Strait of Hormuz

US Secretary Marco Rubio speaks on India-US energy partnership amid rising global oil tensions
‘भारत हमारा बेहतरीन दोस्त’, मार्को रूबियो बोले- जितना तेल चाहिए, अमेरिका देने को तैयार

Marco Rubio ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझीदार” बताते हुए बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक जितना ईंधन चाहिए, उतना बेचने के लिए तैयार है। रूबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत दौरे को बताया बेहद अहम मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे Kolkata, Agra, Jaipur और New Delhi का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, “भारत हमारे सबसे बेहतरीन सहयोगियों और साझीदारों में से एक है। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है।” रूबियो ने यह भी कहा कि इस दौरे के दौरान उन्हें क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिलेगा, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है। क्वाड बैठक पर भी फोकस अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इस साल के अंत में क्वाड देशों की एक और बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अहम माना जाता है। वेनेजुएला के तेल पर भी नजर रूबियो ने संकेत दिए कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि Venezuela के तेल को लेकर भी कई अवसर मौजूद हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति Delcy Rodriguez अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आ सकती हैं, जहां तेल व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को चेतावनी रूबियो ने Iran को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का शुल्क लगाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर स्थायी टोल व्यवस्था को लेकर चर्चा कर रहा है। अमेरिका ने इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है। भारत पर बढ़ते तेल संकट का असर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा करता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतों में तेजी देखी गई है। बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच भारत की तेल विपणन कंपनियों ने चार दिनों के भीतर दो बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की। पहले 3 रुपये और बाद में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी हो सकती है मजबूत विशेषज्ञों का मानना है कि मार्को रूबियो का बयान भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दे सकता है। अगर अमेरिका भारत को बड़े पैमाने पर तेल और गैस सप्लाई बढ़ाता है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और मध्य पूर्व पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।  

surbhi मई 22, 2026 0
US and Iran officials continue talks amid tensions over uranium stockpile and Strait of Hormuz dispute
US-Iran बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट पर अब भी टकराव

United States और Iran के बीच जारी तनाव के बीच बातचीत में कुछ नरमी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन यूरेनियम भंडार और Strait of Hormuz को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे बने हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हालिया वार्ता को लेकर कहा कि बातचीत में कुछ “पॉजिटिव संकेत” मिले हैं, लेकिन किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। वहीं, ईरान के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच दूरी पहले से कुछ कम हुई है, लेकिन फिलहाल कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है। यूरेनियम भंडार सबसे बड़ी अड़चन अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) भंडार को लेकर बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल नहीं करने देगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान के पास ऐसा यूरेनियम रहे, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सके। उन्होंने कहा, “हम ईरान को यूरेनियम रखने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो उसे नष्ट भी किया जा सकता है।” ईरान का दावा- परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण दूसरी तरफ तेहरान लगातार यह दावा कर रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यूरेनियम मुद्दे पर वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mojtaba Khamenei ने निर्देश दिया है कि समृद्ध यूरेनियम किसी भी स्थिति में ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इस रुख से साफ है कि परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव अभी खत्म होने वाला नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट पर भी टकराव तनाव की दूसरी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने ईरान की उस कोशिश का विरोध किया, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क या नियंत्रण बढ़ाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और इसे दुनिया के सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। यहां किसी तरह का टोल या प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।” वैश्विक बाजार की बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता से तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में वृद्धि और नए सैन्य तनाव की आशंका भी बढ़ सकती है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहना फिलहाल राहत की बात मानी जा रही है। आने वाले दिनों में वार्ता किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Donald Trump speaks about Israel, Benjamin Netanyahu and Iran during a press conference
इजरायल में PM चुनाव लड़ने वाला ट्रंप का दावा, नेतन्याहू और ईरान पर भी दिए बड़े बयान

