही है जो समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज सुरक्षित रहें और इस क्षेत्र में काम कर रहे वाणिज्यिक जहाजों का भरोसा बहाल हो सके। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसी कारण अमेरिका अपने सहयोगी देशों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि वैश्विक बाजारों पर किसी भी संभावित झटके को कम किया जा सके। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। हेगसेथ ने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा अभियान केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक प्रयास है। इसका उद्देश्य तेहरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह अमेरिकी सेना, क्षेत्रीय सहयोगियों और वैश्विक व्यापार को खतरा पहुंचा सकता है। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान को दी गई “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की चेतावनी का भी जिक्र किया। हेगसेथ ने कहा कि इसका मतलब है कि अमेरिका इस संघर्ष में जीत हासिल करने के लिए लड़ रहा है और अंतिम शर्तें वही तय करेगा। उनके अनुसार, लक्ष्य ऐसी स्थिति तक पहुंचना है जहां ईरान सैन्य अभियान जारी रखने की स्थिति में न रहे और उसे संघर्ष समाप्त करने के लिए मजबूर होना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Iran President Masoud Pezeshkian addressing the nation amid Middle East tension and announcing halt on attacks against neighbors.
ईरान का बड़ा ऐलान: पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का फैसला, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मांगी माफी

  मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरान की नई रणनीति मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव का संकेत दिया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने घोषणा की है कि अब ईरान किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी देश की जमीन से ईरान पर हमला किया गया, तो तेहरान जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।   “ईरान किसी के सामने सरेंडर नहीं करेगा” अपने संबोधन में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने साफ कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि देश न तो Israel और न ही United States के सामने आत्मसमर्पण करेगा। उनके मुताबिक, ईरानी जनता और सरकार अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।   पड़ोसी देशों से जताया खेद राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने बयान में पड़ोसी देशों को लेकर नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान जिन पड़ोसी देशों को हमलों का सामना करना पड़ा, उसके लिए उन्हें खेद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान की तरफ से अब ऐसे हमले नहीं किए जाएंगे और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।   माफी के साथ रखी अहम शर्त हालांकि इस माफी के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी पड़ोसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ईरान की नई सुरक्षा नीति का संकेत हो सकता है, जिसमें वह सीधे टकराव से बचते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।   खामेनेई की मौत से बढ़ा तनाव हाल के सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे मध्य पूर्व में राजनीतिक और सैन्य तनाव और बढ़ गया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और आगे की रणनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।   होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता इस संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां तनाव और बढ़ता है या मार्ग बंद होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।   क्षेत्रीय शांति की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा बयान विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह बयान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0