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राष्ट्र विकास की बन रही नीति, बैठक में सीएम हेमंत भी शामिल

abhishek singh जून 11, 2026 0
Niti Aayog
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रांची। देश को साल 2047 तक महाशक्ति बनाने के संकल्प के साथ आज 11 जून को राजधानी दिल्ली में नीति आयोग की 11वीं गवर्निग काउंसिल की बैठक शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रही हाई-प्रोफाइल बैठक में बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य की एक नई तस्वीर दिखी।

 

इस बार की बैठक बेहद खास रही, क्योंकि इसमें देश के तीन प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के विजय ने पहली बार शिरकत की।


विपक्षी खेमे से झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने इस बात को रेखांकित किया कि जब बात राष्ट्र निर्माण की हो, तो संघवाद की भावना राजनीतिक मतभेदों से ऊपर खड़ी होती है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, गवर्नर्स और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में देश के भविष्य का एजेंडा टेबल पर रखा गया।


एजेंडे पर डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास


इस बार की बैठक का मुख्य विज़न बेहद स्पष्ट है- आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना। ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ की थीम पर केंद्रित इस महामंथन में कई अहम रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।


 समान अवसर और पोषण: हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने के मौके देना।


रोजगार और कौशल: युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना ताकि वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजे।


डिजिटल गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और आम जनता के लिए सुलभ बनाना।

 

बैठक का मूल मंत्र


2047 तक देश के हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड, लिंग, उम्र या क्षेत्र कुछ भी हो, मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है। नीति आयोग की यह बैठक केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि नए भारत की नींव रखने का एक ठोस ब्लूप्रिंट है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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टीएमसी में आर-पार की लड़ाई, सोमवार को साफ होगी कौन है किसके साथ?

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी आंतरिक कलह अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग संसदीय ब्लॉक बनाने या खुद को 'वास्तविक तृणमूल कांग्रेस' के रूप में मान्यता देने का दावा पेश कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, बागी खेमे का दावा है कि उसके साथ 19 लोकसभा सांसद हैं। यदि ऐसा होता है तो यह तृणमूल कांग्रेस के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जाएगा।   लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने भी संकेत दिए हैं कि सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष औपचारिक दावा पेश किया जा सकता है। बागी सांसद अलग संसदीय पहचान और संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।   पार्टी नेतृत्व ने दावों पर उठाए सवाल तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने बागी गुट के दावों को चुनौती दी है। पार्टी का कहना है कि कथित समर्थन पत्र और उस पर मौजूद हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की जांच होनी चाहिए। वहीं, पार्टी के भीतर बयानबाजी भी तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल ने नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की, जबकि सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों को 'गद्दार' बताते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में दूसरी पार्टी के साथ हैं तो सांसद पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच जाएं। दूसरी ओर, शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में अपनी आस्था दोहराई।   सोमवार का घटनाक्रम रहेगा अहम राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार का दिन केवल तृणमूल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि बड़ी संख्या में सांसद अलग राह चुनते हैं तो इसका असर संसद में विपक्ष की ताकत और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। वहीं, यदि बागी गुट पर्याप्त समर्थन जुटाने में विफल रहता है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नेतृत्व और अधिक मजबूत होकर उभर सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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रूसी तेल खरीद पर भारत के समर्थन में उतरी फिनलैंड, जयशंकर ने पश्चिमी देशों को याद दिलाई पुरानी बातें