Donald Trump ने एक बार फिर अपने बयान से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि इजरायल में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और अगर वह चाहें तो वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव भी लड़ सकते हैं। रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “इस समय इजरायल में मेरी लोकप्रियता 99% है। मैं वहां प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ सकता हूं।” “मेरे पास 99% समर्थन है” ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें इजरायल में भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्हें एक सर्वे मिला, जिसमें उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत बताई गई। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “शायद यह काम खत्म करने के बाद मैं इजरायल जाऊं और वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव लड़ूं।” हालांकि ट्रंप ने इस दौरान किसी सर्वे एजेंसी या आधिकारिक पोल का नाम नहीं बताया। ईरान पर हमले को लेकर क्या बोले ट्रंप? ईरान को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल किसी समझौते को मौका देना चाहते हैं और जल्दबाजी में सैन्य कार्रवाई नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, “हमें स्ट्रेट खोलनी होगी और वह तुरंत खुल जाएगी। हम इसे एक मौका देने जा रहे हैं। मुझे कोई जल्दी नहीं है। मैं कम से कम लोगों की मौत देखना चाहता हूं।” ट्रंप का इशारा Strait of Hormuz की ओर माना जा रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद अहम समुद्री मार्ग है। नेतन्याहू को बताया “शानदार इंसान” प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने Benjamin Netanyahu की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। वह वही करेंगे जो मैं कहूंगा। वह एक शानदार व्यक्ति हैं। यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू के साथ इजरायल में सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। ईरान को फिर दी चेतावनी इससे पहले ट्रंप ईरान को लेकर भी सख्त चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो “एक और बड़ा हमला” हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। ट्रंप और नेतन्याहू पर इनाम की चर्चा इसी बीच ईरान में ट्रंप और नेतन्याहू को लेकर एक नए विवाद ने भी ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने एक नए विधेयक का जिक्र किया है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बिल का नाम “इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई” रखा गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस प्रस्ताव में ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या करने वाले व्यक्ति या संगठन को करोड़ों डॉलर का इनाम देने की बात कही गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि और संसदीय प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप के बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।  

surbhi मई 21, 2026 0
US trade representative discusses China, Iran and Strait of Hormuz amid rising global tensions.
US का दावा: ‘ईरान को मदद नहीं देगा चीन’, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने किया बड़ा खुलासा

United States के व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने दावा किया है कि China ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वह Iran की मदद नहीं करेगा। एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का मुख्य फोकस इस बात पर था कि चीन, ईरान के समर्थन में कोई कदम न उठाए। ग्रीर ने कहा, “हमें चीन की ओर से इसकी प्रतिबद्धता मिली है और उन्होंने इसकी पुष्टि भी की है।” होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयान ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने चीन से Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए किसी सैन्य हस्तक्षेप की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि चीन खुद भी इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखना चाहता है, क्योंकि इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ता है। ग्रीर के मुताबिक, “राष्ट्रपति ट्रंप चीन की सैन्य मदद नहीं चाहते। अमेरिका सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चीन, अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों में बाधा न बने।” ट्रंप-शी जिनपिंग बातचीत में टैरिफ मुद्दा नहीं उठा हाल के महीनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद चर्चा में रहे हैं। हालांकि ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनकी और Xi Jinping के बीच हुई बातचीत में टैरिफ का मुद्दा नहीं उठा। ग्रीर ने इस पर कहा कि व्यापार वार्ता जरूर हुई थी, लेकिन वह शीर्ष नेताओं के स्तर पर नहीं थी। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से उन्होंने, वित्त मंत्री Scott Bessent और उनकी टीम ने चीनी अधिकारियों के साथ टैरिफ समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार ग्रीर ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक नियमों और विवादों को व्यवस्थित करने के लिए ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन ने कई अमेरिकी मीट निर्यात इकाइयों से आयात फिर शुरू करने, कुछ बायोटेक मामलों की समीक्षा करने और 200 Boeing विमानों की खरीद पर सहमति जताई है। हालांकि चीन की ओर से अब तक इन समझौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर ग्रीर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई “ठोस कदम” पहले ही शुरू हो चुके हैं और सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-चीन संबंध आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं।  

surbhi मई 18, 2026 0
Map showing submarine internet cables near Strait of Hormuz amid rising Iran digital control concerns.
ईरान का नया ‘डिजिटल हथियार’  होर्मुज की इंटरनेट केबलों पर नियंत्रण की कोशिश से दुनिया में बढ़ी चिंता

