Suvendu Adhikari

Former West Bengal minister Partha Chatterjee speaking on TMC leadership and Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने से शुरू हुआ तृणमूल का पतन: पार्थ चटर्जी का बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच पार्टी के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संगठनात्मक कमजोर होने की शुरुआत उस समय हुई, जब अभिषेक बनर्जी को संगठन में प्रमुखता दी जाने लगी। "अभिषेक को आगे बढ़ाने की कीमत पार्टी ने चुकाई" एक निजी चैनल से बातचीत में पार्थ चटर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को स्थापित करने की प्रक्रिया में कई वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की गई। उनका आरोप है कि इसी वजह से संगठन कमजोर होता गया और अंततः इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा।उन्होंने कहा कि पार्टी धीरे-धीरे आम लोगों से दूर होती चली गई, जिसका परिणाम वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के रूप में सामने आया। शुभेंदु अधिकारी को नहीं मिला उचित सम्मान पार्थ चटर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने के दौरान शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उनके अनुसार, वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा ने संगठन के भीतर असंतोष बढ़ाया और इसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ा। "हर पार्टी छोड़ने वाला गद्दार नहीं" पूर्व मंत्री ने कहा कि तृणमूल छोड़ने वाले सभी नेताओं को गद्दार कहना उचित नहीं है। उन्होंने ममता बनर्जी के हालिया बयान का जिक्र करते हुए तंज कसते हुए कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी को "बाघ" कहा जा रहा है, तो बाकी नेताओं को क्या कहा जाएगा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "अगर अभिषेक बाघ हैं, तो फिर बाघ के अत्याचार से बाकी बिल्लियां भाग गईं।" पार्टी के भीतर बढ़ सकती है सियासी हलचल पार्थ चटर्जी के इस बयान को तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से उनके आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Realme China Exit
OnePlus के बाद Realme का बड़ा फैसला, चीन से समेटेगी कारोबार; वैश्विक बाजारों पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन ब्रांड Realme ने अपनी वैश्विक रणनीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी अब अपने घरेलू बाजार चीन से स्मार्टफोन कारोबार चरणबद्ध तरीके से समेटने की तैयारी कर रही है और भविष्य में यूरोप समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर अधिक ध्यान देगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में OnePlus ने भी अपनी वैश्विक रणनीति में बड़े बदलाव की घोषणा की थी।   क्यों लिया गया यह फैसला?   रिपोर्ट के मुताबिक, Realme की मूल कंपनी Oppo अपने विभिन्न ब्रांडों के पुनर्गठन पर काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत Realme चीन में नए स्मार्टफोन लॉन्च कम करेगी और वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी। कंपनी खासतौर पर यूरोप के नॉर्डिक देशों में विस्तार की योजना बना रही है।   भारत पर नहीं पड़ेगा असर   Realme ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का भारत में कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत कंपनी के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है और यहां नए स्मार्टफोन लॉन्च, बिक्री, सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट पहले की तरह जारी रहेंगे। कंपनी ने हाल ही में भारतीय बाजार के लिए नए स्मार्टफोन और रिटेल विस्तार की योजनाओं का भी ऐलान किया है।   सॉफ्टवेयर रणनीति में भी बदलाव   कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में Realme के स्मार्टफोन ColorOS आधारित सॉफ्टवेयर पर चलेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य सॉफ्टवेयर अपडेट प्रक्रिया को अधिक तेज और बेहतर बनाना बताया गया है। हालांकि, मौजूदा ग्राहकों को नियमित अपडेट और सपोर्ट मिलता रहेगा।   बाजार की नजर अगले कदम पर   विशेषज्ञों का मानना है कि Oppo समूह की यह रणनीति वैश्विक स्तर पर ब्रांडों के बीच जिम्मेदारियों को नए सिरे से तय करने की दिशा में बड़ा कदम है। फिलहाल Realme का फोकस चीन की बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर रहेगा, जबकि भारत कंपनी के लिए प्रमुख रणनीतिक बाजार बना रहेगा।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Entrance to the historic Gauripur Jama Masjid inside Kolkata's Netaji Subhas Chandra Bose International Airport premises, where temporary restrictions have been imposed amid renovation and security measures.
कोलकाता एयरपोर्ट मस्जिद विवाद: बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक का शुभेंदु अधिकारी ने किया समर्थन, बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि

कोलकाता: कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NSCBI Airport) परिसर स्थित ऐतिहासिक गौरीपुर जामा मस्जिद में बाहरी लोगों के प्रवेश और सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने एयरपोर्ट प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा किसी भी अन्य विषय से अधिक महत्वपूर्ण है। शुभेंदु अधिकारी बोले- संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सर्वोपरि पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलुक में भाजपा की संगठनात्मक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जिन स्थानों का सामरिक और सुरक्षा की दृष्टि से विशेष महत्व होता है, वहां बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोलकाता हवाई अड्डा संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती। धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं: अधिकारी शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह फैसला किसी की धार्मिक स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी समुदायों को कानून के दायरे में रहकर अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की पूरी स्वतंत्रता है। बकरीद और मुहर्रम जैसे आयोजनों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नियमों का पालन होने पर किसी तरह की समस्या नहीं होती। क्या है पूरा मामला? एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, हवाई अड्डा परिसर के भीतर रनवे के निकट स्थित करीब 136 वर्ष पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद में मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। इसी कारण शनिवार से तीन दिनों के लिए मस्जिद में सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक लगाई गई है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। भाजपा विधायक ने उठाए सुरक्षा के सवाल दमदम उत्तर से भाजपा विधायक सौरभ सिकदर ने भी इस मुद्दे पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि एयरपोर्ट परिसर उच्च सुरक्षा क्षेत्र है, जहां प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक पहचान जरूरी होती है। उन्होंने दावा किया कि नमाज के लिए आने वाले बाहरी लोगों की सुरक्षा जांच पर्याप्त नहीं होती। सिकदर ने यह भी कहा कि मस्जिद की मौजूदा स्थिति के कारण एयरपोर्ट के दोनों रनवे के विस्तार और पूर्ण उपयोग में भी बाधा आती है। मस्जिद समिति ने जताई आपत्ति मस्जिद समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने प्रवेश पास रोके जाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट प्रशासन के साथ बातचीत जारी थी, ऐसे में नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने मस्जिद को 135 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए कहा कि समिति सभी पक्षों के साथ बातचीत के जरिए समाधान चाहती है। सुरक्षा बनाम धार्मिक व्यवस्था पर बहस कोलकाता एयरपोर्ट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर अब सुरक्षा और धार्मिक गतिविधियों के बीच संतुलन का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां एयरपोर्ट प्रशासन और भाजपा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं, वहीं मस्जिद समिति बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग कर रही है। फिलहाल मरम्मत कार्य पूरा होने तक प्रतिबंध जारी रहेगा।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Annapurna Bhandar Yojana
टीएमसी ने अन्नपूर्णा भंडार योजना लाभार्थियों के नाम हटाने को बताया 'पहला घोटाला'

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम लाभार्थियों की सूची से हटाकर अपना पहला बड़ा घोटाला किया है। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केवल अपात्र और फर्जी आवेदनों को ही रद्द किया गया है।   टीएमसी ने उठाए लाभार्थियों की संख्या पर सवाल साकेत गोखले ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत करीब 2.4 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था, जबकि नई अन्नपूर्णा भंडार योजना में लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.3 करोड़ रह गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 1.1 करोड़ महिलाओं के नाम क्यों हटाए गए। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से महिलाओं को योजना से बाहर किया है।   सरकार का दावा- फर्जी आवेदन हटाए गए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार को योजना के लिए करीब 1.6 करोड़ आवेदन मिले थे। विस्तृत जांच के बाद 27 लाख आवेदन रद्द किए गए, जिनमें मृत लाभार्थियों के नाम, डुप्लीकेट बैंक खाते, मतदाता सूची से हटे नाम और नागरिकता या निवास से जुड़ी विसंगतियां पाई गईं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र महिलाओं के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पहली किस्त भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और लगभग 1.1 करोड़ खातों में राशि जमा कराई जा चुकी है।   सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल पात्र महिलाओं तक पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना है, जबकि टीएमसी इसे महिलाओं के अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा सरकार को लगातार घेर रही है। अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी टकराव फिलहाल और तेज होने के आसार हैं।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Suvendu Adhikari
अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत, 1.10 करोड़ महिलाओं के खातों में पहुंचे 3,000 रुपये

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत कर दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की 1 करोड़ 10 लाख पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3,000-3,000 रुपये की पहली किस्त डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।   1.60 करोड़ आवेदन आए, 27 लाख आवेदन किए गए खारिज मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए कुल 1.60 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से गहन जांच के बाद 27 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों में नागरिकता या स्थायी निवास को लेकर संदेह था, उन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया। शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भारत और पश्चिम बंगाल के करदाताओं के पैसे केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए हैं और इन्हें गैर-भारतीयों को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता और पात्रता का पूरा ध्यान रखा गया है।   लक्ष्मी भंडार योजना की जगह लेगी नई योजना अन्नपूर्णा भंडार योजना ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना का स्थान लिया है। पहले लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को 1,700 रुपये की सहायता मिलती थी। नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे उन्हें घरेलू खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में अधिक मदद मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Suvendu Adikari
धर्मांतरण रोकने के लिए नया कानून लाएगी बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ने किया बड़ा ऐलान