फिनलैंड की विदेश मंत्री ने भारत का किया बचाव रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस बार भारत को यूरोप से ही अप्रत्याशित समर्थन मिला है। फिनलैंड की विदेश मंत्री Elina Valtonen ने स्पष्ट कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा तय किए गए प्राइस कैप नियमों का पालन किया है और यही उस व्यवस्था का मूल उद्देश्य भी था। फिनलैंड में आयोजित चर्चित ‘कुल्तारांता टॉक्स’ कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, फिनलैंड की विदेश मंत्री और यूएई की सहायक विदेश मंत्री Lana Nusseibeh एक पैनल चर्चा में शामिल हुए थे। इसी दौरान वाल्टोनेन ने भारत के पक्ष में अपनी बात रखी। "रूसी तेल खरीदने पर रोक नहीं थी" वाल्टोनेन ने कहा कि जब पश्चिमी देशों ने रूस के तेल पर प्राइस कैप लागू किया था, तब इसका उद्देश्य दुनिया को रूसी तेल खरीदने से रोकना नहीं था। उन्होंने कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित न हो और रूस को अत्यधिक मुनाफा न मिले, इसी संतुलन को ध्यान में रखकर यह व्यवस्था बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने निर्धारित मूल्य सीमा के भीतर तेल खरीदा, इसलिए उसने नियमों का उल्लंघन नहीं किया। जयशंकर बोले- लागत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं तेल रूस से तेल आयात को लेकर पूछे गए सवालों पर विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की ऊर्जा नीति का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत किसी राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखकर ऊर्जा खरीदता है। जयशंकर ने याद दिलाया कि 2022 में रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया था। उस समय यूरोपीय देशों ने मध्य-पूर्व के तेल की बड़ी मात्रा खरीदनी शुरू कर दी थी, जो पहले भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए विकल्प तलाशने पड़े। "अमेरिका ने भी रूसी तेल खरीदने को कहा था" विदेश मंत्री ने चर्चा के दौरान एक महत्वपूर्ण दावा भी किया। उन्होंने कहा कि उस समय अमेरिका ने स्वयं भारत से रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था ताकि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनी रहे। जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे को किसी बड़े नैतिक सिद्धांत की तरह पेश करना उचित नहीं है, क्योंकि उस दौर में कई देशों ने व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर फैसले लिए थे। यूरोप की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत की विदेश नीति पर चर्चा के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय देशों की आलोचना पर भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देश वर्षों से ऐसे देशों को हथियार बेचते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हुआ है। भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कोई कदम नहीं उठाया, इसलिए आलोचना करते समय इस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। बदल रहा है भारत का ऊर्जा नक्शा जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत केवल एक ही क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जबकि प्राकृतिक गैस के मामले में अमेरिका शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है। इससे पहले यह स्थान Qatar के पास था। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। भारत के पक्ष को मिली नई मजबूती फिनलैंड की विदेश मंत्री का सार्वजनिक समर्थन भारत के उस तर्क को मजबूती देता है कि उसने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा निर्धारित नियमों का ही पालन किया। ऐसे समय में जब रूस की ऊर्जा निर्यात नीति और यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक बहस जारी है, यह बयान भारत की ऊर्जा रणनीति के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।  

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DRDO missile interceptor launch during successful ballistic missile defense and anti-ship missile tests in India.
भारत की मिसाइल सुरक्षा को बड़ी मजबूती, DRDO ने लगातार तीन सफल परीक्षण कर रचा नया कीर्तिमान

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइल क्षमता का सफल प्रदर्शन भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षणों के जरिए देश की बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली और नई नौसैनिक मिसाइल तकनीक का प्रदर्शन किया है। इस सफलता को भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि इन परीक्षणों ने विभिन्न प्रकार के दुश्मन खतरों से निपटने की भारत की क्षमता को साबित किया है। दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की क्षमता DRDO द्वारा किए गए परीक्षणों में बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया गया। इस दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक ट्रैक कर उन्हें नष्ट किया। यह प्रणाली विभिन्न ऊंचाइयों और दूरी पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानने, उनका पीछा करने और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने में सक्षम है। इस तरह की रक्षा प्रणाली किसी भी संभावित हमले के खिलाफ कई स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) तक को रोकने की क्षमता वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली मौजूद है। आधुनिक युद्धों में बढ़ेगा भारत का सुरक्षा कवच आज के दौर में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें किसी भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानी जाती हैं। ऐसे में एक प्रभावी मिसाइल शील्ड सैन्य ठिकानों, रणनीतिक संस्थानों और महत्वपूर्ण नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है। इन परीक्षणों के दौरान स्वदेशी सेंसर, अत्याधुनिक रडार, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क और इंटरसेप्टर सिस्टम की दक्षता भी सफलतापूर्वक परखी गई। यह भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पहली बार सफल हुआ NASM-MR मिसाइल का परीक्षण मिसाइल रक्षा प्रणाली के अलावा DRDO ने नौसेना के लिए विकसित नई मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का भी पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक लक्ष्यों पर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और समुद्री सुरक्षा दोनों में बड़ा इजाफा होगा। 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत तैयार हो रही नई सुरक्षा व्यवस्था रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद स्थित DRDO की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान "मिशन सुदर्शन चक्र" का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा घोषित दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत देश के लिए तीन-स्तरीय मिसाइल सुरक्षा कवच विकसित किया जा रहा है, जो सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिक क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करेगा। आत्मनिर्भर भारत को मिला नया बल इन सफल परीक्षणों ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। अब अगला कदम इन प्रणालियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन और सशस्त्र बलों में तैनाती के लिए तैयार करना होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि DRDO की यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और देश की सामरिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगी।  

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