Iran अब केवल तेल और समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट और डेटा केबलों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने के संकेत दिए हैं। इस कदम ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों पर किसी तरह का असर पड़ा तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन कारोबार और वित्तीय लेनदेन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर शुल्क लगाने की तैयारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों को भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिए कि समुद्री इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाया जा सकता है। डिजिटल युद्ध की तरफ बढ़ रहा ईरान? विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की पश्चिम एशिया विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। समुद्र के नीचे बिछी सबसी केबलें वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। भारत समेत एशियाई देशों पर पड़ सकता है असर रिपोर्ट्स के अनुसार, Strait of Hormuz एशिया और यूरोप के बीच एक अहम डिजिटल कॉरिडोर बन चुका है। अगर यहां इंटरनेट केबलों में बाधा आती है तो भारत की IT और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात से जुड़े डिजिटल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क और शेयर बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इंटरनेट स्पीड कम होने से कहीं बड़ा खतरा वित्तीय लेनदेन और वैश्विक डेटा ट्रैफिक में रुकावट का हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा ईरान ईरानी मीडिया का दावा है कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत तैयार की जा रही है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी तटीय देश अपनी समुद्री सीमा में आने वाली केबलों पर कुछ नियम लागू कर सकता है। ईरान स्वेज नहर का उदाहरण देकर यह तर्क दे रहा है कि रणनीतिक जलमार्गों से आर्थिक लाभ कमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की कानूनी स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। पहले भी निशाने पर आ चुकी हैं समुद्री केबलें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी की टेलीग्राफ केबल काट दी थी। हाल ही में 2024 में Houthi Movement से जुड़े हमलों में लाल सागर की तीन इंटरनेट केबल क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित हुआ था। हालांकि आधुनिक नेटवर्क में वैकल्पिक रूट मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर किसी केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump issues strong warning to Iran amid rising Middle East tensions and nuclear dispute.
‘घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी’, ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना   ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump speaks about Pakistan’s role in the Iran ceasefire during media interaction aboard Air Force One
‘पाकिस्तान पर एहसान किया’, ईरान सीजफायर को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान, शहबाज सरकार के लिए नए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ हुए संघर्षविराम को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। चीन यात्रा से लौटते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने युद्धविराम कराकर “पाकिस्तान पर एहसान किया” है। ट्रंप के इस बयान के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सीजफायर में पाकिस्तान की अहम भूमिका का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और Iran के बीच तनाव कम कराने में पाकिस्तान ने बैकचैनल संपर्कों के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद ने ईरान के पांच सूत्रीय प्रस्ताव को वॉशिंगटन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद युद्धविराम की दिशा में प्रगति हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय मध्यस्थ और संवाद मंच के रूप में पेश करने की कोशिश की है। शहबाज शरीफ और इशाक डार की तारीफ ट्रंप ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar की भी तारीफ की। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह संकेत भी दिया कि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में पाकिस्तान से लगातार सहयोग की उम्मीद करता है। होर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए यह संघर्षविराम सिर्फ कूटनीतिक सफलता नहीं बल्कि आर्थिक जरूरत भी था। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित होने का खतरा था, जिसका असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता था। युद्धविराम के बाद पाकिस्तान को अपने ऊर्जा मार्ग सुरक्षित रखने में राहत मिली है। ट्रंप के बयान के क्या मायने? ट्रंप का “पाकिस्तान पर एहसान” वाला बयान पाकिस्तान के लिए मिश्रित संकेत माना जा रहा है। एक ओर इससे इस्लामाबाद की कूटनीतिक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत भी दिया है कि पाकिस्तान को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर सीमा पार आतंकवाद, पर ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अफगान सीमा और आतंकवाद पर भी इशारा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने हालिया सुरक्षा घटनाओं का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को अपनी सीमाओं पर सुरक्षा मजबूत करने का संदेश दिया। हाल ही में Bannu में पुलिस चौकी पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल मध्य पूर्व में जारी तनाव, होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान संबंधों के बीच पाकिस्तान की भूमिका ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा दे दी है। फिलहाल अमेरिकी और पाकिस्तानी सरकारों की ओर से बैकचैनल कूटनीति के कई पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Donald Trump speaks after China visit amid reports of possible US action against Iran
चीन दौरे से लौटते ही ईरान पर फिर सख्त हुए ट्रंप, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0’ की तैयारी का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के चीन दौरे से लौटने के बाद एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका ईरान पर दोबारा बड़े हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मुख्यालय Pentagon संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। ‘शांति प्रस्ताव पसंद नहीं आया’ रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने खारिज कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मैंने उस प्रस्ताव को देखा और उसकी पहली लाइन ही मुझे पसंद नहीं आई, इसलिए मैंने उसे फेंक दिया।” ट्रंप के इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0’ की तैयारी? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले संघर्ष के दौरान रोके गए “Operation Epic Fury” को नए रूप में फिर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर “Operation Epic Fury 2.0” नाम की किसी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास और सैन्य तैयारियों में लगी हुई हैं। अगले सप्ताह हमले की आशंका? मध्य पूर्व के कुछ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि सैन्य तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं और जरूरत पड़ने पर अगले सप्ताह की शुरुआत में कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र तनाव के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कई देश चाहते हैं कि वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव पिछले महीने संघर्षविराम के बाद कुछ समय के लिए हालात शांत हुए थे, लेकिन अब दोनों पक्षों के बयानों और सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा, जबकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फिर से सक्रिय कर दिया है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Indian cargo vessel Haji Ali attacked near Oman coast amid rising tensions around the Strait of Hormuz.
होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला, भारत ने कहा- व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना अस्वीकार्य