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कथित जबरन धर्मांतरण और तथाकथित "लव जिहाद" के मामलों को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार जल्द ही इस संबंध में नया विधेयक लाने की दिशा में काम करेगी। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।   क्या होगा नए कानून का उद्देश्य?   मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का धोखे, दबाव, लालच या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन रोकना है। सरकार का कहना है कि कानून केवल ऐसे मामलों पर कार्रवाई के लिए बनाया जाएगा, जहां किसी प्रकार की अवैध या जबरन गतिविधि के आरोप हों।   सरकार ने क्या कहा?   सरकार का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन छल, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से कराया जाता है, तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी उद्देश्य से बंगाल में नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है।   विपक्ष की प्रतिक्रिया   घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने इस प्रस्तावित कानून पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का दायरा और प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही उसके प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। वहीं समर्थकों का मानना है कि इससे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।   अभी कानून नहीं हुआ लागू   फिलहाल सरकार ने केवल कानून लाने की मंशा जाहिर की है। विधेयक का मसौदा, विधानसभा में पेश किए जाने की तारीख और अंतिम प्रावधानों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। कानून लागू होने से पहले इसे विधानसभा से पारित कराना होगा।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Kolkata Police escort accused Ranjit Singh after his arrest over alleged objectionable social media posts against Prime Minister Narendra Modi and Suvendu Adhikari.
पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला गिरफ्तार, 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया आरोपी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कसबा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कसबा थाना पुलिस ने आरोपी रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अलीपुर अदालत ने आरोपी को 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। नस्कर हाट इलाके से हुई गिरफ्तारी पुलिस के अनुसार, आरोपी रंजीत सिंह को नस्कर हाट इलाके से गिरफ्तार किया गया। उस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ अभद्र और भ्रामक टिप्पणियां पोस्ट करने का आरोप है। अदालत में सरकारी पक्ष ने रखा कड़ा रुख रविवार को आरोपी को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील शुभाशीष भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि आरोपी लगातार सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री और राज्य के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहा था। सरकारी पक्ष ने कहा कि आरोपी की टिप्पणियों का उद्देश्य केवल नेताओं की छवि धूमिल करना नहीं था, बल्कि समाज में भ्रम, अशांति और भ्रामक सूचनाएं फैलाना भी था। पुलिस हिरासत की मांग मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी वकील ने आरोपी की पुलिस हिरासत की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि यह जांच करना आवश्यक है कि आरोपी ने यह गतिविधि अकेले की या इसके पीछे किसी संगठित समूह अथवा साजिश का हाथ है। 27 जून तक पुलिस कस्टडी अलीपुर अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रंजीत सिंह को 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया है। सोशल मीडिया अकाउंट और फोन रिकॉर्ड की जांच शुरू पुलिस अब आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स, मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आपत्तिजनक पोस्ट के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या सुनियोजित अभियान तो नहीं था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Police detain Jahangir Khan’s wife after violent protests and stone-pelting outside Falta police station in South 24 Parganas, West Bengal.
लंबे समय से फरार टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, पथराव मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

  पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में हिंसा और पथराव के मामले में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लंबे समय से फरार रहे नेता जहांगीर खान की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई फलता थाना क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में की है। फलता थाने के बाहर हुआ था उग्र प्रदर्शन 16 जून को दक्षिण 24 परगना के फलता थाना के पास जहांगीर खान की पत्नी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाने के आसपास जमा हो गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया। लाठीचार्ज से बचने के लिए तालाब में कूदे प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी लाठीचार्ज से बचने के लिए पास के एक तालाब में कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी। भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ कम से कम सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (19 जून) को कहा कि फलता हिंसा मामले में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला करने वालों के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कड़ी धाराएं लगाई गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीणों की एक भीड़ ने फलता थाने पर धावा बोलकर जेल में बंद टीएमसी नेता जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 12 आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। 13 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक और कानूनी असर फलता हिंसा और जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने दक्षिण 24 परगना की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं टीएमसी समर्थकों का आरोप है कि कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। आने वाले दिनों में इस मामले के राजनीतिक प्रभाव और जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court to challenge Bhabanipur election result and Suvendu Adhikari's victory.
भवानीपुर सीट के चुनाव परिणाम को ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती, दायर की चुनाव याचिका

  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की है। 15,105 वोटों से मिली थी हार भवानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से पराजित किया था। इस जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचीं ममता टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी चुनाव याचिका की औपचारिक पुष्टि (वेरिफिकेशन) के लिए मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचीं। पार्टी का कहना है कि चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में चुनौती दी गई है। 4 मई को हुई थी मतगणना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना 4 मई को हुई थी। चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला, जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब क्या होगा आगे? चुनाव याचिका दायर होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करेगा। अदालत तय करेगी कि याचिका स्वीकार करने के पर्याप्त आधार हैं या नहीं। इसके बाद चुनाव परिणाम से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Niti Aayog
राष्ट्र विकास की बन रही नीति, बैठक में सीएम हेमंत भी शामिल