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले व्यावसायिक जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला हुआ है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अस्वीकार्य” बताया है। Ministry of External Affairs ने गुरुवार को कहा कि भारतीय जहाज पर हमला व्यावसायिक नौवहन और आम नाविकों की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर घटना है। ओमान के जलक्षेत्र में हुआ हमला जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal के मुताबिक, ‘हाजी अली’ नाम का यह पारंपरिक लकड़ी का पाल वाला भारतीय जहाज सोमालिया से Sharjah जा रहा था। बताया गया कि 13 मई 2026 की सुबह ओमान के जलक्षेत्र में जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई और बाद में वह समुद्र में डूब गया। सभी 14 चालक दल सदस्य सुरक्षित राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल सदस्यों को Oman Coast Guard ने सुरक्षित बचा लिया। सभी लोगों को ओमान के दिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी हालत सुरक्षित बताई जा रही है। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि व्यावसायिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को लगातार निशाना बनाया जाना पूरी तरह गलत है। भारत ने कहा कि समुद्री व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में बाधा डालने वाली किसी भी गतिविधि से बचा जाना चाहिए। हमलावरों की पहचान नहीं फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया। घटना की जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज स्ट्रेट Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता माना जाता है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Oil refinery and fuel price board amid rising global crude oil prices due to Middle East tensions
मिडिल ईस्ट संकट का असर: पाकिस्तान से अमेरिका तक तेल के दाम में भारी उछाल, कई देशों में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी

Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और Iran, United States तथा Israel के बीच जारी टकराव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ रहा है। कई देशों में तेल की कीमतें आसमान पर हालिया आंकड़ों के अनुसार कई देशों में ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी Malaysia – 56% Pakistan – 55% United Arab Emirates – 52% United States – 45% Canada – 32% China – 22% United Kingdom – 19% रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के लगभग 85 देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। कई देशों में अभी और संशोधन बाकी हैं, इसलिए आने वाले हफ्तों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। पाकिस्तान और मलेशिया में सबसे ज्यादा असर विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों की अर्थव्यवस्था आयातित ईंधन पर काफी निर्भर है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने का असर वहां सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। इन देशों में ट्रांसपोर्ट, बिजली और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। अमेरिका और यूरोप में भी महंगाई का खतरा अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में करीब 45% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहा तो ऊर्जा संकट और महंगाई दोनों बढ़ सकते हैं। United Kingdom और यूरोप के अन्य देशों में भी तेल की बढ़ती कीमतें आर्थिक चिंता का बड़ा कारण बन रही हैं। भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर दूसरी ओर India में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। Delhi समेत कई शहरों में पिछले करीब डेढ़ साल से ईंधन की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। आखिरी बड़ा बदलाव अक्टूबर 2024 में देखा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान भारत में पेट्रोल की कीमत में केवल मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई है। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है चिंता ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार में और अस्थिरता आ सकती है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Donald Trump speaking to media amid rising US-Iran tensions and military conflict debate
“ये अमेरिकी कायर हैं...”, ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, आलोचकों पर साधा निशाना

Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वे “देशद्रोही” मानसिकता दिखा रहे हैं। ट्रंप ने कहा: “ये अमेरिकी कायर हैं जो हमारे देश के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान ईरान को “झूठी उम्मीद” देते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। “ईरान की नेवी और एयर फोर्स खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक: ईरान के 159 नौसैनिक जहाज अब नष्ट हो चुके हैं ईरानी एयर फोर्स लगभग खत्म हो गई है सैन्य तकनीक और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि ईरान अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल “लूजर और एहसान फरामोश लोग” ही अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को घरेलू आलोचकों और विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी किया बचाव इस बीच Pete Hegseth ने भी ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति का बचाव किया। सीनेट एप्रोप्रिएशन सबकमेटी के सामने पेश होते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद अमेरिका के पास अभी भी “सभी कार्ड” मौजूद हैं। इंडो-पैसिफिक सहयोगियों को संदेश पीट हेगसेथ ने Dan Caine के साथ सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बढ़ते तनाव से वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Donald Trump and Iranian leaders exchange sharp warnings amid rising US-Iran tensions over peace proposal talks.
ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को बताया ‘कचरा’, तेहरान बोला- हमला हुआ तो करारा जवाब मिलेगा

Iran और United States के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो उसके सशस्त्र बल “हमलावर को सबक सिखाने” के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप ने क्या कहा? वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को “अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा: “यह युद्धविराम गंभीर लाइफ सपोर्ट पर है।” ट्रंप ने हालात की तुलना ऐसे मरीज से की जिसकी “जीवित रहने की संभावना सिर्फ एक प्रतिशत” बची हो। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने दी जवाबी चेतावनी ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि ईरान किसी भी संघर्ष के लिए तैयार है। उन्होंने X पर लिखा: “हमारे सशस्त्र बल किसी भी हमले का जवाब देने और हमलावर को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “खराब रणनीति और गलत फैसलों का परिणाम हमेशा बुरा ही होता है।” ईरान के प्रस्ताव में क्या था? ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, तेहरान ने जो प्रस्ताव दिया था उसमें: ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने पूरे क्षेत्र में सैन्य अभियान रोकने लेबनान में Hezbollah को निशाना बनाने वाले हमलों पर रोक विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें शामिल थीं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा: “हमने किसी तरह की रियायत नहीं मांगी, सिर्फ ईरान के वैध अधिकारों की मांग की है।” होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा दबाव तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। Strait of Hormuz में पहले से चल रही रुकावटों के कारण तेल बाजार दबाव में हैं। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पेट्रोल-डीजल महंगा होना खाद्य और परिवहन लागत बढ़ना जैसे असर देखने को मिल सकते हैं। क्यों बढ़ रहा है तनाव? विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद: ईरान के परमाणु कार्यक्रम अमेरिकी प्रतिबंध मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी इजरायल और हिजबुल्ला को लेकर टकराव को लेकर है। हालिया बयानबाजी से साफ है कि फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Rising US-Iran tensions could disrupt global food supply, fuel prices, fertilizers and shipping routes worldwide
अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ तो सिर्फ तेल नहीं, खाने पर भी पड़ेगा असर

अमेरिका और Iran के बीच बढ़ता तनाव अगर खुले युद्ध में बदलता है, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया की खाद्य सप्लाई, खेती-किसानी और आम लोगों की थाली तक पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा साबित हो सकता है, क्योंकि इस बार मामला दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा सप्लाई रूट्स में से एक Strait of Hormuz से जुड़ा है। दुनिया का बड़ा हिस्सा यहीं से तेल और गैस प्राप्त करता है। कैसे बढ़ेगा खाद्य संकट? आधुनिक खेती पूरी तरह तीन चीजों पर निर्भर है: ईंधन (डीजल, पेट्रोल) उर्वरक (फर्टिलाइजर) ट्रांसपोर्ट सप्लाई चेन अगर युद्ध के कारण तेल सप्लाई बाधित होती है, तो: ट्रैक्टर और सिंचाई की लागत बढ़ेगी खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों की लागत कई गुना बढ़ जाएगी माल ढुलाई महंगी होगी खेत से मंडी तक अनाज पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा यानी खेती से लेकर खाने की प्लेट तक हर चरण प्रभावित होगा। खाद का संकट क्यों सबसे खतरनाक? Saudi Aramco के CEO Amin Nasser ने चेतावनी दी है कि दुनिया पहले से ही “एनर्जी सप्लाई शॉक” का सामना कर रही है। अगर हालात बिगड़े, तो असर कई साल तक रह सकता है। फर्टिलाइजर उद्योग प्राकृतिक गैस और तेल पर काफी निर्भर करता है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने का मतलब है: यूरिया और अन्य खाद की कीमतों में भारी उछाल गरीब देशों में खाद की कमी अगली फसलों की पैदावार में गिरावट यही वजह है कि विशेषज्ञ 2027 तक असर बने रहने की आशंका जता रहे हैं। गरीब देशों पर सबसे ज्यादा असर United Nations Office for Project Services ने भी चेतावनी दी है कि अगर तनाव लंबा चला, तो करोड़ों लोग खाद्य संकट की चपेट में आ सकते हैं। जो देश खाद्यान्न आयात पर निर्भर हैं, वहां हालात सबसे खराब हो सकते हैं, क्योंकि: युद्ध के समय देश अनाज निर्यात रोक सकते हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं-चावल की कमी हो सकती है शिपिंग और बीमा खर्च कई गुना बढ़ जाएगा ऐसी स्थिति में अफ्रीका, दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के गरीब देशों में भुखमरी का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। हॉर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम? Strait of Hormuz दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट्स में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का मतलब: तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होना शिपिंग कंपनियों का जोखिम बढ़ना वैश्विक सप्लाई चेन टूटना अगर यह रास्ता असुरक्षित होता है, तो सिर्फ तेल ही नहीं, खाद्यान्न और जरूरी सामान की वैश्विक ढुलाई भी प्रभावित होगी। आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? अगर युद्ध लंबा चला, तो दुनिया भर में: पेट्रोल-डीजल महंगा LPG और गैस सिलेंडर महंगे सब्जियां और अनाज महंगे दूध, अंडे और खाने की चीजों की कमी ट्रांसपोर्ट और बिजली खर्च में बढ़ोतरी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। क्या दुनिया तैयार है? विशेषज्ञ मानते हैं कि कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक सप्लाई चेन पहले ही कमजोर हो चुकी है। ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक और बड़े झटके में धकेल सकता है। सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर खाद और ईंधन की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित हुई, तो इसका असर सिर्फ कुछ महीनों का नहीं बल्कि कई सालों तक दिखाई दे सकता है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Donald Trump reacts strongly to Iran peace proposal over Hormuz Strait and compensation demands
ईरान की शर्तों पर भड़के ट्रंप, मुआवजा और होर्मुज कंट्रोल बना बड़ा विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की ओर से भेजे गए नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह “अनएक्सेप्टेबल” यानी अस्वीकार्य करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ करीब 10 हफ्तों से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी थीं, जिनमें युद्ध के नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देना शामिल है। पाकिस्तान के जरिए भेजा गया प्रस्ताव रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया। प्रस्ताव में कहा गया कि अगर अमेरिका युद्ध रोकना चाहता है तो उसे पहले तत्काल संघर्षविराम लागू करना होगा और भविष्य में किसी भी नए हमले की गारंटी देनी होगी। ईरान ने यह भी मांग की कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई की जाए। इसके साथ ही उसने Strait of Hormuz पर अपनी संप्रभुता को औपचारिक रूप से स्वीकार करने की बात कही। तेल प्रतिबंध हटाने की मांग ईरान ने प्रस्ताव में अमेरिकी वित्त विभाग के Office of Foreign Assets Control यानी OFAC द्वारा लगाए गए तेल निर्यात प्रतिबंधों में अस्थायी राहत की मांग भी रखी। तेहरान चाहता है कि कम से कम 30 दिनों के लिए उसके तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं और समुद्री घेराबंदी समाप्त की जाए, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके। होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मान लेता है, तो इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का प्रबंधन उसके नियंत्रण में रहेगा। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह कौन-सी शर्तें हैं जिनके बदले वह क्षेत्रीय तनाव कम करने को तैयार होगा। परमाणु कार्यक्रम पर भी तनातनी The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि वह सीमित समय के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकने को तैयार हो सकता है, लेकिन अमेरिका के 20 साल वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। तेहरान ने अपने परमाणु ठिकानों को खत्म करने की मांग को भी साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इससे साफ है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी गहरा मतभेद बना हुआ है। ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव? अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान की शर्तें अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। उनका मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को ज्यादा नियंत्रण देना और मुआवजे की मांग मानना अमेरिकी रणनीतिक हितों के खिलाफ होगा।  