रांची। देश को साल 2047 तक महाशक्ति बनाने के संकल्प के साथ आज 11 जून को राजधानी दिल्ली में नीति आयोग की 11वीं गवर्निग काउंसिल की बैठक शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रही हाई-प्रोफाइल बैठक में बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य की एक नई तस्वीर दिखी।   इस बार की बैठक बेहद खास रही, क्योंकि इसमें देश के तीन प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के विजय ने पहली बार शिरकत की। विपक्षी खेमे से झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने इस बात को रेखांकित किया कि जब बात राष्ट्र निर्माण की हो, तो संघवाद की भावना राजनीतिक मतभेदों से ऊपर खड़ी होती है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, गवर्नर्स और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में देश के भविष्य का एजेंडा टेबल पर रखा गया। एजेंडे पर डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास इस बार की बैठक का मुख्य विज़न बेहद स्पष्ट है- आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना। ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ की थीम पर केंद्रित इस महामंथन में कई अहम रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।  समान अवसर और पोषण: हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने के मौके देना। रोजगार और कौशल: युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना ताकि वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजे। डिजिटल गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और आम जनता के लिए सुलभ बनाना।   बैठक का मूल मंत्र 2047 तक देश के हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड, लिंग, उम्र या क्षेत्र कुछ भी हो, मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है। नीति आयोग की यह बैठक केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि नए भारत की नींव रखने का एक ठोस ब्लूप्रिंट है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
West Bengal Chief Minister and newly inducted ministers during cabinet expansion oath ceremony
बंगाल मंत्रिमंडल में कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना का दबदबा, तीन जिलों को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

  पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्य की राजनीतिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की तस्वीर साफ हो गई है। सोमवार को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 35 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मंत्रिपरिषद में कुल 41 पद भर चुके हैं, जबकि तीन पद अभी खाली हैं। जिलावार प्रतिनिधित्व के विश्लेषण से पता चलता है कि कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना को मंत्रिमंडल में सबसे अधिक स्थान मिला है। इन तीनों जिलों से चार-चार मंत्री बनाए गए हैं, जिससे सरकार में इन क्षेत्रों की भागीदारी सबसे ज्यादा हो गई है। इन जिलों को मिला सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व कोलकाता से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। राजधानी होने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से इस जिले को विशेष महत्व मिला है। पूर्व मेदिनीपुर, जो मुख्यमंत्री का गृह जिला भी है, से चार नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इनमें कैबिनेट और राज्य मंत्री दोनों स्तर के चेहरे शामिल हैं। उत्तर 24 परगना से भी चार नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। यह जिला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से राज्य के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रों में गिना जाता है। कई जिलों को मिला संतुलित प्रतिनिधित्व अलीपुरदुआर को तीन मंत्री पद मिले हैं। वहीं दक्षिण 24 परगना, बांकुड़ा, बीरभूम, कूचबिहार, पूर्व बर्धमान, पश्चिम बर्धमान, हुगली, झारग्राम, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग और मुर्शिदाबाद से दो-दो नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, पुरुलिया और मालदा को एक-एक मंत्री पद मिला है। तीन जिलों को नहीं मिला मंत्रिमंडल में स्थान मंत्रिमंडल विस्तार में नदिया, दक्षिण दिनाजपुर और कलिम्पोंग को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इन जिलों से भाजपा के विधायक होने के बावजूद किसी नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि भविष्य में खाली पड़े पदों या संगठनात्मक जिम्मेदारियों के जरिए इन जिलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा सकती है। अभी तीन पद खाली 294 सदस्यीय विधानसभा में नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान में 41 पद भरे गए हैं। मंत्रिपरिषद में 13 कैबिनेट मंत्री, तीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं। अब सभी की नजर विभागों के बंटवारे पर है। इससे यह स्पष्ट होगा कि सरकार के भीतर किस क्षेत्र और नेता को कितनी अहम जिम्मेदारी सौंपी जाती है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Security personnel outside holding center in West Bengal during illegal infiltration verification drive
बंगाल में ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ अभियान तेज