surbhi मई 11, 2026 0
Donald Trump speaks to reporters about awaiting Iran’s response on a possible ceasefire proposal
ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे ट्रंप, बोले- आज रात मिल सकता है लेटर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह तेहरान की ओर से युद्ध रोकने के अमेरिकी प्रस्ताव पर जवाब मिलने का इंतजार कर रहे हैं. ट्रंप ने उम्मीद जताई कि ईरान की तरफ से “आज रात” कोई आधिकारिक पत्र भेजा जा सकता है. व्हाइट हाउस से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हालात को लेकर जल्द तस्वीर साफ हो जाएगी. हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या ईरान जानबूझकर बातचीत की प्रक्रिया को धीमा कर रहा है. “हमें जल्द पता चल जाएगा” : ट्रंप सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान बातचीत को लंबा खींच रहा है, तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता, लेकिन हमें जल्द ही पता चल जाएगा.” ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान की ओर से जल्द आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलेगी और संभवतः “आज रात” तक एक लेटर आ सकता है. फिर शुरू हो सकता है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा के लिए “Project Freedom” नामक ऑपरेशन दोबारा शुरू कर सकता है. उन्होंने कहा कि यह मिशन समुद्री जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाने के लिए चलाया जाता था. ट्रंप ने कहा, “अगर हालात नहीं सुधरते हैं तो हम Project Freedom पर वापस जा सकते हैं, लेकिन इस बार यह Project Freedom Plus होगा.” हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि “Plus” से उनका क्या मतलब है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें अतिरिक्त सैन्य और निगरानी उपाय शामिल हो सकते हैं. समझौते को लेकर “बड़ी प्रगति” का दावा ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत में “बड़ी प्रगति” हुई है. उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ कदम अस्थायी रूप से रोके गए हैं ताकि यह देखा जा सके कि क्या दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते तक पहुंच सकते हैं. उनके मुताबिक, अगर सहमति बनती है तो समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर भी किए जा सकते हैं. ईरान की ओर से सैन्य चेतावनी इधर, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अली खेजरियन ने अमेरिका को चेतावनी दी है. ईरानी स्टेट टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां बढ़ती हैं, तो ईरान “सैन्य जवाब” दे सकता है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका को अपने युद्धपोतों के साथ अतिरिक्त एस्कॉर्ट रखने चाहिए ताकि किसी हमले की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को बचाया जा सके. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Donald Trump warns Iran as tensions escalate near the Strait of Hormuz and US warships face threats
होर्मुज में तनाव बढ़ा, ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी नौसेना के तीन युद्धपोतों पर हमला किया गया. हालांकि उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाज सुरक्षित रहे, लेकिन जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया. ट्रंप का दावा- अमेरिकी जहाजों पर हुआ हमला ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना के तीन आधुनिक डेस्ट्रॉयर युद्धपोत सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. उनके मुताबिक, अमेरिकी सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया. हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि हमला किस प्रकार का था और इसमें कितना नुकसान हुआ. अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से भी इस घटना को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है. ईरान को दी बड़ी धमकी ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान जल्द किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो अमेरिका भविष्य में और ज्यादा कठोर तथा हिंसक कार्रवाई कर सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब भी डील के लिए तैयार है, लेकिन ईरान को तेजी से फैसला लेना होगा. ट्रंप के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है. संघर्ष विराम के बाद फिर बढ़ा तनाव यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 8 अप्रैल को लागू संघर्ष विराम के बाद क्षेत्र में हालात कुछ शांत माने जा रहे थे. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव कुछ कम हुआ था, लेकिन अब फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. ईरान की सेना ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद एक ईरानी तेल टैंकर और दूसरे जहाज को निशाना बनाया. ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई संघर्ष विराम का उल्लंघन है. ईरान का पलटवार का दावा ईरानी सेना के संयुक्त कमांड ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से और चाबहार बंदरगाह के दक्षिण में मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया. इसके अलावा ईरान ने अमेरिका पर किश्म द्वीप और बंदर खमीर व सीरिक जैसे तटीय इलाकों में हवाई हमले करने का भी आरोप लगाया है. ईरान का कहना है कि इन हमलों में नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा. परमाणु विवाद बना बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह तनाव परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से भी जुड़ा हुआ है. वॉशिंगटन अभी भी ईरान से अपने प्रस्ताव पर जवाब का इंतजार कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर नई शर्तों को स्वीकार करे, जबकि तेहरान कई मुद्दों पर अब भी सख्त रुख अपनाए हुए है. वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है. यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करता है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच हालात और बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Donald Trump speaking on Middle East tensions and warning Iran over the Strait of Hormuz crisis
ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- समझौता नहीं किया तो होगी भीषण बमबारी

Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो उस पर पहले से ज्यादा तीव्र और ताकतवर बमबारी की जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यदि ईरान तय शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को समाप्त कर दिया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को ईरान सहित सभी देशों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. ट्रंप बोले- नहीं माने तो बरसेंगे बम ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ज्यादा आक्रामक होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देगा. उन्होंने लिखा कि “अगर ईरान सहमत नहीं होता, तो बमबारी पहले से कहीं अधिक ताकतवर होगी.” ट्रंप के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने भी दी चेतावनी ट्रंप का यह बयान ईरानी संसद अध्यक्ष एमबी गालिबफ की टिप्पणी के बाद आया है. गालिबफ ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर “नया समीकरण” तैयार हो रहा है और अमेरिका की नाकाबंदी नीति उसके लिए भारी साबित होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने युद्धविराम का उल्लंघन कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है. ईरान ने आरोप लगाया कि नाकाबंदी की वजह से जहाजों, तेल और गैस आपूर्ति की सुरक्षा प्रभावित हुई है. प्रोजेक्ट फ्रीडम अस्थायी रूप से रोका गया इस बीच ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए शुरू किये गये “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच “पूर्ण और अंतिम समझौते” को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध और कूटनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह फैसला लिया गया. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री नाकाबंदी अभी भी जारी रहेगी. पाकिस्तान ने ट्रंप को कहा धन्यवाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रंप का यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा. शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा कूटनीति और संवाद के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा. होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Cargo ship attacked by small boats in Strait of Hormuz raising global maritime security concerns
Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमला, छोटी नौकाओं से टारगेट– बढ़ा वैश्विक तनाव