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर्स बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य संदिग्ध घुसपैठियों और नागरिकता जांच के दायरे में आये लोगों को अस्थायी रूप से रखना है, ताकि दस्तावेजों का सत्यापन पूरा किया जा सके। जेल नहीं, ‘सुविधा केंद्र’ के तौर पर तैयार किये गये सेंटर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि होल्डिंग सेंटर्स जेल नहीं हैं। इन्हें ट्रांजिट सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां रहने वाले लोगों को भोजन, साफ बिस्तर और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी। सरकार के मुताबिक, इन केंद्रों में किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकेगा। इस दौरान उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की जायेगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी कैमरे, पुलिस बल और सिविल डिफेंस कर्मियों की तैनाती की गयी है। मालदा और मुर्शिदाबाद में शुरू हुआ ऑपरेशन सीमावर्ती जिलों में इन केंद्रों ने काम करना भी शुरू कर दिया है। मालदा जिले के इंग्लिश बाजार स्थित एक सरकारी प्रशिक्षण केंद्र की एक मंजिल को होल्डिंग सेंटर में बदला गया है। यहां हाल ही में पकड़े गये 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। वहीं मुर्शिदाबाद के लालगोला स्थित ‘पद्म भवन’ में दूसरा केंद्र सक्रिय किया गया है। यहां जाली दस्तावेजों के साथ पकड़े गये लोगों को शिफ्ट किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र में प्रवेश से पहले सभी लोगों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है ताकि संक्रमण या बीमारी के खतरे को रोका जा सके। क्या है ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति? राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी रणनीति को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नाम दिया है। डिटेक्ट (Detect) : संदिग्ध घुसपैठियों और फर्जी दस्तावेज रखने वालों की पहचान करना। डिलीट (Delete) : अवैध रूप से वोटर लिस्ट या सरकारी रिकॉर्ड में शामिल लोगों के नाम हटाना। डिपोर्ट (Deport) : दस्तावेज सत्यापन के बाद संबंधित व्यक्तियों को बीएसएफ को सौंपना, ताकि उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार घुसपैठ के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। CAA के तहत अल्पसंख्यकों को राहत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले पड़ोसी देशों से भारत आये हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत सुरक्षा प्रदान की जायेगी। विपक्ष ने उठाये सवाल जहां बीजेपी सरकार इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल टीएमसी ने प्रक्रिया को लेकर चिंता जतायी है। टीएमसी का कहना है कि कार्रवाई के दौरान किसी भी भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। सरकार का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलायी जा रही है और इसका उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Taniya Bhardwaj reacts to Mamata Banerjee’s old Maoist remark after Bengal election results
ममता बनर्जी के ‘माओवादी’ बयान की फिर चर्चा, 12 साल बाद तानिया भारद्वाज ने दी तीखी प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस की हार और बीजेपी की प्रचंड जीत के बीच 12 साल पुराना एक विवाद फिर चर्चा में आ गया है। वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ‘माओवादी’ कहे जाने वाली छात्रा तानिया भारद्वाज ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अहंकार की हार” बताया है। तानिया ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक राजनीतिक दल की जीत या हार नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की जीत है। उनके मुताबिक, जनता ने उस राजनीति को नकार दिया है जिसमें सवाल पूछने वालों को देशविरोधी या माओवादी जैसे टैग दिए जाते थे। क्या था 2012 का चर्चित विवाद? मई 2012 में कोलकाता के प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय की छात्रा तानिया भारद्वाज ने एक लाइव टॉक शो के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से राज्य में बढ़ते अपराध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा था। सवाल सुनते ही ममता बनर्जी नाराज हो गई थीं और उन्होंने तानिया को “माओवादी” करार दे दिया था। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी बीच कार्यक्रम से उठकर चली गई थीं। उस समय यह घटना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रही थी। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का उदाहरण बताया था। “यह तानाशाही सोच की हार” : तानिया भारद्वाज चुनाव नतीजों के बाद तानिया भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2012 में जो हुआ था, वह सत्ता के बढ़ते अहंकार की शुरुआत थी। उन्होंने कहा कि जब सरकारें सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को बदनाम करने लगती हैं, तो जनता का विश्वास धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। तानिया ने कहा, “यह जनादेश सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं है। यह उस मानसिकता की हार है जो असहमति की आवाज़ को दबाना चाहती थी।” आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले का भी किया जिक्र तानिया भारद्वाज ने अपनी प्रतिक्रिया में आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस घटना ने बंगाल के युवाओं और आम जनता को झकझोर दिया था। उनके मुताबिक, राज्य के युवाओं ने इस चुनाव में यह संदेश दिया है कि उन्हें डराकर हमेशा चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता अब जवाबदेही और सम्मान चाहती है। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ी चर्चा विधानसभा चुनाव 2026 में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी ने 208 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी के 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया। चुनाव परिणामों के बाद सोशल मीडिया पर तानिया भारद्वाज का पुराना वीडियो और 2012 की घटना फिर वायरल हो रही है। कई लोग उन्हें “लोकतांत्रिक आवाज़” और “बंगाल की साहसी छात्रा” के रूप में पेश कर रहे हैं। “अब किसी छात्र को आतंकवादी नहीं कहा जाएगा” तानिया भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में उन्हें यह राहत महसूस हो रही है कि अब शायद कोई छात्र या आम नागरिक सिर्फ सवाल पूछने पर “आतंकवादी” या “माओवादी” नहीं कहलाएगा। उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है, जब बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव और सत्ता परिवर्तन को लेकर पूरे देश में चर्चा जारी है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Suvendu adhikari
शुभेंदु सरकार के कड़े रुख के बाद भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर बढ़ी गुसपैठियों की हलचल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बाद अवैध प्रवासियों के बीच हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश लौटने के लिए उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे हैं। भाजपा ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोग अब सीमा पार लौटने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि विशेष पहचान प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी ऐसे दृश्य सामने आए थे और अब सरकार की सख्त नीति के बाद फिर से सीमा क्षेत्रों में भीड़ बढ़ने लगी है।   होल्डिंग सेंटर और पहचान प्रक्रिया पर जोर रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार ने मालदा में एक होल्डिंग सेंटर तैयार किया है, जहां कथित अवैध प्रवासियों को रखा जाएगा। इसके बाद उनकी पहचान प्रक्रिया पूरी कर उन्हें संबंधित एजेंसियों के माध्यम से डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।   राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत दस्तावेजों की जांच और नागरिकता संबंधी सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है।   शुभेंदु अधिकारी के बयान से बढ़ी चर्चा हाल ही में एक बैठक के दौरान भाजपा नेता शुवेंदी अधिकारी  ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।   आधिकारिक पुष्टि का इंतजार हालांकि, सीमा पर जुटी भीड़ और बड़े पैमाने पर लोगों के लौटने के दावों की अब तक प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्षी दलों ने भी भाजपा के दावों पर सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद राज्य में अवैध प्रवास और नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