मस्कट/तेहरान, 4 मई: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल Strait of Hormuz में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी United Kingdom Maritime Trade Operations ने जानकारी दी है कि ईरान के सिरिक तट के पास एक मालवाहक जहाज पर कई छोटी नौकाओं के जरिए हमला किया गया। कैसे हुआ हमला? रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने छोटी-छोटी तेज गति वाली नौकाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्गो शिप को निशाना बनाया। इस तरह के हमले आमतौर पर ‘स्वार्म टैक्टिक्स’ के रूप में देखे जाते हैं, जिसमें कई नावें एक साथ हमला कर जहाज को घेर लेती हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन था और इसका मकसद क्या था। चालक दल सुरक्षित, लेकिन खतरा बरकरार सबसे राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। United Kingdom Maritime Trade Operations ने क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और सावधानीपूर्वक मार्ग तय करने की सलाह दी है। ईरान का दावा– ‘हमारा नियंत्रण कायम’ घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि Strait of Hormuz पर उनका नियंत्रण पूरी तरह बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जो जहाज अमेरिका या इजराइल से जुड़े नहीं हैं, वे निर्धारित शुल्क देकर सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका-ईरान टकराव की पृष्ठभूमि Donald Trump प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी गई है। अमेरिकी नौसेना इस इलाके में सक्रिय है और हर आने-जाने वाले जहाज पर नजर रख रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 30 दिनों के भीतर विवाद सुलझाने की बात कही गई है। हालांकि Donald Trump ने इस प्रस्ताव को लेकर संदेह जताया है और किसी ठोस समझौते की संभावना को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। क्यों बेहद अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा चिंता पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले, जब्ती और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा कमजोर हो रही है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Brent crude oil prices surge above $120 amid Trump Iran sanctions and Hormuz tensions
ट्रंप की सख्ती से कच्चे तेल में लगी आग, ब्रेंट क्रूड $120 के पार, वैश्विक बाजार में हड़कंप

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और ब्रेंट क्रूड ऑयल $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस अचानक बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का कड़ा रुख बताया जा रहा है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और समुद्री नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी। ईरान पर सख्ती और बढ़ता तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों पर परमाणु समझौते को स्वीकार नहीं करता, तब तक Strait of Hormuz पर नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी जारी रहेगी। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यह रणनीति सैन्य कार्रवाई की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो आगे सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है दुनिया के लिए अहम? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। जब इस मार्ग में बाधा आती है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है और तेल की उपलब्धता घट जाती है। परिणामस्वरूप कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है, जिसका असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल इस स्थिति को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी दी है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Jeffrey Sachs ने कहा है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल यह उम्मीद लगाए बैठा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि सप्लाई बाधित रही तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। आम जनता पर सीधा असर तेल कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे परिवहन, खाद्य वस्तुएं और अन्य जरूरी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो महंगाई एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।  

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
Donald Trump and Iranian leader amid rising tensions over nuclear talks and Strait of Hormuz
युद्ध रोकने को ईरान का नया प्रस्ताव, लेकिन ट्रंप खुश नहीं; परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

Iran ने अमेरिका के साथ जारी तनाव खत्म करने के लिए एक नया चरणबद्ध प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump इससे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। इससे युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है। ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया? ईरान की तीन-स्तरीय योजना में शामिल हैं: पहले अमेरिका-इज़राइल के साथ युद्धविराम फिर Strait of Hormuz में नौवहन बहाल करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना उसके बाद परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर बातचीत तेहरान चाहता है कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा युद्ध खत्म होने और समुद्री विवाद सुलझने के बाद हो। अमेरिका क्यों नाराज? वॉशिंगटन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अलग नहीं किया जा सकता। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि किसी भी समझौते की शुरुआत ही परमाणु हथियारों के मुद्दे से हो। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा जो ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता दे। होर्मुज बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। यहां जारी तनाव से वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। कूटनीति की राह कठिन प्रस्ताव पर गतिरोध के कारण इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता भी टल गई। इस बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं, जिससे निकट भविष्य में समझौते की संभावना कमजोर दिख रही है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Russia defends Iran at UN Security Council amid rising tensions over Strait of Hormuz
UN में रूस ने ईरान का किया बचाव, होर्मुज पर अमेरिका-पश्चिम को घेरा

Russia ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर Iran का खुलकर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, पर तीखा हमला बोला और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कदमों को जायज़ ठहराया। रूस ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि Vasily Nebenzya ने कहा कि युद्ध की स्थिति में किसी भी तटीय देश को अपनी सुरक्षा के लिए समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सीमित करने का अधिकार है। उनका कहना था कि ईरान पर पूरा दोष मढ़ना गलत है, जबकि वह खुद बाहरी दबाव और हमलों का सामना कर रहा है। पश्चिमी देशों पर 'समुद्री डाकू' वाला हमला नेबेंज्या ने पश्चिमी देशों की तुलना समुद्री डाकुओं से करते हुए कहा कि वे अपने "गैरकानूनी" कदमों को एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की आड़ में छिपाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश खुलेआम समुद्र में लूटपाट जैसी कार्रवाइयों का समर्थन कर रहे हैं। पहले भी रूस-चीन ने किया था वीटो इस महीने की शुरुआत में China और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना था। पुतिन ने भी जताया समर्थन इसी दिन रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और ईरान के प्रति अपना समर्थन दोहराया। क्यों अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0