Unknown मई 26, 2026 0
Suvendu Adhikari talking about ‘Detect, Delete and Deport mission
शुभेंदु अधिकारी का ‘Detect, Delete and Deport’ मिशन शुरू, 9 संदिग्ध घुसपैठिये डिटेंशन सेंटर में भेजे गये

Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार ने ‘Detect, Delete and Deport’ यानी 3D नीति लागू करते हुए संदिग्ध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार का दावा है कि अब अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड से हटाया जायेगा और फिर सीमा सुरक्षा बल को सौंपकर वापस भेजा जायेगा। मालदा में बना पहला डिटेंशन सेंटर Malda राज्य का पहला जिला बन गया है, जहां अवैध विदेशी नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाया गया है। यह केंद्र इंगलिश बाजार के चंदन पार्क इलाके में स्थापित किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गजोले के पांडुआ क्षेत्र से पकड़ी गयी 3 महिलाओं और 6 नाबालिगों समेत कुल 9 संदिग्ध बांग्लादेशियों को यहां रखा गया है। सभी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डिटेंशन सेंटर लाया गया। सीसीटीवी और पुलिस निगरानी में रखा गया सेंटर अधिकारियों ने बताया कि डिटेंशन सेंटर में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। यहां सीसीटीवी निगरानी के साथ 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी है। इसके अलावा नागरिक सुरक्षा कर्मी और स्वयंसेवक भी मौजूद हैं। भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गयी है। क्या है ‘Detect, Delete and Deport’ नीति? राज्य सरकार की इस नीति का मकसद अवैध घुसपैठ रोकना और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है। Detect (पहचान) खुफिया एजेंसियों और जिला प्रशासन की मदद से उन लोगों की पहचान की जायेगी, जो बिना वैध दस्तावेजों के राज्य में रह रहे हैं। Delete (हटाना) जिन लोगों के दस्तावेज वैध नहीं होंगे, उनके नाम मतदाता सूची, राशन कार्ड और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से हटाये जायेंगे। Deport (निर्वासन) पकड़े गये लोगों को Border Security Force को सौंपा जायेगा, जो बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के साथ समन्वय कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगी। जिलों में बनेंगे होल्डिंग सेंटर राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिये हैं। इन केंद्रों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जायेगा, जो जेल से रिहा हो चुके हैं या अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में पकड़े गये हैं। CAA को लेकर भी सरकार का बड़ा बयान नबान्न में वरिष्ठ अधिकारियों और BSF अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग Citizenship Amendment Act के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जायेगा। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण वर्षों तक केंद्र के निर्देशों की अनदेखी की गयी। अब राज्य सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की बात कह रही है। सीमा क्षेत्रों में पुलिस को मिले विशेष निर्देश राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को सीमावर्ती जिलों के सभी थानों में इस नीति को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है। अब स्थानीय पुलिस संदिग्ध विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेते ही इसकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों और BSF को देगी, ताकि निर्वासन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके।  

surbhi मई 26, 2026 0
BJP candidate Debangshu Panda celebrates massive victory in Falta bypoll with supporters in West Bengal.
फालता उपचुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत, देबांग्शु पांडा ने 1 लाख से ज्यादा वोटों से दर्ज की जीत

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फालता विधानसभा सीट पर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। भाजपा उम्मीदवार Debangshu Panda ने एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। यह सीट पहले All India Trinamool Congress के पास थी और इसे पार्टी के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee का मजबूत इलाका माना जाता है। ऐसे में बीजेपी की इस बड़ी जीत को राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। दोबारा मतदान के बाद आया नतीजा फालता सीट पर पहले हुए मतदान में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, जिसके बाद पूरा चुनाव रद्द कर दोबारा वोटिंग कराई गई। पुनर्मतदान के बाद हुई मतगणना में बीजेपी ने भारी बढ़त के साथ जीत दर्ज की। किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले? बीजेपी के Debangshu Panda - 1,49,666 वोट सीपीएम के Shambhu Nath Kurmi - 40,645 वोट कांग्रेस के Abdur Razzaq Molla - 10,084 वोट टीएमसी के Jahangir Khan - 7,783 वोट दिलचस्प बात यह रही कि टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने पुनर्मतदान से पहले ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। विधानसभा में बीजेपी की संख्या बढ़ी फालता में जीत के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी की सीटों की संख्या 207 से बढ़कर 208 हो गई है। नंदीग्राम सीट खाली होने के कारण पार्टी की प्रभावी संख्या में बड़ा बदलाव नहीं माना जा रहा है। ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान फिर से वोटों की चोरी हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय बलों के कुछ लोग बीजेपी एजेंट की तरह मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद थे। शुभेंदु अधिकारी का टीएमसी पर हमला वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने बीजेपी की जीत को जनता का जनादेश बताया। उन्होंने कहा कि “डायमंड हार्बर मॉडल अब तृणमूल का लॉस मॉडल बन चुका है।” उन्होंने फालता की जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोगों ने बीजेपी उम्मीदवार को भारी मतों से जिताकर बदलाव का संदेश दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने 1 लाख वोटों से जीत की अपील की थी और जीत का अंतर उससे भी ज्यादा रहा। देबांग्शु पांडा का अभिषेक बनर्जी पर तंज जीत के बाद देबांग्शु पांडा ने अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव से पहले कहा गया था कि उन्हें मछली बेचनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर अभिषेक बनर्जी फालता आएंगे तो वह उन्हें “मछली-भात” जरूर खिलाएंगे। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान उर्फ ‘पुष्पा’ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने चुनाव परिणाम के जरिए जवाब दे दिया है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Mamata Banerjee addresses TMC leaders amid political developments and strategy meeting in West Bengal.
बंगाल में तेज हुई सियासत: ममता बनर्जी ने बुलाई नवनिर्वाचित TMC विधायकों की बैठक

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों के बाद हलचल तेज हो गई है। Mamata Banerjee ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनाव परिणामों के बाद अब टीएमसी राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्ष की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा होगी। नगर निकायों को लेकर रणनीति बनेगी पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक का प्रमुख मुद्दा राज्य के नगर निकायों के कामकाज से जुड़ा होगा। पश्चिम बंगाल के कई नगर निकायों में अभी भी टीएमसी का नियंत्रण है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर सहयोग में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। टीएमसी नेतृत्व इस बात पर चर्चा करेगा कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी अपने नगर निकायों और संगठनात्मक ढांचे को कैसे मजबूत बनाए रखे। अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर KMC का नोटिस यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब Kolkata Municipal Corporation (KMC) ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को कथित अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया है। KMC अधिनियम की धारा 400(1) के तहत जारी इन नोटिसों में संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। अधिकारियों ने संबंधित संपत्तियों की दीवारों पर नोटिस की प्रतियां भी चस्पा की हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दिए थे संकेत पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने पिछले सप्ताह ही इन संपत्तियों की जांच के संकेत दिए थे। उन्होंने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी को “मिस्टर नेफ्यू” कहकर संबोधित किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि उनके पास एक कंपनी से जुड़ी 24 संपत्तियों की सूची है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछली टीएमसी सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। दो नए जांच आयोग बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो अलग-अलग आयोग बनाने की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज Biswajit Basu को सौंपी जाएगी। वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच रिटायर्ड जज Samapti Chatterjee की अध्यक्षता में गठित आयोग करेगा। सरकार के अनुसार, दोनों आयोग जून महीने से अपना काम शुरू कर देंगे।  

surbhi मई 19, 2026 0
Job aspirants filling government recruitment forms after West Bengal increased upper age limit for vacancies.
पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: अब 40 पार उम्मीदवार भी सरकारी नौकरी के लिए कर सकेंगे आवेदन

West Bengal सरकार ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए भर्ती की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। राज्य के वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब विभिन्न श्रेणियों की सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा पहले से अधिक होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्रुप A पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 41 वर्ष, ग्रुप B के लिए 44 वर्ष और ग्रुप C तथा D के लिए 45 वर्ष तय की गई है। यह संशोधन पश्चिम बंगाल सर्विसेज (रेजिंग ऑफ एज-लिमिट) रूल्स, 1981 में किया गया है। 11 मई से लागू होंगे नए नियम राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई आयु सीमा 11 मई से प्रभावी मानी जाएगी। यानी इस तारीख के बाद जारी होने वाली सभी भर्ती प्रक्रियाओं में नए नियम लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इस फैसले से उन युवाओं को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं में देरी के कारण आयु सीमा पार होने की चिंता से जूझ रहे थे। युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा नई नीति लागू होने के बाद हजारों ऐसे उम्मीदवार सरकारी नौकरियों के लिए पात्र हो जाएंगे, जो पहले अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी। सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार बड़े फैसले 2026 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। Suvendu Adhikari के नेतृत्व में बनी नई सरकार प्रशासनिक सुधार और रोजगार के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं और सरकारी भर्ती से जुड़े फैसले आने वाले समय में राज्य की राजनीति और रोजगार व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। 2026 चुनाव में बदला राजनीतिक समीकरण 2026 के विधानसभा चुनाव में Bharatiya Janata Party ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं All India Trinamool Congress, जिसने पिछले चुनाव में 212 सीटें जीती थीं, इस बार 80 सीटों पर सिमट गई। नई सरकार बनने के बाद राज्य में प्रशासनिक बदलाव और भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर लगातार फैसले लिए जा रहे हैं।  

surbhi मई 18, 2026 0
RG Kar Medical College victim’s family demands action amid growing political controversy in West Bengal
RG Kar मेडिकल कॉलेज केस में नया मोड़, पीड़िता की मां ने ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग की

पश्चिम बंगाल के चर्चित RG Kar मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस में सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के सस्पेंड होने के बाद पीड़िता के परिवार ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता की मां ने ममता बनर्जी को “अपराधियों की मुखिया” बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। परिवार का आरोप है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाए, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने भी उठाए सवाल भाजपा विधायक Ratna Debnath ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस केस में कई लोग शामिल हैं, लेकिन अब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा, “जिस रात पीड़िता के साथ डिनर करने वाले लोगों की जांच तक नहीं हुई। अब तक सिर्फ कॉलेज के प्रिंसिपल को जेल भेजा गया है, जबकि बाकी लोगों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं।” ‘पूरी घटना के पीछे बड़ी साजिश’ पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि इस पूरी घटना के पीछे एक बड़ी साजिश थी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कॉलेज प्रशासन और उस समय के स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी इस मामले के लिए जिम्मेदार हैं। परिवार ने पूर्व स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पिता बोले- ‘शुरुआत से केस दबाने की कोशिश हुई’ पीड़िता के पिता शेखररंजन देबनाथ ने दावा किया कि शुरुआत से ही मामले को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने पहले दिन से ही केस को छिपाने की कोशिश की और यह सब कथित तौर पर तत्कालीन सरकार के निर्देश पर हुआ। उनके अनुसार अब धीरे-धीरे मामले की सच्चाई सामने आ रही है। मौजूदा सरकार की कार्रवाई की सराहना हालांकि पीड़ित परिवार ने वर्तमान सरकार की कार्रवाई की सराहना भी की है। परिवार ने कहा कि नई सरकार ने मामले में कदम उठाया है और अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ी है। उन्होंने मांग की कि इस केस में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और परिवार को न्याय मिले। कई पुलिस अधिकारियों पर जांच शुरू पश्चिम Bengal के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि मामले में कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मामले की जांच और शुरुआती कार्रवाई में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। ‘पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश’ हावड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुछ पुलिस अधिकारियों पर पीड़ित परिवार को पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश करने के आरोप भी लगे हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। लगातार बढ़ रहा राजनीतिक विवाद RG Kar मेडिकल कॉलेज केस पहले ही राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब पीड़ित परिवार के नए आरोपों के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।विपक्ष लगातार पूर्व सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि जांच एजेंसियां मामले से जुड़े हर पहलू की पड़ताल में जुटी हुई हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
West Bengal CM Suvendu Adhikari after resigning from Nandigram assembly seat in Kolkata
बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ी नंदीग्राम सीट, कहा- ‘नंदीग्राम हमेशा मेरे दिल में रहेगा’

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए कहा कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल का हिस्सा है। इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, “नंदीग्राम मेरे दिल में है। यहां की जनता ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं जहां भी रहूं, नंदीग्राम के विकास के लिए हमेशा काम करता रहूंगा।” दो सीटों से जीत के बाद लिया फैसला शुभेंदु अधिकारी ने हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया। अब इस सीट पर उपचुनाव होने की संभावना है और इसे लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि नंदीग्राम से उपचुनाव में उम्मीदवार कौन होगा। बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र रहा नंदीग्राम नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम मानी जाती रही है। इसी सीट से शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। उस जीत को बंगाल की राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ माना गया था। इसके बाद भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत की। केंद्र की योजनाओं को लेकर बड़ा बयान इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को पश्चिम बंगाल में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की हर योजना का लाभ बंगाल के गरीब, किसान, महिला, युवा और श्रमिक तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। नंदीग्राम के विकास का किया वादा शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नंदीग्राम के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। भाजपा नेताओं के मुताबिक, क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट जल्द शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नंदीग्राम को विकास के मॉडल के रूप में तैयार करना चाहती है। विपक्ष ने उठाए सवाल वहीं, विपक्ष इस इस्तीफे को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नंदीग्राम सीट छोड़ने के पीछे भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी हो सकती है। राज्य की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नंदीग्राम उपचुनाव में कौन उम्मीदवार होगा और क्या यह सीट एक बार फिर बंगाल की राजनीति का बड़ा रणक्षेत्र बनेगी।  

surbhi मई 16, 2026 0
Mamata Banerjee addresses TMC leaders after Bengal election defeat at her Kalighat residence meeting
बंगाल में हार के बाद पहली बार बोलीं ममता बनर्जी, कहा- ‘जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो स्वतंत्र हैं’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’  ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0